सेक्सी टॉक स्टोरी में मैं अपनी माँ के साथ लेस्बो होना चाहती थी और मेरा भाई भी मम्मी के साथ चुदाई का मजा लेना चाहता था. हमारी मम्मी भी सेक्स करने को तैयार थी.
मेरी कहानी के पिछला भाग था
भाई के कमरे में उसके बेड पर रात बिताई
अब आगे सेक्सी टॉक स्टोरी:
नीचे पहुंची तो देखा कि मम्मी भी शायद नहाकर निकली थीं और हॉल में खड़ी होकर बालों में कंघी कर रही थीं।
मम्मी ने लेगिंग और टाइट कुर्ती पहना हुआ था।
उनके लंबे गीले बालों से कुर्ती पीठ की तरफ भीग कर चिपकी हुई थी।
मम्मी की पीठ मेरी तरफ थी।
रात में तो आते ही सो गयी थी तो ध्यान नहीं दिया था लेकिन शादी के करीब साल भर बाद आज जब मम्मी को गौर से देखा तो लगा कि जिम और डांस क्लास का असर फीगर पर साफ दिख रहा था।
अब मेरी सेक्स इमैजिनेशन थी या मम्मी को लेकर मेरी फीलिंग बदलना पता नहीं लेकिन ये सच था कि मम्मी का कर्वी फीगर सच में बेहद कामुक लग रहा था।
मैं कुछ देर खड़ी होकर मम्मी के फीगर को ही देखने लगी।
मम्मी जान गयी थीं कि मैं नीचे आ गयी हूं तो उन्होंने बालों में कंघी करते हुए ही पलटकर देखा और बोलीं- क्या हुआ? वहां क्या खड़ी होकर देख रही है।
मैं सामने जाकर सोफे पर बैठ गयी।
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बात शुरू करूँ।
करीब 10 सेकेंड की चुप्पी के बाद मैंने ऐसा दिखाते हुए बात शुरू की जैसे ऊपर कमरे में मम्मी ने जो कुछ भी देखा है वो मुझे नहीं पता।
मैं मुस्कुराते हुए बोली- वाह मम्मी, तुमने तो गजब फीगर मेंटेन किया है। जिम और डांस क्लास का असर दिख रहा है।
मेरी तारीफ पर मम्मी थोड़ा खुश हो गयीं और हंसकर बोलीं- अरे वाह… सच में?
तभी मेरे दिमाग में कुछ सूझा।
मैंने सोचा कि जब मम्मी को सब पता ही है और सुबह कमरे में उन्होंने देख भी लिया है तो फिर थोड़ी बातचीत आगे बढ़ाने में क्या दिक्कत है।
ये सोचकर मैंने कहा- सच में यार… बेहद सेक्सी फीगर हो गया है तुम्हारा। सोनू भी रात में मुझसे बोल रहा था कि इस उम्र में भी मम्मी कितनी जवान और सेक्सी लगती हैं। तुम दोनों साथ चलो तो लोग मां-बेटी नहीं बल्कि बहन समझेंगे।
मम्मी मेरी बात पर तेजी से हसने लगीं और फिर मजे लेकर हंसते हुए बोलीं कि- अच्छा, आजकल कुछ ज्यादा ही गौर कर रहा है वो मेरे ऊपर!
मम्मी को भी मजे लेते देख कर मेरे अंदर और हिम्मत आ गयी थी।
मैं भी बात को आगे बढ़ाती हुई मम्मी के पास जाकर उनके गाल खींचते हुई हंसकर बोली- अरे सच में किसी कोण से देखने में मेरी माँ तो नहीं लगती हो। मार्केट में मेरे साथ चलो तो मां-बेटी नहीं बल्कि बहन लगोगी आप मेरी।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- ऐसा है क्या? 43 उम्र में भी अगर तेरी बहन लग रही हूं तो अच्छा ही है।
इतनी देर में सोनू तैयार-वैयार होकर सीढ़ी से नीचे आने लगा।
सोनू को देखकर मैं और मम्मी चुप हो गये।
सोनू अपने प्लान के मुताबिक नीचे आते ही बोला- मुझे दे दो नाश्ता, काम से बाहर जाना है फिर दोस्तों से मिलता हुआ आउंगा शाम तक।
हालांकि सोनू को अभी तक कुछ पता नहीं था कि सुबह कमरे में क्या हुआ है।
इसीलिए वो एकदम नॉर्मल था।
मैंने सोनू का नाश्ता निकाल दिया और उसके बाद सोनू ने नाश्ता किया और अपने दोस्त से मिलने निकल गया।
घर पर सिर्फ मैं और मम्मी ही रह गये।
चूंकि सुबह के घटना के बाद और उसके बाद अभी हंसी-मजाक में मैं मम्मी के साथ थोड़ा बहुत खुल चुकी थी।
इसलिए मैं बात को और आगे बढ़ाना चाह रही थी।
मैं और मम्मी दोनों साथ ही नाश्ता करने बैठ गये।
दरअसल मैं मम्मी से ही जानना चाह रही थी कि उन्हें हमारे और सोनू के बारे में कैसे पता चला, क्या-क्या पता है ये सब।
इसलिए मैं बस किसी तरह बहाना खोज रही थी ये सब बात शुरू करने की।
नाश्ता करते वक्त मैं उनसे बात कर सकती थी आराम से हालांकि अब हम दोनों ही थे घर में तो कोई दिक्कत भी नहीं थी।
मम्मी और मैं दोनों डायनिंग टेबल पर बैठकर नाश्ता कर रहे थे।
मैं मम्मी के ठीक बगल बैठी थी।
हम दोनों थोड़ी देर दोनों चुप रहे।
अभी मैं सोच ही रही थी कि कैसे बातचीत शुरू करूं तो मम्मी खुद ही मुस्कुराते हुए बोलीं- और मजा आ रहा है ससुराल में?
मैं भी मुस्कुराते हुए बोली- हां… आ रहा है।
मम्मी- वैसे मायके से ज्यादा मजा आ रहा है ससुराल में यहां ज्यादा मजा था तुझे?
मैं समझ नहीं पायी कि मम्मी क्या कहना चाह रही हैं, तो मैंने पूछा- मतलब?
मम्मी थोड़ा टालते हुए मुस्कुराकर बोलीं- मतलब रोहित के साथ मजा आ रहा है कि नहीं?
लेकिन मैं कुछ-कुछ समझ गयीं कि मम्मी क्या कहना चाह रही थीं।
मैं भी मुस्कुराते हुए बोली- हां उनके साथ भी मजा आ रहा है।
मम्मी थोड़ा कमेंट में मुस्कुराकर बोलीं- उनके साथ “भी” मतलब… किसी और के साथ भी मजा आ रहा है क्या?
जैसे ही मम्मी ने ये बात बोली तो मैं समझ गयीं कि मम्मी का इशारा किधर है और जब मम्मी खुद भी खुलकर बात करना चाह रही हैं तो ये मेरे लिए भी बढ़िया था।
अभी तक मैं सोच रही थी कि कैसे मम्मी के साथ थोड़ा खुलकर बात शुरू करूं लेकिन मामला यहां उल्टा था मुझे लग रहा था मम्मी तो खुद ही इस तरह की बात शुरू करने के इंतज़ार में थीं।
मैं भी मजे लेते हुए मुस्कुराकर बोली- किसके साथ जानना चाह रही हो?
मम्मी हंसकर बोलीं- जिस – जिस के साथ मजा आ रहा है सब बता दे। मुझसे क्या छुपाना!
अभी मैं कुछ कहती तभी मम्मी थोड़ा कमेंट में मुस्कुराकर फिर बोलीं- ससुर जी के साथ?
पहले तो मैं थोड़ा हिचकी लेकिन फिर मैं भी उसी तरह मुस्कुराते हुए बोली- हां उनके साथ भी!
मैं सोच रही कि मम्मी को कैसे पटाउंगी लेकिन अब लग रहा था कि मम्मी खुद ही मुझे पटाना चाह रही थीं या पटने के लिए तैयार बैठी थीं।
अभी मम्मी कुछ कहती तभी मैं फिर हंसकर बोली- कल पापा जी (ससुर जी को मैं पापा जी बोलती थी) ने तुम्हें फोन पर जो रिपोर्ट दी है, मुझे पता है।
मेरी बात पर मम्मी हल्का सा हंस पड़ीं और मेरी ओर देखकर बोलीं- अच्छा… मतलब तेरे ससुर तुझे सारी जानकारी देते रहते हैं। एकदम अपने काबू में कर लिया है तूने उन्हें।
मम्मी की बात पर मैं हंस पड़ी और बस बोली- हम्म्म्… वो तो है।
मम्मी नाश्ता करते हुए मेरी तरफ देखकर थोड़ा मजा लेते हुए मुस्कुराकर बोलीं- वैसे इतनी जल्दी अपने ससुर को इतना काबू में कैसे कर लिया तुमने, कौन सा रस पिलाया है ज़रा मुझे भी बताओ।
मम्मी के इस तरह मजा लेते हुए दोअर्थी बात करने से मेरे अंदर का डर भी खत्म हो गया और मैं भी मुस्कुराकर मजा लेते हुए बोली- वही रस… जो तुम भी पिला चुकी हो उन्हें!
मेरी बात पर मम्मी मेरी तरफ देखकर जोर से हंस पड़ीं और बोलीं- अच्छा बेटा, तुने अपने ससुर ने बहुत कुछ उगलवा लिया है।
मेरी बात बात पर मम्मी हल्का सा शरमा गयी थीं और उनका गोरे गालों पर हल्की सी लालिमा आ गयी थी।
कुछ भी हो लेकिन वो पूरे मस्ती के मूड में थीं।
वो मुस्कुराते हुए बोलीं- वैसे बताया नहीं तुमने मायके में ज्यादा मजा था या ससुराल में है।
मैं भी अब धीरे-धीरे खुलती जा रही थी इसलिए हंसकर आंख मारती हुई बोली- सब बताउंगी… लेकिन कल जो पापा जी ने तुमसे बताया है, वो बताओ।
मम्मी समझ गयी थीं कि अब मैं सीधा टॉपिक पर आ रही हूँ इसलिए मुस्कुरा कर मुझे चिढ़ाते हुए बोलीं- उसी रस के बारे में बता रहे थे जो तूने पिलाया है उन्हें!
मैं मुस्कुराते हुए- और वो भी जो तुमने उनसे कहा है?
मैं सोनू वाली बात सुनना चाह रही थी।
सच कहूं तो एक्साइटमेंट में मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और अब मैं भी मम्मी से खुलकर पूरी बात करना चाह रही थी।
मम्मी समझ गयीं कि मैं क्या जानना चाहती हूं, वो भी मुस्कुराते हुए सीधा बोलीं- कौन सी बात… तुम्हारे और सोनू के बीच वाली? वो तो मुझे बहुत पहले से पता है।
मम्मी के ये बोलने पर मैं थोड़ा शरमा गयी।
इसलिए मैं हल्का सा मुस्कुराते हुए बोली- कब से पता थी तुम्हें ये बात… कभी पता भी नहीं लगने दिया हमें कि सब जानती हो।
मम्मी बिना मेरी तरफ देखे नाश्ता करते हुए मुस्कुरा कर बोलीं- तुझे क्या लगता है कि तेरी शादी से पहले घर में मेरी नाक के नीचे क्या-क्या चल रहा था मुझे कुछ पता नहीं चलेगा। चाहे तेरे और सोनू के बीच की बात हो या कुछ और…
ये तो मैं भी जान चुकी थी कि मेरे और सोनू वाली बात मम्मी को पता थी लेकिन उनके “कुछ और…” वाली बात पर मैं थोड़ा चौंक गयी।
फिर मैं नॉर्मल दिखाने की कोशिश करते हुए मुस्कुराकर बोली- “कुछ और…” मतलब… बताओ ना प्लीज… पहेली क्यों बुझा रही हो। तुम्हें और क्या-क्या पता है सब बता दो ना एक ही बार में। मुझे भी तुम्हारे बारे में जो पता है वो मैं बता दूंगी।
मैंने महसूस किया मम्मी भी अब मुझसे मां की तरह नहीं बल्कि दोस्त की तरह बात कर रही थी।
मेरी बात हल्का सा हंसकर बोलीं- मेरे बारे जो तुझे पता है वो तेरे ससुर ने ही बताया है ना तुझसे? मैं सब जानती हूँ कि तुझे मेरे बारे में क्या-क्या पता है। मुझे ये भी पता है कि तू अपने पापा और बुआ के बारे में भी जानती है।
मैं हंसते हुए- धत् तेरी की। यार मम्मी, प्लीज बता दो ना सब। मैं जानती हूँ कि तुम्हें सोनू और मेरी बीच की बात तुम्हें पता है लेकिन तुमने “कुछ और…” कहा… मतलब इसके अलावा और क्या जानती हो ये बताओ ना?
मेरे रिक्वेस्ट करने पर मम्मी हल्का सा मुस्कुराते हुए बोलीं- तेरे पापा और तेरे बारे में, ज्योति और तेरे बारे, तेरे पापा और ज्योति के बारे में और पायल और तेरे बारे में भी पता है। बस हो गया ना? यही जानना चाहती थी ना?
मम्मी के मुंह से ये सब सुनकर मैं हैरान रह गयी … मेरा चेहरा थोड़ा शर्म से लाल हो गया।
पापा वाली बात भी मम्मी जानती हैं इसका मुझे ज़रा भी अंदाजा नहीं था।
मैं हैरानी से मम्मी की ओर देख रही थी।
मम्मी ने मेरी तरफ देखा तो वो समझ गयीं कि उनकी खुलासे से मैं थोड़ा शॉक्ड हो गयी हूं।
इसलिए वो माहौल को नॉर्मल करते हुए हंसकर बोलीं- अब क्या हुआ? अभी तो बड़ा पूछ रही थी कसम देकर कि कुछ छुपाना मत और जब बता दिया तो बोलती बंद हो गयी।
मैं हंसकर मम्मी को चिकोटी काटते हुए बोली- बहुत शातिर हो मम्मी तुम! पायल वाली बात तो तुम्हें ससुर जी ने बतायी होगी। लेकिन पापा वाली बात और ज्योति वाली बात कब से जान रही हो तुम बताना तो मुझे?
मम्मी हंसते हुए बोलीं- तेरी मां हूँ, तुझे क्या लगता है मेरी बिना जानकारी के यहां सब हो रहा था।
मैंने मम्मी से मुस्कुराते हुए कहा- अच्छा ये बताओ फिर कि मेरे और पापा के बारे में तुम्हें पहली बार कब पता चला।
मम्मी मुस्कुरा कर बोलीं- जब से तेरे और पापा के बीच शुरू हुआ था यानि पहले दिन से ही जब तेरे पापा रात में शालू (मेरी बुआ) के कमरे में जाते थे और तू अपने कमरे में उन्हें पटाने के लिए बिना कपड़ों के सोती थी और जब पहली बार किताब खरीदने के बहाने स्कूटी पर उनके साथ बाजार गयी थी और वहां जो कुछ हुआ था ये सब भी पता है।
ये सब सुनकर मेरा मुंह हैरानी से खुला रह गया मैं बोली- क्या!?! तुम्हें कैसे पता ये सब?
मम्मी ने मुस्कुराते हुए जो जवाब दिया उसकी मुझे उम्मीद भी नहीं थी, मम्मी मुस्कुराते हुए मेरा गाल पकड़ कर बोलीं- तेरे पापा मुझे पहले दिन से ही सब बता रहे थे।
ये सुनकर मैं अवाक रह गयी- क्याआ आआ!!
मम्मी मेरा चेहरा देखकर हंसने लगीं और बोलीं- हां… तुम्हें लगा होगा कि मैंने और तुम्हें… पापा के साथ कुछ करते हुए छुपकर देख लिया होगा।
मैं बोली- हां मुझे तो यही लगा था। एक बात बताओ जब तुम्हें खुद पापा सब बताते थे फिर वो रात में चुपके से क्यों आते थे मेरे कमरे में।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- ताकि तुझे लगे कि ये सब मुझसे छुपके हो रहा है और तू ये ना जाने कि मुझे पता है ये सब।
मैं बोली- ऐसा क्यों?
मम्मी मुस्कुराते हुए धीरे से बोलीं- अरे मुझे लगा कि कहीं तुम मेरे बारे में क्या सोचोगी और फिर ये भी कहीं तुम ये सब सोनू को ना बता दो।
मैं बोली- तो पापा को मेरे और सोनू के बारे में भी पता है क्या?
मम्मी बोलीं- नहीं, उन्हें इस बारे में आज तक नहीं पता है। वैसे तुमने सोनू को तो नहीं बताया होगा ना अपने और पापा के बारे में।
मैं बोली- नहीं, मेरे और पापा के बारे में सोनू को नहीं पता है। लेकिन तुम्हारे और ससुर जी, पापा और बुआ और तुम चारों का एक साथ ग्रुप वाली सारी बात उसे पता है।
मेरी बात सुनकर अब थोड़ा शर्माने की बारी मम्मी की थी।
उनका गोरा चेहरा हल्का सा लाल हो गया था और वो थोड़ा झिझकते हुए बोलीं- ये सब क्या बताने की ज़रूरत थी उसे?
सच कहूं तो अचानक से मेरा मम्मी के साथ रिश्ता ही लगभग बदल सा गया था।
मम्मी जिस तरीके से मस्ती के साथ मुझसे एक दोस्त की तरह बात कर रही थी उसके बाद से अब वो मेरी मम्मी से ज्यादा एक अच्छी दोस्त और राजदार बन चुकी थीं।
मैं धीरे से बोली- मेरे और सोनू वाली बात तुम्हें कब पता चली थी?
मम्मी मुस्कुराते हुए आराम से ऐसे बताने लगी जैसे कोई बड़ी बात नहीं बल्कि नॉर्मल सी बात हो- अरे यार… अब दिन और तारीख तो याद नहीं लेकिन कुछ साल पहले से जान रही हूँ। तुम दोनों की आपस में बातें और मस्ती देखकर मुझे शक होने लगा था। इसलिए जब तुम दोनों अकेले होते थे नीचे तो मैं चोरी से तुम दोनों की हरकतें देखा करती थीं। तो एक बार मुझे मौका मिल गया तुम दोनों की हरकतों को देखने का।
मम्मी की बात पर मेरा चेहरा लाल हो रहा था।
मैं मुस्कुराते हुए बोली- तुम्हें गुस्सा तो आया होगा।
मम्मी हंसते हुए बोलीं- नहीं गुस्सा नहीं आया था। बस थोड़ा चौंक गयी थी। जब तेरे पापा और बुआ भी मजे करते हैं तो तुम दोनों के मजे करने में क्या दिक्कत थी।
अभी मैं कुछ बोलती … तभी मम्मी फिर बोलीं- बेचारा छुट्टी पर आने के बाद से बार-बार पूछता था कि दीदी कब आएगी इसीलिए तो मैंने तुझे जल्दी बुला लिया ताकि उसकी भी दिल की तमन्ना पूरी हो जाए जल्दी!
मम्मी की बात पर मैं हल्का सा शरमा गयी फिर हंसते हुए बोली- वही मैं सोच रही थी कि अचानक कैसे इतनी जल्दी बुला लिया मुझे। वैसे और क्या-क्या राज छुपा रखा है थोड़ा हमें भी बता दो।
अभी मम्मी कुछ कहतीं कि उससे पहले मैंने हंसते हुए दोनों हाथों से मम्मी का गाल नोचकर कहा- वैसे खूब मजे लिये हैं तुमने भी। ससुर जी सही कहते हैं कि तुम अपनी मम्मी पर गयी हो। वो भी तुम्हारी तरह ही मस्त मजा देती थी।
अब मैं और मम्मी खुलकर एक-दूसरे से दोस्तों की तरह हंसी-मजाक कर रही थी।
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