लेस्बियन फॅमिली सेक्स स्टोरी में मैं अपनी मम्मी को अपने साथ होमो-सेक्स के लिए तैयार करके नंगी होकर उनके जिस्म को चूम चाट रही थी. मम्मी मेरी चिकनी चूत देख रही थीं।
कहानी का पिछला भाग था
वासना से भरी माँ के साथ लेस्बियन सेक्स
अब आगे लेस्बियन फॅमिली सेक्स स्टोरी:
बात करते करते मुझे अपनी चूत में थोड़ी खुजली हुई तो मैं हाथ से चूत को खुजाने लगी।
इस पर मम्मी मुस्कुराते हुए धीरे से बोलीं- मैं खुजला दूँ अपनी जीभ से?
मैं तो बस जैसे इसी के इंतज़ार में थी मम्मी के बोलते ही कहा- सच में थोड़ी खुजली मिटा दो अपनी जीभ से।
इसके बाद मम्मी सोफे से उठीं और सामने आकर मेरे पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गयीं।
मैंने भी अपनी जांघों को फैलाकर उनका स्वागत किया।
मम्मी एकटक मेरी चिकनी चूत को देख रही थीं।
मैं हंसकर बोली- देख तो ऐसे रही जैसे पहली बार किसी चूत को देख रही हो।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- नहीं… ये देख रही थी कि तेरे पापा और भाई कितने लकी हैं कि वे इतनी मस्त और खूबसूरत चूत के साथ मजे करते हैं।
मैं उंगलियों से अपनी चूत के दोनों फांकों को हल्का सा फैलाते हुए हंसकर बोली- लो तुम भी मजे कर लो… देखते हैं पापा और सोनू से अच्छा चाटती हो या नहीं!
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- बाल तो बड़े अच्छे से साफ किया है तुमने।
मैं बोली- मैंने नहीं… कल रात ही तुम्हारे बेटे ने साफ किया है।
इस पर मम्मी मुस्कुराते हुए मुंह आगे किया और जीभ निकाल मेरी चूत के दोनों फांकों के बीच नीचे से ऊपर फेरते हुए आइसक्रीम की तरह चाटा जिससे मेरे मुंह से हल्की सिसकारी निकल गयी।
मैं एक हाथ की उंगलियों से चूत तो फैलाया और दूसरा हाथ मम्मी के सिर पर रखकर हल्का-हल्का कमर हिलाते हुए चूत चटवाने लगी।
मम्मी से अपनी चूत चटवाते हुए एक्साइटमेंट में मेरे रोंगटे खड़े हो गये थे और मेरे बदन में हल्की-हल्की झुरझुरी दौड़ रही थी।
उधर मेरी दोनों जांघों के बीच मम्मी की जीभ कमाल दिखा रही थी।
अब मैं चूत से हाथ हटाकर अपनी चूचियों को मसल रही थी और दूसरे हाथ को मम्मी के बालों में फंसाकर सहलाते हुए चूत चटवा रही थी।
मेरे मुंह से अपने आप आआ आआ आहह हहह… मम्मीई ईईईई… उफ्फ! की सिसकारियां निकल रही थीं।
मम्मी मेरी जांघों को थोड़ा और फैलाकर उनपर हाथ फेरते हुए अपनी जीभ निकाल-निकालकर मेरी गीली हो चुकी चूत के रस को ऐसे चाट रही थीं जैसे बिल्ली किसी भगोने में रखे हुए दूध को पीती है।
मैं उत्तेजना और कामुकता में में छटपटा रही थी और शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था।
मम्मी जिस तरह चूत चाट रही थीं वो कमाल का था।
मेरे मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं- उउ उउ उउफ … मम्मी ईईई… अच्छा आआआ लग रहा है… मम्मी इइइ तेज चाटो आआ आआआह हहह… और तेज तेज चाटो… आ आआ हहह!
मेरी चूत से रस तेजी से निकलकर मम्मी के चेहरे और मेरी जांघों से होता हुआ पीछे गांड की छेद तक पहुंच रहा था।
मम्मी की नाक और गाल मेरी चूत के रस से चमक रहे थे।
कुछ देर बिल्ली जैसे इसी तरह चाटने के बाद मम्मी ने जीभ को गोल किया और कड़ा करके मेरी चूत में घुसा दिया।
मेरा पूरा शरीर वासना से लाल हो गया था.
मेरे मुंह से तेज सिसकारी निकली… मैं कंपकंपाती आवाज़ में बोली- आआ आहहह आ आआआह मम्मी, मैं झड़ने वाली हूँ! आआ आहहह थोड़ा और तेज चाटो आआ आआआह।”
मम्मी और तेजी से चूत चाटने लगीं और जीभ को अंदर डालकर हिलाने लगीं।
मैंने मम्मी के सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर चूत पर दबाने लगी और तेजी से अपनी कमर को हिलाते हुए बड़बड़ाने लगी- आआ आआह हहह मम्मी इइइइ आआ आआह हहहह प्लीज और तेज चाटो ओओओ आआ आहह… मेरा पानी निकलने वाला है. मम्मी इइ आआ आ आआ आहह… झड़ने वाली हूँ उउउ … आआआ आहहह… चाटोओ ओओ… आआहहह चाटो ओओओ मम्मीइइइ!
अचानक मेरे मुंह से एक तेज सिसकारी निकली- हाँ हाँ, आआ आआआ आहह मम्मी ईई… उउ उउउ उफ्फ।
मेरी कमर और गांड सोफे से उठकर हवा में उछल गयी और मैंने मम्मी के सिर को तेज पकड़ कर चूत में धंसा दिया।
मेरी आँखें बंद हो गईं और होठों को दांतों के नीचे इतनी तेज दबाया कि लगा खून निकल जाएगा।
और फिर कमर को झटका देते हुए एक और तेज सिसकारी निकली- आआ आआआ आआ हहहह मम्मी इइइइ आ आ आ आआ आआह।
मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया… मेरा पूरा बदन कांपने लगा।
मैं सोफे पर पीछे की ओर गिर गई, पीठ सीधी हो गई और पैर ढीले पड़ गए।
मेरी आआ आहहह… की हल्की कराह निकली।
मैं आंखें बंद किये तेजी से हांफ रही थी. सांस ऐसे चल रही थी जैसे कई किलोमीटर दौड़ कर आयी हूँ.
मैं जान भी नहीं पायी कि मम्मी क्या कर रही हैं।
बस इतना समझ पायी कि मम्मी नीचे उठकर सोफे पर आकर मेरे बगल में आकर बैठ गयी थीं।
तभी मम्मी मुझसे चिपक कर बैठ गयीं और अपना एक हाथ बढ़ाकर मेरी गर्दन के पीछे रखा और मुझे खुद से चिपका लिया।
मैं भी निढाल होकर मम्मी की बांहों में गिर गई।
हम दोनों का पसीने से गीला नंगा शरीर एक-दूसरे से चिपका हुआ था।
दूसरे हाथ से मेरी चूची को सहलाते हुए मम्मी ने मेरे गाल पर किस किया।
अब तक मैं अपनी सांस पर काबू पा चुकी थी और नॉर्मल हो गयी थी।
मैंने आंख खोलकर मम्मी की तरफ देखा और मुस्कुराने लगी।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- कैसा लगा? पापा और भाई से ज्यादा मजा दिया कि नहीं?
मैं मम्मी मुस्कुराते हुए मम्मी के गाल पर किस करके बोली- मज़ा आ गया मम्मी। शायद ही किसी ने इस तरह चाटा था आज तक!
ये कहकर मैं फिर उनके कंधे पर सिर रख दिया।
हम दोनों पूरी तरह नंगी एक-दूसरी से चिपककर बैठी थी।
मम्मी का एक हाथ अभी भी मेरी चूचियों के साथ हल्का-हल्का छेड़खानी कर रहा था।
मैं भी अपना एक हाथ बढ़ाकर मम्मी की चूची, पेट और जांघो को सहलाने लगी।
नंगे चिपक कर बैठने से हम दोनों की एक-एक साइड की चूची एक-दूसरे की चूचियों से टकरा रही थी।
टाइम देखा तो 8.30 बज चुके थे।
करीब आधे घंटे में ही हम दोनों के रिश्ते बदल चुके थे।
अब हम मां-बेटी से ज्यादा एक-दूसरे के लेस्बियन पार्टनर हो चुके थे।
अभी आधे घंटे पहले मम्मी कपड़े उतारने में हिचक रही थीं और अब आलम ये था कि हम घर में दोनों नंगे चिपक कर बैठे थे और फिलहाल दोनों को ही कपड़े पहनने की कोई जल्दी नहीं दिख रही थी।
इन सबसे अंजान सोनू ऊपर आराम से सो रहा था।
कुछ देर हम दोनों इसी तरह नंगी चिपक कर बैठी एक-दूसरे चूचियों को सहलाती रही।
मैंने धीरे से मम्मी से पूछा- पापा को बताओगी ये?
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- तू क्या चाहती है… बताऊं या ना बताऊं?
मैं हल्का सा मुस्कुराकर बोली- बता दो… फिर तीनों साथ मजा करेंगे और कोई डर भी नहीं रहेगा।
मम्मी हंसकर बोलीं- तेरे पापा तो वैसे भी इंतजार में हैं तेरे! वो तो रात में ही जाने का प्लान बना रहे थे कि जब सोनू सो जाएगा तो 12 बजे के बाद वो तेरे कमरे में जाएंगे।
मैं हैरानी से बोली- अरे बाप रे… फिर?
मम्मी मुस्कुराती हुई बोलीं- मैंने समझाया कि रहने दीजिए सोनू अगर रात में पानी पीने उठा या उसे पता चल गया तो. फिर तेरे पापा को लगा कि मैं सही कह रही हूं तो वो रुक गये। अब सोनू के जाने का इंतजार कर रहे हैं।
मैं मुस्कुराकर बोली- कहो तो सुबह-सुबह चोरी से आ जाऊं… फिर तीनों साथ में मस्ती करते हैं। सोनू तो वैसे भी 9.30-10 बजे तक सोता ही रहता है। वैसे भी उसके साथ सिर्फ रात में डर है सुबह तो जब तक वो सोकर उठेगा तब तक पापा ऑफिस पहुंच चुके होंगे।
मम्मी हंसकर उंगलियों से मेरी चूची का निप्पल दबाती हुई बोलीं- तेरे पापा से जल्दी तो तुझे मची है। पहले बात आज रात बात तो करने दे।
इस पर हम दोनों हंसने लगी।
बातें करते हुए हम दोनों के हाथ लगातार एक-दूसरी की चूचियों को सहला रही थी।
मैंने महसूस किया कि मम्मी के निप्पल कड़े हो गये हैं।
मैं समझ गयी कि मम्मी फिर से एक्साइटेड हो रही है।
तभी मम्मी बोलीं- कमरे में चलें?? बेड पर आराम से बैठते हैं थोड़ी देर!
मैं हां में सिर हिलात हुए बोली- हां चलो… मुझे भी वॉशरूम जाना है सूसू लग रही है।
इसके बाद मैं और मम्मी सोफे से उठकर रूम की तरफ चलने लगे मैं रुककर अपनी टीशर्ट और मम्मी का गाउन और पैंटी उठाने लगी।
मम्मी आगे चलने लगीं, पीछे से मम्मी की मांसल जांघों के ऊपर मस्त गोल-गोल गोरी सी गांड इतनी सेक्सी लग रही थी कि मुझसे रहा नहीं गया और मैं बगल में चलते हुए गांड पर हाथ रखकर सहलाने लगीं।
मेरी हरकत पर मम्मी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने लगीं।
कमरे में जाते ही मैंने कपड़े बेड पर रखे और सीधा मम्मी के वॉशरूम में घुस गयी।
सूसू करने के बाद चूत धोकर निकली तो देखा मम्मी बेड पर तकिये पर सिर रखकर लेटी हुई थीं।
मैं कमेंट में आंख मारते हुए मुस्कुरा कर बोली- अरे कपड़े पहनने हैं या नहीं… या सोनू के जगने का इंतज़ार कर रही हो।
मम्मी मुस्कुराकर बोलीं- इतनी जल्दी कहां उठने वाला है वो!
मैं बेड पर मम्मी के बगल लेटती हुई बोली- अच्छा मान लो कि सच में सोनू नीचे आ गया और हम दोनों को इस हालत में नंगी देख लिया तो?
मम्मी हंसकर मेरी तरफ करवट लेकर लेटती हुई बोलीं- तो क्या… आ गया तो देखेंगे।
मैं समझ गयी कि मम्मी अब खुद सोनू से चुदने की पूरी तैयारी में हैं इसीलिए वो बिना किसी डर के नंगे मेरे साथ बैठी हैं।
मैं भी हंसकर मम्मी की तरफ मुंह करके एक दम चिपककर लेटती हुई बोली- फिर क्या डर है… तब आराम से लेटते हैं।
मैं और मम्मी दोनों इतने चिपके थे कि हमारी चूचियां, जांघें एक-दूसरे से रगड़ खा रही थीं।
मम्मी का शरीर एक बार फिर गर्म होने लगा था जिसे मैं साफ महसूस कर सकती थी।
इस समय जो हालत थी अगर उसमें सोनू सच में आ जाए तो मम्मी बिना किसी नखरे के उसके साथ चुदने को तैयार थीं।
लेकिन सच कहूं तो मैं नहीं चाहती थी कि सोनू आए क्योंकि फिलहाल मम्मी के साथ मैं अकेले पूरा मजा लेना चाहती थी और सोनू के आने के मतलब चूत की कवाब में लंड की हड्डी होना था।
इस तरह मम्मी के साथ नंगे चिपक कर लेटने से मेरी दोनो जांघों के बीच की दरार में फिर से हल्की-हल्की खुजली मचनी शुरू हो गयी थी।
अपना एक पैर उठाकर मम्मी की जांघ के ऊपर रख दिया और अपनी एक चूची पकड़ कर उसके निप्पल को मम्मी की चूची की निप्पल से हल्का-हल्का रगड़ने लगी।
मम्मी भी जैसे बस इंतज़ार में थीं जवाब में उन्होंने अपना मुंह आगे करके अपना होठों को मेरे होठों पर रखकर किस करना शुरू कर दिया और अपना एक हाथ मेरी जांघ पर रखकर सहलाने लगीं।
मैं भी अपने होठों को खोलकर मम्मी के होंठ को चूसने लगी और जीभ से चाटने लगी।
इतनी देर में हम दोनों अपना शरीर हल्का-हल्का हिलाते हुए एक-दूसरे के साथ रगड़ने लगे और साथ ही हमारी जीभ आपस में भिड़ी हुई थीं।
मैं अपनी चूत को मम्मी की चिकनी जांघों से रगड़ रही थी।
तभी मम्मी मुझे पीछे धक्का देते हुए मेरे ऊपर आ गयीं।
लेकिन हम दोनों के मुंह उसी तरह आपस में जुड़े रहे और एक-दूसरे के होंठ, जीभ से खेलते रहे।
मम्मी की चूचियां मेरी चूचियों पर धंसी हुई थीं।
मैं अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाकर मम्मी की पीठ और गांड को तेजी से सहलाने लगी।
लेस्बियन फॅमिली सेक्स स्टोरी जारी रहेगी.
यह कहानी आपको कैसी लगी?
आप अपने विचार लिखें.
sexygarimaa@gmail.com