लेस्बियन मॅाम कहानी में मैं अपनी मॅाम के साथ समलिंगी सेक्स का मज़ा लेना चाहती थी. इसके लिए मम्मी भी तैयार ही बैठी थी. मेरी मम्मी ने सेक्स का खूब मज़ा लिया हुआ था.
मेरी कहानी का पिछला भाग था
माँ बेटी एक दूसरी के सामने नंगी हुई
अब आगे लेस्बियन मॅाम कहानी:
मैं कामुक बातों के सिलसिले को बंद नहीं करना चाह रही थी ताकि मम्मी की उत्तेजना उसी तरह बनी रहे।
इसलिए मैंने ब्रा-पैंटी की तरफ इशारा करते हुए मुस्कुरा कर धीरे से कहा- उतारो इन्हें, सिर्फ मैं ही नंगी बैठी हूं। वैसे मैं भी तो देखूं कि आखिर इनके पीछे ऐसा क्या छुपा रखा है कि तुम्हारा बेटा इतना दीवाना है इन्हें देखने के लिए।
मेरी बात पर मम्मी गाउन उतारते हुए मुस्कुराकर बोलीं- बेटे का तो नहीं पता लेकिन अभी तो बेटी ही अपनी मां को नंगी देखना चाह रही है।
मम्मी भी अब खुलकर कामुक बातें कर रही थीं।
मम्मी ने बैठे-बैठे पहले गाउन उतार दिया फिर हाथों को पीछे लेजाकर ब्रा का हुक खोल दिया।
हुक खोलते ही ब्रा सरक कर नीचे खिसक गयी और मम्मी की नंगी चूचियां मेरी आंखों के सामने थीं।
दूध की तरह गोरी बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच में बादामी कलर की निप्पल बेहद खूबसूरत लग रही थी।
मैंने अपना एक हाथ बढ़ा कर सीधा मम्मी की एक चूची पर रखा और निप्पल के चारों ओर उंगलियों फिराते हुए उसे हल्का-हल्का दबाने और सहलाने लगी।
फिर अचानक मैं झुकी और एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगी।
मम्मी के मुंह से हल्की सिसकारी निकलने लगी।
मम्मी ने अपने एक हाथ से अपनी चूची को पकड़ कर मेरे मुंह में देते हुए मेरे सिर को पकड़ लिया और अपनी चूची पर दबाते हुए चुसवाने लगीं।
उनके मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।
मैं एक हाथ से दूसरी चूची को सहलाती जा रही थी।
कुछ देर बाद मैंने चूची चूसते हुए ही जिस हाथ से मम्मी की दूसरी चूची को सहला और दबा रही थी उसे चूची पर से हटाते हुए पेट पर ले गयी और फिर नीचे ले जाकर पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रख दिया।
चूत पर हाथ रखते ही मम्मी के बदन में हल्की सी झुरझुरी दौड़ गयी।
मैं मम्मी की एकदम मुलायम फूली हुई चूत और उसकी दरारों को महसूस कर रही थी।
कामुकता में मम्मी चूत गीली हो गयी जिसे चूत की दरारों के पास पैंटी के गीले हिस्से से साफ महसूस किया जा सकता था।
इसलिए मैंने पैंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाते हुए कामुक आवाज में धीरे से कहा- इसे भी उतारो.
मम्मी भी वासना के उस मुकाम पर थीं कि उन्हें भी अपने शरीर पर एक भी कपड़ा कांटे की तरह चुभ रहा था।
इसलिए मेरे कहते ही वो बिना कुछ बोले अपने दोनों को हाथों को कमर के अगल-बगल से पैंटी को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और अपनी गांड को उठाकर एक झटके में पैंटी को सीधा खिसकाकर घुटनों तक कर दिया और फिर पैरों को मोड़कर पैंटी को बाहर निकाल कर पूरी नंगी हो गयीं।
मम्मी की दूध जैसी गोरी मांसल जांघों के बीच हल्की-हल्की ट्रिम्ड काली झांटों के नीचे से पाव की तरह फूली चूत बेहद खूबसूरत लग रही थी।
अब हम दोनों मां-बेटी पूरे नंगे बैठे थे।
मैं मम्मी की खूबसूरती को ऊपर से नीचे तक देखने लगी।
हल्के घुंघराले खुले हुए बालों की बीच गोल सा सुंदर चेहरा उसके नीचे मस्त गोल चूचियां, सपाट पेट जो नाभी के नीचे थोड़ा उभरा और भरा दिख रहा था और उसके नीचे दूध जैसी मांसल जांघें और दोनों जांघों के बीच पाव की तरह ऊभरी चूत और चूत की फूली हुई दोनों पंखुड़ियों के बीच उनकी गुलाबी गुफा का रास्ता ऐसे दिख रहा था जैसे बर्गर के बीच लाल टमाटर दिखता है।
मैं मम्मी की चूत को हाथ से सहलाती हुई बोली- सोनू बस तुम्हारे बारे में सोचकर अपने लंड का पानी निकालता है लेकिन अगर वो तुम्हें ऐसे देख ले तो उसका लंड फव्वारे की तरह झड़ जाएगा!
मम्मी की चूत गीली हो चुकी थी वहीं मेरे खुलकर चूत, लंड जैसे शब्दों का यूज करने और सोनू के बारे में बातें मम्मी की कामुकता को बढ़ा रही थीं.
और शायद वो चाहती थीं कि मैं उनके साथ इस तरह की बात और ज्यादा बात करुं।
मम्मी की आखें वासना के नशे में लाल हो रही थीं और उन्होंने अपनी जांघों को हल्का सा अगल-बगल फैलाते हुए मुझे अपनी चूत सहलाने की पूरी जगह देते हुए धीरे से कहा- सच में तुम्हें ऐसा लगता कि वो मेरे बारे इस तरह से सोचता है?
मम्मी की बात सुनते ही मैं समझ गयी तीर निशाने पर लगा है।
मेरे एक हाथ की उंगलियां मम्मी की गीली चूत की दोनों पंखुड़ियों के साथ अठखेलियां कर रही थीं और दूसरा हाथ उनकी चूचियों से खेल रहा था।
मैंने अपनी एक उंगली को मम्मी की चूत के अंदर डाल दिया।
उंगली चूत में डालते ही मम्मी की मुंह से तेज सिसकारी निकली और उन्होंने अपना एक हाथ बढ़ाकर मेरे हाथ को कसकर पकड़ लिया और दूसरे हाथ से बेड की चादर को मुठ्ठी में भींच लिया।
हालांकि उन्होंने मेरे हाथ को अपनी चूत से ना हटाया और ना ही उंगली बाहर करने की कोशिश की बस मेरे हाथ को पकड़े रहीं।
चूत में उंगली को हल्का-हल्का आगे-पीछे करते हुए मैं बोली- हां, सच में वो तुम्हारे बारे में सोचता है। वो रोज तुम्हारी चुदाई के सपने देखकर अपने लंड का पानी निकालता है।
मम्मी की आंखें बंद हो गयी थीं और वो वासना के समंदर में गोते लगा रही थीं।
उनके मुंह से कराहते हुए बस इतना निकला- अम्म हाँ हम्म्… आआ आहहहह!
मम्मी ने अपनी जांघें और फैला दीं।
शायद वो मेरे हाथों की उंगलियों को अपनी चूत के अंदर जाने का पूरा रास्ता देना चाह रही थीं।
उन्होंने अभी भी कसकर मेरे हाथ को पकड़ रखा था लेकिन हाथ को हटाने के बजाय वो मेरे हाथों पर जोर डालकर अपनी चूत पर दबा रही थीं।
ये सब बातें करके मैं मम्मी के अंदर की उस कामुक कल्पना को बाहर लाना चाह रही थी जो उन्होंने कहीं गहरे अपने अंदर दबा कर रखी थी और वो कल्पना थी अपने बेटे के साथ वासना का खेल खेलने की।
मैं बोली- सोचो मामी, बेटी की उंगली चूत में इतना मज़ा दे रही है तो जब जवान बेटे का आठ इंच का लंड कितना मजा देगा?
मम्मी आंखें खोलकर मेरी ओर देखीं और वासना से हल्का कंपकंपाती आवाज़ में मुस्कुराते हुए बोलीं- जब अपनी बहन को मजा देता है तो मम्मी को भी मजा देगा.
मम्मी अब खुलने लगी थीं, उनके अंदर का संकोच, शर्म और सब्र सब टूट रहा था.
अब वो भी अपनी कामुक कल्पना को रियल लाइफ में जीना चाह रही थीं।
मैं मम्मी की चूत में उंगली को थोड़ा तेजी से अंदर बाहर करते हुए मुस्कुराकर बोली- बेटे से पहले बेटी के साथ मजा ले लो।
मम्मी भी जैसे तैयार थीं… वो बोलीं- मैं तो कबसे तैयार हूं अपनी प्यारी बेटी के साथ मजा करने के लिए।
मैं सोफे से ऊतर कर नीचे मम्मी के सामने घुटनों के बल बैठते हुए मुस्कुराकर धीरे से बोली- तो अपनी बेटी को अपना चूत चाटने दोगी?
मम्मी ने भी मुस्कुराते हुए अपनी दोनों जांघों को फैलाकर मेरा स्वागत करते हुए कामुकता में लड़खड़ाती आवाज़ में बोलीं- हां चाट लो.
ये कहते हुए मम्मी ने जांघों को पूरा अगल-बगल फैला दिया और अपनी दोनों चूचियों को अपने हाथों से सहलाते हुए मुझे देखने लगीं।
मैं घुटनों के बल दोनों जांघों के बीच में बैठने के बाद हाथों से चूत और जांघों को कुछ देर सहलाने के बाद नीचे झुकी और मम्मी की गीली हो चुकी चूत को होठों से चूमा और फिर जीभ निकाल कर हल्का सा चूत पर ऊपर से नीचे तक फेरते हुए चाटा।
मम्मी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गयी।
मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि कभी उस रास्ते को देखने और चाटने का मौका मिलेगा जिस रास्ते से कभी खुद इस दुनिया में आयी थी।
यह अहसास होते ही मेरे बदन में झुनझुनी सी दौड़ गयी।
मम्मी की चूत का नमकीन टेस्ट मुझे इस समय दुनिया का सबसे टेस्टी जूस लग रहा था।
उसके बाद दोनों हाथ की उंगलियों से मम्मी की चूत की दोनों पंखुड़ियों को हल्का फैलाया और जीभ निकाल कर चूत को चाटने लगी।
मम्मी ने उत्तेजना में एक हाथ को मेरे सिर पर रखा और दूसरे हाथ से अपनी एक चूची को मसलते हुए चूत चटवाने लगीं।
उनके मुंह से हल्की-हल्की ‘आ आआ आहह… हम्म म्मम… हां हांआ आआ…’ की सिसकारियां निकल रही थीं।
मम्मी लगातार मुझे चूत चाटते हुए देख रही थीं.
उन्हें शायद इससे ज्यादा उत्तेजना महसूस हो रही थी कि उनकी बेटी उनका चूत चाट रही है।
मैं भी जीभ से चूत और उसके अगल बगल के हिस्से को आइसक्रीम की तरह चाट रही थी बीच-बीच में जीभ को चूत के गुलाबी दरारों में डाल कर हिलाने लग रही थी।
मम्मी के मुंह से आ आह हह… हांआ आआ आआ… हां… गरिमा आआ…’ की सिसकारी निकल रही थी।
मैं मम्मी की बढ़ती उत्तेजना को महसूस कर रही थी।
उनकी सांसें और हल्का-हल्का हांफना।
मम्मी धीरे-धीरे कराह रही थीं और एक हाथ से अपनी चूची को मसलते हुए दूसरे हाथ से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबाए हुए अपनी कमर को हल्का-हल्का आगे-पीछे हिलाते हुए मेरी जीभ के साथ ताल मिला रही थीं।
उनका गोरा सा चेहरा वासना और कामुकता में लाल हो गया था।
मैं उनकी नर्म चिकनी जांघों को हाथ से सहलाते हुए धीरे-धीरे अपनी जीभ को चूत के छेद की गर्म और गीली दीवारों के बीच डालकर हिला रही थी।
मम्मी की चूत का पानी अब तेजी से रिसने लगा था जिसे मैं चाट कर साफ करती जा रही थी।
मम्मी की चूत का रस इस समय मुझे दुनिया का सबसे स्वादिष्ट रेसिपी लग रहा था।
मम्मी के मुंह से ‘आआ आ आआहह हहह… आआआ आआहहह हहहह’ के कराहने की आवाज़ लगातार निकल रही थी।
मैं दो उंगलियों से चूत और ज्यादा फैलाते हुए अपनी जीभ को जितना हो सका अंदर गहराई में डालकर हिलाने लगी।
मम्मी की चूत से रस का निकलना तेज होता जा रहा था जो मेरी नाक, मुंह के आस पास से रिसता हुआ मेरी ठुड्डियों तक पहुंच गया था और फिर ठुड्डियों से होते हुए मेरी गर्दन फैल रहा था।
मैं जितना हो सकता था जीभ से चाट कर पीती जा रही थी और दांतों को हल्का-हल्का चूत के दाने पर गड़ा भी दे रही थी।
मम्मी अब अपनी चूची को दबाना छोड़कर अपनी चूत के पास ऊपर रखकर रगड़ने लगीं और दूसरे हाथ से मेरे सिर को कसकर पकड़े हुए अपनी चूत पर दबाते हुए अपनी कमर हिलाने की स्पीड बढ़ा दी।
मम्मी के कराहने और सिसकारी की आवाज़ तेज होती जा रही थी- आआ आआ आहह हहहह हह… गरिमा आआआ आ आआ… ओओ ओह हहह… हाहाहा हहांए आआआ… और तेज हाह हहह हाआ हाहाहां… चाआटो ओओ… गरिमा आआ… और तेज हाआआ आआआ!
मैं समझ गयी कि मम्मी के सब्र का बांध टूटने वाला है और उनकी चूत से कामुकता की तेज धार निकलने वाली है।
मम्मी की जांघें हल्की-हल्की कांपने लगी थीं।
मैं अपनी जीभ को कड़ा कर सीधा उसकी नोक को चूत में अंदर तक गहराई में डालकर मुंह को तेजी से आगे-पीछे करते हुए जीभ से चूत को चोदने लगी।
मेरी जीभ मम्मी की लबालब रस से भरे चूत में बिना किसी रुकावट के अंदर तक फिसल कर जा रही थी।
मम्मी के मुंह की सिसकारियां से हॉल गूंजने लगा था.
मम्मी ने मेरे सिर को चूत पर दबाती हुई लखड़ाती आवाज़ में बोलीं- आ आआ आहह हहह… बस झड़ने एए वाली ईई हूं… आआ आआआ आआह… गरिमा … आ… तेज चाटो … ओओ और तेज चाटओ ओओ आआ आहह हहह!
अचानक मम्मी के मुंह से तेज सिसकारी निकली- आआ आ आआआ आआ आआह हह हहह हहहह… गरिमा आआ आआआ!
और उन्होंने मेरे सिर को कसकर पकड़ा अपनी चूत पर दबा दिया.
उनका बदन अकड़ गया… मम्मी ने कमर हल्का सा सोफे पर से हवा में उठा लिया।
मम्मी की जांघें कांप रही थीं।
कुछ सेकेण्ड इसी तरह रहने के मम्मी धप्प से सोफे पर गिर पड़ीं।
उनकी चूत रस से लबालब भर गयी जो मेरे मुंह के अगल-बगल से निकल कर गालों और गर्दन को गीला कर चुकी थी।
मम्मी का शरीर एक दम शिथिल हो गया था और उनकी पकड़ अब एक दम ढीली हो चुकी थी।
अपने सिर को पीछे सोफे पर टिकाए हुए आंख बंद कर हाँफ रही थीं… उनकी सांस तेजी से चल रही थी।
मैं सीधी होकर उठी और सोफे पर बगल में आकर बैठ गयी।
अपनी टीशर्ट से अपना मुंह, नाक, गाल और गर्दन को पौंछने लगी जिस पर मम्मी की चूत का रस लगा हुआ था।
मुंह को साफ करने के बाद मैंने मम्मी की तरफ देखा तो वो अभी भी आंखें बंद किये हुए सांस पर काबू पाने की कोशिश कर रही थी।
मैं झुककर उनकी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगी।
इस पर मम्मी ने हल्का सा आंखें खोलकर मुझे देखा और मुस्कुराने दीं।
फिर अपने एक हाथ से मेरे सिर को सहलाने लगीं।
मैंने दोनों चूचियों को बारी-बारी से कुछ देर चूसा।
जब मम्मी नॉर्मल हो गयीं तो मैं सीधी होकर बैठ गयी और मुस्कुराते हुए बोली- कैसा लगा?
मेरी लेस्बियन मॅाम ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया- लाजवाब… मजा आ गया।
मैं मुस्कुराते हुए- सच में?
मम्मी- हां… शायद शादी के बाद किसी लड़की के साथ पहली बार इतना मज़ा आया है।
हालांकि मम्मी ने ये बात झटके से बोल दी थी।
लेकिन मैंने बात पकड़ ली और हंसते हुए पूछा- मतलब शादी से पहले भी किसी लड़की के साथ ये मजा आ चुका था क्या आपको?
मेरे सवाल पर मम्मी थोड़ा हड़बड़ा गयीं और हंसकर बात को टालते हुए बोलीं- मैं ज्यादा तेज़ आवाज़ तो नहीं निकाल रही थी।
हालांकि फिर मैंने भी कुछ नहीं पूछा और हंसकर कहा- सिसकारियां तो तेज ले रही थी लेकिन हमारे और तुम्हारे अलावा जो सुनने वाला है वो घोड़े बेच कर ऊपर सो रहा है। अगर सुन लेता तो अपने घोड़े जैसे लण्ड के साथ नीचे आ चुका होता अब तक!
बात करते हुए मुझे अपनी चूत में हल्की सी खुजली महसूस हुई तो मैं हाथ से चूत को हल्का सा खुजलाने लगी।
लेस्बियन मॅाम कहानी जारी रहेगी.
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