न्यूड सिस्टर ब्रदर स्टोरी में मेरी मम्मी और मैं लेस्बो सेक्स का मजा लेने के बाद बैठी थी कि मेरा भाई भी वहीं आ गया. मम्मी मेरी और भाई की चुदाई का जानती थी.
कहानी का पिछला भाग
सगी माँ के साथ चुदाई की बातें
अब आगे न्यूड सिस्टर ब्रदर स्टोरी:
मम्मी ने खाली प्लेट उठाकर किचन में ले जाकर रखा और हाथ धोकर वापस आकर चेयर पर बैठ गयीं।
सोनू को अभी तक पता नहीं चला था कि मैंने नीचे कुछ नहीं पहना है।
उसे ये भी अंदाजा नहीं था कि मम्मी भी गाउन के नीचे पूरी नंगी हैं।
उसके बाद मैं भी अपना हाथ धोने के लिए उठी और वॉशबेसिन जाने लगी तो निगाह मेरी जांघ पर पड़ी।
वो चौंक गया.
इतनी देर में सोनू भी खुल चुका था, वो हंसते हुए बोला- ये क्या तूने नीचे लोअर नहीं पहना है क्या?
सोनू की बात पर मैं और मम्मी दोनों हंस दिये।
मैं हाथ धोने के बाद मुड़ी और हंसते हुए अपनी टीशर्ट को पेट तक कर नंगी चूत दिखाते हुए बोली- लोअर छोड़ मैंने तो पैंटी भी नहीं पहनी है।
सोनू और मम्मी दोनों की निगाह मेरी नंगी चूत पर चली गयी।
मम्मी और सोनू दोनों को उम्मीद नहीं थी कि मैं इस तरह की हरकत कर दूंगी।
सच कहूं तो सोनू के आने से पहले मम्मी की कहानी सुनते-सुनते वैसे ही मैं और मम्मी दोनों की चूत गीली हो चुकी थी वहीं एक बार फिर से सोनू के साथ बातचीत में माहौल थोड़ा कामुक होने लगा था।
कुल मिलाकर हम तीनों पर वासना का बुखार चढ़ रहा था।
वहीं मेरी इस हरकत ने कामुकता की आग में घी का काम किया।
सोनू थोड़ा ज्यादा एक्साइटेड हो रहा था मम्मी को लेकर।
वह हंसकर मम्मी से थोड़ा नखरा दिखाते हुए बोला- मम्मी, डांट क्यों नहीं रही हो इसे… देखो तुम्हारे सामने कैसी हरकत कर रही है।
मैं इतनी देर में आकर बैठने के बजाय सोनू के बगल उसकी चेयर का टेक लेकर खड़ी हो गयी और हंसते हुए बोली- मम्मी क्या डाटेंगी… वो तो खुद ही गाउन के नीचे कुछ नहीं पहनी हैं। ना ब्रा ना पैंटी।
इस पर सोनू चौंकते हुए मम्मी की तरफ देखने लगा।
मम्मी और मैं दोनों हंस पड़े।
मम्मी का गोरा चेहरा थोड़ा शर्म और कामुकता के मिश्रण से गुलाबी हो गया वो हंसते हुए बोलीं- हट बदतमीज… इसे हमेशा मस्ती ही सूझती है।
सोनू हंसते हुए पूछा- वैसे तुम्हें कैसे पता चला कि मम्मी ने अंदर कुछ नहीं पहना है।
मैं हंसकर बोली- मुझे इसलिए पता है क्योंकि तेरे नीचे आने से कुछ देर पहले मम्मी ने गाउन भी नहीं पहना था और मैंने भी कुछ नहीं पहना था।
इतनी देर में सोनू समझ गया कि क्या हुआ होगा.
वो नखरे करता हुआ बोला- मतलब… मेरे आने से पहले तुम दोनों नंगी होकर क्या कर रही थी?
अभी मम्मी कुछ और कहती तभी मैंने मम्मी को सुनाते हुए सोनू से हंसते हुए कहा- वही जो कल रात में तुझसे बोल रही थी… वैसे तू पीछे रह गया… तुझसे पहले मेरा सपना पूरा हो गया।
सोनू समझ गया कि मैं क्या कहना चाह रही हूं।
भाई को सरप्राइज पर सरप्राइज मिल रहे थे.
मेरी बात पर फिर वो हैरानी से बोला- सच में?
अब सोनू भी खुलकर बात करने लगा और वो हंसते हुए बोला- ये तो गलत बात है भाई… मैं सो रहा था और तुम दोनों ने आपस में मजे कर लिए… लेकिन अब तो मेरे सामने भी एक बार करना होगा एक बार!
सोनू के खुलकर इस तरह बोल देने पर मम्मी थोड़ा नर्वस होने लगी थीं।
इतनी देर में हम तीनों ही जान चुके थे कि अब क्या होने वाला है।
वो मुस्कुरा कर मेरी तरफ देखते हुए बोलीं- अरे ये ऐसे ही बक-बक कर रही है और तू मान रहा है।
मैं सोनू से हंसते हुए बोली- अरे यार… तू हमें और मम्मी को देखना चाहता है. लेकिन मम्मी तो कुछ और चाहती हैं… वो चाहती हैं कि हम दोनों उनके सामने करें।
सोनू हंसकर मेरा गाल खींचते हुए बोला- तो क्या करना है बताओ?
हम तीनों पर ही वासना का बुखार चढ़ चुका था और मुझे ये भी पता था कि मम्मी सोनू के सामने और सोनू मम्मी के सामने पहली बार इतनी आसानी से खुलने वाले नहीं थे तो मुझे ही शुरुआत करनी थी।
इसलिए मैंने ज्यादा टाइम वेस्ट ना करते हुए सीधा अपनी टीशर्ट को ऊपर उठाकर कंधे तक कर दिया और जिससे मेरी चूचियां नंगी हो गयीं और फिर उन्हें सोनू के मुंह के पास करते मुस्कुराकर बोली- यही करना है… जैसे रात में पीता है ना मेरा दूध वैसे मम्मी के सामने पी।
सोनू मम्मी की ओर देखा।
मम्मी ने इस बार कुछ नहीं बोला, वो बस चुपचाप मुस्कुराते हुए हम दोनों की ओर देख रही थीं।
उनकी आंखें भी वासना में हल्की-हल्की लाल हो रही थीं जो मौन सहमति भी दे रही थीं।
मैं सोनू के बगल ही खड़ी थी तो मेरी नंगी चूचियां सोनू के मुंह के ठीक सामने थीं।
सोनू मेरी तरफ देखकर हल्का सा मुस्कुराया फिर बिना कुछ बोले मुंह आंगे करके एक चूची की निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगा।
मैं एक हाथ से अपनी चूची को उसके मुंह में दिये हुए दूसरे हाथ उसके सिर पर रखकर चूची चुसवाने लगी।
मेरी निगाह मम्मी की तरफ गयी तो चुपचाप हमें देख रही थीं।
सोनू पहली बार मेरी चूची नहीं चूस रहा था लेकिन मम्मी के सामने ही अपने भाई के साथ वासना के खेल के अहसास से ही मेरे रोंगटे खड़े हो गये और मेरा शरीर तपने लगा था और मम्मी भी चुपचाप अपने दोनों बेटे-बेटी को अपने सामने ही कामुक प्यार करते देख रही थीं।
ऐसा नहीं था कि ये हालत सिर्फ मेरी थी करीब-करीब हम तीनों उसी कामुक अहसास से गुज़र रहे थे।
सोनू ने लोअर और टीशर्ट पहना था।
लोअर के नीचे उसके लंड का उभार साफ दिख रहा था।
सोनू बच्चों की तरह बारी-बारी से मेरी दोनों चूचियों को लेकर मुंह में लेकर चूस रहा था।
हम दोनों भाई-बहन के बीच जबसे ये खेल शुरू हुआ था तबसे शायद ये पहला मौका था कि हम घर में बिना डरे एक-दूसरे के साथ इस तरह कर रहे थे और वो भी मम्मी के सामने।
चूची चूसते-चूसते सोनू धीरे से एक हाथ नीचे ले जाकर मेरी चूत को सहलाने लगा था।
तभी मैं सोनू को रोकते हुए मम्मी की तरफ देखते हुए बोली- ये तो गलत है भाई… मैं अकेली यहां नंगी हूँ और तुम दोनों पूरे कपड़े पहने हो।
मेरी आवाज़ भी कामुकता के नशे में हल्का सा कंपकपा रही थी।
सोनू तो जैसे इसी मौके की तलाश में था।
वो तुरंत खड़ा हो गया और पहले अपनी टीशर्ट उतारी और फिर लोअर।
अब वो सिर्फ अंडरवियर में था जिसमें उसके लण्ड का कड़ापन और उभार साफ दिख रहा था।
मम्मी के सामने सोनू अंडरवियर उतारकर पूरा नंगा होने में थोड़ा झिझका।
मम्मी समझ गयीं कि अब क्या होने वाला है।
दरअसल हम तीनों ही जान रहे थे कि अब जो होगा उससे रिश्तों के बीच का वो पतला पर्दा भी हट जाएगा जो अब तक सिर्फ नाम के लिए हम तीनों के बीच रह गया था।
माहौल हंसी और मजाक से वासना की गंभीरता में बदल रहा था।
हम तीनों इस हालत में पहुंच चुके थे कि जहां रिश्ता नहीं सिर्फ वासना दिख रही थी।
हालांकि ये भी सच था कि इससे रिश्ते में और भी गहराई और प्यार भी बढ़ रहा था बस रिश्तों का नज़रिया बदल चुका था।
मैंने उसके अंडरवियर को दोनों ओर से पकड़ा और खींच कर नीचे घुटनों तक कर दिया जिससे उसका तना हुआ बड़ा सा लण्ड झटके से बाहर आ गया और हवा में लहराने लगा।
मैंने देखा कि मम्मी नजर सोनू के तने हुए लण्ड पर टिक गयी थी।
उनकी नजर में वासना साफ पता चल रही थी।
इसके बाद मैंने भी अपनी टीशर्ट को उतार कर चेयर पर रख दिया। अब मैं और सोनू दोनों पूरे नंगे न्यूड सिस्टर ब्रदर मम्मी के सामने खड़े थे।
सोनू वासना से कंपकंपाती आवाज़ में मम्मी की तरफ देखते हुए धीरे से बोला- अब तुम्हारी बारी है मम्मी… तुम भी उतारो।
मम्मी की हालत मैं समझ रही थी।
मुझे पता था कि वो खुद नहीं उतारने वाली हैं गाउन।
मैं सोनू के लण्ड को हाथ में लेकर हल्का-हल्का सहलाते और हिलाते हुए मम्मी की तरफ देखकर सोनू से बोली- मम्मी बाद में उतार देगी… पहले उन्हें थोड़ा देखने का मजा देते हैं।
फिर हम दोनों भाई-बहन फिर एक-दूसरे को चूमने और प्यार से एक-दूसरे को सहलाने लगे… धीरे-धीरे, आराम से, बिना किसी जल्दबाजी के।
सोनू मेरी चूचियों और चूत पर हाथ फेर रहा था और मैं उसके लंड को प्यार से हल्का-हल्का हिला रही थी।
मम्मी प्यार से हम दोनों को देख रही थीं।
मैं चेयर पर बैठ गयी।
सोनू मेरे सामने खड़ा था और उसका लण्ड मेरे सामने था।
मैं अभी भी उसके लण्ड को हाथ में पकड़े हुए थी।
उत्तेजना में सोनू के लण्ड से कुछ बूंद पानी निकल कर उसकी फोरस्किन पर इकट्ठा हो गया था।
मैंने सोनू के लण्ड की स्किन को पीछे खींचा जिससे उसका और उसके लण्ड के पानी को उंगलियों से उसके फूले हुए मशरूम जैसे सुपाड़े पर फैलाकर चिकना कर दिया जिससे उसका फूला हुआ गीला सुपाड़ा चमकने लगा था।
मैं उसके लण्ड के सुपाड़े बारी-बारी अपनी दोनों चूचियों की निप्पल से रगड़ने लगी।
सोनू के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।
कुछ देर इसी तरह करने के बाद मैंने उसके लण्ड को दोनों चूचियों के बीच दबा दिया।
जिस पर सोनू हल्का-हल्का कमर हिलाते हुए मेरी चूचियों को चोदने लगा।
सोनू के लण्ड को कुछ देर चूचियों के बीच रगड़ने के बाद मैंने लण्ड को हाथ से पकड़ा और फोरस्किन को पूरा पीछे खींचकर फूले बैंगनी सुपाड़े को मुंह में लेकर चूसने लगी।
भाई का लण्ड चूसते हुए मैं मम्मी की तरफ देख रही थी मम्मी भी गौर से मुझे अपने भाई का लण्ड चूसते देख रही थीं।
जैसी ही मेरी निगाह मिली मैं हल्का सा मुस्कुरा दी।
शायद मैं आँखों ही में मम्मी से कह रही थी कि देख लो कितना बड़ा है तुम्हारे बेटे का लंड… मैं तो चूस रही हूं… तुम्हें चूसना हो तो बताओ।
सोनू के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियाँ आ आआ आआहह हहह… दीदी ईईई… आआ आआहह निकलने लगी थीं।
वो मम्मी को देखता हुआ मुझसे लण्ड चुसवा रहा था।
अगर पिछली रात सोनू के लण्ड का पानी दो बार नहीं निकला होता तो उत्तेजना के इस माहौल को वो बर्दाश्त नहीं कर पाता और कब का झड़ जाता।
मेरी हालत भी कुछ ऐसी ही थी।
मेरे बदन में तो यही देखकर आग लग चुकी थी कि हम दोनों भाई-बहन अपनी वासना का खेल मम्मी के सामने खेल रहे थे।
और मम्मी की हालत ये थी कि हमें मना करने के बजाय वो खुद ही इस खेल का हिस्सा बनना चाह रही थीं।
मैंने मम्मी के चेहरे की तरफ देखा उनके बदलते भाव साफ पता चल रहे थे… उनका गोरा चेहरा और आंखें कामुकता में लाल होने लगे थे।
चेहरे से मुस्कुराहट गायब हो चुकी थी और वासना का नशा तैरने लगा था।
वो भले ही पहले से इस बात को जानती थीं कि उनके बेटे-बेटी आपस में सेक्स करते हैं लेकिन इस तरह अपने सामने दोनों को नंगे एक-दूसरे को सहलाते हुए देखने से उनकी वासना की आग बढ़ती जा रही थी।
धीरे-धीरे वो हल्का सा कुर्सी पर ही कसमाने लगीं और अपने एक पैर को दूसरे पैर पर रखकर चूत की गर्मी और अपने बदन की वासना की आग को शांत करने की नाकाम कोशिश करती रहीं।
और आखिर फिर वही हुआ जो मैं सोच रही थी।
मम्मी के बर्दाश्त की सीमा खत्म हो गयी और उन्होंने खुद ही अपने गाउन के रिबन की गांठ को पहले खोला और फिर उसे धीरे से अगल-बगल फैला कर अपना एक हाथ सीधे अपनी चिकनी चूत पर रखा और उसे उंगलियों से हल्का-हल्का रगड़ने लगीं और दूसरे हाथ से चूची को दबाते और सहलाते हुए हमें देखने लगीं।
सोनू ने जैसे ही मम्मी को इस हालत में देखा तो उसका लण्ड मेरे मुंह में ही ठुमके लेने लगा।
मम्मी को गोरा नंगा बदन पर गोल-गोल बड़ी सी चूचियां… और नीचे पाव की तरह फूली हुई चिकनी चूत।
एकदम स्वर्ग की अप्सरा जैसी लग रही थीं।
सोनू का लण्ड अभी भी मेरे मुंह में था मैं उसकी जांघ को सहलाते हुए लण्ड चूस रही थी।
मैंने महसूस किया कि सोनू का शरीर जल रहा था… जैसे तेज बुखार हो… ये नज़ारा शायद सोनू के भी बर्दाश्त के बाहर हो रहा था।
जहां एक तरफ उसकी सगी बड़ी बहन उसका लण्ड चूस रही थी वहीं उसकी नंगी मां अपनी चूत सहलाते हुए दोनों भाई-बहन की काम वासना के खेल को देख रही थी।
मम्मी अपनी चूत सहलाते हुए ललचायी निगाह से मुझे सोनू के लण्ड को चूसते देख रही थीं।
उनकी निगाह से साफ पता चल रहा था कि वो अपने बेटे के लण्ड को चूसना चाह रही थीं बस कह नहीं पा रही थीं।
तभी मैं लण्ड को मुंह से निकालकर सीधी बैठ गयी और मैंने मम्मी से धीरे कामुकता भरी आवाज में बोली- तुम भी चूसोगी मम्मी?
मेरी बात पर मम्मी का आंखों और चेहरे पर हल्की सी चमक आ गयी थी।
मैं समझ रही थी कि मैंने मम्मी के दिल की बात कह दी है।
न्यूड सिस्टर ब्रदर स्टोरी जारी रहेगी.
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