भाई बेहेन X कहानी में शादी के बाद मैं मायके आई तो भाई के बेड पर सोई. उसके साथ मस्ती की और हम दोनों भाई बहन ने अपनी मम्मी को अपने सेक्स गेम में शामिल करने की योजना बनाई.
मेरी कहानी के दूसरे भाग
छोटे भाई का लंड चूस कर माल पीया
में आपने पढ़ा कि मैं अपने भाई के साथ लेटी थी, वो मेरे निप्पल चूस रहा था. हमने आपस में मम्मी के साथ सेक्स की बात की तो हम दोनों वासना से भर गए. हमने एक दूसरे के अंग चूस चाट कर मजा दिया.
अब आगे भाई बेहेन X कहानी:
सोनू मुस्कुराते हुए बोला- वैसे शादी के बाद तुम्हारे अंदर बहुत चेंज आया है।
मैं- अच्छा… और वो क्या है?
सोनू- शादी के पहले जब हम आपस में सेक्स करते थे तो तुम थोड़ा शरमाती थी और इतनी बोल्ड और एग्रेसिव नहीं होती थी। लेकिन उस दिन ससुर जी के साथ, फिर मालगाड़ी में और फिर एक दो दिन से घर पर जब मैं तेरे साथ सेक्स कर रहा हूँ तो मैंने महसूस किया है चुदाई के दौरान तुम बहुत बोल्ड और एग्रेसिव रहती हो।
मैं हंसकर- अच्छा तो पहले ज्यादा मजा आता था या अब?
सोनू हंसकर बोला- अब ज्यादा मजा दे रही हो।
इस पर सोनू और हम दोनों हंस पड़े।
टाइम देखा तो करीब साढ़े छह बज चुके थे।
मैंने कहा- मैं अपने कमरे में जा रही हूँ थोड़ी देर सो लेते हैं उसके बाद पापा ऑफिस चले जाएंगे तब नीचे चलेंगे।
सोनू बोला- ऐसा है दीदी… आज तुम दिन में मम्मी से बात करके उनका मूड देखना कि कैसा है।
मैं हंसते हुए- क्यों तू दिन भर कमरे में ही बंद रहेगा क्या?
सोनू बोला- मेरा तो वैसे भी दोस्तों के साथ बाहर मिलने का प्रोग्राम है. फिल्म वगैरह देख कर रात में लौटूंगा ताकि मम्मी से ज्यादा सामना ना हो. तुम दिन में संभाल लेना।
मैं हंसते हुए बोली- अच्छा बेटा, जब मजा लेना था तो साथ में था अब जब सजा कि बारी आयी तो मुझे आगे कर रहा है अपने भाग जाएगा।
सोनू हंसते हुए बोला- अरे दीदी, तुम्हारे पर भरोसा है कि जब तुमने अपने ससुर और ननद को पटा लिया तो मम्मी को भी आराम से पटा लोगी।
इस पर हम दोनों हंस पड़े।
मैंने दोबारा ब्रा पहनने की जहमत नहीं उठाई बस टीशर्ट नीचे किया और पैंटी पहन ली।
पजामा पहनने लगी तो सोनू बोला- अरे ऐसी ही सो जाओ ना थोड़ी देर और मेरे साथ. अभी थोड़ी देर में उठकर अपने कमरे में जाकर पहन लेना।
मैं थकी हुई थी तो सोनू की बात मान गयी और टी-शर्ट और पैंटी में ही लेट गयी।
सोनू ने भी सिर्फ अपनी हाफ पैंट डाली और फिर से मेरी टी टर्श ऊपर किया और छोटे बच्चे की एक चूची को मुंह में भरकर मुझसे चिपक कर लेट गया।
मैं भी उसी तरह सोनू को बाहों में भरे सो गयी।
सोते हुए मैं सोनू की बोल्ड और ऐग्रेसिव वाली बात के बारे में सोचने लगी।
दरअसल ये बात तो मैंने खुद भी महसूस की थी कि शादी के बाद मैं सेक्स के दौरान धीरे-धीरे थोड़ा बोल्ड होने लगी थी।
शादी के कुछ दिन तक तो शुरू में रोहित ज्यादातर मेरे ऊपर सवार रहते थे।
लेकिन करीब एक-दो महीने के बाद से चुदाई के दौरान मैं उनके ऊपर सवार रहने लगी थी।
मैं खुद से ही रोहित के कपड़े उतार देती थी.. सेक्स की शुरुआत भी मैं ही करने लगी थी।
चुदाई के दौरान मैं एक-एक पल का मज़ा लेने लगी थी और मेरे मुंह से कराहने की आवाज़ भी थोड़ा तेज़ हो गयी थी।
कभी-कभी रोहित को कहना पड़ता था कि गरिमा थोड़ा धीरे आवाज़ करो कमरे के बाहर भी कोई सुन लेगा।
ससुर जी के साथ भी यही होने लगा था।
शुरुआत में थोड़ा शर्म और संकोच था उसके बाद सब खत्म।
शुरुआत में ससुर जी ज्यादातर एक ही पोजीशन में चुदाई करते थे लेकिन बाद में मैं खुद ही नयी-नयी पोज़ीशन में चुदाई करवाने लगी थी।
कभी उनकी गोद मैं बैठकर कभी उनको बेड पर नीचे करके खुद उनके लंड उछल-उछल कर चुदाई के मजे लेने लगी थी।
शायद इसीलिए ससुर जी अक्सर मुझसे कहते थे कि तुम अपनी मम्मी की तरह मज़ा देती हो।
तो मैं उनसे मजाक में पूछती भी थी कि मम्मी भी इसी तरह आपके लंड पर उछलती थीं क्या।
तो ससुर जी हंसकर कहते थे वो तो तुमसे भी ज्यादा उछलती थी।
खैर… मैं सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन नींद गायब हो चुकी थी।
यही सब सोचते-सोचते साढ़े सात बज गये।
सोनू गहरी नींद में सो गया था।
पहले मैंने सोचा कि अपने कमरे में चली जाउं ताकि मम्मी आएं तो उन्हें पता ना चले कि मैं सोनू के साथ थी।
लेकिन फिर अचानक दिमाग में आया कि जब उन्हें सब पता ही है तब क्या डरना!
तो क्यों ना आज यही देख लिया जाए कि सोनू के साथ कमरे में देखने पर उनका रिएक्शन क्या होता है।
इससे उनका मूड भी पता चल जाएगा।
ये सोचकर मैंने अपनी टीशर्ट ठीक की ब्रा और पैंटी पहन लिया लेकिन नीचे लोअर नहीं पहना और खिड़की के पर्दे वगैरह खींच कर रुम में अँधेरा कर दिया।
हालांकि कमरे में इतनी रोशनी थी कि मम्मी अगर कमरे में आतीं तो मैं हाथ के नीचे से उनका आराम से देख सकती थी।
हालांकि ये थोड़ा रिस्क लेने जैसा था लेकिन मेरे और सोनू को लेकर मम्मी का मूड जानने के लिए ये ज़रूरी था।
मेरे अंदर ये हिम्मत इसलिए भी थी क्योंकि मुझे इतना तो पक्का पता था कि मम्मी गुस्सा तो नहीं होंगी. बस हो सकता है पहली बार सामने इस तरह देखकर थोड़ा मूड ऑफ हो सकता है उनका!
मैं चुपचाप यही सब सोचते-सोचते मम्मी का वेट करने लगी।
करीब आधे घंटे बाद मुझे सीढ़ियों पर चढ़ने की आवाज सुनाई दी।
मैं समझ गयी कि मम्मी आ रही हैं।
मैं तुरंत हाथ से आंखों को ढक कर सोने का नाटक करने लगी।
मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था कि मम्मी का रिएक्शन क्या होगा।
तभी मुझे बगल में अपने कमरे का दरवाजा खुलने की आवाज सुनाई दी।
मम्मी शायद पहले मेरे कमरे में जाकर मुझे चाय देना चाह रही होंगी।
लेकिन दोबारा चलने की आवाज से लगा कि मुझे कमरे में ना पाकर वो तुरंत सोनू के कमरे की तरफ आने लगीं थीं।
सोनू गहरी नींद में सो रहा था और मैं सोने का नाटक कर रही थी। दिल धक-धक कर रहा था।
मैंने महसूस किया कि मम्मी कमरे के सामने आकर रुकीं।
वो शायद सुनने की कोशिश कर रही थीं कि हम जगे हैं या सो रहे हैं।
वो भी शायद यही सोच रही होंगी कि कहीं हम अंदर कुछ कर तो नहीं रहे हैं।
तभी मम्मी ने दरवाजे पर हल्का सा नॉक किया लेकिन खोला नहीं।
मम्मी शायद हमें अलर्ट करना चाह रही होंगी या जो भी उनके दिमाग में हो।
जब कुछ देर तक अंदर से कोई आवाज़ नहीं आयी तो मम्मी ने धीरे से बिना आवाज़ के थोड़ा सा दरवाज़ा खोला और दरार से अंदर झांकने लगीं।
जब उन्होंने देखा कि हम दोनों कुछ कर नहीं रहे और चुपचाप सो रहे हैं तो फिर वो धीरे से दरवाजा खोल कर कमरे में आ गयीं।
उनके हाथ में प्लेट में दो कप चाय थी।
जैसे ही उनकी नज़र मेरे पर पड़ी और मुझे सिर्फ टीशर्ट और पैंटी में देखा तो रुक कर कुछ देर देखने लगीं।
सोनू की तरफ देखा तो वो हाफ पैंट में गहरी नींद में सो रहा था।
हम-दोनों की हालत देखकर मम्मी इतना तो पक्का समझ चुकी थीं कि रात में यहां क्या हुआ होगा लेकिन वो चुपचाप चाय लेकर कुछ देर हम दोनों को देखती रहीं।
शायद वो इस उधेड़बुन में थी कि हमें जगाएं या ना जगाएं।
तभी मम्मी ने सामने टेबल पर चाय के कप रख दिये और फिर बेड के पास आकर खड़ी हो गयीं।
मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था।
मम्मी को यही लग रहा था कि मैं गहरी नींद में हूँ।
मम्मी ने फिर मेरे बांह पकड़ कर हल्का सा हिलाते हुए धीरे से जगाते हुए बोलीं- गरिमा… गरिमा!
मैंने आंख से हाथ हटाते हुए ऐसा नाटक किया जैसे में अभी जगी हूँ।
और फिर मम्मी को देखकर हड़बड़ाने का नाटक करते हुए बोली- अरे मम्मी? तुम कब आयी?
मम्मी मुस्कुराती हुई धीरे से बोलीं- तू यहां सो रही है और में चाय लेकर तेरे कमरे में गयी थी।
मैं तेजी से उठकर कंफर्टर से जांघों को ढकते हुए जानबूझकर थोड़ा घबड़ाहट में सफाई देते हुए बोली- अरे रात में अकेले डर लग रहा था तो सोनू के पास सोने चली आयी थी।
मेरा चेहरा देखकर मम्मी को लगा कि सोनू के साथ इस तरह बिना लोअर के मुझे देखकर मैं घबरा गयी हूँ।
इसलिए शायद माहौल को हल्का करने और मुझे तसल्ली देने के लिए मुस्कुराते हुए धीरे से बोलीं- ठीक है, बाकी नींद बाद में पूरी करना अब चाय पी ले।
मैं सोनू को जगाने जा रही थी तभी मम्मी धीरे से इशारा करते हुए बोलीं- सोने दो उसे. वो बाद में पी लेगा। तुम अपनी चाय पी लो।
ये कहकर मम्मी दरवाजे की तरफ मुड़ने लगीं।
मम्मी को नॉर्मल देखकर मेरे अंदर थोड़ी सी हिम्मत आ गयी थी।
मैं बोली- रुको, मैं भी चल रही हूं तुम्हारे साथ ही पीयूंगी चाय।
ये कहकर मैं धीरे से बेड से उतरने लगी।
मेरी बात पर मम्मी रुकीं और मुड़कर देखने लगी मैंने देखा कि मम्मी की निगाह मेरे नंगी जांघों के बीच पैंटी पर चली गयी थी।
फिर वो हल्का सा हंसते हुए मुझसे बोलीं- मैं नहाने जा रही हूँ, तुम चाय पीकर जा नहा-धो लो और और ढंग से कपड़े पहन लो।
ये कहकर मुस्कुराते हुए मम्मी नीचे चली गयीं।
मम्मी ने जिस तरीके से मेरी जांघों के बीच पैंटी पर नज़र डाली थी उसे याद कर मेरे एक्साइटमेंट में मेरे बदन में एक झुरझुरी से दौड़ गयी थी।
बचपन से लेकर आज तक में इतना तो अनुभव हो ही चुका था कि मैं निगाहों को तुरंत पहचान सकती थी और मम्मी की निगाह में मुझे हल्की सी वासना और कामुकता दिख गयी थी।
सोनू अभी भी सो रहा था।
उसे पता ही नहीं चला था कि इतनी देर में क्या हो चुका है।
टाइम देखा तो सवा आठ बज रहे थे।
पहले मैंने सोचा कि सोनू को जगा कर सारी बात बता दूँ।
लेकिन पता नहीं क्यों मैंने उसे अभी कुछ बताना उचित नहीं समझा और उसे सोते हुए छोड़कर चुपचाप चाय लेकर अपने कमरे में चली गयी।
चाय वगैरह पीने के बाद मैं नहा धोकर कपड़े बदल कर करीब एक घंटे बाद निकली।
मैं नीचे जाने के बजाए सोनू के रूम में गयी तो देखा कि सोनू बेड पर नहीं था उसके बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही थी मैं समझ गया कि भाई नहा रहा है।
उसके बाद मैं सीधा नीचे चली गयी।
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