माय Xxx पापा स्टोरी में मैं अपनी मम्मी के साथ लेस्बियन करने के बाद उनसे सेक्स की बातें कर रही थी. मम्मी ने बताया कि हमारे परिवार में खुला सेक्स होता आया है.
कहानी का पिछला भाग
बेटे ने मम्मी की गांड और चूत मारी
अब आगे माय Xxx पापा स्टोरी:
>हंसी-मजाक के बाद माहौल पूरी तरह नॉर्मल हो गया, साथ ही सोनू और मम्मी भी आपस में खुलकर बिना किसी हिचकिचाहट के एक-दूसरे से बात करने लगे।
खैर आधे घंटे बाद सोनू अपने दोस्तों के घर निकल गया।>
अब मैं और मम्मी घर में बचे।
मुझे तो मम्मी की अधूरी कहानी सुनने की जल्दी मची थी।
उसके बाद मम्मी ने आराम से अपनी चुदाई के अनुभवों की पूरी कहानी आराम से सुनाई।
उस कहानी में सब कुछ था।
घर के अनुभव, पापा के साथ मुलाकात, ससुर जी और सास के साथ कैसे शुरू हुआ।
पापा और बुआ की कहानी भी मतलब सबकुछ ऐसा कोई एंगल नहीं जो छूटा हो।
क्योंकि मैं भी हर खोद-खोद कर सब पूछ रही थी और मम्मी जवाब देती जा रही थीं।
मम्मी का सेक्स अनुभव इतना कामुक और रोमांचक होगा इसकी मुझे सपने में भी उम्मीद नहीं थी।
पूरी कहानी सुनने के बाद मेरी चूत और पैंटी के पास पूरी गीली हो चुकी थी, कामुकता में मेरे शरीर के रोएँ खड़े हो गये थे वहीं मम्मी की हालत वही थी।
अपनी कहानी सुनाने के बाद मम्मी ने मेरे बारे में पूछा- तेरा सोनू के साथ कब शुरु हुआ था और किसके किसके साथ किया है तूने?
उसके बाद मैंने मम्मी को सारी कहानी सुना दी कि कब और कैसे सोनू के साथ शुरू हुआ था.
वो कहानी आप इस लिंक
छोटे भाई के साथ भीड़ वाली ट्रेन के डिब्बे में
पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं
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छोटे भाई और अनजान आदमी से स्टेशन पर चुदाई
ज्योति और ज्योति के पापा के साथ
सहेली ने मेरी चढ़ती जवानी का इलाज बताया
ससुराल में पायल के साथ
जैसी मैं, वैसा रसिक पति मिला मुझे
और फिर शादी से पहले ससुर जी के साथ उनके घर पर
पापा के दोस्त की नजर मेरे सेक्सी जिस्म पर
और शादी के बाद ससुर जी के साथ ससुराल में कैसे शुरू हुआ था
ससुराल में एक और सुहागरात ससुर जी के साथ
वो सारी कहानी मम्मी को सुना दी।
साथ में ये भी बता दिया कि सोनू भी ज्योति को चोदता है।
मेरी कहानी सुनने के बाद मम्मी मेरा गाल खींचती हुईं बोलीं- वाह… मजे तो तूने भी बहुत किये हैं।
मैं हंसकर बोली- लेकिन तुम्हारे आगे तो सब फीका है।
तभी मेरे दिमाग में एक सवाल आया मैंने पूछा- एक बात बताओ, मेरे बारे में पापा ने क्या बताया था पहली बार?
मम्मी बोलीं- यही कि शालू के पास जाने से पहले तेरे कमरे में देखने गये थे कि तू सो गयी है या नहीं… तो उन्होंने देखा कि तूने छोटी सी स्कर्ट पहनी थी जिसमें तेरी जांघें दिख रही थीं।
मैं उत्सुकता से- फिर?
मम्मी हल्का सा रुकीं और फिर मुस्कुराते हुए बोलीं- बोले कि गरिमा सो रही थी लेकिन उसकी गोरी जांघ पर मेरी निगाह अटक गयी थी। मेरा मन कर रहा था कि और कुछ देर रुक कर देखूं लेकिन जग ना जाए इस डर से मैं धीरे से दरवाजा बंद करके शालू के पास चला गया।
मैं- तो तुम्हें कुछ अजीब नहीं लगा या बुरा नहीं लगा कि वो अपनी बेटी के बारे में तुमसे इस तरह बात कर रहे थे।
मम्मी मुस्कुराते हुए- नहीं. मुझे आदत हो गयी थी. तेरे पापा और तेरे ससुर तो बहुत पहले से ही अपनी-अपनी बेटियों को लेकर आपस में बात कर मजे लेते थे।
मैं- क्या कहते थे दोनों… कुछ बताओ ना?
मम्मी हंसते हुए बोलीं- कभी हम चारों साथ होते में होते थे तो दोनों मुझे और तेरी सास को चिढ़ाते हुए बोलते थे कि जब तक तुम दोनों बुड्ढी होंगी तब तक हमारी बेटियां जवान हो जाएंगी और वो हमारा ख्याल रखेंगी। दोनों आपस में अपनी बेटियों की अदला-बदली की बात भी करते थे।
मैं- तो तुम दोनों कुछ नहीं बोलती थी इस पर?
मम्मी हल्का सा मुस्कुराते हुए बोलीं- फिर हम दोनों भी जवाब में बोलती थी कि बेटियां जवान होंगी तो बेटे भी तो जवान हो जाएंगे वो रखेंगे अपनी-अपनी मम्मी का ख्याल। फिर हम दोनों भी अदला-बदली करेंगी।
मैं उसी तरह उत्सुकता से- फिर… अगली रात में भी पापा आए थे मेरे कमरे में और करीब 1-2 मिनट तक मेरी जांघें देख रहे थे।
मम्मी बोलीं- जब वो रात में जाने लगे तो मैंने ही मजाक में कहा कि गरिमा की जांघ देखते हुए जाइयेगा तो शालू के साथ ज्यादा मजा आएगा।
मैं- फिर… आगे क्या हुआ?
मम्मी हंसकर धीरे से बताने लगीं- पहले एक दो दिन तो हम दोनों को यही लगा कि तू ऐसे ही सोती होगी। लेकिन शालू के जाने के बाद रात में तेरे पापा मुझसे बोले कि एक बार फिर गरिमा को देख कर आऊं। मैं हंसकर बोली कि क्यों अब बिना बेटी की जांघ देखे नींद नहीं आ रही क्या? तेरे पापा बोले कि हां वो भी है लेकिन पता नहीं क्यों मुझे लग रहा है कि गरिमा को पता है कि मैं कमरे में उसे चुपके से देखता हूँ। तब मुझे भी थोड़ी हैरानी हुई। मैंने पूछा उनसे कि आपको ऐसा क्यों लग रहा है कि वो जानबूझ कर ऐसा कर रही है। वो बोले बस ऐसे ही मुझे लगा कि वो जगी रहती है और जानबूझकर मुझे दिखाने के लिए छोटी स्कर्ट पहन कर सो रही है। इसलिए सोचा आज एक बार और देखकर आऊँ। इस पर मैंने मजाक करते हुए कहा कि अरे बेटी की जांघ देखने का मन हो रहा है तो बहाने कर रहे हैं।
मैं मुस्कुराते हुए बोली- फिर… कमरे में क्या हुआ था ये बताया माय Xxx पापा ने आकर?
मम्मी बोलीं- हां… कमरे मे आये तो थोड़ा घबराए थे। मैंने मजाक में पूछा कि क्या हुआ पकड़ लिए गये क्या। तब उन्होंने बताया कि क्या हुआ है। (उस दिन कमरे में क्या हुआ था आप इस पापा ने जवान बेटी की चूत सूँघी लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।) मुझे हंसी आ गयी थी। वो बोले कि तुम्हें हंसी आ रही है और मैं समझ ही नहीं पाया कि क्या करुं इसलिए ऐसे ही चला आया तुरंत। क्या करना है बताओ। मैं बोली कुछ नहीं करना है चुपचाप सो जाइये जो होगा सुबह देखेंगे।
मैं थोड़ी हैरानी से- क्यों तुम्हें डर नहीं लगा कि अगर मैं जगी तो ये सब देखकर क्या सोचूंगी।
मम्मी हंसते हुए मेरे गाल पर चिकोटी काटकर बोलीं- बेटा तुझे अच्छे से जान रही थी मैं! तेरे पापा को भले नहीं पता था लेकिन सोनू और तेरी कारस्तानी के बारे में मैं तो जान ही रही थी। तूने सोचा होगा कि भाई के साथ-साथ अपने पापा के साथ भी मजे कर लेती हूँ। इसलिए मुझे पक्का यकीन हो गया था कि तू जानबूझकर नंगी सो रही है पापा को पटाने के चक्कर में।
मैं हंसते हुए बोली- तुम्हारे पर ही गयी हूँ. जैसी माँ वैसे बेटी।
यह बात मैंने मम्मी के बताये अनुभव पर कही थी।
इस पर हम दोनों हंस दी।
मैं फिर आगे बोली- वैसे पापा से बताओगी?
मम्मी बोलीं- क्या?
मैं बोली- अपने और मेरे बारे में?
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- तेरे पापा तो यही चाहते हैं… तेरे आने का जब प्रोग्राम सेट हुआ वो तो तभी से मुझसे बोल रहे हैं कि किसी तरह इस बार उसे बता दो कि तुम जानती हो हमारे (मेरे और पापा) के बारे में। मैं बोली कि क्यों इससे क्या होगा तो वो बोलते हैं कि अरे फिर आराम से मजा लिया जाएगा तीनों साथ में!
मैं हैरानी से हंसते हुए बोली- तब क्या डर है… फिर प्लान चेंज करते हैं. पापा को सरप्राइज देते हैं कल सुबह. मैं सुबह ही पापा के ऑफिस जाने से पहले आ जाउंगी।
मम्मी हैरानी से बोलीं- तू पागल है. सोनू को पता नहीं चलेगा क्या?
मैं बोली- अरे वो तो 9.30 बजे तक सोकर उठता है। वैसे भी जग भी गया तो वो तो जानता ही है कि मैं नीचे चाय पीने आती हूँ। वो ये देखने नीचे थोड़ी ना आएगा कि मैं पापा के साथ क्या कर रही हूँ।
मम्मी हंसकर बोलीं- ठीक है फिर. कल सुबह तेरे पापा की तो बल्ले बल्ले हो जाएगी। वो तेरे आने के बाद रात में ही जाना चाहते थे तेरे कमरे में। मैंने थोड़ा सोनू का डर दिखा कर रोका कि सोनू जग गया तो… रात में पानी पीने उठा तो ये सब बहाने कर उन्हें रोका… नहीं तो तेरी और सोनू की पोल उनके सामने भी खुल चुकी होती.
मैं हंसकर बोली- अरे बाप रे… तुमने तो बचा लिया.
मम्मी हंसकर बोलीं- लेकिन उसके बाद कबसे सोनू के जाने का इंतज़ार कर रहे हैं।
मैं हंसकर बोली- उनका इंतजार कल सुबह ही खत्म कर देते हैं.
इसके बाद फिर हम दोनों कुछ देर बातचीत की.
मुझे नींद आने लगी तो मैं अपने कमरे में सोने चली गयी।
मम्मी लंच बनाने और किचन का काम करने लगीं।
दिन भर ऐसे ही रहा रात में भी खाना-वाना खाकर करीब 10 बजे तक पापा-मम्मी अपने कमरे में और मैं और सोनू ऊपर अपने-अपने कमरे में आ गये।
आधे-एक घंटे बाद मैं धीरे से सोनू के कमरे में गयी।
जाकर जैसे ही बेड पर सोनू के बगल लेटी सोनू पलट कर मेरे चेहरे को पकड़ा और गाल पर एक जोरदार किस देते हुए बोला- थैंक्यू… थैंक्यू… थैंक्यू… दीदी. मजा आ गया आज तो. असंभव को संभव कर दिखाया तुमने!
मैं मुस्कुराते हुए बोली- यार सच कहूं तो जब मम्मी, मैं और तुम हम तीनों ये सब कर रहे थे तो देखने के बावजूद भी मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि ये सब सच में हो रहा है। सबकुछ इतनी आसानी से पॉसिबल हो जाएगा कसम से मैंने भी नहीं सोचा था… मम्मी कैसे इतनी जल्दी तैयार हो गयीं मेरे अभी तक पल्ले नहीं पड़ रहा है।
मेरी बात पर सोनू बिना कुछ बोले हल्का सा मुस्कुराने लगा।
उसके मुस्कुराने से साफ पता चल रहा था कि जैसे उसे कोई राज की बात पता थी।
मैं बोली- तू इस तरह क्यों मुस्कुरा रहा है कुछ बात है क्या बता?
सोनू थोड़ा मुस्कुराते हुए बोला- चलो जब आज सब हो ही गया है तो तुम्हें बता देता हूं।
सोनू के इस तरह बोलने पर मैं हैरान रह गयी।
मैं बोली- क्या मतलब… मुझसे छुपा रहे हो क्या कुछ?
सोनू मुस्कुराते हुए बोला- अरे नहीं… छिपाना होता तो बताता क्यों… बात ये है कि…
इसके बाद सोनू ने मुझे पूरी बात बतायी।
जिसे सुनकर मैं हैरान रह गयी।
दरअसल मम्मी और सोनू के बीच छुपाछिपी का खेल मेरी शादी के बाद से ही शुरु हो गया था।
मैंने पहले ही बताया था कि सोनू मम्मी की चूची और गांड चोरी-चोरी देखता था।
मम्मी भी इस बात को जानती थीं।
सोनू ने बताया कि धीरे-धीरे मम्मी भी अकसर उसे उकसाने वाली हरकतें करने लगी थीं।
जैसे जब सोनू के नीचे आकर नाश्ता करने का टाइम होता तो मम्मी अक्सर उसी समय नहाकर गाउन में ही आ जाती थीं और नाश्ता देती थीं।
मम्मी अक्सर खाना निकालते समय या कभी-कभी कमरे में सुबह चाय देने का टाइम इस तरह झुक जातीं कि उनकी गोल-गोल बड़ी चूचियां कुर्ती के अंदर से साफ दिख जाती थीं।
मम्मी को भी इसमें मजा आ रहा था।
ये सारा खेल पापा के ऑफिस जाने के बाद होता था।
एक बार जब सोनू छुट्टी पर आया तो भी यही छुपनछुपाई का खेल हुआ।
लेकिन इस बार सोनू मम्मी के नहाने के बाद नीचे उन्हीं के बाथरूम में नहाने चला गया ताकि उनकी पैंटी में मुठ मार सके।
लेकिन लगातार दो दिन तक उसे कुछ नहीं मिला क्योंकि मम्मी की आदत थी कि नहाने के बाद तुरंत वो अपने कपड़े बाहर लाकर वॉशिंग मशीन में डाल देती थीं।
शुरू में तो मम्मी भी नहीं समझीं कि सोनू बार-बार उनके बाथरूम में क्यों नहाने जा रहा है।
तीसरे दिन सोनू को लगा कि मम्मी तो आज भी कोई कपड़ा नहीं छोड़ी होंगी बाथरूम में… इसलिए वो चाय पीने के बाद ऊपर अपने कमरे में नहाने के लिए जाने लगा।
तभी मम्मी ने खुद ही उससे कहा कि नीचे ही नहा लो।
मम्मी के कहने पर सोनू नीचे ही उनके बाथरूम में नहाने चला गया।
लेकिन सोनू चौंक गया जब उसने देखा कि बाथरूम में मम्मी की यूज़ की हुई पैंटी खूंटी पर टंगी थी जिसमें से चूत की मादक खुशबू आ रही थी।
सोनू समझ गया कि मम्मी शायद जान गयी हैं कि वो उनके बाथरूम में किसलिए नहाने आता है और क्या चाहता है।
उस दिन सोनू ने पहली बार उनकी पैंटी में मुठ मारी और वीर्य को उसी तरह लगा रहने दिया और नहाकर बाहर आ गया।
अगले दिन भी वही हुआ।
मम्मी बाथरूम में पैंटी को छोड़कर अपने बाकी कपड़े वॉशिंग मशीन में डाल दी थीं।
उसके बाद से ये अक्सर होने लगा।
पापा के ऑफिस जाने के बाद सोनू नीचे चाय पीने आता तब मम्मी नहाने जाती थीं और उसके बाद सोनू नहाने जाता और पैंटी पर मुठ मारकर और वीर्य को पैंटी पर ही छोड़ कर आता था।
फिर अगली बार जब छुट्टी पर आया तो फिर यही कहानी हुई।
यहां तक कि इस बार भी मेरे आने से एक दिन पहले तक भी यही हुआ था।
कहानी सुनने के बाद मैं थप्पड़ मारते हुए बोली- कमीने… तो ये सब तूने पहले क्यों नहीं बताया मुझे। तभी मैं कहूं कि मम्मी इतने आराम से कैसे तैयार हो गयीं… और तू भी पहली बार में ही शुरू हो गया।
इस पर सोनू हंसते हुए बोला- तभी तो मैंने कहा था कि तुम पक्का उन्हें पटा लोगी।
मैं बोली- वैसे मम्मी ने ये तो बताया था कि तू चोरी-चोरी उनकी चूची और गांड देखता है लेकिन पैंटी में मुठ मारने वाली बात उन्होंने मुझे नहीं बतायी। अब कल पूछती हूँ उनसे!
सोनू बोला- अरे वो यही सोचकर नहीं बता रही होंगी कि तू क्या सोचेगी उनके बारे में!
फिर मैंने भी बात को ज्यादा नहीं बढ़ाया क्योंकि मैंने खुद भी तो सोनू से पापा और अपनी वाली बात छुपा कर रखी थी।
फिर अगले दिन सुबह जल्दी भी उठना था पापा को सरप्राइज देने के लिए।
मैं हंसते हुए बोली- चल लेकिन तेरी तो लॉटरी लग गयी. अब तो जब तक यहां पर है बस मम्मी ही नज़र आएंगी तुझे… बहन को तो भूल ही जाएगा।
सोनू बोला- अरे ऐसा कैसे हो सकता है दीदी… तुम्हीं तो हो जिसकी वजह से मुझे ये सारे सुख मिल रहे हैं.
फिर वह आँख मारते हुए बोला- और आगे कुछ नये सुख भी मिलने वाले हैं.
मैं समझ गयी कि वो पायल की तरफ इशारा कर रहा था।
मैं हंसकर बोली- हां… लेकिन उससे पहले उसे अपने पापा और भाई का सुख तो दिला दूं।
सोनू हंसकर बोला- हां… बिल्कुल … तभी तो ज्यादा मजा आएगा।
फिर हम दोनों काफी देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे।
मैं जानबूझकर उससे ज्यादा बात कर रही थी ताकि वो रात में देर से सोए जिससे सुबह देर से उठे।
चूंकि पिछली रात और सुबह मम्मी के साथ मिलाकर सोनू के लण्ड का पानी कई बार निकल चुका था तो वो भी कुछ करने के मूड में नहीं था और मैं भी नहीं चाहती थी।
बातें वगैरह करने के सोनू नेटफ्लिक्स पर एक अपनी हॉलीवुड की एक मूवी लगायी और देखने लगा।
मुझे भी नींद आ रही थी तो मैं गुड नाइट बोलकर अपने रूम में आने लगी।
सोनू बोला- यहीं सो जाओ ना!
लेकिन मैं नहीं चाहती थी उसके रूम में सोना क्योंकि सुबह उठकर मुझे नीचे जाना था।
इसलिए मैंने बहाना करते हुए कहा- तू मूवी देख मुझे तेज नींद आ रही है… और तू डिस्टर्ब करेगा।
फिर आंख मारते हुए बोली- वैसे भी एनर्जी बचाकर रख सुबह फिर मम्मी के साथ लिए। वैसे भी बहन के साथ बहुत मजे लिए हैं अब जितने दिन छुट्टी पर है यहां थोड़ा मम्मी के मजे ले।
सोनू हंसने लगा और मैं अपने रूम में चली आयी और सुबह का अलार्म लगाकर सो गयी।
कहानी जारी रहेगी.
यह माय Xxx पापा स्टोरी आपको कैसी लगी?
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