सेक्स टॉक विद मॉम स्टोरी में मैंने अपनी कामुक मम्मी के साथ लेसबियन सेक्स का मजा लिया। मम्मी ने भी पूरी नंगी होकर मेरा साथ दिया। उसके बाद हम दोनों भाई से चुदाई की योजना बनाने लगी।
कहानी का पिछला भाग था
मम्मी की चूत से मेरी चूत मसली
अब आगे सेक्स टॉक विद मॉम स्टोरी:
सुबह पापा के लिए नाश्ता बनता है तो उसी समय मम्मी सबका नाश्ता तैयार देती है।
इसलिए बस चाय बनाने लगीं।
मैं किचन में जाकर उनसे बात करने लगी।
मैंने सोचा कि सोनू को नहा-धोकर नीचे आते-आते 10 तो बज ही जाएंगे।
तब तक थोड़ा मम्मी से कुछ बातें कर ली जाए।
वैसे भी मुझे मम्मी से बहुत कुछ जानना था अभी।
मैं जल्दी-जल्दी किचन से नाश्ता लाकर डायनिंग टेबल पर रख दिया और फिर मम्मी भी चाय लेकर आ गयीं हम दोनों चाय पीने लगी।
नाश्ता सोनू के साथ ही करना था।
चाय पीते हुए मम्मी हंसकर बोलीं- तेरे पापा पूछेंगे कि किसने साफ किया है तब?
मैं बोली- बोल देना कि मैंने किया है और क्या!
मम्मी हंसने लगीं।
उनके चेहरे से लग रहा था कि वो भी मजे लेना चाह रही थीं।
मैंने मुस्कुरा कर कहा- अच्छा एक बात बताओ, ससुर जी ने तुम्हें अपने और मेरे बारे में… फिर पायल और मेरे में तो बता दिया है… लेकिन खुद अपने और पायल के बारे बारे में बताया है या नहीं।
मम्मी थोड़ा उत्सुक होते हुए बोलीं- नहीं तो… क्या बात है बता ना?
जिस पर मैंने ससुर जी और पायल की सारी कहानी मम्मी को सुना दी।
सारी बात सुनाने के बाद मैंने कहा- ससुर जी भी पायल को चोदना चाहते हैं। पायल की शादी भी सोनू से कराने को तैयार हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है कि पायल को पापा भी चोद लें।
पूरी बात सुनने के बाद मम्मी हंसकर बोलीं- अच्छा बेटा… अपने पहले अपने पापा के लिए अपनी दोस्त ज्योति का इंतजाम किया और अब पायल। और अब ससुर जी के लिए उनकी बेटी का।
मैं हंसते हुए- अरे अगर पापा और ससुर जी के लिए बेटी और बहू तो तुम्हारे लिए भी तो बेटा और दामाद हैं।
इस पर मम्मी हंसने लगीं।
मैं- एक बात पूछूं सच सच बताना?
मम्मी- अब एक दूसरे से कुछ छुपाना बाकी है क्या!
मैं- तुमने और पापा ने अभी कितने दिन पहले किया है बुआ के साथ कुछ? सच बताना प्लीज़.
मम्मी मेरी बात पर हल्का सा हंसकर टालते हुए बोलीं- अरे पागल है क्या… बहुत दिनों से नहीं किया है यार कुछ!
उन्हें देखकर साफ पता चल रहा था कि वो झूठ बोल रही हैं।
मैं बोली- मम्मी प्लीज़ सच बताओ ना?
मम्मी समझ गयी थीं कि मैं बिना जाने नहीं मानूंगी।
वो धीरे से मुस्कुराकर बोलीं- जिस दिन सोनू छुट्टी पर आया है उसके ठीक पहले वाले संडे को।
मैं चहकते हुए उनका गाल पकड़ कर बोली- अरे वाह… क्या क्या किया था कुछ तो बताओ यार?
मम्मी थप्पड़ मारते हुए हंसकर बोलीं- ये सब नहीं बताउंगी… कुछ और पूछना हो तो पूछो नहीं तो भागो यहां से।
मैं- तुमसे बहुत सी बातें करनी है, बहुत कुछ पूछना है यार… कहां से शुरू करूँ समझ में नहीं आ रहा।
मम्मी हंसते हुए बोलीं- पूरी लिस्ट बना ले सवालों की फिर पूछती जाना, मैं बताती जाउंगी।
यह कह कर मम्मी हंस पड़ीं।
इतनी बातें करने के बाद हम दोनों पर एक बार फिर से हल्का-हल्का वासना का बुखार चढ़ने लगा था।
मैं- अच्छा ये बताओ कि तुमने पापा और बुआ को साथ में सेक्स करते देखा है ना?
मम्मी- दोबारा क्यों पूछ रही हो?
मैं- तो तुम मुझे और सोनू को सेक्स करते देखोगी।
मेरे सवाल पर मम्मी हल्का सा मुस्कुराई और फिर बोलीं- मुझे नहीं देखना, तुम दोनों को जो करना है करो।
मैं मुस्कुराते हुए बोली- क्यों पापा और बुआ भी तो भाई-बहन हैं, जब उन्हें चुदाई करते देखकर मजा लेती हो तो अपने बेटे-बेटी की चुदाई करते देख कर भी मजे लेने में क्या दिक्कत है?
लेकिन मम्मी के हाव-भाव और आंखों से साफ पता चल रहा था कि मेरी बात पर मम्मी थोड़ा एक्साइटेड हो गयी थीं और ऊपरी मन से मुझे मना कर रही थीं।
मैं फिर आगे बोली- अच्छा एक बात बताओ, जब तुमने मुझे और सोनू को पहली बार देखा कुछ करते हुए तो तुम्हें गुस्सा क्यों नहीं आया था… सच बताना। क्योंकि ऐसा तो नहीं हो सकता कि कोई मां अगर अपने बेटे और बेटी को आपस में ही सेक्स करते देखे और उसे गुस्सा ना आए।
मम्मी को देखकर साफ पता चल रहा था कि मेरे सवाल पर वो थोड़ा असहज हो गयी थीं।
वो समझ रही थीं कि मेरा सवाल एकदम सही इसलिए उन्हें शायद समझ में नहीं आया कि क्या बोलें।
फिर भी थोड़ा संभलते हुए मुस्कुराकर बोलीं- मैं तुम दोनों से पहले तेरे पापा और बुआ को भी वही हरकत करते देख चुकी थी इसलिए ये मेरे लिए ये कोई नयी बात नहीं थी। सोचा चलो जब वो भी आपस में मजे करते हैं तुम दोनों भी कर सकते हो दिक्कत क्या है।
लेकिन मम्मी का चेहरा देखकर मैं सौ प्रतिशत दावे से कह सकती थी कि वो कुछ छुपा रही थीं।
लेकिन मैं बस किसी तरह जानना चाह रही थी अचानक मेरे दिमाग में एक सवाल आया जिसे सोचते ही मेरे बदन में करंट दौड़ गया।
मेरे कामुकता में मेरे निप्पल कड़े हो गये… मेरे अंदर पता नहीं कहां से इतनी हिम्मत आ गयी और मैंने बिना सोचे समझे मम्मी से सीधा वो सवाल दाग दिया।
मैं धीरे से कामुक आवाज़ में मुस्कुराते हुए बोली- अच्छा एक बात बताओ, तुम्हारा तो इतना बड़ा परिवार है और सब एक ही घर में रहते हैं। तो शादी से पहले तुम्हारे साथ भी घर में किसी ने किया है कभी कुछ?
मेरी बात पर मम्मी थोड़ा चौंक गयीं।
ऐसा लगा जैसे कि उनकी चोरी पकड़ ली हो किसी ने।
उनका चेहरा देखते ही मैं समझ गयी कि शायद ये वही बात है जिसे वो छिपा रही थीं।
हालांकि मैंने सवाल कर तो दिया था लेकिन उसका असर क्या होगा मैं भी नहीं जानती थी।
क्योंकि ये सवाल ऐसा था कि अगर गलत हो गया या मम्मी का मूड खराब हो गया तो समझो कि सारा मज़ा किरकिरा हो जाएगा।
लेकिन मम्मी नाराज़ होने के बजाए मुस्कुराते हुए बोलीं- तेरे दिमाग में ये कहां से आ गया कि मेरे साथ भी घर में कुछ ऐसा एक्पीरियंस हुआ होगा।
मम्मी का ऐसा प्यारा सा रिएक्शन देखकर मेरी चूत के दोनों होंठ फिर से फड़कने लगे मैं समझ गयी कि तीर सीधा निशाने पर लग गया है।
मैं मुस्कुराते हुए बोली- जब तुमने कहा कि मेरे लिए ये कोई नयी बात नहीं थी तभी मेरे दिमाग की बत्ती जल गयी थी। मैं समझ गयी थी कि पापा और बुआ वाली बात तो तुम मुझे टालने लिए बोल रही हो। असल बात कुछ और है। वैसे भी तुम्हारा इतना बड़ा परिवार है। नाना-नानी उनके बच्चे, छोटे नाना-नानी का परिवार उनके बच्चे, इतना बड़ा परिवार और तुम सब लोग एक ही घर में साथ में रहते थे। इसलिए मुझे शक हुआ… अब बताओ सच-सच कि क्या हुआ किसके साथ हुआ है?
फिर मम्मी को और भरोसा देते हुए मैं बोली- प्लीज़ मम्मी सब बताओ ना, तो मैं भी तुम्हें अपने बारे में सब बताऊंगी कि सोनू के साथ कब शुरू हुआ और किस किस के साथ मजे किये हैं।
मम्मी की आंखें और चेहरा गुलाबी होने लगा था।
अब ये अपनी पुरानी बातों को याद करके था या कामुकता में लेकिन उनके अंदर फिर से वासना के डोरे तैर रहे थे।
अब मैं और मम्मी मेरे संबंध इस स्थिति में पहुंच चुके थे थीं कि वो भी मुझसे कुछ छिपाना नहीं चाहती थीं।
उसके बाद उन्होंने जो कहानी सुनानी शुरू कि उसे सुनकर कामुकता में मेरे रोंगटे खड़े हो गयी मेरी चूत का जूस रिसकर मेरी जांघों पर बहने लगा था।
अपने सेक्सुअल एक्सपीरियंस की कहानी सुनाते-सुनाते मम्मी खुद इतनी कामुक हो गयी थीं कि उनका एक हाथ अपनी चूत पर पहुंच चुका था जिसे वो हल्का-हल्का सहलाती जा रही थीं।
उनकी आंखें और दूध सा गोरा चेहरा कामुकता में गुलाबी हो गये थे।
मैं खुद कहानी सुनते-सुनते अपनी चूत सहलाने लगी थी।
मम्मी के साथ इतनी देर की बातचीत में मुझे लगा ही नहीं कि मैं अपनी मां से बात कर रही हूँ ऐसा लग रहा था कि मैं ज्योति या पायल के साथ बात कर रही हूं।
दरअसल अनकहे तरीके से हम दोनों मां-बेटी कम और एक-दूसरे के सेक्स पार्टनर, दोस्त और राजदार ज्यादा बन चुके थे।
वही रिश्ता जो मेरा भाई और पापा के साथ बन चुका था।
मम्मी भी शायद कुछ ऐसी ही फीलिंग के साथ भी मुझसे खुलकर बात कर रही थीं।
अब हम दोनों पर फिर से धीरे-धीरे वासना का बुखार चढ़ता जा रहा था।
मम्मी की आंखें और गोरा चेहरा वासना के नशे में हल्का-हल्का गुलाबी होने लगे थे।
अभी मम्मी सारी बातें बता ही रही थीं कि तभी अचानक सीढ़ी पर आवाज़ सुनकर हम दोनों पलट कर देखा तो सोनू नहा धोकर नीचे आ रहा था।
टाइम देखा तो 10.30 बज गये थे।
बातचीत में कब एक घंटा बीत गया पता ही नहीं चला।
मम्मी ने धीरे से अपना गाउन ठीक किया।
मम्मी और मेरे दोनों के ऊपर एक बार फिर से हल्का-हल्का कामुकता का बुखार चढ़ चुका था।
लेकिन मैं इतना तो गारंटी के साथ कह सकती हूँ कि मम्मी ने अभी कहानी की शुरुआत की थी लेकिन इतने में ही सेक्स के जो अपने अनुभव बताए मम्मी के सेक्स के अनुभव सुनने के बाद मुझे अपना अनुभव फीका लगने लगा।
उनकी कहानी में बहुत से शॉकिंग और इंट्रेस्टिंग लोग हैं जिन्हें यहाँ कुछ लाइनों में लिख पाना मुश्किल है उस पर अलग से पूरी कहानी लिखनी होगी।
हालांकि मम्मी की पुराने अनुभव की कहानी अभी भले अभी अधूरी थी लेकिन अब उनमें जो नया अनुभव जुड़ रहा था उसे पूरा करना अभी बाकी था।
जिसमें बेटी का अनुभव तो जुड़ चुका था बस बेटे का जुड़ना बाकी था और अब वो भी नीचे आ गया था।
हम दोनों सोनू को सरप्राइज देने की पूरी तैयारी में थे।
सोनू आकर डायनिंग टेबल पर मेरे बगल बैठ गया।
मेरा सीने का नीचे का हिस्सा डायनिंग टेबल के नीचे था तो सोनू नहीं जान पाया कि मैं सिर्फ टीशर्ट में हूँ।
मम्मी ने प्लेट लगा दी फिर हम तीनों नाश्ता करने लगे।
कुछ देर तो हम तीनों नाश्ता करते रहे।
ऐसे ही इधर-उधर की बातचीत होती रही।
सोनू को अभी तक कुछ पता नहीं था तो वो इधर-उधर की बातें कर रहा था लेकिन मैं और मम्मी दोनों जान रहे थे कि सोनू को सरप्राइज मिलने वाला है।
मैं भी समझ नहीं पा रही थी कि कहां से बात शुरू करुँ।
तभी नाश्ता करते हुए सोनू बोला- क्या बात है… मेरे आने के पहले तो तुम दोनों ऐसे बात कर रहे थे जैसे कोई बड़ा सीरियस मामला हो लेकिन अब मेरे आने के बाद माहौल शांत हो गया है।
बस मैं तो जैसे इसी मौके की तलाश में थी।
मैं तुरंत हंसते हुए बोली- मम्मी बोल रही थीं कि तुम और मैं जो चोरी-छुपकर कर रहे हैं ना वो सब उन्हें बहुत पहले से पता है।
पहले तो मेरी बात पर सोनू चौंक गया।
लेकिन फिर उसे समझते देर नहीं लगी कि मैंने मम्मी को सेट कर लिया है।
वैसे भी उसे दिन भर की सारी बातें मैं उसे रात में बता चुकी थी।
सोनू मुस्कुराते हुए बोला- क्या चोरी छुपकर कर रहे हैं। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा किस बारे में बात कर रहे हो तुम दोनों?
वहीं मम्मी हंसते हुए बोलीं- देख कैसे मासूम बन रहा है.
सोनू मेरी तरफ देखा मैंने आंख मारते हुए मुस्कुराते हुए कहा- अब ज्यादा भोला मत बन… वैसे भी आज सुबह ही मम्मी ने तुझे मेरे कमरे में देखा है नंगा सोते हुए।
सोनू सच में हैरान हो गया था क्योंकि ये बात तो उसे सच में नहीं पता थी।
सोनू हैरान होकर धीरे से- क्या?!
मैं हंसते हुए- तुझे क्या लगता है झूठ बोल रही हूं। खुद पूछ ले मम्मी से। अभी तेरे आने से पहले यही पूछ रही थीं कि ‘क्या-क्या करते हो तुम दोनों’ तो मैंने कहा कि कहो तो तुम्हारे सामने करके दिखा दें कि क्या-क्या करते हैं।
इस पर मम्मी हंसते हुए बोलीं- पागल है ये… तू चुपचाप नाश्ता कर और अपने दोस्तों से मिलने जा!
इतनी देर में हम तीनों अपना नाश्ता भी खत्म कर चुके थे।
सोनू उठकर वॉशबेसिन पर हाथ धोने के बाद वापस आकर चेयर पर बैठते हुए हंसकर बोला- ना… अब मैं कहीं जाने वाला नहीं।
इस पर हम तीनों हंसने लगे।
कहानी जारी रहेगी.
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