लंडखोर औरत की चूत की दास्तान-ए-चुदाई- 2


वाइफ सेक्स कहानी में मसाज़ बॉय ने मेरी चूत की मालिश की तो मेरी चूत लंड मांगने लगी पर मैंने कभी मसाज़ बॉय से चूत नहीं मरवाई थी तो मैंने अपने पति का इन्तजार किया.

मेरे प्यारे मित्रो, मैं अंजलि शर्मा एक बार पुनः अपनी चुत की चुदाई वाली सेक्स कहानी लेकर आपके सामने हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
दुबई में बेटे के साथ मनाया हनीमून
में अब तक आपने पढ़ा था कि भारत जाने के प्रोग्राम के तहत मैं अपनी बॉडी की सर्विसिंग करवा रही थी.
तरुण नाम कर मसाज ब्वॉय मेरी चुत की झांटों को साफ करने में लग गया था.

अब आगे वाइफ सेक्स कहानी:

तरुण ने बड़े प्यार से धीरे धीरे मेरी पुसी को भी अच्छे से वैक्स कर दिया.

तरुण बोला- मैम मालिश भी कर दूँ?
मैंने कहा- हां कर दो तरुण!

तरुण ने मुझे उल्टा होने के लिए कहा और उसने पीछे से मेरी टांगों पर तेल लगाते हुए मेरी गांड के गोरे गोरे गोलों पर तेल की कुछ बूंदें गिराईं और मेरी गांड की अच्छे से मालिश करने लगा.

उसके सख्त हाथ धीरे धीरे मेरे बदन को रगड़ने लगे.
उसके हाथ मेरी कमर से होते हुए मेरे कंधों पर आए और उसने मेरे कंधों की मालिश की.

कल रात से सुबह तक हुई चुदाई के कारण मेरा बदन टूट रहा था, अब उस दर्द में मालिश से आराम मिलने लगा था.

मैं भी आहें भरती हुई मालिश के पूरे मजे ले रही थी ‘आह तरुण आह आह … और अच्छे से करो … बहुत अच्छा लग रहा है यार!’

तरुण भी पूरे जोश में आकर मेरी मालिश करने लगा.
फिर उसने मुझे सीधा होने के लिए कहा और धीरे धीरे तरुण मेरे बूब्स पर आ गया.

उसने तेल की बूंदें मेरे निप्पलों पर गिराईं और अपने दोनों हाथों को मेरे बूब्स के ऊपर रख कर बेखौफ उनकी मालिश करना शुरू कर दिया.

मैं भी मस्ती से अपनी चूचियों की मालिश का मजा ले रही थी.
देखते ही देखते तरुण मेरी जांघों की मालिश करते हुए मेरी चुत के पास पहुंच गया और उसने तेल की कुछ बूंदें मेरी चुत के ऊपर गिराते हुए अपने हाथ को मेरी चुत पर रख दिया.

मैं उसके हाथ की गर्मी अपनी चुत पर पाकर एकदम से सिहर गई.
वह धीरे धीरे मेरी चुत की दोनों पुत्तियों को अपनी उंगलियों से मींज मींज कर मसलने लगा.

आह … उसके सधे हुए हाथों से चुत की रगड़ाई से जिस तरह का सुख मुझे मिल रहा था, वह जन्नत के अहसास से कम नहीं था.
सच कह रही हूँ कि चुदाई से ज्यादा सुख मुझे उस समय जो मिल रहा था, मैं उसे शब्दों में बयां नहीं कर पा रही हूँ.

तरुण ने मालिश करते करते धीरे धीरे अपने हाथ की दो उंगलियों को मेरी चुत के अंदरूनी छेद पर फेरा और चुत की चमड़ी को प्यार से उमेठ दिया.
मेरी सिसकारी निकल गई.

उसने अपनी उंगलियों को तेल की कुछ बूंदें टपका कर चिकना किया और उन्हें मेरी चुत पर फेरते हुए लंड के सुपारे की तरह उंगली की नोक को चुत में हल्के से अन्दर करके बाहर खींचने लगा.

इससे मेरी चुत रो पड़ी और उसने रस छोड़ना चालू कर दिया.
चुत चिकनी हुई तो उसने अपनी एक उंगली का आगे का हिस्सा मेरी मखमली चुत के अन्दर सरका दिया, जिसकी वजह से मेरे मुँह से ‘आह तरुण’ निकल गया.

तरुण ने तब भी अपना काम जारी रखा.
मैं खुद को संभालती हुई अपनी कमर को हिलाने लगी और चुत के अन्दर उंगली से हो रही चुदाई जैसी मालिश का मजा लेने लगी.

तरुण ने काफ़ी देर तक मेरी चुत की सेवा की, जिसके बाद मैं झड़ गई.
उसने मेरी पूरी बॉडी की मसाज और चुत की चुदाई जैसी मालिश बहुत अच्छे से की थी.

तरुण ने अपने हाथ नैपकिन से पौंछ कर कहा- मैम हो गया सारा काम, अब आप आराम से शॉवर ले लो, मैं चलता हूँ बाकी अगर कोई जरूरत हो तो आप कॉल कर देना, मैं आ जाऊंगा.
मैंने तरुण को इतनी अच्छी मसाज और वैक्स के लिए थैंक्स बोला और तरुण भी मुझे स्माइल देते हुए जाने लगा.

मैंने सोचा कि चलो एक बार शॉवर ले लेती हूँ.
मैंने वाशरूम में जाकर शॉवर लिया और वापस आकर रूम में खुद को शीशे के सामने नंगी देखने लगी.

मेरे बदन का अंग अंग चमक रहा था और मेरी चुत भी एकदम खिली हुई लग रगी थी.
साथ ही पानी की बूंदें मेरे बदन पर अलग ही निखार ला रही थीं.

मैंने अपना बदन टॉवल से पौंछा और खुद को तैयार किया.
फिर एक नई वाइट ब्रा और पैंटी पहनी. उसके ऊपर लंबी वाली शर्ट पहनी और रेडी हो गई.

दिन का टाइम हो चला था और कल मुझे निकलना था.

इतने में मोबाइल पर नोटिफिकेशन की टोन बजी तो मैंने देखा.
दीपा ने मुझे मेरी फ्लाइट की टिकट और मुंबई से चंडीगढ़ आने की टिकट मेल कर दी थी.

मैंने देखा की फ्लाइट मॉर्निंग 8 बजे की थी.
मैंने आराम करने का तय किया.

कल इंडिया जाने की बेताबी मेरे चेहरे पर अलग ही नज़र आ रही थी.

मैं अपने बेड पर आकर लेट गयी और ना जाने कब इंडिया की सोचती सोचती मैं सो गयी.

शाम को ज़ब आंख खुली तो 7 बज चुके थे.
मैं फ्रेश हुई और अपने कपड़े चेंज किए.
एक ब्लैक शर्ट लोंग शर्ट निकाल कर पहन ली.

अन्दर से मैंने खुद को नंगी ही रखा था.
घर के अन्दर ब्रा पैंटी अधिक समय तक पहनना मुझे पसंद नहीं है.

मैंने खुद को आईने में निहारा और नीचे लिविंग रूम में आ गयी.

सुबोध ने डिनर की तैयारी कर दी थी.
रात के 8:30 बज गए थे. कुछ ही देर में रोहण भी आ चुके थे.

मैंने रोहण को देख कर स्माइल दी.
हमेशा की तरह रोहण ने पास आकर पीछे से हग किया और उन्होंने कहा- अंजलि, आज तो आपके चेहरे पर अलग ही ग्लो है, क्या बात है मेरी बीवी इतनी खुश लग रही है. लगता है इंडिया जाने की तैयारी हो गयी है!
मैंने स्माइल देते हुए हां कहा.

रोहण बोले- लगता है आज वैक्स करवाई है टांगें चमक रही हैं.
मैंने कहा- हां आपके लिए ही करवाई हैं, सोचा इंडिया जाने से पहले आपको अच्छे से प्यार दे दूँ!

रोहण मेरे एक दूध को मसलते हुए बोले- अच्छा जी, पति का इतना ख्याल!
मैंने कहा- और क्या … बीवी को तो ख्याल रखना पड़ेगा ना पति की जरूरतों का!

रोहण बोले- ठीक है फिर आज मेरी बीवी जी तैयार रहना … जमकर चुदाई के लिए!

मैंने भी रोहण को छेड़ते हुए कहा- मैं तो हमेशा ही रेडी रहती हूँ अपने पति के लंड की सवारी करने के लिए … मैं खुद चाहती हूँ कि आप आज मुझे अच्छे से अपनी घोड़ी बना कर चोदो और मुझे अपने लंड पर बैठा कर जोरदार लंड के झटकों की चोट से अपने लंड के ऊपर बैठा कर उछालो … मेरी जवानी को पूरी रात भोगो … मैं आपके लौड़े की गुलाम हूँ मेरी जान!

मेरी ये सब चुदास भरी बातें सुन कर रोहण भी जोश में आ चुके थे- ठीक है बीवी जी, डिनर करने के बाद आपकी चुदाई का प्रोग्राम शुरू करते हैं.
मैंने भी रोहण की हां में हां मिलाते हुए कहा- जैसा आप कहें मेरे प्यारे पति देव!
रोहण बोले- ओके मेरी जान मैं फ्रेश होकर आता हूँ तुम डिनर लगाओ.

उसके बाद रोहण ऊपर हमारे बेडरूम में चले गए.

मैंने यहां डिनर लगाने की तैयारी की और कुछ देर बाद रोहण भी फ्रेश होकर वापस नीचे आ गए.

सुबोध ने हम दोनों के लिए डिनर लगाया और फिर हम दोनों ने साथ बैठ कर एक एक पैग लिया और उसके बाद डिनर किया.

डिनर करते करते 9:30 चुके थे.
रोहण बोले- चलो अंजलि, थोड़ा टहल लेते हैं.

मैं रोहण के साथ टहलने लगी और एक सिगरेट सुलगा कर धुआँ उड़ाने लगी.
बीच बीच में रोहण ने भी उसी सिगरेट से कश लगे और हम दोनों बातें करते रही.

ऐसे ही बातों बातों में समय बीत गया और रात के 10 बज गए.
रोहण बोले- चलो अंजलि बेडरूम में चल कर आपकी चुदाई का प्रोग्राम शुरू करते हैं, वाइफ सेक्स कहानी का नया चैप्टर लिखते हैं.

मैंने भी रोहण की बात मानते हुए कहा- ठीक है, चलो पति देव जी.

हम दोनों घर में आ गए.
मैंने रोहण से कहा- आप ऊपर जाओ, मैं आती हूँ.
रोहण ऊपर चले गए.

सुबोध किचन में काम कर रहा था.
मैंने सुबोध को बता दिया कि सुबोध कल मुझे निकलना है. सुबह की मेरी फ्लाइट है इंडिया की, तो सुबह 5 बजे मुझे एयरपोर्ट छोड़ देना. मेरे पीछे से साहब का ध्यान रखना … और हां अब डिस्टर्ब मत करना, मैं ऊपर सोने जा रही हूँ.

सुबोध ने हां में हां मिलाई और मैं ऊपर बेडरूम में आ गयी.
रोहण पहले से ही मेरी चुदाई करने के लिए रेडी बैठे हुए थे.

उन्होंने मुझे पकड़ कर अपनी छाती से लगाया और हम दोनों एक दूसरे की जीभ से खेलने लगे.

काफी देर तक एक दूसरे की लार को पीने के बाद रोहण ने 69 में मुझे प्यार किया और उसके बाद घोड़ी बनाकर मेरी चुत चुदाई चालू कर दी.

सच में उस दिन रोहण को मेरी चिकनी चुत चोदने में बड़ा मजा आ रहा था.

फिर रोहण से लगभग 12 बजे तक धुआंधार चुदने के बाद मैं एकदम से निढाल हो गई थी.
हम दोनों काफी थक चुके थे.

मैं अपने रोहण की बांहों में सोने लगी क्योंकि मुझे इंडिया जाने के लिए 4 बजे फिर से उठना था.
मैंने ठीक 4 बजे घड़ी का अलार्म लगाया था तो समय पर अलार्म बजने लगा.

मैं रोहण की बांहों में नंगी ही लेटी हुई थी, रात की चुदाई से मै अभी थकी हुई थी क्योंकि एक बजे सोने के बाद 3 घंटे की नींद से थकान नहीं उतरने वाली थी.
मैंने सोचा उठ जाती हूँ वरना फ्लाइट मिस हो जाएगी.

मैं रोहण की बांहों में से खुद को निकाल कर वाशरूम में गयी और फ्रेश होकर शॉवर लिया और नंगी ही रूम में आ गयी.
उधर मैंने ब्लैक ब्रा पैंटी का सैट पहना और साथ ही और ऊपर से ब्लैक शर्ट और जीन्स पहन ली.

उसके बाद लॉंग शूज पहन कर बाल बनाए और रेडी हो गई.
मैंने जानबूझ कर अपनी शर्ट के ऊपर के 2 बटन खोल रखे थे, जिसमें से मेरा पूरा क्लीवेज दिख रहा था.

मैंने अपना मेकअप किया और जाने के लिए रेडी हो गयी.
सुबह के 5 बज चुके थे.

मैंने प्यार से बालों में हाथ फेरते हुए रोहण को उठाया- रोहण उठिए, मैं जा रही हूँ!
रोहण नींद में से उठे.

मैंने रोहण को हग किया और उनके माथे पर किस की.
रोहण ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और बिस्तर पर खींच लिया. उन्होंने मेरे ऊपर ब्लैंकेट डाल लिया.

मैं अपने नंगे पति के ऊपर उनकी बांहों में थीं.
मैंने रोहण को रोकते हुए बोला- रोहण, छोड़िये, जाने दीजिए न … मैं लेट हो रही हूँ!

रोहण बोले- बीवी जी, चली जाना यार … एक बार पति को हग तो कर दो!
मैं रोहण को बांहों में थी और हग कर रही थी.

रोहण ने मुझे अपनी बांहों में दबाया हुआ था.
मैंने रोहण की छाती पर किस की और फिर हम दोनों ने होंठों को एक दूसरे के होंठों से मिला कर किस की.

रोहण का लंड सुबह सुबह खड़ा हुआ था.
मैंने ब्लैंकेट के अन्दर ही अपने पति के लंड को हाथ में ले लिया.
रोहण और मैंने एक दूसरे को आई लव यू बोला.

मैं ब्लैंकेट में से बाहर आ गयी और रोहण को फिर से माथे पर एक किस दी.
साथ ही रोहण के लंड को मुँह में लेकर चूसा और उनके लंड को किस की.

रोहण और मैंने एक दूसरे को स्माइल दी.

रोहण बोले- अंजलि ध्यान से जाना!
मैंने कहा- आप फ़िक्र मत करो मेरी जान … मैं अपना ध्यान रखूंगी.

रोहण बोले- मैं चलता हूँ तुम्हें छोड़ने!
मैंने कहा- नहीं आप आराम करो, आप वैसे ही थके हुए हो. मैं सुबोध के साथ चली जाउंगी.
रोहण बोले- ठीक है.

फिर मैं भी अपना हैंड बैग और पैकिंग बैग लेकर नीचे लिविंग एरिया में आ गयी.

सुबोध भी कार के साथ तैयार ही खड़ा हुआ था.
हम दोनों कार में बैठे और सुबोध ने मुझे 6 बजे तक एयरपोर्ट पहुंचा दिया.

मैंने सुबोध को समझा दिया था कि रोहण का और घर का ध्यान रखे. मैं जल्दी आ जाउंगी.
फिर मैं अपना लगेज लेकर एयरपोर्ट में आ गयी और धीरे धीरे मैंने सारी फॉर्मेलिटी पूरी की, चेक इन किया.

मेरी फ्लाइट ठीक टाइम से थी. उसे 8:10 तक उड़ना था.
मैंने टाइम से अपनी फ्लाइट ली और लगभग 2:30 घंटे में फ्लाइट ने मुझे इंडिया लैंड करवा दिया.

दोस्तो, मैं हर बात को बड़ी नफासत से लिखती हूँ तो हो सकता है कि आपको सेक्स कम पढ़ने मिलता हो.
लेकिन मैं जो भी लिखती हूँ, एकदम सच लिखती हूँ.

आपको मेरी वाइफ सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
mrsanjalisharma1986@gmail.com

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