सेमी न्यूड लेडी इन द ट्रेन स्टोरी में मैं अपनी सहेली के दोस्त के साथ फर्स्ट क्लास के केबिन में अकेली उसके साथ सेक्स करने की इच्छा के चलते कम कपड़ों में थी बिना ब्रा पैंटी के.
दोस्तो, मैं आपकी चुलबुली अंजलि शर्मा एक बार पुनः आपकी वासना की गर्मी को बढ़ाने के लिए हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
ट्रेन में अनजान आदमी से कामुक मुलाक़ात
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं सुमेश के साथ एसी फर्स्ट के केबिन में थी और अपने कपड़े बदल कर सिर्फ एक फ्राक जैसी जांघों तक आने वाली नाइटी को पहन कर उनके सामने मुस्कुरा रही थी. मैंने उस वक्त ब्रा पैंटी कुछ नहीं नहीं पहनी थी.
अब आगे सेमी न्यूड लेडी इन द ट्रेन स्टोरी:
हम दोनों अपनी अपनी सीट पर बैठ गए.
मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी आप भी कपड़े बदल लो, वैसे भी सोने का टाइम होने वाला है.
इस पर सुमेश जी बोले- अंजलि जी, मुझे ऐसे नींद नहीं आती है, मुझे सिर्फ अंडरवियर में सोना पसंद है इसलिए मैंने अभी अपने कपड़े चेंज नहीं किए हैं. हम लोग आज एक साथ सफर कर रहे हैं, तो ऐसे ठीक नहीं लगता कि मैं आपके साथ ऐसे अंडरवियर में साथ रहूँ.
सुमेश जी उस वक़्त मुझसे पूरी तरह से खुल कर बात कर रहे थे, तो मैंने सोचा कि मुझे भी इनसे खुल कर बात करनी चाहिए.
मैंने सुमेश जी को छेड़ते हुए कहा- सुमेश जी, वैसे मुझे खुद कपड़े पहन कर सोने में नींद नहीं आती है. मैं खुद बिना कपड़ों के नंगी सोना पसंद करती हूँ.
मेरी बात में नंगी शब्द सुन कर सुमेश जी के चेहरे पर स्माइल आयी और वे बोले- ये तो अच्छी आदत है अंजलि जी!
मैंने सुमेश जी से कहा- अगर आप चाहो तो आप भी अपने कपड़े उतार कर अंडरवियर में सो सकते हो.
सुमेश जी बोले- अंजलि जी आपको दिक्कत होगी, आप ऐसे कम्फर्टेबल फील नहीं करोगी.
मैंने सुमेश जी से कहा- अरे उसमें क्या दिक्कत आनी है, आप अलग सीट पर सोने वाले हो और मैं अलग सीट पर सोऊंगी … और हम लोग केबिन की लाइट भी बंद कर देंगे. मुझे कोई दिक्कत नहीं होने वाली. आप चाहो तो आप अंडरवियर में सो सकते हो.
सुमेश जी मेरी बात से खुश हो गए और मैं भी समझ गयी कि वे भी ऐसा ही चाहते हैं.
फिर सुमेश जी बोल पड़े- अंजलि, आप काफ़ी मॉडर्न ज़माने की औरत हो!
मैंने सुमेश जी से पूछा- आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं?
सुमेश जी बोले- आपका रहन सहन पहनावा काफ़ी मॉडर्न है.
मैं तुरंत समझ गयी थी कि सुमेश जी मेरी मॉडर्न पैंटी की बात कर रहे हैं.
मैंने भी मजे लेते हुए उनकी बात को कुरेदना चाहा और पूछा- ऐसा क्या देख लिया सुमेश जी आपने मेरे पहनावे में?
सुमेश जी मुस्कुराते हुए बोले- वह आपकी पिंक कलर की पैंटी काफ़ी खूबसूरत लग रही थी.
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा- बस कीजिये आप भी मेरी टांग खिंचाई कर रहे हैं.
सुमेश जी बोले- सच में यार … आप बहुत मॉडर्न लेडी हो.
ऐसे ही हमारी बात चलती रही और रात के 10:30 बज गए.
मैंने सुमेश जी से कहा- अब हमें सोना चाहिए!
नींद तो मुझे नहीं आ रही थी क्योंकि मेरे सामने एक हट्टा-कट्टा जवान मर्द बैठा हुआ था. मेरी जैसी मर्दखोर औरत की चुत में पानी आ रहा था.
सुमेश जी बोले- तो अंजलि जी, मैं कपड़े उतार दूँ, अगर आपको कोई दिक्कत ना हो!
मैंने भी हां बोलते हुए अपनी रज़ामंदी दे दी.
बस फिर क्या था, सुमेश जी ने अपनी ब्लैक शर्ट के एक एक बटन खोले और शर्ट उतार दी.
फिर उन्होंने अपनी बनियान भी उतार दी और ऊपर से नग्न हो गए.
मैं उनकी चौड़ी छाती को वासना से देख रही थी.
फिर उन्होंने अपनी मोटी जांघों से अपनी जीन्स को भी उतार दिया और अब वे मेरे सामने सिर्फ एक वाइट कलर की वी शेप वाली फ्रेंची अंडरवियर में खड़े हुए थे.
सुमेश जी की लंबाई काफ़ी अच्छी थी और उनका बदन भी काफ़ी चौड़ा था.
उनकी छाती पर एक भी बाल नहीं था.
सुमेश जी की छाती एकदम चमक रही थी.
मैं सुमेश जी को ही देख रही थी.
मेरी नज़र उनके अंडरवियर पर पड़ी हालांकि उनका लंड अभी खड़ा नहीं था … पर फिर भी अंडरवियर के अन्दर से वह मुझे काफ़ी मोटा लग रहा था.
लौड़े का आकार भांप कर मेरी चुत में भी चुदास जगने लगी थी.
मैंने खुद को संभाला.
सुमेश ने अपने बैग से क्रीम निकाली और बोले- अंजलि, ये क्रीम मेरी पीठ पर लगा दोगी बाकी सीने पर मैं खुद लगा लूंगा.
मैं खुद भी चाहती थी कि सुमेश जी की बॉडी को हाथ लगाऊं .. तो ये मुझे एक अच्छा मौका मिल गया.
मैंने झट से हां करते हुए सुमेश जी से क्रीम की डिब्बी को ले लिया और उन्हें देखा.
वे सीट पर एक तरफ मुँह करके बैठ गए.
मैं उठ कर सुमेश जी के पीछे आ गयी और घुटनों के बल बैठ कर सुमेश जी की पीठ पर क्रीम को मलने लगी और हाथ से उनकी पीठ की मालिश करने लगी.
ऐसा करने से सुमेश जी और मुझे बहुत मजा आ रहा था.
मैं अपने कोमल कोमल हाथों से सुमेश जी के चौड़े कंधों पर मालिश कर रही थी और साथ ही पूरी पीठ पर भी मालिश कर रही थी.
मेरे कोमल हाथों का स्पर्श पाने से सुमेश जी का लंड उनके अंडरवियर में खड़ा होने लगा था, जो कि मुझे साफ दिखाई दे रहा था.
लंड का खड़ा होना भी लाजिमी था … एक हसीन सेमी न्यूड लेडी इन द ट्रेन एक गैर मर्द की मालिश जो कर रही थी.
धीरे धीरे मदमस्त मसाज से देखते ही देखते सुमेश जी का लंड पूरा खड़ा हो चुका था और ये सब देख कर मेरे मुँह में पानी आ रहा था.
मैंने सुमेश जी की पूरी पीठ की मालिश कर दी और मैं सामने की ओर आ गयी.
सुमेश सीट पर बैठे थे और मैं उनके सामने खड़ी हुई थी.
मैंने सुमेश जी से पूछा- सुमेश जी, चेस्ट पर भी लगानी है?
सुमेश जी बोले- हां अगर आप लगा दो तो मुझे कोई दिक्क़त नहीं है.
मैंने उनकी चेस्ट पर क्रीम लगाई और मालिश करने लगी.
हम दोनों एक दूसरे के सामने खड़े थे.
ऐसे खड़े होकर मालिश करने में मुझे काफ़ी दिक्कत हो रही थी.
सुमेश ने मुझसे पूछे बिना मेरी कमर पर हाथ रखा और मुझे पकड़ कर अपनी गोद में अपने खड़े लंड के ऊपर बैठा लिया.
उनकी गोद में बैठते ही मेरे चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी.
मैं हौले से शर्मा रही थी, पर अन्दर से मैं पूरी तरह से कामुक होने लगी थी.
मैं बिना पैंटी के नंगी थी और मेरी फ्राक जैसी नाइटी पहले ही जांघों तक ही आ रही थी.
अब सुमेश जी के लंड का स्पर्श मेरी नंगी गांड को साफ साफ हो रहा था और मुझे मर्द के फूले हुए लंड का अहसास होने लगा था.
नीचे से मेरी टांगों के बीच में सुमेश जी का लंड फुदक रहा था, जिसे मैं अच्छे से महसूस कर पा रही थी … साथ ही मैं उनकी छाती की मालिश भी कर रही थी.
सुमेश जी और मेरी आंखें एक दूसरे से टकराईं और हम दोनों ही शर्म से पानी पानी हुए जा रहे थे.
वे बोले- अंजलि जी, आप बहुत खूबसूरत हो, आपकी बॉडी बहुत कमाल है.
मैं मुस्कुराती रही, पर कोई जवाब नहीं दिया.
सुमेश ने मेरी कमर पर अपने दोनों हाथों को रखा था और मेरी नजरों से नजरें मिलाते हुए उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया और मेरे होंठों को चूमने लगे.
सच बताऊं तो थोड़ी देर के लिए मैं खुद भी सुमेश जी की किस में मदहोश हो गयी.
फिर खुद को संभालते हुए मैंने खुद को रोका.
मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी ये गलत है!
मैं उनकी गोद से उठने लगी.
सुमेश जी ने मुझे रोका और बोले- एक बार मेरी बात तो सुनो!
मैं उनकी बात सुनने के लिए उनकी गोद में बैठी रह गयी.
सुमेश जी ने मेरी ठोड़ी पर हाथ रख कर मेरे चेहरे को ऊपर उठाया और मेरी आंखों में आंखें डाल कर मुझे देखने लगे.
मुझे बहुत शर्म आ रही थी.
सुमेश जी बोले- अंजलि, आप बहुत खूबसूरत हो और आपके जैसी बीवी पाना सच में नसीब की बात है. सही बताऊं तो आपको ऐसे अपने साथ देख कर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ … बस जी कर रहा है मैं आपको आज रात बहुत सारा प्यार करूं … कहीं ना कहीं आप भी एक भरे हुए बदन की जवान औरत हो … हां मैं मानता हूँ आपकी लाइफ बहुत अच्छी चली रही होगी और आप अपने पति से खुश भी होंगी, पर आप मुझे एक मौका दे कर देखो. मैं आपको खुश कर दूंगा. मुझे भी पता है आपका भी मन है अब मुझसे चुदने का … पर आप अपनी मर्यादा की वजह से खुद को रोक कर बैठी हैं, बस एक बार अपनी हद पार करके तो देखो, कसम से आप आज की रात कभी नहीं भूलोगी.
सुमेश जी अपनी मीठी मीठी बातों से मुझे अपनी और उकसा रहे थे और साथ ही मेरी जांघों को अपने हाथों से मसलते हुए मुझे और मेरी चुत को गर्म कर रहे थे.
सच बात तो यही थी कि मैं भी सुमेश जी से चुदने के लिए बेरकरार थी, पर मैं चाहती थी सुमेश जी थोड़ी और कोशिश करें और मुझे मनाएं.
मैंने सुमेश जी को जवाब देते हुए कहा- सुमेश जी ऐसी कोई बात नहीं है, मैं अपनी जिंदगी से एकदम खुश हूँ.
सुमेश जी एकदम से बोल पड़े- अंजलि, अगर आपके मन में मुझसे चुदाई करवाने की इच्छा नहीं होती, तो इस वक़्त आप एक गैर मर्द के लंड के ऊपर नहीं बैठी होतीं … क्योंकि मेरा लंड अंडरवियर में पूरी तरह से खड़ा हो चुका है और आपको नीचे चुभ भी रहा है. इस अहसास से आप भली-भांति वाकिफ भी हो. आपको तो पता ही था कि आप अन्दर से पूरी नंगी हो … और मुझे भी पता हो गया था कि नाइटी के अन्दर आप पूरी तरह से नंगी हो. आपने ब्रा और पैंटी दोनों उतार रखी थीं. इस वक्त आप अपनी नंगी पुसी लेकर एक मर्द की गोद में बैठी हो, यह सब जानते हुए भी आप पूरी बेशर्मी के साथ एक अध नंगे गैर मर्द की गोद में बैठी हो तो इस बात से सब कुछ साफ पता चलता है कि आपकी खुद की क्या इच्छा है?
सुमेश जी की ये सारी बात सुन कर मैं पूरी तरह से पानी पानी हो चुकी थी और मेरे दोनों गाल शर्म की वजह से एकदम लाल हो चुके थे.
मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी और साथ ही मैं अपनी आंखें सुमेश जी से चुरा रही थी.
ये सब बात सुन कर मेरे होंठों पर एकदम चुप्पी छाई हुई थी क्योंकि मेरे मन की सारी बात सुमेश जी समझ चुके थे.
सुमेश जी बोले- बस एक बार आप सब भूल कर आज की रात को हसीन बनाओ, देखना आप कभी अपनी जिंदगी में आज रात की इस चुदाई नहीं भूलोगी!
मैंने अपनी आंखें हिम्मत करके सुमेश जी से मिलाईं और उन्हें एक स्माइल दी.
मेरी इस हरकत से सुमेश जी भी समझ गए कि मैंने उन्हें हरी झंडी दिखा दी है.
मैं चुदाई करवाने के लिए ही सुमेश जी की गोद में बैठी हुई थी तो उस स्माइल के बाद मैं सुमेश जी के सीने से चिपक गयी.
सुमेश जी ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और साथ ही उन्होंने मेरी पीठ को और बालों को सहलाना शुरू कर दिया था.
अब मैं समझ चुकी थी आज रात मेरी जमकर चुदाई होने वाली है.
सच बताऊं तो मैं भी एक नये लंड से चुदने के लिए उत्साहित थी.
हम दोनों के बीच में एक टाइट हग हुआ और उसके बाद हम दोनों अलग हो गए.
मैं सुमेश की बांहों में उनकी गोद में बैठी हुई थी और हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे.
हम दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी.
सुमेश जी ने कहा- अंजलि, कर दूँ न अब आपकी चुदाई?
मैंने भी मुस्कुराते हुए कहा- हां कर दीजिए … अब कोई दिक्कत नहीं है.
बस फिर क्या था सुमेश जी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और हम दोनों की मदहोशी भरी किस स्टार्ट हो गयी.
मैं भी सुमेश जी के अन्दर पूरी तरह से डूब कर किस का मजा ले रही थी और सुमेश जी भी मेरे होंठों से रस चूस रहे थे.
उनके दोनों हाथ मेरे शरीर को मसलने में लगे हुए थे, जिसकी वजह से मेरा शरीर और भी ज्यादा चुदास से भरता जा रहा था.
मैं अब चुदाई करवाने के लिए पागल हो रही थी.
सुमेश जी टांगें लटका कर सीट पर बैठे हुए थे और मैं अपने घुटने मोड़ कर उनकी गोद में बैठी हुई थी.
सुमेश ने मेरी नाईटी में हाथ डाला और मेरी नाईटी के बटन को एक एक करके खोलना शुरू कर दिया.
उन्होंने नाईटी को पूरी तरह से खोल दिया और मेरे हाथों को ऊपर उठाते हुए नाईटी को मेरे कोमल चिकने बदन से उतार कर नीचे गिरा दिया.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में पूरी तरह नंगी कर लिया.
मैं एक गैर मर्द की बांहों में पूरी तरह से नंगी और चुदने के लिए पूरी तरह से बेकरार थी.
मेरा मन पूरी तरह से राज़ी हो चुका था.
दोस्तो, मेरे जैसी मर्दखोर औरत को आज एक नया लंड मिलने वाला था और वह भी चलती ट्रेन में चुदाई का अनुभव मुझे अति उत्तेजित कर रहा था.
अगले भाग में मैं अपनी चुदाई की कहानी को विस्तार से लिख कर आपको गर्म करूंगी.
सेमी न्यूड लेडी इन द ट्रेन स्टोरी में अभी तक आपको कितना मजा आया, प्लीज मेरी सेक्स कहानी अपर अपनी ईमेल जरूर भेजें.
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