लंडखोर औरत की चूत की दास्तान-ए-चुदाई- 3

Views: 221 Category: Koi Mil Gaya By mrsanjalisharma1986 Published: April 24, 2026 📖 10 min read
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हॉट भाभी इन ट्रेन स्टोरी में मैं पहली श्रेणी के वातानुकूलित केबिन में थी, मेरे साथ मेरी सहेली के मित्र भी इसी केबिन में थे. उनसे मिल कर मैं गर्म होने लगी थी.

फ्रेंड्स, मैं अंजलि शर्मा एक बार फिर से आपकी टांगों के बीच सनसनी दौड़ाने हाजिर हूँ.

कहानी के दूसरे भाग
फुल बॉडी मसाज़ के बाद पति से फुल चुदाई
में मैं आपके लिए अपनी दुबई से भारत की यात्रा से पहले की तैयारी बता रही थी. यात्रा के पहले मैंने अपने बेटे रोहण जो कि अब मेरे पति बन चुके हैं, उसने धुआंधार चुदाई का मजा लिया और सुबह की फ्लाईट से इंडिया आने लगी.

अब आगे हॉट भाभी इन ट्रेन स्टोरी:

इंडिया आते ही मेरी ख़ुशी अलग ही थी.

लगभग 11:30 बजे मैं एयरपोर्ट से बाहर आ गयी थी.
उस वक्त मैंने सोचा कि वैसे भी ट्रेन अगले दिन सुबह 10 बजे की है, जब तक किसी होटल में कमरा लेकर आराम कर लेती हूँ.

मैंने एयरपोर्ट से टैक्सी की और ड्राइवर को एक अच्छे होटल तक ले जाने के लिए कहा.

ड्राइवर ने मुझे थोड़ी ही देर में होटल पर उतार दिया.
उस होटल में मुझे आराम करने के लिए बड़ी आसानी से कमरा मिल गया.
दिन के 12:30 बज चुके थे.

होटल स्टाफ मेरे लगेज के साथ मुझे रूम तक ले आया.

मैं रूम में अन्दर आ गयी.
रूम काफ़ी सुन्दर था … साथ ही काफ़ी बड़ा भी था.

मैंने होटल स्टाफ को मेरे लिए लंच का आर्डर दे दिया और कुछ देर बाद मेरे लिए वह ब्रेकफास्ट लेकर आ गया.
मैंने उन्हें बोल दिया था कि प्लीज मुझे कुछ देर डिस्टर्ब ना करें.

मेरी बात मानते हुए वेटर ने मेरे रूम के दरवाजे पर डू नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया.
मैंने उस होटल स्टाफ को कुछ टिप दी और वह भी मुझे अपनी स्माइल के थैंक्स बोल कर चला गया.

मैंने तसल्ली से लंच किया और दीपा और रोहण दोनों को कॉल करके इन्फॉर्म कर दिया कि मैं इंडिया आ गयी हूँ.

अब मेरे पास कोई काम नहीं था.

मैंने आराम करने का सोचा और रूम का गेट अन्दर से लॉक कर लिया.
कमरा बंद करके मैंने अपनी शर्ट के बटन खोले और उसको उतार कर सोफे पर फेंक दिया.

फिर अपनी जीन्स और ब्रा पैंटी को भी उतार सोफे पर ही फेंक दिया.
मैं पूरी नंगी होकर ब्लैंकेट के अन्दर आ गयी.

आप लोगों को बता दूँ कि मुझे नंगी होकर सोने की ही आदत है.
मैं आराम से सो गयी.

ज़ब मेरी आंख खुली तो शाम के 4 बजने वाले थे और मुझे अगली सुबह चंडीगढ़ के लिए ट्रेन लेनी थी.

मैंने वाशरूम में जाकर शॉवर लिया और नंगी ही रूम में आ गयी.

उसके बाद मैंने अपने लिए एक कॉफ़ी भी आर्डर कर दी और रेडी होने लगी.
मैंने पहनने के लिए बैग से पिंक ब्रा पैंटी का सैट निकाला और साथ ही पिंक शर्ट और वाइट जीन्स निकाली.

एक एक कर के अपने कपड़े पहन लिए और शर्ट के ऊपर वाले दो बटन खुले रखे, जिसमें से मेरे दोनों दूध लगभग आधे बाहर झाँक रहे थे.
खुद को मिरर में देखते हुए मैंने अपने आपको रेडी किया … बाल बनाये और हल्का सा मेकअप किया.

तब तक कमरे में दस्तक हुई तो देखा कि कॉफ़ी आ चुकी थी.
कॉफ़ी का आनन्द लेने के बाद मैंने अपना समय होटल के कमरे में ही बिताने का तय किया.

अगली सुबह अपना लगेज लेकर रेलवे स्टेशन के लिए निकल गयी.

नीचे ही मुझे टैक्सी भी आराम से मिल गयी और ड्राइवर ने मुझे 10 बजे तक स्टेशन तक पहुंचा दिया.
मैं स्टेशन के अन्दर आ गयी और देखा तो ट्रेन पहले ही प्लेटफार्म पर लग चुकी थी.

मुझे मेरी सीट और कोच पहले से मालूम था.
मैं अपने कोच में आ गयी और अपनी सीट पर भी आ गयी.

दीपा ने हमारे लिए फर्स्ट क्लास एसी की टिकट बुक की हुई थी.
मैं अपने केबिन में आ गयी, जिसमें 4 सीट थीं.

एक एक मेरी और रोहण की और एक दीपा के दोस्त की … और एक शायद किसी और की थी.
मैं अपनी सीट पर आ गयी और अपना सामान बैग वगैरह सैट करके विंडो वाली सीट पर बैठ गयी.

कुछ मिनट बाद ही केबिन में एक आदमी की एंट्री हुई.
उसने मुझे देखा और मैंने उसे.

उसने मुझे देखते ही कहा- आप दीपा की फ़्रेंड हो?
मैंने कहा- हां जी!

उसने मुझे अपने बारे में बताया- मैं सुमेश हूँ दीपा का फ़्रेंड … मैं ही आपके साथ चंडीगढ़ जाने वाला हूँ.
हम दोनों में हाय हैलो हुई.

मैंने उसने अपने बारे में बताया कि मैं अंजलि शर्मा दीपा की फ़्रेंड हूँ.
सुमेश ने अपना सामान सैट किया और वह बैठ गया.

मैंने सुमेश से पानी के लिए पूछा और उसके हां कहने पर मैंने उसे पानी की बोतल दे दी.
सुमेश मेरे सामने बैठे हुए थे.

सही बताऊं तो सुमेश देखने में काफ़ी हैंडसम लग रहे थे.
पहली ही नज़र में ही सुमेश को देख कर मेरा दिल सुमेश पर आ गया था.
वे 6 फ़ीट से ज्यादा हाइट वाले मर्द थे. खासी लंबाई के साथ ही उनका चौड़ा सीना था और वे एकदम गोरे बदन के कड़ियल मर्द थे.

सुमेश की मादक मुस्कान मेरा मन मोह रही थी.
मैं पहली नज़र में ही सुमेश पर फ़िदा हो चुकी थी.

ब्लैक शर्ट और ब्लू जीन्स में वे सच में कातिल लग रहे थे.
कुछ देर बाद ट्रेन चंडीगढ़ के लिए चल दी और हम दोनों में बात होने लगी.

सुमेश बोले- अंजलि जी, आपके हस्बैंड भी आने वाले थे, वे नहीं आए?
मैंने सुमेश को बताया कि उन्हें ऑफिस का काम था इसलिए वे नहीं आ पाए.

ये बात सुन कर सुमेश के चेहरे पर स्माइल आयी.
मैं मर्दखोर औरत हूँ तो ऐसी स्माइल को भाँप जाती हूँ.

मर्द अकेली औरत को पाकर उसको चोदने की ख्वाहिश करने लगता है.
हमारी काफ़ी सारी बातें हुईं.

सुमेश ने पूछा- अंजलि जी, आप क्या काम करती हो दुबई में?
मैंने उन्हें बताया कि मैं लेडीज़ अंडरगारमेंट्स का बिज़नेस चला रही हूँ. हम दोनों डिज़ाइनर ब्रा पैंटी, बिकनी और नाईट वियर बनाते हैं.

सुमेश खुश हो गए और हमारे काम की तारीफ करने लगे.
सुमेश बोले- अंजलि जी आप काफ़ी समझदार लगती हो, इतना बड़ा बिज़नेस चला रही हो.

ऐसे ही बातों बातों में चाय नाश्ता आ गया.
हम दोनों ने चाय नाश्ता लिया.

मैंने गौर किया कि सुमेश जी की नज़र मेरे बूब्स पर ही थी, जो कि मेरी शर्ट के बटन खुले होने की वजह से उनके लंड को कड़क करने वाला सीन दिखा रहा था.
मेरे बूब्स का क्लीवेज काफ़ी हद तक दिख रहा था और साथ ही शर्ट के अन्दर मेरी ब्रा भी काफ़ी हद तक दिख रही थी.

मेरे बूब्स का साइज 36 इंच है, पर मैंने 34 साइज की ब्रा पहनी हुई थी, जिसके कारण मेरी चूचियां एकदम तनी हुई लग रही थीं.
सुमेश जी की नज़र मेरे बूब्स पर ही टिकी थी और मैं भी उन्हें देख रही थी.

ये चीज उन्हें पता चल गयी और वे एकदम से आंख चुराते हुए हड़बड़ा गए.
सुमेश जी बोले- अंजलि जी, आपने अपने आपको को काफ़ी हद तक मेन्टेन किया हुआ है, क्या राज़ है इस हुस्न का?

मैंने भी स्माइल देते हुए बताया- सुमेश जी कुछ खास नहीं, नियमित वर्कआउट डाइट और स्विमिंग करना … बस यही राज़ है जो मैं इतनी मेन्टेन हूँ बाकी पति का प्यार मिलता है तो और चार चाँद लग गए है खूबसूरती में!
सुमेश जी बोले- बिल्कुल सही बात है, पति का प्यार औरत के लिए बहुत जरूरी होता है.

मैं समझ गयी थी कि वे कौन से प्यार की बात कर रहे हैं.
ऐसे ही बातों बातों में समय बीत गया और शाम के 8 बज चुके थे.

हमारा खाना भी आ चुका था.
हम दोनों ने खाना खाया और अब लगभग 8:30 बजे का समय हो गया था.

मैंने सोचा कि मैं चेंज कर लेती हूँ.
मैंने अपने बैग से एक सिल्वर कलर की नाइट गाउन निकाला और वाशरूम की ओर जाने लगी.

मैंने सुमेश जी से कहा- मैं कपड़े बदल कर आती हूँ सुमेश जी.

इतने में सुमेश जी बोले- अंजलि आप यहीं कपड़े बदल लो … मैं बाहर चला जाता हूँ.
मैंने कहा- हां ये ठीक है, मुझे बस 5 मिनट लगेंगे.

सुमेश जी बोले- कोई नहीं, आप आराम से चेंज कर लो .. ज़ब हो जाए तो मुझे आवाज लगा देना.
सुमेश जी केबिन से बाहर चले गए और मैंने अपने केबिन का गेट लगा दिया … साथ ही पर्दा भी लगा दिया ताकि बाहर से कुछ दिखाई ना दे.

सुमेश जी केबिन के बाहर ही खड़े हुए थे.
मैंने जल्दी से अपनी शर्ट के बटन खोल कर शर्ट उतार दी और साथ ही अपनी पैंट में हाथ डाल कर पैंट को भी उतार दिया.

उसके बाद मैंने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी और मैं केबिन के अन्दर फिलहाल पूरी नंगी थी.
इस वक़्त मेरे सारे कपड़े सीट पर पड़े हुए थे.

मैंने अपने गाउन के बटन खोल कर गाउन पहन लिया जो कि फ्राक नुमा था और मेरी जांघों तक ही आ रहा था.
अन्दर से मैं पूरी तरह नंगी थी.

मैंने अपनी बॉडी पर जल्दी से नाईट लोशन लगाया और अपने कपड़े उठाने लगी.
ब्रा पैंटी के साथ मेरे सारे कपड़े मेरे हाथ में ही थे.

मैंने केबिन का गेट खोल दिया और सुमेश जी को अन्दर आने के लिए बोल दिया.

सुमेश जी केबिन के अन्दर आ गए.
तभी एकदम से ट्रेन में झटका लगा और उसी वजह से मेरे हाथ से मेरे कपड़े जमीन पर गिर गए.
झटका एकदम से लगा था तो मैं और सुमेश जी एकदम से एक दूसरे से टकरा गए.

मेरे बूब्स सुमेश जी की छाती से जाकर टच हुए तो मैं हड़बड़ा गई.
हम दोनों ने ही एक दूसरे को सॉरी बोला.

सुमेश जी जमीन पर झुक कर मेरे कपड़े उठा कर मुझे देने लगे.
सुमेश जी ने मेरे सारे कपड़े मुझे पकड़ा दिए, बस मेरी छोटी सी गुलाबी रंग की पैंटी नीचे पड़ी रह गई थी … जिसे सुमेश जी ने अपने हाथ से उठाई और उसे देखने लगे कि यह किस तरह की पैंटी है.

जैसा कि मैं पहले भी बता चुकी हूँ कि मैं थोंग पैंटी पहनती हूँ.
सुमेश जी के हाथ में मेरी पिंक रंग की डोरीनुमा थोंग पैंटी थी, जिसमें मेरी चुत को छुपाने के लिए छोटा सा त्रिभुजाकार कपड़ा था बाकी सब डोरी थी.

सुमेश जी मेरी पैंटी को देख रहे थे और मैं शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी क्योंकि एक गैर मर्द के हाथ में मेरी पहनी हुई पैंटी थी.

मुझे शर्म आ रही थी, सुमेश जी के चेहरे पर भी एक शर्म भरी मुस्कान थी.
सुमेश जी खड़े हुए और उन्होंने मुझे मेरी पैंटी भी पकड़ा दी.
हम दोनों की आंखें एक दूसरे से मिलीं तो मुझे उस पल बड़ी शर्मिंदगी महसूस हो रही थी.

सुमेश जी बोले- अंजलि जी, आप तो सच में काफी अच्छी डिजाइनर हैं, आपकी पैंटी काफी खूबसूरत लग रही है.
मेरे चेहरे पर मुस्कान आ गई और मैंने उन्हें थैंक्स बोला.

इस हरकत के होने से सुमेश जी को ये भी पता चल गया था कि मैंने गाउन के अन्दर कुछ नहीं पहना है … अन्दर से मैं पूरी तरह नंगी हूँ.

फिर मैंने अपने कपड़े अपने बैग में रख दिए.

उस वक़्त हम दोनों के बीच में एकदम शांति छा चुकी थी.

दोस्तो, ट्रेन के इस कूपे में किस तरह से मैंने सुमेश के साथ चुत चुदवाई, उस सेक्स कहानी को मैं अगले भाग में लिखूँगी.
इस हॉट भाभी इन ट्रेन स्टोरी पर आपके विचारों का स्वागत है.
mrsanjalisharma1986@gmail.com

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