लंडखोर औरत की चूत की दास्तान-ए-चुदाई- 6

Views: 138 Category: Hindi Sex Story By mrsanjalisharma1986 Published: April 26, 2026

Xxx चुदाई इन द ट्रेन पूरी रात ही चली मेरी. मुझे नया लंड मिला था और लंड शानदार चुदाई करे तो लड़की की चूत संतुष्ट हो जाती है, मेरी भी हुई.

दोस्तो, मैं आपकी अंजलि एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
ट्रेन में चुद गयी मैं पराये लंड से
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं चलती ट्रेन में अपने साथ यात्रा कर रहे सुमेश के लौड़े से एक बार चुदवा चुकी थी, लेकिन मेरा मन नहीं भरा था.

अब आगे Xxx चुदाई इन द ट्रेन:

लगभग आधा घंटा अराम करने के बाद मैं अगले राउंड में फिर से चुदने के लिए तैयार थी.
सुमेश का फनफनाता हुआ लंड भी मेरी चुदाई करने के लिये तैयार था.

सुमेश ने मुझे अपने ऊपर से उठाया.
मैंने झट से सुमेश का लंड फिर से अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

कुछ 5 मिनट अच्छे से लंड चूसने के बाद सुमेश का लंड फिर से खड़ा हो चला था.
यह मेरी मदमस्त चुदाई करने के लिए फिर से फौलाद बन गया था.

सुमेश ने इस बार मुझसे घोड़ी बनने के लिए कहा और मैं भी सुमेश का कहा मानती हुई जल्दी से अपनी गांड को ऊंची करती हुई घोड़ी बन गयी.

सुमेश ने अपने लंड का टोपा एक बार फिर से मेरी चुत के छोटे से छेद पर रखा और एक दमदार जोरदार झटका मारते हुए अपने लंड को मेरी चुत के अन्दर तक उतार दिया.

एक झटके से लंड अन्दर घुसा था तो मेरे मुँह से एक जोरदार आह निकल गई ‘आह … सुमेश जी धीरे!’
सुमेश ने कुछ ना सुनते हुए एक हाथ से मेरे बालों को अपने हाथ में पकड़ लिया.

वे मेरे बालों को पकड़ कर मुझे किसी घोड़ी की तरह ही चोदने लगे थे.
अब मेरी चुत और बाल दोनों ही सुमेश जी ने अपने कब्जे में ले लिया था.

उन्होंने किसी मस्त घुड़सवार की तरह से मेरी चुत पर अपने लंड को फिर से सरपट दौड़ाते हुए मेरी जोरदार चुदाई शुरू कर दी.
मैं भी सुमेश का साथ देती हुई लंड के झटकों को झेल रही थी और आहें भरती हुई मदमस्त चुदाई का आनन्द ले रही थी.

‘आह आह मेरे सुमेश आह .. आराम से चोदो न … आह सुमेश!’
सुमेश ने भी मुझे चोदने में अपना पूरा जोर लगाया हुआ था और वे मेरी दमदार चुदाई कर रहे थे.

मैं घोड़ी बन कर अच्छे से अपनी गांड को मटकाती हुई चुदाई का मजा ले रही थी.
सुमेश का लंड अन्दर तक मुझे हिला रहा था और मेरी चुत की गहराई तक लंड का मुख टच हो रहा था.

सुमेश मेरी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारते हुए मेरी ले रहे थे.
उनके थप्पड़ मेरी गोरी चिकनी मोटी गांड पर एकदम सटासट लग रहे थे.

मेरी मोटी गांड सुमेश के थप्पड़ों से एकदम लाल हो चुकी थी.
हम दोनों चुदाई में पूरी तरह से डूब चुके थे.

हमारा कोच एसी क्लास का होने के बाद भी मेरा और सुमेश का पूरा बदन पसीने से लथपथ हो चुका था.
हम दोनों चुदाई में लगे हुए लगभग 25-30 मिनट हो गए थे.

अब मेरी चुत झड़ने के लिए तैयार थी और सुमेश जी जोरदार झटकों के साथ आहें भरती हुई मैं सुमेश जी के लंड पर ही झड़ने लगी.

मेरी चुत का सारा पानी सुमेश के लंड पर निकल गया और मेरा जोश ठंडा हो चुका था.
मैं रुकना चाहती थी, पर सुमेश जी का लंड अभी भी मेरी चुदाई करने में लगा हुआ था.

मैं चुदाई का मजा ले भी रही थी और थक भी चुकी थी.

मैंने हांफते हुए सुमेश जी से पूछा- आह सुमेश जी, और कितनी देर लगेगी आपको झड़ने में?
सुमेश बोले- अंजलि रानी … बस दो मिनट और रुको. आह बस मेरा भी होने ही वाला है!

यह कह कर सुमेश ने मेरी चुत में अपने लंड के धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. वे मुझे और ज्यादा जोरदार तरीके से चोदने लगे.

Xxx चुदाई इन द ट्रेन करके कुछ ही देर बाद सुमेश का बदन भी अकड़ने लगा और कुछ जोरदार झटके मरने के बाद वे मेरी चुत में झड़ने लगे.
सुमेश ने इस बार मेरी पूरी चुत को अपने अमृत से भर दिया था.

वे झड़ कर अपना लंड मेरी चुत कर अन्दर डाल कर मेरे ऊपर ही लेट गए.
हम दोनों थक चुके थे और साथ ही हम दोनों की सांसें फूल रही थीं, पसीने से हम दोनों भीगे हुए थे.

सुमेश और मैं एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे.

सुमेश ने कहा- अंजलि, तुम खुश हो ना मुझसे चुद कर … कोई कमी तो नहीं रही?
मैंने भी सुमेश जी के द्वारा की गयी मेरी चुदाई की सराहना करते हुए कहा- नहीं कोई कमी सुमेश जी, आपकी कसम आपने मुझे बहुत प्यार दिया है. इस तरह के प्यार के लिए मैं कब से तड़प रही थी.

वे मुस्कुराने लगे.

फिर मैंने सुमेश जी से भी पूछा- आपको कैसा लगा सुमेश जी मुझे चोद कर?
सुमेश ने कहा- अंजलि, तुम बहुत हसीन हो, कसम से मजा आ गया … आपके जैसी औरत चोदने मिलना मेरे लंड के नसीब की बात है. तुम सच में बहुत मॉडर्न ख्यालात की भरे बदन की औरत हो … हर आदमी आपको तलाशना चाहेगा!

मैं भी मुस्कुराती हुई सुमेश के बदन से लिपट कर लेट गयी.
हम दोनों की सांसें एक दूसरे की सांसों से टकरा रही थीं.

करीब एक घंटा तक यूं ही प्यार करने के बाद हम दोनों ने एक और राउंड चुदाई का मजा लिया और दोनों थकान से पूरी तरह चूर हो गए थे.
उस वक्त रात का एक बजे का समय हो गया था.

इतनी देर रात तक मेरी चुदाई का रंगारंग कार्यक्रम चला और उसके बाद हम दोनों सो गए.

सुबह ज़ब मेरी आंख खुली तो मैं सुमेश की बांहों में सिमटी हुई थी.
वे जागे हुए थे और वे मेरे बालों को सहला कर मुझे निहार रहे थे.

हम दोनों एक दूसरे को देख कर स्माइल दी और साथ ही सुमेश ने मेरे माथे को चूमते हुए गुडमॉर्निंग विश किया.

कुछ देर ऐसे लेटने के बाद हम दोनों उठ गए.
साढ़े नौ बजे तक हम लोग चंडीगढ़ पहुंचने वाले थे.

मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी, चलिए कपड़े पहन लेते हैं, वैसे भी अब उतरना है.
हम दोनों उठे.

मैंने खुद को शीशे में देखा तो मेरे पूरे बदन पर और मेरे दोनों बूब्स पर कल रात के हमारे प्यार के निशान छपे हुए थे.
पूरे बदन पर लव बाईट के निशान थे और यही हाल सुमेश का भी था.
सुमेश जी की छाती मेरी किस की वजह से लाल हुई पड़ी थी.

मैंने अपने बैग से एक ब्लैक ब्रा पैंटी का सैट निकाल लिया और साथ ही एक पीले कलर की कुर्ती व सफ़ेद रंग की लैगी निकाल ली.

मैं ब्रा पहनने लगी.
ब्रा टाइट होने की वजह से मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी, मेरी ब्रा का हुक लगा दो पीछे से!

सुमेश ने ब्रा का हुक लगाया, जो सच में काफ़ी टाइट ब्रा थी.
फिर मैंने अपनी पैंटी पहनी और साथ ही सूट पहन कर लैगी भी पहन ली.
ये लैगी मुझे काफ़ी ज्यादा चुस्त आ रही थी, जिसमें मेरी मोटी गांड और ज्यादा साफ दिखाई दे रही थी.

उसके बाद मैंने हल्का सा अपना मेकअप किया और बाल बना कर मैं पूरी तरह से रेडी हो गयी.
मैंने सूट इसलिए पहना था क्योंकि मैं अपनी फ़्रेंड के घर जा रही हूँ, तो उसकी शादी में कोई बेढब सा ना लगे … इसलिए मैंने खुद को सिंपल रखना चाहा.

सुमेश जी भी रेडी हो गए.
फिर हमने केबिन का गेट खोल दिया.

केबिन में थोड़ी देर बाद कॉफ़ी आ गयी तो हमने कॉफ़ी पी और बात करने लगे.
थोड़ी देर बाद 9 बज गए.

ट्रेन थोड़ी लेट हो गई थी, इसलिए ट्रेन ने हमें थोड़ा देरी से चंडीगढ़ उतार दिया.
हम दोनों 10:30 बजे तक चंडीगढ़ आ गए थे.

सुमेश जी पहले भी दीपा के घर जा चुके थे इसलिए उन्हें मालूम था दीपा के घर किस रास्ते से जाना है.

हम दोनों रेलवे स्टेशन से बाहर आए और सुमेश जी ने हम दोनों के लिए टैक्सी बुक की.
दीपा का घर लगभग आधा घंटा की दूरी पर था.

हम दोनों ने जब टैक्सी ली, उस समय सुबह के 11 बजने वाले थे.

कुछ ही देर में हम लोग दीपा के घर पहुंच गए.

हम दोनों को ही दीपा के घर दो दिन तक रुकना था उसके बाद दोनों की वापसी थी.

चूंकि दीपा काफ़ी अच्छी फैमिली से है, तो उसका घर किसी दुल्हन की तरह सजा हुआ था.

दीपा के मम्मी पापा सामने ही खड़े थे. मैंने उन्हें देख कर स्माइल दी.
वे लोग मुझे पहले से जानते हैं क्योंकि हमारी काफ़ी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी.

मैं भी दीपा के मम्मी पापा की तरफ बढ़ी और सुमेश जी भी मेरे साथ बढ़ गए थे.
मैंने दीपा की मम्मी पापा के पैर छुए और हमारी हाय हैलो हुई.

दीपा के मम्मी पापा बहुत खुश लग रहे थे.
सुमेश जी ने भी उन दोनों के पैर छुए.

फिर दीपा की मम्मी हम दोनों से बातें करती हुई घर के अन्दर ले आईं.
वहां कुछ रिश्तेदार पहले से ही बैठे हुए थे.

हमारी सबसे हाय हैलो हुई.

अब बारी थी दीपा से मिलने की.
दीपा रूम से निकल कर नीचे आयी और हम दोनों ने एक दूसरे को स्माइल दी.

फिर हम दोनों ने दूसरे को हग किया.
दीपा मुस्कुरा कर बोली- अंजलि, तुम आ ही गयी आखिरकार … सच में तुम नहीं जानतीं कि मुझे कितना अच्छा लगा!

मैंने कहा- अरे तूने बुलाया था तो तेरी शादी में तो आना बनता ही था.
दीपा ने सुमेश जी को भी हग किया और उनसे बात करने लगी.

फिर दीपा बोली- चल यार … वैसे भी तुम लोग थक चुके होंगे. पहले फ्रेश हो जाओ, फिर बात करेंगे.
दीपा ने सुमेश को अपने भाई के रूम में भेज दिया और अंजलि से बोली- चलो अंजलि, तुम मेरे साथ चलो.

दीपा मुझे मेरे बैग के साथ अपने बेडरूम में ले आयी और अन्दर आकर उसने बेडरूम का गेट लगा लिया.
दीपा बोली- अंजलि, तुम मेरे साथ मेरे ही रूम में सोना … हम बहुत सारी बातें करेंगे वैसे भी तुम बहुत दिन बाद आयी हो!

मैंने कहा- ठीक है मैं तेरे रूम में रुक जाऊंगी.
दीपा बोली- अंजलि तुम नहा लो, मैं यहीं बैठी हूँ.
मैंने कहा- ठीक है.

मैंने अपने बैग से अपना टॉवल और एक पीच कलर की ब्रा पैंटी का सैट निकाला और वाशरूम में आ गयी.

कुछ देर शॉवर लेने के बाद मैं फ्रेश हो गयी और अपना बदन पौंछ कर ब्रा पहनने लगी, पर मैं एक नंबर छोटी ब्रा पहनती हूँ तो मुझसे बंध नहीं रही थी.

मैंने दीपा को आवाज लगाई ‘दीपा सुन!’
दीपा बोली- हां अंजलि बोलो!

मैं वाशरूम के गेट के पास आकर बोली- इधर को आ जरा!
वह दरवाजे के करीब आई- बोलो अंजलि, क्या हुआ?

मैंने कहा- यार, जरा मेरी ब्रा का हुक लगा दे … लग नहीं रहा है. काफ़ी टाइट है!
दीपा हंस कर बोली- अरे यार अंजलि, तुम बाहर आ जाओ न बेडरूम में!

मैंने कहा- कोई आ जाएगा तो दिक्कत हो जाएगी!
दीपा बोली- कोई नहीं है आने वाला … मैंने गेट लगा लिया है.

फिर मैं दीपा का कहा मानती हुई अपनी ब्रा पैंटी हाथ में लेकर रूम में नंगी ही आ गयी.
मुझे पूरी नंगी देख कर दीपा मुस्कुरा रही थी.

वह बोली- अंजलि तुमने खुद को काफ़ी मेन्टेन किया है .. सच में यार काफ़ी खूबसूरत लग रही हो तुम!
फिर दीपा ने मुझको ब्रा को पहनाने लगी.

उसी वक्त उसने मेरे लव बाईट के निशानों को देख लिया और बोली- अंजलि तुम्हारे बूब्स पर ये लव बाईट के इतने सारे निशान कैसे हैं … लगता है परसों रोहण जीजू ने की है ये हालत … ऐसा लगता है कि इंडिया आने से पहले तुमने जीजू का पूरा ख्याल रखा है!

मैं मन ही मन मुस्कुरा दी.
अब मैं उसे क्या बताती कि सारी रात चलती ट्रेन में मेरी चुत का भोसड़ा बनाने का कार्यक्रम चलता रहा और मेरी यह हालत करने वाले ने ही मेरे जिस्म पर ये लव बाइट बना दिए हैं.

दोस्तो, इस सेक्स कहानी में मैं आगे बताऊंगी कि दीपा के घर सुमेश के साथ मेरा किस तरह से प्यार जागा और कैसे हम लोगों ने अपनी जिंदगी में एक ने सफर की शुरुआत करने की नींव डाली.

आपके प्यार भरे मेल व कमेंट्स मुझे काफी उत्साहित करते हैं.
प्लीज Xxx चुदाई इन द ट्रेन कहानी पर मेल करना बिल्कुल भी न भूलें.
आपकी अंजलि शर्मा
mrsanjalisharma1986@gmail.com

You May Also Like

Maa Beti Ko Chodne ki Ichcha-13
Views: 414 Category: Hindi Sex Story Author: tarasitara28 Published: June 07, 2025

फिर मैंने उसके चूचों को रगड़ना और मसलना चालू किया.. जिससे वो अपने आप का काबू खो बैठी और तेज़-तेज़ से चुदाई करने लगी।मुझे इ…

Maa Beti Ko Chodne ki Ichcha-7
Views: 424 Category: Hindi Sex Story Author: tarasitara28 Published: June 06, 2025

कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि उसकी आँखें बहुत ही मादक थीं.. जिसे देख कर कोई भी उसका दीवाना हो जाता। माया मेरे

Comments