लंडखोर औरत की चूत की दास्तान-ए-चुदाई- 5

Views: 252 Category: Hindi Sex Story By mrsanjalisharma1986 Published: April 24, 2026 📖 12 min read
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फकिंग इन द ट्रेन का मजा मैंने लिया अपनी सहेली के एक दोस्त के साथ. हम दोनों फर्स्ट क्लस के केबिन में अकेले पूरी रात का सफर कर रहे थे.

दोस्तो, मैं आपको अपनी सेक्स कहानी के पिछले भाग
गैर मर्द की बाँहों में चुदाई की लालसा
में सुना रही थी कि मैं चलती ट्रेन के एसी फर्स्ट के कूपे में एक अजनबी मर्द के साथ उसकी गोदी में बैठी थी और उसके लौड़े से चुदने के लिए मरी जा रही थी.

अब आगे फकिंग इन द ट्रेन का मजा:

जैसा कि मैंने बताया था कि मैं सुमेश जी के लंड बैठने के लिए मैं मरी जा रही थी.

उस वक्त मैं सोच रही थी कि वक्त भी क्या क्या दिखाता है. अब मुझे क्या पता था कि इंडिया पहुंचते ही मेरी चुदाई का प्रोग्राम बन जाएगा.
कहां मैं अपनी फ़्रेंड की शादी में शामिल होने आयी थी और आज मेरी ही सुहागरात बन जाएगी.

खैर … मैं तो मर्दखोर हूँ और अलग अलग लंड से चुदने के लिए सदा से ही राज़ी रहती हूँ, तो बस आज इस चुदाई का मजा लेने के लिए मेरी चुत से रस टपकने लगा था.

सुमेश मुझे नंगी घूरते हुए बोले- अंजलि, वैसे तुमने खुद को काफ़ी मेन्टेन कर रखा था, तुम्हारे बदन पर एक भी बाल नहीं है!
मैं भी सुमेश जी को गर्म करने के लिए उनकी चेस्ट को चूमने और चाटने लगी और उनकी छाती को पूरी तरह से लाल कर दिया.

मैंने सुमेश जी की छाती पर जगह जगह लव बाईट के निशान भी दे दिए थे.
कुछ देर सुमेश जी की छाती को चूमने के बाद मैं उनसे अलग हुई.

अब बारी मेरे चिकनी चूचियों और चुत की थी.

सुमेश जी ने मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों में भरा और उनको मसलने लगे.
मैं आहें भर रही थी- आह सुमेश आह!

मेरे होंठों पर सिर्फ सुमेश और आह यही दो शब्द रह गए थे.
सुमेश मेरे बूब्स को मसलते हुए उन्हें प्यार कर रहे थे.

उन्होंने मुझे और ज्यादा गर्म करने के लिए मुझे देखते हुए मेरे दोनों बूब्स को एक साथ पकड़ कर अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगे.

पर मेरे बूब्स काफ़ी बड़े साइज के हैं, इसलिए वे एक बार में मेरे एक ही दूध को चूसने में सफल हो पा रहे थे.
मैं भी अपनी अल्हड़ जवानी को उनके मुँह में बारी बारी से देती हुई मस्ती कर रही थी.

सुमेश ने मेरे दोनों बूब्स को बारी बारी से अपने मुँह में भरा और उन्हें खींचते हुए चूसने लगे.
मैं भी उनके इस तरह से मम्मे खींच खींच कर चूसने का पूरा मजा ले रही थी और अन्दर ही अन्दर गर्म होती जा रही थी.

सुमेश ने भी पूरी मदहोशी से अपने मुँह में मेरे दूध के निप्पल दबा रखे थे और वे मेरे दोनों निप्पलों को बार बार मुँह में लेकर बहुत जोर जोर से खींचते हुए काट रहे थे.
इस वजह से मेरी और ज्यादा सिसकारियां निकल रही थीं ‘आह सुमेश धीरे कीजिए न!’

पर सुमेश के ऊपर मेरी किसी बात का कोई असर नहीं हो रहा था.
कुछ ही देर में सुमेश ने मेरे मम्मों पर काट काट कर मेरे दोनों निप्पलों को कड़क व टाइट कर दिया था.

मेरी पूरी चूचियों पर सुमेश जी के लव बाईट के निशान बन गए थे.
उन्होंने मेरे दोनों बूब्स को लगभग 20 मिनट तक चूसा होगा.

अब मैंने रोमांस को अलग सीमा पर ले जाने का सोचा और झट से सुमेश जी की गोद से नीचे उतर कर घुटनों के बल बैठ गयी.
फिर मैंने सुमेश जी की मोटी जांघों से उनकी वाइट कलर की फ्रेंची अंडरवियर को उनकी जांघों से नीचे उतार दिया.

सुमेश जी भी अब मेरे सामने नंगे थे और उनका मोटा काला लंड भी मेरी नजरों के सामने था.

मैंने प्यार के साथ सुमेश जी के लंड पर अपना हाथ रखा और उन्हें देखते हुए धीरे धीरे लंड को सहलाने लगी.
उनका लंड लोहा हो गया था.

मैंने लौड़े के सुपारे की खाल को पीछे किया और उनके लंड के टोपे को बाहर निकाल लिया.
सुपारे का रंग एकदम डार्क रेड कलर का था.

मैंने बिल्कुल भी संकोच ना करते हुए सुमेश जी के लंड को मुँह में लेने के मुँह को आगे बढ़ाया और लंड के टोपे को अपनी रसीले होंठों में दबा लिया.

उनके मुँह से एक मादक आह निकल गई और उन्होंने मेरे सर को पकड़ लिया.
मैंने उनके लंड को अपने मुँह में भर लिया और अच्छे से चूसने लगी.

मेरे बाल खुल चुके थे और सुमेश जी ने मेरे बालों को इकट्ठा करके अपने हाथों से पकड़ लिया था.
वे मुझसे अपना लंड चुसवा रहे थे.

मैं भी पूरे जोश के साथ सुमेश जी का लंड अपने गले तक लेने की कोशिश कर रही थी, जिसकी वजह से सुमेश जी का पूरा लंड रसीला हो चुका था.

मेरी भी सांसें फूलने लगी थीं.

कुछ देर मदहोशी में लंड चूसने के बाद सुमेश जी ने मुझे अपनी गोद में उठाया और सीट पर लेटा दिया.
मुझे पता चल गया था कि अब मेरी चुत चुसाई की बारी है.

सुमेश जी मेरी चुत की ओर आए और उसे सूंघा.
फिर उन्होंने अपनी एक उंगली मेरे मुँह में डाल कर गीली की और उसको मेरी चुत पर फेरते हुए धीरे से चुत के अन्दर सरका दिया.

मेरी आह निकल गई.
सुमेश जी अब धीरे से मेरी चुत के पास झुके और अपने होंठों को प्यार से मेरी चुत पर रख दिया.

उनके होंठों की छुअन से मेरे मुँह से एक लम्बी आह की सिसकारी निकली- आह सुमेश … प्यार से कीजिएगा प्लीज!
सुमेश ने कुछ ना सुनते हुए मेरी चुत के होंठों से अपने मुँह के होंठ मिला दिए और मेरी मस्ती भरी चुत की चुसाई करना शुरू कर दी.

मैं भी आहें भरती हुई सुमेश जी का साथ देने लगी.
उनको अपनी ओर खींचती हुई उनके बालों को सहलाने लगी और उनकी पीठ को अपने हाथों के नाखूनों से नोचने लगी.

मेरे ये निशान आज रात मेरी चुदाई की निशानी बनने वाले थे.

मैंने भी आहें भरने में और सुमेश जी को जोश से दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
‘आह आह सुमेश प्यार से चूसिए न … आह सुमेश सुमेश आह आह!’

मेरे होंठों से बस आहें निकल रही थीं और चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी जो कि आज रात मेरी होने वाली चुदाई की वजह से थी.
सुमेश जी ने चूस चूस कर मेरी चुत को गीला कर दिया.

बस फिर क्या था … लगभग एक घंटे तक हम दोनों का फोरप्ले चला, जिसमें हम दोनों ही अपने चरम सुख तक पहुंच चुके थे.

शरीर को ऐसा कोई अंग नहीं था, जहां हम दोनों ने एक दूसरे को चूमा नहीं हो.

अब सुमेश जी सीट पर आ कर बैठ गए.
मैं फिर से घुटनों के बल बैठ गई थी.

मैंने उनकी टांगों के बीच कड़क हो चुके लंड को वापस चूसा और उनके लंड को मेरी चुत की चुदाई करने के लिए तैयार कर दिया.
सुमेश जी बोले- अंजलि, अब आपकी चुदाई शुरू करूं!

मैंने भी मुस्कुराते हुए गर्दन हिला कर मुझे चोदने का इशारा दे दिया.
सुमेश जी ने मुझे गोद में उठाया और उन्होंने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया.

फिर उन्होंने मुझसे मेरी गांड को उठाने को बोला तो मैंने अपनी गांड को थोड़ा ऊपर उठा दिया.
बस सुमेश जी ने अपना लंड मेरी चुत पर रखा और चुत पर लंड को रख कर रगड़ने लगे.

सुमेश जी मेरी चुत पर अपना लंड रगड कर मुझे और ज्यादा बेताब कर रहे थे.
सुमेश जी और मैं एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे … साथ ही मुझे बहुत शर्म भी आ रही थी कि मैं एक गैर मर्द की बांहों में नंगी बैठी हुई थी.
वह भी चुदने के लिए.

मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश, बस करो यार .. अब मुझे परेशान करना बंद करो और डाल दो अपना लंड अन्दर!
तब सुमेश ने झट से अपना लंड मेरी चुत पर अच्छे से सैट किया और मुझे दबने का इशारा करते हुए खुद भी मेरे कंधों को दबाते हुए चुत में लंड पेलने का शगल करने लगे.

मैंने भी सुमेश के लंड पर धीरे धीरे बैठना शुरू कर दिया.
पहले ही झटके में सुमेश के लंड का टोपा मेरी चुत को फाड़ता हुआ मेरी चिकनी गीली चुत में प्रवेश कर चुका था.

मेरी आह निकली और सुमेश ने मेरी एक चूची को पकड़ कर दबा दिया.

मैं भी सुमेश के लंड पर धीरे धीरे बैठने लगी और कुछ ही पल बाद पूरा लंड मेरी चुत के अन्दर तक समा चुका था.
उनके गर्म लंड का अहसास मेरी गीली चुत को हो रहा था.

हाथ की आटा चक्की के हैंडल के जैसा उनका मूसल लंड मेरी चुत की बखिया उधेड़ता हुआ सा लग रहा था.

कुछ पल बाद सुमेश ने मेरी एक चूची को अपने मुँह में भरा और अपने दोनों हाथ मेरी कमर पर रख कर मुझे उनके लंड पर उछलने का इशारा दिया.
मैंने भी एक मस्त मर्दखोर औरत की तरह उनकी बात को मानते हुए धीरे धीरे अपनी गांड को उठा उठा कर लौड़े पर पटकना शुरू कर दिया.

मैं सुमेश के लंड पर मस्ती से उछलने लगी और वे मेरे दोनों मम्मों को बारी बारी से अपने मुँह में भर कर चूसते हुए मुझे चोदने लगे.
अब मेरी मस्त चुदाई शुरू हो चुकी थी.

मुझे सब कुछ एक सपने के जैसा लग रहा था कि मैं कैसे पहली ही मुलाकात में एक पराये मर्द से चुदने लगी हूँ.
कुछ इधर उधर की बातें भी मेरे मन में चल रही थीं.

फिर मैंने भी सारी बातों को छोड़ा और सुमेश के लंड पर उछलने में ध्यान देने लगी.
मैंने अपनी स्पीड बढ़ाते हुए सुमेश को और मजा देना चाहा, तो उन्होंने भी नीचे से अपनी गांड को उठा कर मुझे ठोकना चालू कर दिया.

मैं सुमेश के लंड पर गजब उछल रही थी और आहें भर रही थी ‘आह सुमेश सुमेश आह आह और जोर जोर से चोदिए मुझे … आह सुमेश चोदिये आह बाबू बच्चा मुझे चोद दो … आज मेरी जवानी का रस लूट लो!’

मैं भी अब किसी रंडी की तरह से पूरी खुल चुकी थी और सुमेश जी के लंबे लौड़े से चुत चुदवाने का मजा ले रही थी.
सुमेश भी मुझे चोदने में अपनी पूरी मेहनत कर रहे थे.

जैसा कि हर मर्द का सपना होता है कि वह एक हसीन औरत को अपने लंड से खुश करने का पूरा प्रयास करे, ठीक उसी तरह से सुमेश भी अपना पूरा प्रयास कर रहे थे और वे मुझे वही ख़ुशी देने की कोशिश कर रहे थे.
मुझे भी सुमेश के काले मोटे लंड से चुदने में बहुत मजा आ रहा था.

सुमेश मुस्कुराते मुस्कुराते मेरी तारीफ करने लगे- अंजलि यार, तुम बहुत मस्त माल हो और बहुत खूबसूरत भी … तुम्हारे जैसी औरत को चोदना एक सपना था. तुम बहुत मॉडर्न हो अंजलि!

सुमेश जी ने मेरी तारीफ के पुल बांध दिए थे.

मैं भी सुमेश को खुश करने के लिए और अच्छे से उनके लंड पर उछल रही थी.
इस वक़्त मैं सब भूल चुकी थी कि मैं एक शादीशुदा औरत हूँ और मेरा एक जवान पति भी है, बस इस पल मेरे अन्दर चुदाई जगी हुई थी. जिसे मैं सुमेश से शांत करवाने में लगी हुई थी.

मेरी चुत अन्दर से पूरी तरह गीली हो चुकी थी, पर मैं अभी तक झड़ी नहीं थी और ना ही मेरा रस आया था … पर हां सुमेश के लंड ने मुझे काफ़ी हद तक संतुष्ट कर दिया था.

उनके लंड के टोपे की ठोकर मेरी चुत के अन्दर जोरदार तरीके से लग रही थी, जिसकी वजह से मेरी चुत में मीठा मीठा दर्द हो रहा था.
ये मीठा दर्द मेरी हो रही हसीन चुदाई का दर्द था.

मैं भी चुदने में एकदम मदहोश थी.
मुझे सुमेश के लंड पर उछलते हुए लगभग 35-40 मिनट हो चले थे और सुमेश जी भी अभी चरम सीमा पर आ चुके थे.

सुमेश ने मेरी गांड पर अपने हाथ रखे और मेरी गांड को उठाते हुए मेरी चुत की और जोरदार चुदाई करने लगे.
मैं समझ चुकी थी कि बस अब सुमेश मेरी चुत को अपने अमृत से भरने वाले हैं.

सुमेश बोले- अंजलि अन्दर निकाल दूँ?
मैंने सुमेश को रोकते हुए कहा- नहीं सुमेश जी.

मैं सुमेश की गोद से नीचे उतर गयी.
और सुमेश को लगा शायद मैं उनका अमृत बाहर निकलवाना चाहती हूँ, पर मेरी अगली हरकत देख कर वह एकदम दंग रह गए.

मैं भी बिना किसी संकोच किए सुमेश जी के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.

लंड चुसवाते चुसवाते सुमेश का शरीर अब अकड़ने लगा था और वे पूरे जोश में आ गए थे.
तभी सुमेश ने मेरे मुँह में ही अपने लंड से अपना अमृत त्याग दिया.

मेरा मुँह सुमेश जी के अमृत से भर चुका था.

सुमेश जी मुझे देख कर बहुत खुश हो रहे थे और मैंने भी बिना कुछ सोचे समझे सुमेश का अमृत अपने गले से नीचे उतार दिया.

मैंने एक गैर मर्द का वीर्य पी लिया.
सुमेश मेरी ये हरकत देख कर एकदम खुश हो गए थे. वे सीट पर टिक गए और फिर धीरे से लेट गए.

मैं भी उनके ऊपर आ कर लेट गयी और ऊपर से रेलवे की वाइट बेडशीट हम दोनों ने अपने ऊपर डाल ली.
मैं सुमेश जी के ऊपर नंगी लेटी हुई थी.

सुमेश बोले- अंजलि कसम से मैंने अपनी पूरी लाइफ में इतनी हसीन और मॉडर्न औरत नहीं देखी कसम से तुम बहुत मॉडर्न हो, जिस तरह से आज तुमने अपनी चुदाई करवाई है मुझसे … और उसके बाद जो तुमने मेरा स्पर्म पिया है … आह बहुत ही कम औरतें इस चीज को करती हैं.

मैंने भी सुमेश का साथ देते हुए कहा- सुमेश जी, आपने भी मुझे आज बहुत अच्छे से चोदा है, कसम से मुझे भी बहुत मजा आया है आपसे चुदने के बाद.
हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर आराम कर रहे थे.

दोस्तो, सुमेश से मेरी चुदाई वाली दोस्ती हो गई थी और अब चंडीगढ़ में अपनी सहेली के घर उसकी शादी में क्या गुल खिलने वाला था, वह आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगी.

फकिंग इन द ट्रेन का मजा आपको भी आया क्या?
मुझे आपके प्यार से भरे मेल्स का इंतजार भी रहेगा.
mrsanjalisharma1986@gmail.com

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