वो चौदह दिन- 8

Views: 65 Category: Hindi Sex Story By me.funny123 Published: June 23, 2026

Wo Chodah Din - 8

माय पुसी जूस लिक स्टोरी में मैं अपने बेटे के दोस्त के लंड का मजा लेने के लिए उसे तैयार कर रही थी. मैंने उसका लंड पकड़ लिया तो उसने मेरी चूचियां दबोच ली.

कहानी का पिछला भाग: बेटे के दोस्त का लंड देखा

अब आगे माय पुसी जूस लिक स्टोरी:

गौरव ने झुक कर अपना अंडरवियर ऊपर करने की कोशिश की पर मैंने मौका ही नहीं दिया।

वह बोला, “छोड़ दीजिए प्लीज!”
मैंने कहा, “कल से मेरे बदन को घूर रहा है, अब मौका दे रही हूं तो छोड़ने को बोल रहा है। शर्म नहीं आती?”

फिर मैंने कहा, “बोल क्या देखने का मन है? मैं दिखाऊंगी।”

हालांकि गौरव ने कोई जवाब नहीं दिया पर उसकी नज़रें फिर से मेरी ‘36 डी’ साइज की चूचियों पर टिक गई।
मुझे लगा कि अब देर करना ठीक नहीं है।
मैंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपनी नाईटी उतार फेंकी और बोली, “अब खुश! देख ले तसल्ली से!”

पर उसने तो अपनी नजर ही नीचे कर ली, एक बार भी नजर उठा कर मेरी तरफ नहीं देखा।

मैं बिस्तर से उठकर उसके सामने आकर खड़ी हो गई और बोली, “अजब बेवकूफ लड़का है, जब तक मैं कपड़े पहने थी तब तक घूर घूर कर देखने की कोशिश कर रहा था। अब मैं खुद देखने का मौका दे रही हूं तो शर्माने का नाटक कर रहा है। जल्दी बता कि देखना है या मैं कपड़े पहन लूं?”
इतना बोलकर मैंने अपना हाथ अपनी नाईटी की तरफ बढ़ाया.

उसने एकदम नजर ऊपर करके कहा, “देखना है मुझे. इनको देखना अच्छा लगता है।”
मैंने उसका हाथ पकड़ के अपनी एक चूची पर रखते हुए कहा, “छू कर देख! कैसी है।”

गौरव कोई अबोध बालक है नहीं, लगभग 20 वर्षीय युवक है, सब समझ रहा था।
अब वो भी धीरे-धीरे खुलने लगा।

जैसे ही मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रखा, उसने दूसरा हाथ भी आगे बढ़कर मेरी दूसरी चूची पर रख लिया और मेरे निप्पल सहलाने लगा।

मैं उसके सामने सिर्फ एक पैन्टी में खड़ी थी और वो मेरे सामने सिर्फ एक बनियान में।

मेरी नजर नीचे गई तो मैंने देखा उसका लौड़ा पूरी तरह से तना हुआ था और बहुत जबरदस्त तरीके से फड़फड़ा रहा था।

अब वह खुलकर मेरी चूचियों से खेलने लगा।
मेरे मुंह से भी हल्की सी सिसकारी निकलने लगी।

मैंने आगे बढ़कर उसका लौड़ा अपने हाथ में पकड़ लिया और उसके अग्र भाग को अपने अंगूठे से सहलाने लगी।

कुछ देर सहलाते ही मैंने देखा कि उसमें से हल्का-हल्का चिपचिपा पानी निकलने लगा.
और जैसे ही मैंने उसे पानी पर हाथ फिराया, वो पूरा ही डिस्चार्ज हो गया।

मैंने उसके अंडरवियर से ही अपना हाथ और उसका लिंग साफ किया।
मैं समझ गई कि यह और कुछ नहीं बल्कि अति कामुकता का नतीजा है. गौरव को थोड़ा सा समय देना जरूरी है।

मैंने गौरव का हाथ पकड़ा तो पाया कि वह उत्तेजना की वजह से बहुत गर्म हो रहा था.
उसके कान के पास से भी पसीना आ रहा था.

पर मैं तो पुरानी खिलाड़ी हूँ, मैं जानती थी कि उसके साथ कैसे खेलना है।
मैंने गौरव का ध्यान हटाने के लिए उसको कहा, “चल नीचे चल चाय पीते हैं।”

अब तो गौरव बिल्कुल गुलाम की तरह मेरे पीछे-पीछे आ रहा था।
मैं भी कूल्हे मटकाते हुए उसके आगे आगे चल रही थी।

मेरे लिए इस घर में लगातार नंगी रहना कोई नई बात नहीं थी।
राजीव और मैं भी जब घर में अकेले होते तो सारा दिन नंगे ही रहते थे।

मैं और गौरव नीचे आ गए.
मैं सीधी रसोई में गई और गौरव मेरे पीछे-पीछे।

मैं रसोई में जाकर चाय बनाने लगी.
गौरव भी वही पास में खड़ा हो गया.

वह लगातार मेरी मोटी भरी हुई चूचियों को ही देख रहा था।
मैं गौरव की तरफ देखकर मुस्कुराई और बोली, “क्या हुआ? बहुत पसंद हैं क्या?”
गौरव ने बस हाँ में अपना सर हिलाया और अपने दोनों हाथ फिर से मेरी चूचियों पर रख दिए।

इधर मैं तो चाय बनाने में लगी थी और वह लगातार मेरी चूचियां सहला रहा था।
मैंने एक बार भी उसको रोकना उचित नहीं समझा.

धीरे-धीरे मेरे चूचूक कड़े हो गए।
गौरव को भी शायद इसका अहसास हो रहा था अचानक वह बोला, “मुझे पीना है।”
मैंने कहा, “तो पी ले, मैंने कब रोका है?”

और गौरव ने आगे बढ़कर मेरी एक चूची अपने मुंह में भरने की कोशिश की।
मैं हंसने लगी, “बुद्धू ऐसे नहीं अपनी जीभ से धीरे-धीरे इस एरोला को चाट, ज्यादा मजा आएगा।”
मैंने अपनी चूची के अग्र भाग की तरफ इशारा करते हुए कहा।

गौरव ने ऐसा ही किया.
अब वह एक-एक करके मेरी दोनों चूचियों के निपप्ल के चारों तरफ अपनी जीभ फिरा रहा था।

तब तक चाय भी बनकर तैयार हो गई.
मैंने चाय दो कप में डाली और बाहर सोफे की तरफ चलने लगी.
गौरव भी किसी गुलाम की तरह मेरे पीछे-पीछे आ रहा था।

मैंने चाय टेबल पर रख दी और सोफे पर बैठ गई.
मैं जानती थी कि गौरव अति कामउत्तेजना में है। अगर जल्दी करूंगी तो यह फिर से डिस्चार्ज हो जाएगा और मेरा काम अधूरा रह जाएगा इसलिए मैं कोई जल्दी नहीं करना चाहती थी।

मैं धीरे-धीरे करके उसके काम-उत्तेजना को नियंत्रित करना चाहती थी।

वह मेरे पीछे-पीछे आया और सोफे पर मेरे बराबर में बैठ गया.
मैंने अपनी चाय उठाई और सामने मेज पर टांगें फैला कर आराम से बैठकर चाय की चुस्की लेने लगी।

पर गौरव का ध्यान सिर्फ मुझ पर था।
मैंने उसको चाय पीने को कहा तो उसने मना कर दिया।
मैंने उसको कहा- और कुछ भी पीने को तब मिलेगा जब पहले चाय पिएगा।

तो उसने तुरंत चाय उठा ली।
वह भी मेरे बराबर में मेज पर टांगें फैला कर बैठ गया।

मैं एक हाथ से चाय का कप पकड़ कर चाय पी रही थी और दूसरे हाथ से गौरव की जांघ सहलाने लगी।
मैंने देखा गौरव का शरीर थोड़ा थोड़ा कांप रहा था।

मैंने उससे पूछा- काँप क्यों रहा है? ठंड लग रही है क्या?
तो उसने कहा, “नहीं, आपके हाथ से करंट लग रहा है। इसलिए कंपकंपी हो रही है।”
मैंने उसको कहा, “कोई बात नहीं, धीरे-धीरे ठीक हो जाएगा। कोई जल्दबाजी नहीं करनी है।”

और हम दोनों चाय पीने लगे।
मैंने चाय खत्म की और दोनों कप उठाकर फिर से रसोई की ओर चल दी.
गौरव भी मेरे पीछे-पीछे रसोई को दौड़ा।

कप रसोई में रखकर जैसे ही मैं गौरव की तरफ घूमी, गौरव ने मेरी पैंटी की तरफ इशारा करते हुए कहा इसे भी निकाल दीजिए प्लीज!
मैंने उसको बोला, “ताकि तू एक बार फिर से डिस्चार्ज हो जाए।”
उसने कहा, “नहीं, ऐसा नहीं होगा।”
मैंने कहा, “ठीक है, मैं भी ये उतार देती हूं और तू भी अपनी बनियान उतार दे। अब तो हम दोनों दोस्त हैं। हम दोनों सारा दिन घर में नंगे ही रहेंगे।”

मेरी बात सुनकर गौरव मुस्कुराया और उसने एक झटके में अपनी बनियान उतार कर फेंक दी।
अब गौरव नंगा मेरे पीछे-पीछे घूम रहा था और मैं घर के छोटे-मोटे काम निपटा रही थी।

दरअसल मैं गौरव को थोड़ा सा समय देना चाहती थी ताकि वह थोड़ा नॉर्मल हो जाए और उसकी उत्तेजना कम हो जाए।

तभी मैंने देखा बाहर दरवाजे पर अखबार पड़ा था।
मैं ऐसे ही नंगी अख़बार लेकर वही फर्श पर अखबार पढ़ने बैठ गई।

गौरव भी मेरे साथ बैठ गया थोड़ी देर बैठने के बाद वह मेरे घुटने पर सर रखकर लेट गया.
मैं तो अखबार पढ़ रही थी और वह लेटे-लेटे ही मेरे निप्पल चूसने लगा।

अब कहीं जाकर मुझे भी आराम मिल रहा था.
पर मैं अभी भी जल्दबाजी करना ठीक नहीं समझा.

मैं तसल्ली से अखबार पढ़ती रही और अखबार पढ़ कर उठी तो अपने वॉशरूम जाने लगी.
गौरव भी मेरे पीछे-पीछे आने लगा.

मैंने वॉशरूम में जाकर ब्रश किया और एक टॉवल दरवाजे पर टांगा।
गौरव मेरे साथ ही अंदर आ गया।

मैंने उसके आते ही शावर चला दिया।
गौरव भी मेरे साथ उस शावर के नीचे खड़ा हो गया.
हम दोनों ठंडे-ठंडे पानी का आनंद ले रहे थे।

अचानक गौरव ने मेरी पीठ की तरफ आकर पीछे से मुझे पकड़ लिया और दोनों हाथ से घेर बनाते हुए मेरी चूचियां जोर से दबाने लगा।
अब मैं गौरव को किसी बात के लिए नहीं रोक रही थी बल्कि मैं भी पूरा आनंद लेना चाहती थी।

मैंने साबुन उठाया और अपने शरीर पर लगाना शुरू कर दिया.
जैसे ही मेरा हाथ मेरी चूचियों के पास पहुंचा, गौरव ने मेरे हाथ से साबुन ले लिया और वह साबुन मेरे पूरे बदन पर रगड़ने लगा।

मैंने शावर बंद किया और गौरव के हाथ से साबुन लेकर उसके पूरे बदन पर लगाने लगी।

गौरव को आखिरी बार डिस्चार्ज हुए 1 घंटे से अधिक हो चुका था।

मैंने महसूस किया कि गौरव के लिंग में फिर से तनाव आने लगा है।

मैंने गौरव के पूरे बदन पर तसल्ली से साबुन लगाया और शावर चला दिया।
अब मैं अपना हाथ गौरव के पूरे बदन पर चल रही थी.

गौरव भी जैसे ही मौका मिलता मेरे बदन पर हाथ फेरने लगता।

मैंने गौरव को पड़कर वही नीचे घुटनों के बल बैठाया और अपना एक पर उसके कंधे पर रखकर अपनी चूत का मुंह उसके मुंह से मिला दिया।
गौरव लपक लपक कर मेरी चूत चाटने लगा।

‘आह… ओह… उफ्फ… उई… मांआआ … आह…’ की सीत्कार मेरे मुंह से निकलने लगी।
मन तो यह कर रहा था कि आज सारे दिन गौरव ऐसे ही मेरी चूत चाटता रहे.
पर डर ये भी था कि अगर ये फिर से डिस्चार्ज हो गया तो मुझे फिर इंतजार करना पड़ेगा।

मैंने शावर बंद किया और गीली ही गौरव को पकड़कर बाहर ले आई।

मैं जाकर सोफे पर बैठ गई और गौरव को अपने सामने खड़ा कर लिया।
अब गौरव का लौड़ा मेरे मुंह के बिल्कुल सामने था.

मैंने तपाक से उसको लपका और एक झटके में ही पूरा मुंह में ले लिया.
अब सिसकियां भरने की बारी गौरव की थी.
आह आई ईईई… आई… आह…’ की आवाज अब गौरव के मुंह से निकल रही थी।
मैं लपालप उसका लौड़ा चूस रही थी।

गौरव भी अपने दोनों हाथों से मेरी चूचियां जोर-जोर से दबाने लगा और नीचे झुककर मेरा पूरा मुंह चाटने लगा.
अब हम दोनों पूरी तरह खुल चुके थे।

अचानक कुछ सेकेंड बाद गौरव ने अपना लौड़ा मेरे मुंह से खींच लिया और मुझे सोफे पर ही लेटने को कहा.
मैं समझ गई कि अब अगर मैंने समय लगाया तो गौरव फिर से डिस्चार्ज हो जाएगा।

मैं तुरंत सोफे पर लेट गई और सोफे के हत्थे के ऊपर अपनी पीठ लगाकर अपनी चूत को गौरव के सामने कर दिया।

गौरव ने भी समय नहीं गंवाया.
शायद उसे मुझसे ज्यादा जल्दी थी।
उसने अपना लौड़ा मेरी चूत पर सेट किया और पहले ही धक्के में पूरा अंदर उतार दिया।

“आह… जानवर” मेरे मुंह से निकला।
पर गौरव को अब कुछ भी सुनने की फुर्सत नहीं थी.
वो तो लगातार गपागप धक्के मारने में लगा था।

मैंने खुद ही अपनी दोनों चूचियों को मींझना शुरू कर दिया।
गौरव के धक्कों मेरा पूरा बदन आगे पीछे हिल रहा था।

मैं जानती थी कि गौरव बहुत लंबा नहीं चल पाएगा इसलिए मैं अपना ध्यान कहीं और नहीं लगाना चाहती थी।
मेरी इच्छा थी कि मैं भी गौरव के साथ ही डिस्चार्ज हो जाऊं।

गौरव की स्पीड लगातार बढ़ रही थी और मैं भी उसकी गति के हिसाब से अपनी चूचियों से लगातार खेल रही थी।

थोड़ी देर की जद्दो जहद के बाद गौरव अचानक रुक गया और मुझ पर झुक गया।
गौरव का लौड़ा अभी भी मेरे जिस्म के अंदर ही था।

मैंने अपनी दोनों टांगें दबाकर उसको अपने अंदर ही समाने की कोशिश की।
पर कुछ सेकेंड बाद वो भी निचुड़ कर छुआरे जैसा हो गया और खुद ही बाहर आ गया।

गौरव वहां से उठकर वॉशरूम की तरफ भागा।
मैं भी सोफे से उठी और अपनी गांड मटकाती हुई धीरे-धीरे वॉशरूम की तरफ जाने लगी।

वॉशरूम में जाते गौरव ने फिर से शावर चला दिया.
मैं और गौरव फिर से पानी में भीगने लगे।

हम दोनों एक दूसरे से कोई बात नहीं कर रहे थे लेकिन एक दूसरे को पूरा कामानन्द देने का प्रयास कर रहे थे।

मैंने एक अपनी चूत पर थोड़ा सा पानी मारा और अंदर तक उंगली डालकर उसे अच्छी तरह साफ किया।
गौरव तो पूरी तरह डिस्चार्ज हो चुका था पर मेरा अभी आना बाकी था।
मेरे बदन में अभी भी आग लगी हुई थी।
मैंने गौरव को फिर से घुटनों के बल बैठाया और बराबर में टॉयलेट सीट के ऊपर अपना एक पैर रखकर चूत का मुंह गौरव के मुंह के आगे कर दिया।
गौरव फिर से लपलपाकर मेरी चूत चाटने लगा।

अब वो अपनी जीभ को चूत के अंदर तक डालने की कोशिश कर रहा था।
मैं बहुत बेचैन हो रही थी.

मैंने गौरव का सर पकड़कर अपनी चूत में घुसाने की कोशिश की।
उसने भी अपने दोनों हाथ बढ़ाकर मेरे चूतड़ पीछे से पकड़ लिए, अपनी एक उंगली से वह पीछे से मेरी गांड का छेद सहलाने लगा।

ऊपर से शावर का पानी और नीचे से यह मस्त जवानी मेरे मजे की कल्पना करना मुश्किल था।
मैंने खुद ही अपनी दोनों चूचियों से फिर से खेलना शुरू कर दिया।

कुछ सेकेंड बाद ही मेरे अंदर का लावा फूट गया और मेरी चूत का रस गौरव के मुंह पर गिरने लगा।
गौरव भी चाट चाट कर सारा रस पी गया।
माय पुसी जूस लिक के बाद अब मुझे संतुष्टि थी और मैं बहुत हल्का महसूस कर रही थी।

सच में ऐसा आनंद कम से कम 10 दिन बाद आया था।

मैंने गौरव को उठाया और हम दोनों नहा धोकर तौलिए से बदन पौंछ कर बाहर आ गए।

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पिछली कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा। मैं भी उनके बगल में जाकर लेट गया और उन्हें अपनी बाँहों में भर कर प्यार करने

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