Wo Chodah Din - 7
द लंड स्टोरी में मैं अपने बेटे के दोस्त से सेक्स का मजा लेना चाह रही थी लेकिन वो पहल ही नहीं कर रहा था. आखिर एक रात मैं उसके बिस्तर में घुस गयी.
कहानी का पिछला भाग: नंगी होकर बेटे के दोस्त से मालिश करवाई
अब आगे द लंड स्टोरी:
मैंने फिर से अपने पति को फोन लगाया और गौरव का सारा गुस्सा उन पर झाड़ दिया।
वे पूछने लगे, “अरे हुआ क्या?”
तो मैंने बताया, “आपसे बात करते-करते डेढ़ घंटा बीत गया. और इसी बीच जब मैं बाहर पहुंची तो गौरव ऊपर जाकर चेतन के कमरे में सो चुका था।”
मेरी बात सुनकर 1 मिनट तो मेरे पति चुप रहे, फिर बोले, “कोई बात नहीं, आज जितना हो गया, उतना आज के लिए बहुत है। कल फिर से कोशिश करो। धीरे-धीरे तुम्हें तुम्हारा टारगेट मिल जाएगा।
फिर वे मुझसे बोले- वीडियो कॉल करोगी क्या?
मैंने झल्ला कर कहा, “बिल्कुल नहीं करूंगी, आपको जो करना है कीजिए। मैं अपने कमरे में सोने जा रही हूं।”
और मैं अपने कमरे में आ गई.
काफी देर तक सोने की कोशिश करती रही पर नींद तो मुझे कोसों दूर थी।
मैं अपने बिस्तर पर इधर से उधर करवटें बदल रही थी.
रात को 1:00 तक तो मैं जागती रही, उसके बाद मुझे याद नहीं कब नींद आ गई।
आदत के हिसाब से सुबह 6:00 बजे मेरी आंख खुली अब मेरा मूड थोड़ा फ्रेश था।
मैंने सोचा एक बार फिर ऊपर जाकर गौरव को देखती हूं.
मैंने वॉशरूम में जाकर अपना मुंह धोया हल्का-फुल्का मेकअप किया।
अपने बाल सही किए और तौलिया हल्का सा गीला करके उससे अपना पूरा बदन भी साफ कर लिया।
फिर कल रात वाली नाइटी पहन कर मैं ऊपर गौरव के कमरे में गई।
गौरव अभी भी बेसुध सो रहा था।
गौरव का कंबल बिस्तर से नीचे पड़ा था मैंने देखा गौरव सिर्फ अंडरवियर बनियान पहन कर सो रहा था।
नींद में भी गौरव का लिंग पूरा तना हुआ था।
ऐसे लग रहा था जैसे अभी ऊपर छत की तरफ फायरिंग कर देगा।
मैंने पहली बार इतने करीब से गौरव के लिंग को इतना तना हुआ देखा।
मेरे मुंह में पानी आ गया एक बार को तो मन हुआ कि जाकर पकड़ लेती हूं. जो होगा देखा जाएगा.
पर मेरे अंदर शायद इतनी हिम्मत ही नहीं थी।
मैं वहीं बैठकर सोचने लगी कि अब क्या किया जाए।
काफी देर विचार करने के बाद एक बात तो मेरी समझ में आ गई कि शायद गौरव अपनी तरफ से पहल नहीं करेगा।
पहल तो मुझे ही करनी पड़ेगी.
आज मेरे पति को गए हुए आठवां दिन था।
अभी 6 दिन और बाकी थे, मेरे पास काफी समय था।
मैंने निर्णय किया कि अब जो भी करूंगी बहुत सोच समझकर करूंगी और अपनी तरफ से ही पहल करूंगी।
अब मैं गौरव की तरफ से कोई उम्मीद नहीं करूंगी।
मन ही मन पूरी प्लानिंग करके मैंने गौरव का कंबल उठाया और गौरव को उसे औढ़ा दिया।
गौरव इतनी गहरी नींद में था कि उसे कुछ आभास ही नहीं था।
मैं चुपचाप दबे पांव गौरव के बिस्तर पर चढ़ी और उसी कंबल में गौरव की तरफ पीठ करके आंख बंद करके लेट गई।
अब मुझे गौरव के जागने का इंतजार करना था।
करीब 7:30 गौरव ने अचानक मेरी तरफ करवट ली और उसकी एक टांग मेरे चूतड़ से टकराई।
पर मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि मुझे तो सोने का ही नाटक करना था।
जैसे ही गौरव की एक टांग मुझसे टकराई, गौरव एक झटके से उठ गया।
“आंटी!” गौरव ने मुझे पुकारा.
पर मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
“आंटी!” गौरव ने दोबारा थोड़ी ऊंची आवाज में पुकारा।
पर मैंने फिर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
मेरी बाजू पकड़ कर ‘आंटी आंटी!’ बोलकर गौरव ने एक बार फिर से मुझे जगाने का प्रयास किया पर मैं तो जैसे बहुत गहरी नींद में थी।
दो-तीन बार कोशिश करने के बाद गौरव फिर से वही मेरे पीछे लेट गया और कंबल ओढ़ लिया।
पर कभी भी गौरव और मेरे बीच में काफी दूरी थी।
मैं उसके अगले एक्शन का इंतजार कर रही थी।
करीब 5 मिनट जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मुझे लगा कि इंतजार करना बेकार है, उठ जाना ही बेहतर है।
तभी अचानक मैंने महसूस किया कि गौरव धीरे-धीरे सरक कर मेरी तरफ आने की कोशिश कर रहा है।
मेरे दिल की धड़कन बढ़ने लगी।
गौरव धीरे-धीरे आगे सरक कर मेरी पीठ से चिपक गया अब गौरव का लिंग मुझे अपने चूतड़ पर चुभता महसूस हो रहा था।
गौरव की अगली हरकत से तो मैं हतप्रभ ही हो गई।
करीब 1 मिनट इंतजार करने के बाद जब उसने मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी तो उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर अपना लिंग मेरे दोनों चूतड़ के बीच की दरार में सेट कर दिया और उसके बाद वह फिर उसी स्थिति में शांत पड़ा रहा।
हाय रे… आज 8 दिन बाद मेरे बदन से कोई लौड़ा टकराया था।
पर मुझे अपनी खुशी कंट्रोल करनी थी और सोते रहने का ही नाटक करना था।
मुझे पता था कि अगर मैं जाग गई तो गौरव तुरंत पीछे हट जाएगा।
इस अवस्था में एक-दो मिनट रुकने के बाद अब गौरव ने धीरे-धीरे अपना लिंग मेरे चूतड़ों की दरार में आगे पीछे करना शुरू किया.
पर मैं चुपचाप पड़ी रही.
मेरी एक छोटी सी गलती मेरा काम बिगड़ सकती थी।
गौरव बहुत हल्के हल्के बिना कोई भी जोर का झटका मारे अपने लिंग को मेरे चूतड़ों की दरार में धीरे धीरे हिला रहा था।
अचानक कुछ देर बाद ही वो रुका और बिस्तर से उठकर वॉशरूम की तरफ भागा।
मैं समझ गई कि गौरव खलास हो गया।
बाथरूम का दरवाजा बंद होने के बाद मैं भी उठकर दबे पांव बाथरूम के पास गई और अंदर की आवाज़ सुनने लगी.
अंदर से गौरव की सिसकारियां जोर-जोर से सुनाई दे रही थी।
तभी अचानक पानी चलने की आवाज आई।
मैं वहां से दौड़कर बिस्तर में वापस आई और पहले की तरह ही कंबल ओढ़कर सो गई।
एक मिनट बाद गौरव बाहर निकला और फिर से उसी कंबल में आ गया.
उसने फिर से मुझे दो बार आवाज लगाई पर मैं कहां उठने वाली थी.
जब वह निश्चिंत हो गया कि मैं बहुत गहरी नींद में हूं तो उसने फिर से मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया न होती देख गौरव का हाथ धीरे-धीरे अब ऊपर बढ़ने लगा और मेरी पीठ पर आकर रुक गया.
मेरे दिल की धड़कन बढ़ रही थी, मेरा शरीर भी गर्म होने लगा.
पर मैं खुद पर पूरी तरह से काबू किए हुए थी।
एक-दो मिनट तक इंतजार करने के बाद जब मेरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो गौरव ने अपना सिर उठाकर मेरे चेहरे की तरफ देखा.
मैंने अपना आधा चेहरा कंबल से ढक रखा था।
गौरव ने अपना हाथ मेरी पीठ से ऊपर ले जाते हुए मेरी चूची पर बहुत हल्के से रखा।
अब मुझसे खुद पर कंट्रोल नहीं हुआ।
मेरे थोड़ा सा हिलते ही गौरव ने एक झटके में अपना हाथ वहां से हटा लिया और मेरे पीछे से काफी दूर हो गया।
मैं फिर से दो-तीन मिनट इंतजार करती रही.
पर गौरव की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।
अभी के लिए शायद इतना काफी है।
ये सोचकर मैंने करवट ली और गौरव की तरह मुंह किया।
गौरव मुझसे काफी दूर पलंग के दूसरे कोने पर बैठा था.
मेरी आंख खुली तो गौरव ने नज़रें दूसरी तरफ कर ली।
मैं उठकर बिस्तर में ही बैठ गई।
तभी गौरव मुझसे बोला, “आंटी आप यहां कैसे आ गई?”
मैंने जवाब दिया, “रात को 2 बजे तक मुझे नींद ही नहीं आई बहुत बेचैनी हो रही थी। बदन दर्द कर रहा था और मुझे डर भी लग रहा था तो मैं ऊपर तेरे पास आकर सो गई. पर तू इतनी गहरी नींद में था कि तुझे पता ही नहीं चला।”
“ओह!” गौरव के मुंह से निकला, “अब आपकी तबीयत कैसी है? आपको रात को नींद तो आ गई. यहां तो कोई तकलीफ नहीं हुई?”
मैंने कहा, “नहीं नहीं… यहां तो बहुत अच्छी नींद आई। बहुत आराम भी मिल रहा था।”
सुनकर गौरव मुस्कुराया।
मैंने पूछा, “चाय पिएगा।”
वो बोला, “आंटी, आप बैठिए मैं बना लेता हूं।”
और बिस्तर से उतरकर गौरव अपने कपड़े पहनने लगा।
मैं नहीं चाहती थी कि वो अभी अपनी पैंट और शर्ट पहने।
मैं चाहती थी कि वह अभी यहां अंडरवियर में ही बैठा रहे।
मैं एक झटके से बिस्तर से उठी और उसके हाथ से उसकी पैन्ट लगभग छीनते हुए बोली, “तू इतनी जल्दी क्यों उठता है, मैं हूं ना, मैं चाय ले आऊंगी तू बैठ आराम से।”
गौरव बोला, “मुझे सुबह चाय पीने की आदत नहीं है मैं तो आप ही के लिए बनाने जा रहा था।”
मैंने कहा, “अगर कुछ करना ही है तो थोड़ी देर मेरी मालिश कर दे मुझे उससे बहुत आराम मिलता है।”
“हां जी… आंटी” बोलकर पास में ही रखा तेल उठाकर गौरव मेरे पास आ गया।
इस बार में उल्टी नहीं बल्कि सीधी लेटी ताकि मैं उसकी नज़रें भी पढ़ सकूं।
जैसे-जैसे गौरव के हाथ मेरी टांगों पर थिरक रहे थे, मैं देख रही थी कि उसकी अंडरवियर में हलचल होने लगी थी।
गौरव ने भी शायद मेरी नजरों को पढ़ लिया था इसलिए उसने तकिया उठाकर अपनी गोदी पर रख लिया।
मैंने हंसते हुए पूछा, “गौरव अब तो तू बड़ा हो गया है कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?
गौरव ने जवाब दिया, “नहीं आंटी मैंने पूछा ऐसा क्यों। तू जवान है!! हैंडसम है!! तेरा गठीला बदन है!! तुझ पर तो कोई भी लड़की मर जाएगी। तूने गर्लफ्रेंड क्यों नहीं बनाई?”
गौरव ने कहा, “आंटी लड़कियां बस पैसे ही खर्च करवाती हैं और मैं इतना बेवकूफ नहीं हूं कि अपनी खून पसीने की कमाई ऐसे उड़ा दूं।”
मुझे गौरव की समझदारी बहुत अच्छी लगी।
मैंने बिंदास होकर अगला सवाल दागा, “पर इस उम्र में तो बहुत मन होता है और इस तरह दिन में चार-चार बार वॉशरूम में जाना अच्छी बात नहीं है शरीर में कमजोरी आ जाएगी। इससे तो अच्छा है कि कोई गर्लफ्रेंड ही बना ले।” मेरी बात सुनकर गौरव जैसे झेंप गया उसे नज़रे नीचे कर लीं।
मैंने अभी-अभी चौका मारा था।
अब मैं छक्का मारना चाहती थी।
मुझे पता था कि अगर मैं मौका चूक गई तो दोबारा मौका कब मिलेगा पता नहीं।
गौरव बिल्कुल चुप बैठा था।
मैंने फिर गौरव को कहा, “डरने की जरूरत नहीं है इस उम्र में ये सब के साथ होता है। जब मैं 18-19 साल की थी तब मेरे साथ भी होता था यही तुम्हारे साथ भी होता है पर समस्या ये है कि हमारे समाज में बड़े बच्चों को कभी भी ना तो इस बारे में कुछ समझाते हैं, न हीं खुलकर बात करते हैं। इससे एक तो बच्चों के अंदर ही ये डर हो जाता है कि वो कोई गलत काम कर रहे हैं और दूसरा वो यह सब चीज छुपा कर करते हैं।”
“हां जी” गौरव ने बस इतना ही बोला।
मैं फिर बोली, “पर मैं उन ख्यालात की नहीं हूं। तू मुझसे खुलकर बात कर सकता है और तू मुझे अपनी आंटी नहीं बल्कि दोस्त समझ ले। तो बात करने में भी आसानी होगी।”
“हां जी” गौरव ने फिर इतना ही बोला।
“हालांकि इस उम्र में लगभग सभी लोग हस्तमैथुन करते हैं. पर दिन में तीन-चार बार करना ठीक नहीं! इससे तेरी सेहत को नुकसान हो सकता है।” मैंने कहा।
तब गौरव की थोड़ी सी हिम्मत बढ़ी, वो बोला, “नहीं, मैं दिन में तीन-चार बार नहीं करता हूं वह तो अभी एक-दो दिन से हो रहा है।”
मैंने हंसते हुए पूछा, “कहीं यह मेरी चिकनी टांगों का असर तो नहीं?”
गौरव बिस्तर पर चुपचाप ही बिना कोई जवाब दिए नजर झुका कर बैठा रहा।
अब मैं उसे मोड़ पर आ गई थी जहां से वापस जाने का कोई रास्ता नहीं था।
मैंने अपनी टांगें उठाई और गौरव की गोदी में रख दी।
गौरव ने नजर उठा कर मेरी तरफ देखा।
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “चैक कर रही हूं कहीं यह मेरी चिकनी टांगों का असर तो नहीं।”
मैंने देखा गौरव ने अपना हाथ बढ़ाकर मेरी टांगों पर रख लिया पर उसकी नज़रें नीचे से ही लगातार मेरी नाइटी में दिखाई देती चूचियों पर टिकी थी।
अब मैं शायद सही दिशा में बढ़ रही थी।
तभी मैंने महसूस किया कि गौरव के अंडरवियर में कुछ तनाव होने लगा।
मैंने जानबूझकर अपने एक पैर से अंडरवियर के ऊपर से ही उसके लिंग को हल्का सा टच करते हुए कहा, “ये तो तय हो गया कि यह मेरे टांगों का ही असर है। अब तुझे एक बार फिर से वॉशरूम में भागना पड़ेगा।”
“नहीं नहीं ऐसा नहीं है।” गौरव ने बस इतना ही बोला और अपने ऊपर से मेरी टांगें हटाने की कोशिश की।
मैंने अगला वार किया और कहा, “मैं कल से महसूस कर रही हूं कि तू मुझसे नज़रें चुरा कर बार-बार घूर घूर कर मेरे बदन को देख रहा है।”
“नहीं आंटी ऐसा नहीं है।” गौरव ने कहा।
मैं बोली अभी थोड़ी देर पहले हम दोस्त बन चुके हैं। तो आंटी नहीं दोस्त की तरह ही बात कर!”
“ओ के” गौरव ने जवाब दिया और बिस्तर छोड़कर खड़ा हुआ।
मैंने देखा गौरव का लिंग पूरा तन चुका था।
मैंने गौरव को कहा, “अब वॉशरूम में जाने की कोशिश मत करना।”
“जी” गौरव बोला।
मैंने फिर से पूछा, “तुझे मेरे अंदर सबसे अच्छा क्या लगता है?”
गौरव ने कहा, “आप तो पूरी ही बहुत अच्छी हैं।”
मैंने कहा, “कभी बताया नहीं?”
उसने जवाब दिया, “आपने कभी पूछा ही नहीं।”
मैंने आगे बढ़कर अपना पैर फिर से उसके अंडरवियर के अंदर तने लिंग पर मारते हुए पूछा, “अब इसका क्या करेगा?”
“जी कुछ नहीं।” उसने जवाब दिया।
मेरा पैर लगने से उसका अंडरवियर थोड़ा सा नीचे हो गया मैंने देखा उसके वहां पर कोई बाल नहीं था।
शायद वो साफ रखता था।
मैंने तुरंत आगे बढ़कर उसका अंडरवियर पकड़ा और एक झटके में नीचे कर दिया.
मेरे सामने अब गौरव का तना हुआ लिंग उछाल मार रहा था।
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