Wo Chodah Din - 10
सेक्स प्ले विद यंग बॉय का मजा मैंने लिया अपने पति की अनुपस्थिति में अपने बेटे के दोस्त के साथ. वह अकसर मेरी मदद करता था इस आस से कि कभी मैं उसे सेक्स का मजा दूंगी.
कहानी का पिछला भाग: मैं चुद ही गयी अपने बेटे के दोस्त से
अब आगे सेक्स प्ले विद यंग बॉय:
गौरव भी मेरे पीछे रसोई में आकर मेरी चूचियों से खेलने लगा।
पर मैं अब थोड़ा थक गई थी; मुझे थोड़ी देर आराम करना था।
मैंने उसको समझाया कि सुबह करेंगे अभी सो जा!
और हम दोनों मेरे बिस्तर पर नंगे चिपक कर सो गए।
रात को करीब 3:00 बजे मुझे प्यास लगी तो मैं उठकर रसोई में आई और पानी पीकर वापस अपने बिस्तर पर पहुंची.
गौरव बिल्कुल सीधा सोया हुआ था, उसका लौड़ा भी तन कर बिल्कुल सीधा खड़ा था.
ऐसे लग रहा था जैसे अभी ऊपर छत में छेद कर देगा।
मैं दुबारा रसोई में गई।
फ्रिज में से थोड़ा सा शहद निकाला, आ कर गौरव के खड़े लोड़े पर लगाया और उसको लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।
कुछ सेकेंड के ही गौरव भी जाग गया।
उसने हाथ बढ़ाकर फिर से मेरी चूचियां दबा ली।
पर मुझे तो सोना था क्योंकि मैं सुबह जल्दी उठ जाती हूं।
तो मैंने बहुत तेजी से उसके लौड़े की मसाज शुरू कर दी।
उसने अपना लौड़ा मेरे हाथ से छुड़ाने की कोशिश भी की, पर मैं लगी रही।
थोड़ी देर के मेहनत के बाद ही गौरव का प्रेम रस उबल उबल कर बाहर आने लगा।
मैंने टिशू पेपर से उसको अच्छे से साफ किया और फिर से गौरव से चिपक कर लेट गई।
मेरे लेटते ही वो किसी बच्चे की तरह मेरे दुदू पीने लगा।
ऐसे ही पता नहीं चला मुझे कब नींद आ गई।
मेरी आंख सुबह अपने टाइम से थोड़ा लेट करीब 6 बजे खुली।
गौरव अभी भी सोया हुआ ही था।
उसका लौड़ा फिर से तन कर खड़ा था।
अब मेरा मन एक बार खेलने का था।
तो मैं झुक कर अपनी चूचियों के बीच में गौरव का लौड़ा भींच कर हिलाने लगी।
गौरव भी जाग गया।
“आह आंटी” उसके मुंह से निकला।
मैंने बोला, “अब मैं आंटी नहीं, दोस्त हूं।”
उसने भी “हां” में सर हिलाया और बिस्तर पर बैठ कर मेरे होठों पर अपने हाथ रख दिए।
कुछ देर तक यूं ही दोनों एक दूसरे के होठ चूसते रहे।
अलग होते ही गौरव बोला, “आपके लिप्स तो बहुत रसीले हैं।”
अपनी तारीफ सुनना मुझे भी अच्छा लगा।
मैंने अपने होठों से गौरव के लौड़े को चूम लिया तो उसके मुंह से भी आह निकल गई।
हालांकि मन तो बहुत कुछ करने का था पर लेट उठने की वजह से टाइम नहीं था।
मुझे सब काम निपटा कर ऑफिस भी जाना था।
गौरव वहीं बस्तर पर पीछे सिरहाने पर पीठ लगा कर बैठा था।
मैं भी एक पैर ऊपर से घुमा कर उसकी गोदी में बैठ गई।
उसका लौड़ा खुद ही सीधा मेरी तड़फती कामरसदायिनी चूत के अंदर चला गया।
मैं उछल उछल कर गौरव के लंड पर कूदने लगी।
मेरी दोनों चूचियां बार बार गौरव के मुंह से टकरा रही थी।
वो अपनी जीभ से बार बार उनको एक एक करके चाटने की कोशिश करने लगा।
मैंने गौरव के दोनों तरफ हाथ करके कमर से पकड़ कर उसको अपनी बाहों में भींच लिया।
अब मैं लगातार गौरव को चोद रही थी।
कुछ ही धक्कों के बाद मेरा कामरस निकल कर गौरव के लंड पर बहने लगा।
गौरव का लंड अब भी कड़क खड़ा था।
मैं उसके ऊपर से उतरी और टिश्यू पेपर ले कर उसको अच्छे से साफ किया।
फिर अपने हाथ से पकड़ कर उसकी मुठाने लगी।
गौरव तो बस पूरा मजा ले रहा था।
थोड़ी देर बाद मेरी मेहनत रंग लाई और गौरव का लावा निकल कर सीधा मेरे मुंह से टकराया।
मैंने टिशू पेपर से सब कुछ अच्छे से साफ किया और वॉशरूम की तरफ भागी।
गौरव भी मेरे पीछे पीछे वॉशरूम में आ गया।
हम दोनों ने ही वहां पेशाब किया और मैंने सीधा शावर चला दिया।
एक साथ नहा कर हम दोनों बाहर आए और कपड़े पहने।
मैंने गौरव को अपने घर जाने को बोला.
पर वो थोड़ी देर और रुकना चाहता था।
मैंने गौरव को समझाया कि अभी मुझे भी ऑफिस जाना है, और तुझे अपनी शॉप पर। शाम को ऑफिस से आ कर प्लान करते हैं।
मेरी बात मान कर गौरव वहां से चला गया।
आज राजीव को गए दसवां दिन था।
मैं जल्दी जल्दी अपने काम निपटा कर ऑफिस चली गईं।
मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक थी।
अब मेरा फोकस बस काम पर होने लगा।
मैंने तय किया कि अब गौरव को नहीं बुलाऊंगी।
ऑफिस के बाद मैं घर पहुंच कर बस चाय ही पी रही थी कि गौरव का कॉल आ गया, पूछने लगा- कितनी देर में आऊं?
मैंने बोला- आज काम बहुत है। आज तो मिलना बहुत मुश्किल है।
पर वो बच्चों की तरह प्लीज़ प्लीज़ बोल कर जिद करने लगा।
वो आज रात भी मेरे पास ही रुकने की जिद करने लगा।
पर मैं नहीं चाहती थी कि गौरव के मम्मी पापा कुछ ऐसा वैसा सोचने लगें.
इसीलिए मैंने गौरव को रात को रुकने के लिए स्पष्ट मना कर दिया।
पर उसके बार बार अनुरोध पर मैंने उसको तुरंत आने को बोला वो भी बस एक घंटे को।
गौरव बोला बस 10 मिनट में पहुंच जाऊंगा।
मैंने बोला, “हाथ मुंह धो कर फ्रेश हो कर ही आना और आते हुए मेरे लिए आइसक्रीम ले कर आना।”
गौरव को बोल कर मैं भी तुरंत नहाने चली गई।
नहा कर मैंने तौलिए से अपना बदन पौंछा और नंगी ही बाहर आ गई।
सोफे पर बैठ कर मैं गौरव का इंतजार करने लगी।
10 मिनट से भी पहले गौरव मेरे घर के बाहर था।
मैंने दरवाजा खोला तो गौरव अंदर आया।
मुझे पहले से ही नंगी देख कर उसने साथ में लाया पैकेट टेबल पर रखा और मेरे पास आ कर मेरे पूरे बदन को बेतहाशा चूमने लगा।
मैंने उसको रोकते हुए कपड़े उतारने को बोला।
एक झटके में उसने अपने सारे कपड़े उतार दिये, वो नंगा हो कर मेरे पास ही बैठ गया।
मैं उसकी गोदी में सर रख कर लेट गई।
उसकी लुल्ली मेरे सर के नीचे दब रही थी.
मेरा सर थोड़ा सा ऊपर उठाया तो पहले उसने अपनी लल्ली एडजस्ट की, फिर आराम से मेरे मुंह को चाटने लगा।
मैंने पूछा- आइसक्रीम लाया है?
उसने बोला, “हां जी, पूरी ब्रिक लाया हूं।”
मैं उठ कर रसोई से बॉउल और स्पून उठा लाई।
मैंने थोड़ी सी आइसक्रीम बॉउल में परोसी और फिर गौरव की गोदी में लेट गई।
मैंने गौरव से पूछा, “बोल, क्या मन है?”
वो मुस्कुराते हुए बोला, “जो आप कहो मेरी आका।”
मैंने बॉउल से आइसक्रीम ले कर अपनी चूचियों पर फैला दी।
गौरव तो जैसे पागल ही हो गया।
वो बिना एक सेकंड गंवाए मेरी दोनों चूचियों को चाटने लगा।
अब तो मैं भी अपने होश खोने लगी।
मुझे सिर के नीचे गौरव के लौड़े का आकार भी बढ़ता हुआ महसूस होने लगा।
तभी गौरव मेरे सिर के नीचे से उठा और मुझे वहीं लिटा कर मेरे बराबर में इस तरह बैठ गया कि अब उसका मुंह मेरी तरफ था।
वो आगे बढ़ कर मेरी दोनों चूचियां चाटने लगा।
मुझे नशा सा चढ़ने लगा।
गौरव का पूरा खड़ा हो चुका लौड़ा मेरे मुंह के ऊपर था।
मैंने हाथ में थोड़ी सी आइसक्रीम ली और उसके लौड़े पर चुपड़ कर मैं भी गौरव का लौड़ा चाटने लगी।
मेरे तो जैसे पूरे शरीर में चीटियां सी दौड़ रही थीं, मेरी टांगें खुद ही बेकाबू सी हो रही थीं।
मैं वहीं लेटी लेटी ही अपने चूतड़ खुद ही ऊपर उछाल रही थी।
ये देखते ही गौरव मेरे सर की तरफ से उठ कर मेरे पैरों की तरफ आ कर बैठ गया।
उसने अपनी दो उंगलियों में आइसक्रीम भरी और मेरी चूत के अंदर सरका दी।
“उफ्फ… ये क्या कर दिया जालिम तूने।” मैं चिल्लाई।
गौरव तो बस पागलों की तरह मेरी चूत में भरी आइस्क्रीम चाट रहा था और मैं भी चूतड़ उचका उचका कर उसका साथ देने लगी।
गौरव अपने दोनों हाथों से मेरा पूरा बदन सहला रहा था और साथ में लगातार मेरी चूत भी चाट रहा था।
कुछ ही देर में मेरी चूत के अंदर की सारी आइसक्रीम खत्म हो गई।
गौरव ने फिर से बाउल से आइसक्रीम उठाने को हाथ आगे बढ़ाया तो मैंने उसका हाथ रोक कर उसके लौड़े की तरफ इशारा किया।
वो एक दम मेरा इशारा समझ गया।
मैंने अपनी दोनों टांगें फैला कर गौरव को आने का निमंत्रण दिया।
गौरव भी बिना समय गंवाए सीधा अंदर दाखिल हो गया और मुझ पर छा गया।
मैंने फिर से थोड़ी सी आइसक्रीम ले कर अपने पेट और चूचियों पर लगा दीं और गौरव को पकड़ कर अपने बदन से चिपका लिया।
अब जिस झटके से वो मुझे चोद रहा था।
उसी झटके से हम दोनों के बदन के बीच आइसक्रीम भी पिघल रही थीं।
मैं शायद ज्यादा गरम हो गई थी; इस बार मैं जल्दी आ गई.
पर गौरव के धक्के बदस्तूर जारी थे।
मैं उसको रोकना नहीं चाहती थीं।
मैं भी उसके लिंग की बारिश का इंतजार कर रही थी।
कुछ देर बाद गौरव भी निपट गया।
थोड़ी देर तक हम ऐसे ही पड़े रहें फिर एक साथ ही वॉशरूम गए।
पानी लेकर मैंने अपनी चूत भी धोई और गौरव का लंड भी पूरा साफ किया।
गौरव ने पेशाब करने के लिए टॉयलेट सीट की तरफ मुंह किया तो मैंने उसका लंड पकड़ कर उसको अपनी तरफ घुमाया।
“छोड़ो प्लीज़, पेशाब निकल जायेगा।” गौरव बोला।
“मेरे ऊपर ही कर दे।” बोल कर मैं गौरव के सामने ही फर्श पर बैठ गईं।
गौरव ने भी बिना समय गंवाए अपने पेशाब की धार मेरी चूचियों पर मारनी शुरू कर दीं।
‘उफ्फ’ क्या जन्नत का मजा था, मैं बयां नहीं कर सकती.
हालांकि मैं चाहती थी कि ये सेक्स प्ले विद यंग बॉय लगातार चलता रहे।
पर थोड़ी से देर में वो धार रुक गई.
मैंने पूछा, “क्या हुआ?”
तो गौरव बोला- बस हो गया।
तो अब मैं क्या कर सकती थी।
“आपको अच्छा लगा?” गौरव ने पूछा।
“हां बहुत!” मैंने जवाब दिया।
गौरव बोला, “आपको जब पेशाब आए, तो आप भी मेरे ऊपर कर देना। मुझे भी ये मजा लेना है।”
मैंने तुरंत गौरव को वहीं फर्श पर बिठाया और अपनी दोनों टांगें उसके दोनों तरफ खोल कर खड़ी हो गई।
मेरा पेशाब गौरव के सर से होता हुआ पूरे बदन को नहला कर उसके लंड तक पहुंच रहा था।
मैंने देखा गौरव का लंड फिर से हिलने लगा।
जैसे ही मैं रुकी, गौरव बोला, “और करो न प्लीज़, बहुत अच्छा लग रहा है।”
“बस मेरा भी हो गया।” मैंने हंसते हुए कहा।
शावर चला कर हम दोनों एक साथ ही नहाए और बाहर आकर कपड़े पहने।
मैंने घड़ी में देखा, 8.30 बज चुके थे.
मैंने गौरव को जाने को बोला।
वो भी बिना बहस किए तुरंत ही चल गया।
मैंने अपने लिए खाना बनाया और राजीव के कॉल का इंतजार करने लगी।
10.15 पर राजीव का कॉल आया।
मैंने उनसे और शालिनी से आधा घंटा बात की और आज का प्लान पूछा।
उन्होंने बोला आज कोई प्लान नहीं है।
तो मैंने गुड नाईट बोला और आ कर सो गई।
अगली सुबह मेरी आंख वही 5.30 बजे खुली।
मैंने देखा आज राजीव को गए ग्यारहवां दिन था, अब बस कुछ ही दिन की बात थी।
मैं अपना नित्य कर्म निपटा कर ऑफिस चली गई।
दिन के करीब 2 बजे कविता का कॉल आया तो वो मार्केट चलने को बोली।
मैंने भी 4-5 दिन से शॉपिंग नहीं की थी तो मैंने कविता को “हां” बोल दिया।
3 बजे हम लोग मार्केट में मिले और जरूरत की शॉपिंग की।
वहां से हम दोनों साथ ही मेरे घर आ गए।
कविता ने मुझसे पूछा, “मिला कोई?”
मैंने अनजान बनते हुए पूछा, “कौन?”
कविता हंसती हुई बोली, “ज्यादा सीधी मत बन. मैं जानती हूँ तुझे। तू इतने दिन रुक ही नहीं सकती।”
मैं भी हंसने लगी।
कविता उठ कर मेरे पास आई और मेरे कमीज के ऊपर से ही मेरे बूब्स को दबाते हुए बोली, “इनकी जरूरत मुझे पता है। सच बोल न, मिला कोई? या बस उंगली से ही?”
मैंने भी कविता को टालते हुए बोला, “मैं तो सोच रही थी राजीव के जाने के बाद सबसे ज्यादा तू ही मेरा ख्याल रखेगी. पर तू तो आज 11 दिन बाद जागी है।”
मेरे दोनों बूब्स दबाती हुई कविता बोली, “कोई बात नहीं आज 11 दिन की कसर निकालते हैं।”
मैं कविता से खुद को छुड़ाते हुए रसोई में चाय बनाने चली गई।
मैं चाय बना कर आई तो देखा कविता अपना टॉप और ब्रा उतार कर बैठी थीं कविता के बूब्स बहुत बड़े हैं 42 साइज के।
और उसका निप्पल भी एक इंच बड़ा है।
मुझे शुरू से ही कविता के बूब्स बहुत पसंद हैं.
और कविता ये अच्छे से जानती है।
मैं चाय नीचे रख कर नीचे फर्श पर बैठ गई और कविता की एक चूची अपने मुंह में पकड़ ली दूसरी अपने हाथ में।
उफ्फ… कविता के मुंह से निकला।
वह बोली, “ये तो तेरे लिए ही खोला है पहले कम से कम चाय तो पी लें।”
मैं उसकी बात सुन पर झेंप गई और चाय ले कर उसके बराबर में बैठ गई।
कविता बोली, “यार मैंने सोचा तूने तो इतने दिन में याद किया नहीं, आज मैं ही कोशिश करती हूं।”
मैंने भी अपनी गलती मानते हुए उसको “सॉरी” बोला।
मैंने उसको आज रात यहीं अपने साथ रुकने का ऑफर किया।
कविता बोली, “यार घर में हसबैंड को सिर्फ शॉपिंग के लिए बोल कर आई हूं। इसीलिए रुकना मुश्किल है।”
तो मैंने कहा- चाय पीकर तेरे घर ही चलते हैं, मैं बात कर लूंगी तेरे हसबैंड से, और फिर आज रात तू यहीं रुकना मेरे पास।”
कविता ने बस ‘ओ के’ बोला और चाय पीने लगी।
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