वो चौदह दिन- 6

Views: 64 Category: Jawan Ladki By me.funny123 Published: June 23, 2026

Wo Chodah Din - 6

न्यूड मसाज़ स्टोरी में मेरी वासना ने मुझे मेरे बेटे के दोस्त की तरफ धकेल दिया. वह खुद भी मेरे साथ सेक्स का मजा लेना चाह रहा था. मेरी मालिश के बाद उसने बाथरूम में मुठ मारी.

कहानी का पिछला भाग: बेटे के दोस्त के लंड से चुदने की तैयारी

अब आगे न्यूड मसाज़ स्टोरी:

मैं अपने बिस्तर में आ गई और सोने की कोशिश करने लगी।
मैंने अपने मोबाइल पर अंतर्वासना साइट खोल ली।
एक अच्छी सी कहानी पढ़ने-पढ़ने मुझे नींद आने लगी और मुझे पता भी नहीं चला मैं कब सो गयी।

सुबह 7:00 बजे मेरे पास नैना भाभी का कॉल आया।
उन्होंने मेरी तबीयत के बारे में पूछा।
तो मैंने बताया, “मैं बिल्कुल ठीक हूं।”

उन्होंने नाश्ते के लिए पूछा।
मैंने जवाब बोला, “नाश्ते में तो आज मैं दूध और ब्रेड ही खा लूंगी। दिन में पार्लर चलते हैं, मुझे कुछ काम करवाना है। क्या आप मेरे साथ चलेंगी?”
नैना भाभी ने कहा, “मैं 11 बजे तक तेरे पास आ जाऊंगी।”

मैं तुरंत उठकर नहा धोकर तैयार हुई और अपने लिए नाश्ता बनाया.
मुझे लगा, एक बार ऑफिस देखकर आना ज्यादा बेहतर है।

मैं अपने ऑफिस के लिए निकल गई और 11 बजे से पहले ही घर आ गई।

11:30 तक नैना भाभी भी मेरे घर पहुंच गई।
मैं उनके साथ पार्लर के लिए निकल गई।

मैंने फेशियल वेक्स ब्लीच मैनीक्योर पेडीक्योर और बालों की ट्रीमिंग भी कर लिया।
साथ में फुल बॉडी मसाज भी।

अब मैं गौरव के लिए तैयार थी।

आज मेरे पति को गए सातवां दिन था। उम्मीद थी, मेरे साथ भी आज कुछ नया होने वाला था।
इसी उम्मीद के साथ नए उत्साह और नई उमंग के साथ में नैना भाभी के साथ रास्ते से ही लंच करते हुए घर वापस आ गई।

नैना भाभी को अपने घर वापस जाना था।
उन्होंने कहा कि रात को डिनर भी वो ही भेज देंगी।

उनके जाने के बाद मैं गौरव के स्वागत की तैयारी करने लगी।
अपने बिस्तर की चादर बदली, कमरे को साफ-सुथरा नया रूप देने की कोशिश की।

पर अभी तक मैं यह नहीं समझ पा रही थी कि गौरव को अपने लिए सेट कैसे करूं?
मैं सिर्फ यह सोचकर ही खुश थी कि गौरव ने मुझे फील करते हुए मुठ मारी।

अब यह काम तो पता नहीं वह कितने समय से कर रहा होगा।
फिर भी एक उम्मीद की किरण तो जगी ही थी।

मैं मन ही मन बहुत सारे अलग-अलग प्लान बनाने लगी।

करीब 7:30 नैना भाभी का कॉल आया- गौरव आ गया है. अगर कहो तो डिनर अभी भेज दूं।
मैंने कहा- जी भाभी, भेज दीजिए। पर मुझे गौरव से एक दो काम करवाने हैं तो उसको यहां थोड़ा समय लगेगा।
नैना भाभी हंसते हुए बोली, “कोई बात नहीं ज्यादा समय लगेगा, तो भी कोई दिक्कत नहीं है। अगर लेट हो जाए तो उसको बोलना वहीं सो जाएगा, सुबह घर आ जाएगा।

मुझे ऐसा लगा जैसे नैना भाभी ने तो मेरे हाथ में संजीवनी बूटी दे दी।

मैं तुरंत अपने बिस्तर से उठी बाथरूम में नहाने गई और बिना अंडर गारमेंट्स के सिर्फ एक सेक्सी सी नाइटी पहन ली।
मैंने लिपस्टिक लगाकर हल्का सा मेकअप भी कर लिया और बाहर आकर सोफे पर लेट गई.

तभी दरवाजे पर घंटी बजी।
मैंने खिड़की से झांककर देखा तो बाहर गौरव ही था।

मैंने एकदम झटके से उठकर जाना ठीक नहीं समझा।
दो-तीन बार घंटी बजने के बाद मैं धीरे-धीरे चलकर दरवाजे तक पहुंची और दरवाजा खोला।

गौरव ने पूछा, “आंटी बहुत देर लगा दी। सब ठीक है ना?”
“हां, सब ठीक ही है। पर मेरा भी पूरा बदन दर्द कर रहा है। चला फिरा नहीं जा रहा। तो दरवाजे तक आने में थोड़ा समय लग गया।” मैंने जवाब दिया।

गौरव मेरे पीछे-पीछे अंदर आता हुआ बोला, “कल मालिश करवा के भी आपको आराम नहीं मिला?”
मैंने कहा, “कल तो ऐसा लगा जैसे मैं बिल्कुल ठीक हो गई हूं। आज तो मैं तेरी मम्मी के साथ बाजार की गई थी। पर अब धीरे-धीरे जैसे शाम होने लगी मेरी हालत फिर खराब होने लगी।”
गौरव बोला, “आज आप दवाई भी नहीं लाई हैं। मैं पहले डॉक्टर से आपके लिए दवाई ले आता हूं।”
मैंने गौरव को रोका और कहा, “तू रहने दे। मैं ऐसे ही ठीक हो जाऊंगी। तू थोड़ी सी मालिश कर देना मुझे उससे बहुत आराम मिलता है।”

गौरव ने बस “ओके” बोलकर मुझे खाना खाने को बोला।
मैंने कहा, “अभी मुझे भूख नहीं है। तू थोड़ी सी मालिश कर दे, शायद आराम मिल जाएगा।”

गौरव तो जैसे इंतजार ही कर रहा था।
वो तुरंत मेरे कमरे में गया और तेल उठा लाया।
उसने अपने हाथों पर तेल चुपड़ लिया।

मैंने भी अपनी नाइटी अपनी जांघ तक उठा ली.
फिर मुझे आभास हुआ कि मैंने नीचे कुछ नहीं पहना है।
मुझे लगा कि गौरव के सामने एकदम इतना खुलना ठीक नहीं है.
मैं वहां से उठी और अपने कमरे में जाकर पैंटी पहनी।

बाहर आकर मैंने फिर से अपनी नाईटी जांघों तक उठाकर गौरव के सामने टांगें फैला दी।

गौरव ने जैसे ही मेरी टांगें देखी, मैंने उसकी आंखों में चमक महसूस की क्योंकि कल के मुकाबले आज मेरी टांगें हैं ज्यादा गोरी और चिकनी भी लग रही थी वैक्सिंग जो कराई थी।
गौरव के चेहरे पर अलग ही मुस्कुराहट थी।
हालांकि वो कुछ बोला नहीं, पर उसकी मुस्कुराहट मैं महसूस कर रही थी।

गौरव तनमयता से मेरी टांगों पर तेल लगाने लगा।
अब मेरी नजर पूरी तरह से गौरव की पैन्ट के उस भाग पर थी।

जैसे-जैसे गौरव के हाथ मेरी टांगों के ऊपर कि तरफ बढ़ने लगे, मैंने महसूस किया कि गौरव की पैन्ट का वो भाग भी टाइट होता जा रहा है।
उस तनाव को देखकर मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश थी।
मैं गौरव के सामने सोफे पर उल्टी लेट गई और अपनी नाईटी भी पीछे से अपने नितंबों तक ऊपर कर दी।

गौरव ने भी मौके का फायदा उठाते हुए अपने हाथों को तेल से चुपड़ कर मेरी टांगों के पिछले हिस्से की मालिश शुरू कर दी.
धीरे-धीरे उसके हाथ खुद ही सरककर मेरी जांघों तक आने लगे।
वाह क्या सुखद अहसास था!!

मैं तो जैसे आनंद के सागर में गोते लगा रही थी।
गौरव लगातार मेरी जांघों पर ही न्यूड मसाज़ कर रहा था।
मैं चाह रही थी कि गौरव के हाथ थोड़ा और ऊपर तक आए और मेरी पैंटी को छूने लगे।
पर गौरव भी शायद यह ध्यान रख रहा था कि उसके हाथ किसी भी स्थिति में मेरी पैंटी को न छूएँ.
मैं इंतजार कर रही थी की कब गौरव मेरी जांघों से थोड़ा ऊपर जाकर मेरे नितंबों को सहलाना शुरू करें।

मैंने महसूस किया कि गौरव अब बस एक ही हाथ से मालिश कर रहा था।
काफी देर तक इंतजार करने में बाद जैसे ही मैंने नजर घुमाकर पीछे की तरफ देखा तो गौरव एक हाथ से मेरी चिकनी जांघों को पीछे से सहला रहा था, और दूसरे हाथ से अपनी पैन्ट के पूरी तरह से तनाव में आ चुके ऊपरी भाग को भी सहला रहा था।

मेरी नजर अचानक घूमती देखकर गौरव ने हड़बड़ाहट में अपना हाथ वहां से हटाया।
मैंने छेड़ने के अंदाज में गौरव को बोला, “गौरव तुझे शायद एक बार टॉयलेट जाना चाहिए।”
मेरे इतना कहते ही “हां…जी…” बोलकर गौरव वहां से बहुत तेजी से भाग कर टॉयलेट में घुस गया.

मैं समझ गई कि मेरा जादू धीरे-धीरे चल रहा है।
मैं भी लगभग भागती हुई गौरव के पीछे पीछे टॉयलेट तक गई और दरवाजे के पीछे से आवाज सुनने की कोशिश करने लगी।

“आह…आह…आह…” की बहुत तेज आवाज अंदर से आ रही थी, गौरव मेरे लिए ही मुठ मार रहा था।
काश … वो दृश्य मैं खुद देख पाती तो गौरव को ऐसा करने से जरूर रोकती।
पर मैं खुश थी।

मैं वापस आ कर अपनी जगह लेट गई और जानबूझ कर अपनी नाईटी अपने नितंबों तक ऊपर सरका ली।

थोड़ी देर बाद गौरव थका थका सा बाहर आया, मेरे पास आकर बैठ गया।

मैंने मुस्कुराते पूछा काफी थक गया है, पानी दूं क्या?
गौरव बोला, “नहीं’ मैं खुद ही ले लूंगा।”
फिर पानी पी कर गौरव मेरे पास ही आ कर बैठ गया।
रात के 8.30 हो चुके थे गौरव मुझसे नजर बचा कर बार बार मेरी चिकनी जांघों को घूर रहा था।

मैं भी अपनी नजर दूसरी तरफ करके गौरव को ये मौका देने लगी।

कुछ देर बाद गौरव बोला, “आंटी, आज मौसम में ठंडक फील हो रही है। आप कुछ और पहन लीजिए नहीं तो आपको ठंड लग जाएगी।”
मैंने जवाब दिया, “गौरव मुझे दरअसल बिना कपड़ों के ही सोने की आदत है कपड़े पहन कर मुझे नींद नहीं आती।”

गौरव हंसते हुए बोला, “हां, कपड़े पहनकर तो मुझे भी नींद नहीं आती. पर फिर भी अभी आप कुछ और भी पहन लीजिए, और खाना खा लीजिए।”
मैं समझ गई कि गौरव मुझसे बचने का बहाना ढूंढ रहा है।

मैंने बोला, “चल खाना खा लेते हैं।”
गौरव बोला, “वो तो बस मैं आपके लिए ही लाया हूँ।”
मैंने बोला, “कोई बात नहीं कुछ और ऑर्डर कर देते हैं।”

गौरव, “आप खा लीजिए, “मैं घर चलता हूं।”
मैंने जवाब दिया, “नैना भाभी बोल कर गई थी कि जब तक मैं बीमार हूं, गौरव यहीं रुकेगा और मेरी देखभाल करेगा।”
गौरव बोला, “पर अब तो आप ठीक हैं न!”
मुझे लगा मैं जीती हुई बाजी हारने लगी हूं।

मैंने गौरव को साफ बोला, “जो खाना है मैं ऑर्डर करके यहीं मंगवा देती हूं। तू खाना खा कर ऊपर चेतन वाले कमरे में सो जाना।”
जिस पर गौरव ने भी सहमति दे दी।

हम दोनों ने साथ ही बैठ कर खाना खाया।
मैंने महसूस किया कि गौरव बार बार मुझसे नजर चुरा कर मेरी नाइटी के अंदर मेरे तने हुए चूचे घूरने की कोशिश कर रहा था।
मैं तो चाह रही थी कि खुद ही इनको बाहर निकल कर गौरव के मुंह में ठूस दूं।
पर सामाजिक मर्यादा मुझे रोक रही थी।
खाना खाने के बाद मैंने सोचा की एक बार अपने पति से बात कर लूं फिर दोबारा से गौरव की तरफ ध्यान देती हूं और किसी भी बहाने से उसे अपने बदन को छूने का मौका दूंगी।

टेबल से उठने के बाद मैंने गौरव से कहा, “मैं थोड़ी देर राजीव से बात कर लेती हूं, और अपना फोन लेकर अपने रूम में चली गई।”
मैंने राजीव को कॉल लगाया मैं अपनी आज की प्रगति राजीव से शेयर करना चाह रही थी।

पहली ही घंटी पर राजीव ने फोन उठा लिया मेरी आवाज सुनकर राजीव बोले, “आज तो बहुत चहक रही है, लगता है गौरव को सेट कर लिया।”
मैंने जवाब दिया, “अभी पूरी तरह तो सेट नहीं हुआ है। हां, शुरुआत हो चुकी है।”

“कैसे-कैसे?” राजीव ने आश्चर्यचकित होकर पूछा।
मैंने सुबह से अभी रात तक की सभी गतिविधियां विस्तार पूर्वक राजीव को बताई।
राजीव मेरी इन गतिविधियों से बहुत खुश थे।

उन्होंने कहा, “तूने लोहा गरम कर लिया है अब बस इस पर हथोड़ा मारना बाकी है।”
मैंने जवाब दिया, “आपकी बात तो सही है। पर गौरव और मैं दोनों ही अपने-अपने सामाजिक दायरे में बंधे हैं। मैं भी उस दायरे से निकल कर शुरुआत नहीं कर पा रही हूं और मुझे लगता है गौरव भी शायद उससे निकलने की कोशिश नहीं कर रहा है। समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए।”

राजीव बोले, “अरे जब तुमने इतना कर लिया है तो आगे का रास्ता भी निकाल ही लेगी। कोशिश में लगी रह। किसी भी पुरुष और महिला के बीच एक अदृश्य से दीवार होती है इसी दीवार को ही हम वो सामाजिक बंधन कहते हैं। एक बार वह दीवार टूटने के बाद सभी बंधन खत्म हो जाते हैं। तू थोड़ा सा कोशिश करेगी तो काम हो जाएगा। क्योंकि वहां की स्थिति तुम्हें ही पता है इसीलिए उसका समाधान भी तुम्हें ही खोजना होगा।”

राजीव से बातचीत करते-करते मुझे पता ही नहीं लगा कब 10:30 बज गए।
तभी मुझे ध्यान आया कि बाहर गौरव मेरा इंतजार कर रहा होगा।

मैंने राजीव से कहा, “10:30 बज गए हैं बाहर जाकर देखती हूं जो भी होगा आपको कल बताऊंगी।”
राजीव ने मुझे “बेस्ट ऑफ लक” बोला और फोन रख दिया।

फोन रखने के बाद मैंने एक बार फिर से हल्का सा मेकअप किया लिपस्टिक लगाई और थोड़ा सा परफ्यूम भी मैंने अपनी नाईटी भी बदल ली.
इस बार मेरी नाइटी पिछली नाइटी के मुकाबले थोड़ी सी ऊंची थी यह सिर्फ घुटनों तक ही जा रही थी।

मैं कमरे से बाहर निकली मुझे गौरव पूरे घर में कहीं दिखाई ही नहीं दिया.
मैंने एक दोबारा आवाज भी लगाई पर कोई उत्तर नहीं मिला.

मुझे लगा कि शायद गौरव चला गया.
मैंने खिड़की से बाहर जाकर देखा, वहां गौरव की बाइक खड़ी थी।
तो फिर गौरव कहां गया?

मैंने गौरव को फिर से सारे घर में ढूंढा पर वह मुझे नहीं मिला।

गौरव को ढूंढते ढूंढते मैं ऊपर चेतन के कमरे में गई तो देखा गौरव तो कंबल ओढ़कर सो रहा था।
मैंने दो बार गौरव को आवाज भी लगाई।
पर वह शायद इतनी गहरी नींद में था कि उस पर मेरी आवाज का असर ही नहीं हुआ।

मैं समझ गई यह बहुत गहरी नींद में है.
सुबह से तीन-चार बार मुठ भी मार चुका था।
तो थकान होना लाजमी था।

पर मेरा मूड बहुत खराब हो गया।
मैंने तो पता नहीं क्या-क्या उम्मीदें जगा ली थी।

एक पल को तो मन हुआ कि जोर से चिल्ला कर गौरव को जगा दूं.
पर फिर अहसास हुआ कि मेरा इतना अधिकार नहीं है गौरव पर।

मैं गौरव के कमरे से बाहर निकली और नीचे अपने कमरे में आ गई.

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