विडो चुदाई कहानी में मैंने अपनी गर्लफ्रेंड की मौसी को चोद कर उनकी प्यास बुझा दी थी. मुझे पता नहीं था कि एक और मौसी को मेरे लंड की जरूरत थी.
हैलो फ्रेंड्स, मैं धीरज आप सबके ईमेल पाकर खुद को रोक न सका और अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर पुनः हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
गर्लफ्रेंड की प्यासी मौसी की चूत मारी
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैंने अपनी बचपन की सहेली कल्याणी की मौसी अलका को रात में उनके घर की छत पर ही रगड़ कर चोद दिया था.
अब आगे विडो चुदाई कहानी:
अगली सुबह शादी वाले दिन सब लोग जल्दी उठे.
सिर्फ मैं अकेला थोड़ा लेट उठा क्योंकि मैं आधी रात की चुदाई के बाद थक चुका था.
अलका मौसी का बेटा मेरे लिए चाय लेकर आया और उसने मुझसे तैयार होने को बोल दिया. वह शादी में जाने के लिए रेडी दिख रहा था.
मैं नहाने के लिए बाथरूम गया.
मुझे लगा कि अलका मौसी की कोई ब्रा-पैंटी होगी लेकिन कुछ भी नहीं था.
मैं बाथरूम से निकल कर टेरेस की साइड वाली खिड़की के पास गया.
उधर मैंने रात को ब्रा-पैंटी रख दी थी तो उसे लेकर आया और अलका मौसी के नाम की मुठ मारने लगा.
तभी मौसी मेरे कमरे में आ गईं.
मैंने उन्हें देखा तो मुस्कुरा दिया.
वे भी कमरे का दरवाजा बंद करके मादक नजरों से मुझे देखती हुई अपनी नाइटी को उतारने लगीं.
मैंने पूछा- सब लोग चले गए क्या?
उन्होंने हां में सर हिलाया और मुझे वासना से देखती हुई अपनी नाइटी को अपने बदन से उतार कर एक तरफ रखने लगीं.
उस वक्त नाइटी के नीचे मौसी ने कुछ नहीं पहना हुआ था, इसलिए नाइटी उतरते ही वे एकदम मादरजात नंगी हो गई थीं.
मैं उनके तने हुए दूध देखने लगा.
क्या कमाल के बूब्स थे उसके …
मैंने बिना एक पल की देर किए उठ कर मौसी को अपनी बांहों में खींचा और उनके एक दूध को अपने मुँह में भर कर निप्पल को चूसने लगा.
मेरी इस हरकत पर अलका की ‘आह्ह’ निकल गई.
वे दबे स्वर में बोल रही थीं- हम्म … और चूसो इनको … धीरज और चूसो.
मैं मौसी के बूब्स पर ऐसा टूट पड़ा, मानो वर्षों का भूखा हूँ.
उनके एक चूचे को मुँह में लेकर दूसरे को जोर-जोर से दबा रहा था.
अलका मौसी की गर्म सिसकारियां अब चीखों में बदलने लगी थीं.
मैं समझ गया था कि घर में पक्का कोई नहीं है. मौसी के सर हिलाने से मुझे पहले ही क्लियर हो गया था कि उनके पति और लड़का दोनों शादी में जा चुके हैं. बस कुछ संशय था तो वह अब उनकी चीखों से साफ हो गया था.
मैं अब बिंदास हो गया था और मौसी की चुदाई का मूड बना कर उन्हें भंभोड़ने लगा.
इधर मेरा लंड लोहे जैसा कड़क हो गया था, जिस पर अलका मौसी अपना हाथ मेरी चड्डी के ऊपर से ही चला रही थीं.
फिर मौसी ने ज्यादा देर न करते हुए मेरी चड्डी को नीचे किया और मेरा 6 इंच लंबा लंड अपने मुँह में ले लिया.
वे मेरे कड़क लौड़े को अपने मुँह में लेकर गर्दन को आगे-पीछे करने लगीं, इससे मेरे लौड़े की मुठ सी मारी जाने लगी.
मैं भी मौसी की इस हरकत को साथ देते हुए उनके मुँह को जमकर चोदने लगा.
अलका मौसी ‘उम्म … उम्म … उम्म …’ करती हुई मेरा लंड अपने गले के अंतिम छोर तक ले रही थीं.
मेरा लंड पूरी उफान पर आ गया था और मैं नहीं चाहता था कि मैं बिना अलका मौसी की चूत चोदे उसे झड़ जाने दूँ.
क्योंकि वक़्त कम था इसलिए मैंने जल्दी से अपना लंड अलका मौसी के मुँह से निकाला और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया.
मौसी की टांगों को फैलाया तो मुझे उनकी चिकनी चूत के दर्शन हुए.
मौसी की चूत की महक मुझे मदहोश कर गई.
बिना वक़्त गंवाए मैंने उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मेरे इस हमले से अलका मौसी बिन पानी की मछली की तरह तड़प उठीं.
मैं ‘उम्म … उम्म … उम्म …’ करते हुए मौसी की चूत चाट रहा था और अलका मौसी अपनी चूत उठा-उठाकर मेरे सिर को अपने चूत में दबा रही थीं.
सच में वे बहुत ही प्यासी लग रही थीं.
अगले पांच मिनट बाद मौसी ने मुझसे कहा- अब मत तड़पाओ धीरज … प्लीज जल्दी से चोद दो मेरी चूत को अपने लंड से!
मौसी की बातों की कद्र करते हुए मैंने भी चुदाई का मन बना लिया और अपना लंड अलका मौसी की चूत पर रख दिया.
मौसी की चूत गीली होने की वजह से लंड आसानी से चूत में घुस गया और उनकी ‘आह्ह्ह’ निकल गई.
मैंने धीरे-धीरे करते अपनी चोदने की गति बढ़ा दी.
फिर मैं अलका मौसी की दोनों टांगें उठाकर उन्हें पूरे वेग से चोदने लगा.
मेरे मुँह से भी ‘आह्ह् … आह्ह् …’ की आवाज़ निकल रही थी.
हम दोनों की चुदाई ऐसे चल रही थी कि थप-थप की आवाज़ से दोनों की संतुष्टि दिख रही थी.
करीब 5 मिनट चोदने के बाद मैंने अलका मौसी को कुतिया बनने को कहा.
वे मेरी बात को समझ कर वैसी पोजीशन में हो गईं.
मैं पीछे से मौसी की चूत चोदने लगा.
उस वक्त तक अलका मौसी मस्त हो गई थीं और वे मस्ती से बोल रही थी- आह चोद मेरे प्यारे चोदू … बना दे मेरी बुर का भोसड़ा .. आह मिटा दे इसकी खुजली! तुझे इनाम में एक और चुत दिलाऊंगी!
उनकी दूसरी चुत दिलाने वाली बात से मेरी चुदाई की गति और बढ़ गई.
मैं मौसी को ‘उम्म … उम्म …’ करके चोदे जा रहा था.
करीब 5 मिनट तक और चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था.
मैंने बिना मौसी से पूछे अपने लौड़े का पूरा माल उनकी चूत में ही टपका दिया.
मेरे वीर्य से मौसी की चूत लबालब भर गई थी.
फिर मैंने उन्हें सीधा किया और लंड उनके मुँह में दे दिया.
मौसी ने मेरे लंड को चाटकर साफ कर दिया.
मुझे भी मेरे वीर्य का स्वाद लेना था इसलिए मैंने अलका मौसी के होंठों को चूमना शुरू कर दिया और अपने लौड़े के रस को भी चाट कर मजा ले लिया.
सच में क्या मस्त स्वाद था हम दोनों के रस के मिश्रण का .. मजा आ गया.
इसके बाद हम दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे.
मैंने अलका मौसी को उनकी नाइटी दे दी लेकिन वे मुझसे अपनी रात वाली ब्रा-पैंटी मांग रही थीं.
मैंने देने से मना कर दिया और उनकी ब्रा-पैंटी लेकर वहां से निकल गया.
फिर हम सब तैयार होकर शादी के लिए निकलने को हुए.
मैंने जैसे ही अलका मौसी को देखा तो मेरे मुँह से अनायास ही वाह निकल गया.
सच में हरे रंग की उस साड़ी में अलका कमाल की माल लग रही थी.
मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.
मौसी के उठे हुए चूचे और गांड देखकर तो मेरा लंड फिर सलामी देने लगा, जो कि मौसी ने देख लिया था.
वे हंस कर बोलीं- अब मान भी जा साले ठरकी!
मैंने खुद को कंट्रोल में किया और शादी के लिए निकल पड़े.
सब शादी में इधर-उधर घूम रहे थे.
मैं सिर्फ अलका मौसी की ओर देख रहा था और हाथों से इशारे कर रहा था.
वे मेरे इशारे समझ रही थीं और हंस रही थीं.
मगर पूरी शादी के दौरान वे मेरे पास नहीं आईं.
शादी के बाद मौसी मुझसे बात करने मेरे पास आईं.
उन्होंने मुझसे कहा- शादी वाले घर से कुछ सामान लाना है, साथ में चलो!
मैंने कहा- हां चलो, मेरा सामान भी रेडी है!
वे हंस दी और अपनी बहन के साथ मेरे साथ कार में बैठ गईं.
शादी वाले घर पर आते ही वे दोनों बहनें सामान ढूँढने में लग गईं.
कुछ देर बीत जाने के बाद मैंने दोनों से पूछा- क्या ढूँढ रही हो आप दोनों?
इस पर अलका मौसी की बहन ने कहा- दुल्हन को देने वाला सोने का हार नहीं मिल रहा. पता नहीं कहां रख दिया?
इस पर मेरा जवाब सुनकर दोनों ने ढूँढना ही बंद कर दिया.
मैंने कहा- इतनी देर से नहीं मिल रहा तो अब कहां से मिलेगा? लगता है उसे किसी ने चुरा लिया है. आप लोग वक़्त मत गंवाओ. आप में से कोई मेरे साथ चलो, हम लोग कोई नया हार लेकर दे देंगे.
इस पर उन दोनों ने एक साथ कहा- हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं.
मैंने कहा- मैं हूँ न, आप चलो.
गाड़ी में बैठकर हम सोनार की दुकान की ओर जाने लगे.
तब अलका मौसी को उनके पति का फोन आ गया.
उन्होंने कहा- जल्दी शादी वाले जगह पर आ जाओ. दुल्हन की विदा होने में देर हो रही है.
मैंने अलका मौसी को शादी में छोड़ दिया और उनकी बहन को साथ लेकर सोनार के पास पहुंच कर एक हार खरीद कर मौसी की बहन को देखने लगा.
मौसी की बहन, जिसका नाम नीलू था … वह मुझे देख कर मुस्कुरा दी.
फिर जैसे ही हम लोग सोनार की दुकान से निकले, वैसे ही नीलू ने मुझे धन्यवाद कहा और बोला- इस वक़्त तुम हमारी मदद न करते तो शायद लड़के वाले होने के बावजूद हमें शर्मिंदगी हो जाती.
इस पर मैंने कहा- कोई बात नहीं, शादी में ये सब बातें होती रहती हैं.
इस बार नीलू ने हार के पैसे की बात की और बोला- मैं सबसे बात करके आपके पैसे दिला दूँगी.
मैंने कहा- ये सब बातें बाद में कर लेना, पहले शादी में चलते हैं.
हम लोग जल्दी जल्दी करके शादी में पहुंच गए.
उधर जैसे-तैसे करके शादी निपट गई.
सब लोग दुल्हन को लेकर बड़े धूमधाम से बारात लेकर वापस आ गए.
मैं भी उनके साथ वापस आया और रुक गया.
सब थके हुए थे.
मैंने एक कमरे में रुक कर अलका मौसी को फोन करके बुलाया.
मैंने उनसे कहा कि मैं घर के ऊपर वाले कमरे में आपका इंतज़ार कर रहा हूँ.
मौसी ने कुछ देर में आने को कहा.
मैं उनके आने की राह देख रहा था.
थकान की वजह से मेरी आंखें भी झपक रही थीं तो मैं आंखें मूँद कर दीवार से टिक गया.
थोड़ी देर बाद मुझे महसूस हुआ कि कोई ऊपर आ रहा है.
मैं अलका मौसी को आया समझते हुए उन्हें पीछे से पकड़ने के लिए दरवाजे के पीछे छिप गया.
तभी दरवाजा थोड़ा सा खुला और मैंने पीछे से अलका मौसी को पकड़ लिया.
मैं उन्हें बेहद जोश में चूमता रहा.
वे भी मदहोशी से मेरा साथ दे रही थीं.
मैं ‘अलका … अलका …’ नाम लेकर उन्हें चूम रहा था.
फिर जैसे ही मैंने उन्हें अपनी तरफ घुमाया, मेरे होश उड़ गए … वह अलका नहीं, बल्कि नीलू थी.
मैंने उसे अपने से दूर किया और पूछा- तुम यहां कैसे?
उसका कोई जवाब नहीं आया.
उसका चेहरा गुस्से से भरा पड़ा था.
मैं चुप रहा और उसे माफी मांगने लगा कि मैं यहां अलका का इंतज़ार कर रहा था.
लेकिन उसकी बातों से मैं फिर से हैरान रह गया.
नीलू ने कहा- मैं जानती हूँ कि तू अलका का इंतज़ार कर रहा था. उसने ही मुझे यहां भेजा है. उसने मुझसे कहा है कि एक बार धीरज का लंड लेकर देख, तेरी पूरी खुजली मिट जाएगी!
मैंने उनके मुँह से लंड शब्द सुनकर भी कमरे से बाहर जाने की बात की.
लेकिन नीलू ने मेरा हाथ पकड़ लिया और उसने मुझे अपनी दुखभरी ज़िंदगी का दर्द सुनाना शुरू किया.
‘जब से मेरे पति का देहांत हुआ है, तब से मैं अकेली हूँ. जब से अलका ने उस रात वाली चुदाई के बारे में मुझे बताया है, तभी से मुझे तुमसे चुदने की बहुत इच्छा थी. इसीलिए मैं सोनार की दुकान तुम्हारे साथ आई थी!’
अब मैं समझ गया कि अलका मौसी ने जिस दूसरी चुत दिलाने की बात कही थी, वह नीलू की चुत ही थी.
बस फिर क्या था … मैंने ज्यादा देर न करते हुए उसे वापस जकड़ लिया और चूमने लगा.
उसने भी मेरे होंठों को ऐसा पकड़ कर लिया था मानो वह मेरा साथ देने में एक कदम आगे थी.
करीब 2 मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद मैंने उसकी कुर्ती को निकाल दिया.
उस वक्त वह मेरे सामने काली ब्रा में थी. उसके चूचे ज्यादा बड़े तो नहीं थे, लेकिन ठीक थे.
मैंने उसकी ब्रा को निकाल दी और उसके चूचों को दबाने लगा.
जो भी हो, उसके चूचे बड़े नरम थे यार … मुझे मसलने में बड़ा मजा आ रहा था.
फिर एक-एक कर मैं दोनों चूचों को मुँह में लेकर चूसने लगा.
नीलू भी मेरा साथ ‘उम्म … उम्म …’ करके देने लगी.
इधर मेरा लंड अपने उफान पर था.
वक़्त की नजाकत को समझते हुए मैंने नीलू को गद्दे पर लिटा दिया और उसका पजामा उतार दिया, साथ में उसकी काली चड्डी भी.
उसकी चूत मेरे सामने थी. बस क्या था, एकदम से टूट पड़ा.
मैं उसकी चूत चाटने लगा. वह बहुत दिनों की प्यासी लग रही थी.
मेरे मुँह लगाते ही उसकी ‘सीईई’ निकल गई.
मैं नीलू की चूत को पागलों की तरह चाट रहा था और वह मेरे सर को अपनी चुत पर दबाए जा रही थी.
सच में उसकी चुत का स्वाद बड़ा ही मस्त था.
नीलू की ‘आह्ह … आह्ह.’ की आवाज से कमरा गूँज उठा.
इधर लंड भी अपने पूरे जोश में था.
नीलू ने बस एक इशारा किया और मैंने लंड सीधा उसकी तपती चूत में पेल दिया.
बहुत दिनों से बिना चुदी चूत थी उसकी, तो कुछ ज्यादा ही कसी हुई थी.
मुझे अपना लंड पेलने में बड़ी तकलीफ हो रही थी और वह भी दर्द से बिलख रही थी.
फिर मैंने लंड को उसकी चूत से निकाल कर उसके मुँह में दे दिया और उसे बोला- गीला कर दे जानू इसे!
नीलू ने गप-गप करके मुँह में लंड लेकर उसे थूक से गीला कर दिया.
मैंने उसकी आंखों में देखा तो मुझे उसकी चुदाई की प्यास साफ झलकती हुई दिखाई दे रही थी.
मैंने फिर से अपने लंड को उसकी चूत पर टिका दिया और पेल कर धक्के लगाने लगा.
कुछ देर के दर्द के बाद वह मस्त हो गई.
अब नीलू बोले जा रही थी- चोद मेरे राजा चोद मेरी चूत को … आह काफी दिनों के बाद लंड लिया है इसने!
‘आह्ह् … आह्ह …’ करते हुए हम दोनों एक-दूसरे का खूब साथ दे रहे थे.
सच बता रहा हूँ दोस्तो, मेरे लंड और उसकी चूत का घर्षण मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था.
करीब 5 मिनट के बाद नीलू ने मुझे कसके पकड़ लिया और वह अपने जिस्म को अकड़ाती हुई झड़ कर ढीली हो गई.
उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया था.
उसके झड़ने के कुछ देर बाद ही मैं भी आने वाला हो गया था.
मैंने धक्कों की गति बढ़ा दी और उसकी चूत में ही पूरी पिचकारी मार दी.
मेरे वीर्य से उसकी चूत भर गई थी.
विडो चुदाई के बाद हम दोनों एक-दूसरे से चिपके हुए लेटे रहे.
फिर उसने मुझे सब बताया कि कैसे मैंने पहले कल्याणी को, फिर अलका को चोदा था और उसी वक्त से वह मुझसे चुदने के लिए मचल रही थी.
कुछ देर बाद मेरा मन फिर से नीलू को चोदने का हुआ.
लेटे-लेटे ही मैंने लंड उसकी चूत में घुसा दिया.
मेरे इस हमले से वह अनजान थी और लंड का धक्का सहन नहीं कर पाई. उसकी चीख निकली और बोली- हरामी बता कर तो चोद!
करीब 5 मिनट की चुदाई कर मैं उसके मुँह में झड़ गया.
उस रात मैंने नीलू को दो और बार तबीयत से चोदा.
मैंने उससे कहा- आज से तुम मेरी मुँहबोली पत्नी बन गई हो.
वह बहुत खुश थी.
उसे एक स्थाई लंड जो मिल गया था.
आपको मेरी यह विडो चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा.
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