स्लट बेब फक स्टोरी में मामा की छोटी बेटी की चुदाई के बाद मेरी नजर उसकी बड़ी बहन की चूत पर थी. वो अपनी चूत में वाइब्रेटर डाल कर जॉब पर जाती थी.
कहानी के इससे पहले वाले भाग
मामा की छोटी बेटी को मजा लेकर चोदा
में आपने पढ़ा कि रचना दीदी की चूत के बारे में सोचते-सोचते मुस्कान दीदी की चूत मिल गई और उसे सोते हुए मैंने रचना दीदी की बगल में पेला और चिक उनकी चूत में गिरा दिया।
अब स्लट बेब फक स्टोरी को आगे बढ़ाते हैं।
आज मेरी नींद बहुत देरी से खुली क्योंकि कल रात की चुदाई की थकान जो थी।
उठते ही मैं नीचे आ गया पर नीचे कोई भी नहीं था।
मैंने पूरा घर तलाश लिया।
फिर मैंने मामा को फोन किया तो उन्होंने बताया कि मामी के पिताजी को हॉस्पिटल में भर्ती किया है तो मामा, मामी और मुस्कान दीदी वहां हैं, और रचना दीदी की ड्यूटी थी तो वो वहां चली गई हैं।
मामा ने मुझे कहा कि वो लोग 2-3 दिन बाद ही आएँगे, तब तक रचना दीदी का ख्याल रखना।
मैंने हामी भर दी।
मेरे मन में तो ये सोच के ही मजा आ गया कि मैं और रचना दीदी अकेले होंगे!
मैं सोचने लगा कि रात को रचना दीदी को कैसे पटाऊंगा और उनके साथ चुदाई करूँगा।
अभी तो सुबह के 10 ही बजे थे तो मैंने सोचा कि क्यों ना गाँव की सैर की जाए और मैं निकल पड़ा।
कुछ दूर जाने पर गाँव की दूध-डेरी दिखी, वहां पर कुछ लोग बैठे थे।
मैंने उनमें से एक को पहचान लिया, वो सरपंच का बेटा समीर था और शायद दूसरे तीन लोग उसके दोस्त होंगे।
तो मैं भी टाइम पास करने वहां चला गया।
वो लोग लड़कियों की बात कर रहे थे।
समीर कह रहा था कि उसने किस तरह लड़की को फंसाया है और उसे और उसकी माँ को साथ में ही पेल रहा था।
मैं तो मन में सोच रहा था कि क्या डींगें हांक रहा है, ऐसा थोड़ी हो सकता है मां और लड़की दोनों को पेल रहा है!
फिर मैं वहां से चला आया मामा के घर और गेम खेलने लगा।
जैसे-तैसे करके मैंने टाइम पास किया और शाम होने का इंतजार करने लगा।
समय तो जैसे बीत ही नहीं रहा था।
मैंने सारी प्लानिंग कर ली थी कि मैं दीदी को कैसे फंसाऊंगा पर थोड़ा डर भी लग रहा था, क्या पता वो चिल्ला-चिल्ला के गाँव वालों को इकट्ठा कर दें और फिर मेरे तो लग जाते!
शाम हो गई थी, मैं दीदी को स्टेशन लेने गया।
वो बहुत जल्दी में लग रही थीं, अपने पैर को बार-बार हिला रही थीं और मोड़ रही थीं।
मैं समझा नहीं कि ये क्या कर रही हैं।
उनका चेहरा भी फीका सा लग रहा था।
मैंने उनसे पूछा भी जब वो बाइक पर बैठीं, “क्या हुआ? आपकी तबियत तो ठीक है ना?”
पर उन्होंने कहा, “मैं ठीक हूँ! बस जल्दी से घर पहुँचा दो, आराम करना है।”
ये सुनते ही उन्हें जल्दी से घर ले आया और वो सीधा बाथरूम चली गईं।
मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या हुआ दीदी को, पर मैंने मोबाइल खोल लिया और कैमरा देखने लगा।
दीदी बाथरूम में गईं, धड़ाम से दरवाजा बंद किया और जल्दी से कपड़े उतारने लगीं।
उन्होंने पहले अपना ग्रीन शर्ट उतारा और उसके बाद जींस उतार फेंकी।
अब वो सिर्फ पिंक कलर की ब्रा पेंटी में थीं।
फिर उन्होंने ब्रा का भी हुक खोला और अपने चूचों को आजाद किया।
फिर पेंटी की बारी आई, वो थोड़ी उभरी हुई सी थी।
मैंने ध्यान से देखा, वो पेंटी उतार रही थीं और वहां उनकी चूत के पास काला-काला सा कुछ दिखा।
पहले तो मुझे लगा कि वो उनके घने बाल दिख रहे हैं … पर ध्यान से देखने पर पता चला कि उन्होंने बड़ा सा काला डिल्डो अपनी चूत में डाल रखा था!
उन्होंने डिल्डो निकाला और अपनी चूत को सहलाने लगीं और आहें भरने लगीं।
कुछ देर चूत सहलाने के बाद वो अपने एक हाथ से डिल्डो को चूत में धकेल रही थीं और दूसरी ओर अपने दूसरे हाथ से पीछे अपने नितंबों को मसल रही थीं।
मेरे मन में मस्ती सूझी, मैंने बाथरूम का दरवाजा जोर से ठोका, “दीदी कितनी देर! मुझे भूख लगी है!”
मैं कैमरे में देख रहा था, उन्होंने बुरा सा मुंह बनाया और हांफती हुई आवाज में बोलीं, “बस आ रही हूँ! एक मिनट!”
वो तो मुझे मन में गाली दे रही होंगी, उनका मुंह देख के ये तो पता चल रहा था।
फिर उन्होंने डिल्डो निकाला और नहाकर वो स्कर्ट एंड यैलो टी-शर्ट पहन कर बाहर आ गईं।
उन्होंने ब्रा एंड पेंटी भी नहीं पहनी, शायद जल्दबाजी की वजह से।
मैं समझ गया था कि वो बहुत गरम होंगी तो आज रात को मेरा काम हो जाएगा।
हमने साथ बैठकर खाना खाया और गप्पें लड़ाई।
कुछ देर टीवी देखी और फिर सोने का समय हो गया।
हम लोग दोनों छत पर आ गए।
दीदी जब बिस्तर बिछा रही थीं तो उनकी स्कर्ट ऊपर को उठ गई थी जिससे मैंने देखा कि उनकी चूत मेरे सामने थी और उनकी जांघ पर उनकी रसीली चूत का पानी बह रहा था और वो चाँद की रोशनी में हल्का सा चमक रहा था और हवा में मदहोश खुशबू फैला रहा था।
मेरे से रहा नहीं गया और मैंने हल्ला बोल दिया!
मेरी इस हरकत से वो गद्दे पर गिर गईं और एकदम दंग रह गईं।
उन्हें पता भी नहीं चला कि उनके साथ क्या हुआ था।
वो इस तरह से गिरी थीं कि उनकी गांड ऊपर को उठी थी और मैंने भी बिना मौका गंवाए अपना लंड शॉर्ट से निकाल कर उनकी चूत में ठूंस दिया!
वो बड़े आराम से अंदर खिसक गया क्योंकि उनकी चूत एकदम गीली थी।
दीदी की जोर से चिल्लाने की आवाज आई।
अब उन्हें एहसास हुआ कि क्या हो रहा था।
वो पूरे जोर से मुझसे अलग होने की कोशिश कर रही थीं और मुझे बोल रही थीं, “नील! मैं तुम्हारी बहन हूँ, ये तुम क्या कर रहे हो!”
मैंने उन्हें और कस कर पकड़ा और चोदने लगा उन्हें इग्नोर करते हुए।
मैंने कहीं सारी सेक्स कहानियां पढ़ी हैं और मैंने पढ़ा है कि पहले लड़कियां मना करती हैं पर फिर वो जम कर चुदवाती हैं।
क्या नजारा था! मेरा सपना साकार हो रहा था।
हर शॉट पर उनके बूब्स हिल रहे थे और नितंबों में तो लहर सी दिख रही थी।
मैंने भी उन्हें सारी बात बता दी जो भी मैंने स्पाई कैमरे में उनके वीडियो देखे थे।
अब वो थोड़ी ढीली हो गई थीं और शायद अब उन्हें शर्म आ रही होगी कि मैंने उन्हें किस-किस हालत में देखा है।
कुछ देर न हिलने के बाद वो भी मजे से चोदने लगीं।
अब वही चिल्ला चिल्ला के कह रही थीं, “चोद मेरे बहनचोद भाई! अपनी बहन को रंडी बना ले!”
इससे मैं और जोश में आ गया।
कुछ देर ऐसे चोदने के बाद अब उनको मैंने अपनी तरफ कर लिया, अब मैं उनका मुंह देखना चाहता था कि वो कैसा रिएक्शन दे रही हैं।
मैंने धीरे से अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और वाह! क्या फेस बनाती हैं यार दीदी! एकदम रंडी हैं साली! मेरे हर शॉट पर उनका अलग रिएक्शन रहता है।
मैंने कुछ देर चोदा और मैं अपने कगार पर आ गया था, मैं झड़ने वाला था।
वो अब तक दो बार झड़ चुकी थीं।
मैंने उनसे पूछा, “दीदी मेरा होने वाला है! कहां निकालूँ?”
उसने जल्दी से मेरा लंड चूत से निकाल लिया और अपने घुटनों पर आ गईं और उन्होंने पूरा लंड मुंह में लेकर चूसने लगीं।
मैं ऐसी रंडी के सामने कैसे टिकता … मैं कुछ ही देर में उनके मुंह में ही निढाल हो गया।
वो मेरा सारा रस पी गईं और मेरा लंड जीभ से साफ भी कर दिया।
तो इस तरह से हमारा पहला राउंड खत्म हुआ।
अब रचना दीदी मेरे बाजू में लेटी हुई थीं— पसीने से भीगी हुई और बिखरे बाल, और उनके मुंह पर मेरा वीर्य कहीं-कहीं लगा हुआ था।
वो जोर-जोर से सांसें ले रही थीं जिससे उनके बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे।
नीचे उनके स्कर्ट ऊपर पेट तक उठा हुआ था और उनकी चूत जो कि अपने ही रस से भीगी हुई थी और थोड़ी-थोड़ी लाल दिख रही थी।
मुझे मस्ती सूझी, मैंने उनकी टी-शर्ट ऊपर उठाई और उनके बूब्स किसी बच्चे की तरह चूसने लगा।
दीदी मचलने लगीं किसी मछली की तरह! अब उनके गोरे-गोरे चूचे बिल्कुल लाल हो गए थे।
अब मैं अपनी जीभ को धीरे-धीरे नीचे की ओर ले गया, उनके पेट पर चूमने लगा।
उन्हें मजा आ रहा था।
मैंने स्कर्ट को खींच कर निकाल फेंका और पेट से नीचे की ओर चूमते हुए दीदी की चूत की ओर बढ़ा।
वो एकदम से मदहोश हो चुकी थीं और गरम भी।
अब तक मेरा लंड भी आधा खड़ा हो चुका था।
दीदी ने अपने हाथों का जादू दिखाना शुरू किया।
वे मेरे लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर आगे पीछे करने लगीं।
कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मैंने अपना लंड पकड़ कर उनकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया।
रचना दीदी ने आहें भरते हुए कहा, “मेरे प्यारे भाई! अब चोद भी दो अपनी बहन को, क्यों परेशान कर रहे हो!”
मैंने उन्हें धक्के लगाना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से उनके बूब्स को दबाने लगा।
कभी-कभी उनके निपल्स को भी मसल देता जिनसे वो चिल्ला उठती थीं।
मैंने लगभग दस मिनट ऐसे चोदने के बाद उन्हें उल्टा लिटा दिया कुत्ते की तरह।
अब मैं उनकी गांड मारना चाहता था।
मैंने उनसे पूछा, “दीदी आपकी गांड बहुत अच्छी है, क्या मैं…”
इतना सुनते ही उन्होंने ना में सर हिलाया और चिल्ला उठीं, “जितनी चूत मार ले भाई पर गांड नहीं!”
मैं कहां सुनने वाला था! मेरे सामने रचना दीदी की बड़ी सी खरबूजे जैसी गांड थी और मार ही न पाऊं?
मैंने कस कर उनकी गांड को पकड़ा और उसे फैला के उस पर थूका और उनकी गांड के छेद पर अपना लंड सेट किया।
दीदी घबरा गई थीं और गाली देने लगी थीं, “मत कर मादरचोद! तेरी मां की गांड मारना घर जाके चूतिये!”
मैंने धक्का दे मारा!
लंड का टोपा अंदर जा चुका था।
दीदी तड़प उठीं, एकदम उछल जैसी रही थीं।
मुझे भी दर्द हो रहा था, उनकी गांड बहुत टाइट थी।
मैं थोड़ी देर ऐसे ही रहा जब तक कि उनको थोड़ा बैटर फील हो, उसके बाद मैंने दूसरा धक्का दे मारा!
अब मेरा लंड उनकी गांड में जा चुका था।
वो चिल्ला रही थीं और गालियां दे रही थीं पर मैंने धक्के जारी रखे।
उनकी गांड धीरे-धीरे ढीली होने लगी थी।
कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद अब दीदी भी मजे लेकर चोदने लगी थीं।
वो खुद गांड हिला रही थीं।
मैंने भी दो तीन चपाट उनकी गांड पर धर दिए!
वो मदहोशी से चुद रही थीं और चिल्लाए जा रही थीं और “नील और जोर से चोदो” ऐसे बोल रही थीं।
ये बहुत ही अच्छा एहसास होता है अपनी बहन को चोदना, जिसके बारे में आपने कई बार उनके नाम की मूठ मारी हो और आज वो आपका नाम लेके बोल रही हो कि मुझे और जोर से चोदो!
कुछ देर इस तरह से चोदने के बाद उन्होंने कहा कि मुझे ऊपर आना है।
मैं समझ गया और नीचे की ओर लेट गया जिससे मेरा तना हुआ लंड हवा में झूल रहा था।
दीदी ऊपर की ओर आईं और उन्होंने अपने हाथों से गांड के छेद पर लंड सेट किया और धीरे-धीरे बैठने लगीं।
अब वो ऊपर नीचे हो रही थीं और अपने हाथों से मेरी छाती को पकड़ रही थीं, नाखून चुभा रही थीं।
उनके बूब्स मैं कभी-कभी भींच लेता था, वो मदहोशी से चुद रही थीं।
कुछ देर ऐसे चोदने के बाद मैंने दीदी से कहा कि मेरा होने वाला है।
वो और जोर से उछलने लगीं और मैं अकड़ने लगा।
वो मेरे ऊपर पूरी बैठ गईं, हम दोनों साथ में ही झड़ गए थे।
उनकी चूत का पानी मेरे ऊपर गिरा था और मेरे लंड का गरम पानी उनकी गांड में निकल गया था।
वो ऐसे ही मुझसे गले मिलकर लेटी रहीं कुछ देर तक और फिर हम सो गए साथ में ही।
इस तरह से मैंने रचना दीदी को पेला, अपनी मामा की बेटी को!
मैं अपेक्षा करता हूँ कि आपको कहानी पसंद आई होगी।
यह स्लट बेब फक स्टोरी का अंतिम भाग था।
इसके बाद मैंने रूपा आंटी और उनकी बेटियों को कैसे चोदा वो मैं कभी और बताऊंगा, अभी के लिए इतना ही।
आपको स्लट बेब फक स्टोरी पसंद आई होगी.
तो प्लीज रिप्लाई करें और बताएं कि मेरी कहानी कैसी लगी।
धन्यवाद।
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