गर्ल गांड एंड चूत कहानी मेरी स्टूडेंट और मैं दोनों सेक्स का मौक़ा ढूंढ रहे थे. उसकी सहेलियों को भी इस बात का पता था. उन्होंने प्लान करके हमें अवसर दिया.
दोस्तो, मैं रोहित सिंह आपको अपनी सेक्स कहानी में एक कोचिंग की जवान छात्रा मीरा की चुत और गांड की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के दूसरे भाग
पैर से लड़की की नंगी चूत सहलाई
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि मीरा मेरे साथ सैट हो गई थी और अब बस उसे चोदने भर की समस्या रह गई थी. उसे भी मीरा की दोनों सहेलियों ने हल कर दिया था. उन्होंने अगले दिन घर में पूजा होने का बहाना बना कर मुझसे छुट्टी ले ली थी.
अब आगे गर्ल गांड एंड चूत कहानी:
अगले दिन शनिवार था, उस दिन ज़्यादातर बच्चों की स्कूल और ट्यूशन की छुट्टी रहती थी.
इसलिए मैं एकदम निश्चिंत होकर फुल नंगा रह कर ही घर की सफाई कर रहा था.
करीब आधा घंटा बाद अचानक से किसी ने दरवाज़ा खटखटाया, मैं एकदम घबरा गया कि अब कौन आ गया!
मैंने झट से तौलिया लपेटा और जाकर दरवाज़ा खोला.
सामने देखा तो मेरा मुँह खुला का खुला ही रह गया.
मेरे सामने मेरे सपनों की रानी मीरा खड़ी थी.
मेरे तौलिया में हमेशा की तरह टेंट बना हुआ था.
ऊपर से मैं नंगा ही था.
मेरी बंदूक फुल सलामी देने के लिए हमेशा की तरह तैयार.
मीरा की नज़र डाइरेक्ट मेरे खड़े लंड पर थी, वह ज़रा भी शर्मा नहीं रही थी.
उसके इस तरह मेरे लंड को देखने की वजह से मैं फुल मस्ती में आ गया और मैंने उसे पकड़ कर अन्दर खींच लिया.
मैं उससे पूरा चिपक गया और वह भी सब भूल कर मुझसे लिपट गयी.
मैं ये पूछना भी भूल गया कि वह क्यों आई है!
मैंने दोनों हाथों से उसके चेहरे को पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
मैं ज़ोर-ज़ोर से उसके होंठों को चूसने लगा, वह भी मदहोश गयी और मेरे होंठों को चूसने लगी.
मैंने फट से अपनी जीभ उसके मुँह में घुसेड़ दी और वह भी टॉफी समझ कर चूसने लगी.
जब कुछ देर हो गयी तो वह अपनी जीभ को मेरे मुँह में देने लगी.
अब हम दोनों एक दूसरे की जीभ से कुश्ती लड़ने लगे.
उसने मुझे कसके पकड़ लिया.
वह भी मेरे होंठों को चूसने लगी.
उसके कंठ से कामुक आवाजें बाहर आने लगीं.
मैं पागल हो गया.
मैंने नोटिस किया कि आज उसने स्कूल ड्रेस नहीं पहनी थी, बल्कि फूलों के प्रिंट वाली एक छोटी सी फ्रॉक पहनी थी, जो उसके घुटनों से काफ़ी ऊपर थी.
ये देख कर तो मैं और भी जोश में आ गया और फ्रॉक के ऊपर से ही उसके मम्मों को मसलने लगा.
मैं बिल्कुल वहशी हो गया था.
उसे भी मेरा वहशीपन अच्छा लग रहा था.
वह भी पूरे जोश में आकर स्मूच करने लगी थी.
उसने तौलिया के ऊपर से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
‘ऊऊहह इस्स …’
हम दोनों के मुँह से मदभरी सिसकारियां निकलने लगीं.
उसने अपनी एक टांग उठा कर मेरी कमर में लपेट दी.
लग रहा था जैसे मुझसे भी ज़्यादा उसे इस मौके का इंतज़ार था.
मैंने उसकी टांग (जो मेरी कमर से लिपटी हुई थी) को सहलाते हुए अपना एक हाथ उसके उसके हिप्स पर फिराना शुरू कर दिया.
इससे वह और भी पागल होने लगी.
मैंने खड़े खड़े ही उसकी चड्डी के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके हिप्स को दबाने लगा.
वह एकदम से गनगना गयी और उसने मेरा तौलिया खोल दिया.
अब मैं पूरा नंगा हो गया.
मैंने उसकी फ्रॉक को ऊपर उठाया और चड्डी के ऊपर से धक्के लगाने लगा.
फिर मैंने अपना दूसरा हाथ भी पीछे की साइड से उसकी पैंटी के अन्दर डाला और उसके दोनों चूतड़ों को पकड़ कर सहलाने और मसलने लगा.
मीरा तो जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गयी थी.
थोड़ी देर तक उसके चूतड़ों को मसलने के बाद मैंने एक हाथ से उसकी फ्रॉक को पूरा ऊपर कर दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचों को काटना शुरू दिया.
वह ज़ोर-ज़ोर से अपने सिर को झटकने लगी और उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ कर भींच लिया.
मैं दर्द से तड़फ उठा और उसके हाथ से लौड़े को मुक्त करवाया, उसे समझाया कि लंड से कैसे खेला जाता है.
फिर मैंने ज्यादा देर न करते हुए उसकी फ्रॉक को ऊपर उठाते उसके जिस्म से पूरा निकाल दिया.
अब वह मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा-पैंटी में खड़ी थी.
वह भी वासना से वहशी हो गयी थी और मेरे सीने के निपल्स पर अपनी जीभ फेरती हुई चाट रही थी और उंगलियों से मींज कर खेलने लगी थी.
फिर उसने मेरा एक निप्पल अपने मुँह में पूरा भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से उसे चूसने लगी.
वह मेरे दूसरे निप्पल को अपने हाथ से मचोटने लगी.
उसकी इस अदा से मैं एकदम पागल हो गया और मैंने हाथ पीछे ले जाकर उसकी ब्रा को खोल दिया.
वह ऊपर से पूरी नंगी हो गयी.
मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और किचन में ले गया.
मैं उधर जमीन पर गद्दा बिछा कर सोता था.
मैंने उसे अपने बिस्तर पर लुड़का दिया और उसके ऊपर चढ़ कर उसके मम्मों को मसलने लगा.
उसके होंठ मेरे होंठों से चुस रहे थे. वह मेरे साथ किसी नागिन सी लिपटी जा रही थी.
कुछ देर बाद जब मैंने उससे अलग होकर उसे देखा तो वह झट से उठ कर बैठ गयी.
मेरा लंड ठीक उसके मुँह के सामने था.
मैंने अपने लौड़े को अपने हाथ से मुठिया कर उसे दिखाया.
उसने झट से मेरे लंड को पकड़ा और उस पर एक चुम्मा ले लिया.
उसके होंठों की गर्माहट पाकर मेरे मुँह से एक मीठी सिसकारी निकल गयी ‘आहह मीरा मेरी जान, बड़ा मज़ा आ रहा है, प्लीज इसको अपने मुँह में ले लो!’
उसने अपना मुँह खोला और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
साली ऐसे चूस रही थी जैसे कोई रंडी अपने कस्टमर के लौड़े को लॉलीपॉप समझ कर चूसती है.
मेरा 6 इंच का लंड उसके मुँह में पूरा नहीं आ रहा था.
मैंने कहा- जानू, इसको पूरा मुँह में लो न … बड़ा मज़ा आ रहा है!
उसने मेरे लंड को पूरा अपने मुँह में लेने की कोशिश की, मगर उसका मुँह छोटा था तो लंड उसके मुँह में पूरा आ ही नहीं रहा था.
अब मुझसे बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था.
मैंने उसके सिर को पीछे से पकड़ा और अपने लंड को पूरा उसके मुँह में ठूंस दिया.
मेरा लंड उसके गले की गहराई में घुस गया और वह तड़फ उठी.
उसके लिए सांस लेना मुश्किल हो गया था.
उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे थे और वह अपने हाथ फटक कर मुझसे लौड़े को बाहर निकालने का इशारा कर रही थी.
मैंने लंड को मुँह में ठेले रखने की दम कुछ कम की तो उसने झट से लौड़े को मुँह से बाहर निकालने कोशिश की.
एक दो इंच लंड बाहर आया, मगर मैंने अगले ही पल वापस अपना लंड उसके मुँह में भर दिया.
इसी तरह से मैंने दो चार बार लौड़े को उसके मुँह में काफी अन्दर तक पेला और निकाला तो उसे आदत हो गई.
अब मैं खड़े-खड़े ही उसके मुँह को चोदने लगा. उसके मुँह से गों-गों की आवाज़ें निकलने लगीं.
कुछ देर तक उसके मुँह को ऐसे ही चोदने के बाद मैंने लंड को उसके मुँह से बाहर निकाला और उसे खड़ी कर दिया.
अब मैं दोबारा से उसे अपनी बांहों में भरके पैंटी के ऊपर से धक्के लगाने लगा और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख कर रस चूसने लगा.
वह भी मज़े और सेक्स के उन्माद में पता नहीं क्या-क्या बड़बड़ाए जा रही थी ‘आ आहह जानू … और ज़ोर ज़ोर से करो उइईई बड़ा मज़ा आ रहा है, प्लीज और ज़ोर से करो ना!’
उसे लौड़े की रगड़न से मजा आ रहा था. यह नहीं पता था कि जब लंड उसकी बुर को फाड़ कर अन्दर घुसेगा, तब क्या हाल होगा!
मगर मुझे मजा आ रहा था तो मैंने अपने झटकों की स्पीड बढ़ा दी.
मेरी और उसकी जांघें आपस में टकरा रही थीं, जिससे ठप-ठप की आवाज़ आ रही थी जो हम दोनों को और भी मदहोश कर रही थी.
फिर मैंने उसे पलटा और उसकी पीठ को अपने पेट से चिपका लिया.
मैंने आगे की तरफ से अपना एक हाथ उसकी पैंटी में डाल दिया और उसकी चुत में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.
साथ ही मैं अपने दूसरे हाथ से उसकी एक चूची को मसलने लगा.
वह एकदम पागल हो गयी और उसने ज्यादा देर न करते हुए खुद ही अपनी पैंटी उतार दी. वह अब पूरी नंगी हो गयी थी.
उस वक्त मेरा लंड पीछे से उसकी गांड के मुँह पर लग गया था.
उसके लिए अब बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया था.
वह मेरे लौड़े को मसलती हुई बोली- आह मेरे जानू, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा, प्लीज इसे पीछे से मेरे अन्दर डाल दो.
मैंने अपने दोनों हाथों से उसके दोनों चूचों को मसलते हुए अपने लंड को गांड पर रखा और एक धक्का दे दिया.
पर उसकी गांड बहुत टाइट थी और उसमें कुछ चिकनाई सी लगी हुई थी इसी वजह से मेरा लंड फिसल गया.
मैंने दो बार और ट्राई किया, लेकिन लंड हमेशा फिसल जा रहा था.
फिर उसने अपना हाथ पीछे लाकर मेरे लंड को पकड़ा और छेद में लगाती हुई बोली- अब डालो!
मैंने एक जोरदार धक्का लगा दिया.
मेरा लंड उसकी गांड को चीरता हुआ आधा अन्दर घुस गया.
उसे अंदाजा ही नहीं था कि लंड जब गांड में घुसेगा तो क्या होगा!
उसके मुँह से एक जोरदार चीख निकल गया- आहह मर गई. मेरी फट गई!
उसकी आंखों से आंसू निकलने लगे.
उसने अपने आप को मुझसे छुड़ाने की बहुत कोशिश की पर मैंने उसे कसके जकड़ लिया और लंड को बाहर निकाले बिना उसके मम्मों को सहलाना जारी रखा.
वह छटपटा रही थी और गिड़गिड़ा रही थी- प्लीज़ इसको बाहर निकालो, बहुत दर्द हो रहा है!
लेकिन मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को जमाए रखा और होंठों को चुभलाना जारी रखा.
करीब 5 मिनट बाद उसका दर्द थोड़ा कम हो गया, अब उसको मज़ा आने लगा.
वह अपनी गांड को पीछे की तरफ धक्के देती हुई ताकत लगाने लगी.
जब भी उसकी गांड मेरे लंड से टकराती, तो ‘फ़च-फ़च’ की आवाज़ आती.
वह भी पागल हो जाती.
उसने लगातार अपनी गांड से धक्के लगाने जारी रखे.
अब मैं जोश में आकर ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा.
गांड चोदने के साथ साथ मैं अपने एक हाथ से उसके दोनों मम्मों को बारी-बारी से भींचने लगा.
एक हाथ की उंगली से मैं उसकी चुत को भी सहला रहा था और उसे पीछे से चोदने में लगा था.
वह आह आह कर रही थी.
मैंने अपनी एक उंगली उसकी चुत में काफी अन्दर तक डाल दी.
उसकी चुत पूरी गीली हो चुकी थी इसलिए उंगली आराम से अन्दर-बाहर जा रही थी.
थोड़ी देर में मैंने अपनी दो उंगलियां उसकी चुत में डालीं और हचक हचक कर उसकी गांड मारने लगा.
सच में ऐसा लग रहा था जैसे मैं जन्नत में पहुंच गया हूँ.
इतना मज़ा पहला कभी नहीं आया था.
कुछ देर पीछे से चोदने के बाद मैंने अपने लंड बाहर निकाला और उसको पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया.
फिर उसकी दोनों टांगों के बीच बैठ गया.
मैंने एक पिल्लो उसकी कमर के नीचे रख दिया, जिससे उसकी चुत पूरी ऊपर हो गयी.
मैंने अपने लंड को उसकी चुत के ऊपर सैट किया और पूछा- रेडी?
उसने कहा- यस आई एम रेडी, प्लीज़ अब और मत तड़पाओ … जल्दी से अन्दर डाल दो. अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा … आआह प्लीज़ जल्दी से अन्दर डालो.
मैंने अपने लंड को एक जोरदार झटका दिया और चुत गीली होने की वजह से लंड बिना किसी तकलीफ़ के पूरा अन्दर घुस गया.
उसके मुँह एक ज़ोरदार सिसकारी निकल गयी.
उसने अपने दोनों हाथ मेरे हिप्स के ऊपर रखे और मुझे अपने अन्दर खींचने लगी.
मैंने भी ज़्यादा देर ना करते हुए उसके दोनों मम्मों को हाथों से कुचलना शुरू कर दिया और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगा.
फ़च-फ़च की आवाज़ों से कमरा गूंजने लगा.
मैं उसके ऊपर लेट गया, मेरी जांघें उसकी जांघों के ऊपर रगड़ रही थीं.
मेरा पूरा लंड उसकी चुत में घुसा हुआ था और मेरे सीने के निप्पल उसके मम्मों के ऊपर जमे हुए थे.
मेरे होंठ उसके होंठों के ऊपर जमे हुए थे और मैं लगातार कोशिश कर रहा था कि मेरी जीभ उसके मुँह में चली जाए.
उसने मेरा इशारा समझ लिया और अपना मुँह खोल कर अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी.
वह मेरी जीभ से कुश्ती लड़वाने लगी.
इधर मेरे धक्कों की स्पीड बढ़ती जा रही थी.
तभी मुझे लगा कि जैसे अब मेरे लंड से रस निकल जाएगा.
उस वक्त बहुत मज़ा आ रहा था, मेरा जी तो चाह रहा था कि मेरा रस कभी ना ना छूटे और मैं ऐसे सारी जिंदगी उसे चोदता रहूं.
तभी उसने कहा- जानू, अब तुम नीचे आ जाओ … मैं तुम्हारे ऊपर चढ़ूँगी!
मैंने कहा- ओके.
मैंने ऐसे ही चुत के अन्दर लंड डाले-डाले ही पलट गया.
अब वह मेरे ऊपर आ गई थी और मैं उसके नीचे था.
वह मेरे लंड के ऊपर सही से बैठ गयी और मेरा पूरा लंड एकदम से उसकी रसभरी चुत में सरकता हुआ चुत की जड़ में समा गया.
उसने एक पल को रुक कर लंड को सही से चुत में सैट किया और मेरे सीने पर दोनोंन हाथ जमा कर ज़ोर-ज़ोर से मुझे चोदने लगी.
मेरे मुँह से बेतहाशा कामुक सिसकारियां निकालने लगी थीं ‘आह मीरा … फक मी हार्ड … आआह मेरी जान … और तेज़ … और तेज़!’
वह और भी तेज स्पीड से मुझे चोदने लगी.
कुछ धक्कों के बाद उसका बदन अकड़ने लगा और अगले 2-4 धक्कों के बाद ही वह झड़ गयी.
झड़ कर वह तेज तेज सांसों को भरती हुई हांफने लगी और मेरे सीने पर ढुलक गई.
मेरा भी निकलने वाला था, मैंने नीचे लेटे हुए ही उसके दोनों मम्मे पकड़ लिए और मसलते हुए अपनी गांड उठा उठा कर उसे चोदने लगा.
वह आह आह कर रही थी.
मैंने नीचे से अपनी कमर को तेज रफ्तार में उठा-उठा कर धक्के लगाते हुए अपनी रफ़्तार बढ़ा दी.
वह भी चार्ज हो गई और ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड पर उठने-बैठने लगी.
करीब 5 मिनट की घमासान चुदाई के बाद मेरे लंड ने अचानक से पानी छोड़ दिया. मैं उसकी चुत के अन्दर ही झड़ने लगा.
एक तेज ‘आआह …’ के साथ मैंने धक्के लगाने बंद कर दिए और वह भी मेरे लंड को अन्दर लिए-लिए ही मेरे ऊपर लेट गयी.
उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया और धीरे-धीरे चूसने लगी.
थोड़ी देर बाद मेरे लंड पूरा खाली हो गया.
हम दोनों उठे और बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ करने लगे.
उसके बाद हम दोनों बाथरूम से निकल कर कमरे में आए और बाहर होटल से खाना मंगवा लिया.
खाना खाने के बाद हम दोनों ने एक बार और चुदाई की. उसके बाद वह अपने घर जाने लगी.
जाते वक्त उसने कहा- सर आज बहुत मज़ा आया, मैं आज का दिन कभी नहीं भूलूंगी!
मैंने भी कहा- मुझे भी तुम्हारे साथ बहुत मज़ा आया. बाइ द वे .. आज तुम उधर नहीं गईं.
उसने कहा- कहां जाना था सर?
मैंने कहा- अरे तुम्हारी सहेली के घर पूजा थी ना!
उसने कहा- क्या सर, आप एकदम चूतिया हो!
मैंने कहा- क्या मतलब?
मीरा- आप सचमुच ट्यूबलाइट ही हो, कुछ भी नहीं समझते!
ये कहते-कहते उसने मेरी तरफ देखा और आंख मार दी … और ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी.
अब मैं सब समझ गया था कि यह सब इन तीनों की मिली भगत थी.
मैंने दोबारा से मीरा को अपनी बांहों में भर लिया.
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी ये गर्ल गांड एंड चूत कहानी?
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