हॉट गर्ल स्टूडेंट X कहानी में मैं एक कोचिंग में लड़कियों को पढ़ाता था. एक लड़की मुझे चोदने लायक माल लगती थी, वह चुलबुली थी तो मैंने उस पर ट्राई मारी.
फ्रेंड्स, मैं रोहित सिंह आपका दोस्त अपनी नयी सेक्स कहानी के साथ एक बार फिर से हाज़िर हूँ.
आप सब ने मेरी पिछली कहानियों को बहुत पसंद किया, मैं उसके लिए आप सब का बहुत आभारी हूँ.
उम्मीद करता हूँ कि मेरी पिछली कहानी
मौसेरी बहन की जवानी का मजा लिया
की तरह इस कहानी को भी आप सब बहुत पसंद करेंगे!
सभी दीदियों और भाभियों को मेरा खड़े लंड से सलाम.
ये हॉट गर्ल स्टूडेंट X कहानी उन दिनों की है, जब मैं दिल्ली में रहता था और एक कोचिंग क्लास में एक इंग्लिश टीचर का काम करता था.
कोचिंग क्लास के ओनर का नाम संजय मिश्रा था और वे बिहार के रहने वाले थे.
वे सिर्फ़ मैथ्स की क्लास लेते थे और उन्हें इंग्लिश टीचिंग नहीं आती थी, तो उसके लिए उन्होंने मुझे सिर्फ़ इंग्लिश पढ़ाने के लिए ही रखा था.
मैं बारहवीं क्लास तक की लड़कियों को इंग्लिश पढ़ाता था.
उस कोचिंग क्लास की ख़ासियत ये थी कि कोचिंग क्लास दसवीं और बारहवीं क्लास तक की लड़कियों के लिए ही थी, तो ज़्यादातर जवान लड़कियों का आना होता था.
सुबह से शाम तक सिर्फ लड़कियों का आना जाना लगा रहता था.
आपको तो पता ही है कि जिस उम्र की लड़कियों का जमावड़ा उधर होता था, वे सब कमसिन उम्र वाली लड़कियां थीं और उनकी उम्र में लड़कियां चुदाई के लिए पागल होती हैं.
जब हम-उम्र लड़कियां एक दूसरे से मिलती हैं, तो उनका मजाक देखते ही बनता है.
मैं पूरा दिन उन तितलियों को देखते हुए जैसे जन्नत में रहता था.
कच्ची उम्र की लड़कियों के छोटे छोटे समोसे जैसे दूध देख देख कर मेरा दिल और लंड मचलता रहता था.
जब कभी कोई तितली थोड़ा तेज़ तेज़ चलती थी और उसके छोटे छोटे चूचे ऊपर नीचे हिलते थे, तो मेरा लंड भी ऊपर नीचे झटके मारने लगता था.
आज की ये सेक्स कहानी मेरी एक स्टूडेंट मीरा की है.
मैं आप सबको मीरा के बारे में थोड़ा सा बता देता हूँ.
उसका रंग हल्का सांवला सा था.
बड़ी-बड़ी काली आंखें और गुलाबी होंठ थे.
उसकी हाइट करीब 5 फुट 2 इंच की थी और उसके दूध मीडियम साइज़ के थे.
कमर के नीचे उसके नितंब थोड़े बड़े से थे.
वह लड़की हमेशा शाम को स्कूल खत्म होने के बाद ही ट्यूशन के लिए कोचिंग क्लास आती थी इसलिए मैंने उसे हमेशा स्कूल ड्रेस में देखा था.
वह वाइट कलर की शर्ट और ग्रीन कलर की स्कर्ट पहनती थी.
उसकी स्कर्ट घुटनों से थोड़ी ऊपर होती थी, जब वह चेयर पर बैठ जाती थी तो उसकी स्कर्ट थोड़ा और ऊपर को उठ जाती थी और उसकी जांघें और भी ज़्यादा नंगी हो जाती थीं.
वह बहुत चुलबुली लड़की थी और हमेशा हंसती रहती थी, जिससे वह और भी ज़्यादा माल लगती थी.
मैंने शुरू शुरू में उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था लेकिन जब वह मुझसे भी क्लास में हंसी-मज़ाक करने लगी तो मेरा ध्यान उस पर चला गया और मैं उसे चोदने की सोचने लगा.
वह हमेशा बात करते-करते मुझे टच कर लेती थी जिससे मेरे बदन में करेंट दौड़ जाता था.
उस कोचिंग क्लास दरअसल एक वन रूम+किचन सैट वाला फ्लैट था, जिसमें बाहर एक रूम था, अन्दर छोटा सा किचन और किचन के अन्दर ही एक कोने में वॉशरूम था, जिसे मैं, हमारे मिश्रा सर और स्टूडेंट्स यूज करते थे.
उस कोचिंग में मेरी सैलरी बहुत कम थी और मेरे लिए अलग से रूम लेकर रहना मुश्किल था.
इसलिए मिश्रा सर ने एक दिन मुझसे कहा- रोहित, आप रूम लेने की बजाए अगर रात को यहीं कोचिंग क्लास में ही सो जाओ तो आपका खर्चा भी बच जाएगा और कोचिंग क्लास की भी देख-रेख हो जाएगी.
मेरे लिए यह एक मुँह-माँगी मुराद जैसी बात थी.
मैं तुरंत सर से बोला- ठीक है सर! मैं रात को यहीं सो जाया करूँगा.
इस तरह मैं दिन में ट्यूशन पढ़ाता और रात को वहीं सो जाता था.
मिश्रा सर अपने घर से जब आते तो मेरे लिए भी खाना बनवा कर ले आते थे, जिससे मेरा खाने का पैसा भी बचने लगा था.
मैं बहुत खुश था कि चलो, अब थोड़ी सेविंग भी हो जाएगी.
मैं आपको बता दूँ कि मैं अकेले ही वहां रहता था, इसलिए मुझे किसी का डर नहीं था.
मेरा लंड हमेशा मीरा के बारे में सोचकर एकदम टाइट रहने लगा था.
लंड को थोड़ी हवा मिले, इस वजह से मैं रात को पूरा नंगा होकर सोता था.
मीरा को याद करते हुए अपने लंड को सहलाना मुझे बहुत अच्छा लगता था.
एक दिन की बात है, मैं सो रहा था और सुबह करीब 7 बजे दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई.
मेरी नींद खुल गयी.
मैं हड़बड़ा कर उठा और ये सोचने लगा कि इतनी सुबह-सुबह कौन हो सकता है क्योंकि स्टूडेंट्स तो 9.30 के बाद ही आते थे.
मेरा लंड एकदम टाइट था और तंबू के बांस की तरह तना हुआ था
मैं अभी सोच ही रहा था कि दोबारा किसी ने दरवाज़ा नॉक किया.
अब मैंने कहा- प्लीज़ वेट, आई एम कमिंग!
मेरे कपड़े बाहर वाले रूम में पड़े थे, जहां पर बच्चे पढ़ते थे.
उस वक़्त किचन में (जहां मैं सोता था) एक तौलिया ही पड़ा था जो इतना छोटा था कि कमर भी पूरी कवर नहीं हो रही थी.
उसकी लंबाई इतनी छोटी थी कि घुटनों के काफ़ी ऊपर तक थी.
मैंने जल्दी से जैसे तैसे उसी तौलिया को ही लपेट लिया और आंखें मलते हुए दरवाज़ा खोल दिया.
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला तो मुझे अहसास हुआ कि मैंने ऊपर तो कुछ पहना ही नहीं है और मेरा लंड एकदम टाइट तो पहले सी ही था.
इसी सब से ज़ाहिर था कि तौलिया में टेंट बन गया था.
मुझे बड़ी शर्म आ रही थी, पर अब काफ़ी देर हो चुकी थी और अब कुछ नहीं हो सकता था.
मैंने देखा कि सामने मीरा और उसके साथ दो लड़कियां खड़ी थीं.
एक का नाम ऋतु और दूसरी का नाम मुग्धा था.
मैंने पूछा कि आज आप लोग इतनी सुबह सुबह क्यों आ गई हैं?
मीरा ने कहा- सर, हम लोग स्कूल गए थे, लेकिन आज प्रिन्सिपल मैडम की अचानक से डैथ हो गयी और स्कूल की छुट्टी हो गयी. इसलिए हम लोग यहां आ गईं.
इतना कहने के बाद तीनों लड़कियों को भी अहसास हुआ कि मैं ऊपर से एकदम नंगा और नीचे एक छोटा सा तौलिया लपेटे हुए था.
उसमें भी मेरा लंड एकदम तंबू की तरह तना हुआ था, तो उन तीनों का ध्यान वहां जाना स्वाभाविक था.
पहले तो उन तीनों ने अपनी नज़र वहां से हटा ली, पर फिर बात करते-करते उनकी नज़र बार बार मेरे खड़े लौड़े पर ही जाने लगी.
शायद उनको भी मेरा खड़ा लंड देखने में मज़ा आ रहा था.
आख़िर वे सब कच्ची उम्र की लड़कियां थीं और इस उम्र में तो लड़कियां लंड की दीवानी होती हैं.
सच पूछो तो अब मुझे भी उनका मेरे लंड को छुप-छुप कर देखना अच्छा लगने लगा था.
मैंने नोटिस किया कि अब वे तीनों बिना किसी हिचक के मेरे लंड को घूरे जा रही थीं.
वे बात तो मुझसे कर रही थीं पर उनकी नज़रें मेरे तौलिया से हट नहीं रही थीं.
मैंने भी बात करते-करते एक-दो बार अपने को लंड को तौलिया के ऊपर से मसल दिया और उस वक्त जान बूझ कर मेरे मुँह से हल्की से ‘आआह’ भी निकल गयी.
उन तीनों ने एक दूसरे को देखा और मुँह छुपा कर मुस्कुराने लगीं.
मेरी उम्मीद जाग गयी कि शायद आज मुझे मीरा की बुर चोदने को मिल जाए.
मेरी इस मदभरी ‘आआह’ से वे तीनों और भी बेशर्म होकर मेरे लंड के टेंट को देखने लगीं.
ख़ास कर मीरा तो अपनी नज़र वहां से हटा ही नहीं रही थी.
मैंने मीरा को देखते हुए फुल बेशर्म हो कर अपने लंड को अपने हाथ में पकड़ ही लिया और कहा- अभी तो सर भी नहीं आए हैं, तो आप लोग क्या करोगी?
इस पर तीनों लड़कियों ने लगभग एक स्वर में कहा- सर आप हमें इंग्लिश पढ़ा दो और मैथ्स के लिए हम सब शाम को दोबारा आ जाएंगी.
मैंने कहा- आर यू श्योर?
उन्होंने कहा- यह सर श्योर!
मैंने अपने लंड को एक बार और ज़ोर से मसला और जानबूझ कर एक मीठी सी और लंबी सी ‘आआह’ निकालते हुए कहा- ठीक है, तुम लोग बैठो. मैं फ्रेश हो कर आता हूँ.
वे तीनों अन्दर आ गईं और मैं अपने कपड़े उठा कर किचन में चेंज करने चला गया.
मेरा मूड तो पहले से ही हमेशा चुदाई करने का बना रहता था, ऊपर से उन तीनों ने मेरे लंड को एकटक घूर कर मुझे और भी ‘हॉर्नी’ बना दिया था.
मैं सोचने लगा कि इन तीनों का कैसे ज़्यादा से ज़्यादा से गर्म किया जाए कि कम से कम मीरा के साथ थोड़ी से मस्ती करने को मिल जाए.
अचानक मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया और मैंने ऊपर एक शर्ट पहन ली और नीचे पैंट ना पहन कर तौलिया पहने रहने का डिसाइड किया.
इस बहाने मैं उनको अपना लंड तो फ्लश करके दिखा सकता था.
मैं शर्ट और तौलिया में बाहर आ गया.
तीनों लड़कियों ने छुपी नज़रों से एक दूसरी को देखा और आंखों ही आंखों में कुछ इशारा किया, जिसे मैं समझ नहीं पाया.
खैर … मैं भी चेयर पर बैठ गया और उन्हें इंग्लिश की बुक निकालने को कहा.
हमारे कोचिंग क्लास में एक सेंटर टेबल थी, जिस पर सामने की तरफ टीचर बैठता था और बाकी के तीनों तरफ स्टूडेंट्स बैठ जाते थे.
सब बच्चों के लिए और सर के लिए फोल्डिंग चेयर्स थीं.
मैं सामने की साइड पर बैठ गया और मेरे लेफ्ट साइड पर मीरा बैठ गयी, ऋतु मेरे सामने और मुग्धा मेरे दाईं ओर बैठ गयी.
मैं मीरा की बुक लेकर उसमें से ही पढ़ाने लगा.
अब क्योंकि बुक मीरा की थी तो जाहिर है कि वह भी उसी बुक में से ही स्टडी करेगी.
उस वजह से मुझे अपनी चेयर को एकदम आगे करके बैठना पड़ा और उस कारण से मेरी पूरी टांगें टेबल के नीचे हो गईं.
मीरा को बुक में देखने के लिए पूरा आगे तक आना पड़ा, उस वजह से उसकी भी टांगें पूरी टेबल के नीचे आ गईं.
यह टेबल बहुत बड़ा नहीं था.
अब क्या हुआ कि जब मैं और मीरा एकदम आगे को हो गए तो मेरी और उसकी टांगें एक दूसरे की टांगों से टच होने लगीं.
शुरू शुरू में तो मैंने अपनी टांगें पीछे खींच लीं लेकिन बुक देखने के लिए मुझे वापिस आगे को आना पड़ता था और मेरी टांगें मीरा की टांगों से बिल्कुल चिपक जाती थीं.
एक तरफ मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं ये सब मुझे ग़लत ना समझ लें.
लेकिन मीरा ने कोई ऐतराज़ नहीं किया बल्कि उसने और भी ज़्यादा आगे आकर अपनी टांगें बिल्कुल मेरी टांगों से चिपका लीं और मस्ती से बैठ गयी.
उसकी जवान टांगों की गर्मी और नर्मी से मैं हॉट होने लगा.
फ्रेंड्स, आप सभी को तो पता ही है सुबह-सुबह हर लड़के का लंड एकदम टाइट होता है.
ऐसे में कोई कच्ची उम्र की खूबसूरत लड़की आपके पास बैठी हो तो खुद के ऊपर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है.
यहां तो मीरा ना सिर्फ़ मुझसे अपनी टांगें चिपका कर बैठी थी बल्कि वह बात-बात पर हंस भी रही थी.
हंसने के अलावा वह हर छोटी सी बात पर मेरा हाथ पकड़ ले रही थी.
कभी मेरे हाथ के ऊपर अपने हाथ रख देती.
ऐसा लग रहा था जैसे आज वह कुछ ना कुछ करके ही मानेगी.
उसकी ये सारी हरकतें ऋतु और मुग्धा भी नोटिस कर रही थीं लेकिन मीरा को इस सब की कोई परवाह नहीं थी.
उसकी नर्म नर्म टांगों का स्पर्श अपनी टांगों पर होने की वजह से मेरा बुरा हाल हो रहा था.
मेरा लंड फड़फड़ा रहा था.
मैं सोच रहा था कि काश आज ये अकेली होती तो इसे यहीं दबोच लेता और चोद डालता.
लेकिन ऋतु और मुग्धा की वजह से मैं कुछ नहीं कर पा रहा था.
अचानक मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया.
मैंने अपनी एक टांग को घुटने से मोड़ कर अपनी दूसरी टांग के ऊपर रख लिया जिससे मेरी टांग सीधी मीरा के घुटने के थोड़ी से अन्दर की तरफ उसकी जांघ पर टच हो गयी.
पहले तो मीरा एकदम से चौंक गयी कि ये क्या हुआ!
वह थोड़ा सा घबरा गयी और पीछे हट गयी, पर तभी उसको समझ में आ गया कि क्या हुआ!
उसके होंठों पर एक छुपी हुई मुस्कान आ गई थी जिसे मैंने समझ लिया था कि लड़की हॉट हो गई है और चुदने के लिए मचल रही है.
दोस्तो, सेक्स कहानी के अगले भाग में मैं आपको बताऊंगा कि मैंने मीरा को किस तरह से सैट करके हचक कर चोदा और उसकी बुर गांड के दोनों छेद फाड़ दिए.
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