टीचर फक स्टोरी में पड़ोस में मेरी ट्यूशन टीचर अकेली रहती थी. हम इतने खुले हुए थे कि उन्होंने अपने लैपटॉप पर मुझे ब्लू फिल्म देखने दी. उसके बाद उन्होंने मेरा लंड देखा.
फ्रेंड्स, मैं परवेज आपको अपनी पड़ोसन आपी की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
पड़ोसन आपी ने मेरा लंड चूसा
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि आपी ने मुझे अपनी चुत कुरेदने की परमीशन दे दी थी.
अब आगे टीचर फक स्टोरी:
मैंने बिना एक पल भी गंवाये अपना हाथ आपी के लोअर के अन्दर डाल दिया और उनकी चूत के मुलायम बालों के बीच उनकी चूत के छेद को ढूंढने के लिए अपनी उंगलियां घुमाने लगा.
आपी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी, चूत का रस आपी की जांघों तक में लग चुका था.
मैंने अपनी बीच वाली उंगली आपी की गर्म और गीली चूत में घुसा दी.
चूत में उंगली जाते ही आपी की सिसकी निकल गयी और आनन्द के वजह से उनकी आंखें बंद हो गयीं.
उनके मुँह से ‘इस्स … उम्म …’ जैसी कामुक आवाज़ें निकलने लगीं.
आपी ने मेरा हाथ फिर से कस के पकड़ लिया जैसे कि वे कहना चाह रही हों कि बहुत मज़ा आ रहा है, प्लीज उंगली बाहर मत निकालना.
मेरा दायां हाथ आपी के लोअर में था और बाएं हाथ से मैं आपी के गदराये दूध को मसल रहा था.
आनन्द के वजह से आपी की हालत देखने लायक थी.
वे ठीक से अपने घुटनों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थीं और मेरे ऊपर पूरी तरह झुक गयी थीं.
उन्होंने अपनी चिन मेरे कंधे पर टिका दी थी और बस लम्बी लम्बी सांसें ले रही थीं.
मेरे हाथ को जगह मिल सके, इसके लिए उन्होंने जितना हो सकता था अपनी टांगों को फैला लिया था.
मैं एक हाथ की उंगली से आपी की गीली नर्म चूत की चुदाई कर रहा था तो दूसरे हाथ से बारी बारी उनकी दोनों चूचियां मसल रहा था.
मैंने आपी को धीरे से पीछे धकेलते हुए लेट जाने का इशारा किया.
आपी समझदार थीं, वे इशारा मिलते ही पीछे लेट गयीं.
मैंने आपी के पजामे और कच्छी को एक साथ पकड़ा और उतारने की कोशिश करने लगा.
मुझे कोई परेशानी ना हो इसलिए आपी ने अपने गदराये चूतड़ थोड़ा ऊपर को उठा दिए.
अगले ही पल आपी का पजामा और मेहरून रंग की कच्छी बेड के पास फर्श पर पड़े थे.
आपी की महीनों से अनचुदी चूत की खुशबू से पूरा कमरा भर गया था.
मैंने ब्लू फिल्में तो काफी देखी थीं, मालूम भी था कि चूत कैसी दिखती है लेकिन आज जीवन में पहली बार असली गर्म चूत, वह भी अपने चेहरे के इतना नज़दीक पहली बार देख रहा था.
समझ ही नहीं आ रहा था कि पहले क्या करूँ!
मैंने अपनी उंगलियों से आपी की गीली चूत को खोला तो उसमें से रस की बूँद बह कर आपी के चूतड़ों के बीच बह गयी.
इतनी रसीली चूत देख कर मुझसे रहा नहीं गया.
मैंने आपी के मस्त गदराये चूतड़ों को पकड़ कर उन्हें बेड के किनारे पर खींच लिया और खुद घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गया.
अब मैंने आपी की टांगें खोलीं तो देखा कि आपी की चूत घने बालों से भरी हुई थी.
उनकी झांटों के बाल जांघों तक आ रहे थे और उनकी चूत के पानी से चिपचिपे हो गए थे.
मैंने बिना एक मिनट भी गंवाए अपना मुँह आपी की चूत पर जमा दिया.
आपी के मुँह से ‘इस्स मर गई …’ की आवाज़ निकल गयी.
उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरे बाल कसके पकड़ लिए.
वे धीमी आवाज़ में बड़बड़ाने लगीं- ओह परवेज़, क्या कर रहे हो तुम … अपनी प्यारी आपी की चूत को खा जाओगे क्या?
आपी की ऐसी बातें सुन कर मुझ पर अजीब सा पागलपन सवार हो गया था.
मैं लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगा कर आपी की चूत चाटने लगा.
आपी की चूत की खुशबू बहुत प्यारी थी.
मैं कभी आपी की चूत को चाटता तो कभी अपनी उंगलियों से आपी की चूत को खोल कर उसमें अपनी जीभ घुसाने की कोशिश करने लगता. फिर आपी के बटन पर अपनी जीभ लपलपाने लगता.
जैसे ही में आपी के गुलाबी बटन पर अपनी जुबान को लपलपाता, आपी के चूतड़ अपने आप उछलने लगते और उनके मुँह से ‘उह्ह्ह … उम्म …’ की आवाज़ें निकलने लगतीं.
थोड़ी देर तक चूत चटवाने के बाद आपी ने मेरे बाल खींचते हुए कहा- बहुत हुआ, अब ऊपर आ जाओ परवेज़ … अब तुम्हारी जीभ नहीं, कुछ और चाहिए मुझे!
आपी का आर्डर मिलते ही मैं फ़ौरन बेड पर चढ़ गया और आपी ने मुझे पीछे धकेलते हुए लेट जाने का इशारा किया.
मैं बेड पर सीधा लेट गया.
मेरा लंड किसी खम्बे की तरह सीधा खड़ा था.
तभी आपी आगे झुकीं और उन्होंने मेरे लंड का टोपा घप्प से अपने मुँह में भर लिया.
मेरा लंड आपी के मुँह में जाते ही ऐसा आनन्द आया मानो सर्दी की किसी रात में ठिठुरते हुए किसी ने आपको मखमली रज़ाई ओढ़ा दी हो.
आपी बड़े प्यार से मेरा मोटा लंड चूस रही थीं और मेरा लंड चूसते चूसते मेरी तरफ गर्दन घुमा कर मेरे चेहरे के भाव देखने लगती थीं.
आपी के चिकने गोल मटोल गदराये चूतड़ मेरे चेहरे की तरफ थे.
मैं उनकी टांग पकड़ कर अपनी तरफ खींचने की कोशिश करने लगा तो आपी समझ गयीं कि मैं क्या करना चाह रहा हूँ.
फ़ौरन से आपी उछल कर मेरे फेस पर अपनी मस्त गांड सैट करके बैठ गयीं.
मैंने आपी की मस्त गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने मुँह के पास खींचा और उनकी चूत चाटने लगा.
कभी में उनकी चूत को अपनी उंगलियों से खोल कर जीभ अन्दर तक डालता और कभी उनकी चूत के दाने को अपने होंठों के बीच में दबा कर मसल देता.
मैं जब भी ऐसा ऐसा करता, आपी मेरा लंड चूसना छोड़ कर एकदम मदहोश हो जातीं और अपनी गीली चूत मेरे फेस पर दबा कर मेरे लंड को कसके पकड़ ले रही थीं.
उस वक्त वे अपना फेस मेरी जांघों के बीच में रख कर निढाल सी पड़ जाती थीं, बस उनकी उम्म आह की मदभरी सिसकारियां ही सुनाई देती थीं.
मेरे दिमाग़ में न जाने क्या खुराफ़ात आयी कि मैंने अपने दोनों हाथों से आपी के बड़े बड़े चूतड़ों को फैलाया और अंगूठे के साथ वाली उंगली थोड़ी सी आपी की गांड के छेद में घुसेड़ दी.
आपी एकदम से उचक पड़ीं और उनके मुँह से ‘उई इ इइ अम्मी’ की आवाज़ निकल गयी.
वे मेरी तरफ अपनी गर्दन करती हुई बोलीं- क्या करते हो?
मैंने कुछ नहीं कहा और अपनी उंगली भी बाहर नहीं निकाली.
उसके बाद उन्होंने अपनी गांड के छेद को एक दो बार ऐसे सिकोड़ा कि मुझे लगा मेरी उंगली टूट ही जाएगी.
आपी के इस तरह गांड को भींचने से मेरे उंगली अच्छी तरह आपी की गांड में सैट हो गयी थी और शायद आपी को उसमें मज़ा भी आने लगा था.
अब जैसे ही मैं आपी की गांड के छेद में अपनी उंगली का प्रेशर बढ़ाता, आपी अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ देतीं.
मेरा पूरा फेस आपी की चूत के पानी और मेरे थूक से गीला और चिपचिपा हो गया था.
थोड़ी देर के बाद अचानक आपी लुढ़क कर मेरे ऊपर से उतर गयीं और बोलीं- अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा यार … तुम मेरे ऊपर चढ़ ही जाओ.
ऐसा कह कर आपी बेड पर सीधी लेट गयीं और मेरी तरफ देखने लगीं.
मैंने घुटनों के बल बैठ कर आपी की टांगों के बीच में पोजीशन ली और उनकी टांगें खोल कर अपनी जांघों के दोनों तरफ फैला दीं.
फिर उनके चूतड़ों के नीचे अपनी बांहें डाल कर आपी के चूतड़ों को थोड़ा उठा दिया.
ऐसा करने से आपी की चूत के घने बालों के बीच से झांकती हुई उनकी गीली चिपचिपी चूत के दर्शन होने लगे थे.
मैंने एक हाथ से अपना लंड आपी की चिकनी चूत पर सैट कर दिया और हल्का सा जर्क लगा कर टोपा अन्दर डाल दिया.
लंड घुसेड़ने के बाद मैं आपी के ऊपर चढ़ने के लिए जैसे ही आगे झुका, मेरा मोटा लंड करीब आधा आपी की चूत में समा गया.
चूत में लंड घुसते ही आपी की चीख़ निकल गयी.
वे ‘उफ्फ उई … आआह …’ करने लगीं.
मैंने पूछा- आप ठीक हो?
वे बोलीं- तुम्हारा बहुत मोटा है परवेज़, इसलिए हल्का सा दर्द हुआ, लेकिन इस दर्द का अपना मज़ा है.
मैंने पूछा- भाई के साथ भी तो करती होंगी ना आप!
वे बोलीं- तुम्हारे भाई सीधे सादे इंसान हैं. उनका लंड तुम्हारी तरह मोटा तगड़ा नहीं है और न ही वो तुम्हारी तरह बदमाश हैं. वे बस सिंपल सिंपल पेल कर अन्दर बाहर करते हैं!
मैंने मस्ती में पूछ लिया- चाटते तो होंगे न आपकी?
वे बोलीं- चाटना तो दूर, उन्होंने आज तक ठीक से देखी भी नहीं है मेरी!
ये सुनते ही मैंने अपने हाथों से आपी के मस्त चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठाया और अपना पूरा लंड आपी की प्यासी चूत में पेल दिया.
आपी ने कराह कर अपनी गर्दन एक तरफ को मोड़ ली और आंखें बंद करके चुदाई का आनन्द लेने लगीं.
उनके मुँह से लगतार उम्म आह की आवाजें निकल रही थीं.
मैं थोड़ा और आगे झुक कर आपी के दूध चूसने लगा.
दूध चूसते चूसते मैं अपना पूरा लंड टोपे तक बाहर खींचता और फिर पूरी ताक़त … और तेज़ी के साथ पूरा लंड आपी की चूत में ढूंस देता.
आपी पागल सी हो गयी थीं.
उनकी आवाजें और सांसें दोनों तेज़ होने लगीं.
आपी ने बिना आंखें खोले ही मुझसे कहा- कुछ बोलो न परवेज़ … कैसा लग रहा है तुमको? खूब गन्दी गन्दी बातें करो प्लीज़ … ये सोचो कि तुम अपनी गर्लफ्रेंड को चोद रहे हो. मेरा नाम लेकर गन्दी गन्दी बातें बोलो न प्लीज़!
पहले तो मुझे यक़ीन ही नहीं हुआ कि आपी ये सब करने को कह रही हैं.
फिर मैंने सोचा कि जब आपी खुद ही कह रही हैं तो क्यों न उनकी बात मान ली जाए.
मैंने कहा- ओह कशिश मेरी जान … तुम्हारी टाइट चूत में जाकर मेरे लंड को जन्नत का मज़ा आ रहा है. ऐसा लग रहा है मेरा लंड किसी गर्म गर्म भट्टी में चला गया है, उफ्फ्फ तुम्हारे मस्त दूध चूसने में कितना मज़ा आ रहा है कशिश मेरी जान!
वे आंखें बंद करके मेरी बातों का मजा ले रही थीं.
मैंने पूछा- कशिश तुम भी कुछ बोलो न, तुमको कैसा लग रहा है?
आपी बोलीं- ओह परवेज़, तुम्हारा लंड भी मुझे जन्नत के मज़े दे रहा है काश तुम्हारे भाई का लंड भी तुम्हारी तरह मोटा तगड़ा और लम्बा होता और वे भी तुम्हारी तरह मेरी चुदाई कर पाते. प्लीज़ तुम मेरा ख़्याल रखना … हमेशा मेरी चूत की प्यास बुझाते रहना परवेज़!
ये सब बोलते बोलते आपी एकदम मदमस्त होकर अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरी चुदाई की रिदम से रिदम मिलाने लगीं.
मेरा लंड इंजन के पिस्टन की तरह आपी की चूत में अन्दर बाहर हो रहा था.
उनकी चूत से इतना रस बह रहा था कि मेरे आंड भी गीले हो गए थे.
मैंने अपना हाथ नीचे ले जाकर आपी के चूतड़ दबोचे तो महसूस हुआ कि आपी की चूत पानी बह कर उनकी मस्त गांड की दरार में भी घुस गया था.
मैंने आपी का एक दूध अपने मुँह में भर कर लम्बे लम्बे धक्के मारने शुरू कर दिए.
आपी ने अपनी टांगें मेरी टांगों पर लपेट लीं और मेरी कमर को अपने हाथों से जकड़ लिया.
मैं महसूस कर पा रहा था कि आपी कभी कभी अपनी चूत ऐसे सिकोड़ती थीं कि मेरे लंड पर उनकी चूत का कसाव महसूस होने लगता था.
आपी के ऐसा करने से मैं पागल सा हो गया और धकाधक धक्के मारने लगा.
हर धक्के पर मैं पूरा लंड बाहर खीचता और झटके से अन्दर पेल देता.
आपी भी अपनी गांड उछाल उछाल कर बराबर की टक्कर दे रही थीं.
अचानक आपी के मुँह से बहुत तेज़ ‘आआ हहह मर गई आह!’ की आवाजें आना शुरू हुईं और आपी ने अपने हाथों की पकड़ मेरी पीठ पर ढीली कर दी.
अपनी जिन टांगों से उन्होंने मेरी टांगों को लपेट रखा था, उनको भी ढीला कर दिया.
मैं आपी के मासूम चेहरे को देखते हुए धक्के मारता रहा और कुछ लम्बे लम्बे धक्कों के बाद मेरे लंड ने भी आपी की चूत में गर्म गर्म लावा की पिचकारी छोड़ दी.
आपी ने एक बार फिर से मुझे जकड़ लिया और ‘उम्म मेरी जान …’ की आवाज़ के साथ फिर से निढाल हो गयीं.
मैं भी झड़ कर निढाल हो गया था तो आपी के ऊपर ही लेट गया.
टीचर फक करके लगभग 2 मिनट तक हम दोनों इसी पोजीशन में लेटे रहे.
फिर मैं आपी के ऊपर से उठा और धीरे से अपना लंड आपी की चूत से बाहर खींचा.
मेरे लंड के चूत से पूरा बाहर आते ही गाढ़ी सफ़ेद क्रीम बह निकली.
उस रस से समझ में आया कि मेरे लंड ने आपी की चूत को लबालब भर दिया था.
हम दोनों के मिश्रित रस की धार आपी की चूत से बाहर आने लगी थी.
आपी ने अपने हाथ से अपनी चूत को छूकर देखा तो बोलीं- बाप से… कितना माल निकाला है?
यह कहते हुए आपी ने बेड की साइड में रखे हुए टिश्यू पेपर के डब्बे से कुछ टिश्यू पेपर निकाले और अपनी चूत साफ़ करने लगीं.
एक दो टिश्यू मेरी तरफ बढ़ाती हुई मुस्कुरा कर बोलीं- लो अपना लंड भी साफ़ कर लो, बहुत मेहनत की है इसने.
आपी ने अपनी आंखों से मुझे नज़दीक आने का इशारा किया, तो मैं आपी के चेहरे की तरफ झुक गया.
मेरे नज़दीक आने पर आपी ने मेरी गर्दन में हाथ डाल कर अपनी तरफ़ खींचा और मेरे होंठों को चूम लिया.
वे बोलीं- बहुत प्यारे हो तुम … प्लीज ये बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिए, अपने किसी बेस्ट फ्रेंड से भी ये बात मत करना … समझे?
यह कह कर हम दोनों बेड से उठ गए और अपने अपने कपड़े पहन लिए.
मैंने अपने जूते पहन ही रहा था कि आपी एक डब्बा लेकर आयीं.
वे बोली- मैंने खीर बनायी है, तुम भाभी को दे देना.
मैंने आपी के हाथ से स्टील का डब्बा ले लिया और जाने लगा.
आपी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और एक बार फिर से किस किया.
वे मुस्कुराती हुई बोलीं- जब भी खीर खाने का दिल हो, बता देना.
मैंने कहा- हां मुझे तो अब रोज ही दो बार खीर खाने का मन रहने वाला है!
आपी- डन मेरी जान … कल तुमको पिच एकदम साफ मिलेगी.
मैं हंस दिया.
दोस्तो, इस तरह से पड़ोसन आपी की प्यासी चुत में मेरे लंड को घुसने-निकलने की इजाजत मिल गई थी.
आपको मेरी टीचर फक स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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