आंटी नेफ्यू Xxx स्टोरी में मैंने अपने सजीले जवान भतीजे को पटाने की कोशिश की तो वो मेरी और खिंचा चला आया. मैं बहाने से उसके फ्लैट में रहने चली गयी.
फ्रेंड्स, मैं आपको अपने भतीजे के लंड से कैसे चुदी … वह सेक्स कहानी सुना रही थी.
कहानी के पहले भाग
देवर के बेटे का लंड लेने की चाह
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं अपने भतीजे के लंड को अपनी चूत में लेने की जुगत भिड़ा रही थी.
अब आगे आंटी नेफ्यू Xxx स्टोरी:
मैंने साड़ी कमर में फंसाई, साइड से दिख रहे मेरे बूब्स मुझे खुद को ही बहुत अच्छे लग रहे थे तो अभिजीत का क्या हाल होगा … जो रात भर मेरे दूध को दबा कर मजा लेता रहा.
अभिजीत लोअर पहन कर आया.
लोअर के बाहर से जो लंड का दीदार होता है, उसका अलग ही मजा है.
हम दोनों रूम की, किचन आदि सब की सफाई में लग गए.
सफाई का काम खत्म हुआ तो उसने मेरी तरफ देखा.
अभिजीत बोला- आप कपड़े नहा लो, कपड़े धोबी को दे देंगे, तब तक मैं सामान ले आता हूं. बता दो क्या क्या लाना है?
उसने न ताई कहा, न बड़ी मम्मी … पहली बार उसके मुँह से ये सब न सुनकर मैं बड़ी खुश हुई.
मैंने लिस्ट बता दी और पूछा- कितनी देर में आओगे?
एकदम बीवी की तरह.
उसने मेरे चेहरे को देखा, वह प्यार वाला भाव देखकर मैं समझ गई थी कि आज मेरा पति मुझे बहुत चोदने वाला है!
अभिजीत एक घंटा की कहकर चला गया.
मैंने सोचा कि एक घंटा तक करूंगी क्या, चलो कपड़े खुद ही धो देती हूं.
मैंने अपनी पहनी हुई साड़ी निकाली, ब्लाउज उतारा.
अभिजीत के भी बैग के कपड़े निकाले.
उसमें एक डब्बा था और डब्बे में वही लाल रंग की 36 साइज की ब्रा थी.
मुझे अथाह खुशी मिली ये देखकर कि मेरा मर्द घात लगाए बैठा था मेरे 38 इंच नाप के थनों पर!
यह सोचते ही मेरे थनों में गुदगुदी हो उठी. अब उस आने वाली रात में इसी ब्रा को पहन कर अपनी पति से खुलवाना थी.
मैं कपड़े धोने के बाद अपने बैग से किट बॉक्स ले आई.
उसमें से रेजर निकाल कर चूत की झांटों को रफा दफा किया, चूत को अच्छे से चिकनी कर दी.
मैंने ब्रा पहन ली.
थोड़ी कसी हुई थी.
फिर साड़ी ब्लाउज पहन लिया.
अभिजीत आया. उसे आने में डेढ़ घंटे लग गए थे लेकिन वह सब सामान ले आया था.
मुझे देखते ही वह स्तब्ध रह गया!
पर उस खिलाड़ी मर्द को सब मालूम था कि औरत या लड़की को चुदाना हो तो वह क्या क्या करती है!
अभिजीत- ये लीजिए, फिलहाल के लिए जो जरूरी था … वह सब ले आया.
वह ये बोलकर नहाने चला गया.
मैं खाना बनाने चली गई.
रात को कैसे करूंगी शुरुआत, समझ नहीं आ रहा था.
अभिजीत नहा चुका था और इधर मैं खाना तैयार कर चुकी थी.
खाना-वाना खाकर अब आराम करने का मन हुआ.
बेड एक ही था.
अभिजीत नीचे लेटा और मैं बेड पर किनारे आ गई.
मैं अभिजीत की ओर करवट लेकर बात करने लगी.
अभिजीत नीचे से अपनी नजरों से मेरे 38 इंच के पपीते देख रहा था.
वह अपनी नजरों से मेरे मम्मों में तीर मार रहा था.
आपको तो मालूम ही है कि बड़ी चूचियों वाली महिलाओं जब करवट लेकर लेटती हैं तो उनके ब्लाउज में से चूचियां एक के ऊपर लद जाती हैं और उनका गुंदाज उभार बड़ा ही कामुक लगता है.
उसका इस तरह से मेरे दूध देखना, मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
कुछ देर तक बातों का दौर चलने के बाद हम दोनों सो गए.
शाम को जब मैं जागी, तो अभिजीत सो ही रहा था, पर उसका लंड जागा हुआ था.
उसके लोअर में उसका मोटा और लंबा लंड काफी खूंखार लग रहा था.
मेरा तो देखते ही मन किया कि चूम लूं, पर मैंने दूर से ही अभिजीत के लंड को फ्लाइंग किस दी.
फिर उठकर मैंने चेंज किया और हल्का सूती वाला गाउन कह लीजिए या मैक्सी, पहन ली और अपने तने हुए मम्मों पर दुपट्टा भी नहीं लिया.
मैं चाय बनाकर ले गई और उसको जगाने लगी.
मैं- जीत, जीत…
मैंने दो तीन बार पुकारा.
अभिजीत जागता हुआ बोला- अ..हां बोलिए!
वह जाग गया और मुझे देखकर बैठ गया.
अभिजीत- अंधेरा होने को आया आपने जगाया नहीं!
मैं- उठो, मुँह धोकर आओ, चाय ठंडी हो जाएगी!
वह उठकर खड़ा हुआ तो उसका लंड फुंफकार रहा था.
मैं बड़ी हसरत भरी निगाहों से लंड देखने लगी और अभिजीत ने भी मुझे यह सब देखते हुए देखा.
हम दोनों ने नजर फेरीं और उसने अपना हथियार सही कर लिया.
वह वाशरूम चला गया और शायद उधर मुठ मार कर शांत होकर आ गया.
हम दोनों बैठ कर चाय पीने लगे.
बिना दुपट्टे के देख कर अभिजीत का मन डोल रहा था.
यह उसकी हलचल करती हुई आंखों से बता दिया!
हम दोनों में सामान्य बातें चलती रहीं.
शाम को अंधेरा हुआ तो हम लोग छत देखने के बहाने ऊपर आ गए.
टहलते टहलते अभिजीत की कोहनी मेरी एक चूची में लग रही थी.
मेरी ब्रा में चूचियां हिचकोले खा रही थीं.
मैं चुदाई का मूड लिए हुई उसकी कोहनी को थैंक्यू कह रही थी.
अभिजीत को भी अच्छा लग रहा था.
फिर कुछ देर बाद मैंने पूछा- जीत खाना क्या बनेगा?
अभिजीत ने बोला- कुछ मंगा लेता हूं ऑनलाइन आ जाएगा, क्या खाएंगी आप?
मुझे कुछ अच्छा सा खाने का बहुत मन था, पर बोलने में संकोच हो रहा था.
मैं- जो मंगाना है, मंगा लो, मैं वही खा लूंगी.
अभिजीत- बिना संकोच बोलिए न … जैसे मैं बचपन में आपसे बोलता था और आप मेरे लिए बना देती थीं!
अभिजीत घर का इकलौता बेटा और छोटा था तो उसे बहुत लाड़ प्यार मिला था.
अब उसे हम तीनों अपने लाड़ के चलते अपनी चूत भी चोदने दे रही हैं.
अगली कहानी में लिखूँगा कि मेरी देवरानी, मैं और रानू तीनों उसके लौड़े से चुद रही थीं.
मैंने बताया कि चिकन रोस्टेड और चिकन करी मँगवा लो!
अभिजीत अंधेरे में अपना लंड सैट कर रहा था.
मैंने मन में ही कहा कि क्यों परेशान हो रहा है, आज रात में मैं इसे अपनी चूत में सही से सैट कर लूंगी, बिल्कुल चिंता न करो.
खैर … खाना आ गया और हम लोग नीचे आ गए.
खाना खाया, मैंने प्लेट्स धोकर रख दीं.
खाना खाने के बाद मैं देवरानी से बात करने लगी.
उससे बात करते करते लगभग एक घंटा हो गया.
उधर अभिजीत अपने फोन में व्यस्त था.
फोन रखने के बाद मैं उससे मुखातिब हुई- अभिजीत, कब तक नीचे सोओगे, ऊपर ही आ जाओ, मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
अभिजीत- कोई बात नहीं बड़ी मम्मी, आप सोओ.
कुछ देर ना नुकुर करने के बाद वह बेड पर आ गया और मैंने बत्ती बंद कर दी.
मैं- अभिजीत तुमसे मैंने कहा था ना कि रानू के लिए तुमने एक बाप का फर्ज निभाया है!
अभिजीत- हां.
मैं- बाप का एक और फर्ज होता है.
अभिजीत- बताइए, वह भी पूरा कर दूंगा!
ये सुनकर मैं खुश हुई, वासना जब सिर पर सवार हो तो चूत और लंड का मिलन हो ही जाता है.
मैं- उसकी मां को खुश रखना!
अभिजीत- आप खुश नहीं हैं क्या? कोई कमी रह गई है क्या दीदी की शादी में?
मैं- अभिजीत मन तो खुश हो गया है, पर …
यह कहकर मैंने अभिजीत के लिए सारे दरवाजे खोल दिए.
अभिजीत- पर … अब क्या कमी है?
मैं सीधे मुद्दे पर ही आ गई क्योंकि मुझे एक भी दिन मिस नहीं करना था.
मैं- मैं वही कमी पूरी करने तुम्हारे साथ आई हूं. अब मेरे पति का फर्ज निभाओ.
यह कहते हुए मैंने उसके लंड पर हाथ रख दिया.
उसका लंड खड़ा था और शायद वह अंधेरे में लौड़े को सहला भी रहा था.
लंड पर हाथ रखते ही मेरी बरसों से सूखी भट्टी में ज्वाला धधकने लगी.
अभिजीत ने कुछ नहीं कहा, सीधे मेरे गाल पर हाथ रखा.
उफ्फ, उम्म्म.
यही निकला हम दोनों के मुँह से!
वह मेरे गाल सहलाते हुए बोला- मैं भी इंतजार में था इस पल के!
मैं लोअर के अन्दर हाथ डाल कर उसके बड़े लंड को सहलाने लगी और अभिजीत ने एकदम से मेरे करीब आकर मुझे बांहों में भर लिया.
मैं लंड सहलाती रही.
अभिजीत मेरे गाल को चूमते हुए बोला- कब से ये सब सोच रखा था?
मैं- जिस दिन तुम्हारी नशीली आंखों ने मेरे इन पपीतों को देखा था.
अभिजीत- मेरी आंखें तो अभी भी देखना चाह रही हैं!
मैंने उसका लंड छोड़ उसको बांहों में भर लिया, उसने भी मुझे समेट लिया. काफी देर तक हम दोनों ऐसे ही चिपके रहे.
फिर उसने मेरे होंठ पर किस किया, मेरे होंठ पीने लगा.
मैं उसकी जीभ से जीभ टकराने लगी.
हम दोनों नाग नागिन की तरह बेड पर लिपट कर ऊपर नीचे हो रहे थे और एक दूसरे की बांहों में ऐसे चिपक गए थे मानो फेविकोल का जोड़ हो.
मेरे उरोज अब ब्रा में नहीं समा रहे थे, बस हुक की बेड़ियों को तोड़कर आजाद होना चाह रहे थे.
मैंने उसका सिर पकड़ के अपनी छाती से लगा दिया, ताकि वह इससे आगे बढ़े.
छाती से लगे रहने के बाद उसने मेरी छातियों को गाउन के ऊपर से ही चूमना शुरू कर दिया.
वासना में लिप्त होकर वह बोला- मैंने आज तक इतने बड़े दूध नहीं देखे!
वह मेरे दूध काट रहा था और मैं उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी.
वह मेरी छाती के निप्पल को काट रहा था, तो मेरी सांसें टंगी जा रही थीं, मदहोशी में मेरी आंखें उलटी हुई जा रही थीं.
उसका लंड मुझे मेरी टांगों के बीच चुभ रहा था, सच में उस वक्त बहुत आनन्द आ रहा था.
बार बार मन कह रहा था कि मैंने अपनी चूत के लिए एक नए पति का लंड खोज लिया है … जो आज मेरा बिस्तर गर्म कर रहा था.
कुछ पल बाद मैंने अभिजीत की बांहों से उठकर खिड़की दरवाजे चैक किए, परदे सही लगा दिए और कमरे की लाइट जला दी.
फिर मैंने बिंदास होते हुए अपनी मैक्सी को उतार दिया.
मैं पेटीकोट और ब्रा मे आ गई. मेरी 36 नंबर की ब्रा में 38 इंच के कबूतर उड़ने के लिए फड़फड़ा रहे थे.
वह अपने बैग से चुराई हुई ब्रा देखकर चौंक गया, पर मदहोशी में लिप्त हम दोनों फिर से लिपट गए.
अभिजीत मेरी गर्दन काटने लगा, चाटने लगा.
वह कभी मुझे चूसने लगता तो कभी मेरे कान की लौ को काटने लगता.
उसकी इन हरकतों से मैं समझ गई कि अभिजीत चुदाई में एक मंजा हुआ खिलाड़ी है.
मैंने उस समय बस यही सोचा कि मुझे मेरे मर्द को कुछ सिखाना नहीं पड़ेगा.
उसने मुझे पेट के बल लिटा दिया और मेरी गर्दन से लेकर कंधे, पीठ सब चूमता रहा.
ऐसा कभी मेरे पति ने नहीं किया था.
मेरे ऊपर लेट कर अपने हाथ नीचे ले जाकर मेरी चूचियां मींजने लगा.
मैं अपनी कामुक सिसकारियों ‘उम्म, आह, सी सी’ से मादकता में और जोश भर रही थी.
अभिजीत बार बार मेरी ब्रा की पट्टी खींचकर छोड़ दे रहा था.
उससे चोट तो लग रही थी, पर इससे पता चल रहा था कि ये मर्द बिस्तर पर बड़ा ही जालिम होगा.
टोटली अनएक्सपेक्टेड किया उसने …
अपने दांतों से मेरी ब्रा के हुक को खोल दिया और अब वह पीठ पर दांत से काटे जा रहा था.
मैं कराहती हुई बोल रही थी- आह आहिस्ता जीत … दांत चुभ रहे हैं!
पर वह हवस से भरा मर्द मेरी एक नहीं सुन रहा था.
मुझे उससे अब अपने चूचुक कटवाने कटवाने थे तो मैं पलट गई.
पहले तो उसने मेरे तने हुए उरोजों का अच्छे से दर्शन किया, फिर एक चूची काटने लगा.
वह जगह जगह मेरे काटता रहा और मेरे मम्मों को लाल करने लगा.
पूरा कमरा मेरी मादक सिसकारियों से गूंज रहा था.
मैं उसके मुँह में चूची डालकर लेट गई और वह मजे से पीने लगा.
मैं उसे दूध पिलाती हुई उसके बाल सहला रही थी.
फिर अभिजीत नीचे सरका और मेरी चूत को चाटने लगा.
मैं पागल होने लगी, मैं उसका सिर अपनी चूत में दबाने लगी.
आह उह्ह्ह्ह …
बस यही निकल रहा था मेरे मुँह से.
मैं अपनी कमर उठाने लगी, उसको कहने लगी- आह और जोर जोर और जोर से!
एक साल बाद मेरा जमा हुआ पानी निकल गया था और मैं हांफ रही थी.
अभिजीत मेरी जांघ चूमने लगा.
मैं उसके लंड को हाथ में पकड़ कर सहलाने लगी और अपनी चूत पर रखकर बोली- जीत, आराम से करना.
उसके लंड का टोपा इतना मोटा था कि चूत उसके सामने छोटी लग रही थी.
उसने हम्म कहा और पेल दिया.
पहले धीरे धीरे, फिर एक झटके में लंड चूत में घुस गया.
वह मेरे बदन को किसी पगलाए सांड की तरह नोच नोच कर चोदने लगा और गंदी गंदी गालियां देने लगा.
एक उन्मत्त मर्द जब गाली देते हुए चोदने लगता है, तो औरत को उससे कुचलने में जो खुशी मिलती है, यह मेरी पाठिकाएं भली भांति जानती होंगी.
अभिजीत पूरी मस्ती में था और मैं भी मस्ती में थी.
उसने बेरहम बनकर मुझे चोदा.
उस रात उसने मुझे 3 बार चोदा और हर तरीके से चोदा.
घोड़ी बनाकर, गोद में उठाकर, अपने लौड़े पर बिठा कर … यानि मेरी चूत को भरपूर मजा दिया.
थक कर कब सो गए हम दोनों … कुछ होश ही न रहा.
सुबह जब मैं उठी तो हम दोनों नंगे ही थे.
मैं मुस्कुराई और नंगी ही वाशरूम गई.
उधर नहाई और अपने जिस्म को सहला कर बार बार अभिजीत को याद किया.
अभिजीत अभी सो ही रहा था.
फिर रोज चुदाई हुई.
मेरी चूचियां और बड़ी हो गईं, मस्ती से खिल गईं. मेरा बदन सच में खिलने लगा था.
रोज मैं अभिजीत का माल अपनी चूत में या मुँह में लेने लगी थी.
वह मुझे खड़े खड़े चोदने लगता, किचन में, वाशरूम में. कभी ब्लू-फिल्म दिखा दिखा चोदता. उसके दांत के निशान से मेरा बदन भर गया था.
एक महीने में मेरी चूत का भोसड़ा बन चुका था.
एक महीने बाद हम दोनों घर वापिस आए.
खाना पीना होने के बाद रात में मैं और देवरानी बैठी थीं.
मेरी देवरानी बोली- वाह दीदी, आप तो बदल गईं एकदम से … ऐसा क्या खा लिया?
मन ही मन मैं बोली कि लंड खाया.
मैं- कुछ नहीं, अभिजीत मेरा कुछ ज्यादा ही ख्याल रखता था. खाने पीने से लेकर मेडिटेशन वगैरह सबका.
कुछ देर बाद हम लोग सोने चली गईं.
रात गहरा रही थी.
मेरी चूत में लंड के लिए खुजली होने लगी.
मैंने अभिजीत को मैसेज किया- लंड चाहिए.
अभिजीत- रात में आऊंगा आपके रूम में!
सब अपने अपने रूम में जा चुके थे.
मैं रूम में जाते ही नंगी हो गई और चादर ओढ़ कर बीएफ देखने लगी.
सबके सोने के बाद अभिजीत मेरे रूम में आ गया और मेरे ऊपर लेट कर चूमने लगा.
वह ‘आई मिस यू, आई लव यू’ बोलने लगा.
मैंने देर न करते हुए उसे उठाकर बिस्तर नीचे लगा लिया.
वह मेरी चूचियां पीने लगा, हमने 69 किया, फिर वह मुझे चोदने लगा.
मैं यहां पर चीख भी नहीं सकती थी, जबकि वहां खुल कर मस्ती से चुदवाती थी.
खूब आंटी नेफ्यू Xxx चुदाई हुई उस रात.
फिर अभिजीत 4 बजे अपने रूम में चला गया.
मैं दरवाजा लॉक करके नंगी ही सो गई.
दोस्तो, आपको मेरी आंटी नेफ्यू Xxx स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर लिखें और यह भी लिखें कि क्या आप वह सब भी पढ़ना चाहते हैं, जिसमें अभिजीत ने घर की तीनों चूतों को चोदा था!
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