फॅमिली बैड सेक्स कहानी में मैंने अपनी मम्मी को मेरे फुफेरे भाई से चुदती देखा था. अगली रात भी उनका चोदमचोद का प्लान था. लेकिन मेरे साथ कुछ खेल हो गया.
दोस्तो, जैसा कि आप लोगों ने कहानी के पहले भाग
चुदक्कड़ माँ और बुआ के बेटे का चुदाई का खेल
में पढ़ा कि कैसे मेरी माँ साधना ने मेरे बुआ के लड़के विकास से चुदवाया और अगले दिन का प्लान बनाया.
अब मैं आगे की फॅमिली बैड सेक्स कहानी पर आता हूँ।
शाम के 7 बज गए थे।
मैं खाना खा के पढ़ रहा था तो मैंने मम्मी को बोला, “आप भी खा लो।”
तो उन्होंने बोला, “नहीं, विकास आने वाला है तो साथ में खा लूँगी।”
करीब आधे घंटे बाद विकास आया मेरे बगल वाली खाट पर बैठ गया।
मम्मी पानी ले के आई तो उसने उनको हाथ में कुछ दिया।
मैं समझ गया ये नींद की गोली होगी मेरे लिए, ताकि ये दोनों आज खुले आसमान में अपनी रात रंगीन कर सकें।
थोड़ी देर बाद मम्मी मेरे लिए दूध का गिलास लाई पीने के लिए तो मैं गिलास ले के बोला, “मैं जरा बाहर जा के टहल के पी लूँगा।”
ये बोल के मैं बाहर चला गया और दूध को नल पर गिरा के नल चला दिया ताकि पता ना चले।
जब मैं वापस आ रहा था तो मैंने सुना मम्मी ने बोला, “विकास, दवा का असर कब होगा?”
तो विकास ने बोला, “अभी आधे घंटे में विनय सो जाएगा सुबह तक के लिए। उसके अब आज तुम्हारी चुत की चटनी बना दूँगा!”
थोड़ी देर बाद मैं वापस आया और लेट गया।
10 मिनट बाद मैंने बल्ब बुझा दिया और मम्मी को बोला, “नींद आ रही है।”
बोल के आँख बंद कर ली।
कुछ देर बाद विकास ने मुझे बुलाया, “विनय! विनय!”
पर मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वह उठ के मेरे पास आया और मुझे हिला के जगाने की कोशिश करने लगा।
तब भी मैं नहीं उठा तो उसने मम्मी को बोला, “साधना जानेमन, काम हो गया!”
मम्मी बोली, “चलो खाना खा ले फिर।”
तो विकास बोला, “ऐसे नहीं! अब हमें कोई डर नहीं है। कपड़े उतार दो और नंगी हो जाओ। आज हम नंगे ही खाना खाएँगे और तुम्हारे बेटे के सामने ही तुम्हें चोदेंगे!”
उसके बाद मम्मी ने कपड़े उतरना शुरू किया।
साड़ी के बाद ब्लाउज और बाद में पेटीकोट।
उनका पिछवाड़ा मेरी तरफ और चुत विकास की तरफ।
चाँदनी रात में चाँदी जैसा चमक रहा था उनका जिस्म।
क्या गाँड थी दोस्तों, बता नहीं सकता!
मन तो किया अभी उठ के मम्मी के गाँड में लंड पेल दूँ।
तभी विकास ने बोला, “वाह साधना! आज तो बुर के एकदम साफ कर दिया!”
तो मम्मी बोली, “चाँदनी रात में जो चुदवाना था!”
ये बोल के उन्होंने विकास के पेंट की हुक खोल दी।
विकास ने अपनी चड्डी को अलग करते हुए बोला, “ये देखो जान! आज ये तुम्हारी बुर का भोजन करेगा।”
पहले तो माँ ने बोला, “रोका किसने है?”
इतना कहते ही विकास ने मम्मी को खाट पर बैठा दिया और दोनों पैर नीचे कर के फैला के खुद ज़मीन पर बैठ गया।
मुझे मम्मी के बूब्ज़ साफ दिख रहे थे।
क्या माल थी यार मेरी माँ, जो कि मेरे सामने ही अपनी बुर को फैला के किसी और से चुदवाने को रेडी थी!
तभी विकास ने उनके पैर की अंगूठे को चूसना शुरू किया जिससे कि मुझे मेरी माँ की चुत एकदम साफ दिखाई देने लगी।
मुश्किल से 1 मीटर के फासले पर मुझे मम्मी की चुत के दर्शन हो रहे थे.
लग रहा था जैसे आज ही झाँट साफ की गई थी जिससे उनकी बुर का लाल देना साफ दिख रहा था और बुर के ओंठ तो ऐसे आपस में चिपके पड़े थे कि जैसे कभी लंड ही ना गया हो अंदर।
तभी विकास पैर को चूसते हुए उनके बुर तक पहुँच गया.
मम्मी सिसकारियाँ निकाले जा रही थी और कह रही थी, “और डालो!”
तो विकास बोला, “ये जीभ है, लंड नहीं!”
तब मुझे समझ आ गया कि उसने मम्मी की बुर में जीभ घुसा दी है और जोर-जोर से चूस रहा था।
मम्मी ‘आ हाहा आहा हा!’ जैसे आवाज निकाल रही थी और विकास मम्मी की चुत चाटे जा रहा था।
मम्मी ने अपने दोनों पैर उठा के मेरी खाट पर रख दिए और विकास उसके बीच में बैठ के बुर के मजे ले रहा था।
ये सब मेरे आँखों के सामने चल रहा था।
तभी विकास ने कहा, “जान, अगर विनय अभी जग जाए तो क्या होगा?”
मम्मी बोली, “कुछ भी तो नहीं! उससे भी चुदवा लूँगी। तुमने इतना गर्म कर दिया है मुझे कि अब तो बस मुझे लंड चाहिए, चाहे वो जिसका भी हो!”
इतना कहना था कि विकास उठ के खड़ा हो गया और अपना लंड मम्मी के मुँह में डाल के बोला, “साली रांड, इसको चूस! तू तो बहुत बड़ी रंडी निकली जो अपने बेटे से भी चुदवा सकती है!”
वह अपना लंड मम्मी के मुँह में जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगा।
करीब 5 मिनट के अंदर उसने मम्मी के बाल पकड़ के अपनी तरफ खींच लिया और सारा वीर्य मम्मी के मुँह में डाल दिया।
मम्मी ने छूटने की बहुत कोशिश की पर विकास ने उसके बाल पकड़ रखे थे जिस वजह से उनको सारा वीर्य पीना पड़ गया।
जब मम्मी ने सारा माल गटक लिया, तब जा के विकास ने उनको छोड़ा और बोला, “कैसा था मेरा माल?”
तो मम्मी बोली, “अजीब सा टेस्ट था पर पीने के बाद अच्छा लग रहा है।”
तब विकास बोला, “चलो जान, खाना खा लेते हैं। उसके बाद तो तुम्हें चोदना भी तो है!”
तो दोनों खाना ला के बगल वाली खाट पर बैठ गए।
विकास ने मम्मी के चूचे पकड़ के बोला, “जान, आज तो चमक रहे हैं!”
तो मम्मी बोली, “चाँदनी रात जो है।”
विकास ने मम्मी को कहा, “जान, आज गाँड भी मारूँगा। मना मत करना!”
तो मम्मी बोली, “नहीं, मैंने आज तक नहीं मरवाई। मैं तो मर ही जाऊँगी!”
पर वह मानने को तैयार नहीं था तो मम्मी ने कहा, “ठीक है, पर मैं जो बोल रही हूँ वह करोगे तो वह राजी हो जाएगा।”
मम्मी बोली, “जा के विनय का लंड पीओ तभी मेरी गाँड मिलेगी!”
ये सुन कर तो मेरी गाँड फट गई कि ये साले क्या करने वाले हैं!
तो विकास बोला, “ठीक है, इसमें क्या है? तेरी गाँड के लिए तो कुछ भी करूँगा। वैसे भी विनय तो नींद में है, कौन सा उसको पता चलने वाला है।”
उसके बाद वे दोनों खाना खा के मेरे पास आये, आके मेरी चादर हटा दी और मेरा अंडरवियर उतार दिया.
मेरा लंड तो पहले से ही खड़ा था.
पर उन्होंने सोचा कि हो सकता है नींद में ऐसा हो गया हो।
तभी विकास मेरा लंड चूसने लगा.
तो मम्मी बोली, “यार, विनय का तो तेरे से बड़ा लग रहा है!”
विकास बोलता है, “साली, तेरे बेटे का है। चुत में लेगी तो बता!”
मम्मी बोली, “धत्त!”
तभी चूसते-चूसते मेरा माल निकल गया और विकास सारा पी गया।
उसके बाद वह उठ के सीधा मम्मी की चुत में उँगली घुसा के बोला, “जान, अब तो आगे-पीछे सब मेरा!”
इतना कहा कि मम्मी लेट गई और वह जोर-जोर से उँगली करने लगा।
तभी मम्मी ने बोला, “सिर्फ उँगली डालेगा या अपनी मामी को चोदेगा भी?”
इतना कहना था कि विकास ने अपना लंड मम्मी की बुर पर रख के जोर का झटका दिया और सारा का सारा लंड मम्मी की चुत में उतार दिया।
मम्मी चिल्लाने लगी, “मर गई साले! आराम से नहीं डाल सकता था कुत्ते!”
और जोर-जोर सिसकारियाँ भरने लगी, “आहाह! उउउ! सीसीसी! कितना मजा आ रहा है!”
मेरे सामने मेरी माँ की चुदाई हो रही है और मैं देख रहा हूँ। ये सब मेरे लिए भी किसी मजे से कम नहीं था।
जिस चुत से मैं निकला था आज उसी चुत को मेरे सामने चोदा जा रहा था और मम्मी मजे ले रही थी।
तभी विकास ने कहा, “साली रंडी, तूने विनय का लंड क्यों चूसवाया?”
तो मम्मी बोली, “तो चूसेगा नहीं और मेरी गाँड बच जाएगी? पर तू तो पक्का हरामी निकला। अब तो गांड देनी ही पड़ेगा!”
इतना सुन के विकास ने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और देखते ही देखते सारा वीर्य मेरे माँ की चुत पर डाल के अपना मुरझाया लंड निकाल लिया।
जैसे ही माँ उठ के बैठी सारा वीर्य उनकी चुत से बहता हुआ उनकी चिकनी जाँघों पर आ गया और वह सारा साफ कर के लेट गई।
थोड़ी देर बाद विकास ने उनको उल्टा होने को कहा और बोला, “अब गाँड की बारी!”
तो वह उल्टा हो के लेट गई।
विकास उनकी गाँड में लंड डालने की कोशिश करने लगा पर शायद मम्मी को नहीं डलवाना था इसलिए सफल नहीं हो पा रहा था।
तभी मम्मी ने कहा, “ऐसा करो, आज चुत की चुदाई करो। कल दिन में मैं गाँड की थोड़ा मालिश कर लूँगी ताकि कुछ ढीली हो जाए तब रात में आके कर लेना।”
वह मान गया और मम्मी को कुतिया स्टाइल में बैठा दिया।
उनकी चुत मेरे सामने एकदम से फैल गई।
अभी तक जो चुत बिलकुल चिपकी हुई थी वह एक ही बार चुदने से भोसड़े का रूप ले चुकी थी।
इतने में विकास ने पीछे से मम्मी को चोदना शुरू कर दिया और चोदते-चोदते सारा माल फिर से मम्मी के बुर में भर दिया।
मम्मी थक चुकी थी और लेट गई।
विकास भी उनके पास लेट गया और बोला, “मजा आ गया! पर तुमने अपने बेटे का लंड पिलाया है मुझे। इसका बदला ले के रहूँगा!”
मम्मी, “कोई बात नहीं मेरे राजा। कल मेरी गाँड तुम्हारे लंड का स्वागत करेगी। तैयार रहना!”
ये सब बातें करते-करते दोनों सो गए और मुझे भी नींद आ गई।
तो दोस्तो, कैसी रही मेरी माँ की हवस की कहानी?
अगली कहानी में मैं आपको बताऊँगा कि कैसे विकास का प्लान कैंसिल हुआ और मैंने अपनी ही माँ के गाँड के मजे ले लिए।
दोस्तो, तैयार रहना मेरी अगली कहानी के लिए!
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