न्यूड फक इन मॉल पीवीआर का मजा दिया मेरे नए बने यार ने जो मुझे गोवा लाया मेरे साथ हनीमून का मजा लेने. उसने मुझे पूरी नंगी करके लंड चुसवया और चोदा हाल में.
फ्रेंड्स, मैं अंजलि शर्मा एक बार पुनः अपनी मचलती जवानी की प्यास बुझाने वाली सेक्स कहानी के अगले भाग को लेकर हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
मॉल में ब्रा पैंटी की शॉपिंग में मजा लिया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि सुमेश जी ने मुझे चेंजिंग रूम में चुदास से भर दिया था और खुद भी मुझसे अपना लंड चुसवा कर मुझे चोदना चाह रहे थे, तो मैंने उन्हें किसी और जगह पर चुदाई के लिए कहते हुए मना लिया.
अब आगे न्यूड फक इन मॉल पीवीआर:
मैंने सुमेश से पूछा- सुमेश जी, हम कहां जा रहे हैं?
वे बोले- अंजलि, इसी मॉल में एक पीवीआर है, उसमें चल कर फिल्म का शो देखने चलते हैं.
मैंने शंका जाहिर की- उधर भीड़ हुई तो?
वे हंस दिए और बोले- तो उधर के वाशरूम इस्तेमाल कर लेंगे.
अब मैं उनके साथ फिल्म देखने जाने के लिए मान गई और हम दोनों थिएटर में आ गए.
कुछ देर बाद शो शुरू होने वाला था, पर वहां पर शो के लिए ज्यादा भीड़ नहीं थी.
उसका कारण सिर्फ यही था कि सुबह के टाइम पर ज्यादा लोग शो देखने नहीं आते हैं. बाहर वाले हॉल में हमारे अलावा सिर्फ 10-12 लोग ही और रहे होंगे.
वहां पर सभी लोग सुमेश जी और मुझे ही देख रहे थे.
ये कहना भी गलत नहीं होगा कि वहां लड़कों की नजर सिर्फ छोटे कपड़ों पर थीं और मेरे बूब्स पर लगी हुई थीं.
पर मुझे इन सब बातों में से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था.
मैं सुमेश जी के साथ यहां मजे लेने आई थी.
कुछ देर बाद शो शुरू हुआ और हम लोग थिएटर के अन्दर आ गए.
सुमेश जी ने पीछे की सीट बुक की थी तो हम दोनों पीछे की तरफ आ गए.
बाकी के सभी लोग हमसे काफी आगे बैठे हुए थे.
शो शुरू होने वाला था तो थिएटर की लाइट्स एकदम बंद हो गईं और थिएटर में एकदम अंधेरा हो गया था.
सिर्फ स्क्रीन की ही हल्की रोशनी आ रही थी और कुछ देर बाद फिल्म शुरू हो गई.
हम दोनों फिल्म देखने लगे थे.
सुमेश जी मुझसे चिपक कर बैठे हुए थे.
कुछ देर के बाद सुमेश जी के मन में पता नहीं क्या आया कि उन्होंने मुझे मेरी सीट से उठा कर अपनी गोद में बैठा लिया.
हम दोनों एक दूसरे की तरफ मुँह करके बैठे हुए थे तो उन्होंने धीरे-धीरे मेरे होंठों को किस करना शुरू कर दिया.
मुझे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था और मैं भी सुमेश जी का किस में साथ दे रही थी.
धीरे धीरे ना जाने कब सुमेश जी ने मुझे पूरी तरह से गर्म कर दिया और उन्होंने अपना हाथ मेरी स्कर्ट के अन्दर डाल कर मेरी स्कर्ट को ऊपर कर दिया.
मैंने पैंटी नहीं पहनी थी तो वे मेरी चूत को अपने एक हाथ से सहलाने लगे.
मैं समझ गई कि सुमेश जी का मूड कुछ जल्दी ही बन गया है और अब वे तुरंत ही लंड पेल कर मेरी चुदाई शुरू कर देंगे.
चुदाई की पोजीशन भी सही बन गई थी.
मेरी चुत भी रिसने लगी थी.
मैंने उनसे कहा- सुमेश जी, ज्यादा मन हो रहा है, तो हम दोनों रूम में वापस चलते हैं, यहां हम दोनों को कोई देख लेगा तो मजा नहीं आएगा.
सुमेश जी बोले- अंजलि यार, अब रहने दो कुछ नहीं होगा, थोड़ी देर की तो बात है. सब हो जाएगा. वैसे भी यहां पर बहुत अंधेरा है और हम दोनों को कोई नहीं देख पाएगा. तुम टेंशन मत लो. एक राउंड इंटरवल से पहले और एक राउंड इंटरवल के बाद करेंगे. सब हो जाएगा.
मैं भी सुमेश जी को रोक नहीं पाई क्योंकि इतनी देर में सुमेश जी ने मेरी चूत को अपने हाथ से मसल मसल कर एकदम गर्म कर दिया था.
मेरी चूत अभी थोड़ा थोड़ा थोड़ा पानी भी छोड़ चुकी थी जिसकी वजह से मेरे अन्दर भी अब चुदाई की चुदास जाग चुकी थी.
मैं भी पूरी तरह से मन बना चुकी थी कि अब सुमेश जी के लंड पर बैठ कर उछल उछल चुदना ही है.
मैंने भी चुदाई के प्रोग्राम को आगे बढ़ाते हुए सुमेश जी को और जोरदार तरीके से चूमना शुरू कर दिया.
हम दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूमे जा रहे थे.
लगभग 5 मिनट तक सुमेश जी ने मेरे होंठों को अच्छे से चूसा और साथ ही सुमेश जी अपने हाथ से मेरी चूत को सेवा भी अच्छे से कर दी थी.
मुझे किस करते करते सुमेश जी ने मेरी शर्ट के सारे बटन भी खोल दिए.
मैं सुमेश जी की गोद में सीने से सीना लगा कर बैठी हुई थी और सुमेश जी ने मुझे ऊपर से नंगी करना शुरू कर दिया था.
उन्होंने मुझे किस करते हुए मेरी ब्रा में हाथ डाल कर मेरे दोनों बूब्स को ब्रा से बाहर निकाल दिया.
अब वे अपने दोनों हाथों की ताकत से मेरे बूब्स को अच्छे से मसल रहे थे, जिसकी वजह से मेरी शरीर में और ज्यादा गर्मी आ गई थी और मैं पूरी तरह से चुदने के लिए चुदासी हो गई.
सुमेश जी के दोनों हाथ लगातार मेरे मम्मों को मसल रहे थे.
उन्होंने अपने होंठों को मेरे होंठों को पर से हटा दिया, मेरे एक दूध के निप्पल पर रख कर उसे अपने मुँह में भर कर चूसने लगे.
मेरी मादक सीत्कार निकलने लगी और मैं खुद अपने निप्पल को उनके मुँह से खिंचवा खिंचवा कर चुसवाने लगी.
सुमेश जी जिस तरह से मेरे दूध की अम्मी चोद रहे थे, उससे साफ जाहिर हो रहा था कि वे मेरा पूरा दूध अपने मुँह में भरना चाह रहे थे.
पर दोस्तो मेरे बूब्स का साइज थोड़ा बड़ा होने की वजह से वे मेरे बूब्स को पूरा अन्दर मुँह में नहीं ले पा रहे थे.
सुमेश जी मेरे चूचुकों के साथ लगभग आधे दूध को मुँह में किसी बर्गर की तरह भर कर खा रहे थे.
मैं वासना की गर्मी से उनके मुँह को अपने सीने में दबाए जा रही थी.
वे मेरे एक दूध को चूसते हुए दूसरे के साथ खेल भी रहे थे, अपने दांतों से मेरे निप्पल पर लव बाइट दिए जा रहे थे, मेरे शरीर की चुदास को और ज्यादा चिंगारी दिखाए जा रहे थे.
मैंने भी सुमेश जी की गर्दन को अपने बूब्स में दबाते हुए उनके पूरे मुँह पर अपना दूध दबा दिया था.
वे लगभग दस मिनट तक मेरे दोनों बूब्स के साथ खेलते रहे और चूसते रहे.
फिर उन्होंने मुँह हटाया और लंबी लंबी सांस लेने लगे.
अब मेरी बारी थी.
मैं सुमेश जी के लंड को चूसने के लिए उनकी गोदी से सरकने को हुई तो सुमेश जी समझ गए और उन्होंने मुझे अपनी गोद से नीचे उतार दिया.
मैं भी सीट के नीचे उनके घुटनों के पास जाकर अपने घुटनों के बल बैठ गई.
उनका लंड बिल्कुल मेरे सामने था और मैं भी पूरी तरह से जोश में थी.
मैंने उनकी जींस की जिप खोली और उसको घुटनों तक सरका दिया.
उसके बाद उनके अंडरवियर को भी मैंने नीचे किया और उनके खड़े लंड को पकड़ लिया.
उनका टनटनाता हुआ लवड़ा मेरे होंठों के बिल्कुल सामने आ गया था.
अब मैं खुद को रोक नहीं पाई और बिना देर किए मैंने सुमेश जी के लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया.
वह पूरी तरह से तन कर लोहा बन चुका था.
मैंने उनके लंड को अपने मुँह से भरा और अपने कोमल होंठों से सुमेश जी के पूरे लंड को अपने मुँह में गले तक भर लिया था.
उनकी हल्की सी आह निकली और मैंने पूरे मुँह को खोल कर बहुत अच्छे से सुमेश जी के लंड को चूसना चालू कर दिया.
सुमेश जी ने भी मेरे बालों को अपने हाथ में लिया और मेरे मुँह को अपने लंड पर जोर देते हुए दबा रहे थे.
इस वजह से उनका पूरा लंड मेरे गले के अन्दर तक जा रहा था.
हालांकि इस वजह से मुझे तकलीफ भी हो रही थी पर मैं भी सुमेश जी को प्यार देने लगी थी.
बस मेरा ध्यान बस इस वक्त सुमेश जी को खुश करने पर था.
मैंने सुमेश जी का लंड लगभग 15 मिनट तक अच्छे से चूसा था, जिसकी वजह से वह पूरा चिकना हो चुका था और गीला भी.
मेरी हरकतों की वजह से मेरी चूत तो पहले से ही गीली पड़ी हुई थी और अब मैं चुदने के लिए भी पूरी तरह से तैयार थी.
सुमेश जी मुझे अपने घुटनों के पास से उठाया और मेरी स्कर्ट को मेरे पेट तक चढ़ा दिया.
फिर सुमेश जी ने मुझे अपनी गोद में बैठा लिया और अब मेरी चुत चोदने की पूरी तैयारी हो चुकी थी.
मैं सुमेश जी के लंड के ऊपर बैठ कर चुदवाने के लिए तैयार हो गई थी.
मैंने उनकी गोदी में बैठ कर लंड को अपने हाथ में लिया और अपनी चूत के छेद पर लंड को सैट कर दिया.
फिर धीरे-धीरे मैं उनके लंड बैठने लगी और ना जाने कब मेरे मियां जी का पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर फिसलता चला गया … अहसास तक न हुआ.
अब मैं सुमेश के लंड पूरी तरह से बैठ चुकी थी.
उन्होंने भी बिना देर किए मेरी कमर पर अपने दोनों हाथों को रखा और मुझे अपने लंड के ऊपर उछालना शुरू कर दिया.
पीवीआर के इस अंधेरे थियेटर में उन्होंने मेरी चुदाई करनी शुरू कर दी थी.
यह मेरे साथ पहली बार हो रहा था जब मैं एक गैर मर्द को अपना पति मान कर उसके साथ सिनेमा हॉल में चुद रही थी.
मैं भी यह सब सोच कर एकदम से उत्तेजित हो गई थी.
अब मैं सुमेश जी के लंड पर मस्ती से उछलने लगी और आहें भरने लगी ‘आह आह सुमेश जी आह आह!’
सच में यह मेरा हनीमून ही चल रहा था.
मुझे तो ऐसा ही महसूस हो रहा था मानो मैं सच में पहली बार दुल्हन बन कर अपने पति के साथ बेहयाई से उनके लंड को अपनी चुत के अन्दर लेती हुई सबके सामने किसी रंडी की तरह चुदवा रही थी.
उनका लंड मेरी चुत के अंतिम छोर तक धंसा हुआ था और उसकी सख्ती के कारण मेरी चुत के अन्दर मीठा मीठा दर्द हो रहा था.
मैं उनकी गोदी में बैठी थी इस वजह से मुझे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था.
उस समय एक अलग ही किस्म की चुदास की फीलिंग आ रही थी.
मुझे मेरी चूत के अन्दर कोई सांप सा रंगत हुआ महसूस हो रहा था.
वे मेरे दूध चूस रहे थे और मेरे दोनों चूतड़ों को अपने हाथ से उठा उठा कर मेरी चुत चोद रहे थे.
मुझे सुमेश जी के लंड पर बैठ कर उछल उछल कर चुदते हुए लगभग 10 मिनट हो चुके थे.
मेरी दोनों जांघें बहुत जयादा अकड़ चुकी थीं. इस वजह से मेरी दोनों टांगों में बहुत दर्द हो रहा था, पर इस तरह से चुदाई का भी अपना एक अलग ही मजा आ रहा था … जिसे मैं खराब नहीं करना चाहती थी.
मुझे बस यही लग रहा था कि आज मैं सिनेमा हॉल वाली इस यादगार चुदाई का भी पूरा मजा ले लूं और साथ ही सुमेश जी को भी अच्छे से खुश कर दूँ.
उस वक्त सुमेश जी भी पूरे जोश में थे और मुझे अपने लंड के ऊपर उछाले जा रहे थे.
सुमेश जी के लंड पर उछलने की वजह से मेरे दोनों बूब्स बहुत जोर से हवा में उचल रहे थे और निप्पल मेरे गोवा वाले पति देव के होंठों से टच हो रहे थे.
मैं और ज्यादा उठ उठ कर उनके मुँह में अपने दूध देने की कोशिश करने लगी थी.
सुमेश जी ने मेरी इस हरकत को देखते हुए समझ गए और उन्होंने मेरे एक दूध के निप्पल को अपने होंठों के बीच में दबा लिया.
वे मेरे निप्पल को चूसते हुए मुझे और जोरदार तरीके से उछालने लगे.
अब तक मेरी कम से कम 20 मिनट की चुदाई हो चुकी थी और मेरी चुत अब पूरी तरह से झड़ने के लिए तैयार थी.
मैंने सुमेश को कहा- सुमेश जी, थोड़ी स्पीड और बढ़ाइए, मेरी चूत अब झड़ने के लिए तैयार है.
सुमेश जी ने अपने लंड की स्पीड बढ़ाते हुए मुझे और जोरदार तरीके से उछालना शुरू कर दिया.
फिर सुमेश जी के लंड पर उछलते उछलते ना जाने कब मैं झड़ने लगी और मेरी चूत ने अपना सारा अमृत सुमेश जी के लंड पर ही बहा दिया.
झड़ने के बाद मैं थक गई और सुमेश जी के लंड पर ही बैठी रह गई.
सुमेश जी अभी तक नहीं झड़े थे, इसलिए उन्होंने मुझे पकड़ा और अपने लंड पर वापस उछालना शुरू कर दिया.
अब मैं सुमेश जी के लंड पर उछल तो रही थी, पर मेरे बदन की सारी ताकत खत्म हो चुकी थी.
मैं पूरी तरह से थक गई थी.
मैंने आहें भरना शुरू कर दिया ‘आह, सुमेश जी … मुझे छोड़ दो प्लीज … मैं बहुत थक गई हूँ!’
तो सुमेश जी ने कहा- अंजलि, बस दो मिनट और … मैं भी बस खत्म करने वाला हूँ.
उनकी इस बात से मुझे थोड़ी शांति मिली कि चलो मेरी इस चुदाई का राउंड अब खत्म होने वाला है.
सुमेश जी पूरे जोश में थे और मुझे अपना लंड पर उछाल रहे थे.
2-3 मिनट तक मैं सुमेश जी के कड़क लंड पर उछलती रही और अपने नए पति को खुश करने के लिए उनसे चुदती रही.
तभी सुमेश जी का बदन भी अकड़ने लगा था और उन्होंने बिना मुझसे पूछे ही मेरी चूत के अन्दर अपने अमृत को भर दिया.
उन्होंने अपना वीर्य मेरी चुत के अन्दर छोड़ दिया और एकदम से लौड़े को मेरी चूत के अन्दर पेल कर ठहर गए.
उनका मूसल मुझे अपनी चूत के अन्दर गड़ा हुआ सा महसूस हो रहा था.
हम दोनों के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी.
सुमेश जी ने अपने जिस्म को ढीला छोड़ा और मुझे चूमते हुए बोले- अंजलि आपकी चुदाई करके मजा आ गया!
मैंने भी सुमेश जी से कहा- बस पति खुश तो बीवी भी खुश, मुझे भी आपके साथ सेक्स करके बहुत मजा आया.
अब हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर बैठे हुए थे.
मैं अभी भी सुमेश जी के ऊपर ही बैठी हुई थी और उनके सीने से चिपकी हुई थी, सुमेश जी का लंड अभी भी मेरी चूत के अन्दर ही था.
मेरी चूत से सुमेश जी का अमृत निकल रहा था और बहुत अच्छा लग रहा था.
दोस्तो, आपको अपनी अंजलि की चुदाई की कहानी कैसी लग रही है, प्लीज जरूर बताएं.
न्यूड फक इन मॉल पीवीआर के बाद मेरी चुदाई और किस तरह से हुई, उसे मैं अगले भाग में लिखूँगी.
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