गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून- 5


ऑलवेज रेडी फॉर सेक्स कहानी में होटल के कमरे में सो कर उठी तो यार का लंड हाथ में आ गया और मेरी चूत फिर से लंड मांगने लगी.

दोस्तो, मैं आपकी अंजलि एक बार फिर से अपने गोवा हनीमून वाली चुदाई की कहानी का अगला भाग लेकर हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
होटल के कमरे में जबरदस्त चुदाई
में मैंने आपको बताया था कि मैं उस रात सुमेश जी से दो बार शानदार चुदी और थक कर सो गई.

अब आगे ऑलवेज रेडी फॉर सेक्स:

सुबह जब मेरी आंख खुली तो 10 बज चुके थे.
मैं सुमेश जी की बांहों में नंगी लेटी हुई थी.

उनके चेहरे की मासूमियत को देख कर मुझसे रुका न गया और मैं बड़े प्यार से सुमेश जी के बालों को सहलाने लगी.
उनके बालों को सहलाती हुई मैं उनके मजबूत लौड़े से अपनी कल रात की जोरदार चुदाई के बारे में सोच रही थी.

जैसे ही उनके लौड़े की याद आई तो ना जाने कब मेरा एक हाथ कंबल के अन्दर सुमेश जी का लंड पर चला गया.
उनका लंड सुबह के वक्त पहले से ही खड़ा हुआ था.

मैंने सुमेश जी के लंड को हाथ में पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी.
धीरे-धीरे प्यार से लौड़े को सहलाया तो सुमेश जी की भी आंख खुल गई.

मैंने सुमेश को जागा हुआ देखा तो ‘गुड मॉर्निंग पति देव’ बोल कर उनके होंठों पर एक चुंबन देते हुए उन्हें उठाया.

उन्होंने भी मेरे माथे पर किस की स्माइल देते हुए गुड मॉर्निंग कहा.

इसके बाद सुमेश ने तुरंत ही मुझे अपने सीने के ऊपर ले लिया
मैं उनके लौड़े को सहला कर कुछ कुछ चुदास से भर गई थी तो मैं सुमेश जी के सीने से लिपट कर लेट गई.

मेरे दोनों नंगे दूध सुमेश जी के सीने से रगड़ खाने लगे.

सुमेश जी मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए बोले- अंजलि फिर से मूड हो रहा है क्या?
मैंने कहा- नहीं पति देव … ऐसी कोई बात नहीं है, वह तो बस मैंने आपके लंड को ऐसे ही सहला रही थी. जब मैं उसे प्यार करूंगी, तभी तो वह मुझे प्यार देगा.

सुमेश जी अपने लौड़े को मेरी चुत से रगड़ते हुए बोले- सही बोल रही हो अंजलि तुम. अभी मेरा लंड कड़क हो गया है और तुम्हारी फुद्दी को प्यार करने को मचलने लगा है.

उन्होंने यह कह कर अपने लंड से मेरी चुत को ठोकर मारी तो बस फिर क्या था … मौसम बन गया.

सुमेश ने बिना पूछे ही मेरी चूत के छेद पर लंड रगड़ा और अपनी कमर उठाते हुए अपना लंड मेरी चूत के अन्दर डाल दिया.
मैंने आह की कराह निकाली तो बोलने लगे- लो जी शुरू हो गई आपकी चुदाई बीवी जी!

मैं भी चुदने के लिए तैयार थी तो मैंने भी अपनी टांगें फैला दीं और सुमेश जी के लौड़े को चुत में अन्दर तक खींच लिया.
अब उन्होंने मुझे अपने लंड पर सही से बैठाया और कमर पकड़ कर मुझे उछलने का इशारा कर दिया.

मैंने भी अपने गोवा हनीमून वाले पति के लंड पर बैठ कर उछलना शुरू कर दिया.
सुमेश जी और मैंने उस समय चुदाई के ज्यादा मजे नहीं लिए, सिर्फ जल्दी वाला चुदाई का एक छोटा राउंड हुआ.

चुत लंड के झड़ जाने के बाद सुमेश जी मुझे चूम कर बोले- अंजलि, चलो आज हम दोनों बाहर चलते हैं.
मैं भी सुमेश जी की बात से सहमत थी.

हम दोनों ने साथ में उठ कर बाथरूम में फ्रेश होने का काम खत्म किया और साथ में ही शॉवर लेने लगे.

शॉवर लेने के बाद मैं बेडरूम में नंगी ही आ गई, सुमेश जी भी मेरे साथ ही आ गए थे.

मैंने उनके सामने अपनी पूरी बॉडी पर क्रीमिंग की और उसके बाद बैग से गहरा गुलाबी रंग की ब्रा पैंटी का सैट निकाल कर पहनने लगी.

मेरी ब्रा पहले से ही एक नंबर छोटी वाली थी इसलिए मेरे बूब्स ब्रा से काफी ज्यादा बाहर आ रहे थे.
मेरे निप्पल भी ब्रा से बाहर आते दिख रहे थे.

मैंने बेबसी से सुमेश जी की तरफ देखा तो उन्होंने मुस्कुरा कर मेरे पीछे आकर मेरी ब्रा का हुक लगा दिया.

उसके बाद मैंने अपनी पैंटी भी पहन ली
मैं इस गुलाबी ब्रा पैंटी के सैट में बहुत सेक्सी लग रही थी.

मैंने फिर अपने बैग से एक सफेद शर्ट निकाली और साथ ही लाल रंग की स्कर्ट निकाली.

मैंने अपनी शर्ट और स्कर्ट दोनों पहन ली और शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए छोड़ दिए, जिसमें से मेरा पूरा क्लीवेज दिख रहा था और मेरे बूब्स भी काफी ज्यादा दिख रहे थे. साथ ही मैंने ब्राउन कलर के हाई बूट्स भी पहन लिए और मिरर के सामने अपनी गांड और चूचों को निहारा.

यह लाल रंग की स्कर्ट मेरी जांघों तक ही आ रही थी और शर्ट भी काफी टाइट थी.

मैं इन कपड़ों में बहुत ज्यादा सेक्सी लग रही थी, साथ ही मैंने शादी वाला चूड़ा भी पहना हुआ था … उस वजह से मैं पूरी नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी.
सुमेश जी ठंडी आह भरते हुए बोले- अंजलि, आज तो तुम्हारा इरादा किसी का क.त्ल करने का दिख रहा है!

मैं हंस दी और उन्हें थैंक्स बोलकर अपना मेकअप करने लगी.

मर्दों को तैयार होने में ज्यादा वक्त नहीं लगता है तो सुमेश रेडी होकर मुझे ही देख रहे थे और मेरे ऊपर मीठे मीठे कमेंट्स कर रहे थे.

हम दोनों चुहलबाजी करते रहे और उसी दरमियान मैं पूरी तरह तैयार हो गई.

सुमेश जी ने सफ़ेद शर्ट और जींस पहनी थी.

कमरे से निकल कर हम दोनों रिसॉर्ट में बाहर आ गए.

वहां हमने पहले नाश्ता किया.
उसके बाद सुमेश जी बोले- अंजलि, चलो मॉल चलते हैं, कुछ शॉपिंग करते हैं.

मुझे तो शॉपिंग का वैसे ही बहुत शौक है इसलिए मैंने झट से सुमेश की बात मान ली और हम दोनों शॉपिंग के लिए मॉल निकल गए.
कुछ देर हम दोनों मॉल पहुंच गए.

मैं सुमेश जी के साथ ऐसे चिपक कर चल रही थी तो वहां लोगों की नज़र सिर्फ मेरे ऊपर ही थी.

हम दोनों मॉल के फर्स्ट फ्लोर पर आ गए और सुमेश जी मुझे वहां एक शॉप पर ले आए.
उधर सुमेश ने मेरे लिए कुछ दो मिडी स्कर्ट पसंद की.

सुमेश ने मुझसे कहा- अंजलि, और कुछ देखना है क्या यहां पर?
मैंने उन्हें बोला- हां मुझे ब्रा पैंटी भी लेनी है.

सुमेश बोले- ठीक है चलो फिर.
सुमेश ने बिल पे किया और हम दोनों एक ब्रा पैंटी की शॉप में आ गए.

उस सेल्समेन ने शॉप के अन्दर अपनी स्माइल के साथ हमारा स्वागत किया.
शायद वह उस शॉप का मालिक था और सुबह ज्यादा टाइम नहीं हुआ था इसलिए शॉप भी खाली थी.

मैं सुमेश जी की बांहों में बांहें डाल कर ऐसे खड़ी हुई थी जैसे मानो हम दोनों पति पत्नी हों.

इतने मैं सुमेश जी का कोई फ़ोन आ गया.
वे मुझसे बोले- अंजलि तुम देखो, मैं बात करके आता हूँ.

सुमेश जी सेल्समेन से बोले- मैम को अंडरगारमेंट्स दिखाओ.
यह कह कर वे वहां से चले गए.

वह सेल्समेन मुझसे पूछने लगा- मैम बताएं क्या देखना है आपको?
मैंने उस सेल्समेन को देखा और मुस्कुराते हुए कहा- मुझे ब्रा पैंटी के सैट दिखा दीजिए.

उसने मेरी पसंद पूछी- किस टाइप के सैट चाहिए?
मैंने उससे बोल दिया कि थॉंग पैंटी वाले सैट दिखा दीजिए और उसकी ब्रा नेट वाली हो … ऐसे में दिखा दीजिए.

जब मैंने उसे थॉंग पैंटी दिखाने को बोला, तो वह समझ गया मैं काफ़ी चुदक्कड़ किस्म की औरत हूँ.
उसने मेरे मम्मों को देखा. मेरी सफ़ेद शर्ट के ऊपर के 2 बटन खुले हुए थे, जिसमें से मेरे आधे चिकने गोरे बूब्स बाहर नजर आ रहे थे और मेरी गुलाबी ब्रा भी साफ दिखाई पड़ रही थी.

उस सेल्समेन की नजर मेरी शर्ट के अन्दर से झांकते मम्मों पर ही टिकी थी.
उसने मुस्कुराते हुए मुझे कुछ ब्रा पैंटी के सैट दिखाए, जिसमें 36 साइज की ब्रा ठी और पैंटी 38 की थी.

मैंने उससे कहा- आप मुझे 32 की ब्रा दिखा दीजिए और 34 साइज की थॉंग पैंटी!
यह सुनकर वह मेरे मम्मों को देखते हुए बोला- मैम, आपको यही साइज फिट आएगा!

मैंने कहा- हां जी मुझे मालूम है, आप मुझे 32 की ब्रा और 34 की थॉंग पैंटी ही दिखा दो, मैं वही पहनती हूँ.
वह बोला- मैम आपको छोटी होगी.
मैंने कहा- हां मुझे मालूम है, मैं छोटी ही पहनती हूँ.

मेरी इन सब हरकतों को देख कर वह समझ गया कि मेरे अन्दर अभी भी बहुत चुदास भरी पड़ी है.
फिर उस सेल्समेन ने मेरे सामने काउंटर पर बहुत सारी मेरी पसंद की पैंटी लाकर रख दीं और एक एक करके दिखाने लगा.

वह जिस अंदाज में मुझे ब्रा के कप रगड़ कर दिखाते हुए कपड़ा टटोलने की सलाह दे रहा था, उससे साफ समझ आ रहा था कि यदि मैं इसको जरा सा भी इशारा कर दूँ तो यह मुझे अभी यहीं लिटा कर चोदने लगेगा.

यह सब सोच कर मैं मन ही मन मुस्कुरा रही थी और उसके हरामीपन की दाद भी दे रही थी.

मैं भी पैंटी को हाथ में लेकर उसकी चुत के पास लगे कपड़े को मसल कर देखने लगी. वैसे भी थॉंग पैंटी में चुत ढकने वाला त्रिभुज आकार का कपड़ा ही होता है, बाकी तो सब डोरियां ही होती हैं.

उसने जो पैंटी दिखाई थीं, वे सब फिशनेट वाली जालीदार चड्डियां थीं, जिनका त्रिभुजाकार चुत कवर भी मेरी फूली फांकों वाली चुत को पूरी तरह से नहीं छुपा सकता था.

उस सेल्समेन को भी पता था कि इस पैंटी को पहनने कोई मतलब नहीं है क्योंकि मेरी चुत इसमें साफ दिखाई देने वाली थी.

उस वक्त वह मुझे ही देख रहा था.
मैंने वाइट शर्ट पहनी हुई थी और साथ ही नीचे रेड स्कर्ट और हाथों में मेहंदी और शादी वाला लाल चूड़ा पहना हुआ था.

वह मेरे यह सारे रंग देख रहा था.
आखिर में उससे रहा न गया और वह बोल ही पड़ा- मैम लगता है आपकी अभी नई नई शादी हुई है!
मैंने भी उससे यही बोला- हां जी हमारी अभी ही शादी हुई है और हम यहां गोवा हनीमून के लिए आए हैं.

सेल्समेन बोला- हां जी मैं समझ गया था आपके हाथ में ये लाल चूड़ा देख कर!
इतने में मैंने अपने लिए 5 ब्रा पैंटी के सैट पसंद किए और उसकी तरफ देखने लगी.

वह समझ गया और बोला- मैम, जब तक आप चाहें तो इन्हें ट्राई कर लो, तब तक सर भी आ जाएंगे.
मैंने कहा- नहीं, मैं वेट कर लूँगी. पति से भी पूछना जरूरी है ना … क्या लूं क्या पहनू. वैसे भी मैं अपने पति के पसंद के ही ब्रा पैंटी पहनती हूँ.

वह बोला- ये तो बहुत अच्छी बात है मैम.
इतने में ही सुमेश जी भी आ गए.

सुमेश जी बोले- हां अंजलि, कर लिए पसंद ब्रा पैंटी?
मैंने कहा- हां कर लिए, पर आपकी पसंद होना भी जरूरी है. आप पसंद करो न मेरे लिए!

यह सुनकर सुमेश बोले- ठीक है.

सुमेश ने मेरे लिए बहुत ही सुन्दर रेशमी पैंटी पसंद की, यह थोंग वाली थी और उसके सैट की ब्रा भी.
सुमेश जी बोले- तो एक बार पहन कर देख लो फिटिंग?

मैंने कहा- हां जी एक बार पहननी तो पड़ेगी ही फिटिंग देखने के लिए!
सेल्समेन बोला- मैडम आप वहां चेंजिंग रूम में चली जाएं, वहां चेक कर लीजिए.

मैं भी ब्रा पैंटी के सैट लेकर वहां चेंजिंग रूम की तरफ आ गयी.
सुमेश जी भी मेरे साथ ही थे.

मैंने सुमेश जी से कहा- मैं चेक करती हूँ आप यहीं बाहर मेरा इंतज़ार करो प्लीज.
उन्होंने ओके कह दिया.

मैं ब्रा पैंटी के सभी सैट लेकर चेंजिंग रूम में आ गई और वहां रखी हुई एक छोटी सी टेबल पर मैंने ब्रा पैंटी के सब सैट रख दिए.

मैंने सामने लगे मिरर में देखते हुए अपनी सफेद शर्ट के बटन खोलने शुरू किए और शर्ट के बटन खोल कर उसे उतार दिया.

सुमेश जी बाहर खड़े हुए थे.
मेरी पहनी हुई ब्रा मुझे काफ़ी ज्यादा टाइट थी इसलिए ब्रा का हुक मुझसे खुल नहीं रहा था.

मैंने सुमेश जी को आवाज दी- सुमेश जी आप बाहर ही खड़े हो ना!
सुमेश जी बोले- हां अंजलि, बताओ क्या हुआ?

मैंने फिर चेंजिंग रूम का लॉक खोला और हल्की सी गर्दन बाहर निकाल कर सुमेश जी से कहा- मुझे आपकी हेल्प चाहिए, अन्दर आओ न!
सुमेश जी तुरंत चेंजिंग रूम में आ गए और बोले- बताओ अंजलि, क्या मदद चाहिए?

मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी, ब्रा बहुत ज्यादा टाइट हो रही है. मेरी ब्रा का हुक नहीं खुल पा रहा है इसलिए आपकी मदद चाहिए!
सुमेश जी ने मुझे एक सेक्सी सी स्माइल दी और मुझे अपने सामने कर दिया.

वे खुद मेरे पीछे आ गए और उन्होंने पीछे से ब्रा में हाथ डालकर हुक को खोल दिया.
मेरे दोनों भारी चूचों को मेरी छोटी सी ब्रा से आज़ाद करके उसको साइड में टेबल पर रख दिया.

मैंने सुमेश जी से चेंजिंग रूम से बाहर जाने को कहा.
लेकिन सुमेश जी ने कहा- अंजलि, मैं बाहर क्या करूँगा? तुम यहीं मेरे सामने मेरी पसंद की ब्रा और पैंटी चेक कर सकती हो. अगर तुम्हें कोई मदद चाहिए, तो मैं तुम्हारी मदद भी कर दूँगा.
मुझे लगा कि सुमेश जी सही बोल रहे है, इसलिए मैंने उनसे दोबारा बाहर जाने को नहीं कहा.

मैंने अपना हाथ लाल स्कर्ट के अन्दर डाला और उसे अपनी चिकनी जांघों से भी नीचे खींच लिया.

इसी के साथ पैंटी में हाथ डाल कर कोमल चूत को भी पैंटी से आजाद कर दिया.
मैं उस समय चेंजिंग रूम में सुमेश जी के सामने पूरी तरह से नंगी खड़ी हुई थी.

शीशे के सामने और सुमेश जी को देख कर मुस्कुरा रही थी.
सुमेश जी ने पीछे से मुझे गले लगा लिया.

मैं समझ चुकी थी कि सुमेश जी का मूड बन गया है क्योंकि उनका लंड भी खड़ा हो चुका था जो मुझे पीछे मेरी गांड की दरार में घुसता हुआ महसूस हो रहा था.
सुमेश जी मुझसे 2-3 मिनट ऐसे ही चिपके रहे.

फिर मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी छोड़िये मुझे, मैं जल्दी से ब्रा पैंटी पहन कर देख लेती हूं.
सुमेश जी बोले- अंजलि छोड़ो ना यार … मुझे तुम्हारी बांहों को छोड़ने का मन नहीं कर रहा.

बस फिर क्या था… सुमेश जी ने मुझे अपनी और घुमाया और तुरंत मेरे होंठों से अपने होंठ मिला कर मुझे किस करने लगे.

वे मेरे बालों को और मेरी गर्दन को सहलाते हुए मुझे गर्म करने लगे.

ये सब प्रोग्राम चेंजिंग रूम में ही चल रहा था.

हम दोनों को किस करते हुए 2 मिनट हो चुके थे और ना जाने कब सुमेश जी ने अपनी जींस के अन्दर हाथ डाल कर उसको जांघों से नीचे सरका दिया.
फिर मेरे हाथ को पकड़ कर सुमेश जी ने अपने अंडरवियर में डाल दिया.

जैसे ही सुमेश जी ने मेरा हाथ अपने अंडरवियर में डाला, मुझे महसूस हुआ कि सुमेश जी का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका है.
उनका लंड लोहे की सख्त रॉड की तरह एकदम गर्म हो चुका था, जिसकी गर्मी मेरे हाथों को महसूस हो रही थी.

सुमेश जी बोले- अंजलि अब कंट्रोल नहीं हो रहा यार, जल्दी से मुँह में ले लो अपने पति के लंड को!

मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी यहां पर नहीं, यहां दिक्कत हो जाएगी … और मुझे मालूम है अगर आपका मूड एक बार बन गया तो कम से कम एक घंटे तक मेरी चुदाई का प्रोग्राम चलेगा. कम से कम आप मुझे एक घंटे तक चोदेंगे. इसलिए मैं आपसे यहां नहीं चुदना चाहती, कहीं और चलते हैं. वैसे भी हम एक घंटे तक चेंजिंग रूम में रहेंगे तो किसी को भी हमारे ऊपर शक हो जाएगा.

वे मेरी बात मान गए और बोले- अंजलि तुम ठीक बोल रही हो, मैं कुछ करता हूं. तुम जल्दी रेडी होकर बाहर आओ .. और हां अब स्कर्ट के अन्दर पैंटी मत पहनना. सारी ब्रा पैंटी के सैट उसी सेल्समेन को दे देना. हम थोड़ी देर बाद आकर ले लेंगे.

सुमेश ने मुझे अपना पर्स दिया और कहा- इसमें से उस सेल्समेन को पेमेंट कर देना, जब हम आएंगे तब तक वह बिलिंग वगैरह सब कर लेगा.
मैंने कहा- ठीक है.

फिर वे चेंजिंग रूम से बाहर निकल गए और मैंने भी अपनी ब्रा पहन ली, शर्ट और स्कर्ट भी पहनी ली.

जैसा कि सुमेश जी ने मुझे पैंटी पहनने के लिए मना किया था तो मैंने पैंटी नहीं पहनी.
सच बताऊं तो अब मेरा भी पूरा मूड बन चुका था सुमेश से चुदने का … मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी … और लंड का स्वाद मांग रही थी.

मैं बाहर निकली और उसी सेल्समेन के पास आ गई.
मैंने उसे कंटीली मुस्कान से देखा और ब्रा पैंटी के सारे सैट देकर समझा दिया- भैया हम थोड़ी देर में आते हैं, आप मुझे बिल बता दो, मैं पेमेंट कर देती हूं.

सेल्समेन ने जल्दी से कच्चे कागज पर जोड़ कर मुझे बिल बताया.
मैंने पेमेंट कर दी.

मेरे हाथ में मेरी गुलाबी रंग की पैंटी थी जो मैंने स्कर्ट के नीचे नहीं पहनी थी.
मैंने उसको बोला- भैया ये पैंटी भी आप इसमें ही रख देना.

वह समझ गया कि स्कर्ट के अन्दर मैंने पैंटी नहीं पहनी है.
उसने एक हल्की सी मुस्कान देते हुए मेरे हाथों से मेरी पैंटी ले ली और रख ली.

कुछ देर वहीं इंतजार करने के बाद सुमेश जी मेरे पास आ गए.

वे बोले- चलो अंजलि हो गई शॉपिंग?
मैंने कहा- हां.

सुमेश जी बोले- तो चलो अब हम चलते हैं.
हम दोनों शॉप से निकल गए.

हमारा चुदाई का मूड इतना ज्यादा हो गया था कि चलते वक्त मेरी चुत का पानी रिस कर मेरी जांघों को गीला कर रहा था.

दोस्तो, अगले भाग में अपनी एक और दमदार चुदाई का वृतांत लिखूँगी.
आपको मेरी ऑलवेज रेडी फॉर सेक्स कहानी को पढ़ कर कैसा लग रहा है, प्लीज जरूर लिखें.
mrsanjalisharma1986@gmail.com

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