Dost Ki Vidhwa Mummy Ki Chudai Ka Maza - 2
X विडो फक कहानी में एक जवान लड़का अपने दोस्त की विधवा माँ को सेक्स के लिए पटा रहा था. वो औरत भी कई साल से चुदी नहीं थी तो अन्तर्वासना वश वह राजी हो गयी.
दोस्तो, मैं धीरज आपको दोस्त की मम्मी की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
दोस्त की विधवा मम्मी को चोदने की चाह
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि प्रतीक अपने दोस्त अमन की मम्मी को चोदने की फिराक में था और उन्हें अपने साथ बाइक पर बिठा कर ले जा रहा था.
अब आगे X विडो फक कहानी:
अमन की मम्मी नीलिमा ने प्रतीक की बात मान ली और उसे पकड़ लिया.
अब प्रतीक थोड़ा मजाक करते हुए बीच-बीच में ब्रेक लगाकर अपनी पीठ से नीलिमा के चूचे चिपका लेता.
शायद ये बात नीलिमा समझ गई थी, इसलिए उसने पहले तो खुद को थोड़ा असहज महसूस किया लेकिन उसकी वासना को उभारने में यह क्रिया काम करने लगी थी, तो नीलिमा भी अपने मम्मों को प्रतीक की पीठ से रगड़ने लगी थी.
कुछ देर में दुकान आ गई.
सब भाव-ताव करके नीलिमा को सोने की चैन मिल गई.
वापस आते वक्त प्रतीक और नीलिमा बातें करते आ रहे थे.
तब नीलिमा ने प्रतीक से पूछा- ये बैग क्यों साथ लाए हो?
प्रतीक बोला- घर जाकर बताता हूँ आंटी!
घर आते ही नीलिमा ने अमन को आवाज दी.
लेकिन अमन घर पर नहीं था.
शायद वह अपना टेबल टेनिस का गेम खेलने गया था.
अब घर में प्रतीक और नीलिमा दोनों ही थे.
नीलिमा ने प्रतीक को पानी दिया और पूछा- अब बताओ ये बैग क्यों लाए हो?
तब उसने उस बैग में से दो गिफ्ट निकाले और बोला- ये अमन की बुआ की लड़की का शादी का गिफ्ट है!
इस पर नीलिमा बोली- थैंक्यू.
अब प्रतीक अमन की राह देखने लगा.
अमन का इंतजार करने के पीछे प्रतीक की वह योजना थी, जो धीरे-धीरे ही सही, सफल हो रही थी.
क्योंकि उसने अमन की बुआ की लड़की के लिए गिफ्ट तो लिया ही था, साथ में उसने वह महंगी वाली ब्रा-पैंटी का सैट भी लिया था जो नीलिमा के लिए था.
उस गिफ्ट के साथ में उसने एक खत भी लिख रखा था.
अब ये रिस्क वाला मामला था.
अगर ये बातें नीलिमा को पसंद नहीं आतीं तो वह बवाल कर सकती थी जिसके लिए प्रतीक तैयार था.
अगर वह बवाल करती तो वह उसे माफी मांगकर सोने की चैन के पैसे के लिए तंग करता.
मगर अब तक कोई भी आहट नहीं हुई थी.
प्रतीक रसोई घर की तरफ पानी पीने गया तो देखते ही दंग रह गया.
नीलिमा वही खत बड़े ध्यान से पढ़ रही थी.
प्रतीक के अन्दर आते ही नीलिमा ने उसे देखा और बोली- ये सब क्या है प्रतीक? मैं तेरी माँ जैसी हूँ ये सब करते हुए तुझे शर्म नहीं आई?
नीलिमा का गुस्सा देख प्रतीक थोड़ा डर गया.
लेकिन उसके शैतान दिमाग ने उसे चोदने के सपने को फिर जगा दिया.
उसने थोड़ी हिम्मत की और नीलिमा से बोला- आंटी मुझे माफ कर देना लेकिन पिछले कुछ दिनों से ये बात मैं आपको बताना चाहता था. डर रहा था कि आप गुस्सा करोगी. लेकिन सच में … मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ आपके लिए अपने मन में मीठे अहसास महसूस करता हूँ.
यह सुनकर नीलिमा चुप रही.
थोड़ा और पास जाते हुए प्रतीक ने कहा- मैं आपके अकेलेपन को दूर करना चाहता हूँ.
नीलिमा ने उससे दूर होते हुए बोला- ये सब पागलपन बंद करो और चुपचाप निकल जाओ यहां से वरना मैं तुम्हारे पापा को बता दूंगी.
प्रतीक बिना कुछ बोले जाने लगा.
उसने बैग उठाया और निकलने लगा.
पता नहीं अचानक नीलिमा ने उसे रुकने को कहा.
प्रतीक के मन में कुछ हलचल हुई.
वह रुक गया.
नीलिमा ने उसे सोफे पर बिठाया और बोली- प्रतीक देखो तुम अमन के दोस्त हो. तुम्हारी और मेरी उम्र में बहुत अंतर है. ये सब मन से निकाल दो. मैं नहीं चाहती कि अमन और तेरी दोस्ती में कोई मनमुटाव आए.
इस पर प्रतीक चुप रहा.
उसके कोई जवाब न मिलने पर नीलिमा ने फिर से कहा- मान जाओ, ये अच्छा नहीं है … पाप है!
प्रतीक ने बोला- अगर प्यार करना पाप है तो मैं ये पाप करने को तैयार हूँ.
नीलिमा ने गुस्से में आकर प्रतीक को एक थप्पड़ जड़ दिया और उसे अगले ही पल गले लगा लिया.
नीलिमा की इस हरकत पर प्रतीक ने भी खूब साथ दिया और उसे उसी तर्ज पर कस के गले लगा लिया.
नीलिमा रोती हुई बोली- प्रतीक देखो ये सब किसी को पता नहीं लगना चाहिए.
प्रतीक ने थोड़ा हटकर नीलिमा के आंसू पौंछे और बोला- ये मेरे लिए एक प्यार है, जो मैं किसी को भी नहीं बताऊंगा आंटी!
नीलिमा- आंटी, नहीं नीलू बोलो!
‘हां, मेरी नीलू डार्लिंग!’
वे दोनों एक दूसरे को फिर से चिपक गए.
दोनों अपने आगोश में थे.
दरवाजा खुला ही था कि किसी के आने की आहट हुई. दोनों एक दूसरे से अलग हुए और देखा तो अमन आया था.
दोनों ने अपना रवैया बदल लिया.
अमन के आते ही प्रतीक उससे बोला- यार, तू सही वक्त पर आया अभी मैं निकलने ही वाला था.
फिर नीलिमा बोली- मैं इसे बोल ही रही थी कि रुक जाओ, बस अभी अमन आता ही होगा.
कुछ देर प्रतीक ने अमन के साथ बात की और वह घर निकलने को था.
उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी. उसे जो चाहिए था, वह मिलने वाला था.
अगले दिन रविवार था, कॉलेज को छुट्टी थी.
अमन ने प्रतीक को कॉल की और क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया.
प्रतीक ने भी हां बोल दी.
दोनों खेलने गए.
लेकिन प्रतीक को तो अपनी चुदाई के काम के लिए जाना था.
उसने अमन से झूठ कहा- पापा ने मुझे कल की सोने की चैन की बिल के लिए घर बुलाया है. मैं जाकर वापस आता हूँ.
वापस निकलते ही प्रतीक जल्दी से अमन के घर आ गया और दरवाजा बजाया.
जैसे ही दरवाजा खुला, उसने सामने नीलिमा को देखा और उसे गले लगा लिया.
नीलिमा ने कहा- अन्दर चल … यहां नहीं.
वे दोनों अन्दर आ गए.
अन्दर आते ही दोनों ने एक दूसरे को फिर गले लगाया.
दोनों इस कदर चिपक गए जैसे जन्मों की प्यासे हों.
अब दोनों अपने-अपने होंठों को एक दूसरे के होंठों से मिला रहे थे.
दोनों ‘उम्म … उम्म … उम्म …’ करते जा रहे थे.
प्रतीक बार-बार बोल रहा था- आई लव यू नीलिमा आई लव यू!
नीलिमा थी कि सिर्फ अपनी प्यास बुझाने में मग्न थी.
अब उसने प्रतीक का टी-शर्ट उतार दिया और उसके सीने को चूमती हुई नीचे की ओर जाने लगी.
साथ में उसके लोअर को निकाल कर चड्डी के ऊपर से ही उसके पौने छह इंच लंड को मसलने लगी.
प्रतीक ने भी अपनी चड्डी नीचे सरकाकर अपना लंड के दर्शन करवाए और लंड को सीधा नीलिमा के मुँह में घुसा दिया.
नीलिमा ने उसके लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दिया.
प्रतीक की ‘उम्म … ओह्ह … ओह्ह …’ की सिसकारियां उसे बड़ा मजा दे रही थीं.
‘मम … उम्म … उम्म … उम्म …’ करते-करते नीलिमा ने प्रतीक के लंड का पानी निकाल दिया और उसे अपने मुँह में लेकर पीने में लग गई.
लंड साफ हो जाने के बाद अब प्रतीक ने भी ज्यादा देर नहीं की.
उसने नीलिमा के पहने हुए कुर्ते को निकाल दिया.
हाय उसकी दी हुई ब्रा को देख प्रतीक बहुत खुश हुआ.
क्या कमाल के चूचे थे एकदम जिद्दी गेंदों की तरह दोनों दूध कसे हुए थे.
उस काली पैडेड ब्रा में जैसे ही ब्रा के हुक खोले, वैसे ही प्रतीक उन दोनों पर टूट पड़ा.
वह जितनी जोर से हो सकता था, उन्हें दबा रहा था.
जिससे नीलिमा की चीख निकल गई, “ओह्ह आराम से प्रतीक … क्या कर रहे हो? मैं यहीं हूँ!”
प्रतीक ने भी बोला- इतने दिन का इंतजार है जान, दबाने दो न इन दोनों शैतानों को!
वह दोनों चूचों को जोर जोर से दबा रहा था.
तभी नीलिमा ने कहा- चूसो इन्हें … और ज्यादा मजा आएगा!
यह सुनकर प्रतीक एक दूध को चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा.
अब नीलिमा को भी मजा आने लगा था और वह अपने हाथ से पकड़ पकड़ कर अपने दोनों दूध बारी बारी से प्रतीक के मुँह में दे रही थी.
कुछ ही देर में प्रतीक का लंड दुबारा से खड़ा होने लगा था.
प्रतीक ने नीचे को होकर नीलिमा की नाभि में अपनी जीभ फेरना शुरू कर दी.
नीलिमा मचलने लगी- ओह्ह प्रतीक … ओह्ह … अउम्म … उम्म … उम्म … अब रहा नहीं जा रहा जल्दी डाल दो अब जल्दी कर दो!
प्रतीक ने पजामे का नाड़ा खोल दिया और देखा कि वह उसी काली पैंटी थी, जिसे उसने गिफ्ट में दिया था.
प्रतीक ने उस पैंटी को निकाल दिया और उसे अगले ही पल नीलिमा की चुत के दर्शन हो गए.
उसकी चुत गीली हो चुकी थी.
प्रतीक ने अपनी उंगली नीलिमा की चुत में घुमाना शुरू किया.
‘सी … सी …’ करती हुई नीलिमा अपने आप को काबू में नहीं रख पाई और उसके मुँह से निकल गया- और कितना तड़पाओगे मेरे राजा? चोद दे मेरी चुत को … मिटा दे मेरी सालों की प्यास को!
यह सुनते ही प्रतीक को ध्यान आया कि अमन कभी भी आ सकता है.
उसने ज्यादा देर न करते हुए नीलिमा को पलंग पर लिटा दिया. उसकी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखा, लंड को सीधा नीलिमा की चुत पर रख दिया और धक्का लगाते हुए लंड अन्दर करने लगा.
नीलिमा की चुत गीली होने के बावजूद लंड ठीक से अन्दर नहीं जा रहा था.
प्रतीक- ये इतनी तंग क्यों है नीलू!
नीलिमा बोली- मैं सालों से नहीं चुदी हूँ, थोड़ी तो तंग रहेगी न!
प्रतीक ने थूक लगाकर नीलिमा की चुत में फिर से लंड घुसाते हुए पूरे जोश से अन्दर कर दिया.
नीलिमा की ‘सीईईई …’ करती हुई चीखें पूरे कमरे को मदहोश करने लगीं- ओह्ह … ओह्ह … प्रतीक चोदो मुझे ओह्ह … हम्म … हम्म … हम्म!
प्रतीक जोर-जोर से धक्के लगाने लगा और नीलिमा के चूचों को पीने भी लगा था.
‘आह … अहह … अहह … अउ… औअऊ…’ करते घमासान चुदाई शुरू थी.
‘चोद मेरी चुत को मेरे राजा आह चोद दे!’ नीलिमा बोल रही थी.
कुछ पल चोदने के बाद अचानक प्रतीक ने धक्कों की गति तेज कर दी और नीलिमा से बिना पूछे पूरा वीर्य उसके चुत में डाल दिया.
लंड से स्खलित वीर्य की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि कुछ पल तक उसके लंड से वीर्य की बूँदें निकलती रही थीं.
अब दोनों की सांसें तेज हो गईं. दोनों एक दूसरे को चूमते हुए पड़े रहे.
तभी अमन का फोन आया तो फोन पर अमन का नंबर देख कर वे दोनों उठ गए.
प्रतीक से बात करते वक्त अमन बोला- यार, अगर तुझे आने में देर है तो मैं घर जा रहा हूँ.
प्रतीक ने उसे दस मिनट का बोल दिया और नीलिमा से अपने को दूर कर जाने लगा.
बातों-बातों में नीलिमा ने बोल दिया- मेरी ब्रा का साइज तुझे कैसे पता?
प्रतीक बोला- दिख जाता है!
नीलिमा आंखों को नचाती हुई बोली- और मेरी चुराई हुई ब्रा-पैंटी का क्या किया?
प्रतीक चौंककर बोला- वह तुम्हें कैसे पता?
इस पर नीलिमा बोली- दुकान में खिड़की है, भूल गए क्या? तुम उसी में से देख लिया था मैंने तुझे!
प्रतीक बोला- तो रोका क्यों नहीं?
नीलिमा बोली- इतने साल बाद लंड मिलने की ख्वाहिश से चुप रही. और वैसे भी तेरा बड़ा लंड मैं पहले भी देख चुकी थी. जब तू बाथरूम करने गया था और मैं छत पर से वापस सीढ़ियों पर थी. तब से तेरा लंड लेना चाहती थी!
यह सुनकर प्रतीक खुश हो गया और जल्द ही दुबारा से रगड़ने की बात करने लगा.
उस पर नीलिमा ने उसे चूमते हुए कहा- मैं हमेशा राजी हूँ.
इस तरह से एक दोस्त ने अपने दोस्त की मम्मी की चुदाई का मजा लिया.
आपको यह X विडो फक कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
आपका धीरज
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