वो चौदह दिन- 11

Views: 64 Category: Lesbian By me.funny123 Published: June 26, 2026

लेस्बियन सेक्स कहानी में अपने बेटे के दोस्त से चुदने के बाद मेरे जिस्म की आग कुछ शांत हुई ही थी कि मेरी सहेली आ गई. उसे मेरी हरकतों का आभास हो गया.

कहानी का पिछला भाग: नींद खुलते ही लंड की तलब लगी

अब आगे लेस्बियन सेक्स कहानी:

मैंने अपनी सहेली को आज रात अपने साथ रुकने को कहा।
पर कविता बोली, “यार घर में हसबैंड को सिर्फ शॉपिंग के लिए बोल कर आई हूं। इसीलिए रुकना मुश्किल है।”
तो मैंने कहा- चाय पी कर तेरे घर ही चलते हैं, मैं बात कर लूंगी तेरे हसबैंड से, और फिर आज रात तू यहीं रुकना मेरे पास!
कविता ने बस “ओ के” बोला और चाय पीने लगी।

तभी मेरे मोबाइल पर गौरव की कॉल आई।
जैसे ही मैंने कॉल उठाई गौरव बोला, “कितनी देर में आ जाऊं।”

कविता के सामने मैंने उसको बुलाना ठीक नहीं समझा और जवाब दिया, “आज घर में गेस्ट्स आ गए तो कल बात करती हूं।”
गौरव तो कॉल पर ही आज आने की जिद करने लगा।

आखिर के मुझे बोला ही पड़ा, “आज मेरी फ्रेंड आई है तो आज मिलना पॉसिबल नहीं है, कल मैं खुद कॉल करूंगी।”
और मैंने फोन काट दिया।

तभी कविता आंखे रंगीन करती हुई बोली, “किसको बुलाती है राजीव के पीछे? बता न, कौन है?”
मैंने उसको बहुत टालने की कोशिश की.
पर वो तो मेरे पीछे ही पड़ गई।
“अभी तेरे घर चलते हैं. फिर रात अपनी है, तसल्ली से बताऊंगी.” बोल कर मैंने कविया को टाला।

चाय पी कर तैयार हो कर हम दोनों कविता के घर चले गए।
घर में कविता के दोनों बच्चे और उसने पतिदेव इंतजार कर रहे थे।

कविता ने बताया कि शॉपिंग के थोड़ी देर हो गई।
“कोई बात नहीं.” उसके पति ने बोला।

मैंने उसके पति को कहा, “आपको पता है आज कल राजीव तो बाहर गए हुए हैं। मैं घर मैं अकेली हूं, रोज बोर हो जाती हूं, मेरा टाइम भी नहीं कटता। एक रात के लिए कविता को मेरे साथ भेज दीजिए प्लीज़।”
“कोई बात नहीं, ले जाओ।” तुरंत कविता के पति ने इजाजत दे दी।

कविता ने डिनर बनाने को पूछा तो उसके पति बोले, “जोमैटो से ऑर्डर कर दूंगा. तुम चली जाओ।”

तब कविता अंदर गई और एक बैग ले कर बाहर आ गई.
हम दोनों मेरे घर वापस आ गए।

घड़ी में टाइम देखा तो 8.30 बज रहे थे।
कविता से बात करके मैंने डिनर ऑर्डर किया और नहाने चली गई।

कविता भी कपड़े उतार कर मेरे पीछे पीछे ही बाथरूम में आ गईं।

हम दोनों नंगी ही बाथरूम में शॉवर के नीचे एक दूसरी की चूचियों के साथ खेल ही रही थी कि घंटी बजी.
मैं समझ गई कि ऑर्डर आ गया।

मैं तौलिया लपेट कर बाहर निकली और ऑर्डर लिया।
कविता भी बाहर आ गई।

हम दोनों ने ऐसे ही बैठ कर खाना खाया और ढेर सारी कामुक बातें की।
10 कैसे बज गए पता ही नहीं चला।

तभी राजीव का कॉल आया और रोज की तरह मेरी राजीव से बात होने लगीं।

उन्होंने फिर से गौरव के बारे में पूछा, तो मैंने उसको सारी बात बताईं।
ये भी बताया कि आज कविता यहीं रुकेगी।

“अरे वाह, तेरी तो लॉटरी लग गई।” राजीव बोले।
उन्होंने कविता से बात करवाने को कहा, मैंने फोन कविता को दिया।

कविता ने राजीव से बात की और फिर से फोन मुझे पकड़ा दिया।

मैंने राजीव से पूछा, “आप लोगो का आज क्या प्लान है?”
राजीव ने बताया- आज तो हमारा बंपर प्लान है।
“क्या?” मैंने फिर से पूछा.

राजीव ने कहा- 10.30 कर वीडियो कॉल करना। तू अपना प्लान दिखा और हम अपना दिखायेंगे।”
मैंने एक दो बार राजीव से पूछा भी पर उन्होंने कॉल कट कर दी।

अब मेरा ध्यान कविता से हटकर राजीव के प्लान पर था।
मैंने कविता को राजीव से हुई सारी बात बताई।

कविता बोली, “अरे, थोड़ी ही देर की तो बात है हम इंतजार कर लेते हैं।”
और वो मुझसे छेड़छाड़ करने लगी.

पर मेरा दिमाग तो अब राजीव की तरफ लग चुका था, मैं कविता को कोई खास रिस्पांस नहीं दे रही थी।
ऐसे ही समय बीतते बीतते पता ही नहीं लगा, 10:30 कब बज गए.

ठीक 10:30 बजे इनका वीडियो कॉल आया.
मैंने लैपटॉप ऑन करके सामने टेबल पर रख दिया।

उस तरफ हार्वी और शालिनी बिल्कुल नंगे एक दूसरे की बदन से खेल रहे थे।

हालांकि हार्वी का लौड़ा मेरे पति से बहुत छोटा था पर हार्वी बहुत हैंडसम और फिट था।
जैसा पुरुष हर औरत को पसंद होता है।

शालिनी ने मेरी तरफ हेलो का हाथ हिलाया।
मेरे साथ कविता को देख कर वो बोली, “अच्छा आज दोनों तरफ ब्लास्ट होगा।”

मैंने पूछा, “राजीव कहां है?”
तो शालिनी बोली, “आपके लिए सरप्राइज़ लेने गए हैं।”
और हंसने लगी।

हार्वी भी अपने छोटे से लेकिन ताने हुए लौड़े की नुमाइश मेरी तरफ करने लगा।
“Hi Harvy, u look handsome.” मैंने हार्वी को बोला।
“Thanks hot lady.” हार्वी ने जवाब दिया।

तभी शालिनी स्क्रीन के पास आई और मोबाइल थोड़ा सा घुमाया।
अरे ये क्या … मैं तो हतप्रभ रह गई राजीव वहां नंग धडंग खड़े थे और उनके सामने बैठ कर कोई गोरी मेम उनके बड़े लंड से खेल रही थी।

राजीव ने मेरी तरफ हेलो का हाथ हिलाया।
मैंने पूछा, “अब ये कौन है?
राजीव ने बताया, “ये अल्बा है, हार्वी की गर्ल फ्रेंड।”
“Ohh great.” मेरे मुंह से निकला, “तो ये था आपका सरप्राइज़?”
“हाँ जान.” राजीव ने जवाब दिया।

“और मोटे दुद्दू वाली, तेरे क्या हाल है?” राजीव ने कविता की तरफ मुखातिब होते हुए पूछा।
“बस तुम्हारे लंड का इंतजार कर रही हूं।” कविता ने भी बेशरम सा जवाब दिया।

मेरा ध्यान लैपटॉप पर ही था तभी कविता आई और पीछे से मुझे चिपक गई।
उसकी 42 साइज की चूचियां मेरी पीठ में धंस रही थी।
मेरा ध्यान भी लैपटॉप से हट गया।

मैंने झटका दे कर कविता को अपनी गोद में गिरा लिया।

मेरी गोदी में आते ही वो मेरे आगे लटके हुए बूब्स से खेलने लगी।
मैंने भी उसकी एक चूची को अपने मुंह में भर लिया और अपना दूसरे हाथ से उसकी जींस का बटन खोला।

उसने तुरंत अपने हाथ से ही अपनी जींस और कच्छी एक साथ ही उतार दी।
मैंने हाथ बढ़ा कर उसकी चूत को छुआ तो देखा, “अरे वाह, ये तो बिल्कुल चिकनी है जैसे अभी सफाई की हो।” मैंने कविता से पूछा.
“हां, जब घर पर अंदर बैग लेने गई थी तभी फटाफट साफ करके आई थी।” कविता ने जवाब दिया।

मैंने बहुत दिन से किसी की चूत नहीं चाटी थी, मैं कविता के ऊपर 69 की पोजीशन में आ गई।
अब मेरी चूत कविता के मुंह पर थी और उसकी चूत मेरे मुंह में।

कविता बहुत बदमाश थी।
वो मेरी चूत चाटने के साथ ही अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मे भी सहला रही थी।
मैंने भी अपनी एक उंगली कविता की चूत के अंदर सरका दी।

“ओह्ह प्लीज़.” तभी जोर की आवाज आई।
हम दोनों की नज़र उधर लैपटॉप पर गई तो देखा अल्बा घोड़ी बनी हुई थी। उसके मुंह में हार्वी का लौड़ा आगे पीछे हो रहा था और उसके नीचे लेट कर शालिनी उसकी छोटी सी नींबू जैसी चूचियों को चाट रही थी।
पीछे की तरफ राजीव लगातार धक्के मार रहे थे।

मैं समझ गई कि राजीव ने एक ही झटके में इस कमसिन सी फ्रेंच बाला की चूत में अपना भारी भरकम लौड़ा उतार दिया होगा।
तभी ये बिचारी इतने जोर से चिल्लाई।

पर अब तो वो ट्रिपल अटैक का मजा ले रही थी।

कविता बोली, “क्या किस्मत पाई है इस छिपकली ने।”

अब मुझमें भी गर्मी आने लगी थी।
मैं कविता के ऊपर से उतर के उस के बराबर में आ गई और उसकी चूचियों पर अपनी चूचियों रगड़ने लगी।
मुझे शुरू से ही कविता के चूचे बहुत पसंद थे। जब भी मौका मिलता मैं इनसे खूब खेलती।

मैंने अपनी एक टांग फैलाकर कविता की चूत से अपनी चूत घिसना शुरू कर दी।

उधर मैंने देखा हार्वी और शालिनी अब 69 की पोजीशन में थे.
हार्वी नीचे लेटा शालिनी की चूत में उंगली कर रहा था और शालिनी उसके ऊपर आ कर उसका लंड लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी।

राजीव ने अब कमसिन सी अल्बा को अपनी गोदी में उठा रखा था और नीचे से उसकी फुद्दी में लंड डाल कर उसकी ओवरहॉलिंग करने में लगे थे।

इतने में कविता ने घुमा कर मुझे नीचे बिस्तर पर डाल दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई।
उसने खुद ही अपनी निप्पल मेरे मुंह में डाल दी जिसको चूसने में मुझे आनंद ही आनंद मिलता था।

इधर मेरी चूत पूरी गीली होने लगी थी.
मैंने कविता को कहा, “यार नीचे थोड़ी उंगली कर दे, बहुत बेचैनी हो रही है।”
कविता बोली, “रुक, आती हूं।” और बाहर हाल में चली गई.

मेरी नजर लैपटॉप कर गई तो पाया कि हार्वी नीचे लेटा था; शालिनी उसके लंड पर जोर जोर से उछल रही थी।

साथ ही अल्बा भी अब हार्वी के मुंह के ऊपर बैठ कर अपनी चूत चटवा रही थी।
पर राजीव अब कहीं दिखाई नहीं दिए।

तभी कविता रूम में वापस आई उसके हाथ में करीब एक फुट लंबा कुछ पाइप जैसा डिल्डो था जो एक साथ दोनों की चूत में जा सकता था दोनों तरफ से।

उसको देखते ही मेरी तो बांछें खिल गई।
मैंने अपनी दोनों टांगें कविता की तरफ फैला दी।

उसने पास में रखी शीशी से थोड़ा सा तेल डिल्डो पर लगाया और धीरे धीरे मेरे अंदर सरकाना शुरू कर दिया।
करीब 6 इंच मेरे अंदर सरकाने के बाद कविता उसको अंदर बाहर करने लगी।

मैंने कविता को अपने ऊपर आने का इशारा किया।

मेरा इशारा समझते ही उसने टाँगें फैलाई और मेरे ऊपर आ कर बचा हुआ डिल्डो अपने अंदर लिया।

अब हम दोनों ही अपने अपने चूतड़ एक साथ हिलने लगी।
दोनों की चूचियां आपस में एक दूसरे से टकरा रही थी।

उधर सामने राजीव भी शायद वॉशरूम से वापस आए और अपना निचोड़ा हुआ लंड शालिनी के हाथ में दे दिया।

शालिनी हार्वी के ऊपर कूदती हुई राजीव का लंड फिर से खड़ा करने की कोशिश करने लगी।
मेरे ऊपर कविता की स्पीड बहुत तेज होने लगी।

वो लगातार अपनी चूचियों मेरी चूचियों पर घिस रही थी।
मेरी नजर लैपटॉप पर गई तो देखा हार्वी भी निपट चुका था।
अभी राजीव भी दोबारा तैयार नहीं हुए थे।

मैंने शालिनी को चिढ़ाने के लिए जोर ओर से सिसकारियां लेनी शुरू कर दी।
शालिनी और अल्बा की नजर हमारी तरफ गई।

फिर उन्होंने एक दूसरे को मुस्कुरा कर देखा।
शालिनी ने अल्बा की बांह पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया।
इधर जोश में कविता की कमर की गति भी तेज हो गई।
उस तरफ शालिनी और अल्बा एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगीं।

तभी जैसे मेरे अंदर का लावा छूट गया।
मैं निढाल हो कर एक तरफ हो गई।

कविता ने मेरी तरफ देखा।
मैंने उठ कर डिल्डो का एक सिरा अपने हाथ में पकड़ा और कविता की चूत में अंदर बाहर करने लगी।

उधर अल्बा शायद पहली बार किसी महिला के साथ थी तो थोड़ा झिझक रही थी।
तब तक इधर कविता का लावा भी निकल गया।

कविता अपनी मोटी मोटी चूचियां हिला हिलाकर शालिनी और अल्बा को उकसा रही थी।

मैं तो अब थक चुकी थी, सोना चाहती थी।

तभी हार्वी ने फिर से शालिनी को पीछे से पकड़ कर चूमना शुरू कर दिया।
उसको देख कर अल्बा भी शालिनी को छोड़कर राजीव की गोदी में जाकर बैठ गई।

मुझे याद आया फ्रिज में कल की थोड़ी सी आइसक्रीम रखी थी।
मैं फ्रिज से आइसक्रीम निकाल लाई और कविता की चूचियों पर चुपड़ दी।

कविता खुद ही उत्तेजित होकर अपनी चूचियों मेरे मुंह में ठूंसने लगी।
कविता की उत्तेजना देख कर मुझे भी जोश आ गया।

मैंने कविता के लाए हुए डिल्डो को नैपकिन से अच्छे से साफ किया और उस को कटोरी में आइसक्रीम में ठूंस दिया।
कविता ने वो आइसक्रीम लगा डिल्डो मेरे हाथ से लिया और उसकी आइसक्रीम चाटने लगी।

मैंने भी कविया की चूचियों पर लगी आइसक्रीम चाटना शुरू कर दिया।

उधर हार्वी और राजीव दोनों ही नई पारी खेलने को तैयार थे।
राजीव तो कुर्सी पर बैठे अल्बा की छोटी छोटी चूचियां सहला रहे थे।
अल्बा सामने से उनका लंड चूस रही थी।

अल्बा के नीचे फर्श पर सीधी लेटकर शालिनी उसकी चूत में जीभ घुसाने की कोशिश में थी और हार्वी शालिनी की टांगें फैलाकर दूसरी पारी खेलने के लिए उसकी चूत में लंड घुसा चुका था।

इधर कविता ने भी डिल्डो चाट कर पूरा साफ कर दिया।

लेस्बियन सेक्स करके मुझे बहुत थकान हो रही थी।
मैंने कविता से पूछकर वीडियो कॉल कट कर दी।

नैपकिन से कविता का पूरा बदन साफ करके मैं उसकी चूचियों पर सर रखकर लेट गई।
कविता भी वहीं लेटे लेटे मेरा बदन सहला रही थी।
रात के 2 बजने वाले थे।

पता ही नहीं चला कब हम दोनों को नींद आ गई।

मेरी आंख सुबह 8 बजे खुली।
मैं हड़बड़ा कर बिस्तर से उठी।

देखा तब तक भी हम दोनों नंगी ही पड़ी थी।
मैं उठकर टॉयलेट गई।

वापस आ कर देखा तो कविता अब भी सो रही थी।
मैंने कविता को जगाया.
मुझे ऑफिस भी जाना था।

कविता ने जागते ही उठ कर मुझे गले से लगाया तो मैंने भी अपनी उंगलियों से उसके दोनों निप्पल को सहला दिया।

कविता ने घड़ी देखी तो वो भी तेजी से टॉयलेट गई।

उसके बाद हम दोनों ही शावर के नीचे एक साथ नहाई और थोड़ी देर एक दूसरे के बदन को सहलाया।
बाहर आते ही कपड़े पहन कर ब्रेड चाय लेकर हम दोनों अपनी अपनी जगह निकल गई।

जयपुर में शराब के नशे में एक लड़की New HD

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