सेक्स स्टोरी राइटर्ज़ कान्फ्रेंस हुई तो मुझे भी उसमें शामिल होने का निमन्त्रण मिला. मैं बहुत खुश हुई और मैंने वहां जाने की पूरी तैयारी कर ली.
मेरे प्यारे दोस्तो, मैं आपकी अपनी सुहानी चौधरी आप सब का एक बार पुनः अपनी एक और नई मजेदार सेक्स कहानी में स्वागत करती हूँ.
कैसे हैं आप सब … मैं तो मजे कर रही हूँ और आशा करती हूँ आप सब भी मजे ही कर रहे होंगे.
आज मैं आप सबको एक बहुत ही रसीली और मजेदार सेक्स कहानी सुना रही हूँ.
तो अपने सारे दुख-दर्द, स्कूल की, ऑफिस की, नौकरी की या बिज़नेस की टेंशन को भूल जाइए और चलिये आनन्द लेते हैं.
जैसा कि आप सब मुझे और मेरे बारे में मेरी कहानियों के द्वारा जानते ही हैं.
मेरी पहली कहानी करीब 7 साल पहले 2019 में अन्तर्वासना पर आई थी.
दरअसल मैं भी आप सब की तरह काफी समय से अन्तर्वासना पर रात को छुप-छुप कर कहानियां पढ़ा करती थी.
वह समय शायद साल 2010 से शुरू हुआ था.
तब तो शायद मैंने जवानी का सुख भी नहीं लिया था, अपनी चुत को हाथ भी नहीं लगाया था, पर उत्सुकता तो रहती ही थी कि इस छेद में ऐसा क्या मजा है … जो इन सेक्स कहानियों में लिखा रहता है.
जब मैं सेक्स कहानियों के बारे में अनजान थी, उस वक्त इमरान हाशमी का ज़माना था और उसकी हर फिल्म में उसका रोमांस देख कर मुझे आग लग जाती थी .. उफ़्फ़ … मेरी टांगों के बीच एक अजीब जी खुजली होने लगती थी.
फिर एक दिन एक सहेली के बताने पर मैं अन्तर्वासना पर गयी और सेक्स कहानियां पढ़ने लगी.
हालांकि तब ब्लू फिल्में भी आसानी से उपलब्ध थीं, पर उनमें तो सीधा साधा सेक्स होता था, तो उसमें न जाने क्यों एक रोमांच नहीं रहता था.
उस वक्त की विदेशी सेक्स फिल्मों को देख कर लगता था कि ये तो उनका कल्चर है.
इसलिए उनके सेक्स में अपनेपन जैसा जुड़ाव नहीं हो पाता था.
जब कि अन्तर्वासना की सेक्स कहानियां पढ़ते हुए ऐसा लगता था कि यह तो भारत में चलने वाली बात है तो हर सेक्स कहानी मेरे दिमाग में चलती रहती थी … और हर वक्त उसकी याद आती … उसमें घटी घटना परत दर परत खुलती रहती … तो और भी ज्यादा रोमांच होता.
ऐसा लगता ही नहीं था कि मैं कोई कहानी पढ़ रही हूँ, बल्कि ऐसा लगता था जैसे ये कहानी मेरे साथ हो रही है और मेरी आंखों के आगे चल रही है.
फिर जब कहानी के किरदार मैं अपने ख्यालों के अनुसार बुनती थी तो और मजा आता था.
इसलिए मुझे ब्लू फिल्मों से ज्यादा अन्तर्वासना कहानियां पसंद आती थीं.
मैंने इधर प्रकाशित काफी सारी कहानियां पढ़ चुकी हूँ और अब तो मुझे इन्हें पढ़े बिना चैन ही नहीं आता है, मैं इनमें बहने वाले रस की आदी हो चुकी थी.
शुरू में तो मुझे कहानियां पढ़ने में बहुत मजा आता था, पर जैसे-जैसे मैं बड़ी होती चली गयी और समझ आती गयी, मुझे ज़्यादातर अन्तर्वासना की कहानियों में थोड़ी-बहुत कमियां भी लगने लगीं.
क्योंकि मैं भी कहीं न कहीं एक लेखिका बनना चाहती थी तो हर कहानी का अपनी तरह से आकलन भी करने लगी थी.
काफी सारी कहानियां सच में बहुत अच्छी होती थीं और वे मेरे अरमानों को नए पंख लगा देती थीं, पर ज़्यादातर कहानियां ब्लू फिल्मों की तरह बहुत ही साधारण और सीधे-सीधे सेक्स पर आधारित होती थीं … तो जरा मजा खराब हो जाता था.
जैसे कि कोई लड़का किसी लड़की से अचानक कहीं भी मिला, लड़की ने लड़के का लंड देखा, लड़के ने चूत देखी, लंड खड़ा हुआ और सेक्स हो गया और कहानी खत्म.
उस तरह की कहानी को पढ़ कर ऐसा लगता था मानो भारत में सबको सेक्स खुले आम बंट रहा है.
जबकि मैं ऐसी कहानियां ज्यादा पसंद करती थी, जिनमे थोड़ा बहुत रोमांच हो आकर्षण हो, मैं खुद को उस कहानी में जीते हुए महसूस कर सकूँ, मतलब ऐसा लगे मेरे साथ ही हो रहा हो वह सब … एक गुदगुदी हो.
कुछ कहानियां ऐसी मिली भी, तो मैंने उन्हें कई कई बार पढ़ा और अपनी चुत को रगड़ कर मजा भी खूब लिया.
फिर मेरी जवानी और गर्म होने लगी, तो ज़िंदगी में धीरे धीरे मुझे सेक्स का अनुभव भी मिलने लगा और समझ आने लगा कि सेक्स मिलना इतना आसान भी नहीं होता है.
असल ज़िंदगी में उत्तेजना होती है, उत्सुकता होती है, रोमांच होता है, कुछ खतरे होते हैं, मुश्किलें होती हैं.
फिर जब मुझे भी सेक्स का अनुभव होने लगा तो मैंने भी अपनी कहानी आप सब पाठकों के साथ साझा करने की सोची.
अब मैंने भी अन्तर्वासना पर कहानी लिखना शुरू कर दिया तो बहुत से चाहने वाले मेरे साथ चुदाई की कामना जताने लगे.
मैं अन्तर्वासना का तहे दिल से धन्यवाद करना चाहती हूँ कि इस साइट ने हम सब गुमनाम या गुप्त लेखकों को एक ऐसा मंच दिया, जिधर हम लोग अपनी बात को खुल कर लिख सकते हैं.
कोई फीस नहीं, कोई रोक-टोक नहीं, बस अपनी कहानियां सुनाते जाओ और दूसरों की सुनते जाओ और मजे लेते जाओ.
इसी तरह मेरी कहानियां मुझे आप सब पाठकों और प्रशंसकों से जोड़ती चली गईं.
मैंने काफी लोगों से ईमेल पर बात भी की और मुझे ये जान कर बहुत अच्छा भी लगा कि आप सब को मेरी कहानियां इतनी ज्यादा पसंद आती हैं.
हालांकि मैं इतने सारे ईमेल्स देख कर हैरान भी हो जाती हूँ और सभी का रिप्लाई भी नहीं कर पाती थी.
तब तक कोई अगली कहानी प्रकाशित हो जाती तो मैं पुनः आप सबसे जुड़ जाती थी.
आप सब के इतने प्यार के चलते मैं और प्रोत्साहित हुई और अपनी कहानियों की एक अलग ही दुनिया बना ली.
आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद.
चलिये अब आप सबका और समय ना लेते हुए आज की कहानी पर बढ़ते है.
तो ये बात 2022 की है.
अन्तर्वासना पर कहानियां लिखते हुए मुझे 3-4 साल हो चुके थे और मैं आप सब से जुड़ी हुई थी. इसके अलावा मैं कुछ अखबारों और पत्रिकाओं में भी रोमांचक कहानियां लिखती रही हूँ और बच्चों के लिए भी छोटी-मोटी कहानियां लिखती रही हूँ, तो थोड़ा बहुत अनुभव भी है.
खैर … एक दिन मेरे ईमेल पर एक निमंत्रण मेल आया. यह निमंत्रण एक कहानी सम्मेलन का था, जिसमें मुझे जाने का मन हुआ.
मेल विश्वसनीय लगा तो मैंने देखा और अपनी रुचि दिखाई.
मैंने ज्यादा जानकारी के लिए दिए हुए नंबर पर कॉल की तो किसी सज्जन व्यक्ति ने फोन उठाया और मैंने सम्मेलन के बारे में और जानकारी मांगी.
उन्होंने मुझे बताया कि हम लोग नए और टैलेंटेड लेखकों के लिए एक सेक्स स्टोरी राइटर्ज़ कान्फ्रेंस कर रहे हैं. काफी सारे उभरते हुए लेखक-लेखिकाएं आएंगे और आपकी कहानियां भी काफी प्रकाशित की जाती और पसंद की जाती हैं, तो आप को भी जरूर आना है.
मुझे लगा इतनी पत्रिकाओं और अखबारों में कहानियां लिखी हैं, चलो किसी काम तो आई मेरी मेहनत … तो मैं बहुत खुश हुई.
अब क्योंकि इस सेक्स स्टोरी राइटर्ज़ कान्फ्रेंस का स्थान दिल्ली में ही था तो मुझे कोई खास दिक्कत भी नहीं थी क्योंकि मैं खुद दिल्ली में रहती हूँ.
मैंने तन्वी से साथ चलने के लिए कहा तो वह बोली- यार इस हफ्ते तो मैं थोड़ी व्यस्त हूँ. तू हो आ … वैसे भी मुझे इन शेरो-शायरी वाले सम्मेलन में कोई खास दिलचस्पी नहीं है.
हालांकि मुझे उसकी बात कुछ पसंद नहीं आई पर फिर सोचा ये साथ जाएगी तो मेरा मूड ही खराब करेगी.
वैसे भी वहां सब मेरे तरह उभरते लेखक ही होंगे, तो मुझे अकेले ही जाना चाहिए.
मैंने एक अच्छी सी गुलाबी पार्टी वाली ड्रेस खरीदी जैसे कि हीरोइनें किसी फ़ंक्शन आदि में पहन कर जाती हैं.
उस दिन अच्छे से पार्टी मेकअप करके तैयार होकर वहां कैब से पहुंची.
फ़ंक्शन शाम का था तो मैं 7 बजे पहुंच गयी.
फ़ंक्शन दिल्ली में एक आलीशान फार्म हाउस में था और देख कर ही लग रहा था कि किसी बड़ी कंपनी ने करवाया है.
मैंने अपना निमंत्रण दिखाया और अन्दर चली गयी.
वहां करीब 140-150 लोग थे और लगभग सब अलग अलग ही घूम रहे थे.
मैं समझ गयी की ज़्यादातर लोग मेरी तरह ही हैं.
वैसे भी हम सब पार्ट टाइम लेखकों के ज्यादा दोस्त होते ही कहां है.
खैर … मैंने चाय नाश्ता आदि किया और उधर एक कुर्सी पकड़ ली.
वहां पर एक बड़ी टीवी स्क्रीन पर कुछ रोमांटिक गाने चल रहे थे.
धीरे धीरे प्रोग्राम शुरू होने लगा.
स्टेज पर होस्ट एक अधेड़ उम्र का आदमी जो दिखने में बहुत हैंडसम था और उम्र भी 45 से ज्यादा ही होगी.
होस्ट काफी उत्सुक था और उसने वह लोगों को संबोधित करना शुरू किया.
‘मेरे प्यारे दोस्तो, कैसे हो आप सब … मैं आज की रात का आपका दोस्त और होस्ट आप सबका यहां तहे-दिल से स्वागत करता हूँ.
भीड़ उसके अंदाज पर तालियां बजा रही थी.
फिर उसने आगे कहा- जैसे कि मैं देख सकता हूँ कि आप सब लोग एक दूसरे को नहीं जानते हैं, पर आप सभी एक से एक टैलेंटेड लेखक हैं और बहुत अच्छा लिखते हैं. आप सब लोगों को शायद अंदाज़ा नहीं है, पर आपके इस दुनिया में कितने प्रंशसक हैं.
यह सब सुनकर वहां लोग उत्साहित भी थे और कन्फ्यूज भी क्योंकि हम सब में से कोई भी किसी को नहीं जानता था.
फिर उसने कहा- दोस्तो, आप सब सोच रहे होंगे कि हम सब लोग कौन हैं, यहां क्या कर रहे हैं और मैं कौन हूँ. ये फ़ंक्शन किस बारे में है वगैरह-वगैरह. तो अब मैं इस राज़ से पर्दा उठाने जा रहा हूँ.
एक पल रुकने के बाद वह पुनः बोला- दोस्तो मेरा नाम गौरव वर्मा है और मैं लंदन में एक ऑनलाइन बिजनेस चलाता हूँ.
हम सब लोग शांत हो कर उसकी बातें सुन रहे थे.
फिर उसने कहा- मैं समझ सकता हूँ कि आप लोग ना मुझे जानते हैं और ना ही बाकी लोगों को, पर मजे की बात ये है कि मैं आप सबको जानता हूँ और आप सब मुझे और एक दूसरे को भी.
भीड़ अब आश्चर्यचकित और अचंभित हो गयी थी.
फिर गौरव आगे बोले कि दरअसल मैं एक कहानी होस्टिंग साइट चलाता हूँ और आप सब मेरे सबसे बेस्ट लेखक हो.
सब लोग एकदम हैरान और भौचक्के रह गए और इधर-उधर देखने लगे.
इस घबराहट को देखते हुए गौरव जी ने आगे कहा- दोस्तो, घबराने की कोई जरूरत नहीं है, आप लोग शांत हो जाइए और मेरी बात सुनिए.
उन्होंने आगे बोला कि आज हमारी साइट को शुरू हुए 20 साल हो गए हैं और यह दुनिया की सबसे बड़ी हिन्दी सेक्स कहानियों की साइट है. मैं आप सबका इस साइट को यहां तक लाने में बहुत शुक्रगुजार हूँ. अगर आप में से किसी को कोई भी आपत्ति या भय है तो निश्चिंत रहे. सब की गोपनियता पूरी तरह सुरक्षित है … अगर फिर भी कोई जाना चाहता है तो जा सकता है, कोई रोक-टोक नहीं है.
मैंने सोचा कि सुहानी बेटा पकड़ी जाएगी … भाग यहां से, पर मेरे अन्दर एक अजीब सी उत्सुकता भी हो रही थी इस फंक्शन को पूरी तरह से रुक कर अटटेंड करने की. मैंने सोचा अगर ज्यादा लोग जाने लगे तो मैं भी चुप-चाप निकल जाऊंगी.
सब लोग कुछ पलों तक एक दूसरे को देख रहे थे कि कौन जा रहा है और कौन यहीं बैठा है.
पर हैरानी की बात ये थी कि 15-20 लोगों को छोड़ के कोई भी भी जाने के लिए खड़ा नहीं हुआ और एक दूसरे को देख रहे थे.
फिर ज़्यादातर लोग एक दूसरे को देखते हुए धीरे धीरे अपनी कुर्सियों पर वापस बैठ गए.
मैं भी थोड़ा तो घबरा रही थी, पर मैं अपने आस-पास की काफी संख्या में बैठी लड़कियों को देख कर थोड़ा धीरज बनाई हुई थी.
जब जाने वाले चले गए तो आगे गौरवजी ने कहा- मेरे प्यारे दोस्तो आज हम टॉप 10 लेखकों को उनकी बेस्ट कहानियों के लिए सम्मानित करेंगे. उनकी ज़िंदगी के सफर के बारे में थोड़ा बहुत जानेंगे, उनके अनुभवों को, उनके विचारों को भी जानेंगे.
लोग तालियां बजाने लगे क्योंकि सबकी झिझक खुलती जा रही थी और भय खत्म होता जा रहा था.
अब तक मैं भी सामान्य हो गयी थी.
कुछ देर में ही गौरव जी के चुटकुलों पर सब लोग ऐसे हंस रहे थे, जैसे ये कोई आम कवि सम्मेलन हो.
धीरे धीरे उन्होंने आगे बातों का सिलसिला बढ़ाया और कहा कि अब मैं आप सब से विनती करता हूँ कि जो भी स्टेज पर आकर अपनी इस यात्रा के बारे में हमारे मेहमानों को बताना चाहता है, कृपया आ जाए.
पहले तो सब एक दूसरे को देखने लगे, फिर हिम्मत करके एक आदमी स्टेज पर गया.
उसने अपने बारे में बताया और आगे बताया कि कैसे उसने सेक्स कहानी लिखनी शुरू की. अलग अलग पत्रिकाओं में लिखा और फिर इस साईट पर आ गया.
इसी तरह एक एक करके लड़के-लड़कियां आदमी-औरतें स्टेज पर जाते और अपने बारे में बताते.
मुझे काफी नाम सुने हुए से लग रहे थे, शायद मैं सेक्स कहानी पढ़ने की शौकीन हूँ और इन्हीं लेखकों की कहानियां पढ़ी थीं इसलिए ऐसा था.
खैर … कोई 12-13 लड़के लड़कियों के बाद में मैं भी स्टेज की तरफ बढ़ी और वहां पहुंच कर अपना परिचय देने लगी.
शुरू में तो मैं थोड़ी सी हिचकी, फिर सोचा कि डरना नहीं है सुहानी, तू स्टार है. ऐसे नहीं अपने अंदाज़ में परिचय दे.
फिर मैंने अपने अंदाज़ में ही कहा- हैलो मेरे प्यारे दोस्तो, कैसे हैं आप सब! मैं सुहानी चौधरी आप सबका इस कहानी सम्मेलन में जोरदार स्वागत करती हूँ.
मेरी इसी लाइन से ही लगभग सभी लोग मुझे पहचान गए कि मैं उनकी पसंदीदा लेखिकाओं में से एक हूँ.
सब लोग खड़े हो कर ज़ोर से ताली बजाने लगे और मुझे एक अलग ही खुशी का अहसास हुआ जैसे मैं सच में कोई फ़ेमस स्टार हूँ.
फिर मैंने अपनी सेक्स कहानी के सफर के बारे में, थोड़ा बहुत अपने बारे में कुछ बोला और मैं स्टेज से उतर कर अपनी कुर्सी पर आ कर बैठ गयी.
मेरे बाद भी कुछ और लेखक आए और फिर मिलने-जुलने का सिलसिला शुरू हो गया.
धीरे धीरे मैं भी उस माहौल में घुल-मिल गयी और अब समझ आ गया था कि सब मेरी तरह ही गुमनाम लेखक हैं.
हम सब पुराने दोस्तों की तरह मिल रहे थे क्योंकि भले ही असल ज़िंदगी हम पहली बार मिल रहे थे पर एक दूसरे को कहानियों के द्वारा तो जानते ही थे.
मैं भी काफी लोगों से मिली और तब मुझे अपनी कहानियों के प्रशंसकों के बारे में समझ आया.
हम सब लेखक एक दूसरे की किसी न किसी कहानी के प्रशंसक ही थे.
मैं उन लेखकों से भी मिली, जिनकी कहानी मुझे बहुत पसंद आई थी.
करीब एक घंटे के बाद और कुछ नाश्ता वगैरह के बाद हम सब फिर अपनी कुर्सियों पर बैठ गए थे.
इसके बाद गौरव जी स्टेज पर आए और माइक लेकर बोलने लगे- तो दोस्तो, जैसा कि मैं देख सकता हूँ कि अब आप सब आपस में थोड़ा सहज हो चुके हैं, तो चलिये अब आगे का कार्यक्रम शुरू करते है.
सब ने जोरदार तालियां बजाईं.
फिर गौरव जी ने अवार्ड्स की घोषणा कर दी और एक एक करके लेखकों को अवार्ड्स मिलने लगे.
सभी लोग स्टेज पर आते और अपना अवार्ड लेते और अपनी कहानी के बारे में थोड़ा बहुत बताते.
मैं परेशान और निराश थी कि मेरा नाम नहीं आ रहा था. क्या मेरी कहानियां इतनी बुरी थीं.
खैर … टॉप के 3 अवार्ड्स बंटने लगे और अभी भी मेरा नाम नहीं आया था.
जब आखिरी और सबसे बेस्ट नयी लेखिका का अवार्ड आया तो गौरवजी ने घोषणा करते हुए कहा- और ये अवार्ड जाता है हमारी सबसे प्यारी और उभरती हुई लेखिका को, जिन्होंने कुछ ही सालों में सभी पाठकों का दिल अपनी कहानियों से जीत लिया है … और वह नाम है हम सबकी और मेरी खुद की चहेती सुहानी चौधरी.
मैं तो मानो एक पल के लिए जम गयी.
सब ताली बजा कर मेरा स्वागत कर रहे थे.
फिर गौरवजी ने कहा- अब मैं सुहानी जी से आग्रह करूंगा कि स्टेज पर आकर वे अपना अवार्ड ग्रहण करें.
मैं बहुत खुश थी.
मैं तालियां पीटती हुई भीड़ को देखती हुई धीरे धीरे स्टेज पर आ पहुंची.
वहां पहुंच कर मैंने गौरव जी से हाथ मिलाया और उनको ज़ोर से थैंक्यू गौरव जी कहा.
उन्होंने मुझे अवार्ड से सम्मानित किया और मेरी तारीफ भी की.
उन्होंने वहां बैठे लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सुहानी जी हमारी सबसे नयी लेखिकाओं में से हैं, पर ये जो भी लिखती हैं, सच में मुर्दों में भी जान डाल देती हैं. सुहानी जी आपकी कहानियां सच में अलग ही होती है, मैं खुद आपकी कहानियों को बहुत पसंद करता हूँ. आप बहुत सुंदर और टैलेंटेड हैं. उम्मीद करते हैं कि आप आगे भी इसी तरह अपनी कहानियों से हम सब का मनोरंजन करती रहेंगी.
मैं मुस्कुरा दी.
गौरव जी- अब मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप अपने बारे में कुछ शब्द कहें.
यह कह कर उन्होंने मुझे माइक दे दिया.
मैंने शुरू में तो बहुत खुश थी और गला भरा हुआ था … पर गला साफ करते हुए मैंने कहा- थैंक्यू वेरी मच … आप सब लोगों का और गौरव जी आपका और उन सब प्रंशसकों का भी, जिन्हें मेरी और आप सब लेखकों की कहानियां इतनी पसंद आती हैं.
हमारे प्यारे गौरव जी का बहुत धन्यवाद क्योंकि आपकी साइट की वजह से ही मैं अपनी इस छुपी कला को पहचान पायी. गौरवजी ने हम सबको एक मंच दिया ताकि हम अपनी कला को दुनिया तक पहुंचा सकें. मैंने कभी नहीं सोचा था कि भारत जैसे देश में जहां सेक्स बोलना तक एक गुनाह माना जाता है और हम 140 करोड़ लोग हैं, वहां इतनी बड़ी उपलब्धि मिल जाएगी. सच में दोस्तों क्या है कि सेक्स एक मर्द और औरत के बीच का जिस्मानी रिश्ता है. यह प्रकृति दत्त उपहार है, मुझे तो समझ नहीं आता कि इसमें इतना बुरा मानने की क्या बात है. चुप-चुप कर सब लोग ये सब देखते हैं … पढ़ते हैं सोचते हैं, पर बात नहीं कर सकते. वह भी हमारे बनाए हुए समाज के डर से. जबकि सेक्स एक पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है. इसी से सृष्टि का सृजन होता है और दुनिया का अस्तित्व है. मेरे प्यारे दोस्तो, इसलिए मेरा मानना है कि सेक्स में कुछ भी गलत नहीं है. आप लोग खुल कर इसके मजे लीजिये. आप अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं.
इस तरह से मैंने अपनी काम चलाऊ स्पीच खत्म की और सबको एक बार फिर से धन्यवाद दिया.
तभी एक फ़ैन भीड़ में से ही चिल्लाया- तो क्या सुहानी जी हम लोग अभी वह सब कर सकते हैं!
इसके साथ ही सब लोग खिलखिला कर हंसने लगे और मेरी भी हंसी छूट गयी.
पर मैंने जवाब देते हुए कहा- हां बिल्कुल, मैंने कहा ना सब मर्ज़ी के मालिक हैं … जब करना है कर लीजिये, जहां करना है कर लीजिये … और अगर यहां स्टेज पर भी करना है, तो सभी के सामने कर लीजिये, हम सब को लाइव सेक्स देखने को मिलेगा.
मेरे ऐसे जबाव से सब और हंसने लगे और वह आदमी भी चुप हो गया.
दोस्तो, हो सकता है कि आपको मेरी इस सेक्स स्टोरी राइटर्ज़ कान्फ्रेंस कहानी के पहले भाग में कोई सेक्स सीन पढ़ने को न मिला हो, पर आने वाले भागों में आप निश्चित रूप से सेक्स का मजा लेंगे, यह मेरी गारंटी है.
अपने विचार मुझे मेल जरूर करें.
सुहानी चौधरी
suhani.kumari.cutie@gmail.com