रोमांटिक भाभी फक स्टोरी में मैंने अपने दोस्त की वाइफ को पहली बार देखा तो हम दोनों के नैन लड़ गए. एक शादी में हम मिले तो छोटी मोटी छेड़छाड़ होने लगी.
दोस्तो, मैं आपको अपनी चाची की बिल्डिंग में रहने वाली रेखा भाभी की चुदाई वाली सेक्स कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
दोस्त की पत्नी के साथ सेक्सी रोमांस
में अब तक आप पढ़ चुके थे कि रेखा भाभी की गांड में अपना कड़क लंड चुभोने से वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी थी.
इससे साफ हो गया था कि वह भी मेरे लौड़े से चुदने के लिए रेडी है.
अब आगे रोमांटिक भाभी फक स्टोरी:
जब भाभी ने तिरछी नजर से मुझे देख कर स्माइल दी तो मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी गांड को दबा दिया.
वह ऊँह करती हुई मुझसे दूर हो गई.
चूंकि शादी का माहौल था और उधर बहुत सारे लोग थे तो चुदाई तो हो ही नहीं सकती थी.
मैंने उसको आंख मारते हुए देखा और सीधा बाथरूम में घुस गया.
उधर मैंने उसके नाम की मुठ मारी, तब जाकर राहत मिली.
अब मैंने प्लानिंग करना स्टार्ट किया, तो सीधा आईडिया आया कि क्यों ना रमेश सहित सब दोस्तों को बुला कर दारू पार्टी की जाए.
मैंने वैसे ही किया.
सबको मैंने अपने रेंट वाले फ्लैट जो करीब ही था, वहीं पर सबको रात में दारू पीने का प्रोग्राम सैट करके बुला लिया.
दारू के नाम पर सब थोड़ा थोड़ा जुगाड़ करके पार्टी करने के लिए रेडी रहते ही हैं, सो सब आ गए.
रात को 9 बजे सब मेरे फ्लैट पर आ गए और सबने लिमिट में पीने का बोला कि घर पर कुछ बवाल ना हो!
पर मेरा मकसद रमेश को पिला कर टुन्न करना था कि वह रात में घर भी ना जा सके और यहीं सो जाए.
मैंने वैसा ही किया.
मैंने उसकी ड्रिंक में वोडका और व्हिस्की बियर साथ मिक्स करके कॉकटेल बना कर पिला दी.
रात हुई तो करीब 11 बजे सब लोग उठ कर जाने लगे, पर रमेश को दिक्कत होने लगी.
वह वाशरूम गया और उधर वोमिट करने लगा.
मैंने सबको जाने के लिए कह दिया और कह दिया- मैं सब संभाल लूँगा, आप लोग घर चले जाओ. इसको यहीं सुला लूँगा.
फिर रमेश वाशरूम से बाहर निकला तो उसकी हालत ख़राब थी.
मैंने उसको रूम के बेड पर सुला दिया और बाहर हॉल में इंतजार करने लगा.
कुछ टाइम बाद उसके फ़ोन पर रेखा के कॉल आने लगे.
कोई 3-4 कॉल के बाद मैंने अन्दर जाकर उसकी जेब से फ़ोन निकाल कर उठाया और रेखा को पूरा मामला बता दिया.
वह गुस्से में बड़बड़ाने लगी और उसे गाली देने लगी.
फिर उसने कहा- मैं उसे लेने तुम्हारे फ्लैट पर ही आ रही हूँ. पता भेज दो!
मैं तो खुद भी यही चाह रहा था; मैंने उसे फ्लैट की लोकेशन भेज दी.
थोड़ी देर में बेल बजी और रेखा अन्दर आयी.
उसने ब्लैक साड़ी पहनी थी, जिसका स्लीवलैस ब्लाउज था.
साली क्या ग़दर माल दिख रही थी!
रेखा- कहां है रमेश?
मैं- मैंने उसको अन्दर रूम में बेड पर लिटा दिया है. वह अभी इतने होश में नहीं है कि तुम्हारे साथ जा सके!
फिर रेखा रूम में गयी और रमेश को उठाने की कोशिश करने लगी, पर रमेश नशे में धुत था.
मैं- थोड़ी देर रुको, उसका नशा अभी एक घंटे में थोड़ा उतर जाएगा, फिर मैं उसको घर तक छोड़ दूंगा.
वह कुछ नहीं बोली.
फिर हम दोनों हॉल में पड़े सोफे पर आ गए, जहां दारू की बोतल आदि सारा सामान पड़ा था.
रेखा- तुम लोग बस दारू पी कर जलसे करो … और हम घर पर सब काम करें!
मैं- तो तुम भी एकाध पैग ले लो!
रेखा- अरे मैं ऐसा कह रही हूँ कि दारू पियो, पर ऐसी भी नहीं कि कुछ पता ही न रहे कि किस हाल में हो!
मैं- हो जाता है … लड़के दो काम अपने मूड के हिसाब से करते हैं. एक दारू … जब पीने बैठे, तो मूड के हिसाब से पीते हैं. कभी ज्यादा हो जाती है … और दूसरा … खैर छोड़ो उसे … चलें अभी .. या पैग लेना है?
वह बोली- चलो बनाओ.
फिर मैंने दो पैग बनाए. एक रेखा को दे दिया और दूसरा मैंने ले लिया.
हम दोनों साथ में पीने लगे.
फिर अचानक वह बोली- ह्म्म्म … एक तो दारू का बताया और दूसरा?
मैं- क्या दूसरा?
रेखा- तुमने ही तो कहा है ना कि लड़के दो काम अपने मूड के हिसाब से करते हैं!
मैं- अभी क्या बोलूँ यार … तुम खुद समझदार हो, खुद ही समझ जाओ न!
रेखा- अरे मुझे कैसे पता, लड़कों का मूड क्या होता है और वे क्या करते हैं? तुम ही बोलो न!
मैं बिंदास बोल उठा- चुदाई.
यह सुनते वह चुप हो गई और कुछ नहीं बोली… बस मुझे देखने लगी.
फिर उसने अपना पूरा पैग एक सिप में खत्म कर दिया और सोफे पर टिक कर बैठ गई.
गिलास उसके हाथ में ही था.
फिर वह थोड़ा सा झुकी और गिलास को उसने टेबल पर रख दिया.
वह फिर से बैठने लगी, मगर इस बार बैठते उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया था.
उसने उसे ऐसे ही ढुलका रहने दिया.
मुझे उसके मस्त रसभरे बूब्स दिखने लगे.
क्या मस्त गोल गोल दूध थे उसके, लग रहा था कि बस अभी हाथ बढ़ा कर निचोड़ लूं उसके मम्मों को!
रेखा- वह कैसे? चुदाई कैसे मूड के हिसाब से करते हैं? लड़के तो बस ताक में ही रहते हैं कि जो भी चूत दे, उसको पेल दो!
उसने इतना खुल कर कहा, तो मैं हंसते हुए बोला- क्या करें अभी … लंड और चूत का रिश्ता ही ऐसा है!
वह भी खिलखिला कर हंसने लगी और उसने हंसते हंसते ही अपना सर मेरे कंधे पर रख दिया.
हम दोनों एक दूसरे के बहुत करीब हो गए. उसके बूब्स मेरे हाथ पर दब रहे थे.
मैंने सोचा कि अभी भी कुछ नहीं किया तो मैं ही चूतिया कहलाऊंगा!
मैंने उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और उसकी आंखों में अन्दर तक झांकने लगा.
हम दोनों शांत थे.
कुछ सेकण्ड्स के लिए एक दूसरे की आंखों को देखने लगे.
फिर मैंने अपने होंठों से उसके चेहरे को चूमा, उसने कुछ नहीं कहा.
अब मैं उसके होंठों को चूमने लगा.
हम दोनों का दिल तेज़ तेज़ धड़कने लगा. दोनों के लिए यह पहला अनुभव था.
फिर मैंने उसको कसके गले से लगाया और एक दूसरे को महसूस करने लगे.
अब हम दोनों ऐसे शांत हो गए मानो हमारे दिलों को मन चाहा मिल गया हो!
फिर मैं उसको किस करने लगा.
धीरे धीरे उसने भी अपनी उत्तेजना जताते हुए किस करने में सहयोग करना शुरू कर दिया.
बल्कि वह खुद मेरे होंठों को खींचने लगी और अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल दी.
मैं निहाल हो गया और ऐसे ही एक दूसरे की जीभ को चूसते, किस करते करते मैंने उसको सोफे पर गिरा दिया और उसके ऊपर लेट गया.
उसकी तड़प व मेरी चुदाई की हवस इतनी ज्यादा बढ़ गयी थी कि क्या ही कहूँ.
ऊपर से दारू का नशा, जिससे चलते दोनों को कुछ दूसरा सूझ ही नहीं रहा था.
वह अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को पकड़ कर अपनी चूत पर ऐसे खींच रही थी, जैसे मुझे पूरा का पूरा अपनी चूत में घुसेड़ लेगी.
मैं उसके मस्त मुलायम मम्मों को जोर जोर से दबाते हुए इतनी गहरी किस करने में लगा था मानो अभी उसके मुँह में समा जाऊंगा!
समय कम होने के कारण हम दोनों ने झट से अपने अपने कपड़े निकाल दिए और फिर से वैसे ही सोफे पर लेट कर एक दूसरे को किस करने लगे.
इस बार हम दोनों एक दूसरे के नग्न जिस्म को महसूस कर रहे थे.
मेरा लंड एकदम टाइट होकर उसकी चूत को टच करते हुए उसकी चूत को गीली करने लगा था.
लंड चूत की नमी को महसूस करके हम दोनों और ज्यादा चुदासे होने लगे.
उसकी चूत, मेरे लंड की गर्मी का अहसास पाकर मचलने लगी.
रेखा अपनी गांड हिलाती हुई चूत को लंड पर रगड़ने लगी.
हम दोनों पूरी तरह से उत्तेजित हो गए थे.
वह अपने दोनों हाथों से मेरी गांड सहला रही थी तो कभी दोनों हाथों से गांड को अपनी चूत की ओर खींच दे रही थी.
मैं भी उसके मस्त रसीले मम्मों से खेलने में सब भूल गया था.
क्या मस्त बबले थे साली के … चूस चूस कर मस्त लाल टमाटर जैसे कर दिए थे मैंने!
सच में क्या मज़ा आ रहा था यार … जब दोनों हाथों से मैं उसके चूचे मसल रहा था, साथ में दोनों गहरी किस कर रहे थे और उसकी गीली गर्म चूत पर मेरा लंड मस्त होकर रगड़ मार रहा था तो क्या ही कहूँ भी … वह सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है, उसे शब्दों में नहीं लिख सकता हूँ!
उसका अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को अपनी ओर खींचना एक अलग ही सुख दे रहा था.
उस वक्त बहुत ही ज्यादा उत्तेजित माहौल बन गया था, ऊपर से दारू की मदहोशी की वजह से दोनों भूल गए थे कि कौन क्या कर रहा है.
हम दोनों बस उस मोमेंट को एन्जॉय कर रहे थे.
फिर उसके होंठों को छोड़ कर मैंने उसके गले से लेकर दोनों दूध के बीच में से चूमते हुए उसके पेट को चूमने लगा.
फिर सरकते हुए मैं उसकी चूत के करीब आ गया.
पहले तो कुछ सेकंड मैंने चूत को देखा. उसकी रसीली चूत बहने लगी थी.
फिर दिल ओ जान से मैं उसकी चूत को चाटने चूसने में लग गया.
उसकी कामुक सिसकारियां निकलने लगीं और वह मेरे सर को पकड़ कर अपनी चूत में दबाने लगी.
साथ ही उसने बाजू में रखी बोतल उठाई और उसमें से दो घूंट नीट ही खींच कर मुँह बनाने लगी.
मैंने मुँह चूत से हटा कर उसे देखा, तो उसने दारू अपनी चूत पर टपकाई और बोली- लो पियो!
मैं चूत को चाट कर दारू पीने लगा.
अब कभी मैं रेखा की चूत के ऊपर वाले हिस्से को चूसने लगता तो कभी जीभ को मोड़ कर टाइट करके चूत के अन्दर पेल देता और रसीली चूत के रस का स्वाद लेने लगता.
ऐसा करते करते वह एक बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और अपने दोनों हाथों से मेरे बाल पकड़ कर मेरे मुँह को अपनी चूत में ऐसे दबाने लगी, जैसे वह उसकी चूत नहीं, उसका मुँह था और वह मुझे पूरी निगल जाएगी!
कुछ देर बाद हम दोनों खुद को संभालते हुए एक दूसरे से आंखें मिलाने लगे.
मैं समझ गया था कि हम दोनों अभी चुदाई के लिए चरम सीमा पर पहुंच गए हैं और अभी लंड और चूत का मिलाप का टाइम आ गया है.
मैंने उसको सोफे पर ऐसे लिटाया कि उसका एक पैर सोफे के नीचे लटक गया और दूसरा पैर सोफे के सपोर्ट पर सैट कर दिया.
इससे उसकी रसीली चूत खुल कर चौड़ी हो गयी.
मैं अपने लंड को एक हाथ से पकड़ कर लंड के टोपे को चूत पर ऊपर नीचे करने लगा.
फिर सुपारे को चूत के मुँह पर रख कर हल्का सा धक्का दे दिया.
सुपारा चूत में घुस गया और हम दोनों की हल्की सी अहह निकल गयी.
वैसे रफ़ चुदाई मुझे पसंद है पर आज प्यार से और धीरे धीरे से चुदाई करने का मन था, तो मैंने अपना लंड उसकी बुर में एकदम से नहीं घुसाया.
उसको किस करते करते हल्के हल्के धक्के देते हुए मैंने अपने पूरे लंड को उसकी रसीली चूत में समां जाने दिया.
फिर अपने दोनों घुटनों को अच्छे से सैट करके मैं अपनी गांड को आगे पीछे करने लगा.
अब मैं मस्ती से अपने लंड को आधा बाहर निकाल कर धक्के लगाते हुए रेखा भाभी की चूत को चोदने लगा था.
वह भी अपनी गांड उठाती हुई लंड से सुख लेने लगी.
देखते ही देखते हम दोनों की प्यार भरी चुदाई चल पड़ी.
थोड़े टाइम बाद उसने मुझे पुश करते हुए उठने का संकेत दिया.
मैं सोफे पर सीधा हो गया. वह भी बैठ गई.
वह नीचे फर्श पर बैठ गई और मेरे दोनों पैरों खोल कर मेरा लंड चूसने लगी.
वाह क्या मस्त लंड चूस रही थी, साली जब भी लंड को पूरा अन्दर तक निगलती थी, तो उस वक्त वह अपनी जीभ को बाहर निकाल कर मेरे गोटों को सहला देती.
उफ़ … क्या मस्त लग रहा था यार … सच में गजब की चुसक्कड़ रांड थी वह!
फिर मैंने अपने दोनों हाथों से उसके सर को पकड़ कर ऊपर को खींचा और उसको लंड पर बैठने को कहा.
वह कोई पोर्न स्टार की तरह मस्ती से अपने एक हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत पर सैट करती हुई उस पर बैठती चली गयी.
उसने पूरा लंड अपनी चूत में निगल लिया और अपनी गांड को मस्ती से ऊपर नीचे करने लगी.
हम दोनों की चुदाई वापस से स्टार्ट हो गयी.
जब भी रेखा भाभी अपनी गांड को मेरे लौड़े पर नीचे धकेलती, अपने दोनों मस्त गोल गोल सॉफ्ट चूतड़ों से मेरे लंड को भींच देती!
उफ्फ … क्या मस्त लग रहा था.
मैं अपने दोनों हाथों से उसके दूध निचोड़ रहा था.
कभी लेफ्ट तो कभी राइट को कस कसके चूसने लगता.
रोमांटिक भाभी फक करने में गजब फीलिंग आ रही थी भाइयो.
बस ऐसे ही 7-8 मिनट तक सेक्स करते उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और हम दोनों एक साथ झड़ गए.
फिर दोनों ने अपने आपको संभाला और कपड़े पहने.
मैं दोस्त को देखने गया कि वह अभी कैसा है!
वह घोड़े बेच कर सो रहा था.
मैंने रेखा से कहा- तुम घर जाओ, अगली सुबह यह खुद ही आ जाएगा!
रेखा मुस्कुरा दी और बोली- यह फ्लैट किसका है?
मैंने उसकी बात समझते हुए कहा- तुम्हारे लिए हमेशा खुला है.
वह मुझसे लिपट गई और चुंबन लेकर चली गई.
तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी रोमांटिक भाभी फक स्टोरी?
प्लीज मेल व कमेंट करके मुझे जरूर बताएं.
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