हॉट रोमांस विद फ्रेंड वाइफ कहानी में एक बार चाची के साथ उनकी पड़ोसन भाभी मेरे घर आई. उसका पति मेरा कॉलेज का दोस्त था. मैं उसे देखता ही रह गया.
दोस्तो, जैसा कि आपने मेरी पिछली सेक्स कहानी
जिम में सैट हुयी भाभी को जम कर चोदा
पढ़ी और आप सभी के बहुत सारे ईमेल भी आए … उसके लिए आप सभी का बहुत आभार.
आपकी प्रतिक्रियाओं से उत्साहित होकर आज मैं अपनी एक और सत्य घटना पर आधारित सेक्स कहानी लिख रहा हूँ.
आशा है आप सभी को पसंद आएगी.
यह हॉट रोमांस विद फ्रेंड वाइफ कहानी एक भाभी के साथ की है. उनसे कैसे मेरी नज़दीकियां बढ़ीं और कैसे मैंने उन्हें चोदा. आज मैं उस सबके बारे में आपको सुना रहा हूँ.
वैसे तो आप सभी मुझे जानते ही हैं. तब भी नए पाठकों के लिए लिखना चाहूँगा.
मेरा नाम पंकज है. मैं गुजरात के वलसाड जिले में रहता हूँ. मेरी कद-काठी तो एक सामान्य भारतीय के जितनी ही है, पर मेरा लंड काफी लम्बा और खीरे जैसा मोटा है.
मैं अपने लंड की हफ्ते में 3-4 बार एक विशेष तेल से मालिश करता हूँ, जिस वजह से मेरे लंड के स्नायु थोड़े ज्यादा कड़क और बड़े हो गए हैं.
मेरा लंड चुदाई के वक्त एक सांड जैसा लंड हो जाता है और इससे चुदने वाली लड़की मुझसे छूटने के लिए तड़फ उठती है.
कहने का आशय यह कि यह एक काफी अच्छा हथियार है.
अब कहानी के बारे में जानते हैं.
हमारी फैमिली में कजिन भाई की शादी थी, तो उसके लिए चाचा चाची मेरे घर पर इन्विटेशन देने आने वाले थे.
उस वक्त मैं अपने काम में व्यस्त था.
तभी दरवाजे की घंटी बजी.
मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने एक मस्त चिकनी लड़की खड़ी थी.
मैं उसको देखता ही रह गया और मेरा मुँह किसी चूतिया की तरह खुला रह गया.
इतने में पीछे से चाची, चाचा से बातें करती हुई आईं.
चाची ने मुझे दरवाजे पर देखा और वे बोलीं- अरे पंकज कैसे हो?
मैं- चाची जी नमस्ते … मैं एकदम ठीक हूँ. आइए आप सब घर के अन्दर आइए न!
वह लड़की शर्माती हुयी चाचा चाची के साथ अन्दर आ गयी.
अन्दर आते समय हम दोनों की नजरें एक दूसरे पर टिक गयी थीं और दो मिनट के लिए हम दोनों की स्थिति एकदम अलग सी हो गई थी.
वह कहते हैं न कि आप अपनी फीलिंग को कितना भी छुपाना चाहो, पर आपकी आंखें सब बता देती हैं.
वही हम दोनों के बीच में हुआ.
जैसे हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में पढ़ लिया था कि हमारे अन्दर चुदाई को लेकर कितनी चुल्ल और तड़प है. मानो एक दूसरे को एक दूसरे के लिए सैट ही कर लिया था.
फिर चाची ने उस लड़की का परिचय देते हुए बताया कि यह रेखा है!
मैंने सवालिया नजरों से चाची की तरफ देखा कि रेखा कौन!
चाची- पंकज, तुम्हें तुम्हारा दोस्त रमेश याद है, जो मेरी बिल्डिंग में रहता है. यह उसी की बीवी रेखा है!
यह जानते ही मैंने स्माइल करते हुए रेखा को भाभी कह कर हैलो किया.
मैं- कैसे हो आप भाभी … और रमेश कैसा है?
रेखा- मैं एकदम बढ़िया हूँ और रमेश भी अच्छे हैं.
मैं- बहुत टाइम हुआ उससे मिले हुए … स्कूल में हम दोनों साथ जाया करते थे. क्या करते हैं वे अभी?
रेखा- अभी तो वे कंसट्रक्शन के कामकाज में हैं. उनके अभी 2-3 प्रोजेक्ट चल रहे हैं.
मैं सोचने लगा कि रमेश एक भोंदू टाइप लड़का था.
स्कूल में सब उसका मज़ाक उड़ाया करते थे.
पर स्कूल जाने का रास्ता एक ही था और वह चाचा चाची की बिल्डिंग में रहता था तो उससे दोस्ती थी.
साले उस जैसे चूतिये को ऐसी कड़क बवाल बीवी मिली, यह देख कर मेरी इतनी जली कि क्या ही बताऊं!
खैर … फिर कुछ देर बाद सब लोग चले गए.
चाची ने मुझसे शादी के सारे काम संभालने के लिए उनके घर आने के लिए कहा तो मैंने झट से हां कह दिया था क्योंकि मुझे रेखा की जवानी पसंद आ गई थी.
दो हफ्ते में ही शादी थी, तो मेरा चाची के घर आना जाना शुरू हो गया था.
चाचा चाची के बहुत सारे काम थे तो बाजार से कुछ लाना, डेकोरेशन के लिए फिक्स करना, उस सब में मैं बिजी हो गया.
मेरे साथ में रेखा भी चाची के घर पर ही होती थी.
वह मेहमानों के लिए खाना बनाने में हेल्प करने आ जाती थी और उसके अलावा भी बाकी सब कामों में वह चाची का हाथ बंटाने में लगी रहती थी.
इन सबके बीच हमारी काफी बार मुलाकात होने लगी.
एक दूसरे को स्माइल देना और बातें करना काफी बढ़ गया था जिससे हम दोनों एक दूसरे के काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे.
एक दो बार उसके पति से भी मुलाकात हुई थी लेकिन मुझे उस झांटू आदमी से कोई लेना देना नहीं था.
मुझे तो बस उसकी बीवी की लेनी थी.
फिर एक दिन मैं चाची के घर बैठा था और काम-काज की वजह से थका हुआ था.
मैंने काम वाली को चाय बनाने के लिए कहा.
पर मुझे पता नहीं था कि रेखा भी किचन में है.
मैं डाइनिंग टेबल पर जाकर बैठ गया था और उतने में वह चाय लेकर आ रही थी.
उस वक्त रेखा ने टाइट लैगिंग्स और स्लीवलैस टाइट कुर्ती पहनी हुई थी.
उसकी इस कुर्ती का गला काफी गहरा था और लोकट स्टाइल में था.
उसके चूचों की दरार बड़ी ही मस्त दिख रही थी.
बहन की लवड़ी ने दुपट्टा भी नहीं डाला था, तो मेरे लौड़े ने ठुमकना शुरू कर दिया था.
उधर वह भी साली रांड के जैसे ठुमके लगाती हुई चल रही थी.
मैं अपने होंठों को दांतों से दबाए हुए मन में उसको चोदने के विचार से उत्तेजित हो रहा था.
मेरा मन कर रहा था कि साली के सारे कपड़े फाड़ दूँ और उसकी गर्दन पकड़ कर झुका कर चुत में लंड पेल दूँ!
मैं उसे चोदने के ख्वाब देखने लगा था और वह मुझे अपनी जवानी का जाम पिला रही थी.
जब तक उसने चाय टेबल पर नहीं रखी, तब तक मेरी नजरें उसकी फिगर पर ही टिकी रहीं.
उसने भी मेरी नजरों को भाँप और जान लिया था कि मैं क्या सोच रहा हूँ.
यही सोच कर उसने चाय का कप टेबल पर रखते टाइम थोड़ा झुक कर कहा- कहां खोये हुए हो?
मैं अपने आपको संभालते हुए कहा- अरे कुछ नहीं, बस देख रहा था कि रमेश कितना भाग्यशाली है!
रेखा मुस्कुरा कर बोली- क्यों?
मैं- ऐसी पटाखा बीवी किसी की हो, तो उसे भाग्यशाली ही कहेंगे ना!
यह कह कर मैंने रेखा को आंख मार दी.
रेखा हंस कर बोली- कुछ भी … लगता है आज तुम्हें बहुत मस्ती चढ़ी है!
मैं चाय पीते पीते बोला- मस्ती तो नहीं, पर नशा बहुत चढ़ा है!
रेखा सवालिया नजरों से मुझे देखती हुई बोली- क्या, किस का नशा? क्या पी कर आए हो?
मैं- कुछ भी तो नहीं पिया है यार, मैं तो इस चाय की बात कर रहा हूँ. बहुत मस्त बनी है!
फिर रेखा के गले से उसके बवाल जैसे मम्मों को आंखों से चोदते हुए कहा- कौन से दूध की बनायी है चाय, कुछ अलग ही नशा … यानि स्वाद आ रहा है! लगता है किसी का बहुत गाढ़ा दूध डाला हुआ है!
रेखा- क्या बोल रहे हो? मैंने तो जो फ्रिज में अमूल ताज़ा दूध रखा था, उससे ही बनाई है!
मैं- अच्छा तो फिर यह तुम्हारे हाथों का कमाल हो सकता है.
मेरी इस बात पर रेखा ने एक स्माइल दे दी और मेरी हिम्मत बढ़ गयी कि चलो मौका मिल गया है इसके साथ फ़्लर्ट करने का … तो आज मस्ती कर ही लेता हूँ!
मैं- और क्या क्या कमाल करती हो इन हाथों से?
रेखा सब कुछ समझती हुई बोली- क्या बोल रहे हो … मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा … साफ़ साफ़ बोलो न!
मैं- अरे ऐसे जादुई हाथों से ऐसी नशीली चाय बनाई है, तो ऐसे जादुई हाथ से और क्या क्या करतब दिखा लेती हो?
रेखा- धत … आज परेशान करने के लिए मैं ही मिली थी क्या?
मैं- अरे मैं कहां परेशान कर रहा हूँ, परेशान तो रमेश करता होगा … रात को!
मैंने रात को शब्द थोड़ा धीमी आवाज से कहा था.
रेखा तनिक उखड़े स्वर में बोली- वे क्यों मुझे परेशान करेंगे? उनको अपने काम और पीने से टाइम मिले तब ना!
यह कह कर वह थोडी उदास हो गयी.
मैं- मतलब?
रेखा- कुछ नहीं, आप चाय पियो … मुझे अभी बहुत काम है … मैं चलती हूँ!
फिर जैसे ही भाभी उठ कर जाने लगी.
तो उसकी मटकती गांड देख कर पता नहीं मैं अपने आपको रोक नहीं पाया.
मैंने न जाने किस झौंक में कह दिया- अरे भाभी, कहां जा रही हो, केला (जो डाइनिंग टेबल पर रखा था) चूसोगी?
मेरे मुँह से यह निकल तो गया था मगर अगले ही पल मैं सोचने लगा था कि यह क्या कह दिया, अभी मेरी गांड लगेगी!
रेखा- अरे पागल … केला चूसा थोड़ी जाता है, इसे तो खाया जाता है!
मैं समझ गया कि रेखा ने भी कुछ दोअर्थी बात की है.
मैंने थोड़ी सी हिम्मत करते हुए कहा- अरे यह खास केला है … जो चूसा भी जाता है और लिया भी जाता है!
रेखा- कहां है खास वाला?
बस मैंने झट से अपने एक हाथ से अपने लंड को खुजाया और उसे दिखाया.
मैं- कभी टाइम मिलेगा तो अकेले में दिखा दूंगा!
रेखा सब समझ गई और बोली- बहुत शरारती हो गए हो, लगता है चाची से शिकायत करनी पड़ेगी!
फिर वह अपनी मस्त गांड ठुमकाती हुई किचन में चली गयी और मैं अपना लंड खुजाता रह गया.
पर मैंने भी सोच लिया था कि अब इसको अपना केला चुसवा कर ही रहूँगा.
इस घटना के बाद अब मैं जहां भी मौका पाता, उसको छेड़ दिया करता.
कभी एक साथ खड़े कुछ कर रहे होते, तो मैं अपनी कोहनी से उसके बूब्स टच कर देता, पीछे से उसकी गांड पर अपनी गांड रगड़ देता.
वह भी कोई आपत्ति नहीं दिखाती … बल्कि हंस कर खुद भी मज़ा लेने लगी.
कभी कभी तो वह खुद अपनी गांड मेरी गांड से रगड़ देती या मेरे जिस्म से अपनी चूचियां रगड़ देती.
ऐसे ही एक दिन शादी का कोई प्रोग्राम चल रहा था, तो सब लोग खड़े थे.
रमेश और रेखा भी खड़े हुए थे.
मैं उन दोनों के पीछे खड़ा था, पर उस दिन मैं रमेश की वजह से कुछ खास नहीं कर पा रहा था.
तभी रमेश को एक दूसरे दोस्त ने आवाज लगायी तो वह थोड़ा आगे जाकर उससे बात करने लगा.
रेखा वहीं खड़ी थी और मैं उसके पीछे अपना खड़ा लंड लिए जुगाड़ देख रहा था.
जैसे ही रमेश हटा तो मैंने मौके का फायदा उठाते हुए रेखा के थोड़ा और करीब हो गया.
मैंने इधर उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा है … और बस रेखा की गुब्बारे जैसी उठी गांड के ऊपर से ही अपने लंड को रगड़ दिया.
मैंने लौड़े को रगड़ा और झट से पीछे को हट गया.
उसने पीछे मुड़ कर गुस्से से देखा, पर मुझे देखते उसने स्माइल कर दी और कुछ नहीं बोली.
वह उसी तरह खड़ी रही.
मैंने ऐसे ही लगातार 4-5 बार किया तो हॉट रोमांस विद फ्रेंड वाइफ के कारण मेरा लंड और ज्यादा टाइट हो गया.
लंड जींस के अन्दर ही कड़क हो रहा था लेकिन उसकी सख्ती के कारण हल्का सा टच भी किसी को समझ आ सकता था.
रेखा तो समझ ही रही थी कि मैं उसकी गांड में क्या रगड़ रहा हूँ!
अब उसको भी मज़ा आने लगा और जैसे वह भी मेरा साथ दे रही हो, लंड लगते ही वह अपनी गांड को थोड़ी थोड़ी हिलाने लगती.
मैं समझ गया कि इसकी चुत भी भभक रही है.
दोस्तो, जैसा कि आप खुद ही समझ गए होंगे कि रेखा भाभी मुझसे सैट हो गई थी और अब उसकी चुदाई होना शेष रह गई थी.
मैं अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग में आपको बताऊंगा कि मैंने रसीली भाभी की रसीली चुत को कैसे चोदा.
आपको कैसी लग रही है यह हॉट रोमांस विद फ्रेंड वाइफ कहानी, प्लीज जरूर बताएं.
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