पड़ोसन आंटी को पटाकर चुदाई का सुख दिया

Views: 139 Category: Jija-Sali By vickycool11524 Published: July 16, 2026 📖 9 min read
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गरम आंटी सेक्स कहानी में मेरे घर के सामने एक अंकल आंटी किराए पर आये. आंटी मस्त माल थी और अंकल हमेशा नशे में रहते थे. मैंने आंटी को कैसे पटाया?

मित्रो, मैं विक्की (नाम बदला हुआ) अंबाला जिले का रहने वाला हूँ.

मैं आपको अपने पड़ोस में रहने वाली आंटी की सेक्स कहानी सुना रहा हूँ.
आंटी अपने शराबी पति से परेशान थीं.
उन्होंने अपनी वासना को बुझाने के लिए घर के काम में मदद करने के लिए बहाने से मुझे बुलाया और मुझसे चुदवाया. उन्होंने मुझे भी चुदाई का पूरा सुख दिया.

गरम आंटी सेक्स कहानी में आइए जानते हैं कि यह सब कैसे हुआ.

हमारे पड़ोस में एक परिवार रहने आया, जिसमें पति-पत्नी ही थे.
उनका बेटा अभी हाल में ही विदेश में जॉब करने चला गया है.

यहां बस पति-पत्नी ही रहने आए थे और वे दोनों हमारे घर के सामने रहने लगे थे.

मैंने अक्सर देखा था कि उन दोनों में अक्सर लड़ाई-झगड़ा होता रहता था.
मित्रो, मैं इस सेक्स कहानी की अभिनेत्री यानि अपनी पड़ोसन आंटी के बारे में बता देता हूँ.

उन आंटी का नाम सुनीता (नाम बदला हुआ) था.
वे उम्र में 42 साल की थीं लेकिन दिखने में 32 से ज्यादा की नहीं लगती थीं.

आंटी एक भरी हुई देह की सुंदर महिला थीं.
उनकी चूचियों का साइज़ 38 इंच, कमर 34 की और चूतड़ों का साइज़ करीब 40 इंच का था.

आंटी का रंग खुलता गेहुंआ था.
उनकी बाहर निकली हुई गांड किसी का भी लंड खड़ा कर देने में एकदम सक्षम थी.

मैं अक्सर उनकी गांड देखकर अपना लंड हिला लिया करता था.

तो हुआ यूँ कि एक बार आंटी को मार्केट सामान लेने जाना था.
अंकल जी तो हमेशा पिए पड़े रहते थे, सो उस वक्त भी वे पीकर पड़े थे.

आंटी घर के बाहर रिक्शा का इंतज़ार कर रही थीं.
उन्हें सामान लाने के लिए मार्केट जाना था.

उसी वक्त मुझे भी मार्केट जाना था तो मैं जाने लगा.
आंटी ने मुझे देखा तो बोलीं- क्या तुम मुझे मार्केट तक छोड़ सकते हो?

उनकी बात सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटा कि आज तो मस्त माल बाइक पर बैठने को मिल रहा है.

मैंने झट से बोल दिया- हां जी मैं भी मार्केट ही जा रहा हूँ. आप साथ चलिए.

आंटी मेरी बाइक पर पीछे बैठ गईं और हम दोनों मार्केट जाने लगे.
रास्ते में मैं जानबूझ कर ब्रेक लगा रहा था, जिससे आंटी की मोटी-मोटी चूचियां मेरी पीठ पर टच हो रही थीं.

उनकी मुलायम चूचियों की रगड़ से मेरा लंड खड़ा होने लगा.
मैंने ध्यान बाइक के साइड वाले शीशे में दिया तो आंटी हल्की-हल्की स्माइल कर रही थीं और मेरे साथ कुछ ज्यादा सटकर बैठ गई थीं.

वे अपनी चूचियां मेरी पीठ पर दबा रही थीं.
मैं भी मजे लेता हुआ चलता रहा.

फिर आंटी को जहां से सामान लेना था, वहां उन्होंने मुझे रुकने का कहा.
आंटी बोलीं- विक्की अगर तुम्हारे पास समय हो तो मुझे वापसी में साथ में लेते जाना. यहां से घर जाने का साधन जल्दी से नहीं मिलता.

मैंने झट से हां कर दी.

मैं कुछ काम की कह कर चला गया और आगे जाकर एक वाइन शॉप से बियर का टिन लेकर पान के खोके के पास आ गया.

उधर मैंने रुमाल से बियर का टिन कवर किया और पीने लगा.
साथ ही एक सिगरेट लेकर मजा लेते हुए आंटी के मम्मों के स्पर्श को याद करने लगा.
उनकी स्पंजी चूचियों की छुअन याद करके मेरा लंड कड़क हो गया था.

कुछ देर में बियर का टिन खत्म हो गया और मैं उसे कचड़े के डिब्बे में डाल कर एक मिंट वाली टॉफी खाकर वापस आने लगा.

आंटी का काम हो गया था तो वे मेरे आने का ही वेट कर रही थीं.
मैंने बियर के हल्के न.शे में आंटी को देखा तो वे मुझे और भी ज्यादा सेक्सी माल लगने लगी थीं.

हम दोनों घर वापस आने लगे.

फिर वापसी में फिर से वही सब चलने लगा.
आंटी की रसभरी चूचियां मेरी पीठ से रगड़ खाने लगीं.

इस बार तो मुझे बियर का सुरूर था तो मैं मस्ती से अपनी पीठ को पीछे करके मजा ले रहा था और आंटी भी शायद कुछ ज्यादा ही चिपक कर बैठी थीं, तो मेरे लंड में सुरसुरी होने लगी थी.

मैं बार बार ब्रेक लगाता रहा और आंटी मेरे से बात करती हुई अपनी चूचियों से मुझे मस्त करती रहीं.
हम दोनों कब घर आ गए, पता ही नहीं चला.

जैसे ही मैं आंटी को उनके घर उतार कर जाने लगा, आंटी ने बोला- विक्की, चाय तो पीकर जाओ!
पहले तो मैंने नाटक किया कि नहीं.
लेकिन मैं अन्दर से चाहता था आंटी के साथ अकेले में समय बिताने को मिले.
मैंने हां कर दी और अन्दर घर में चले गए.

अंकल शायद नहीं थे तो मैंने पूछा- अंकल कहां हैं?
तो आंटी गुस्से में बोलीं- गए होंगे पीने … और कुछ काम कहां है उनको?

फिर आंटी चाय लेकर आईं और टेबल पर रखने लगीं.

मुझे उनके झूलते हुए चूचों की झलक मिली और मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैं अपने लंड को एडजस्ट करने लगा तो आंटी का भी ध्यान मेरे खड़े लंड पर चला गया.

उन्होंने मुझे एक नॉटी स्माइल दे दी.

आंटी बोलीं- कोई गर्लफ्रेंड बनाई है या नहीं?
मैं बोला- नहीं आंटी जी.

तो आंटी बोलीं- क्यों? अभी तक हाथ से काम चला रहे हो?
यह कह कर वे हंसने लगीं.

मैं बोला- आंटी मैं कुछ समझा नहीं.
आंटी कुछ नहीं बोलीं, बस हंसने लगीं.

फिर आंटी ने मुझे शुक्रिया कहा कि मैंने उनकी मदद की.

‘तुम्हारे अंकल तो मेरा बिल्कुल ध्यान नहीं रखते. सिर्फ दारू से ही प्यार करते हैं. मेरी तो कोई फिक्र ही नहीं है.’
इतना कहकर आंटी रोने लगीं.

मैं उठकर आंटी के पास बैठ गया और उन्हें गले लगाकर चुप करने लगा.

मैंने बोला- कोई बात नहीं आंटी, मैं हूँ ना … आप मुझे बता दिया कीजिए, मैं आपकी हेल्प कर दिया करूंगा!
आंटी बोलीं- बेटा तुम कैसे मेरी हेल्प कर सकते हो?

मैंने कहा- अरे आप एक बार बोलकर तो देखो!
यह सुनते ही आंटी ने मुझे कसके गले लगा लिया.

मैं भी मौका देखकर आंटी की कमर पर हाथ घुमाने लगा और उनकी गर्दन पर चुम्बन करने लगा.
आंटी गर्म होने लगीं.

उनकी मादक आहें निकलने लगीं- आह … आहम्म्म …
उनकी आवाजों से साफ लग रहा था कि आंटी बहुत प्यासी हैं.

आंटी ने तभी मेरे होंठों से अपने होंठों को लगा दिया और हम एक-दूसरे में खो गए.
हम एक-दूसरे की जीभ को चूसने लगे.

चुंबन के साथ ही मैंने आंटी के मोटे चूचों को दबाना शुरू कर दिया, जिससे आंटी और गर्म हो गईं.

फिर आंटी मुझे बोलीं- सिर्फ ऊपर-ऊपर से ही करना है क्या?
मैंने कहा- आंटी जी, ये तो सिर्फ शुरुआत है … आगे-आगे देखना कि क्या क्या होता है … आप तो बस मजा लो!

आंटी बोलीं- मुझे सिर्फ सुनीता बोलो, आंटी नहीं.
मैंने कहा- सुनीता मेरी जान मैं कब से तुम्हें चोदना चाहता था. आज तो मैं तुम्हारी चूत का भोसड़ा बनाकर ही दम लूँगा!
आंटी बोलीं- हां बुझा दे मेरी प्यास, बहुत सालों से प्यासी हूँ मैं!

फिर मैंने उनके चूचों को जोर से दबाना शुरू कर दिया.
आंटी की ‘आआ ह्ह्ह … ‘ निकल गई.

वे बोलीं- आराम से दबाओ मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ.
मैंने कहा- कहीं भाग गईं, तो मैं किसे चोदूंगा?

वे हंस दीं और मुझे चूमने लगीं.

मैंने आंटी की साड़ी उठाकर उनकी मोटी-मोटी जांघों पर हाथ फेरा.
मुझे ऐसा लगा जैसे मैं कोई मखमली गद्देदार चीज पर हाथ फेर रहा हूँ.

आंटी भी पूरी मस्त होने लगीं.
उनकी आहें निकलने लगीं.

वे पूरी तरह से तड़प उठी थीं.
मुझसे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

मैंने जल्दी से आंटी के कपड़े निकाले और उन्हें ब्रा-पैंटी में कर दिया.
मैंने उन्हें देखते हुए कहा- सुनीता डार्लिंग, तुम तो पूरी सिल्क स्मिता लग रही हो!
सिल्क स्मिता दक्षिण भारत की मस्त हॉट अभिनेत्री है.

वे सिल्क स्मिता का नाम सुनकर हंस दीं.
मैंने उनके पूरे जिस्म को चूमना शुरू कर दिया.

आंटी बोलीं- अपने भी कपड़े निकालो न!
मैंने बोला- आप खुद निकाल दो!

आंटी ने मेरी टी-शर्ट निकाली, फिर मेरी पैंट के साथ ही अंडरवियर निकाल कर मुझे नंगा कर दिया.

मेरा लंड देखकर आंटी की आंखें पूरी खुल गईं.
वे बोलीं- इसे देख कर तो लगता है कि आज मेरी चूत का भोसड़ा बनने वाला है!

मैंने भी आंटी को नंगी करके चूचे चूसना शुरू कर दिया. साथ में आंटी की चूत में उंगली करने लगा.
आंटी पूरी गीली हो चुकी थीं. उनकी चूत भट्टी की तरह तप रही थी.

फिर हम 69 पोजीशन में आ गए और एक-दूसरे को चूसने-चाटने लगे.

जैसे ही आंटी ने मेरा लंड मुँह में लिया, मैं आसमान में उड़ने लगा.
आंटी की चूत पर जीभ लगते ही वे भी मछली की तरह फड़फड़ाने लगीं.

फिर आंटी से सब्र नहीं हो सका.
वे अपनी टांगें फैलाकर किसी रांड के जैसे लेट गईं और बोलीं- अब डाल दो जल्दी से मेरी चुत के अन्दर … और नहीं रहा जाता!

मैंने भी ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और अपना मूसल उनकी चूत में झटके के साथ घुसेड़ दिया.
आंटी की चूत गीली तो थी ही, मुझे लौड़े को पेलने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई.

लंड चुत में लेते ही आंटी तेज-तेज आहें भरने लगीं- ऊऊह … विक्की आआह … और जोर से चोदो अपनी सुनीता जान को … आह बड़ा मजा दे रहा है तुम्हारा लंड … आआह … ऊऊह …

लगभग 15-20 मिनट तक आंटी को चोदने के बाद मैंने पूछा- आंटी कहां निकालूँ?
आंटी बोलीं- बेटा अन्दर ही छोड़ दो बुझा दो इस निगोड़ी चूत की प्यास!

मैं झड़ गया और थककर उनके पास ही लेट गया.
आंटी के चेहरे पर संतुष्टि का भाव झलक रहा था.

फिर हमने एक राउंड और चुदाई का खेला.
इसमें मैंने अपना माल आंटी को पिलाया, जिसे आंटी चटखारे लेकर पी गईं.

हमने अब अपने-अपने कपड़े पहन लिए क्योंकि अंकल कभी भी आ सकते थे.
आंटी ने मुझसे कहा- विक्की तेरा जब भी मन हो, आ जाना और बजा लेना मेरी चूत … आज से मैं तेरी हुई!

उसके बाद मैं अपने घर आ गया.
उसके बाद मैंने आंटी की गांड मारी और उनकी मदद से उनकी बहन को भी चोदा.

आपके कमेंट्स मिलने के बाद वह सब अगली सेक्स कहानी में लिखने का सोचूँगा.

इस गरम आंटी सेक्स कहानी में मुझसे कोई गलती हुई हो तो माफ़ करना और अच्छी लगी हो … तो अपना प्यार देना.
vickycool11524@yahoo.com

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