हॉट चूत स्टोरी में एक लड़की को शादी के बाद भी पति से चुदाई का पूरा सुख नहीं मिला. उसने अपनी परेशानी अपनी दीदी को बताई. दीदी ने अपने पति को. बस जीजा अपनी साली को चोदने की फ़िराक में हो गया.
दोस्तो, मैं वृत्ति चौधरी आपको अपनी एक पाठिका प्रिया की सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
वह राजस्थान की लड़की है.
इस कहानी को आप उसकी जुबान से ही सुनें.
हैलो, मैं प्रिया … कुछ महीने पहले मेरी एक सहेली ने मुझे अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी की इस मस्त वेब साइट के बारे में बताया था.
तब से अब तक लगभग दो-तीन महीने हो गए हैं, मैं रोजाना अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी वाली साइट पर प्रकाशित हिंदी सेक्स कहानियां पढ़ रही हूं.
इधर की गर्म सेक्स कहानी पढ़कर मुझे भी लगा कि मुझे भी अपना कामुक संस्मरण लिखना चाहिए.
मैं अपनी जानकारी गोपनीय रखना चाहती हूं, इस कारण से अपनी कहानी वृत्ति चौधरी की आईडी से ही भेज रही हूं.
आप सब लोग वृत्ति चौधरी की मेल आईडी पर मेल करके जरूर बताएं कि आपको मेरी हॉट चूत स्टोरी कैसी लगी है.
भारत में शादी हो जाने के बाद लड़कियां शादीशुदा जिंदगी में व्यस्त हो जाती हैं.
उनकी सेक्स की इच्छाएं और उनका मन तो खुल कर सेक्स करने का बहुत होता है, पर आधी से ज्यादा लड़कियां असंतुष्ट रहती है.
ठीक ऐसा ही कुछ हाल मेरा भी रहा है, जो मैं आपको आगे बताऊंगी.
विदेश में सेक्स संबंधों पर बंदिश नहीं है, वहां खुलापन है तो विदेशी महिलाएं जीवन में खुलकर इन्जॉय कर लेती हैं.
वहां की महिलाएं दिन में किसी से भी चुदाई करवा लेती हैं और मर्द चाहे जिस महिला को अपनी पत्नी के सामने चोद सकता है.
महिला भी चाहे जब पति के सामने ही किसी भी मर्द से चुदाई करवा सकती है लेकिन भारत में ऐसा संभव नहीं है.
मेरी उम्र अभी 27 साल है, मेरे फिगर का साइज मस्त है.
मेरे दूध 34 इंच के हैं, कमर 30 की और मेरे चूतड़ों का नाप 36 इंच का है.
मेरी शादी बहुत जल्दी हो गई थी.
मेरे पति का नाम रमण है.
उनकी उम्र 28 साल है.
मुझे अपने पति से साथ चुदाई करवाते हुए 7 साल हो चुके हैं लेकिन अभी तक मेरी एक बार भी सही ढंग से चुदाई नहीं हुई है.
मेरे पति अभी भी दिन में मात्र एक बार ही चुदाई करते हैं और चुदाई में भी क्या कहूँ कि वे कैसी चुदाई करते हैं.
मैं उनके नीचे लेटी रहती हूं और वे ऊपर से पुल्ल पुल्ल करते हैं … बस 5 से 7 बार अन्दर बाहर करते हैं और इतने में ही उनका वीर्य निकल जाता है.
फिर दूसरी बार चाहे जितनी कोशिश कर लो, उनका चुन्नू खड़ा ही नहीं होता है.
इस तरह मेरी प्यास नहीं बुझती है.
बल्कि चुत में लंड के अन्दर बाहर होने से मेरी चुदास बहुत ज्यादा बढ़ जाती है.
उस वक्त मेरे पास लंड के नाम पर सिर्फ मोमबत्ती खीरा मूली आदि ही होता है, जिसे मैं पति से छुपा कर अपनी चुत में अन्दर कर लेती हूँ और उसी से चुत को रगड़ कर झड़ जाती हूँ.
साफ शब्दों में कहूँ तो मैं एक नामर्द से शादी करके परेशान हूँ.
उसकी कमजोरी के चक्कर में मैं कुछ कर भी नहीं सकती हूं, इसलिए खीरा मूली आदि जैसे नकली लंड पर क्रीम लगाकर उससे खुद ही अपनी चुत को चुदवा कर लंड का सुख ले लेती हूं.
न तो मेरे पति कभी मेरी टांगें कंधे पर उठाकर चोदते हैं … और न कभी अपने लौड़े की सवारी करवाते हैं.
हां वे कभी कभी घोड़ी बनाकर जरूर मुझे चोदते हैं लेकिन उसमें भी एक से दो मिनट का समय ही लेते हैं.
इस आसन में भी उन्होंने कभी भी ज्यादा देर तक चुदाई नहीं की है.
मेरा यह संस्मरण रिश्ते में मेरी बहन के पति मेरे जीजा जगदीप के साथ का है.
वे महाराष्ट्र में काम करते हैं.
यह सेक्स स्टोरी तब की है, जब मैं 22 साल की थी और मेरे जीजा की उम्र 39 वर्ष थी.
उस समय मेरी शादी हो चुकी थी.
जब मैं कुंवारी थी, तब सोचती थी कि मेरा भी एक पति होगा जो शादी के बाद मेरे साथ मस्त चुदाई करेगा.
क्योंकि विवाह से पहले मुझे कभी भी चुदाई करवाने का मौका नहीं मिला था, तब मैं यह सोचकर खुश रहती थी कि अपने पर्सनल लौड़े से ही चुदाई का सुख लूँगी.
जीजा जी साल में दो-तीन बार ही आते थे और जब अकेले में उनको मौका मिलता तो मुझे छूने की और छेड़ने की कोशिश करते थे.
मैं मेरी दीदी यानि जीजा की पत्नी के साथ सभी बातें कर लेती थी कि मेरे पति रमन का लंड 5 इंच लंबा है और ज्यादा मोटा नहीं है.
शादी के बाद जब दीदी ने मुझसे पूछा, तो मैंने उन्हें बताया था कि मेरे पति का काम बहुत जल्दी तमाम हो जाता है.
शादी के बाद दीदी अक्सर मुझसे पूछती रहती थीं- कितनी देर तक सेक्स कर रहे हो तुम लोग … और कितनी बार कर रहे हो आजकल!
तो मैं उनके सवाल को सुनकर चुप रह जाती थी.
फिर एक बार दीदी के जोर देने पर मैंने उन्हें सब कुछ साफ साफ बता दिया था कि मेरी सेक्स लाइफ खत्म ही समझो क्योंकि मेरे पति के लौड़े में जान नहीं है.
दीदी ने अफसोस जताया और मुझसे धैर्य रखने के लिए कहा.
फिर उन्होंने जीजा से इस बारे में बात की होगी तो जीजा जी को भी पता चल गया था कि मेरी यानि प्रिया की चुदाई सही ढंग से नहीं होती है.
दोस्तो, यह बात आप जानते होंगे कि बहनें या सहेलियां आपस में जो भी बात करती हैं, वह अपने पति को जरूर बता देती हैं.
मैंने भी अपनी दीदी को जो बताया था, उन्होंने वह सब कुछ अपने पति जगदीप को बता दिया था.
इस कारण से जीजा जी मेरे साथ टच करने की कोशिश करते थे कि शायद मैं उनसे सैट हो जाऊं.
एक बार गर्मियों के मौसम में वे घर आए हुए थे.
उस समय मैं भी अपने घर पर अकेली थी.
जीजा जी मुझसे थोड़ी देर इधर-उधर की बातें करते रहे.
फिर वे बोले- रमण तुझे कितना परेशान करता है?
मैंने कहा- बिल्कुल भी नहीं करते.
वे बोले- जवानी में भी अगर परेशान नहीं करता है, तो कब करेगा?
मैं उस वक्त समझी नहीं थी कि जीजा जी का परेशान करने का मतलब चुदाई से है.
वे कहने लगे- वैसे शादी के बाद पति बहुत ज्यादा परेशान करते हैं, कभी इस पोजीशन में तो कभी इस पोजीशन में … और कई पति तो पीछे से भी परेशान करते हैं.
उनका मतलब गांड मारने से था.
मैंने कहा- मैं समझी नहीं!
तो वे बोले- वह ठीक से तुझे रात में खुश नहीं करता है ना!
अब मैंने उनकी बात को समझा और कहा- छोड़िए इन बातों को, क्या करना है.
वे बोले- मैं तुम्हारे भले के लिए ही कह रहा हूं.
मैं खड़ी खड़ी बात कर रही थी और वे कुर्सी पर बैठे बातें कर रहे थे.
फिर वे उठे और उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया.
मैंने कहा- छोड़िए जीजा जी, आप यह क्या कर रहे हो?
तो वे कहने लगे- साली को आधी घरवाली कहते हैं, क्या मैं हाथ भी नहीं पकड़ सकता हूं?
मैं चुप रही.
फिर वे बोले- तुम्हें भी जरूरत है और मुझे भी. तुम्हारी दीदी अब मेरे साथ रोज नहीं करती है, मुझे रोज जरूरत पड़ती है.
मैं बोली- मैं यह सब नहीं कर सकती. दीदी को पता चला तो उन्हें अच्छा नहीं लगेगा और मुझे भी यह खराब लगता है!
वे बोले- भूख तुम्हें भी है, मुझे भी है … एक बार कर लेंगे तो किसी को पता भी नहीं चलेगा.
मैंने मना कर दिया और बाहर आ गई.
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे अन्दर से आवाज दी.
मैं अन्दर गई तो वे चारपाई पर बैठे थे.
मुझे देख कर बोले- मेरे पास तो बैठो.
मैं उनके पास बैठी तो थोड़ी देर बाद उन्होंने फिर से मेरा हाथ पकड़ लिया.
इस बार मेरा मन डोल गया था तो मैंने विरोध नहीं किया.
फिर उन्होंने मुझे उठाकर अपनी गोदी में बैठा दिया.
मैं उठने लगी तो उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया.
वे जाने नहीं दे रहे थे.
मुझे भी यह सब असहज सा महसूस हो रहा था और मैं डरती भी बहुत ज्यादा थी कि कहीं घरवालों को पता चल गया तो क्या क्या हो सकता है … आदि आदि.
लेकिन चुदाई की तड़प मेरे अन्दर भी बहुत ज्यादा थी.
मैं डरपोक स्वभाव के कारण अन्दर ही तड़पती रहती थी.
मैं पुनः बोली- कोई आ जाएगा!
वे बोले कि आएगा, तब देखेंगे … वैसे भी घर पर फिलहाल कोई नहीं है.
मैं चुप रही.
वे बोले- मान जाओ प्रिया, मैं तो साल में कभी-कभी आता हूं … और मुझे पता है कि तुम्हारे पति ने तुम्हारे साथ आज तक ढंग से नहीं किया है. एक बार करवा कर तो देख लो … अगर अच्छा नहीं लगा तो बाद में नहीं करूंगा.
मैंने कहा- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है, आप प्लीज अभी चले जाओ.
उन्होंने मुझे वापस अपने पास में बैठा दिया.
इस दौरान उन्होंने मेरे सिर्फ बूब्स ही अच्छी तरह से मसले थे.
अब वे मेरे सामने खड़े हो गए और अपना पैंट खोल कर मुझे अपना हथियार दिखाने लगे.
वे बोले- देखो तुम्हारे पति से मेरा बहुत बड़ा है … और मैं करता भी काफी देर तक हूं. एक बार मान जाओ.
मैं उनके लंड को देख कर बोली- जीजा जी, आप चले जाओ और बंद करो यह!
वे अपनी जिप खुले रख कर ही बोले- बंद कर दूंगा, एक बार इसे अपने हाथ में पकड़ ले.
मैंने कहा- मैं नहीं पकड़ूँगी.
तो उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में पकड़ा और अपना लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया.
उनका लंड 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था.
उस वक्त उनका लौड़ा लोहे के जैसा टाइट था.
मैंने उनका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया.
वह बहुत गर्म था.
मुझे थोड़ा अच्छा लगा.
फिर वे बोले- कैसा लगा?
मैं धीरे से बोली- ठीक है.
कुछ देर बाद में वे चले गए क्योंकि घर में यह सब ज्यादा देर तक नहीं कर सकते थे.
अब मेरा भी मन होने लगा था.
मैं उनका मोटा लंबा लंड अपनी चूत में लेने का सोचने लगी थी लेकिन झिझक अभी भी मेरे मन में थी.
मेरे जीजा जी एक्सपर्ट खिलाड़ी थे तो अगले दिन वे मुझे फोन करके बोले- मार्केट से कुछ लाना जा रहा हूँ. तुम साथ चलोगी क्या?
मैं बोली- ठीक है, मैं चलूंगी.
कुछ देर बाद वे आए और मैं उनके साथ मार्केट चली गई.
वे तो मार्केट जाने का बहाना बनाकर ही आए थे, उन्हें कुछ खास लेना नहीं था.
रास्ते में वे मुझसे पति के सेक्स के बारे में … और इसी तरह की बातें पूछते रहे.
थोड़ी देर तक तो मैं छुपाती और टालती रही, फिर मैंने सब कुछ बता दिया.
वे बोले- तुम्हें तो अभी तक पति का सुख नहीं मिला है. मैं तो तुम्हारी दीदी को रोज दो बार करने की हिम्मत रखता हूं. वह खुद ही नहीं करती बाकी मैं तो रोज करने को तैयार रहता हूं.
मैं गर्म होने लगी थी.
फिर वे कहने लगे- तुम्हारी दीदी गांड में भी करने नहीं देती है और ना मुँह में लेती है.
दोस्तो, उस वक्त मुझे जीजा जी का मोटा लंड ही याद आ रहा था और चुत उस लौड़े को अन्दर लेने के लिए मचलने लगी थी.
अगले भाग में मैं आपको अपनी सेक्स कहानी में जीजा साली की चुदाई की दास्तान को लिखूँगी.
हॉट चूत स्टोरी पर आपको मुझसे क्या कहना है, प्लीज जरूर कहें.
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