हॉट चाची की चूत कहानी मेरी जवान चाची की है. हमारे संयुक्त परिवार चाचा चाची रोज रात को छत पर चुदाई करते थे. मैं और मेरी कजिन पास में सोते थे.
दोस्तो, मैं युवराज हूँ.
मेरी उम्र 21 साल है.
यह हॉट चाची की चूत कहानी पिछले साल की है.
हमारे घर में कुल मिलाकर 10 मेम्बर हैं.
मैं, माँ, मेरी बहनें, चाचा-चाची और उनका एक लड़का.
मेरे दादा दादी और हमारे एक अंकल की लड़की जो हमारे साथ रहती है.
मेरी चाची बहुत ही सेक्सी हैं.
उनकी हॉट जवानी को देख कर मुहल्ले के सारे लड़के पागल हो जाते हैं.
उन दिनों गर्मी का मौसम था.
इस वजह से हम सब लोग छत पर सोते थे.
मैं, चाचा-चाची और मेरे दिल्ली वाले अंकल की लड़की.
अंकल दिल्ली में अपनी जॉब करते थे और आंटी गुजर चुकी थीं तो अनु को उन्होंने हम लोगों के साथ रहने भेज दिया था.
हम चार लोगों के अलावा बाकी सब नीचे सोते थे.
उस दिन रात को मैंने चाची की सिसकारियों की आवाज़ सुनी तो मैं जाग गया.
मैंने बिना आंख खोले ध्यान से सुना तो समझ में आया कि चाची मदभरी सिसकारियां भर रही थीं.
उन कामुक आवाजों से मैं समझ गया कि चाचा उन्हें चोद रहे हैं.
अब मैंने हल्के से चादर को उठाया, अपना मुँह हल्का सा बाहर निकाला और अधखुली आंखों से उन दोनों की तरफ देखने लगा.
चाचा चाची की टांगों में बैठे थे और चाची अपनी दोनों टांगों को फैला कर हवा में उठाई हुई थीं. चाचा उनकी चूत को चाट रहे थे.
चाची उस वक्त पूरी नंगी थी.
उनके सेक्सी रेशमी बाल, जो मुझे हर बार पागल करते हैं, पूरे खुले हुए थे और चाची सिसकारियां भर रही थीं.
चाची के आगे पीछे हिलने से उनकी चूचियां मस्त हिल रही थीं.
मैं यह सब देख कर वैसे ही गर्म हो गया था.
चाचा ने चाची की चूत को चाटते हुए शायद काट लिया था तो चाची चिल्ला उठीं- ऊई मम्मी रे …
चाचा ने झट से अपना हाथ उनके मुँह पर रख दिया और बोले- चिल्लाओ मत, नहीं तो युवी और अनु जाग जाएंगे!
चाची कराह कर बोलीं- इतनी ज़ोर से जानवर की तरह काटोगे तो चिल्लाऊंगी नहीं, तो और क्या करूँगी?
तो चाचा ने कहा- ठीक है रानी, अब नहीं काटूँगा.
अब चाचा फिर से चूत चाटने लगे.
चाची भी गांड को आगे पीछे करती हुई सिसकारियां भरने लगीं.
‘आह क्या कर रहे हो, आह फाड़ ही दोगे क्या? मैं कहीं भागी नहीं जा रही हूँ … आह धीरे उंह … मर गई, आह पहले मालूम होता कि इतना दर्द दोगे तो कभी तुमसे शादी नहीं करती!’
अब चाचा को भी जोश आ गया था.
उन्होंने कहा- रानी, अभी तो सिर्फ़ चाट रहा हूँ. थोड़ी देर रूको फिर दिखाऊंगा कि तकलीफ़ किसे कहते है!
अब चाचा चाची के ऊपर चढ़ गए और चाची से बोले- ले चल अभी मुँह खोल और चूस इसे!
चाचा ने अपना लंड चाची के मुँह में दे दिया था और वे मजे से लंड को चूस रही थीं.
साथ ही चाची कामुक आवाजें निकाल रही थीं.
कुछ देर बाद वे चाचा के लंड के टट्टे सहलाती हुई बोलीं- सुनो न … तुम्हारा रस निकलने वाला लग रहा है!
चाचा ने कहा- तो पी जा न उसे!
चाची ने चाचा के लंड को मुँह में भर लिया और चचोरने लगीं.
चाचा ने लंड से रस छोड़ना चालू कर दिया और लंड का सारा का चाची ने पी लिया और जो बचा था, उसे अपने गालों में रगड़वाने लगीं.
अब चाची ने चाचा को अपने नीचे लिया और खुद उनके ऊपर आ गईं.
चाची के लंबे बाल उनके मम्मों को ढकते हुए चाचा के ऊपर छा गए थे.
चाची ने चाचा के कान को काटा और उनके मुँह में अपना मुँह डाल कर उनको चूमने लगीं.
‘आहह उम्म …’ की कामुक आवाजें बता रही थीं कि वे दोनों जोश में आ गए थे.
कुछ देर बाद चाची और ऊपर को चली गईं और उन्होंने अपनी नंगी चूत को चाचा के मुँह पर रख दिया.
वे चाचा के मुँह पर चुत रगड़ने लगीं.
चाचा भी बहुत ही ज्यादा जोश में आ गए थे.
चाची की चूत को चूस चूस कर गीली कर दिया था और वे चाची के दूध मसलते हुए उन्हें गाली दे रहे थे.
‘साली रंडी आज तेरी माँ चोद दूंगा!’
चाची हाँफती हुई कह रही थीं- चोद दे बहन के लंड … मेरी चुत चोद दे आज आह.
उन दोनों की चुदाई की मस्ती देख कर मेरा लंड पूरा टाइट हो गया था.
मेरी कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!
अगर लंड हिलाता तो उन दोनों को समझ में आ जाता.
मैं चुपचाप फिर से उन दोनों की चुदाई को देखने लगा.
अब चाची ने चाचा से कहा- अब और कितना तरसाओगे … डालो ना अन्दर!
चाचा ने चाची को अपने ऊपर से हटने का इशारा किया तो चाची चाचा के नीचे आ गईं.
उन दोनों ने चुदाई का पोज सैट कर लिया और चाचा ने अपना लंड धीरे से चाची की चूत पर रख दिया.
चाची ने सिसकारी भरी- डालो न अन्दर!
चाचा ने धीरे से लंड अन्दर घुसेड़ दिया.
अभी चाचा का आधा लंड ही अन्दर गया था कि चाची दर्द भरी सिसकारियां भरने लगीं-आह क्या कर रहे हो … आह लग रही है!
चाचा ने कहा- चिल्लाओ मत रानी, बस ये बताओ कि अब मारूं क्या झटका?
चाची ने गांड को एडजस्ट करते हुए कहा- आह मारो ना … पूछ किससे रहे हो … मेरी जान चुत तुम्हारी ही तो है.
यह सुनकर चाचा ने एक ज़ोर से झटका दे मारा, तो चाची चिल्ला उठीं- उंई माँ … मर गई … उम्म्म!
इतने में मुझे अनु की चादर के नीचे से कुछ हलचल होती दिखाई पड़ी.
मैं समझ गया कि चाचा चाची की चुदाई की इस लाइव ब्लू-फिल्म का मज़ा अनु भी ले रही है.
उधर चाचा ने चाची की चुत में झटके लगाने शुरू कर दिए थे.
चाची भी लंड को लील गई थीं और वे नीचे से अपनी गांड को उठा उठा कर लंड से लोहा ले रही थीं.
उनकी कामुक आवाजें भी निकल रही थीं- आह धीरे धीरे करो राजा … मार ही डालोगे क्या … आह फाड़ना मत मेरी चूत को!
उन दोनों की मदभरी सिसकारियों ने रात का पूरा शांत माहौल गर्म आवाज़ों से भर दिया था.
कम से कम 20 मिनट की धकापेल चुदाई के बाद चाचा शांत पड़ गए.
मुझे समझ में आ गया कि चाचा ने अपना पानी चाची के चूत में छोड़ दिया है.
फिर कुछ मिनट के बाद चाचा चाची के ऊपर से उठ गए और बोले- क्यों रानी, मज़ा आया?
चाची बोलीं- आज तो तुमने मार ही दिया मुझे!
चाचा हंसने लगे.
फिर दोनों ने कपड़े पहने और सो गए.
लेकिन मैं रात भर चाची के बारे में सोचता रहा.
मैंने भी ठान लिया था कि एक ना एक दिन चाची को ज़रूर चोदूंगा.
अब तो रोज चाची मेरे सपनों में मुझे नंगी दिखने लगी थीं.
कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूँ.
एक दिन सुबह मैं चाची के कमरे में गया, जो कि फर्स्ट फ्लोर पर था.
मुझे उधर कोई नहीं दिखा.
जब मैं अन्दर गया तो देखा कि बाथरूम से पानी की आवाज़ आ रही है.
मैंने सोचा कि अच्छा फिर से मौका मिला है चाची को नंगी देखने का!
मैं बाथरूम के बाजू में बने संडास के अन्दर चला गया और नल के सहारे से ऊपर चढ़ कर दीवार की दूसरी तरफ से बाथरूम में देखने लगा था.
चाची पूरी नंगी होकर नहा रही थीं.
उनके बाल खुले हुए थे और पूरा बदन भीगा हुआ था.
उनके बड़े बड़े बोब्स मस्त हिल रहे थे और चाची बहुत सेक्सी माल लग रही थीं.
मुझे यह सब देख कर बड़ी आग लग रही थी.
लेकिन तभी मेरा पैर नल पर से फिसल गया और मैं नीचे गिर पड़ा.
गिरने से आवाज़ हुई, तो चाची चिल्लाईं- कौन है?
उन्होंने शायद मुझे देख लिया था.
वे बाथरूम में से कपड़े पहन कर जब तक बाहर आतीं, तब तक मैं वहां से भाग गया.
चाची को समझ में तो आ ही गया था कि मैंने उनको नंगी देख लिया है.
अब उनका मेरे साथ बोलने के स्वभाव में थोड़ा बदलाव आ गया था.
चाची मुझसे थोड़ी हिचकिचा कर बात करने लगी थीं.
जब उन्होंने मुझसे कुछ कहा नहीं, तो मैं समझ गया कि या तो इन्होंने मुझे सही से देखा नहीं था या फिर ये मेरे देखने से कोई खास नाराज नहीं हैं.
दो दिन बाद से मेरा वापस छत पर जाना शुरू हो गया था.
उधर रोज रात को चाचा चाची की चुदाई का प्रोग्राम देखने मिलता था, तो मैं उसी समय पर जाग कर चाची और चाचा की चुदाई देखने लगता था.
इसी बीच मेरे दिल्ली वाले अंकल यानि अनु के पापा बीमार पड़ गए थे.
फोन पर खबर मिली कि अंकल कुछ ज्यादा बीमार हो गए हैं.
अपने भैया के बीमार होने की खबर मिलते ही चाचा को दिल्ली जाना पड़ा.
वे अनु को अपने साथ ले गए थे.
चाची अपने काम के कारण दिल्ली नहीं जा सकी थीं.
उधर जाकर चाचा ने फोन किया और बताया शायद उनको वहां पर महीना भर रुकना पड़ेगा.
चाचा जी की तबीयत बहुत खराब हो गई है. उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया था.
जब चाचा ने महीना भर रहने की बात कही, तो चाची की तो जैसे जान ही निकल गयी.
अब छत पर सिर्फ़ मैं और चाची सोते थे.
पहले हफ्ते में तो कुछ नहीं हुआ लेकिन दूसरे हफ्ते में मुझे चाची की चाचा के प्रति तड़प दिख रही थी.
क्योंकि चाचा उन्हें रोज चोदते थे और छुट्टी के दिन तो दिन भर चुदाई का संग्राम चलता था.
दूसरे हफ्ते मैंने बहुत बार ध्यान दिया कि चाची अपनी चूत पर अक्सर हाथ फेरने लगी थीं.
उस रात चाची ने अपनी नाइटी पहनी थी और वे जब छत पर आईं, तो मैं उन्हें देख कर ठगा सा रह गया.
उनके लंबे बाल खुले हुए थे और उनके दूध मस्त हिल रहे थे.
यह देख कर मैंने अंदाजा लगाया कि शायद चाची ने नाइटी के अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.
उस वक्त रात के 11.30 बज गए थे.
मेरा बिस्तर तो एक कोने में लगा था और चाची का छत के बीचों बीच.
मैंने जब देखा कि चाची छत पर सोने के लिए आ गयी हैं तो मैंने आंखें बंद करके सोने का नाटक किया.
चाची ने देखा कि मैं सो गया हूँ, तो वे भी अपने बिस्तर पर लेट गईं.
लेकिन चाचा की कमी की वजह से उन्हें नींद नहीं आ रही थी.
वे बेचैनी से करवटें बदल रही थीं और सोने का प्रयास कर रही थीं.
अचानक से मैंने देखा कि चाची ने अपनी नाइटी को ऊपर उठा लिया और अपनी चूत पर हाथ फेरने लगीं.
अंधेरे की वजह से ठीक से तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन जब मैंने उनका हाथ आगे पीछे होते देखा तो मैं समझ गया कि उन्होंने नाइटी के अन्दर पैंटी भी नहीं पहनी है.
उनकी भारी मलाईदार जांघें और चूत का हल्का सा उभार मुझे दिख रहा था.
मैंने ध्यान दिया तो समझ आया कि चाची के हाथ में कुछ था और वे उसे अपनी चुत में अन्दर बाहर कर रही थीं.
शायद उनके हाथ में रोटी बनाने का बेलन था.
वे उसे अपनी चूत में डाल कर अन्दर बाहर करके सिसकारियां भर रही थीं.
ये प्रोग्राम कुछ देर चला और चाची झड़ कर सो गईं.
मैं भी लंड हिला कर सो गया.
यह सब दो दिन तक ऐसे ही चलता रहा.
फिर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने सोच लिया कि आज कुछ भी हो जाए, मैं चाची को ज़रूर चोदूंगा.
रात को फिर से चाची का प्रोग्राम चालू हो गया.
थोड़ी देर के बाद मैंने हल्के से आवाज़ में बोला- मैं कुछ मदद करूं!
तो चाची एकदम से घबरा गईं और उन्होंने मेरी तरफ देख कर कहा- युवराज़ क्या तुम जाग रहे हो?
तो मैं बोला- नहीं, मैं तो नींद में बड़बड़ा रहा हूँ.
चाची समझ गईं कि मैं क्या चाहता हूँ.
आज चाची से भी रहा नहीं गया तो उन्होंने पूछा- अच्छा तो शायद उस दिन भी तुम नींद में मुझे नहाते देख रहे थे शायद!
मैं बोला- हां.
वे मुझसे पूछने लगीं- और क्या क्या करना चाहते हो नींद में?
मैं बोला- बहुत कुछ.
अब चाची धीरे से मेरे पास सरक आईं और बोलीं- चल हट, उधर एक तरफ को होकर लेट जा. मैं भी आज तेरे साथ तेरे बिस्तर पर सोऊंगी.
चाची मेरे बिस्तर पर आ गईं.
‘बेटा तेरे चाचा नहीं हैं, तो मुझे नींद भी नहीं आती … क्या करूँ?’
मैंने कहा- चाचा नहीं हैं, तो क्या हुआ … मैं तो हूँ!
वे बोलीं- अरे तू तो मेरा भतीजा है?
मैं बोला- तो क्या हुआ? जो चाचा कर सकते हैं वह क्या मैं नहीं कर सकता?
चाची जोश में आ गईं और उन्होंने झपट कर मेरे लंड पर हाथ रख दिया और उसे मसलती हुई सहलाने लगीं.
वे वासना भरी आवाज में बोलीं- सच में क्या तू मेरी आग बुझाएगा?
मैंने भी चाची की नाइटी को उठाया और चूत पर हाथ फेरने लगा.
मैं कामुक स्वर में बोला- एक बार आजमा कर तो देखो … फिर चाचा को छोड़कर मेरे साथ सोने के लिए तरसोगी!
चाची ने झट से मेरे पजामे का नाड़ा खोल दिया और अंडरवियर के अन्दर हाथ डाल दिया.
वे मेरे लंड को सहलाने लगीं.
फिर वे बोलीं- तेरे सामान का साइज़ तो तेरे चाचा से काफी बड़ा है!
मैंने कहा- ज्यादा देर तक चलता भी है!
यह कहते हुए मैंने चाची की नाइटी को उतार दिया और नजारा देखा तो मेरा अंदाजा सही निकला था.
चाची ने अन्दर ब्रा पैंटी नहीं पहनी थी.
मेरे द्वारा नाइटी उतार देने से चाची को भी जोश आ गया था.
उन्होंने जल्दी से मेरे सारे कपड़ों को उतार दिया और हम दोनों जोश में आ गए थे.
मेरा एक हाथ चाची की जांघ पर था और उनकी जांघ मेरी जांघ पर थी.
मैं चाची की जांघ को पीछे से सहला रहा था.
मेरा लंड उनकी चूत से टकरा रहा था.
मेरा दूसरा हाथ उनके रेशमी बालों में था और उनके मुँह में मेरा मुँह.
मेरी जीभ चाची की जीभ को सहला रही थी.
‘चाची बहुत सेक्सी हो तुम … तुम्हारे रेशमी लटकते बाल मुझे पागल बना देते हैं चाची … प्लीज़ इन्हें ऐसे ही रखना, काटना मत!’
चाची भी मेरे मुँह में मुँह डाले हुई मुझे किस कर रही थीं.
मैं उसके मोटे मोटे दूध दबा रहा था.
आहह … क्या मज़ा आ रहा था.
मेरा लंड चाची की चूत पर रगड़ मार रहा था.
‘चाची क्या मैं आपकी चूत को चाट सकता हूँ?’
मैंने पूछा, तो चाची बोलीं- आज से यह तेरी भी हो गई है … चाट ले!
मैंने चाची को सही से चित लेटाया और उनके पैरों को फैला दिया.
चाची की चूत थोड़ी सी गीली हो चुकी थी.
मैंने अपनी जीभ चुत पर फेर दी, तो चाची ने मस्त सिसकारी भरी- आह!
मैं उनकी चूत को चाटने लगा.
मेरी जीभ चूत पर जबरदस्त फिर रही थी.
फिर मैंने चुत के दाने को छेड़ा और उसको अपने होंठों से पकड़ कर मसलने लगा.
इससे चाची कसमसा उठीं- आह युवी … क्या कर रहे हो … मार ही डालोगे क्या?
चाची की कामुक आवाज़ों से मुझमें और जोश भरता जा रहा था.
मैंने अपनी जीभ उनकी चुत के छेद में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा.
अब तो वे और पागल हो गईं.
क्या सेक्सी थी मेरी चाची … मैं भी पागल हो गया था- चाची, क्या तुम मुझसे रोज चुत चोदने दोगी?
चाची मेरे बाल पकड़ कर अपनी चुत चुसवाती हुई बोलीं- आज तो पहले सही से चोद … यदि मजा दिया तो रोज एक बार पक्के में दूँगी!
मैंने झट से पोज बनाया और हॉट चाची की चूत में अपना हथियार पेल दिया.
चाची की चुत में जब मेरा मोटा लंड अन्दर गया तो चाची की कराह निकल गई.
मैं उनकी चीख पुकार से बेखबर होकर धकापेल चोदने में लग गया.
करीब बीस मिनट में मैंने चाची को दो बार झाड़ दिया था.
वे तड़फ कर बोलीं- अब बस कर मेरी चुत में जलन हो रही है!
मैंने कहा- पहले वादा करो कि रोजाना चुत चोदने दोगी!
वे हंस दीं और मुझे चूम कर बोलीं- तेरे जैसे चोदू के लिए तो मैं चाचा को छोड़ दूँगी!
अब मैं मस्त हो गया और उन्हें चोदता हुआ उनकी चुत के बाहर झड़ गया.
दोस्तो, इस तरह से चाची मेरे लंड की गुलाम बन गईं.
मैं भी चूत चुदाई का गुलाम बन गया था.
और चाचा के साथ साथ अब मैं भी चाची की चुत चुदाई का मजा लेने लगा.
मैं आज भी चाची को, जब भी समय मिलता है, तभी उसी जोश के साथ चोदता हूँ… कभी घर में तो कभी होटल में जाकर!
आपको मेरी हॉट चाची की चूत कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
vikashkumar.dangi.52@gmail.com