मामी Xxx चुदाई कहानी में मैं अक्सर मामा के घर जाता था. एक रात मामी मुझे छत पर ले गयी सोने के लिए. वहां हालात कैसे बने कि मैंने मामी को चोदा.
नमस्ते चुदासी भाभियो और सेक्सी लड़कियो, आप सब अपनी अपनी चूत में उंगली करने के लिए तैयार हो जाओ और लड़के अपना लंड हिलाने के लिए उसे पैंट से बाहर निकाल लो.
मैं राजेश प्रयागराज से आपके लिए एक सच्ची मामी Xxx चुदाई कहानी लेकर आया हूं.
इस समय मैं गुरुग्राम में रहता हूं और यहीं की एक प्राइवेट कम्पनी में कार्य करता हूँ.
आप लोगों ने मेरी पिछली कहानी
जीजा जी की बड़ी बहन की चुदाई
को बहुत प्यार दिया.
बहुत से लोगों के कमेंट और मेल आए और आप सभी ने सेक्स कहानी को बहुत सराहा.
इसके लिए आप लोगों का धन्यवाद!
आज की घटना मेरी और मेरी मामी के बीच में घटी थी, जिसे मैं सेक्स कहानी के रूप में लिख कर आपके साथ साझा कर रहा हूँ.
सबसे पहले तो आपको मामी Xxx चुदाई कहानी की नायिका यानि अपनी मामी के बारे में बता देता हूं.
मेरी मामी जी बेपनाह हुस्न की मलिका हैं.
उनका नाम सुनीता (बदला हुआ नाम) है.
मामी की उम्र लगभग 37 साल की है और उनका फिगर 34-30-36 का एकदम कसा हुआ है.
उनका रंग भी एकदम साफ है.
मेरी मामी की चूचियों और गांड का उभार बहुत ही ज्यादा मस्त है.
मामी की चूचियां देख कर ऐसा लगता है मानो वे खुद को कसे हुए कपड़ों की कैद से बाहर आने को बहुत बेताब हैं.
उनके कामुक रूप को देखकर किसी का भी मन बहक सकता था.
मामी की चूचियों को मसलने और गांड मारने को भी मन करने लगेगा.
कुल मिलाकर मामी जी बहुत सुंदर और सेक्सी हैं.
उनके दो बच्चे हैं, एक लड़का एक लड़की.
जब मामा की शादी हुई थी, तब मैं अपनी जवानी की दहलीज पर आया ही था.
आज मेरी जवानी पूरी तरह से खिल चुकी है और मेरे लंड ने कई चूतों का रस पिया है.
आप सभी का ज्यादा समय न लेते हुए सीधा कहानी पर आता हूं.
हुआ यूं कि मैं आपने मामा के घर अक्सर जाता रहता हूँ.
मेरे मामा जी का घर प्रतापगढ़ में है.
मामा जी एक दुकान में काम करते हैं और घर पर भी एक दुकान है, जिसे मामी जी देखती हैं.
जब भी मैं मामा के यहां जाता हूँ तो मामा मामी मुझसे बहुत अच्छे से बात करते हैं और वे दोनों मुझे खूब मानते भी हैं.
मेरे जाने पर खासकर मामी बड़ी खुश हो जाती हैं.
एक दिन मैं किसी काम से मामा के घर गया था.
मामा जी काम पर गए थे और मामी घर में अकेली थीं.
मामी ने मुझे देखा तो खुश होती हुई बोलीं- अरे वाह … अबकी बार तो तुम बहुत दिनों में आए हो? कहां चले गए थे?
मैंने कहा- कहीं नहीं मामी जी, मैं तो बस घर पर ही था और घर के कामों के चलते आपके पास आने का टाइम ही नहीं मिला.
वे बोलीं- अच्छा, ऐसा कहां बिजी हो आजकल जो आने का टाइम नहीं मिल रहा था. इस बार तुम सच में बहुत दिनों में आए हो.
मैं हंस दिया और बोला- कहीं नहीं मामी जी, चलो अभी तो यहीं आपके पास आ गया हूँ.
फिर वे मुझे दुकान पर बिठा कर मेरे लिए पानी और कुछ मिठाई ले आईं.
मैंने उनसे पूछा- मामा जी कहां हैं?
मामी ने बताया कि वे दुकान गए हैं.
मैं- अच्छा … काम काज सही चल रहा है न?
मामी ने कहा- हां सब ठीक चल रहा है.
इस तरह हम दोनों में काफी देर तक बात हुई.
फिर शाम हो गई, तो मामा जी भी काम से आ गए.
हम सबने खाना खाया और सोने की बारी आ गई.
उस समय गर्मी का मौसम था तो गांव में गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, ऊपर से बिजली का भी कोई ठिकाना नहीं रहता था कि कब आई और कब चली गई.
मामा जी का घर दो मंजिला है.
मामा मामी और बच्चे नीचे वाले पोर्शन में ही सोते हैं.
मैं बोला- मैं ऊपर वाले हॉल में सो जाता हूँ.
वैसे भी मैं जब उनके घर जाता था, तो ऊपर वाले हॉल में ही सोता था.
इस बार मामी जी बोलीं- छत पर चलो, मैं भी ऊपर ही चली चलती हूं, तुमसे बात करने का बड़ा मन है.
मामा ने अपनी रजामंदी देते हुए कहा- हां ठीक है.
मैं ऊपर छत पर चला गया.
थोड़ी देर में मामी भी आ गईं.
मामी ने दो चारपाई लगाईं.
वहां पर मच्छर बहुत ज्यादा काटते हैं इसलिए मामी ने मच्छरदानी लगाने के लिए चारपाई बगल बगल में सरकाईं और दोनों में मच्छरदानी लगा दी.
अब हम दोनों सोने के लिए लेट गए.
इससे पहले मेरे मन में मामी जी के बारे में कोई गलत ख्याल नहीं था लेकिन जब मामी मेरे बगल में चारपाई पर लेटीं … तो कुछ मस्त सा सीन बन गया.
दरअसल मामी ने अपनी साड़ी का पल्लू सीने से हटा दिया.
उनके ऊपर ब्लाउज के अलावा कुछ नहीं था, ब्लाउज भी बड़े गले का था तो उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां आधी से ज्यादा साफ दिखने लगी थीं.
मामी के मम्मे देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया.
उसी वक्त मामी ने मेरी तरफ करवट ली और मुझसे बातें करने लगीं.
उनकी चूचियां बहुत बड़ी लग रही थी और ऐसे दिख रही थीं मानो अभी ही बाहर आने को बेताब हो रही हैं.
काफी देर बातें करने के बाद मामी ने कहा- चलो अब सोते हैं, रात बहुत गहरा गई है.
मैंने कहा- ठीक है.
मैं आंख बंद करके लेट गया.
थोड़ी देर तक मुझको नींद नहीं आई.
काफी देर बाद करवट लेने के बाद पता नहीं, कब आंख लग गई और मैं सो गया.
लगभग डेढ़ बजे मच्छर काटने की वजह से मेरी नींद आंख खुल गई.
मेरी मच्छरदानी में कहीं से जगह हो गई थी तो उधर से बहुत से मच्छर अन्दर आ गए थे.
मैंने ध्यान से देखा तो मच्छरदानी एक जगह से फटी हुई थी, जिस कारण बहुत सारे मच्छर अन्दर आ गए थे.
मैंने मामी को देखा, वे गहरी नींद में सो रही थीं.
उनकी चूचियां पहाड़ जैसी दिखाई दे रही थीं और सांस लेने के कारण उठ बैठ रही थीं.
काफी देर तक उन्हें देखने के बाद मेरे अन्दर वासना जाग गई.
अब मुझको नींद नहीं आ रही थी.
एक तो मच्छर बहुत काट रहे थे और दूसरा कारण मामी की चूचियां मेरे अन्दर वासना जगा चुकी थीं.
मैंने काफी देर सोचने के बाद मन बनाया कि मैं मामी की तरफ को चला जाता हूं.
काफी हिम्मत करके मैं अपनी चारपाई से उठा और मच्छरदानी को उठा कर मामी की चारपाई पर चला गया.
मामी को पता ही नहीं चला कि मैं उनकी चरपाई पर आ गया हूं.
मामी को इतने करीब से देखकर मेरा लंड एकदम से फनफना कर खड़ा हो गया.
मैं उनके बदन की गर्मी का अहसास करता रहा और काफी देर बाद हिम्मत करके मैंने उनके गाल पर चूम लिया.
उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने अपना हाथ मामी की चूचियों पर रख दिया.
आह मस्त दूध थे उनके.
मामी अभी भी सो रही थीं.
मैं धीरे-धीरे से उनकी एक चूची को दबाने लगा.
अचानक से मामी की नींद खुल गई.
उन्होंने मुझे अपने पास देखकर कहा- यहां क्या कर रहे हो?
पहले तो मुझे बहुत डर लगा, फिर मैं बोला- मेरी मच्छरदानी में बहुत मच्छर आ गए हैं, इसलिए मैं यहां पर आ गया हूँ.
इसके बाद मम्मी ने कुछ नहीं कहा और वे चुपचाप वहां से उठ गईं.
मामी बाथरूम चली गईं.
मैं सोच रहा था कि कहीं मामी मामा को न बता दें.
मेरे मन में डर लग रहा था.
थोड़ी देर में मामी बाथरूम से बाहर आईं और वहां से आने के बाद उन्होंने इधर-उधर पड़ोस की छत पर देखा.
जब उनको कोई नहीं दिखा तो वे सीढ़ी के दरवाजे के पास गईं और नीचे की आहट लेकर दरवाजे को बन्द कर दिया.
जब मामी ने दरवाजा बंद किया तो मैं मन में सोच रहा था अगर अब मामी जी मेरे पास आकर लेटती हैं तो समझ जाऊंगा कि इनका भी चुदाई का मन है.
यही सब सोच रहा था कि मामी जी आकर मेरे बाजू में लेट गईं.
अब चुदाई की सोच कर मेरा लंड जो बैठा था, दोबारा खड़ा हो गया.
जैसे ही मामी मेरे बाजू में लेटीं, मैं भी उनको कुछ देर देखता रहा.
वे उस वक्त दूसरी तरफ मुँह करके लेटी हुई थीं.
थोड़ा सोचने के बाद मैं हिम्मत करके उनके कंधे पर हाथ रखा.
वे कुछ नहीं बोलीं.
यह देखकर मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने उनके कंधे को पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ को कर लिया.
उन्होंने कुछ नहीं बोला, तो मैंने उनकी चूचियों पर हाथ रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगा.
उनका भी मन हो रहा था, तो वे चुपचाप चूचियों को मिंजवाती रहीं.
फिर मैंने उनकी चूचियों को ब्लाउज से बाहर निकालने का सोचा और उनके ब्लाउज के बटन खोलने लगा.
कुछ ही पलों बाद मैंने मामी की चूचियों को आजाद कर दिया.
उन्होंने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी तो उनके दोनों कबूतर बाहर आ गए.
मैं उनकी दोनों चूचियों से खेलने लगा और एक को मुँह में लेकर चूसने लगा.
मैं काफी देर तक चूसता रहा.
उन्होंने भी मेरे सर हाथ रख दिया और मुझे अपने मम्मों में दबा कर मेरे बालों में हाथ फेरती रहीं.
चूचियों को चूसने के साथ साथ मैं अपने एक हाथ को उनकी चूत पर ले गया.
उन्होंने पेटीकोट के अन्दर भी कुछ नहीं पहना हुआ था.
मेरा हाथ चुत के पास गया तो पता चला कि उनकी चूत से पानी बह रहा था और चूत एकदम गीली हो गई थी.
थोड़ी देर तक झांटों में हाथ फेरने के बाद मैंने उनकी चूत में उंगली करना शुरू कर दी.
इससे उन्हें मजा आने लगा था तो उनके मुँह से हल्की हल्की सिसकारियां निकलने लगी थीं.
अब तक मुझे सब समझ में आ गया था कि मामी को लंड चाहिए है, तो अब खुल कर जंग छेड़ना चाहिए.
बस मैं नीचे को सरक गया और मामी की चूत को चाटने लगा.
थोड़ी देर में मामी अति उत्तेजित हो गईं और वे मेरा सिर को अपनी चूत में दबाने लगीं.
उनकी चूत का स्वाद मस्त नमकीन था, मुझे चुत चाटने में बहुत मजा आया.
मैंने जल्दी से मामी की साड़ी निकाल कर अलग की और पेटीकोट को उनके पेट पर करके पोज बनाया और ऊपर चढ़ गया.
अपने लंड पर मैंने थूक लगाया और मामी की चुत के अन्दर डाल दिया.
मेरा पूरा लंड एक बार में ही उनकी चूत में जड़ तक घुसता चला गया था.
लंड चुत के अन्दर जाते ही मामी को बहुत तेज दर्द हुआ.
मुझे भी उनकी चूत बहुत टाइट लग रही थी.
ऐसा लग रहा था मानो मामा अब मामी की चुदाई करते ही न हों.
थोड़ी देर बाद मैं खूब जोर जोर से मामी की चूत चोदने लगा और मामी की चूत से पानी निकल गया.
लगभग 5 मिनट बाद मेरे भी लंड ने भी माल फेंकने की इच्छा जाहिर की तो मैंने उसे चुत से बाहर निकाला और चुत के ऊपर पानी छोड़ दिया.
अब मैं उनके होंठ पीता रहा और उनके ऊपर ही पड़ा रहा.
मामी ने कुछ नहीं कहा, वे बस मुझे देख रही थीं.
मैंने कहा- क्या देख रही हो?
उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मैं थोड़ी देर तक लेटा रहा और उनकी चूचियों को दबाता रहा.
अब तक मेरा लंड चुत से बाहर आ गया था लेकिन जवान लंड उनकी चूचियों के कारण वापस अकड़ कर गर्म होने लगा था.
मैंने बाजू में लेट कर मामी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.
मामी लंड को ऊपर नीचे करने लगीं.
थोड़ी देर में लंड फिर से चुत चोदने लायक टाइट हो गया था तो हम दोनों ने दोबारा चुदाई स्टार्ट कर दी.
इस बार मैंने मामी से कहा- आप ऊपर आ जाओ.
वे बिना कुछ बोले लंड के ऊपर आ गईं और लंड पर चुत फंसा कर खूब तेज तेज कमर मटकाती हुई अपनी चूत की चुदाई करवाती रहीं.
मुझे उनके दूध मसलने में बहुत मजा आ रहा था.
मामी को देखकर भी लग रहा था कि उनको बहुत सुकून मिल रहा है.
काफी देर बाद मामी की चूत से पानी निकल चुका था और वे निढाल होकर मेरे सीने पर गिर कर लंबी लंबी सांसें ले रही थीं.
मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेर कर उन्हें सहलाया और नीचे ने लंड उठा कर चुत को चोदने लगा.
कुछ देर तक चूत चोदने के बाद मेरा भी पानी निकलने वाला हो गया था.
मैंने मामी से पूछा- कहां गिराऊं!
वे वीर्य बाहर निकालने के लिए बोलीं.
करीब 30 मिनट चुदाई करने के बाद मेरा भी पानी निकल गया.
मैंने मोबाइल में देखा तो सुबह के 4:30 बज गए थे.
मामी बोलीं- मामा का उठने का समय हो गया है.
मैं उठकर वापस अपने चरपाई में आकर सो गया.
थकान ज्यादा हो गई थी तो मुझे मच्छरों के काटने का भी असर नहीं हुआ.
अब जब भी मैं मामा के यहां जाता हूं तो मामी की चुदाई जरूर करता हूँ.
मामी भी किसी न किसी बहाने मुझको बुलाती रहती हैं.
अब आपको पता चल गया होगा कि मच्छर की वजह से मुझे मामी की चूत चुदाई करने का मौका मिला था.
आपको मामी Xxx चुदाई कहानी कैसी लगी, मेल करके जरूर बताएं या कमेंट भी करके बताना चाहें तो आपका स्वागत है.
धन्यवाद.
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