गाँव की लड़की की पहली चुदाई कहानी में मैं खेतों में बनी कोठरी में अपने पड़ोस की कुंवारी लड़की के साथ नंगा था। मैं उसके जिस्म का मजा ले रहा था और उसकी चूत फाड़ने को तैयार था।
कहानी के पहले भाग
देसी जवान लड़की के साथ मजा
में आपने पढ़ा कि कुत्ते कुतिया की चुदाई देखकर मेरे देसी दोस्त गरम हो गई।
मैंने उसे प्रपोज कर दिया, वो माँ गई और हमारी अश्लील हरकतें शुरू हो गई।
उसने मुझे अपने खेत में बनी कोठरी में बुलाया।
वहाँ हम दोनों नंगे होकर मजे लेने लगे।
अब आगे गाँव की लड़की की पहली चुदाई कहानी:
फिर मैंने प्रियंका को लेटने के लिए बोला।
उसके ऊपर मैं लेट गया।
पर चारपाई पर सही से पोज़िशन नहीं बन रही थी।
तब मैंने उसे चारपाई वाला बिस्तर नीचे ज़मीन पर बिछाकर नीचे लेटने के लिए बोला।
वो नीचे लेट गई।
मैं उसके ऊपर लेटकर लंड को उसकी चूत पर रगड़ने लगा।
वो सिसकियाँ लेने लगी- आआ आआह ह ऊई ईअअ अअ! बस ऐसे ही करते रहो, बहुत मज़ा आ रहा!
मैंने बोला- अभी और भी मज़ा आएगा।
अचानक वो मेरे लंड को पकड़ लिया, बोली- अब बस करो! इसे जल्दी से अंदर डालो!
उसने लंड को पकड़कर चूत के मुँह पर रख दिया।
मैंने भी हल्का सा धक्का लगाया।
पर सील पैक चूत होने से लंड साइड में फिसल गया।
वो बोली- रुको! ऐसे नहीं जाएगा।
मैं- कैसे जाएगा?
प्रियंका- वो ऊपर सरसों के तेल की डिब्बी पड़ी है, उसको लगाओ।
मैं- यहाँ तेल कौन लाया?
वो बोली- मैंने कल ही लाकर रख दिया।
मैं- तेरे को कैसे पता कि इसकी ज़रूरत पड़ेगी?
वो बोली- मेरी एक सहेली ने बताया कि पहली बार लंड लेने में दर्द होता है तो तेल व क्रीम लगाने से आसानी से अंदर चला जाता है।
मैंने तेल लेकर उसकी चूत को एक हाथ से चौड़ी करके तेल की धार गिराई और उसकी गाँड से पकड़कर ऊपर उठा दी जिससे तेल नीचे नहीं जाकर उसकी चूत में जाए।
एक उँगली से चूत के अंदर तक तेल लगा दिया।
अब बहुत सारा तेल लेकर मैंने अपने लंड पर लगा दिया।
तेल से लंड चमकने लगा।
ये देख के प्रियंका के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
अब मैंने अपने चिकने लंड को उसकी चूत के मुँह पर लगाकर हल्का सा धक्का दिया तो गप से लंड का टोपा चूत में घुस गया।
वैसे ही वो चिल्लाई- आआउ! बाहर निकालो! दुख रही!
मैं वैसे ही रुक गया, उसके बूब्ज़ मसलने लगा।
उसको वापस मज़ा आने लगा।
वो अपनी गाँड ऊपर-नीचे कर रही थी तो मैं उसके होठों पर अपने होठ लगाकर चूमने लगा और उसको कसकर पकड़कर एक जोरदार झटका लगाया।
झटके से मेरा आधा लोडा चूत में चला गया।
वो जोर से चिल्लाई पर उसकी आवाज़ बाहर नहीं निकल पाई।
उसकी आँखों से आँसू टपक-टपक कर गिरने लगे।
मैं बिना हिले हुए उसके बूब्ज़ मसलता रहा।
उसको चूम भी रहा था मैं।
मैंने जैसे ही उसकी चूत की तरफ देखा तो चूत से टप-टप खू.न टपक रहा था।
मैंने खू.न के बारे में उसको नहीं बताया… नहीं तो वो आगे चुदने से मना कर देती।
10 मिनट ऐसे ही रुकने पर उसे आराम हो गया, दर्द की जगह मज़ा आने लगा।
अब वो मुझे अपनी तरफ खींचने लगी तो मैं अपने आधे लंड को ही आगे-पीछे करने लग गया।
लंड को बाहर खींचके जैसे ही अंदर करता तो उसकी सिसकियाँ निकल जातीं।
5 मिनट आधे लंड से चोदने से उसको मज़ा आने लगा तो मैंने पूरा लंड घुसाने की सोचा।
तो अचानक मैंने पूरा लंड बाहर निकालके एक झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया।
प्रियंका एक जोरदार से चिल्लाई और दूर हटने लगी।
मैंने तुरंत कसकर पकड़ लिया और मुँह भी बंद कर दिया।
अब वो मुझे हाथ से धक्का देकर हटा रही पर मैं उसे कसकर पकड़ के रखा था।
7-8 मिनट में उसका दर्द कम हुआ तो उसने अपने आप को ढीला छोड़ा और बोली- मादरचोद! कुत्ते! कमीने! एक बार में ही पूरा लंड बाड़ दिया! मेरी तो जान ही निकल गई!
मैं धीरे-धीरे लंड चलाने लगा।
अब उसको भी मज़ा आ रहा था, अब वो अपनी आँखें बंद करके लंड का आनंद ले रही थी।
अब मैंने अपने झटके की स्पीड बढ़ाई तो वो- आआ आऊऊ ऊई ईईई आह्ह हआ आआ! मज़ा आ रहा! बाड़ लंड और जोर से!
और मेरी गाँड से पकड़कर अपनी चूत पर दबाने लगी।
मैं जोर-जोर से चोदने लगा।
अचानक उसने अपने नाखून मेरी गाँड पर गाड़ दिए और जोर से चिपका लिया- कुत्ते! गाँड मेरे चोद! मुझे और जोर से!
ऊऊऊ सीसी सी सीस करने लगी।
ऐसे ही मेरे लंड को नीचे से गर्म-गर्म लगा।
उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया जो मेरे आंड को गीला करते हुए उसकी चूत का खून और पानी नीचे टपक रहा था।
उसकी साँसें तेज़ी से चलने लगीं, धड़कन तेज हो गई और वो जोर से मुझे चिपक गई।
5 मिनट बाद उसकी साँसें शांत हुईं तो बोली- जान! बहुत मज़ा आया! मुझे पता होता कि लंड लेने में इतना मज़ा आता तो मैं पहले ही तेरा लंड अपने भोसिया में गलवा लेती। अब रोज ही डलवाऊँगी!
मैंने जैसे ही अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला तो फक की आवाज़ आई।
तो वो उठकर अपनी चूत देखने लगी।
चूत देखते ही उसके होश उड़ गए।
उसकी चूत का मुँह खुलकर चौड़ा हो गया और नीचे से ऊपर तक खू. न-खू.न हो रहा था।
तो मैंने उसे समझाया कि पहली बार चुदाई करने पर चूत की सील टूटती है तो खू.न निकलता है। कोई दिक्कत नहीं है।
अब वो मेरे लंड को हाथ से पकड़कर देखने लगी जो कड़क होकर खड़ा था।
लंड पर खू.न और चूत का पानी लगा हुआ था और खड़ा लंड झटका ले रहा था तो बोली- इसकी क्या हो रहा?
मैंने कहा- तेरी चूत का तो इसने पानी निकाल दिया पर इसका पानी नहीं निकाला। वापस अपनी चूत में लेकर इसका पानी निकाल!
वो बोली- 5 मिनट रुक, मुझे मूत लेने दे।
तो वो मेरे सामने ही मूतने लगी।
तो उसका मूत 2-3 धार में निकलने लगा और मूत के साथ खून और गाढ़ा पानी निकल रहा।
बोली- आज तो मादरचोद ने मेरा भोसियो फाड़ दियो! मूत भी अलग-अलग धार में निकल रहा!
हम दोनों हँस पड़े।
उसके मूतने के बाद मेरे गले लगकर मुझे किस करने लगी।
मैं भी किस करते हुए उसके बूब्ज़ मसल रहा था।
तो वह किस करना छोड़कर चिल्लाई- अबे मोटे लंड के! धीरे मसल मेरे बूब्ज़! नहीं तो छाले पड़ जाएँगे!
मैंने उसके बूब्ज़ छोड़कर उसको अपने से चिपका लिया और वापस किस करने लगे।
और उसकी गाँड पकड़कर उसकी चूत को अपने लंड पर दबा दिया।
मेरा लंड भी उसकी चूत की खुशबू से वापस तनकर खड़ा होकर उसकी चूत को ठोकर मारने लगा।
तो वो बोली- तेरा लंड तो वापस खड़ा हो गया।
मैंने कहा- इसकी अभी प्यास नहीं बुझी।
तो अचानक नीचे बैठकर लंड को पकड़कर ऊपर-नीचे करके देखने लगी।
उसका हाथ लगते ही मेरा लंड और कड़क हो गया तो धीरे-धीरे वो मेरे लंड को आगे-पीछे करके एकाएक मुँह में ले लिया।
आधा लंड मुँह में लेकर चूत की तरह मुँह से लंड को चोदने लगी।
मुझे जन्नत का मज़ा आने लगा।
मेरे मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं- आ आहह हहह ऊई!
2 मिनट चूस के लंड बाहर निकाल दिया, बोली- मेरा तो मुँह दुखने लग गया इतने मोटे लंड से! मेरे से नहीं होगा। मेरा भोसियो चोद ले!
मैंने उसको उठाकर चारपाई पर लिटाया और लंड चूत पर अच्छे से मेरा और उसका थूक लगाकर उसके दोनों पैर पकड़कर लंड को चूत के मुँह पर लगाकर धक्का लगाया तो फच से टॉप अंदर चला गया।
वो आई उ माँ! करके उछली।
पर मेरी पकड़ मजबूत थी।
“दर्द होता है, आराम से करो!”
तो मैं लंड को रोककर उससे प्यार करने लगा।
5 मिनट बाद वह अपनी गाँड ऊपर कर लंड लेने लगी तो मैं वहीं पर लंड को आगे-पीछे करने लगा जिससे उसको मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने सोचा यही मौका है पूरा लंड डालने का।
तो मैंने उसके मुँह को होठ से बंद करके पूरा लंड बाहर खींच के एक ही झटके से पूरा लंड उसकी जड़ तक पेल दिया।
जिससे वो उछल पड़ी।
उसने चिलाने की कोशिश की पर उसकी आवाज़ नहीं निकली।
मैंने अपना लंड वहीं रोक दिया।
उसके पैर काँप रहे थे।
उसकी आँखों से आँसू निकल गए जिसको मैंने चाट लिया और उसे सहलाने लगा।
5 मिनट बाद वो अपना गाँड हिलाकर चोदने को बोली।
मैं धीरे-धीरे चोद रहा था।
जैसे ही मेरा लंड चूत की जड़ बच्चेदानी से टकराता उसके मुँह से आह आह आह ऊई उइई निकल जाती।
मैं अब जोर-जोर से चोदने लगा।
अब उसको भी मज़ा आ रहा था- ऊई माँ का भोसड़ा! और जोर से चोद!
मैं और जोर से चोदने लगा।
जांघ से जांघ टकराने से फट-फट की आवाज़ आ रही थी पर वहाँ कोई सुनने वाला नहीं था।
15 मिनट तक दना-दन चोदने के बाद अचानक उसका शरीर काँपकर अकड़ने लगा।
उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और बड़बड़ाने लगी- मादरचोद! कुत्ते! और चोद! मुझे चोद-चोदके भोसड़ा बना दे! बहुत खुजली होती इसमें! अब इस भोसड़े को रोज चोदना!
मैं फूट जोर लगाकर धक्के मारने लगा।
10-12 धक्का लगाने के बाद उसके चूत का फुव्वारा फूट पड़ा।
वो भलभला के झड़ने लगी।
उसका गाढ़ा पानी मेरे लंड और आंड को गीला करके नीचे टपक पड़ा।
पर अभी भी उसकी चूत में जैसे ही लंड अंदर जाता तो पिचकारी निकल रही।
अचानक मुझे लगा कि मेरा भी पानी निकालने वाला है तो मैं जोर-जोर से चोदने लगा।
मेरा लंड झटके खाने लगा।
मैंने मुँह से गाली निकाली- तेरी माँ का भोसड़ा चोदू! साली रंडी! तेरी चूत को फाड़ दूँगा!
मैंने कसकर पकड़कर पूरा लंड दबाकर बच्चेदानी के मुँह में उतार दिया।
मेरे लंड से पिचकारी निकल पड़ी।
अचानक बोली- लंड का माल मेरे बूब्ज़ पर लगाओ!
पर तब तक आधे से ज्यादा पानी निकाल चुका था और मेरी भी हिम्मत नहीं थी कि लंड को चूत से बाहर निकालूँ।
लंड झटके खाकर पिचकारी मार रहा था।
6-7 पिचकारी के बाद चूत का माल और लंड का माल एक साथ उसकी और मेरी जांघों से नीचे बहने लगा।
पर हम दोनों की साँसें रुक नहीं रही थीं।
ऐसे ही 5 मिनट पड़े रहने के बाद वो बोली- अब तो उठ जाओ! आज ही मुझे ग्याभन कर दोगे क्या?
तभी मुझे होश आया कि मैंने पानी अंदर छोड़ दिया।
उठकर देखा तो कमर के नीचे उसका पानी और मेरे पानी उसकी चूत से निकलकर हम दोनों लथपथ हो गए।
मैं बोला- इसको साफ कैसे करें?
तो उसने कहा- बाहर एक पानी का ड्रम भरा है। उससे साफ कर लो।
तो मैं झोपड़ी से बाहर निकलकर उस ड्रम से पानी लेकर अपने आप को साफ किया।
तब तक वो भी आई।
उससे चला ही नहीं जा रहा था, लँगड़ाकर चल रही।
मेरी हँसी निकल गई।
वो गुस्से में बोली- मेरी चूत दर्द के मारे फट रही और तुम हँस रहे!
फिर मैंने पानी से उसकी चूत-गाँड को साफ कर दिया।
झोपड़ी में आकर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और वापस गले लगकर किस किया।
मैंने टाइम देखा 4 बज गए।
वो बोली- अब जाओ तुम। मेरे घर वाले कभी भी आ सकते हैं।
मैंने बोला- ठीक है। पर अब दोबारा कब मिलेंगे?
वो बोली- कमीने! अभी भोसिया में बहुत दुख रहा।
मैंने बोला- मैं शाम को दवाई दे दूँगा। घर आओ तब। मैं रास्ते में दवाई लेकर आ रहा हूँ। तुम अपनी गाय-भैंस को लेकर आओ।
फिर एक बार गले लगकर किस किया और मैं आस-पास देखकर घर पर आ गया।
दुकान से दर्द की गोली लेकर मैं वापस उसके खेत की तरफ गया तो रास्ते में वो धीरे-धीरे आ रही थी।
तो मैंने उसको टैबलेट दे दी और कहा- ये दवाई रास्ते में ही ले लेना ताकि घर जाएगी तब तक दर्द कम हो जाएगा।
उसने कहा- ठीक।
फिर मैं दूसरे रास्ते से वापस घर आ गया।
ये रही मेरी रियल घटना।
कैसे लगी आपको?
मुझे रिप्लाई देकर ज़रूर बताना।
ये मेरी पहली स्टोरी है तो लिखने में कोई गलती हो गई तो माफ करना।
अगली कहानी में मैंने कैसे उसकी गाँड भी मारी और उसकी एक सहेली की भी चुदाई की, वो बताऊँगा।
गाँव की लड़की की पहली चुदाई कहानी कैसी लगी आपको?
deshiboy2382@gmail.com