गाँव की कुंवारी लड़की की कहानी में मेरे पड़ोस की एक लड़की मेरे दोस्त थी। एक बार गली के कुत्ते कुतिया का सेक्स देख कर हम दोनों गरम हो गए और मैंने उसे प्रोपॉज कर दिया।
दोस्तो, मैं नाम प्रदीप हूँ।
मैं राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का रहने वाला हूँ।
मैं आपको मेरे जीवन की एक सच्ची घटना, गाँव की कुंवारी लड़की की कहानी बताऊँगा।
मेरे पड़ोस में एक लड़की रहती थी जिसका नाम (बदला हुआ) प्रियंका था।
वो अपने मम्मी-पापा, एक छोटा भाई 12 साल का और एक छोटी बहन 8 साल की के साथ रहती थी।
प्रियंका एक सेक्सी फिगर वाली 19 साल की लड़की थी।
उसने 12 पास कर ली थी।
प्रियंका ज्यादा खूबसूरत तो नहीं थी, पर उसकी जवानी और मोटे बूब्स देखकर हर किसी का लंड खड़ा हो सकता था।
उसका पहनावा गाँव जैसा था इसलिए ज्यादा उस पर कोई ध्यान नहीं देता था।
प्रियंका का घर और मेरा घर पास-पास ही था।
बीच में एक रास्ता था।
उसके और मेरे परिवार में अच्छी पटती थी।
वो कभी-कभी हमारे घर आ जाती थी या मैं उसके घर चला जाता था, कोई भी काम हो तो।
एक दिन दोपहर में मैं और प्रियंका उसके घर के बाहर बैठे थे।
तभी एक कुत्ता और कुतिया आए और सेक्स करने लग गए।
थोड़ी देर में हमारी दोनों की नज़र कुत्ता-कुतिया पर पड़ी।
जिसे देखकर मैं मुस्कुराते हुए प्रियंका की तरफ देखा तो वो भी मुस्काने लगी।
इतने में कुत्ता-कुतिया आपस में चिपक गए।
वो उनको ही देखने लगी.
तो मैंने पूछा- क्या देख रही हो।
प्रियंका- कुछ नहीं। मेरे बहुत काम पड़े हैं घर के!
ऐसे बोलके शर्माते हुए घर के अंदर चली गई और गेट लगा दिया।
मैं वहीं कुत्ता-कुतिया का वीडियो बनाने लगा।
उसके बाद मैं घर पर आ गया।
दो-तीन दिन में भी उस बात को भूल गया।
एक दिन दोपहर में मैं घर पर बैठा फोन चला रहा था।
तभी वो वीडियो दिखाई दिया तो मुझे उस दिन की याद आई।
मैंने सोचा कि प्रियंका को दिखाऊँ ये वीडियो।
मैं घर से बाहर निकलके देखा तो वो अकेली उसके घर के बाहर बरामदे में बैठी थी।
मैंने सोचा अच्छा मौका है, बात की जाए।
मैं गया उसके घर और उससे बात करने लगा- घर पर और कौन-कौन है?
प्रियंका- कोई नहीं है।
मैं- कहाँ गए?
प्रियंका- मम्मी-पापा खेत पर गए और भाई-बहन दादा-दादी के घर गए।
मैंने उससे पानी माँगा तो वो पानी लाई।
मैंने पानी पिया और वो लोटा अंदर रखकर वापस मेरे पास आकर बैठ गई, मेरे साथ फोन देखने लगी।
अचानक वो वीडियो आ गया, जिसको मैंने चालू कर दिया।
जिसको वो घूरकर देखने लगी।
फिर उसने मुँह उधर फेर लिया।
प्रियंका- तुम इसको बंद करो!
मैं- क्यों? क्या हुआ? तेरे को पसंद नहीं आया क्या?
प्रियंका- छिः! गंदा वीडियो बंद करो!
मैं- उस दिन तो उनको करते हुए देख रही थी।
प्रियंका- वो तो मैं बस ऐसे ही देख रही थी।
मैं- तो आज भी देख ले, ऐसे ही।
प्रियंका- फोन मुझे दो। मैं अंदर अकेले में देख के आऊँगी।
मेरा फोन घर के अंदर ले गई।
10 मिनट बाद मुझे लाकर दिया और दूर जाके बैठ गई।
मैंने देखा कि उसका चेहरा एकदम शर्म से लाल हुआ था।
मैं- क्या हुआ? दूर क्यों बैठी?
प्रियंका- मैं एक बात पूछ सकती हूँ?
मैं- हाँ, पूछो।
प्रियंका- अभी नहीं, बाद में।
मैं- बाद में कब?
प्रियंका- शाम को 10 बजे बाद।
मैं- वो कैसे?
प्रियंका- फोन पर मैसेज से।
मैं- तुम्हारे पास फोन है क्या?
प्रियंका- मेरी मम्मी का फोन है, की-पैड वाला।
मैं- ठीक। तुम मुझे अपना नंबर दे दो।
प्रियंका- नहीं। तुम मुझे अपना नंबर दे दो। मैं इनबॉक्स में मैसेज करूँगी। कॉल नहीं करूँगी।
मैं- ठीक।
मैंने उसको मेरा नंबर लिखके दे दिया।
इतने में उसके भाई-बहन आ गए तो वो उनके साथ घर में चली गई।
मैं भी घर पर आ गया।
शाम को खाना खाकर मैं अपने रूम में जाकर उसके मैसेज का इंतज़ार करने लगा।
रात 11 बजे एक अनजान नंबर से एक मैसेज आया- मैं प्रियंका।
मैंने भी हाँ किया और पूछा- हाँ बोलो, क्या पूछना है?
प्रियंका- मैंने दिन में वीडियो देखा। उसके बारे में कि कुत्ते का कुतिया के अंदर क्यों फँस गया।
मैं- क्या फँसा?
प्रियंका- अरे वो ही, कुत्ते की नुन्नी।
मैं- पहले उसको नुन्नी नहीं बोलते, लंड बोलते हैं।
प्रियंका- तुम वाकई में बेशर्म हो! अब बताओ।
मैं- क्या?
प्रियंका- कुत्ते का लंड कुतिया के अंदर क्यों फँसा?
मैं- अच्छा, वो क्या है कि जब कुत्ता और कुतिया चुदाई करते हैं तब कुतिया की चूत में अंदर जाकर कुत्ते का लंड आगे से फूल के बॉल के जैसा हो जाता है। तो वापस बाहर नहीं निकलता जब तक कुत्ते का पानी नहीं निकल जाता है।
प्रियंका- पानी क्या? वो सफेद निकलता है वो क्या?
मैं- हाँ। तेरे को कैसे पता?
प्रियंका- वो मेरी एक सहेली ने बताया कि चुदाई करने के बाद सफेद पानी निकलता है।
मैं- और क्या बताया तेरी सहेली ने?
प्रियंका- उसने एक लड़के से चुदाई कराई। उसकी स्टोरी बताई।
मैं- तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
प्रियंका- नहीं। तुम्हारी गर्लफ्रेंड है?
मैं- पहले थी, अभी तो कोई नहीं है।
मैं- मेरी दोस्त बनोगी?
प्रियंका शर्माते हुए बोली- सोच के बताऊँगी।
मैं मन में खुश होते हुए- काम हो जाएगा अपना।
दो-तीन दिन वो दिखाई नहीं दी।
एक दिन वो पानी लेने जा रही थी तो मैं भी उसके पीछे-पीछे गया पानी लेने हैंडपंप पर।
उस समय कोई नहीं था तो मैंने उसका जवाब पूछा।
तो बोली कि किसी को पता नहीं चलना चाहिए और रात को 9 बजे घर के पीछे आ जाना।
मैं खुश होते हुए इधर-उधर देखके एक किस कर दिया।
वो मुझसे हल्का धक्का देकर अलग हो गई।
फिर हम घर आ गए।
दिन निकल नहीं रहा था, 1 मिनट 1 घंटे के बराबर लग रहा था।
शाम को जैसे 9 बजे, मैंने देखा घर पर सब सो गए।
गाँव में सब जल्दी सो जाते हैं।
मैं धीरे से बाहर निकला, धीरे से उसके घर के पीछे गया।
1 मिनट बाद पिछला गेट धीरे से खोलके बाहर आ गई और मुझे थोड़ा आगे चलने को कहा।
वो भी मेरे पीछे आ गई और मुझसे चिपक गई।
उसके मोटे बूब्ज़ मेरी छाती से दब गए।
मुझे मज़ा आने लगा।
मैं उसको किस करने लगा।
वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसके बूब्ज़ को दबाया हल्का सा।
वो झटके से अलग हो गई।
मैं बोला- क्या हुआ?
वो बोली- किसी ने पहली बार ऐसे छुआ।
मैं उसको दुबारा किस करने लगा, साथ ही बूब्ज़ दबा रहा था।
मैंने एकदम उसकी चूची को मसल दिया तो उसने आहह कर दिया और बोली- धीरे से दबाओ!
फिर भी मैं जोर से दबा रहा था।
इतनी देर में मेरा लंड खड़ा हो गया तो उसकी चूत के अंदर घुसने लगा।
प्रियंका- ये नीचे क्या चुभ रहा?
मैं- ये मेरा लंड है।
और मैंने पैंट की चेन खोलकर बाहर निकाल दिया और उनको हाथ में पकड़ा दिया।
उसने हाथ में पकड़ के वापस छोड़ दिया।
मैंने दुबारा पकड़ाया तो वो हाथ से आगे-पीछे हिलाने लगी।
मैंने उसके सलवार का नाड़ा खींच के खोल दिया।
अंदर हाथ डाला और पैंटी के ऊपर से चूत सहलाने लगा।
उसकी पैंटी हल्की सी गीली होने लग गई, उसने आह किया और मेरे लंड को जोर से दबाया।
मैं उसकी सलवार और पैंटी को नीचे करके चूत सहलाने लगा।
वो आँखें बंद करके जोर से सिसकियाँ लेने लगी।
प्रियंका भी मेरे लंड को जोर से हिलाने लगी।
मैंने उसको लिपकिस करने लगा जिससे उसकी आवाज़ बाहर नहीं निकले।
और फिर मैं उसकी चूत में जोर से उँगली करने लगा।
5 मिनट बाद उसका बदन अकड़ने लगा और मेरे लंड को उसने कसके पकड़ लिया।
और प्रियंका झड़ने लगी।
मुझे भी अपने आप पर कंट्रोल नहीं रहा।
मैंने भी पिचकारी मार दी सीधी उसके चूत पर जा लगी।
प्रियंका के चूत का पानी मेरे हाथ से होते हुए उसकी सलवार-पैंटी पर जाने लगा और मेरा पानी भी उसकी चूत से होते हुए सलवार पर जा गिरा।
दोनों झड़ने के बाद अलग हुए।
मेरा हाथ उसके पानी और मेरे पानी से सना था।
उसने अपनी सलवार से साफ कर दिया।और पैंटी-सलवार पहनने लगी।
मैं- अरे ये तो गंदी हो गई और गीली भी!
प्रियंका- अंदर जाके दूसरी पहन लूँगी।
मैं- अभी मन नहीं भरा, एक बार चुदाई करते हैं।
प्रियंका- अभी नहीं। कोई आ जाएगा। बाद में जब मौका मिलेगा तो मैं बता दूँगी।
वो भी अंदर चली गई।
2 दिन बाद रात 9 बजे एक अनजान नंबर से कॉल आया।
मैंने उठाया तो उधर से धीरे से उसकी आवाज़ आई।
मैं उसकी आवाज़ पहचान गया।
प्रियंका- ये मेरे पापा का नंबर है। कल मेरे मम्मी-पापा मेरे भुआ के वहाँ जा रहे हैं। कल मैं दिन में खेत पर अकेली रहूँगी। भाई-बहन घर पर रहेंगे। 12 बजे खेत पर आ जाना।
मैं- ठीक है।
यह बोल के उसने फोन काट दिया।
मुझे ये सोच-सोच के रात भर नींद नहीं आई।
सुबह लेट उठा।
नहा-धोकर बाहर निकला तो 9 बज रहे थे।
मैंने नहाते टाइम अपनी जांघें साफ कर ली थीं।
थोड़ा इधर-उधर टाइम पास करके मैं 11:30 से घर से निकला।
उसके खेत पर पहुँचा 12:05 हो गए।
वो खेत की मेड़ पर खड़ी मेरा इंतज़ार कर रही थी।
उसने मुझे इशारा किया कि खेत की मेड़ पर बनी एक घास की टपरी में आ जाओ।
मैं उसके पीछे-पीछे टापरी में चला गया।
झोपड़ी में एक चारपाई पड़ी थी और नीचे तरपाल बिछा रखा था।
मैं चारपाई पर बैठ गया।
प्रियंका ने मुझे मटके से ठंडा पानी पिलाया।
वो भी मेरे पास में आकर बैठ गई।
आज वो एक मस्त माल लग रही थी।
लाल रंग का सलवार-कुर्ता पहन रखा था।
मुझे तो उसके जिस्म की खुशबू उसके पास में खींचने लगी।
मैं सीधा उसके मुँह के पास होठ ले गया और उसके होंठ चूसने लगा।
प्रियंका एकदम हुए हमले से घबराकर मुझसे छूटने लगी।
पर मेरी पकड़ मजबूत थी तो छूट नहीं पाई।
धीरे-धीरे वो भी मेरा साथ देने लगी।
10 मिनट तक हम ऐसे ही एक-दूसरे का होंठ रस पीते रहे।
मैं एक हाथ से उसके बूब्ज़ दबाने लगा, एक हाथ से उसका कुर्ता ऊपर कर दिया।
अंदर उसने काले रंग की ब्रा पहन रखी थी।
काली ब्रा में से उसके मोटे-मोटे बाहर निकलने को बेताब हो रहे थे।
मैंने एक से ब्रा का हुक खोल के आज़ाद कर दिया।
अब मैं दोनों हाथ से बूब्ज़ दबाने लगा।
वो आहह की आवाज़ निकालने लगी।
मैं उसके एक बूब को मुँह में लेकर चूसने लगा, एक हाथ से दूसरे को दबा रहा था।
एक हाथ को उसके पेट पर घूमते हुए सलवार के ऊपर से चूत सहलाने लगा।
वो सिसकियाँ ले रही थी।
मैंने उसका नाड़ा खोल दिया और उसकी पैंटी में हाथ डाल दिया।
जैसे उसकी चूत पर हाथ रखा, प्रियंका उछल पड़ी।
उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया।
मैंने उसकी चूत सहलाना चालू रखा।
ऊपर से दूसरे दूध को चूसने लगा।
वो मुँह से सिसकियाँ लेने लगी।
फिर मैंने उसको चारपाई पर लिटाकर सलवार निकाल दी।
अब वो सिर्फ एक ब्लैक पैंटी में रह गई।
पैंटी को भी मैंने उसके सहयोग से निकाल दी।
अब वो मादरजात नंगी पड़ी थी मेरे सामने।
उसने अपने हाथ से आँखें बंद कर लीं, वो शर्माने लगी।
मैंने उसके दोनों पैर को पकड़कर चौड़े कर दिए तो उसकी अंदर से चूत गुलाबी दिखने लगी।
मुझसे अब कंट्रोल नहीं हो रहा तो मैं सीधा उसकी चूत पर मुँह लगा दिया।
वो एकदम उछल पड़ी।
उसके पूरे शरीर में करंट दौड़ गया।
वो आहहह हहह उम्म्म्म करने लगी।
मैं उसके चूत से नमकीन रस को चूसने में इतना मगन हो गया कि उसकी सिसकियों पर ध्यान ही नहीं दे रहा।
5 मिनट रसपान करने के बाद प्रियंका ने मेरा मुँह चूत से हटा दिया, बोली- आज ही खा जाओगे क्या?
इसी बीच मेरा लंड इतना टाइट हो गया कि अभी पैंट फाड़के बाहर आ जाएगा।
मैंने एक ही झटके में पैंट उतार फेंकी।
पैंट के साथ चड्डी भी निकल गई।
एकदम से मेरा लंड प्रियंका के मुँह पर जा लगा।
वो एकदम पीछे हट गई।
बोली- बाप रे! इतना बड़ा कैसे जाएगा अंदर? मेरी तो आज भोसड़ी फट के चौड़ी हो जाएगी!
मैंने बोला- अभी देखना, आराम से चला जाएगा। पता भी नहीं चलेगा।
मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रखा और पकड़ा रहा, धीरे आगे-पीछे किया।
फिर वो अपने आप आगे-पीछे करके मेरे लंड की मुठ मारने लगी।
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, मैंने आँखें बंद कर लीं।
एक हाथ से वो मेरी नीचे लटक रही गोलियों को सहलाने लगी।
मैं तो आनंद के सागर में गोते लगाने लगा।
अचानक मुझे लगा कि मैं झड़ जाऊँगा।
तो मैंने उससे लंड छुड़ा लिया।
पूरी चुदाई अगले भाग में!
अभी तक की गाँव की कुंवारी लड़की की कहानी कैसी लगी आपको?
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