जवान चुदासी तीन ममेरी बहनों को पेला- 4

Views: 0 Category: Brother-Sister By susmitasenwar Published: October 04, 2026 📖 11 min read
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वर्जिन सिस्टर की चुदाई कहानी में मेरी 3 ममेरी बहनें पूरी नंगी एक साथ मेरे साथ थी, तीनों को मेरे लंड की जरूरत थी पर मैंने सबसे छोटी वाली को पहले चोदने का तय किया.

दोस्तो, मैं दीपक चौधरी आपको सुष्मिता जी के जरिए अपनी सेक्स कहानी में अपनी ममेरी बहनों की चुदाई की सच्ची घटना सुना रहा था.

कहानी के तीसरे भाग
सीलबंद बहन की गांड मारने की कोशिश
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि उस वक्त कमरे में चुदाई का माहौल बन गया था और रमणी मेरे लंड की सवारी करने की तैयारी कर रही थी.

अब आगे वर्जिन सिस्टर की चुदाई:

मैंने उसको अचानक से खींचा और अपने सीने के ऊपर गिरा लिया.
मैं उसके होंठों को चूसने लगा.

वह भी पूरे जोश में थी तो मेरे होंठों को अपने होंठों से पकड़ कर जोर जोर से चूस रही थी.
वह पैंटी पहनी हुई ही अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ने लगी थी.

वह वासना से वशीभूत हो गई थी.
मेरा लंड भी उसकी हरकतों से लोहे की तरह सख्त हो गया था.

मैं उसकी पीठ के ऊपर अपने दोनों हाथों को ले गया और ब्रा का हुक खोल दिया.
उसने ब्रा को हटा कर दूर फेंक दिया.

मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से अलग हटाए और उसकी चूचियों की तरफ होंठ बढ़ा दिए.
उसके दोनों दूध ब्रा की कैद से आजाद हो गए थे तो मैंने हाथ से दोनों को पकड़ा और बारी बारी से दोनों को चूसने लगा.

कुछ देर बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया और उसके ऊपर आ गया.

मैं बूब्स को चूसने लगा और मसलने लगा.
काफी देर तक ऐसे ही बारी बारी से दोनों बूब्स के साथ खेलता रहा.

बीच में कभी कभी मैं उसके निप्पल को दांतों से काट भी लेता तो वह जोर से ‘आह … ई… स सी! की गर्म सिसकारी मार देती.

अब मैंने रमणी दीदी की पैंटी को निकाल दिया और उसकी चूत पर हाथ फिराया.
दीदी की चूत काफी गीली थी.

मैंने दो उंगलियां एक साथ चुत के अन्दर डाल दीं.
रमणी दीदी कराह उठी मगर जल्द ही वह नॉर्मल भी हो गई.

उसकी इस हरकत से मुझे मालूम चल गया कि ये अब तक काफी चुदी चुकी है.

मैंने रमणी की दोनों टांगें ऊपर की और दोनों को अपने कंधों पर रख लिया.
फिर उसकी गीली चूत पर लौड़ा सैट किया और जोर से अन्दर पेल दिया.

आह की आवाज के साथ आधा लंड चुत के अन्दर घुसता चला गया.
रमणी दीदी जो अपने दांत पर दांत चढ़ा कर दम साधे लंड के हमले का इंतजार कर रही थी, वह लंड लेते ही ‘ऊंह मर डाला रे!’ चिल्लाई.

तभी मैंने एक और झटका लगा और पूरा लंड घुसेड़ दिया.
वह बिलबिलाने लगी.

मैंने रुक कर थोड़ी देर उसको किस किया, उसके निप्पलों को उंगलियों से दबाते हुए उमेठा.
इस तरह से उसका दर्द बंट गया और वह चुत के दर्द को भूलने लगी.

कुछ देर में वह नॉर्मल हो चुकी थी और अपनी कमर को हिला हिला कर मेरा साथ देने लगी थी.

मैं अब उसे जोर जोर से चोदने लगा था और वह किसी माहिर खिलाड़िन की तरह गांड उठा उठा कर चुत चुदवा रही थी.

उसने मेरी आंखों में आंखें डाल कर कहा- आह बड़ा मजा आ रहा है … क्या लवड़ा है तेरा आह .. अह तुम बहुत तेज तेज शॉट मार रहे हो साले आज तो तूने मुझे मार ही डाला रे .. आह बड़ा हरामी भाई है … पति के जैसा चोद रहा है फाड़ डाल मेरी चुत को आह कुत्ता भाई!

इसी सब बकचोदी करने के साथ साथ वह झड़ने लगी और ‘सीई आह मैं मर गई आह अह … छोड़ दे मुझे साले … अब सोनम को चोद ले!’ बोलती हुई मुझे धक्का देने लगी थी.
वह खुद को मुझसे अलग कर दी और लेट कर लंबी लंबी सांसें लेने लगी.

उधर सोनम हम दोनों की चुदाई देख काफी गर्म हो गई थी और चूत को मसल मसल कर बेहाल थी.
मैंने उसके हाथ को पकड़ा और बेड पर डॉगी पोज में कर लिया.

वह भी आसानी से कुतिया के जैसी हो गई.
मेरा एक बार कविता की गांड में वीर्य निकल चुका था, इसलिए अभी मेरे लंड को झड़ने की कोई जल्दी नहीं थी.

रमणी दीदी बहुत ज्यादा झड़ गई थी तो उसे वापस गर्म होने में समय लग सकता था.

सोनम डॉगी पोज में थी, तो मैं नीचे बैठ गया और अपनी जीभ से कुत्ते की तरह सोनम की चूत चाटने लगा.
सोनम काफी गर्म हो गई थी, अगर मैं थोड़ी देर और चाटता तो वह मेरे मुँह में ही पानी छोड़ देती.

इसलिए मैं उठा और अपना लंड को सैट करके एक बार में ही अन्दर डाल दिया.
लंड लेते ही सोनम भी चिल्लाई मगर वह बहुत जल्द मेरे लंड से चुत चुदवाने का मजा लेने लगी.

वह थोड़ी गालीबाज थी और मुझे गाली देने लगी- साले, तेज तेज चोद न … धीरे धीरे क्या चोद रहा है!

मुझे उसकी गाली सुनकर मजा आ रहा था और मेरा जोश भी दुगुना हो गया था.
मैंने भी उसकी गांड पर थप्पड़ मार मार कर चोदना चालू किया- साली छिनाल गाली देती है कुतिया!

मैंने एक हाथ से उसकी चोटी को पकड़ा और दाहिने हाथ से गांड पर थप्पड़ मारता रहा.
मैं इतने जोरदार झटके मार कर चोद रहा था कि पूरी कमरा सिर्फ मेरी जांघों और उसके नितंबों की टकराहट से चट चट और थप्पड़ की थपाड़ थपाड़ की की आवाजें से गूंज रही थीं.

उधर सोनम दर्द और मजे कराह रही थी मगर अपनी कमर को जोरदार जबावी हमले के साथ मेरे लंड पर पटक रही थी.
फिर ऐसा भी समय आया कि वह भलभला कर झड़ने लगी और बेड पर गिर गई.

मेरा लंड बाहर निकल चुका था.
मैं अभी भी झड़ा नहीं था.

मैंने उसको दुबारा से सीधा करने की कोशिश की तो उसने मना कर दिया.
वह बोली- अब नहीं होगा मुझसे! तुम साले सांड की तरह चोदते हो!

मैंने आशा भरी नजरों से रमणी दीदी की तरफ देखा मगर वह हाथ हिलाती हुई बोली- आह मेरा हो गया … अब बाद में कभी!

मैं बोला- मुझे कविता को चोदना है!
तो रमणी दीदी बोली- वह अभी सील पैक है, उसे बहुत दर्द होगा और ऐसे भी तुम्हारा बहुत बड़ा है. हम दोनों नहीं झेल पा रही हैं तो ये कुंवारी चुत वाली कैसे झेलेगी. अगर कुछ हो गया तो हम सब पकड़े जाएंगे.

सोनम ने भी हां में हां मिलाई.
तभी कविता बोली- नहीं, मैं भी चुदूंगी. तुम दोनों ने मजा ले लिया और मेरी बारी आई तो पकड़ी जाने की बात कर रही हो. अगर मुझे चुदाई नहीं करने दी तो आज मैं मम्मी को सब बता दूंगी!

तभी रमणी ने गुस्से में कहा- साली कुतिया रंडी … चुदवा ले न … धमकी क्यों दे रही है. मैं तो तेरे भले के लिए ही बोल रही थी!
यह कह कर उसने गुस्से में कविता की ब्रा पैंटी फाड़ कर उसे पूरी नंगी कर दी.

वस्त्र के नाम पर कविता के जिस्म पर अब एक धागा भी नहीं था.

उसने कविता को मेरे लौड़े के ऊपर धक्का दे दिया और बोली- जा फटवा ले अपनी बुर!

मैंने कविता को संभाला और रमणी को समझाया- ऐसा क्यों कर रही हो! ये भी जवान हो गई है न … तो इसे भी लंड का मजा ले लेने दो!
मेरी बात सुनकर कोई कुछ नहीं बोला.

अब मैं कविता की बड़ी बड़ी चूचियों को मसलने लगा.
उसके दूध तीनों बहनों में बहुत सेक्सी थे.

मैं उसके एक दूध को चूसने लगा और अपनी जीभ उसके निप्पल के ऊपर रगड़ने लगा.
वह तो पहले से ही दो चुदाई देख कर गर्म हुई पड़ी थी.
अब मेरे स्पर्श से वह मदहोश होने लगी.

वह बोली- मुझे अपनी बीवी बना लो .. आज मेरी बुर की सील तोड़ कर मुझे अपना बना लो मेरे भाई! अब मैं तेरी हूं. चोदते वक्त मर भी जाऊं तो गम नहीं है! मेरी ये दोनों बहनें हमेशा किसी न किसी से चुदवाती रहती हैं और मुझे ज्ञान देती हैं!

अब मैं उसके चूतड़ों को दोनों हाथों से मसलते हुए किस कर रहा था.
मैंने उसे बेड पर चित लिटा दिया और चूत को सहलाने लगा.
फिर जीभ से चाट कर चुत को रसीला कर दिया.

फिर मैंने अपनी बीच वाली उंगली उसकी बुर में डाल दी और चूत को मसल कर ढीला करने लगा था.
उंगली चुत में ज्यादा अन्दर जाने पर कविता मेरे हाथ को बार बार पकड़ ले रही थी.

मैंने सोनम को इशारा किया, तो सोनम ने आकर कविता के मुँह पर अपनी चूत रख दी और वह बैठ गई.
वह सिसियाती हुई बोली- आह चाट कुतिया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… बहुत चुदाने का चुल्ल चढ़ी है!

दूसरी तरफ मैंने कविता के दोनों पैरों को ऊपर की तरफ उठाया और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा दिया.
अब उसकी चूत का मुँह ऊपर को हो गया.
उंगली चलाने से उसकी बुर खुली सी लग रही थी.

मैंने बहुत सारा थूक अपने लौड़े पर मला और उसकी बुर में भी थूक डाल कर उसे चिकना कर दिया.
फिर अपने लंड का टोपा उसकी चूत की फांक पर सैट किया और एक जोरदार झटका दे मारा.

मेरा लंड अभी थोड़ा सा ही अन्दर गया था कि कविता चीख पड़ी.
वह तो अच्छा था कि सोनम ने अपनी चूत से उसकी मुँह बंद रखा था तो उसकी आवाज घुट कर रह गई.

तभी मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर को खींचा और दुबारा दोहरी ताकत से धक्का मार दिया.
इस बार लंड काफी अन्दर जा चुका था.

कविता ने गुस्से से सोनम धक्का देकर अपने मुँह से गिरा दिया और छटपटाती हुई बोली- आह छोड़ो … मुझे नहीं चुदवाना है. रमणी दीदी, मुझे बचा लो …. मैं मर जाऊंगी.
रमणी दीदी हंस रही थी और बोली- फड़वा लो मेरी रंडो … बहुत खुजली हो रही थी न तेरी बुर में!

मैंने कविता को पूरी ताकत से दबा कर रखा था मगर वह बार बार छुड़ाने की कोशिश कर रही थी.
तभी रमणी ने उसके करीब आकर उसके आंसू पौंछे और बोली- कुछ नहीं होगा. सब ठीक हो जाएगा … मैं हूं न!

फिर रमणी मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दी और वह कविता के बूब्स को चूसने लगी.
रमणी काफी शातिर खिलाड़ी लग रही थी, उसके चूसने से कविता थोड़ी थोड़ी सामान्य होने लगी थी और हल्के स्वर में कराह रही थी.

मैंने महसूस किया कि वह अपनी कमर भी धीरे धीरे हिलाने लगी थी.
मैं समझ गया था कि अब कविता मजा ले रही है.

मैंने रमणी दीदी की ठोड़ी पकड़ कर उसे ऊपर किया और रमणी के होंठों को चूसने लगा.

उसने भी साथ दिया और मुझसे अलग हो गई.
वह बोली- नई चूत मुबारक हो!

अब मैं जोर जोर से कविता को चोद रहा था और कविता भी अपनी गांड उठा उठा कर चुदवा रही थी.
उसके चेहरे पर दर्द का कोई नामोनिशान नहीं था.

फिर मैंने लवड़ा बाहर खींचा तो कविता तड़फ कर बोली- क्या हुआ क्यों निकाल लिया?
मैंने बोला- अब घोड़ी बन जा!

वह झट से घोड़ी बन गई.
मैंने उसे घोड़ी बना कर पेलना चालू किया.
वह पूरी जोश के साथ कमर हिला हिला कर चुदवा रही थी.

बहुत ही कसी हुई चूत होने के कारण मुझे लगा कि अब मेरा रस निकल जाएगा.
कुछ देर चोदने के बाद मैंने उसे फिर से मिशनरी पोज में लिटा दिया और उसके दोनों पैर ऊपर उठा कर लंड को अन्दर पेल दिया.

कविता आउच … करके मुझसे बोली- आराम से चोदो न!

मैं उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर उसकी जोरदार चुदाई करने लगा.
कविता अपने दोनों हाथ की मुट्ठियों से कभी बिस्तर का चादर पकड़ती, तो कभी वह मुझे अपने हाथों से रोकने की नाकाम कोशिश करती.

वह जोर जोर से ‘आह … आह … ई आह आह मम्मी आह आह.’ कर रही थी.
मैं उसके कंधों को पकड़ कर पूरी रफ्तार से वर्जिन सिस्टर की चुदाई कर रहा था.

तभी कविता ने अपना सिर ऊपर उठाया और मेरे कंधों में अपने दांत गड़ाती हुई आह आह करने लगी.
वह कंपन करती हुई झड़ने लगी.

उसका पूरा शरीर कांप रहा था.
मैं भी उसकी कंपन को बर्दाश्त नहीं कर पाया और मैंने उसके अन्दर ही अपना सारा माल छोड़ दिया.

अब कविता ने मेरे कंधों से अपनी जकड़न हटाई और निढाल होकर गिर पड़ी.
मैंने भी झड़ा हुआ लंड चुत से बाहर निकाला तो उसके ऊपर खून और चूत रस और लगा हुआ था.

मैंने कविता को एक किस किया और सहारा देखर उठाया.
वह बोली- बहुत दर्द हुआ मगर मजा भी बहुत आया!

ये सुनकर दोनों बड़ी बहनें खिलखिला कर हंसने लगीं.

मैंने समय देखा तो तीन बजने वाले थे.
मैं बोला- अब तुम सब लोग साफ सफाई करके कपड़े बदल लो. मैं अपने घर जा रहा हूँ. मामी के भी आने के समय हो रहा है!

सभी ने सहमति जताई.

जब बाथरूम जाने के लिए कविता उठी तो वह एक कदम भी नहीं चल पा रही थी.

उसकी दोनों बड़ी बहनों ने उसको संभाला.
मैंने कहा- दर्द वाली दवाई है क्या घर में?

रमणी बोली- हां मेरे पास रखी हूं, मैं उसे दे देती हूं.
मैंने कहा- गर्भ निरोधक तो रखे ही होगी! वे भी तुम तीनों कहा लेना!

सोनम बोली- तुम ज्यादा ज्ञान न दो. हम लोग सब जानती हैं!
रमणी हंस दी.

मैंने अपने कपड़े पहने और उनके घर से बाहर आ गया.
दोस्तो, ये थी मेरी तीन ममेरी बहनों की चुदाई की सेक्स कहानी.

वर्जिन सिस्टर की चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज आप सुष्मिता चौधरी की मेल आईडी पर जरूर फीडबैक दें.
susmitasenwar@gmail.com

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