सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी में मुझे सेक्स का शौक होने लगा था पर मुझे लंड नहीं मिला था. मेरा छोटा चचेरा भाई मुझ पर ट्राई मारता था. मैं भी उसे करने देती थी.
नमस्कार दोस्तो, मैं वृत्ति आप लोगों के लिए लेकर आई हूँ एक मजेदार सेक्स कहानी जो मेरी सहेली की है।
मेरे सहेली और उसके चचेरे भाई के बीच जागी अंतर्वासना की है।
तो आप लोगों को पता ही है कि हम राजस्थान के बाड़मेर इलाके के रहने वाले हैं।
हमारे यहाँ पशु पालन एक रोजगार का बहुत ही मुख्य जरिया है।
हमारे गाँव से थोड़ी ही दूरी एक गाँव में मेरी सहेली मनीषा चौधरी का परिवार रहता है।
मनीषा चौधरी का परिवार एक संयुक्त परिवार है जिसमें मनीषा के माता-पिता और मनीषा के दो भाई और एक बहन और मनीषा के चाचा-चाची और दो चचेरे भाई और दादा-दादी एक साथ ही एक ही घर में रहते हैं।
यानी कुल 12 लोगों का बड़ा सा परिवार एक साथ एक ही घर में रहता हैं, वैसे घर काफी बड़ा है।
मनीषा स्कूल की पढ़ाई पास करने के बाद घर पर ही रह रही थी।
अब वो जवान हो गई है, उसके मन में तरह-तरह के उमंगें, जोश और एक अलग ही सरसराहट महसूस करती थी।
ऐसी मन में भावनाएं जगतीं कि कोई उसे सहलाता, उसकी बालों से खेलता, कोई उसे जोर से गले लगा लेता!
मगर घर के सख्त पाबंदियों के वजह से घर से निकलना भी दूभर था।
और ऊपर से बड़ा परिवार होने की वजह से किसी दूसरे व्यक्ति से घर में या घर के आस-पास चुदाई करवाना भी मुश्किल था।
घर में बैठे-बैठे बोर होने के वजह से वो अपने चचेरे भाई जिसका नाम महेंद्र चौधरी था, के साथ पशु चराने जाती थी।
वैसे हमारे यहाँ बारानी फसल होने के कारण केवल बारिश के मौसम में ही खेती होती थी।
पशु ढाणी के आस-पास चराने जाते थे तो महेंद्र के साथ-साथ मनीषा भी पशु के चराने जाती थी क्योंकि उसके दोनों सगे भाई स्कूल में पढ़ते थे और छोटी बहन भी पढ़ती थीं।
और उसकी बहन के बड़ी होने पर साथ में शादी करने के लिए भी उसकी शादी में देर हो रही थी, इस कारण पशु चराने मनीषा को ही जाना पड़ता था।
महेंद्र, मनीषा से दो साल छोटा था जो लगभग उन्नीस साल का रहा होगा, वहीं मनीषा 21-22 साल की थी।
यहाँ से मनीषा की आगे की कहानी उन्हीं के शब्दों में सुनिए कि कैसे महेंद्र ने उसकी चूत पर अपना वीर्य डाला था।
हेलो दोस्तो, मैं मनीषा चौधरी आप सभी को अपनी ओपन डोर सेक्स कहानी बताने जा रही हूँ।
सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी से पहले मैं अपने बारे में बता दूँ।
मैं छरहरी बदन की एक बहुत ही कामुक लड़की हूँ।
मेरी उम्र अब 23 साल है। मेरी बॉडी फिगर 30 बूब्स, 28 की कमर और 32 की थोड़ी सी बाहर निकली हुई गांड है।
ये वासना से भरी कहानी 2 साल पहले की है जब तक मेरी सगाई भी नहीं हुई थी और अब तो मेरी शादी भी हो चुकी है।
इस कहानी में आप जानेंगे कि शादी से पहले जिस तरह जवानी में कदम रखते ही हर कोई चूत-लंड के लिए तड़पती है, उसी तरह की तड़प मेरे भी थी।
वो शांत हुई या नहीं, आगे की कहानी में आप जानेंगे।
ये तब शुरू हुई जब हम पशु चराने अपने चचेरे भाई के साथ ढाणी से दूर खेत में जाते थे।
मेरा भाई मुझसे दो साल छोटा है, वो हमेशा मुझे दीदी बुलाता है।
पता नहीं इधर कुछ दिनों से वो मुझे ज्यादा ही घूरता रहता है और बात-बात पर मुझे छूने की कोशिश में लगा रहता है।
वो शुरू से ही मुझे चोदना चाहता था लेकिन संयुक्त परिवार में हमें मौका बहुत ही कम मिलता था। इस कारण मैं उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देती थी।
लेकिन वो मुझे चोदना चाहता था क्योंकि वो अजीब तरह की हरकत करता था।
वो पशु चराते समय अक्सर मेरे साथ सेक्सी बातें करता था.
और उस समय भी उसके पास स्मार्ट फोन था लेकिन हमारे घर में किसी के पास नहीं था।
तो मैं उस पर मरती थी और वो मुझे फोन देता था तो मैं इंस्टा पर रील और यू-ट्यूब पर वीडियो आदि देखती थी।
उस दौरान वो मेरे बूब्स मसलना और चूत को भी छू लेता था।
मुझे भी फोन देखना होता था तो मैं मना भी नहीं कर पा रही थी!
ऐसे ही चलता रहा था, वो किसी न किसी बहाने मुझे उत्तेजित करता रहता था लेकिन मैं बहुत ही ज्यादा डरती थी, इस कारण ज्यादा पहल नहीं करती थी। लेकिन धीरे-धीरे मेरा भी मन होने लगा था।
एक दिन एक बकरी के ऊपर एक बकरा बार-बार चढ़ने की कोशिश करता मगर बकरी बार-बार छिटक कर भाग जाती।
तभी मेरे छोटा भाई महेंद्र ने बकरी को पकड़ लिया।
तब बकरा बकरी के ऊपर अपने दोनों आगे के पैर उठा कर चढ़ गया और जोर से लंड पेल दिया, जिससे बकरी जोर से मेमियाने लगी और भागने लगी।
तभी महेंद्र बोला- मज़ा ले लिया, फिर भी मेमिया रही है!
“मैं उसकी बातें सुनकर अपना चेहरा दूसरी तरफ कर ली।
तभी महेंद्र बोला- दीदी! थोड़ा बकरे को पकड़ कर रखो, मैं बकरी को दोबारा लाता हूँ, एक बार और चढ़वाते हैं!
मैं बकरे को पकड़ कर वहीं खड़ी हो गई क्योंकि बकरी को गयाभिन करना था।
महेंद्र बकरी को जब लेकर आया तो बकरा जोर से झटका दे कर मेरे हाथों से छूट गया और जाके जल्दी से बकरी के ऊपर बो-बो करते हुए चढ़ गया और अपनी नर निकाल कर एक ऐसी जोर का झटका मारा और बकरी की चूत में डाल दिया!
बकरी की आगे और पीछे की चारों पैर एक जगह पे आ गई और बकरी अपनी पीठ को सिकोड़ कर ऊंची करके चिग्घाड़ मारी।
मेरा भाई जोर से हंसा और बोला- काम बना दिया इसका!
फिर मुझसे बोला- दीदी! अभी तो बकरी को बहुत मज़ा आया होगा न!
मैं बोली- मैं क्या जानूँ!
और गुस्से से उसकी तरफ देखा तो वो चुप हो गया।
इसके पहले मेरे और भाई के बीच वैसा कुछ भी नहीं था।
मगर इस छोटी सी घटना ने मेरे अंदर वासना की आग को हवा दे दी और भाई के प्रति पहली बार सोचने का नजरिया ही बदल गया।
अब महेंद्र को अपने भाई के नजर से न देख कर एक लड़के के नजर से देखने लगी।
दोपहर हो चुकी थी, हम लोगों ने अपने पशुओं को वहीं पर इकट्ठा किया और दोपहर का खाना खा कर ढाणी में ही आराम करने लगे।
अभी तक हमारे घर के बाकी परिवार खेत से ढाणी नहीं आये थे।
हम एक चारपाई पर लेट गए और थोड़ी देर में हमारी आँखें लग गई।
तभी मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे पेट के ऊपर कुछ रेंग रहा है।
मेरी नींद खुल चुकी थी, चेतना वापस आ चुकी थी।
फिर मालूम हुआ कि ये कोई कीड़ा नहीं है बल्कि मेरे चचेरे भाई महेंद्र का हाथ है!
वह मेरे सो जाने के बाद मेरे बगल में लेट गया था और बहुत ही हल्की हाथों से मेरे पेट को सहला रहा था।
मैंने अपनी आँखें बंद ही रखीं और उसकी हरकतों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी।
अब वह धीरे-धीरे हाथ चलाते हुए ऊपर तक ला रहा था।
मेरे अंदर एक अजीब सी सरसराहट महसूस होने लगी।
फिर उसका हाथ थोड़ा और ऊपर की तरफ आया और मेरी ब्रा में कसी चूचियों से टकरा गया.
मेरे अंदर एक हलचल सी पैदा हो गई।
अब एक साथ हजारों चींटियां मेरे बुर में रेंगने लगी थीं!
मैं अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और कसमसाई और एक तरफ करवट लेकर लेट गई।
भाई को लगा मैं जग गई हूँ तो डर कर जल्दी से हाथ हटा लिया क्योंकि घर में होने पर मैं डांट भी सकती थी।
जब थोड़ी देर हो गई और उसे लगा कि मैं जागी नहीं हूँ, सिर्फ करवट बदल कर गहरी नींद में सो रही हूँ, तो उसने फिर से मेरी तरफ करवट ली।
अभी तक घरवाले नहीं आए हुए थे, तो उसने भी मौका देख कर अपनी दाहिनी हाथ को धीरे से मेरे चूचे पर रख दिया।
थोड़ी देर बाद अपनी हाथ को हरकत देनी शुरू की और मेरे दोनों चूचियों पर कपड़े के ऊपर से ही हल्की हाथों से सहलाने लगा।
ऐसा लग रहा था जैसे मेरे संतरों की गोलियों की नाप ले रहा हो!
मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था घरवाले आ सकते हैं।
मैं मना करूँ या फिर उसे ऐसा करने दूँ, यह भी समझ में नहीं आ रहा था।
मेरे बूब्स के निपल्स अब तन चुकी थीं!
तभी वह मेरे से अचानक अलग हो गया क्योंकि कमरे का गेट बजा था, जिससे महसूस हुआ था कि कोई आने वाला है।
मैंने अपने अंदर एक दहकती हुई ज्वाला को शर्म के चादर से ढक लिया और उसको फिर से कोई रिस्पांस नहीं दिया था।
फिर खाना खाया और हम वापस लौट कर चले गए!
मैंने भी ऐसा दिखाया जैसे कुछ भी नहीं देखा और सुना है, सब पहले जैसे ही होकर रहे थे।
भाई भी नॉर्मल ही व्यवहार कर रहा था।
अगले दिन रोजमर्रा की सुबह उठकर ब्रश किए, नहाए, फिर नाश्ता करके महेंद्र पशु चराने के लिए खेत में चला गया।
थोड़ी देर बाद मैं भी चली गई।
आज महेंद्र ने कई बार पशु चराने वाले डंडे से मेरी गांड पर दे मारा! जोर से नहीं लेकिन प्यार से मारा था।
डंडा मारने से मुझे दर्द कम, मज़ा ज्यादा आया।
मेरे पूरे शरीर में सिहरन पैदा हो गई।
मैंने भी बनावटी गुस्से में उसके बाल पकड़ कर नोच दिया और बोली- हाँ कुत्ते! तुम हो न बहुत बहादुर, फिर फटता क्यों है!
वह भी मेरी गाल पकड़कर हिलाने लगा।
मैं अपनी गाल छुड़ा कर उसकी बाल पकड़ने और मारने की कोशिश की.
तभी हम एक दूसरे से आपस में गुत्थम-गुत्थी हुए और एक हाथ महेंद्र का मेरे सीने पर आकर लगा और उसकी हथेली में पूरा मेरा दाहिने तरफ की चूची आ गई।
मेरी चूची उसकी हाथ में आने से उसने तुरंत मसल दिया था.
तो उसकी नियत देख कर उससे तुरंत अलग हो गई थी।
महेंद्र थोड़ी रुक कर बोला- दीदी! रोशन (मेरे पड़ोसी का लड़का) अपनी भाभी को चोदता है, उसने मुझे बताया था। इसलिए कल तुमको देख कर मैं बहक गया था। आप बहुत सेक्सी हो! आपकी पिछवाड़ा हिलता है तो मेरे शरीर में गलत भावना जाग जाती है। अब तुम मेरे साथ ही पशु चराने आना. नहीं तो पता नहीं वो कब तुझे पटाकर चोद दे!
मैं अपने से दो साल छोटे भाई के मुँह से ‘चोदता है’ जैसे शब्द को सुनकर अंदर से रोमांचित हो उठी और ऊपर से नाराज होते हुए बोली- अच्छा! और क्या-क्या बताया है उसने?
महेंद्र बोला- दीदी! जब रोशन के भाई काम पर चले जाते हैं, तो उसकी भाभी और रोशन दोनों आपस में खेलते हैं और मज़ा करते हैं। रोशन कहता है मेरे भैया भाभी को अच्छे से नहीं चोदते हैं इसलिए भाभी मुझसे चुदवाती है और प्यार से मेरा लंड मुँह में लेकर मुझे खेलती है। रोशन अपनी भाभी की गांड भी मारता है और बोलता है जब गांड मारता हूँ तो भाभी और जोर-जोर से गांड को हिलाती है और बोलती है कि रोशन मेरे दोनों चूची को पकड़ कर और जोर-जोर से मार। दीदी! उसकी भाभी बहुत गंदी है, अब मैं कभी उससे बात नहीं करता हूँ!
मैं बोली- अच्छा! तो ये बात है।
मैं उसकी चुदाई की कहानी सुनकर गर्म हो गई थी और रोशन की भाभी का ख्याल मन में आने लगा कि यह भी अपने देवर से गांड मरवाती है, कैसे लेती होगी, कितना अंदर जाता होगा!
मैंने पहली बार सुना है कि लड़कियां गांड भी मरवाती हैं।
फिर मैं बोली- अच्छा! ये बताओ कल तुम मेरी गांड के बारे में क्या बोल रहे थे?
उसने बोला- कुछ भी नहीं, या तूने मन से ही यह बात बना ली है!
मेरे जोर देने पर वह बोला- दीदी! तुम बहुत सुंदर हो। आप जैसी सुंदर लड़की मुझे पूरे गाँव में कोई नहीं दिखती है और आपके चूचे और पिछवाड़ा जब चलने के समय हिलते हैं तो मेरे मन में आपके प्रति वासना जग जाती है और तुमको चोदने का विचार मन में आने लगता है!
मैंने बोला- अच्छा! तुम गलत लड़के के साथ रह कर बहुत गंदे हो गए हो!
महेंद्र अब मुझसे खुलने लगा था, वो बोल पड़ा- दीदी! मुझे एक बार करने दो अपने साथ!
मैंने देखा कि उसके पैंट के अंदर लंड में तनाव आ गया था, जिसका उभार ऊपर से नजर आ रहा था।
मैं थोड़ी देर चुप रही क्योंकि मेरे अंदर भी हलचल मची हुई थी कल दोपहर से ही।
मैं बोली- ठीक! लेकिन सिर्फ कपड़े के ऊपर-ऊपर से!
वो बोला- ठीक है।
मैं बोली- इधर दूर से कोई देख सकता है।
फिर महेंद्र बोला- हम रोहिड़े के झुंड के बीच चलते हैं।
पशु को फसल से दूर पहुँचा कर हम दोनों रोहिड़े के झुंड के बीच चले गए जहाँ से कोई भी नहीं देख सकता था।
महेंद्र ने मुझे जोर से गले लगा लिया और मेरे होठों पर अपने होंठ रख कर मुझे चूमने लगा।
मैं भी अपने से दो साल छोटे भाई के साथ ओपन डोर सेक्स का मज़ा लेने लगी।
उसने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों खरबूजे जैसे निकले चूतड़ पकड़ कर भींच लिये और अपने आप से सटा कर मेरी गांड को मसलने लगा।
मेरे लबों को बेतरतीब चूसे जा रहा था।
मैं काफी गर्म हो गई थी।
फिर उसने पीछे घुमाया और अब अपनी दोनों हाथों से मेरे दोनों उरोजों को पकड़ कर दबाने लगा।
मुझे थोड़ी दर्द भी हो रही थी मगर मज़ा भी बहुत आ रहा था।
उसका लंड जींस में तनी चूतड़ों के बीच चुभ रहा था.
वहीं महेंद्र मेरे कंधों और मेरी गर्दन पर बेतहाशा चूमे जा रहा था।
अपनी जुबान निकाल कर वह कुत्ते की तरह कभी गर्दन, कभी ठोड़ी, कभी मेरे कान को अपने लबों से चबा रहा था।
मैं हवस में न जाने क्या-क्या बोले जा रही थी- आह… आह… मेरे भाई… मुझे चोद डाल भाई… ये कहाँ से सीखा… आह!
उसकी गर्म साँसें मेरी गर्दन पर पड़ने से मैं अपनी कुंवारी चूत चुदवाने के लिए पागल हुए जा रही थी।
तभी मेरे भाई ने एक हाथ से मेरी जींस की हुक खोल दी और पैंटी के अंदर सीधा हाथ डाल दिया!
इतनी देर से चूमा-चाटी, गांड और बूब्स को मसलने के कारण मेरी चूत रस से सराबोर थी।
चूत के रस की कुछ बूंदें मेरी पैंटी में टपक चुकी थीं, वो गीला-गीला लग रहा था।
मैंने अपने हाथों से उसे रोकने की कोशिश की मगर वो रुका नहीं और मेरी चूत को रगड़ने लगा।
अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रही थी, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरे अंदर से लावा फूट कर बाहर बह जाएगा!
मेरे मुँह से बहुत ही सेक्सी आवाज़ निकली- हम्म… आह… अब छोड़ दो… ई इ हेय दइया ओ ईई!
कभी उसकी उंगली ज्यादा अंदर की ओर जाती तो थोड़ी दर्द होती तो मैं उसका हाथ पकड़ लेती।
मुझे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मैंने भाई से बोला- अरे कुत्ते! मुझे छोड़, ऊपर से ही करने को बोला था!
उसने अपना गमछा थोड़ी जगह बना कर बिछा दिया और मुझे लेटने को बोला।
मैं उस पर अपनी गांड रख कर पसार गई।
भाई ने फिर अपनी पैंट और कच्छा एक बार में उतार कर घुटनों से नीचे कर दिया और मेरी जींस को भी पैंटी सहित थोड़ी सी नीचे खिसका दिया।
मैंने मना किया था थोड़ा बहुत!
फिर वह अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगा।
उसका लंड काफी अच्छा था, करीब छह इंच से ज्यादा था।
उसने अपनी ढेर सारी थूक उस पे मल दी।
इतनी देर हम दोनों सेक्सुअल एक्टिव थे कि उसका लंड ठुमक-ठुमक कर ऊपर-नीचे हो रहा था।
मैं बोली- जो करना है जल्दी करो!
उसने गर्म लंड को मेरी चूत पर सेट किया और एक ही धक्का दिया था!
लंड मेरी चूत में घुसा नहीं.
लेकिन उसने अपने लंड से ऊपर ऊपर से चार से पांच झटकों में बहुत सारा सफेद रंग का वीर्य मेरी चूत, पैंटी और जींस पर गिरा दिया!
सेक्सी लड़की की चुदाई पूरी किये बिना ही उसका लंड एकदम शांत हो गया।
उसने मेरी पूरी जींस गंदी कर दी!
वो जोर-जोर से हाँफने लगा और उठकर अपने कपड़े पहन लिए क्योंकि उसका खेल हो चुका था।
मैं भी अब उठ कर बैठ गई और बोली- क्या हुआ? मेरी जींस गंदी कर दी, मैं कैसे बाहर निकलूँगी?
लेकिन हमारा भी उस खेत में झोपड़ा था, वहाँ मेरी ड्रेस रहती थी।
वहाँ पर हम स्नान आदि करते थे.
तो मैंने तुरंत जींस बदल दी और उसको पानी में डाल दिया।
उसके 5 से 7 मिनट के बाद ही मैंने देखा कि मेरी मम्मी, बहन और चाची आ रही थीं!
मैं एकदम डर गई थी कि आज रंगे हाथों पकड़े जाते बच गई।
लेकिन मैं अपनी जवानी की आग वहीं बैठ कर जलती रही।
मेरी हालत वही समझ सकती है जिसे किसी ने अधूरा छोड़ दिया हो!
मुझे बहुत गुस्सा आया था।
उस दिन के बाद मैंने अपने चचेरे भाई से बातचीत ही बंद कर दी!
उसके बाद न तो महेंद्र को कभी मौका मिला था और न ही मैंने उसे कोई मौका दिया था।
पिछले साल मेरी शादी हो गई और सुहागरात को मेरे पति ने ही मेरी सील तोड़ी थी।
पहली बार लंड लेने के लिए मुझे लंबा इंतजार करना पड़ा था।
शादी के बाद भी महेंद्र ने चुदाई के सपने देखे थे लेकिन मैंने मना कर दिया था।
पति को भी टाइट चूत मिलने पर मज़ा आ गया था!
तो आप बताओ दोस्तो, मेरी सेक्सी लड़की की चुदाई कहानी कैसी लगी आपको?
आपके अच्छे-अच्छे और बड़े-बड़े मेल की प्रतीक्षा में!
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