सेक्सी सिस्टर किसिंग स्टोरी में मामा के घर में तीन बहनें मेरे पीछे पड़ गयी थी. उनको मेरे लंड लेने की लालसा थी. वे तरह तरह से मुझे उत्तेजित कर रही थी.
दोस्तो, मैं सुष्मिता चौधरी आज अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ हाजिर हूं.
पिछले भाग
मेरी ममेरी बहनों की वासना
में आपने इस कहानी के लेखक दीपक की कलम से पढ़ा था कि किस तरह से वह अपने मामा के घर गया था और वहां जाकर आम खाने के लिए मामा की बेटियों के साथ खेत में आ गया था.
वहां उसके मामा की बेटियों की नियति, उसे देख कर बदल गई थी.
दीपक के मामा की सबसे छोटी लड़की पेशाब करने के बहाने बाहर निकली थी तो काफी देर तक जब वह वापस नहीं आई तो दोनों ही बहनों ने दीपक को उसको देखने के लिए भेजा था.
अब दीपक की कलम से ही आगे सेक्सी सिस्टर किसिंग स्टोरी सुनें :
मैंने उनकी बात मान ली और मैं देखने के लिए कविता के पीछे चला गया.
जब मैं पीछे के दरवाजे को खोल कर गया तो मुझे थोड़ी दूर ही कविता नजर आ गई थी.
वह पेशाब करने के लिए ही उकड़ूँ बैठी थी और उसकी खुली हुई गांड मेरी ओर थी.
उसकी गांड बड़ी मस्त थी, देख कर मेरी धड़कन बढ़ गई.
उसके दोनों नितम्बों के बीच मस्त दरार थी.
उस दरार में अन्दर थोड़े थोड़े से बाल भी दिख रहे थे.
वह सब देख कर एक तरफ तो मुझे बहुत डर लग रहा था और दूसरी तरफ मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया था.
मेरा लंड उसकी गांड में घुसने के लिए तैयार था.
मैं सोच रहा था कविता की इतनी मस्त गांड देख कर हर कोई उसे चोदने की यूं ही नहीं सोचता होगा.
वाकयी में मेरी बहन चोदने लायक माल है!
सीन देख कर एक बार को तो मेरा मन भी हुआ कि मैं अभी इसी समय उधर जाकर कविता को घोड़ी बनाकर खुले में ही चोद दूं.
लेकिन मैं अभी भी डर रहा था और कविता अभी तक इतनी खुली हुई नहीं थी.
यदि जल्दबाजी में कोई कदम उठा लिया तो हो सकता था कि इस काम के कारण मेरी बदनामी हो जाए.
यह विचार आते ही मैंने एक नया प्लान बनाया.
मैं अनजान बनकर छोटे वाले रास्ते से अन्दर गया और चुपचाप उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया.
मैं उसकी पेशाब करने की छर्र छर्र की आवाज सुनने लगा था, बड़ी ही सुरीली आवाज आ रही थी.
वह शायद इतनी देर तक मूतने के बहाने से अपनी चूत में उंगली कर रही थी.
बाद में मुझे पता चला था कि वह मुझे आता देख चुकी थी और जानबूझ कर उसी वक्त पेशाब करने बैठी थी.
उधर शायद उन दोनों का यही प्लान था या फिर तीनों ने ही मिलकर यह प्लान बनाया था.
यह अभी मुझे नहीं मालूम था.
वे दोनों अपनी छोटी बहन को तो अपने प्लान में साथ रखना ही नहीं चाहती थीं लेकिन वह अपने आप घटित होने वाली घटना थी या कविता ने जानबूझ कर मुझे अपनी गांड दिखाई थी!
इस बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता था.
तभी कविता पेशाब करके खड़ी हुई तो मैंने देखा कि उसने पैंटी आदि कुछ भी नहीं पहनी थी.
उस समय वह घुटनों तक की गुलाबी फ्रॉक पहनी हुई थी.
उसने बस अपनी फ्रॉक नीचे गिरा ली और अचानक से पीछे मुड़कर मेरे सामने देखती हुई मुस्कराने लगी.
वह बोली- तुम कब से मुझे देख रहे थे बदमाश भैया … किसी को ऐसे देखते हैं क्या?
उसका भी ध्यान सीधे ही मेरे लंड पर गया तो में एक बार सकपका गया था.
उस समय मेरा लंड एकदम से खड़ा था, तो उसी वजह से मैं झट से पीछे मुड़ गया.
मैं बोला- अरे मैं तो बस अभी ही आया हूं और मुझे पता ही नहीं था कि तुम भी यहां हो?
वह मेरे करीब आई और मेरा हाथ पकड़ कर बोली- तुम अन्दर चड्डी क्यों नहीं पहनते हो?
मैंने सकपका कर कहा- पहनी हुई है तुमको दिखाई दे रही है?
वह आंखें नचाने लगी.
मैंने कहा- तुम भी नहीं पहनती हो क्या?
अब वह बोली- पहले पहनी हुई थी लेकिन अब गर्मी बहुत है न, इस कारण मैंने उतार दी है. लेकिन मेरा तेरी तरह कुछ भी खड़ा नहीं होता है!
यह कहकर वह हंस दी.
मैं भी हंसने लगा था.
मैं यह बोलने ही वाला था कि तेरा कैसा है, जो खड़ा नहीं होता है … लेकिन उससे पहले ही वह बोल उठी- तेरा यह क्या खड़ा होता है … दिखाना तो जरा!
मैं शर्माने की एक्टिंग कर रहा था.
शायद उसने मेरे लंड के उभार को देख कर कहा था कि चड्डी नहीं पहनते हो … क्योंकि चड्डी नहीं पहनने पर लंड का उभार बहुत ही ज्यादा दिखता है.
फिर उसने जब मुझे लंड दिखाने को कहा तो मैंने एकदम से मना कर दिया.
मेरा लंड बहुत बड़ा था और हो सकता कविता लंड देख कर डर जाती और खेल शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता.
तभी उसने एकदम से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से दबा दिया.
तब मैंने उचकते हुए कहा- अबे क्या कर रही हो … वे दोनों आकर देख लेंगी!
उसने कहा- अभी यहां कोई नहीं आने वाला है.
पर हम दोनों को यह नहीं पता था कि रमणी और सोनम हम दोनों को छुप कर देख रही थीं. वे दोनों मजे ले रही थीं कि ये दोनों यह क्या कर रहे हैं!
फिर जैसे मैंने लंड दिखाने के लिए अपनी पैंट नीचे किया तो रमणी का अचानक से हमला हो गया.
सोनम अन्दर चली गई थी और रमणी ने आवाज लगाई थी.
उसके बोलते ही मेरा लंड अपने आप झुकने व नीचे होने लगा था.
मेरी गांड फट गई थी.
छोटी बहन कविता ने लंड को बस अपने हाथ से पकड़ा ही था कि ये नाटक हो गया था!
फिर रमणी बोली- तुम दोनों यहां चोदा चोदी कर रहे हो और मैं और सोनम वहां आम काट कर तुम्हारा वेट कर रही हैं!
उसकी कड़क आवाज से मेरे शरीर में कंपकंपी सी छूट गई थी.
हालांकि मैं उसे एक बार चोद चुका था लेकिन तब भी पता नहीं क्यों डर लग रहा था.
कविता तुरंत वहां से भाग गई और हम दोनों ही वहां रह गए थे.
उस समय मेरा लंड दीदी से डरने के कारण एकदम से ही मुर्दा हो गया था.
फिर रमणी दीदी ने मुझसे कहा- कविता को क्या दिखा रहे थे? मुझे भी बताओ!
यह कह कर उसने एक बार फिर से मेरी पैंट को नीचे कर दिया और मेरा मुरझाया हुआ लंड उसके सामने आ गया था.
वह उसको हाथ में लेकर बड़े ही आराम से उसे देख रही थी.
उसने 4-5 बार लंड की चमड़ी को आगे पीछे किया, तो एक बार फिर से मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया.
तभी छोटे वाली बहन सोनम भी वहां आ गई और वह भी मेरे लंड को इसी तरह से मसलना चाह रही थी.
पर बड़ी दीदी के रहते हुए वह थोड़ी शर्मा रही थी.
इसी कारण से वह थोड़ी दूर खड़ी बस नजारा देख रही थी.
लेकिन ज्यादा देर तक उससे सब्र नहीं हुआ और वह भी करीब आ गई.
उसने मुझसे कुछ बोलने की बजाए अपनी बड़ी दीदी से कहा- भाई सिर्फ तेरा ही नहीं है, मेरा भी है. क्या तुम सिर्फ चुपचाप पूरा मजा ले लोगी और मुझे पता भी नहीं चलेगा!
एक पल रुक कर वह वापस बोली- जब तुम तीनों ही काफी देर तक नहीं आए तो मुझे पता चल गया था.
मैंने देखा कि अब कविता भी वहीं थोड़ी दूर खड़ी होकर नजारा देख रही थी.
सोनम ने मुझसे कहा कि भैया मुझे भी दिखाओ न अपना हथियार!
उस समय मेरा भी मन कर रहा था लेकिन मैंने पैंट पहन ली.
मैं बोला- सिर्फ मैं ही दिखाऊं क्या? तुम लोग भी दिखाओ न!
यह कहते हुए मैंने थोड़ा सा गुस्से का नाटक किया.
फिर मैं पुनः बोला- तुम तीनों ही बारी बारी से आकर बस मेरा ही सामान देख रही हो … अपना कुछ नहीं दिखाना चाहती हो!
इतने में रमणी दीदी भी मन में नटखटपन का भाव लाती हुई मेरे एकदम से पास आई और मेरे दोनों गाल को अपने हाथ से दबा कर बोली- बदमाश, कविता को तो बिना कहे ही सब कुछ दिखा रहा था … और हमें दिखाने में नाटक कर रहा है!
यह कह कर दीदी ने मेरे गाल को चूमा.
फिर मेरी पीठ को पीछे से पकड़ लिया और वह अपनी दोनों चूचियों को मेरी पीठ पर रगड़ने लगी.
मुझे बड़ा मजा आ रहा था.
मैंने ज्यादा देर ना करते हुए उसे अपने सामने की तरफ किया और उसकी चूची को छुआ.
वह बोली- थोड़ा सा जोर दबाओ न भैया!
उसने खुद दबाकर बताया कि ऐसे …
रमणी को बूब्स मसलवाने से शायद बहुत मजा आ रहा था इस कारण उसने सबसे पहले मुझे अपने बूब्स ही मसलने का बोला था.
फिर मैं उसके बताए अनुसार जोर जोर से कपड़ों के ऊपर से उसकी चूचियों को दबाने लगा था.
वह मदभरी सिसकारियां ले रही थी.
उसकी दोनों बहनें पास में खड़ी यह सब देख रही थीं.
थोड़ी देर बाद वह मेरे कंधे पर हाथ रखकर वापस रूम में चलने के लिए बोली क्योंकि वहां आराम से सब कुछ किया जा सकता था और यहां ऐसे खुले में ठीक नहीं था.
फिर हम लोग वापस अपने कमरे में चले गए.
मैं दोनों बड़ी बहनों रमणी और सोनम के बीच में था.
वे दोनों मेरे अगल बगल में बैठ कर आम खिला रही थीं.
हमारे बिल्कुल सामने ही कविता बैठी थी.
रमणी और सोनम बड़े प्यार से आम खिला रही थीं.
बड़ी दीदी ने आम का एक टुकड़ा काटकर मुझे खिलाया और एक टुकड़ा सोनम ने मुझे खिलाया.
फिर मैंने भी आम के टुकड़ों को काटकर उन को खिलाए, कविता को भी खिलाया.
इस तरह से हम तीनों ही एक दूसरे को आम खिला रहे थे.
इसी के साथ हमारे बीच में प्यार बढ़ता ही जा रहा था.
आम खिलाते हुए अक्सर हमारे शरीर के अंग आपस में टकरा रहे थे.
रमणी दीदी के बूब्स तो कुछ ज्यादा ही मेरे सीने से टकरा रहे थे.
मैंने कविता से कहा- तुम भी पास में आ जाओ!
उसने पहले तो मना कर दिया लेकिन बाद में वह मान गई.
मैं कविता को अपने हाथों से बड़े प्यार से आम खिला रहा था और वह मुस्कुरा रही थी.
मुझे उसके तरबूज याद आ रहे थे, जिनको मैं आज मसलने का प्लान मन में लिए हुए था.
यह सब काफी देर तक चलता रहा था.
कविता बस बार बार मुस्करा रही थी.
शायद वह मन ही मन बोल रही थी कि इस खेल को जल्दी खत्म करो और असली चुदाई वाला खेल शुरू करो.
फिर रमणी दीदी ने मुझसे कहा- तुम हमें भी अपने हाथ से आम नहीं खिलाओगे क्या?
मैं उस समय कविता को आम ज्यादा खिला रहा था.
मेरा ध्यान बार बार उधर ही लगा था.
रमणी दीदी ने जब यह कहा तो मैंने रमणी और सोनम को भी अपने हाथ से बराबर मात्रा में आम खिलाने शुरू कर दिए.
उसने अपने मुँह में आम की फाँक दबाई और मुझे अपने मुँह में से ही आम खिलाना शुरू कर दिया.
हम लोग एक दूसरे के झूठे आम भी खाने लगे थे.
मुँह में से आम खाने के बहाने अगर हमारे होंठ एक दूसरे से लग जाते थे तो उन दोनों को बड़ी लज्जत मिल जाती थी.
कुछ ही देर में यह हरकत बढ़ने लगी और हम तीनों एक दूसरे के मुँह में से जूठा खाने के बहाने एक दूसरे के मुँह नाक होंठ आदि चाटने लगे थे.
उम्म्ह… अहह… हय… याह… सेक्सी सिस्टर किसिंग करके बहुत ज्यादा मजा आ रहा था.
कभी हमारी जीभें आपस में टकराती थीं तो कभी आपस में होंठ जुड़ जाते थे.
अब कविता भी इस खेल में शामिल हो गई थी.
अब कभी आधा टुकड़ा में खाता, तो आधा कविता खाती.
फिर उसी टुकड़े को सोनम और रमणी दीदी भी खाने लगती थीं.
मुझे मजा आ रहा था और इस तरह से एक दूसरे के मन में सब तरह का संकोच खत्म होता जा रहा था.
बिना संकोच के अब सेक्स की भावना जागृत हो गई थी.
इस चूमा चाटी से जूठन वाली फीलिंग खत्म हो गई थी.
इससे सबसे ज्यादा लाभ यह होने वाला था कि आगे होने वाली चूत गांड चाटने की क्रिया में बड़ा मजा आने वाला था.
मैं उन तीनों बहनों से अपना लंड और आंड भी चुसवाने की सोचने लगा था.
दोस्तो, उम्मीद है कि आपको सेक्सी सिस्टर किसिंग स्टोरी में रस आने लगा होगा.
जल्दी ही अगले भाग में मैं कोशिश करूंगा कि आपके अंगों से रस टपकने भी लगे.
आप अपने मेल सुष्मिता जी की मेल आईडी पर भेज सकते हैं.
susmitasenwar@gmail.com