जवान चुदासी तीन ममेरी बहनों को पेला- 1

Views: 3 Category: Jawan Ladki By susmitasenwar Published: October 01, 2026 📖 14 min read
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हॉट सिस्टर्स X कहानी में मैं मामा के घर गया तो मामा की 3 भतीजियों से मिला. तीनों जवान थी, मैं भी जवान था तो हमारी दोस्ती हो गयी, उन तीनों की जवानी लंड मांग रही थी.

दोस्तो, मैं सुष्मिता चौधरी … रातकीबात  के सभी पाठकों और पाठिकाओं को प्यार भरा नमस्कार करती हूं.
उम्मीद करती हूं कि आप सब अच्छे होंगे और रातकीबात की मस्त कहानियों का आनन्द ले रहे होंगे.

आपने मेरी पिछली कहानी
खेल के बहाने भैया से चुदी दीदी
पढ़ी होगी. वह सेक्स कहानी मेरी बड़ी दीदी की थी.

इस कहानी से संबंधित हजारों की तादाद में मुझे मेल प्राप्त हुए हैं, जिससे मैं समझ पाई कि आप सबको कहानी कितनी ज्यादा पसंद आई है.
सभी पाठकों और पाठिकाओं को धन्यवाद.

मैंने आपको बताया था कि जैसे जैसे मुझे समय मिलता जाएगा, तो मैं चुदाई की नई व गर्मागर्म कहानियां आप लोगों को सुनाती रहूंगी.

कुछ लोगों ने पिछली बार मेल पर पूछा था कि आपने कहानी में अपना परिचय नहीं दिया था.
मैं बताना चाहती हूं कि उस कहानी में मेरा कोई रोल ही नहीं था तो मैं परिचय किस आधार पर देती?

काफी मेल इस बारे में भी आए थे कि आपकी दीदी इतनी चुदक्कड़ है तो आप हमारे से भी सैटिंग करवा दो.
हालांकि यह इतना आसान नहीं है और 34 साल की उम्र में अब कोई भी सैटिंग नहीं करना चाहता है.

वैसे मैंने कहा था कि मैं सिर्फ मेरी ही कहानियां भेजूंगी, किसी और की कोई भी कहानी नहीं भेजूंगी लेकिन अचानक से मेरे एक दोस्त ने अपनी सेक्स कहानी मुझे भेजी और कहा कि इसे अन्तर्वासना या फ्री सेक्स कहानी की साइट पर भेजने लायक संपादित कर दो.
मैंने ओके कहा और कहानी को पढ़ा.

यह सेक्स घटना बहुत ही मजेदार थी और इसको पढ़कर मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आया था.
इस कारण से मैंने सोचा कि आप भी इस तरह की असली सेक्स कहानी का मजा लें.

आगे की हॉट सिस्टर्स X कहानी लेखक की जुबानी सुनिएगा.

दोस्तो, मैं दीपक चौधरी आज आपके सामने एक सच्ची और मजेदार कहानी पेश कर रहा हूं.
यह मेरी और मेरे मामा की 3 जवान लड़कियों के बीच हुई चुदाई की कहानी है, जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा मजा आने वाला है.

आप इस कहानी में पढ़ेंगे कि किस तरह से मेरे मामा की तीनों ही लड़कियों ने आम तोड़ने के बहाने मुझे पटाकर अपनी सील पैक चूत का उद्घाटन करवाया था और अपने संतरे (बूब्स) मुझसे चुसवाए थे.

जवान लड़की में चुदाई से पहले शरीर में कितनी गर्मी होती है, आप इस कहानी को पढ़कर अनुमान लगा सकते हैं.

आप लोग सोच रहे होंगे कि तीन लड़कियां एक साथ कैसे चुद गईं!
वह आपको पढ़ने के बाद ही पता चलेगा.

सबसे पहले में आपको कहानी के सभी पात्रों का परिचय दे देता हूं.

मेरा नाम दीपक चौधरी है.
मेरी उम्र वर्तमान में 25 साल है.
मेरे लंड का साइज 7.5 इंच का है और यह 2.5 इंच मोटा है, जो किसी भी लड़की की चुत को फाड़ कर भोसड़ा बना सकता है और उसे हर तरह से संतुष्ट कर सकता है.

मेरा स्टेमिना भी बहुत ही दमदार है.
यह किसी भी चुत में काफी देर तक रन करता है!

यह सेक्स कहानी फरवरी 2025 की है.
उस वक्त मैं लंबे अंतराल के बाद अपने ननिहाल (यानि कि मामा के घर) गया था.

मैं इधर आपको एक बात यह भी बताना चाहता हूं कि यह घटना मेरे सगे मामा की लड़कियों की नहीं है बल्कि उनके पड़ोस में रहने वाले रिश्ते में लगने वाले मामा की 3 लड़कियों के साथ हुई चुदाई की कहानी है.
मैं बचपन में अपने ननिहाल में कई बार जाता था और मेरी हम उम्र के सभी लड़कों के साथ बहुत ही अच्छी बनती थी.

मुझे अपने मामा की लड़कियों के साथ भी खेलना कूदना बहुत अच्छा लगता था.

फिर साल 2012 के बाद पता नहीं कैसा विघ्न पड़ा था कि मैं कभी भी ननिहाल नहीं जा पाया था.
धीरे धीरे ननिहाल वाले मुझे भूल गए थे और मैं ननिहाल वालों को.

हालांकि जिन मामा की लड़कियों के साथ मेरी चुदाई की कहानी है, मैं उनको उस दिन से पहले सही से जानता तक नहीं था … और न ही उस दिन से पहले कभी देखा था.
हां नाम आदि से जरूर जानता था.

लेकिन मामा की सबसे बड़ी लड़की जिसका नाम इस कहानी में रमणी चौधरी है, उसको खूब जानता था क्योंकि मैंने उसे एक बार चोदा था.

जिस समय मैंने उसकी चुदाई की थी, उस समय तक मेरी शादी भी हो चुकी थी और मेरी शादी में मामा की सबसे बड़ी लड़की रमणी आई थी.

उस समय मेरा ऐसा कोई गलत ख्याल नहीं था.
फिर हालात कुछ ऐसे बने कि चुदाई हो गई.

उस वक्त की चुदाई रात के अंधेरे में हुई थी तो हम दोनों ने एक दूसरे का चेहरा देखे बिना ही चुदाई कर ली थी.
उस वक्त रमणी की चुत कुंवारी थी तो उसे चोदने में शोर होने का डर था इसी वजह से कोई खास मजा नहीं आया था.

फिर जब मैं अपनी ननिहाल में आखिरी बार गया था, तो रमणी की दोनों छोटी बहनें उस समय बहुत ही छोटी उम्र की थीं.

इस बार ननिहाल जाने पर मुझे पता चला कि वे दोनों तो अब एकदम जवान माल जैसी हो चुकी हैं.
उनकी चुदाई के बाद तो पता चला कि ये दोनों तो बड़े बड़े लंड भी अपनी चूत की गहराई में ले सकती हैं.

रमणी और उससे छोटी बहन सोनम … दोनों ही पक्की रांड हो चुकी थीं!

वैसे मेरे मामा के परिवार में मामा जी मामी जी और 3 लड़कियां हैं … और एक लड़का है.
लड़का सबसे छोटा है.

मामा जी ज्यादातर बिजनेस के सिलसिले में बाहर ही रहते हैं और मामी जी स्कूल में टीचर हैं.

लड़का अभी भी स्कूल में पढ़ता है तो सुबह मामी और उनका लड़का स्कूल चले जाते हैं और घर में तीनों ही बहनें अकेली ही रहती हैं.

वैसे उनकी दिन-चर्या भी गजब की थी.
दिन भर घर में पड़े रहना है और मोबाइल आदि देखना ही उनके मनोरंजन का एकमात्र साधन था.

इसी साल ही फरवरी में जब मैं और मेरी मम्मी अपने मामा के घर गए थे, तब मैंने पहली बार तीनों ही बहनों को देखा था.

पहले मैं आपको उन तीनों का परिचय दे देता हूं.

मामा की बड़ी बेटी का नाम रमणी चौधरी तो बताया ही है!
उसकी उम्र 26 साल थी और रंग एकदम गोरा था … दूध के जैसा. फिगर भी ठीक ठाक था.
छोटे छोटे से बूब्स थे और उठी हुई गांड थी. चूचों और गांड के बीच पतली सी लचकती हुई कमर थी. वह व्यवहार में भी बहुत ही सीधी सादी लड़की थी.
हालांकि वह सुंदर बहुत थी लेकिन इतनी सेक्सी नहीं थी, जिसे देखते ही लंड उठने लग जाएं … ऐसा तो कुछ नहीं था.

मामा की दूसरी लड़की का नाम भी बताया है, उसका नाम सोनम चौधरी है.
सोनम की उम्र 21 साल थी और रंग गेंहुआ था. फिगर भी ठीक ठाक था लेकिन इतना मस्त चेहरा आदि नहीं था.
यह थोड़ी बदमाश टाइप की थी.
सोनम के बूब्स ज्यादा कोई खास नहीं थे.

मामा की तीसरी लड़की का नाम कविता चौधरी था जो उन तीनों ही बहनों में कमाल के फिगर वाली लड़की थी.
उसकी उम्र उस समय मात्र 19 साल की थी.
उसकी छोटी सी गांड और बड़े बड़े बूब्स थे.
खुले हुए बालों में वह गजब की छिनाल लगती थी.

तीनों ही बहनों में सबसे बड़े बूब्स इसके ही थे और जब उसके दूध थिरकते थे, तो सच में कमाल ढाते थे.

मैंने उस दिन कविता को पहली बार देखा तो बस उसे देखता ही रह गया था.
वह उस दिन नीले रंग की जींस और गुलाबी रंग की कमीज पहनी हुई थी.

उस दिन उनकी मम्मी भी पास में थीं और जैसा कि मैंने ऊपर बताया कि मेरे सगे मामा के बिल्कुल ही पास वाला घर उनका था.

शाम का खाना खाने के बाद हम वापस लौट कर आ गए.
उस वक्त तक कविता की खूबसूरती को देख कर हल्का सा कामुक भाव मेरे मन में आया था.
उसके अलावा कोई भी गलत विचार अभी तक मेरे अन्दर नहीं उपजा था.

तब भी जो कामुक भाव मेरे मन में आया था, उससे कह सकता हूँ कि उन तीनों ही बहनों की मादक जवानी देख कर मेरी नियत खराब हो गई थी.

वे भी चुदवाने के लिए तड़पने लगी थीं, जिसे आप कहानी में आगे पढ़ेंगे.
दोनों बड़ी बहनों को चुदाई की चुल्ल ज्यादा थी और उन्होंने कविता को इस खेल से दूर ही रखा था.

शायद वे दोनों सोच रही थीं कि यह अभी छोटी ही है.
फिर दूसरे दिन लगभग 10 बजे मैं उनके घर गया था तो उस समय घर में तीनों ही बहनें ही थीं.

उस समय तीनों की ही जवानी अपनी चरम सीमा पर अंगड़ाई ले रही थी.
सबको ही लंड की तलाश थी पर उन्हें कोई भी मिल नहीं रहा था.

जब मैं मामा के घर गया तो वे तीनों बहनें लेटी हुई थीं.
वे आराम कर रही थीं और आपस में बातें भी कर रही थीं.

उन्होंने उस समय तक स्नान आदि करके खाना भी खा लिया था और अलसाई मुद्रा में लेटी हुई अपनी जवानी की आग को बुझाने वाले किसी मजबूत यंत्र को लेकर चर्चा कर रही थीं.

वे बार बार सोने की सी कोशिश कर रही थीं लेकिन जिसकी चूत में आग लगी हो, उसको नींद कहां आती है!
जिस समय से उन्होंने मुझे देखा था, उस समय से उनकी नियत खराब हो गई थी.

उनमें से दोनों बड़ी वाली बहनों को यानि रमणी और सोनम को किसी भी मर्द के लंड की सख्त जरूरत थी और वे किसी भी कीमत पर अपनी चूत फड़वाने के लिए उतावली थीं.

उस वक्त भी वे दोनों शायद मेरे लंड को लेकर कुछ योजना बना रही थीं.
फिर उन दोनों ने प्लानिंग कर ली थी कि कैसे भी करके भैया से अब चुदवाना ही है. ऐसा सुनहरा मौका बार बार नहीं मिलता हैं.

मैं इनके प्लान से बिल्कुल ही अनजान था और मामा के घर के पीछे वाले खेत में लगे आम के पेड़ों से आम तोड़ कर खाने गया था.

मामा के खेत में आम के काफी पेड़ लगे थे और उस वक्त उन पर ढेरों पके हुए आम लटके थे.
जबकि मामा की तीनों लड़कियों ने मुझे अपने ओरिजिनल आमों को खिलाने का मन बनाया हुआ था.

उनके घर जाते ही उन्होंने मुझे बैठा लिया और बातें करने लगी थीं.
मैंने देखा कि छोटी वाली लड़की थोड़ी कम बात कर रही थी लेकिन आग उसकी चूत में भी लगी थी, यह बाद में पता चला था.

जबकि मैं उसकी गांड का दीवाना हो चुका था लेकिन उसकी चुदाई को लेकर मेरे मन में कोई योजना अभी नहीं बनी थी.

उस समय वे सब मुझे अपने अपने आम दिखाने की चेष्टा कर रही थीं और मैं मामा के खेत वाले आम खाने के लिए मचल रहा था.

मैंने कहा- मुझे आम खाने हैं.
उस समय आम काफी पक चुके थे तो बहुत ही मीठे हो गए थे.

उन दोनों ने आपस में आंखों में कुछ इशारा किया और एक ने अपनी छोटी बहन से कहा- तुम जाओ, आम तोड़कर लेकर आओ भैया के लिए!

यह सुनकर एक बार तो छोटी बहन खुश हो गई क्योंकि उसे लगा कि वह आम लाकर मुझे इंप्रेस कर लेगी.
जबकि वे दोनों छिनाल बहनें यह सोच रही थीं कि वे छोटी को आम तोड़ने का बोलकर मुझसे अपने संतरे चुसवा लेंगी.

मुझे उस वक्त तक इस बारे में कुछ भी पता नहीं था कि उनके मन में यह सब प्लान चल रहा है.
छोटी वाली बहन ने शायद रात को उनकी बातें सुनी थीं और वह खुद अपनी तरबूज सरीखी गांड मुझे फड़वाने के लिए देने वाली थी.

इस कारण उसने बाद में मना कर दिया था क्योंकि उसको भी अपनी बहनों के प्लान का पता था कि वे दोनों मुझे आम लाने के लिए भेजने के बाद, भैया से अपने संतरे चुसवाना चाहती हैं.
उसकी बहनें सोच रही थीं कि यह छोटी है और यह खेल खराब कर सकती है.
लेकिन सबसे ज्यादा चुदाई की चुल्ल छोटी वाली के मन में घुसी हुई थी.

फिर जब बात नहीं बनी तो हम चारों ही भाई बहन आम तोड़ने आ गए थे.
उधर सबसे पहले में पेड़ पर चढ़ा और उसके बाद बड़ी वाली दोनों बहनें आ गई थीं.

छोटी वाली नीचे आम इकट्ठे कर रही थीं और आम लेने के लिए झुकने के बहाने मुझे उसके तरबूजों के भी दर्शन हो रहे थे.
उसकी गोल गोल गांड बहुत ही मस्त थी.

उधर ऊपर उन दोनों ने शायद चुदने का पूरा प्लान बना लिया था और उसी प्लान के अंतर्गत वे लोग हरकतें कर रही थीं जिस कारण से पेड़ पर मेरा हाथ कई बार उनकी गांड से टच हुआ था.

एक और बात थी जो मेरे साथ पेड़ पर हो रही थी.
दरअसल दो तीन बार ऐसा भी हुआ था कि मैं जिस डाल पर चढ़ा होता था, उस पर रमणी और सोनम दोनों ही आ जाती थीं और मेरे हाथों से अपनी चूचियों पर दबाव देने लगती थीं.

एक बार तो बड़ी वाली बहन रमणी ने हद ही पार कर दी थी.
वह 2 मिनट के लिए एक ही डाल पर मुझसे चिपक कर बैठ गई थीं और आम तोड़ने के बहाने झुक कर अपनी गांड को मेरे लंड पर ही रगड़ने लगी थी.
उस वक्त मुझसे सहन न हुआ तो मेरे लंड ने भी अपनी पोजीशन ले ली थी.

लौड़ा एकदम से तनतना कर अकड़ गया था लेकिन डर के कारण अपनी पैंट से उसे दबा दिया था.
रमणी को पता चल गया था कि मेरा लंड खड़ा हो गया है.

वह भी कोशिश करने लगी और उसने अपनी गांड के सुराख को मेरे लंड के निशाने पर लगा दी.
वह आम तोड़ने के बहाने झुकने लगी थी.
मेरा लंड उसकी दरार में सैट हो चुका था और वह अपनी गांड को मेरे सख्त लंड पर रगड़ने लगी थी.

उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझे अच्छा लगा तो मैंने उसकी कमर को सही से पकड़ लिया ताकि वह गिरे नहीं.

उसने उसी पोजीशन में कुछ आम तोड़े और नीचे फेंक दिए जिसे छोटी बहन कविता ने उठा लिए.
उसी दौरान मेरा लंड रमणी की गांड के छेद से एकदम से रगड़ खा गया था और उसको भी पता चल गया था कि मेरा भी मन सेक्स का हो गया है.

फिर हम लोग अनजान बन कर पेड़ से उतरे और आम लेकर घर के एक कमरे में आ गए.
वे दोनों बड़ी वाली बहनें सीधे ही आम लेकर किचन में चली गईं और आपस में कुछ बातें करने लगी थीं.

रमणी शायद अपनी बहन को बता रही थी कि मैं भी सेक्स के मूड में हूँ और उसने अपनी गांड में मेरा सख्त लंड महसूस कर लिया है.
दोनों बड़ी बहनें अपनी छोटी वाली बहन को साथ में नहीं लेकर गई थीं.

छोटी वाली को गर्मी लगने लगी थी तो वह अपने कपड़े बदलने की बात कह कर चली गई थी.

थोड़ी देर में वह वापस भी आ गई थी.
उसने घुटनों तक की फ्रॉक पहन ली थी, जो कि नीले रंग की थी और उसकी जांघें आराम से दिख रही थीं.

वह वापस आकर मेरे साथ ही रूम में बिल्कुल मेरे सामने बैठ गई थी.
मैं उसको सामने से देख रहा था.

जैसे ही हम दोनों की नजरें आपस में टकरातीं तो वह मुस्करा कर सिर झुका लेती थी.
मैं भी हंस देता था और समझ चुका था कि इसकी तरफ से भी सिग्नल बिल्कुल ही ग्रीन हो गया है.

थोड़ी देर बाद वे दोनों बहनें आम धोकर और चाकू लेकर आईं और वे फल काट कर मुझे खिलाने लगीं.

मैंने गौर किया कि रमणी मुझे आम की फांक पकड़ा देती और बाद में उसी फांक को आधी खाने के बाद मुझसे वापस लेकर खुद खा ले रही थी.

मैं उसे देखता तो वह हंस देती!
इस तरह से हम चारों ही भाई बहन एक दूसरे से जूठा किया गया आम खाने लगे थे.

आम खाते हुए माहौल एकदम साधारण था, अब ऐसा कुछ नहीं चल रहा था, जैसा पेड़ पर था.

तभी कविता बोली- मुझे टॉयलेट जाना है. मैं थोड़ी देर में आती हूं.
वह उठकर बाथरूम की और चली गई हम तीनों ही लोग आम खाने लगे थे.

करीब दस मिनट बाद भी जब वह वापस नहीं आई तो रमणी दीदी ने मुझसे कहा- जाकर देख कर आओ कविता कहां रह गई? वह अभी तक क्यों नहीं आई है, क्या फिर से आम के पेड़ों की ओर चली गई है?

इधर के बाद इस सेक्स कहानी में कुछ ऐसा होने वाला है जिससे आप अपनी टांगों के बीच में हलचल महसूस करने लगेंगे.

इस कहानी के अगले भाग में आप पढ़ेंगे कि मेरी छोटी बहन कविता पेशाब का बहाना बनाकर कहां गई थी और मैं अपनी बाकी की दो बहनों की सलाह मान कर उसके पीछे गया था.
मैंने वहां पहली बार कविता की गोल और हल्की बीच उठी हुई गांड के दर्शन किए थे और उसके बाद क्या हुआ था … अगले भाग में आप विस्तार से पढ़ेंगे.

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