गोवा में गैर-मर्द संग मस्त हनीमून- 4

Views: 189 Category: Sex Kahani By mrsanjalisharma1986 Published: May 07, 2026 📖 12 min read
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चूत चुदाई इन होटल कहानी में रिसोर्ट के स्विमिंग पूल में न्यूड होने के बाद मेरे चोदू यार मुझे नंगी ही उठाकर होटल के कमरे में ले आये और मेरी चूत का बाजा बजाया.

मेरे प्यारे प्यारे पाठको, मैं आपकी अंजलि शर्मा एक बार पुनः आपके सामने अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर हाजिर हूँ.

कहानी के पिछले भाग
मैं स्वीमिंग पूल में पूरी नंगी हो गयी
में अभी तक आपने मुझे स्वीमिंग पूल में टॉपलैस होकर सुमेश के साथ मस्ती करते हुए पढ़ लिया था.

अब आगे चूत चुदाई इन होटल कहानी:

अब सुमेश ने मुझे फिर से अपनी ओर घुमा लिया. मेरे बूब्स उनकी छाती से छूने लगे थे.

कुछ देर तक ऐसे ही रहने के बाद सुमेश मुझे चूमने लगे और उनका एक हाथ मेरी पैंटी में घुस चुका था.
वे मेरी पैंटी भी उतारना चाहते थे, ये चीज मुझे समझ आ गई थी.

मैंने भी अब पूरी बेशर्मी दिखाई और उनको नहीं रोका.
सुमेश नीचे से मेरी पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर मेरी चूत को सहलाने लगे थे जिसकी वजह से मैं और ज्यादा गर्म होती जा रही थी.

सुमेश ने मुझसे बिना पूछे मेरी पैंटी को मेरी कमर से नीचे सरका दिया और मुझे पैंटी उतारने को कहा.

मैंने भी नीचे पानी में हाथ डाल कर अपनी पैंटी उतार कर सुमेश जी के हाथ में दे दी और उन्होंने पैंटी पूल के बाहर फेंक दी.

अब मैं पूल के अन्दर ऊपर से नीचे तक नंगी थी और ये चीज उन तीनों लड़कों को भी पता चल गई थी.
अब वे तीनों लड़कों बारी बारी से पानी के अन्दर जाकर मुझे नीचे से नंगी देखने की कोशिश करने लगे.
वे मेरी चूत के दर्शन करना चाहते थे, मुझे बहुत शर्म आ रही थी पर सुमेश जी की वजह से मजबूर थी.

मैंने सुमेश से कहा- सुमेश जी रूम में चलें, वहां ठीक रहेगा … यहां पर कंट्रोल करो आप!
सुमेश बोले- ठीक है अंजलि, चलो रूम में ही चलते हैं.

फिर सुमेश ने मुझे पानी में से नंगी ही अपनी बांहों में उठा लिया और बाहर ले आए.

इस तरह से आखिरकार सुमेश जी उन तीनों लड़कों को मेरी चूत के दर्शन … और मेरे पिघलते हुए यौवन के दर्शन करवा ही दिए.
इस वक्त में 4 मर्दों के सामने नंगी थी.

सुमेश ने मुझे पूल के बाहर अपनी बांहों से नीचे उतारा और अब उन लड़कों को सही तरह से मेरी चूत के दर्शन हो चुके थे.
वे लोग मुझे पूरी तरह से आंखें भर के नंगी देख चुके थे.

मैंने अपनी ब्रा पैंटी पूल के पास से उठाई और सुमेश जी ने पुनः मुझे अपनी मजबूत बांहों में उठा लिया.
वे मुझे नंगी ही अपनी गोदी में उठा कर बेडरूम में ले आए और रूम को लॉक कर लिया.

उन्होंने मुझे बेड पर ले जाकर बेड पर पटक दिया और खुद भी मेरे ऊपर एकदम किसी भूखे शेर की तरह टूट पड़े.
वे मेरे बदन के अंग अंग को चूमते हुए मुझे गर्म करने लगे और मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख कर मुझे किस करने लगे.

इस वजह से मैं और ज्यादा कामुक महसूस कर रही थी.
हम दोनों का मूड तो पहले से पूल में ही बन चुका था इसलिए यहां मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी थी.

सुमेश बहुत जल्दी ही मेरी चुदाई के लिए तैयार होने वाले थे, ये मुझे मालूम था.
मैंने भी ज्यादा वक्त खराब ना करते हुए सुमेश जी को बेड पर लेटा दिया और उनकी जांघों के पास आ गई, उनका अंडरवियर झटके से अलग किया, उनके खड़े लंड को मुँह में ले लिया और उनके लंड के टोपे को चूसने लगी.

सुमेश भी मेरा साथ देने लगे और मेरे मुँह को अपने लंड पर जोर से दबाने लगे.
मैंने उनका लंड कुछ ही मिनट चूसा होगा कि उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे ऊपर आ गए.

मेरी चूत के पास आते ही सुमेश ने अपने दोनों होंठों को मेरी चूत पर रखा और चुत को चूसने लगे.
कसम से जैसे ही उन्होंने अपने होंठ मेरी कोमल चूत पर रखे, मेरी कामुक आहें निकलने लगीं.

मैंने पूरे कमरे को अपनी मादक आवाजों से भर दिया ‘आह सुमेश जी आह आह चूसिए मेरी चूत को अच्छे से … आह मेरी जान सुमेश जी … आह उउम्म्म खा जाओ इसे!’

सुमेश ने कुछ मिनट तक मेरी चूत चुसाई का मजा लिया और उसके बाद बिना एक पल की देर किए मुझे घोड़ी बना दिया.
उन्होंने मेरे बालों को अपने हाथ में लेकर चुदाई की लगाम अपने हाथ में ली.

उन्होंने मेरी चूत के छेद पर अपना लंड सैट किया और एक झटके में लंड को मेरी चूत के छेद में गहराई तक उतार दिया.

मैं मदमस्त आवाज में चीख उठी और उधर उन्होंने बिना ब्रेक की गाड़ी के जैसे अपनी चुदाई की गाड़ी को रफ्तार दे दी.

सुमेश ने जोरदार झटकों के साथ मेरी लेनी शुरू कर दी.
उनके लंड के झटके मेरी चूत के अन्दर बहुत जोर से लग रहे थे और मेरी बच्चेदानी तक जा कर चोट कर रहे थे.

मुझे उनसे चुदने में बहुत मजा आ रहा था.
मेरी चुदाई की वजह से हमारा दस इंच के गद्दा मस्त हिल रहा था, जिससे लौड़े को चुत में झटके देने में मदद मिल रही थी.

सुमेश जी मेरी गांड पर थप्पड़ मार रहे थे और मेरी चूत के छेद पर अपना लंड सटासट चला रहे थे.

मुझे भी चुदने में बहुत मजा आ रहा था और मेरे मुँह से आहें निकल रही थीं ‘आह आह सुमेश जी आह आह … चोदिये जोर जोर से आह आह उम्म्म्म.’
वे मुझे लगातार चोदते रहे और मैं भी पूरी तरह से मदहोश होकर चुदाई का मजा लेती रही.

सुमेश ने मुझे अपनी घोड़ी बना रखा था और अपने मोटे लंड से मेरी चूत में जोरदार धक्के मार रहे थे.
उनकी ताबड़तोड़ चुदाई के कारण जांघें टकरा रही थीं और मादक आवाज कमरे में भी गूँज उठी थी.

पूल में नहाने की वजह से मेरा पूरा गीला बदन अब तक सूख चुका था पर मेरे बाल अभी भी गीले थे.
सुमेश ने मेरे बालों को अपने हाथ में ले रखा था, जिस वजह से ऐसा लग रहा था मानो घोड़ी बनी अंजलि शर्मा की लगाम उनके हाथ में थी.

वे किसी उन्मत्त घोड़े की मानिंद मेरी चुदाई करने में लगे हुए थे.
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं इंडिया अपनी फ्रेंड की शादी में आऊंगी और मेरी खुद की चुदाई का इतना बढ़िया प्रोग्राम बन जाएगा.

सुमेश जी अभी तक मेरी जवानी का और मेरे गदराए जिस्म का पूरा मजा लूट चुके थे.
इस वक्त अगर मेरी चूत की बात की जाए तो उसकी हालत तो सुमेश जी ने बुरी कर रखी थी.

जबसे मैं इंडिया आई थी, तब से मेरी चुत एकदम लाल हो रखी थी और सूजी पड़ी थी.
उसका कारण सिर्फ और सिर्फ सुमेश जी के लंड की दमदार चुदाई थी.

इस वक्त भी मेरी वही चुदाई फिर से एक बार हो रही थी.

अभी तक 20 मिनट तक चुदाई हो चुकी थी, मेरी चूत झड़ने के लिए तैयार थी.

मैंने सुमेश से पूछा- सुमेश जी कितनी देर और लगेगी, कब निकलेगा आपका दही?
सुमेश जी बोले- आह अंजलि रानी .. बस निकलने वाला है!

सुमेश जी ने लंड की स्पीड मेरी चूत में बढ़ा दी थी और मेरी कराहने की आवाज भी बहुत जोर जोर से आने लगी थी.

‘आह सुमेश आह मैं गई उम्म्म उम्म्म.’
‘आह मेरी जान आह मैं भी आ गया आह!’

इसी तरह आहें भरते भरते हम दोनों एक साथ ही झड़ने लगे.
सुमेश ने अपना सफेद अमृत फिर एक बार मेरी चूत के अन्दर ही निकाल दिया और मेरी चूत को पूरी तरह से अपने अमृत से भर दिया.

उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के अन्दर डाले रखा और मेरे ऊपर ही लेट गए.
हम दोनों ही पूरी तरह थक चुके थे और मेरी सांसें फ़ूल रही थीं.

ऊपर से सुमेश जी मेरे ऊपर लेटे हुए थे.
तभी उनका लंड मेरी चुत से निकल गया और हम दोनों अलग हो गए.

एक साथ लेटे रह कर लगभग 20 मिनट तक हम दोनों ने आराम किया.

आराम कर लेने से मेरी चूत की चुदास एक बार फिर जगने लगी थी और मैं फिर दोबारा से चुदना चाहती थी.
हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेटे थे हम दोनों की आंखें एक दूसरे को देख रही थीं और मैं मुस्कुरा रही थी.

एक दूसरे को देख कर हमारा मूड पुनः बन गया और उनका लंड जोश में आने लगा.
मैंने सुमेश के लंड को अपने हाथ में ले लिया और उन्हें अपनी मुस्कान देती हुई उनके लंड को सहलाने लगी और जगाने की कोशिश करने लगी.

वे भी जोश में आने लगे.
जल्द ही उनका लंड फिर एक बार खड़ा हो चुका था.

मैं सुमेश के लंड के पास आ गई और उनके लंड के टोपे को अपने होंठों के बीच दबा कर उसे चूसने लगी.
मैंने जल्दी ही लौड़े को अपने मुँह भर ले लिया.

उन्होंने मेरे सर को अपने लंड पर दबा दिया और मैंने सुमेश जी के लंड की 10 मिनट तक अच्छे से चुसाई की.
मैंने सुमेश जी के लंड को चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार कर दिया था.

अब मुझसे रहा भी नहीं जा रहा और लंड लेने के लिए चुत फड़फड़ा उठी थी.
इसलिए सुमेश जी से बिना पूछे मैं उनके लौड़े के ऊपर आ गयी.

मैंने अपने हाथ से उनके लंड को पकड़ कर फिर से अपनी चूत के छेद पर रगड़ा और सैट करने लगी.

मैं सुमेश जी के लंड धीरे से बैठती चली गयी और वे भी उन्मत्त सांड की तरह मेरी चुत में अपने लवड़े को पेलते चले गए.

कुछ ही पलों में सुमेश का पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर प्रवेश कर चुका था और मैं पूरी तरह उनके लंड पर बैठ गई थी.

सुमेश के लंड की मोटाई काफी अच्छी है, जिस वजह से मुझे उनसे चुदने में बहुत मजा आ रहा था.
मैं बिना देरी किए सुमेश जी के मोटे खीरे जैसे लंड पर झूलने लगी.

सुमेश जी मेरे सामने चित लेटे हुए थे.
हम दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा रहे थे और मैं सुमेश जी के लंड के ऊपर उछल रही थी.

उस वक्त मैं बहुत खुश हो रही थी.
मेरे दोनों हाथ मेरे सर पर थे, जिस वजह से मेरे दोनों दूध मस्ती से उछल कर सुमेश के लौड़े में आग भरने का काम कर रहे थे.

मेरे मुँह से फिर से आहें निकलने लगी थीं ‘आह उम्म्म सुमेश जी मस्त मोटा हो गया है आपका … आह आअह उम्म् उम्म्म सुमेश जी … आह चोदो मुझे … और जोर से चोदो!
मैं उनके लंड पर जोरदार तरीके से उछल रही थी.

इस बार सुमेश के लंड की लगाम मेरे हाथों में थी इसलिए मैं खुद की स्पीड लंड पर उछलते टाइम अपनी मर्जी से कंट्रोल कर रही थी और जोरदार तरीके से लंड पर उछल उछल कर मजा ले रही थी.

उनका लंड मेरी चूत के अन्दर तक समा चुका था.
मुझे सुमेश जी से चुदते हुए 15 मिनट से ज्यादा हो चुके थे.
मेरे बूब्स हवा में जोर जोर से उछल रहे थे.

सामने मिरर लगा था तो मैं देख रही थी कि मेरा ये दुल्हन वाला गेटअप मुझे उन्हें चोदने में और ज्यादा मजा दे रहा था.
मेरे हाथों का जो लाल चूड़ा था, वह तो हमारी चुदाई के प्रोग्राम में अलग ही चार चांद लगा रहा था.

चुदाई की वजह से पूरे रूम में आवाज आ रही थी और मैं मोटे लंड पर मस्ती से उछल उछल कर मजा ले रही थी.

थोड़ी देर और उछलने के बाद मेरी चूत अपना पानी छोड़ने के लिए तैयार थी.
मेरी उत्तेजना बढ़ी तो मैं और ज्यादा जोरदार तरीके से उछलने लगी और उनके लौड़े से चुदवाने लगी.

कुछ देर उछलते उछलते ही मेरी चूत ने अपना सारा पानी सुमेश जी के लंड पर बहा दिया और मैं पूरी तरह से थकान से चूर हो चुकी थी.
मैं सुमेश जी के लंड के ऊपर ही बैठी रह गई थी, पर सुमेश जी का प्रोग्राम अभी खत्म नहीं हुआ था.

उन्होंने अपने दोनों हाथों मेरी मोटी चिकनी गांड पर रखे और मुझे अपनी और झुका लिया.
वे मुझे पीछे से अपने लंड के झटके की चोट मेरी चूत के अन्दर मारने लगे और मुझे चोदने लगे.

सुमेश के लंड के झटके सटासट मेरी चूत के अन्दर लगते रहे और मैं मजे लेती रही.

‘आह आह सुमेश चोदिये मुझे … आआह आअ अहह उम्म्म्म उम्म्म!’

सुमेश भी पूरी जान लगा कर मुझे चोद रहे थे और मेरी चूत की प्यास पूरी करने के लिए पसीना बहा रहे थे,

मैंने सुमेश जी से पूछा- अभी आपको कितनी देर और लगेगी?
सुमेश जी बोले- बस अंजलि, होने वाला है मेरा!

मैंने सुमेश जी से कहा- सुमेश जी मुझे आपका अमृत पीना है, प्लीज रुक जाना.
मेरी ये बात सुन कर सुमेश जी खुश हो गए और बोले- ठीक है मेरी जान पी लेना.

फिर क्या था … सुमेश जी ने मुझे 2 मिनट तक और चोदा और मेरी चूत में से लंड निकाल लिया.
उन्होंने मुझे अपने ऊपर से उठा दिया.

सुमेश जी का स्पर्म अपनी चरम सीमा पर था.
उन्होंने कहा- जल्दी से मुँह में लो अंजलि!

मैं झट से घुटनों के बल बैठ गई और सुमेश जी मेरे सामने खड़े हो गए.
मैंने जल्दी से सुमेश जी का लंड मुँह में ले लिया और उसे हिला हिला कर चूसने लगी.

इस वजह से एक ही मिनट के अन्दर सुमेश जी ने अपना सारा अमृत पहली बार मेरे मुँह में निकाल दिया.
मेरे मुँह को उन्होंने अपने स्पर्म से भर दिया.

मैं भी पूरा स्वाद लेकर सुमेश जी के स्पर्म को अपने गले में लेकर गटकती चली गई.
जो 2-4 बूंद सुमेश जी के लंड पर लगी रह गई थीं, उन्हें भी अपनी जीभ से चाट लिया.

इस तरह सुमेश जी ने उस रात मेरी एक राउंड और चुदाई की और हम दोनों थकान से चूर होकर सो गए.

फ्रेंड्स, अगले भाग में सेक्स की कुछ और विधियों को अपना कर मैं आपकी उत्तेजना को बढ़ाने का प्रयास करूंगी.
मेरी चूत चुदाई इन होटल कहानी का यह भाग आपको कैसा लगा, प्लीज जरूर बताएं.
धन्यवाद.
आपकी अंजलि शर्मा
mrsanjalisharma1986@gmail.com

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