मौसी फक स्टोरी में मेरी गर्लफ्रेंड की मौसी मस्त माल थी और मेरे से सेट हो गयी थी. अब चुदाई का मौका ढूंढ रहे थे हम दोनों. थोड़ी चुम्मा चाटी कार में हुई.
दोस्तो, मैं धीरज एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर हाजिर हूँ.
मेरी कामुक दृष्टि गर्लफ्रेंड की मौसी पर
अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं मौसी को उनके घर ले जाने के लिए वापस आ गया था.
अब आगे मौसी फक स्टोरी:
मुझे आते देख अलका मौसी का तेवर कुछ और ही था.
वे एकदम गुस्से में लग रही थीं.
मैंने गाड़ी का दरवाजा खोला और अलका मौसी अन्दर आ गईं.
वे बड़ी गुस्से से वह मुझे देख रही थीं.
मैंने पूछा- अब क्या हुआ?
मौसी ने कहा- तूने मेरी ब्रा क्यों ली?
उनके इस सवाल पर मैं हैरान था.
बाद में मुझे याद आया कि मैंने डिक्की में ही तो ब्रा छुपाई थी.
मैंने भी बिना डरे कह दिया- घर से निकाल कर लाया था … शादी के बाद आपकी एक याद मेरे साथ रखने के लिए!
मेरे इस जवाब पर मौसी ने कहा- गाड़ी चालू कर.
मैंने भी वही किया.
गाड़ी आगे बढ़ते ही उन्होंने मुझसे गाड़ी को दूसरे रास्ते से लेने को कहा, जो पुरानी नर्सरी की ओर जाने वाला रास्ता था.
उस रास्ते से रात के समय कोई आता-जाता नहीं था.
मेरे पूछने पर मौसी ने बोला- तुझे मेरी ब्रा याद के तौर पर चाहिए तो क्यों न जो मैंने अभी पहनी है, वही उतार कर ले जा!
मौसी की इस बात को मैंने जल्दी ही समझ लिया कि माल गर्म है और चोट मारने का सही अवसर है.
मैंने कुछ देर बाद सुनसान रास्ते में एक तरफ गाड़ी लगा कर रोक दी और मौसी के हाथ को पकड़ कर उन्हें अपनी ओर खींचने लगा.
मेरे इस काम का उन्होंने कोई विरोध नहीं किया.
हम दोनों ने एक-दूसरे को चूमना शुरू कर दिया.
कुछ देर चूमने के बाद मैं उन्हें पीछे वाली सीट पर ले आया और उधर उन्हें लिटा कर फिर से चूमने लगा.
मौसी भी मेरा भरपूर साथ दे रही थीं.
करीब पांच मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद उन्होंने मुझे रुकने को कहा.
लेकिन मेरा उन्हें चोदने का पूरा मन हो गया था.
इस पर मौसी ने कहा- अभी देर हो जाएगी, तो शक हो जाएगा!
मैंने कहा- तो कब करेंगे?
तब अलका मौसी ने एक बार फिर मुझे किस करते हुए कहा- मेरे राजा कल का दिन भी हमारे पास है.
मैंने उन्हें अपने लौड़े की हालत दिखाई- इसका क्या करूं?
मौसी ने मेरे लौड़े की हालत देखकर अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को पजामे में से निकाल कर सहलाया.
मैं उन्हें वासना से देख रहा था.
मौसी ने झुक कर मेरे लौड़े को अपने मुँह में भर लिया.
मौसी के इस हमले से मैं एकदम अनजान था.
उनके मुँह की गर्मी से मेरे लौड़े की हालत खराब होने लगी.
कुछ ही चुप्पे लगे तो मेरा लंड मस्त हो गया … आह साली क्या मस्ती से मेरा लंड चूस रही थी … साफ लग रहा था जैसे मौसी वर्षों से लंड की भूखी है.
मैंने भी मौसी के मुँह में लंड को आगे-पीछे करके उनके मुँह को खूब चोदा.
करीब पांच मिनट बाद मेरा पानी निकलने वाला था जो मैंने अलका मौसी को बिना बताए उनके मुँह में ही गिरा दिया.
मौसी ने भी उतने ही प्यार से मेरे वीर्य को गटक लिया.
अब मैं थोड़ा शांत हुआ.
हम दोनों वापस घर की तरफ बढ़ चले.
मौसी ने कहा- मैंने तेरी हरकतें तेरे आते ही पहचान ली थीं. मुझे मालूम था कि तूने कल्याणी के सामने क्या शर्त रखी थी, इसलिए मैं तुझे इतना भाव दे रही थी. एक बात बोलूँ धीरज?
मैंने कहा- हां बोलो अलका!
‘तेरा लंड सच में बहुत ही खास है!’
मैंने पूछा- अच्छा … मेरे अलावा किस-किस का लिया है?
तो मौसी ने मुझे बड़े नॉटी अंदाज में देखा और बदमाशी भरे स्वर में कहा- मेरे पति के सिवा किसी का नहीं लिया साले … इसीलिए तेरे लंड को खास बोला!
मैं भी हंस दिया और जेब से एक सिगरेट निकाल कर सुलगाने लगा.
कुछ देर बाद मौसी ने मेरे हाथ से सिगरेट ले ली और खुद धुआँ उड़ाने लगीं.
सिगरेट खत्म करने के बाद मौसी ने अपने पर्स से एक टॉफी निकाली और अपने मुँह में आधी दबाने के बाद आधी लेने के लिए मुझे इशारा किया.
मैंने मौसी के मुँह से मुँह लगा कर टॉफी काट ली और उनके होंठों को चूम कर मजा लेने लगा.
अब हम दोनों घर के काफी करीब आ गए थे.
घर पहुंचते ही अलका मौसी ने फोन किया तो उनके लड़के ने आकर दरवाजा खोला.
थकान की वजह से सब सोने को बेचैन हुए लग रहे थे.
हम दोनों भी थक गए थे.
मौसी ने मुझे सोने के लिए जगह बताई.
मैं वहां सोने को चला गया.
रात में करीब तीन बजे होंगे, मुझे प्यास लगी और मैं पानी पीने किचन की ओर गया.
किचन से लगकर ही अलका मौसी का बेडरूम था, जिसका दरवाजा खुला था.
मैं कमरे में अलका मौसी को देख रहा था.
काली नाइटी में क्या ही कांटा माल लग रही थीं वे … मुझसे रहा नहीं गया और मैं उनके रूम में घुस गया.
बेड के कुछ पास जाने के बाद मैंने अलका मौसी को छुआ लेकिन उनको कुछ असर ही नहीं हुआ.
मुझे लगा कि ये नींद में हैं इसलिए मैं वहां से जाने को निकला कि तभी अलका मौसी ने कसके मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने पास खींच लिया.
उन्होंने मेरे कान में कहा- तुम जल्दी से टेरेस पर जाओ, मैं पांच मिनट में आती हूँ.
मुझे समझ में आ गया कि अबकी बार ये मेरे मन मुताबिक चुदेगी.
बस फिर क्या था, मैं झट से टेरेस पर आ गया और अलका मौसी के आने का इंतज़ार करने लगा.
कुछ देर में अलका मौसी टेरेस पर आईं.
वे अपने साथ में एक तकिया और चादर लाई थीं.
मैं ज्यादा उत्तेजित हो रहा था.
उन्होंने तकिया और चादर नीचे रखे ही थे कि मैंने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन को चूमने लगा.
मौसी भी ‘उम्म … उम्म …’ करके मेरा साथ देने लगीं.
कुछ देर बाद मैंने उन्हें अपनी ओर सीधा किया और उनके होंठों को चूमने लगा.
वे भी मेरा भरपूर साथ दे रही थीं और ‘उम्म … उम्म …’ करती उनकी मादक सांसें मुझे मदहोश करने लगीं.
मैंने वक़्त की नजाकत को समझा और मौसी के 34 साइज़ के स्तनों को दबाना शुरू कर दिया.
इससे उनकी ‘अह्ह्ह्’ निकल गई
अब मैंने ज्यादा देर न करते हुए उनकी काली नाइटी को निकाला.
वाह … क्या कमाल का फिगर पाया था मौसी ने … सफेद पैडेड ब्रा और पैंटी में अलका मौसी किसी परी से कम नहीं लग रही थीं.
बस फिर क्या था, उस हसीन रात में मैंने उन्हें चूमना शुरू कर दिया.
वे भी मेरे मुँह में अपना मुँह डालकर मेरी लार को चूस रही थीं और मैं उसकी जीभ को दबा कर उससे रस निचोड़ रहा था.
कुछ पल बाद मैंने उनके दूध चूसना शुरू कर दिए.
मौसी खुद अपने हाथ से अपने दूध को पकड़ कर मुझसे चुसवा रही थीं.
मैंने उनके एक दूध को चूसते हुए कहा- सच में यार, मुझे तेरी चुत चुदाई की बड़ी इच्छा हो रही थी.
वे भी बोलीं- हां तेरे लौड़े को जब से मैंने चूसा है न … मुझे तभी से अपनी चुत की आग सहन नहीं हो रही थी. अभी तू न आता मेरे कमरे में … तो मैं तेरे पास आकर तुझे छत पर ले आती.
मैंने समझ लिया कि मौसी को मेरा लंड पसंद आ गया है.
वे बोलीं- अब देर न कर … पहले एक बार चोद दे मुझे … बाकी का खेल हम दोनों बाद में करेंगे.
मैंने ओके कहा और उन्हें चित लिटा दिया.
मैंने एक बार मौसी की चुत को चाटा और थूक से गीला करके अपने लंड को उनकी चुत पर टिका दिया.
वे लंड अन्दर लेने के लिए अपनी कमर को उठाने लगीं.
तभी मैंने सुपारे को चुत की फांकों में हल्के से घुसाया और अलका मौसी के मुँह पर अपना मुँह लगा कर एक करारा शॉट मार दिया.
मौसी छटपटा उठीं और मुझसे छूटने की कोशिश करने लगीं.
मौसी का मुँह बंद था तो वे चिल्ला नहीं पाई थीं.
कोई एक मिनट तक उसी मुद्रा में पड़े रहने के बाद मैंने अलका मौसी को चोदना चालू कर दिया.
अब उन्होंने भी अपनी दोनों टांगें हवा में उठा कर मस्ती से चुत रगड़वाना चालू कर दी.
कोई बीस मिनट तक चुत चोदने के बाद मैंने लंड चुत से बाहर निकाला और मौसी के पेट पर वीर्य छोड़ दिया.
उन्होंने मेरे लंड को चूस कर साफ कर दिया और हम दोनों पुनः लिपट कर चुंबन करने लगे.
झड़ने के कुछ देर बाद बाद मैंने अलका मौसी को अपनी तरफ खींचा और उनके 34 के बूब्स को सहलाने लगा.
क्या कमाल के बूब्स थे उनके … मैं फिर से गर्म होने लगा था तो मैंने बिना एक पल की देर किए मौसी के एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और निप्पल को चूसने लगा.
मेरी इस हरकत पर अलका की ‘आह्ह्ह.’ निकल गई.
वे दबे स्वर में बोल रही थीं- हम्म … और चूसो इनको … धीरज और चूसो.
मैं उसके बूब्स पर ऐसा टूट पड़ा, मानो वर्षों का भूखा हूँ.
उनके एक चूचे को मुँह में लेकर दूसरे को जोर-जोर से दबा रहा था.
अलका मौसी की सिसकारियां अब चीख में बदलने लगीं.
इधर मेरा लंड फिर से लोहे जैसा कड़क हो गया था जिस पर अलका मौसी अपना हाथ चला रही थीं.
अब मौसी पोज बदला और मेरा 6 इंच लंबा लंड अपने मुँह में ले लिया.
वे अपने मुँह को आगे-पीछे करने लगीं, इससे मेरे लौड़े की मुठ सी मारी जाने लगी.
मैं भी मौसी की इस हरकत को साथ देते हुए उनके मुँह को जमकर चोदने लगा.
अलका मौसी ‘उम्म … उम्म … उम्म …’ करती हुई मेरा लंड मुँह में अन्दर तक ले रही थीं.
इधर मेरा लंड पूरी उफान पर आ गया था और मैं नहीं चाहता था कि मैं बिना चूत चोदे उसे झड़ जाने दूँ.
मेरे पास वक़्त कम था इसलिए मैंने जल्दी से अपना लंड अलका मौसी के मुँह से निकाला और उन्हें वापस चुदाई की पोजीशन में लिटा दिया.
मैंने उनकी टांगें खोलीं, तो मुझे मौसी की चिकनी चूत के दर्शन हुए.
उनकी चूत की महक मुझे मदहोश कर गई.
बिना वक़्त गंवाए मैंने मौसी की चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मेरे इस हमले से अलका मौसी मछली की तरह तड़प उठीं.
मैं ‘उम्म … उम्म … उम्म …’ करते हुए उनकी चूत को जबरदस्त चाट रहा था और मौसी अपनी चूत उठा-उठाकर मेरे सिर को अपनी चूत में दबा रही थीं.
सच में वे बहुत ही प्यासी लग रही थीं.
अगले पांच मिनट बाद अलका मौसी ने मुझसे कहा- अब मत तड़पाओ धीरज … प्लीज फिर से चोद दे मेरी चूत को अपने लंड से!
मौसी की बातों की कद्र करते हुए मैंने भी चुदाई का मन बना लिया और अपना लंड वापस अलका मौसी की चूत पर रख दिया.
अलका मौसी की एक बार चुद जाने की वजह से एकदम फैल गई थी और रस से सराबोर भी थी.
जरा सा धक्का देने से मेरा लंड आसानी से चूत में घुस गया और मौसी की ‘आह्ह्ह्.’ निकल गई.
मैंने धीरे-धीरे करते अपनी चोदने की गति बढ़ा दी.
फिर मैं अलका मौसी की दोनों टांगें उठाकर उन्हें पूरे वेग से चोदने लगा.
मेरे मुँह से भी ‘आह्ह् … आह्ह् …’ की आवाज़ निकल रही थी.
दोनों की चुदाई ऐसे शुरू थी कि थप-थप की आवाज़ से दोनों की संतुष्टि दिख रही थी.
करीब 5 मिनट चोदने के बाद मैंने अलका मौसी को टांगों हाथों के बल कुतिया बन जाने को कहा.
वे मेरी बात को समझ कर वैसी पोजीशन में हो गईं.
मैं पीछे से उनकी चूत चोदने लगा.
उस वक्त तक अलका मौसी मस्त हो गई थीं.
वे मस्ती से बोल रही थीं- चोद मेरे प्यारे चोद … बना दे मेरी बुर का भोसड़ा .. आह मिटा दे इसकी खुजली!
उनके इस तरह के बोल से मेरी गति और बढ़ गई.
मैं उन्हें ‘उम्म … उम्म …’ करके चोदे जा रहा था.
करीब 5 मिनट और चोदने के बाद मैं झड़ने वाला था.
मैंने बिना उनसे पूछे पूरा माल उनकी चूत में ही डाल दिया.
मेरे वीर्य से मौसी की चूत लबालब भर गई थी.
फिर मैंने मौसी को सीधी किया और अपना लंड उनके मुँह में दे दिया.
उन्होंने मेरे लंड को पूरी तरह से चाटकर साफ कर दिया.
मुझे भी मेरे वीर्य का स्वाद लेना था इसलिए मैंने अलका मौसी को चूमना शुरू कर दिया और उनका मुँह चाट चूस कर साफ कर दिया … क्या स्वाद था हम दोनों के रस के मिश्रण का .. सच में मजा आ गया.
इसके बाद हम दोनों कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे.
मैंने अलका मौसी को उनकी नाइटी दे दी, लेकिन वे मुझसे अपनी ब्रा-पैंटी मांग रही थीं.
मैंने देने से मना कर दिया और उनकी ब्रा-पैंटी लेकर छत से नीचे आ गया.
सुबह होने वाली थी, इसलिए हम दोनों अपने-अपने बिस्तरों पर आ गए.
अगले दिन कैसे मैंने वापस अलका मौसी को चोदा और उनकी मदद से ही उनकी बहन नीलू को भी चोदा, ये सब अगली सेक्स कहानी में जरूर बताऊंगा … पर आपके ईमेल से मुझे लिखने के लिए कहा गया तो ही लिखूँगा.
मौसी फक स्टोरी पर अपने विचार बताएं.
आपका धीरज
dbtr90@gmail.com