डबल चुदाई कहानी में मैं अपने दोस्त की बीवी के साथ सेक्स का सुख लेने लगा था और वह भी मेरे साथ मस्ती से चुदाई का मजा लेने लगी थी. एक दिन दोस्त भी इस खेल में शामिल हो गया.
दोस्तो, मैं विजय कुमार … रतन दत्त जी के माध्यम से आपको अपनी सेक्स कहानी सुना रहा था.
कहानी के पिछले भाग
दोस्त की बीवी ने चूत गांड का मजा दिया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मैं अपने दोस्त मोहन की बीवी शालिनी के साथ सेक्स का सुख लेने लगा था और वह भी मेरे साथ मस्ती से चुदाई का मजा लेने लगी थी.
अब आगे डबल चुदाई कहानी:
एक दिन मैं और शालिनी, मोहन को मंथली चेकिंग के लिए डॉक्टर के पास ले गए.
डॉक्टर ने कहा- मोहन की हालत में काफी सुधार आया है, वह वॉकर छोड़कर छड़ी के सहारे चलने की कोशिश करे.
डॉक्टर को लगा कि मोहन खुश लग रहा है और जल्द स्वस्थ होने की कोशिश कर रहा है.
जबकि पहले वह निराश था और स्वस्थ होने की कोशिश नहीं कर रहा था.
मैंने मोहन के लिए डॉक्टर की बताई छड़ी खरीदी.
कुछ कोशिशों के बाद मोहन छड़ी के सहारे चलने लगा.
एक रात मैं शालिनी के साथ सेक्स वीडियो देख रहा था.
इस फिल्म में लड़की के हाथ हथकड़ी से पलंग पर बंधे थे और वह चित लेटी थी.
उसकी आंख पर पट्टी बंधी थी.
पुरुष उसको सेक्स के लिए उकसाने के बाद सम्भोग कर रहा था.
अगली रात हम दोनों ने वैसा ही करना तय किया.
शालिनी ने हथकड़ी की जगह कपड़े का पट्टा सिला, उस पर वेल्क्रो लगा दिया, पट्टे में रस्सी बांधने की व्यवस्था थी.
अगली रात चूमा चाटी के बाद मैंने नंगी शालिनी को चित लेटाकर उसके हाथ ऊपर कर पलंग से बांध दिए.
मेरे पास काले कपड़े का चश्मा था जो मुझे कभी अपनी हवाई यात्रा में मिला था.
मैंने चश्मा शालिनी को पहना दिया.
मैं इत्मीनान से शालिनी के पूरे शरीर को चूम रहा था.
मुझे कांख (आर्मपिट) चूमने चाटने में बहुत मजा आता है.
साथ ही मैं शालिनी के निप्पल मरोड़ रहा था, शालिनी मचल रही थी.
फिर रूककर मैं शालिनी के सुन्दर नंगे शरीर को निहारने लगा.
शालिनी- विजय कहां चले गए, जल्दी से चुदाई शुरू करो न!
मैंने घमासान चुदाई की, फिर बाथरूम में एक दूसरे का मूत्र पिया, नहाये.
अब हम रात में एक बार ही सम्भोग करते, पर लम्बे समय तक … और एक दूसरे की जरूरत का ख्याल रखते हुए.
मैं शालिनी के झड़ने से पहले नहीं झड़ता.
एक रात शालिनी ने मेरे हाथ पलंग पर बांध दिए, मेरी आंखों पर कपड़े वाला काला चश्मा लगा दिया.
वह मेरे शरीर से कुछ देर खेलती, लंड चूमती, फिर रुक जाती.
मेरा लंड खड़ा होकर झटके ले रहा था.
मैं बोला- शालिनी और मत तरसाओ अब मेरे ऊपर आ जाओ.
शालिनी ने लंड की मस्त सवारी की.
मुझे शालिनी का दूसरा पति बने 6 महीने हो गए थे.
मेरा दोस्त और शालिनी के पति मोहन की हालत में बहुत सुधार आ गया, वह बिना छड़ी के सहारे चलने लगा था.
हम सभी इस बात से खुश थे.
एक दिन मोहन ने मुझे अकेले में कहा- शालिनी के हाथ पलंग से बांधकर, उसकी आंख में पट्टी बांधकर सम्भोग करने से उसे बहुत मजा आता है … कल रात करके देखो.
मैं हम्म कहा.
उसने आगे कहा- दरवाज़ा खुला रखना, मैं देखना चाहता हूँ तुम शालिनी को ठीक से आनन्द देते हो या नहीं … और हां शालिनी को यह बात नहीं बताना!
मैं- ठीक है कल रात करेंगे, मैं दरवाजा अन्दर से लॉक नहीं करूँगा, शालिनी की आंख हाथ बांधने के बाद तुम्हें मिस कॉल दूंगा.
अगली रात शालिनी के हाथ पलंग पर बांधने और आंख पर कपड़े का काला चश्मा पहनाकर मैंने हल्का म्यूजिक चलाकर मोहन को मिस कॉल दे दिया.
फिर मैं शालिनी को चूमने लगा.
मोहन चुपके से दरवाज़ा खोलकर बेडरूम में आ गया.
म्यूजिक के कारण शालिनी ने दरवाज़ा खुलने और मोहन के अन्दर आने की आवाज़ नहीं सुनी.
मोहन देख रहा था कि मैं शालिनी के बदन को चूमकर, चूचे दबाकर उसे उत्तेजित कर रहा था.
शालिनी कहने लगी- अब और मत तरसाओ.
मोहन कपड़े उतारकर नंगा हो गया.
मैंने देखा मोहन का खड़ा लंड मेरे लंड जितना ही मोटा लम्बा था.
मोहन ने मुझे पलंग से नीचे आने का इशारा किया, मैं समझ गया कि आज मोहन चुदाई करने वाला है.
मेरे पलंग से उतरते ही मोहन पलंग पर चढ़ गया, शालिनी की फैली जांघों के बीच घुटने के बल बैठकर उसने अपना लंड शालिनी की चूत में पेल दिया और चोदने लगा.
चोदते समय मोहन के मुँह से हूँ हूँ की आवाज़ आ रही थी, जैसे गैती से खड्डा खोदने वालों के मुँह से आती है.
शालिनी समझ गयी थी कि आज उसको चोदने वाला उसका पति मोहन है.
वह बोली- मैं बहुत खुश हूँ मोहन कि तुम ठीक हो गए हो, मेरी आंख खोलो.
मोहन ने शालिनी के आंख की पट्टी खोल खोल दी, दोनों एक दूसरे को बेतहाशा चूमने लगे.
उसके बाद हुआ उनका चुदाई का कार्यक्रम, मैं कुर्सी पर बैठ देख रहा था.
मैं खुश हुआ कि मेरा दोस्त स्वस्थ हो गया है.
पर मुझे लगा मेरा पत्ता कटने वाला है.
मैंने कपड़े पहने और बेडरूम से बाहर आ गया, मोहन के बेडरूम में जाकर सो गया.
मोहन और शालिनी एक दूसरे में इतने मग्न थे कि उन्होंने मुझे जाते हुए नहीं देखा.
सुबह मैं जागा और चाय बनाने किचन में जाने लगा.
मैंने देखा शालिनी किचन मोहन के साथ थी, वह नहाकर आयी थी.
मोहन ने शालिनी के आंख होंठ चूमे, फिर पीछे से आकर मैक्सी कमर तक उठाकर उसके कूल्हे चूमे.
शालिनी ने पैंटी नहीं पहनी थी.
फिर मोहन ने पीछे से मैक्सी के अन्दर हाथ डालकर चूचे दबा दिये.
शालिनी बोली- अब नाश्ता बनाऊं?
मोहन ने मुस्कुरा कर उसे छोड़ दिया.
मैं किचन में गया, शालिनी ने मुझे चाय देकर कहा- जल्दी से फ्रेश होकर आओ, नाश्ता बना रही हूँ.
हम तीनों ने नाश्ता किया.
मैं और मोहन फैक्ट्री गए.
शाम को घर लौटे, मोहन अपने बेडरूम और मैं कपड़े बदलने अपने बेडरूम में चला गया.
जब मैं ड्राइंगरूम में गया मोहन और शालिनी नाश्ते पर मेरा इतंजार कर रहे थे.
मैं अनमना था, मैंने कहा कि नाश्ता नहीं करूँगा, सिर्फ चाय पिऊंगा.
मोहन- विजय, मैंने और शालिनी ने सोचा है कि शालिनी एक रात अपने पहले पति यानि मेरे साथ सोएगी, अगली रात दूसरे पति विजय के साथ सोएगी. विजय तुम्हें यह प्रस्ताव मंजूर है?
मैं- मैं सोच रहा था दूसरे घर में शिफ्ट हो जाने की. मोहन तुम दोनों ने यह प्रस्ताव सोच समझ कर लिया है न … बाद में कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी?
मोहन- तुम्हें शालिनी का दूसरा पति बनाने के समय तुमने पूछा था, यदि मैं ठीक हो गया, तब क्या होगा? तब मैंने कहा था कि यदि मैं ठीक हो गया, तब भी तुम शालिनी के दूसरे पति रहोगे, भूल गए?
शालिनी- विजय, तुमने मेरी मांग में सिंदूर भरकर मुझे पत्नी बनाया, मैंने भी तुम्हें पति मान लिया. मुझे तुम दोनों का प्यार और दुलार चाहिए. कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, हम दोनों इसी बात की चर्चा कर रहे थे.
मैंने खुश होकर कहा- मैं तैयार हूँ.
उस रात शालिनी मेरे बेडरूम में थी, हमने जमकर यौन आनन्द लिया.
तब से शालिनी एक रात मेरे साथ एक रात मोहन के साथ सोती.
सुबह शालिनी जल्द उठ जाती, नहाकर नाश्ते की तैयारी करती, हमें जगाती. मोहन और मैं नहाकर शालिनी के होंठ आंख चूमते, उसकी मैक्सी कमर तक उठाकर उसके कूल्हे चूमते, चूचे दबाकर गुड मॉर्निंग कहते.
हम रात को बेडरूम का दरवाज़ा बंद नहीं करते.
जब शालिनी एक पति के साथ यौन आनन्द लेती, दूसरे पति को लाइव शो देखने की अनुमित थी.
जब मैं या मोहन कोई नया आसन ट्रॉय करते, एक दूसरे को बता देते, जिससे नया आसन सीख सके और आसन आजमाते समय यदि कोई गिरने लगे, उसे चोट से बचाये.
कुछ आसनों में तीसरे की सहायता लगती.
दो महीने बीत गए, मोहन फैक्ट्री में पूरी मेहनत से काम करने लगा, उसकी तनख्वाह बढ़ गयी.
एक दिन शालिनी का जन्म दिन निकट था, हमने तय किया कि बुधवार शाम शालिनी का जन्म दिन मनाएंगे.
गुरूवार को हमारी साप्ताहिक छुट्टी होती है, यह हमारे लिए एक अतिरिक्त सुविधा थी.
मैंने और मोहन ने उससे पूछा- तुम्हें जन्म दिन पर क्या चाहिए?
शालिनी- समय आने पर बताउंगी कि क्या उपहार चाहिए!
बुधवार शाम मैं और मोहन फैक्ट्री से वापस आते समय पार्टी के लिए वोडका, चखना, केक, आइसक्रीम ले आए.
खाना शालिनी बनाने वाली थी.
पार्टी शुरू हुई, शालिनी ने केक काटा, हमने उसे चूमकर बधाई दी.
मैंने तीन ग्लासों में वोडका लिम्का मिलाकर डाला.
हम सब पीने लगे.
मैंने कहा- सेक्स वीडियो देंखे?
शालिनी- मैं लगाती हूँ.
यह कहकर उसने पीसी में थ्रीसम सेक्स वीडियो लगाया.
उसमें कुछ देर बाद डबल पेनिट्रेशन का दृश्य आया, तो शालिनी ने कहा- यह है मेरे बर्थ डे का उपहार!
मैंने और मोहन ने आपस में कई बार चर्चा की थी कि शालिनी के साथ थ्रीसम का आनन्द लेंगे, पर बोल नहीं सके थे.
सोचा था कि शालिनी बुरा न मान जाए.
उसकी बात सुनकर हम दोनों तुरंत तैयार हो गए.
तीनों मेरे बेडरूम में आ गए, जहां किंग साइज पलंग था.
मैं और मोहन शालिनी के आजू-बाजू खड़े उसे चूम रहे थे, उसके चूचे दबा रहे थे.
पता ही नहीं चला कि कब हम तीनों नंगे हो गए.
मैंने शालिनी की दाहिनी चूची पर कब्ज़ा कर किया, मोहन ने बायीं चूची पर.
हम कभी अपने हिस्से की चूची दबाते कभी चूसते.
मोहन शालिनी की चूत सहला रहा था तो मैं गांड!
शालिनी कामुक सिसकारियां ले रही थी.
फिर मोहन ने शालिनी को चित लेटा दिया और उसकी चूत चूसने लगा.
मैं चूचे दबाने चूसने लगा.
थोड़ी देर बाद शालिनी ने हमें रोककर कहा- मुझे तुम दोनों का लंड चूसने दो!
हम दोनों खड़े हो गए, शालिनी ने जमीन पर तकिया रखा, तकिए पर घुटनों पर खड़ी होकर बारी बारी हमारे लंड चूसने लगी.
कुछ ही देर में हम दोनों के लंड खड़े हो गए और झटका लेने लगे थे.
शालिनी पलंग के किनारे घोड़ी बनकर खड़ी हो गयी.
उसने अपने कूल्हे थपथपाकर हमें चोदने का आमंत्रण दिया.
मैं और मोहन बारी बारी शालिनी को चोदने लगे.
कुछ देर बाद.
मैं- अब हम शालिनी को डबल पेनीट्रेशन का बर्थडे गिफ्ट देंगे.
यह कहकर मैं पलंग पर चित लेट गया, मेरे कमर तक का शरीर पलंग पर था, पैर जमीन पर.
वीडियो के समान, शालिनी मेरे ऊपर आ गयी. उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर अपनी चूत में डाल लिया और उछल उछल कर लंड की सवारी करने लगी.
मोहन फर्श पर खड़ा होकर अपने लंड में तेल लगाने लगा.
उसने उंगली में तेल लगाया और शालिनी के कूल्हे थपथपाकर उसे रुकने का इशारा किया.
शालिनी उछलना बंद किया और सामने की तरफ झुककर मुझे दूध पिलाने लगी.
उतनी देर में मोहन ने शालिनी की गांड के अन्दर अच्छे से तेल लगाया और लंड गांड में पेल दिया.
दो लंड शालिनी ने एक साथ पहली बार लिए थे, तो वह उई आ आ करती हुई कराह उठी.
हम दोनों रुक गए.
मैंने पूछा- शालिनी, तकलीफ हो रही है?
शालिनी- पहली बार दो एक साथ लिए हैं यार … थोड़ा सा दुखा था, पर अब ठीक है!
मोहन पीछे से गांड मारने लगा, मैं कमर उछाल कर चूत चोदने लगा … साथ ही शालिनी के चूचे चूसने लगा.
कुछ देर में शालिनी झड़ गयी, उसके कामरस से मेरा लंड भीग गया.
थोड़ी देर चुदाई के बाद मैं चूत में मोहन गांड में झड़ गया, शालिनी भागकर बाथरूम में चली गयी.
हम भी लंड धोकर आए, कपड़े पहने और हल्का डिनर लिया.
डिनर के समय वह बोली.
शालिनी- मुझे कॉपर टी लगाए 4 साल हो गए, डॉक्टर ने कहा था 5 साल बाद निकाल लेना. उसका असर ख़त्म हो जाता है. कॉपर टी प्रेग्नेंसी से बचने का 100 % उपाय नहीं है, नसबंदी ही एक मात्र उपाय है. मैं बच्चा नहीं चाहती. हमारी सोसाइटी के बहुत से बच्चे बड़े होकर विदेश में बस गए है, माँ बाप को नहीं पूछते. मेरे दोनों पतियों का क्या कहना है?
मोहन- हां हमें नसबंदी करा लेना चाहिए. हमारी जिंदगी में हम कैसे जिएं, यह हम तय करेंगे.
मैंने भी सहमति जताई.
यही तय हुआ कि मैं और मोहन नसबंदी कराएंगे.
शालिनी भी नसबंदी करा लेगी, तब हम 100 % सुरक्षित रहेंगे.
हम सभी ने नसबंदी करा ली.
हमारा सेक्स जीवन रंगारंग चल रहा है.
मैं और मोहन शालिनी की सहमति से ही सम्भोग करते हैं, उसकी जिस दिन शालिनी की मर्जी ना हो, नहीं करते.
एक रात शालिनी मेरे साथ एक रात मोहन के साथ यौन आनन्द लेती है.
कभी हम तीनों ग्रुप सेक्स करते हैं, विशेष कर बुधवार की रात शराब पार्टी के बाद.
गुरूवार को हमारी छुट्टी होती है.
शालिनी मेरी और मोहन की मालिश करती है, हम दोनों शालिनी की.
फिर बारी बारी हम शालिनी को यौन आनन्द देते और लेते हैं.
डबल पेनिट्रेशन कम ही करते है, उसमें नवीनता है, पर चुदाई के समय जोरदार स्ट्रोक नहीं मार पाते.
एक बुधवार रात, शालिनी ने मुझे और मोहन को बड़े पलंग पर चित लिटाकर हमारे हाथ ऊपर कर पलंग से बांध दिए, हमारी आंखों पर पट्टी बांध दी.
हमें चूमकर, चूचे चुसवा कर, लंड चूसकर खूब तड़फाया.
हम कह रहे थे कि शालिनी अब लंड की सवारी करो.
आखिर शालिनी ने बारी बारी हम दोनों की लंड की सवारी की.
हम सब यह खेल कई कई बार खेलते हैं.
अगले बुधवार रात हमने शालिनी के हाथ पलंग पर बांध दिए. उसकी आंख पर पट्टी लगा दी, उसके चूचे दबाकर चूसकर, चूत चूसकर उसे खूब उत्तेजित किया.
शालिनी मचल रही थी, चोदने को बोल रही थी.
मोहन ने शालिनी की चूत घमासान मारी.
मैंने कहा- शालिनी अब तुम्हें पेट के बल लिटाकर गांड मारुं?
शालिनी- हां अब पीछे की प्यास बुझाओ.
मैंने शालिनी के हाथ खोले, उसे पेट के बल लिटाकर उसके हाथ पलंग से बांध दिए, मस्त गांड मारी.
यह डबल चुदाई का खेल हम कई बार खेलते हैं.
जब शालिनी का चुदाई का मूड नहीं होता, पर मैं और मोहन उत्तेजित होते, वह हमारे लंड चूसकर वीर्य पी जाती.
मैं और मोहन शालिनी को खूब लाड़ करते, उसकी इच्छा पूरी करने की कोशिश करते.
जब कोई बीमार पड़ता तो बाकी दोनों उसकी सेवा करते.
हम तीनों पिछले 5 सालों से साथ रह रहे हैं, खुश हैं.
हमने जिंदगी भर साथ रहने का वादा एक दूसरे से किया है.
यह डबल चुदाई कहानी आपको कैसी लगी, जरूर बताएं.
मेल भेजते समय सेक्स कहानी का नाम अवश्य लिखें, मैंने अनेक कहानियां लिखी हैं.
आपका रतन दत्त.
valmiks482@gmail.com