चाची को सैट करके चुदाई का मजा लिया

Views: 0 Category: Chachi Ki Chudai By himanshu54kn Published: October 04, 2026 📖 12 min read
Share
Text size:

चाची सेक्स कहानी में चाचा का घर मेरे घर से जुदा हुआ है. चाची के पास मैं बहुत जाता था, मैं उनको पसंद करता था. एक बार अकेले में मैंने अपने दिल की बात उनको कह दी.

मेरा नाम विकी गुप्ता है.
मैं कानपुर शहर का रहने वाला हूं.

यह चाची सेक्स कहानी मेरे औऱ मेरी चाची के बीच की है.
यह बात उस समय की है जब मैं अपने ग्रेजुएशन के दूसरे साल में था.

मैं अक्सर अपनी चाची के घर आता-जाता था.
उनका घर और हमारा घर आपस में जुड़ा हुआ ही है.
हमारी छतें एक दूसरे के घर में जाने के लिए मिली हुई हैं.

मेरी चाची एक घरेलू महिला हैं और उनका नाम कंचन है. मेरे चाचा की एक दुकान है.
चाची का फिगर साइज 34-30-36 का है.

मैं अपनी चाची को काफी पहले से ही पसन्द करता आ रहा था पर मैं इस बात को कभी भी अपनी चाची से कह ही नहीं पाया.
पर वह कहते हैं ना कि जो चीज को दिल से चाहो, तो ऊपर वाला भी उसे मिलाने में मदद कर देता है.

एक बार मेरे चाचा को किसी काम से घर से बाहर जाना पड़ गया तो चाचा ने मुझसे घर पर रुकने के लिए कह दिया.
चाचा चले गए और अब मैं और चाची घर में अकेले रह गए.

उस दिन मैंने अपने दिल की बात उनसे कह दी.
पर वे नहीं मानी और उन्होंने मुझे झिड़क दिया.

मेरा दिल टूट गया और मैं चुपचाप एक कोने में बैठ कर अपना मोबाईल चलाने लगा.
चाची को मुझसे बात करने की आदत सी पड़ गयी थी लेकिन उस दिन ऐसी बात हो गई थी कि वे भी मुझसे नहीं बोलीं.

दूसरे दिन चाचा को वापस आना था तो मैं सुबह सुबह ही उठ कर चाची से सॉरी बोल कर अपने घर चला गया.
चाची ने भी कुछ नहीं कहा.

अब मैंने उनके घर जाना बंद कर दिया था.
एक दिन चाची ने मुझे फोन किया और घर बुलाया.

मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उन्होंने मुझसे पूछा कि अब घर क्यों नहीं आते हो?
मैंने उन्हें उस दिन वाली बात बताई.

तो उन्होंने एक ऐसी बात कही कि मेरा लंड उछलने लगा.

चाची ने कहा- प्यार तो मैं भी तुमसे करती हूँ, पर मेरी अब शादी हो चुकी है. शादी के बाद यह सब गलत होता है!
पर मैं नहीं माना और उनसे अपनी बात कहता रहा.

चाची ने कहा- अच्छा घर तो आ, फिर बात करती हूँ!

मैं उनके घर गया और उस समय चाचा थे तो मैं बस यूं ही कुछ देर रुक कर वापस आने लगा.

चाची ने कहा- तुम आजकल कम क्यों आने लगे हो … आया करो न!
चाचा ने भी कहा- हां बेटा, आया करो न!

मैं अब उनके घर वापस फिर से जाने लगा था.

एक दिन मैं चाची के बाथरूम में गया और उधर से चुपचाप उनकी पैंटी उठा कर उसे सूंघने लगा.
फिर मैंने उनकी पैंटी में मुठ मारी और उनकी पैंटी में ही अपना सारा पानी गिरा दिया.

अब मैं जब भी उनके घर जाता तो उनकी पैंटी में मुठ मार कर उसे खराब कर आता.
चाची जान गयी थीं कि मैं ही उनकी पैंटी में मुठ मार रहा हूँ.

एक दिन मैंने उनको शाम को छत पर मिलने को बुलाया.

वे जब ऊपर आईं … तो एक ब्लैक कलर की मैक्सी पहन कर आई थीं.
उस मैक्सी में वे बहुत ही सेक्सी लग रही थीं.

मैं उनको देखता ही रह गया.

और जब वे नीचे जाने लगीं तो मुझसे रहा न गया, मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया और उन्हें किस करना स्टार्ट कर दिया.

मैं जानता था कि चाची खुद से पहल नहीं करने वाली हैं.
इसलिए मैं ख़ुद ही उनको किस करने लगा लेकिन थोड़ी देर न नुकुर के बाद वे भी मेरा साथ देने लगीं.

उस वक्त हम लोग जीने पर मिले थे तो थोड़ी देर किस करने के बाद मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया और उनके बूब्स पीने लगा.
वे भी मस्ती से अपने चूचे चुसवाने लगीं.

थोड़ी देर में उनके मुँह से सिसकारियां निकलना शुरू हो गईं.

लेकिन तभी किसी के आने की आहट मिली और चाची मुझसे खुद को छुड़ा कर नीचे चली गईं.

उनके पड़ोस में रहने वाली आंटी उनसे किसी काम से मिलने आई थीं.

पड़ोसन के आ जाने के कारण उस दिन मैं चाची की ठुकाई नहीं कर सका.
पर इतना हो गया था कि चाची मुझसे खुल गई थीं.

अब जब भी मुझे मौका मिलता, मैं उन्हें दबोच लेता और चाची भी मुझे छूट दे देतीं.

हम लोग प्यार करने लगते थे, ऊपर ऊपर से मैं चाची के दूध मसल लेता था, चूस लेता था, उनकी गांड को कपड़ों के ऊपर से ही भींच लेता था, चूत को अपनी हथेली से दबा कर भींच लेता था.
लेकिन चाची की चुत चोदने नहीं मिल पा रही थी.

फिर एक दिन अवसर मिला.
उस दिन मुझे और चाची को बुआ के यहां शादी में जाना पड़ गया था.

चाचा ने जाने से मना कर दिया था और मेरे घर से मैंने जाने की बात कह दी थी.
अब हम दोनों लोग बुआ के घर शादी में चले गए.

वह शादी मेरी बुआ के परिवार में थी, तो हम दोनों के रुकने का इंतजाम बुआ के घर था.
रात को हम दोनों लोग एक साथ में लेट गए.

बुआ के के घर के सब लोग शादी वाले घर में चले गए थे, घर में कोई नहीं था. सिर्फ मैं और चाची ही रह गए थे.
मैंने चाची को मनाया और उनके साथ चूमा चाटी करने लगा.

चाची पहले तो शांत लेटी रहीं, उन्हें लग रहा था कि कोई आ न जाए और चूंकि बुआ के घर का मामला है तो कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए.
मैंने चादर ओढ़ लिया और चादर के अन्दर घुस कर ही चाची के पेटीकोट को टांगों से ऊपर खींच लिया.

वे कुछ नहीं बोलीं. मैं उनकी जांघों को सहलाने लगा, पर वे चुपचाप लेटी रहीं.
मैंने उनके बूब्स पर हाथ रख दिया और उन्हें सहलाने लगा.

अब चाची धीमे धीमे आहें भरने लगीं.
तो मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया और ब्रा के ऊपर से उनके मम्मों को सहलाने लगा.

वे मुझे देखने लगीं और गर्म सांसें छोड़ने लगीं.
मैं उनके बूब को किस करने लगा और उसे अपने मुँह से चूसने लगा.

अब चाची भी गर्मा गईं और मेरा साथ देने लगीं.

मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया, मेरा लंड बहुत टाइट हो गया था.
वे मेरी तरफ घूम गईं और हम दोनों एक दूसरे को होंठों पर चुंबन करने लगे.

मैंने चाची के ब्लाउज को उनके मम्मों से उतार दिया और उनकी ब्रा को भी हटा दिया.
वे कहने लगीं कि दरवाजा बंद कर आ.

मैंने कहा- पहले ही बंद कर दिया था चाची!
अब चाची की चुत में तो आग लग ही गई थी, जैसे ही उन्होंने सुना कि दरवाजा बंद है. चाची मेरे ऊपर झपट पड़ीं.

मैंने भी जल्दी जल्दी उनके सारे कपड़े उतार दिए और उन्हें चित लिटा कर उनकी चूत चाटने लगा.
अभी मैंने एक या दो मिनट ही उनकी चुत को चाटा होगा कि वे उठ गईं और 69 में आकर मेरे लंड को चूसने लगीं.

मैंने भी आसन सही से सैट किया और उनकी चूत को मस्ती से चाटने लगा.
हम दोनों ने लगभग दस मिनट तक लंड चुत का रस पिया.

चाची की चूत अब पानी छोड़ने लगी थी, वे गांड उठा कर चुत को मेरे मुँह में दे रही थीं.

मैंने सोचा कि झाड़ने से अच्छा है कि चाची को चुदाई का मजा दिया जाए और उसी में वे दो बार झड़ने का मजा ले लें.

अब मैंने भी देर न करते हुए पोज सैट किया और उनकी चूत पर अपना लंड लगा दिया.
मैं सुपारे को चुत की फांक में रगड़ने लगा.

वे पहले ही चुत चाटना बंद होने से बेहद तड़पने लगी थीं और ‘जल्दी जल्दी पेलो’ की आवाज निकाल रही थीं.
उनकी कमर बहुत तेज तेज उठ रही थी और वे अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ने की कोशिश करने लगी थीं.

मैंने भी देरी न करते हुए अपना लंड उनकी चूत में एक झटके में डाल दिया.

वे अचानक लंड पेले जाने से तड़पने लगीं और कराहने लगीं- आह दर्द हो रहा है, रुक जा!

पर मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर नहीं निकाला और उनके ऊपर ही लेटा रहा.

कुछ देर बाद लंड ने चुत में जगह बना ली और मैं उन्हें मस्ती से चोदने लगा.

अब चाची भी मेरा साथ देने लगीं और कुछ देर बाद वे मेरे लौड़े के ऊपर आकर मुझे चोदने लगीं.

दस मिनट तक लंड चोदने के बाद चाची थक गईं और बोलीं- अब तू कर.
मैं उनके ऊपर आ गया और उन्हें चोदने लगा.

वे एक बार झड़ चुकी थीं तो उन्हें झड़ने में समय लग रहा था.

मैंने चाची की चुत से लंड निकाला और उन्हें डॉगी स्टाइल में खड़ी करके पीछे से लंड पेल कर चुत चोदने लगा.

वे कुतिया बन कर चुदती हुई मस्त आवाजें निकाल रही थीं.
मैं उनके ऊपर चढ़ कर उनके दोनों दूध अपने दोनों हाथों से भींच कर उन्हें चोद रहा था.

कोई बीस मिनट बाद मैं उनकी चुत से लंड निकाल कर उनकी गांड पर झड़ गया और हम दोनों हांफते हुए अपनी सांसों को कंट्रोल करने लगे.
उस रात मैंने उन्हें पूरी रात चोदा और वे भी मेरा साथ देती रहीं.

इसके बाद मैं चाची को अक्सर ही चोदने लगा था.
पहली बार सेक्स के बाद हम दोनों को सेक्स के लिए जगह नहीं मिल पा रही थी क्योंकि कोई न कोई घर पर आ जाता था.

फिर एक दफा हम दोनों ने प्रोग्राम बनाया और चाची मुझे लेकर अपने मायके आ गईं.
उन्हें मालूम था कि उस दिन घर के सब लोग किसी काम से बाहर गए हुए थे.

घर पर उनकी सिर्फ बहन ही थी जो कि मेरे साथ की थी और मेरी उम्र की ही थी.
वह भी अपनी कोचिंग जा रही थी.

उसने अपनी दीदी को आया देखा तो वह चौंक गई.
पर चाची ने उससे कहा कि तू जा, हम लोग घर पर ही हैं.
वह चली गई.

उसके जाने के बाद हम दोनों शुरू हो गए और तीस मिनट तक सेक्स करने के बाद हम दोनों ने अपने अपने कपड़े सही किए और चाची मेरे लिए कुछ खाने के लिए लाईं.

हम दोनों का सोच यह था कि चाची की बहन आ जाएगी तो अब सेक्स नहीं करेंगे.
लेकिन चाची की बहन को आने में देर थी तो मैं चाची को छेड़ने लगा.
बस मूड बन गया और हम दोनों फिर से शुरू हो गए.

हम दोनों को समय का ध्यान ही नहीं रहा.
चुदाई हो रही थी और तभी चाची की बहन वापस आ गई और उसने हम लोगों को सेक्स करते देख लिया.

उस वक्त चाची का मुँह दूसरी तरफ था तो वे अपनी बहन को नहीं देख पाईं.

मैंने उसे देख लिया था.
लेकिन मैं रुका नहीं और चाची की चूत मारता रहा.

वह बिना कुछ बोले चली गई.
मैंने भी यह बात चाची को नहीं बताई.

मैं जल्दी जल्दी धक्के लगाने लगा, चाची सेक्स का मजा लेने लगी.

कुछ देर के बाद मैंने अपना पानी चाची की चूत में ही निकाल दिया और बगल में लेट गया.

मैंने चाची से कपड़े पहन लेने को कहा.
चाची ने झट से अपने कपड़े पहन लिए.
मैंने भी पहन लिए.

तभी कुछ देर बाद चाची की बहन कमरे में आ गई और उसने ऐसे दिखाया जैसे उसे कुछ मालूम ही न हो.

मैं समझ गया कि लौंडिया चुदाई देख कर गर्म हो गई है और शायद इसकी चुत का मजा भी मिल सकता है.

रात को खाने के समय चाची की बहन मुझे देख देख कर मुस्कुरा रही थी.

मैं कुछ कुछ डर भी रहा था कि कहीं वो किसी को बता नहीं दे.
पर उसने किसी को नहीं बताया.

मैं उससे बात करने लगा तो उसने मुझे एक कागज पकड़ा दिया.
मैंने चाची की नजर बचा कर देखा तो उसमें उसका नंबर लिखा था.

मैं मुस्कुरा दिया और चाची को साथ लेकर वापस अपने घर आ गया.
अब यहीं से मेरी और चाची की बहन से कहानी की शुरुआत हो गयी.

चाची की बहन का नाम आरती था, वह ग्रेजुएशन कर रही थी.
चाची के मायके से वापस आने के बाद हम लोगों की फोन पर बात होने लगी थी और हम लोग घण्टों फोन पर बात करने लगे थे.

वह मुझसे पूछ रही थी कि मैं चाची को कब से पेल रहा हूँ.
मैंने कहा- तुम आम खाने मतलब रखो, गुठलियां चूसने से क्या फायदा?

वह हंस दी और बोली- तो गुठलियां चुसवाओ, कब चुसवा रहे हो!
मैंने कहा- मैं अकेला आ जाता हूँ तो तुम चूस लेना!
वह हंस दी.

अब हम लोगों की फोन पर सब तरह की बात होने लगी और फोन सेक्स भी होने लगा था.
पर मिल नहीं पा रहे थे.

अखिरकार मेरा जन्मदिन आया, तो मेरे घर पर एक दावत हुई.
उस दावत में वह भी घर आयी.

हम दोनों ने छत पर मिल कर चूमा चाटी की और अभी चुदाई की स्थिति बनती कि तब तक किसी के आ जाने के कारण हम लोग अलग हो गए.

हम दोनों मायूसी से बस एक दूसरे को देखते रहे लेकिन कोई मौका नहीं मिला कि कुछ कर सकते.

उस दिन रात को भी मुझे चाची की बहन चोदने का मौका मिला, तो उसी वक्त चाची अपनी चुत उठा कर आ गईं.

वे बोलीं- आज तुम्हारा स्पेशल गिफ्ट देना था तो आ गई हूँ!
मैं मन में सोचने लगा कि चाची तुम्हारी चुत का तो भोसड़ा बन चुका है, अब तो तुम्हारी बहन की चुत का गिफ्ट मिल जाता तो मजा आ जाता.

खैर … लौड़े में आग लगी थी तो मैं चाची को ही चोदने लगा था.
चाची को अब तक अपनी बहन के बारे में नहीं पता था कि मैं उससे भी बात कर रहा हूँ.

एक दिन चाची की बहन को मौका मिल गया तो उसने अपनी बहन को घर आने के लिए कह दिया.
इधर उसने मुझे भी कह दिया था कि मैं उनके साथ आ जाऊं.

मैं चाची के साथ उनके मायके आ गया. घर जाकर मुझे पता चला कि चाची को अपने भाई के लिए लड़की देखने जाना था.
वे मुझसे बोलीं- तुम यहीं घर पर रुक जाओ, मैं शाम तक आ जाऊंगी.

मैंने हामी भर दी.
घर पर मैं और चाची की बहन रह गयी थी.

मैंने दरवाजा बंद किया और चाची की बहन आरती के ऊपर टूट पड़ा.

अब मैंने कैसे चाची की बहन को चोदा और बाद में चाची को भी पता चल गया तो मैंने उन दोनों को एक ही बिस्तर पर नंगी करके चोदा, वह सब मैं अपनी किसी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.
आप यदि पढ़ना चाहते हैं तो प्लीज मुझे मेरी मेल आईडी पर मेल करके जरूर बताएं कि चाची सेक्स कहानी कैसी लगी आपको?
himanshu54kn@gmail.com

You May Also Like

सेक्सी चाची की चूत चोदकर मजा लिया
Views: 334 Category: Chachi Ki Chudai Author: sanchitgupt123 Published: March 21, 2026

देसी चाची सेक्स कहानी में मैं चाची के घर खाना खाता था तो उनसे लगाव हो गया था. एक दिन उनको चोट लग गयी तो मैंने चाची की से…

मेरी बुआ के बेटे ने मेरी मम्मी को चोदा
Views: 64 Category: Chachi Ki Chudai Author: vkdwivedy Published: September 12, 2026

फॅमिली बैड सेक्स कहानी में मैंने अपनी मम्मी को मेरे फुफेरे भाई से चुदती देखा था. अगली रात भी उनका चोदमचोद का प्लान था. लेक…

Comments