ब्रदर डिक सक स्टोरी में मैं अपने बड़े भाई के साथ अपना जन्मदिन मना रही थी. भाई में मेरी चूत से लंड छुआ कर मुझे गर्म कर दिया था तो मैं उससे चुदने को तैयार थी.
फ्रेंड्स, मैं कविता आपको भाई बहन सेक्स कहानी सुना रही कि कैसे एक भाई ने अपनी कुंवारी बहन को उसकी अठारहवीं वर्षगांठ पर चोद दिया.
कहानी के पिछले भाग
18वें जन्मदिन पर भाई से सील तुड़वाने की चाहत
में आपने पढ़ लिया था कि मेरे चेतन भईया ने मुझे नंगी कर दिया था और कमरे की बिजली जलाने का कह दिया था.
मैंने जैसे ही स्विच ऑन किया तो मैं शर्म से पानी पानी हो गई और अपने नग्न जिस्म को अपने हाथों से ढकने लगी.
अब आगे ब्रदर डिक सक स्टोरी:
मैं बोली- हाय भईया, ऐसे क्या देख रहे हो, बहुत शर्म आ रही है. मैं लाज से मर जाऊंगी.
भईया मेरे बोबों को देख कर मस्त होते हुए बोले- कविता इसमें शर्म की क्या बात है, ये देखो मैं भी तो नंगा हूं.
चेतन भईया का लंबा और मोटा लंड बिल्कुल ऊपर छत की तरफ मुँह उठा कर खड़ा था.
भईया मेरी नंगी जवानी देख कर बहुत मस्त हो गए थे और उनका लंड पूरा अकड़ गया था.
उसे देख कर मैं भी मस्त हो रही थी.
चेतन भईया ने अपने लंड को हाथ सहलाया और कहा- कविता तुम अपने दोनों हाथ साइड में कर लो.
मैं तो जैसे लाज से मरने ही वाली थी.
मैंने चेतन भईया के कहे मुताबिक अपने हाथ साइड में कर लिए, जिससे मेरी चूचियां और चुत दोनों नंगी हो गईं.
मेरी नंगी चुत को देखते ही चेतन भईया के लंड ने एक जोर का झटका खाया.
मैं- ओह चेतन भईया, मुझे बहुत डर लग रहा है.
मैं दौड़ कर चेतन भईया से लिपट गई ताकि चेतन भईया मुझे नंगी न देख सकें.
भईया ने प्यार से मेरे चेहरे को ऊपर उठाया और अपनी बहन के रस भरे होंठों को चूमते हुए बोले- मेरी प्यारी बहन, इसमें डरने की क्या बात है? तुम फालतू में ही डर रही हो. मैं अभी तुम्हारा सारा डर दूर कर देता हूं.
ये कह कर चेतन भईया ने अपना कड़क और मोटा लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया.
मैंने जिंदगी में पहली बार एक लंड को पकड़ा था और वह भी चेतन भईया जैसे मर्द का जवान लंड.
मैंने ‘उई मां’ कह कर लंड पर से हाथ हटा लिया.
भईया ने प्यार से दुबारा मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया.
इस बार मुझे डर नहीं लगा, उल्टा लंड को पकड़ते ही मेरे शरीर में करंट दौड़ गया और मैं अपने भईया के लंड को पकड़ कर धीरे धीरे सहलाने लगी.
फिर भईया भी मेरी चुत को सहलाने लगे. मैं तो जैसे स्वर्ग में चली गई.
चेतन भईया मुझे अपने लंड को सहलाते हुए देख कर खुश हो रहे थे कि उनकी बहन कविता ही उनका मोटा लंड सहला रही है.
भईया एक हाथ से मेरी चुत और दूसरे हाथ से मेरे बोबे को मसलने लगे.
मेरी आंखें आनन्द के मारे बंद हो गई थीं.
भईया- कविता अब कैसा लग रहा है? क्या तुम्हें मेरा ये टूल पसंद आया?
मैं धीरे से अपना मुँह चेतन भईया के कान के पास ले गई और हल्की आवाज़ में शर्माती हुई बोली- भईया अब कोई डर नहीं लग रहा है. आपका ये टूल बहुत अच्छा है और मुझे आपका ये बहुत पसंद आया है.
भईया खुश हो गए.
अब मैं कमसिन सी लड़की अपने जवान और मर्द भईया की बांहों में थी.
चेतन भईया फिर से मेरे होंठ चूसने लगे और एक हाथ से मेरा एक दूध दबाने लगे. वे अपने दूसरे हाथ से मेरा चूतड़ दबाने लगे.
अब भईया ने मेरे ऊपर पूरा हमला कर दिया था और मैंने भी अपनी जवानी अपने चेतन भईया को सौंप दी थी.
मेरे सगे भईया मेरी जवानी का रस निचोड़ निचोड़ कर पी रहे थे.
कुछ पल बाद भईया ने मुझे अपने आप से अलग किया और खुद पलंग पर बैठ गए.
वे अपने पैर नीचे लटका कर बोले- कविता, आओ और मेरी गोद में बैठ जाओ. हम दोनों एक दूसरे को केक खिलाते हैं.
मैंने एक प्लेट में केक के कुछ टुकड़े रखे और प्लेट लेकर चेतन भईया की गोद में दोनों तरफ टांगें फैला कर बैठ गई.
चेतन भईया का मोटा लंड जो खड़ा था, वह मेरे पेट में चुभने लगा.
उन्होंने मुझे कसके पकड़ा और अपनी तरफ खींचा, लेकिन लंड बीच में आ गया.
चेतन भईया बोले- कविता, मुझे लग रहा है कि तेरे और मेरे बीच में ये लंड आ रहा है, इसलिए मैं ऐसा करता हूं कि अपने लंड को किसी छेद में डाल देता हूं.
मैं चेतन भईया की चाल समझ गई कि चेतन भईया अपनी बहन को गोदी में बिठा कर चोदने की प्लानिंग कर रहे हैं.
मैं शर्माती हुई बोली- चेतन भईया, मुझे तो कोई ऐसी जगह दिख नहीं रही है. आपका लंड है भी इतना लंबा और मोटा इसको कहां छुपाओगे? मुझे लगता हैं कि इस लंड की वजह से मैं अपने चेतन भईया को प्यार से गले नहीं मिल पाऊंगी!
चेतन भईया भी इसी तरह नाटक करते हुए बोबों, पेट से होते हुए जांघों पर हाथ फेरते हुए बोले- कविता मेरी बहन तेरी नाभि में एक छेद है, पर वह बहुत छोटा और कम गहरा है.
चेतन भईया ऐसे ही नाटक करते हुए अपना हाथ मेरी चुत पर हाथ रखा और बोले- कविता छेद मिल गया, अगर तुम कहो तो मैं अपना लंड इस छेद में डाल दूं?
चेतन भईया की बात सुन कर मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया. मैं तो चुदने के लिए तैयार थी ही और अपने चेतन भईया का लंड लेने के लिए मरी जा रही थी.
लेकिन फिर भी मैंने नाटक करते हुए कहा- देख लो भईया, अगर मेरी चुत में जगह है तो घुसा दो अपना लंड और मुझे कसके प्यार करो … आज मेरा जन्मदिन है न! मैं अपने प्यारे भईया को केक भी खिलाना चाहती हूं.
ये बात सुन कर चेतन भईया खुश हो गए और मुझे थोड़ा सा पीछे सरका दिया.
फिर वे अपना लंड पकड़ कर मेरी चुत में घुसाने लगे.
मेरे चेतन भईया का लंड काफी मोटा था और ये एंगल भी सही नहीं था. इस वजह से उनका लंड मेरी बुर के अन्दर नहीं घुस पा रहा था.
उन्होंने सख्ती से लंड चुत में पेलने का प्रयास किया, जिसके कारण मेरे मुँह से दर्द भरी आह निकल गई.
चेतन भईया मेरे होंठों को चूमते हुए बोले- कविता लगता हैं मेरा लंड सूख गया है … इसलिए तेरी चुत में नहीं घुस रहा है … अब क्या करें यार!
मैं- एक काम हो सकता है चेतन भईया. मैं आपके इस लंड को मुँह में लेकर चूस देती हूँ तो ये गीला हो जाएगा.
भईया- वाह मेरी प्यारी बहन कविता ये तो कमाल का आइडिया है. तुम मेरा लंड चूस कर गीला करो, फिर मैं तुम्हारी चुत को चूस कर गीला कर दूंगा. फिर तुम आराम से मेरा ये लंड अपनी चुत डालकर मेरी गोद में बैठ कर अपने भईया को प्यार कर सकती हो.
मेरे मुँह से लंड चूसने की बात सुन कर चेतन भईया का लंड और लंबा और मोटा हो गया और टोपा पूरा गुलाबी हो गया.
भईया ने मुझे जमीन पर बैठा दिया और खुद पलंग पर पैर लटका कर बैठ गए.
अब चेतन भईया का लंड एकदम मेरे मुँह के सामने आ गया.
चेतन भईया- अरे रुको कविता, वैसे ही हम दोनों केक ही खाने वाले हैं तो तुम ऐसा करो कि मेरे लंड पर केक लगा लो … तो दोनों काम एक साथ हो जाएंगे!
फिर भईया ने अपने लंड पर केक लगा दिया.
भईया का लंड केक की क्रीम से पूरा व्हाइट व्हाइट हो गया था.
मैं तो सफेद लंड को देख कर मस्त हो गई और मेरी चुत ने पानी छोड़ना चालू कर दिया था.
भईया ने प्यार से मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मेरा मुँह अपने लंड की तरफ बढ़ाया.
मैंने भी अपनी जीभ निकाल कर लंड के सुपारे पर फेरी. मुझे लंड और केक दोनों का मजा और स्वाद एक साथ आ रहा था.
मैं केक भी खाती रही और साथ ही लंड को चूसती रही.
भईया के मुँह से तो सिसकारियां निकलने लगी थीं.
‘आह मेरी बहन कविता मजा आ गया … आह और चूसो अपने चेतन भईया का लंड आहह…!’
मैंने धीरे से अपना मुँह पूरा खोला और चेतन भईया के लंड का पूरा सुपारा मुँह के अन्दर ले लिया.
फिर अपने दोनों गालों को दबा कर लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी.
धीरे धीरे मैंने चेतन भईया का लंड लगभग 5-6 इंच तक अन्दर ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी.
मुझे लंड का स्वाद बहुत ही अच्छा लग रहा था. मन कर रहा था कि चेतन भईया ऐसे ही बैठे रहें और मैं उनका लंड चूसती ही रहूं.
भईया के मुँह से आनन्द भरी सिसकारियां और आहें निकल रही थीं
वे मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपना लंड मेरे मुँह के अन्दर जोर जोर से डालने लगे.
मैं भी चेतन भईया का लंड जोर जोर से अन्दर बाहर करने लगी. मेरी भी आनन्द के मारे आंखें बंद हो रही थीं.
चेतन भईया ने सिसकारी भरते हुए कहा- आह मेरी कविता रानी … मजा आ गया …ऐसे ही चूसती रहो … आह बहुत मजा आ रहा है. आज तुमने अपने जन्मदिन पर मेरे मन की छुपी हुई तमन्ना पूरी कर दी. आह कविता थोड़ा और जोर जोर से चूसो और मेरे लंड को खूब गीला कर दो ताकि जब मैं इसे तेरी चुत में डालूं, तब कोई दिक्कत ना हो!
चेतन भईया का लंड अब और भी अकड़ गया था और लंड का सुपारा भी फूल गया था.
ऐसा लग रहा था कि अगर एक मिनट तक मैंने चेतन भईया का लंड और चूसा, तो वह फट कर पानी छोड़ देगा.
चेतन भईया ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल लिया और बोले- बस कर कविता, मेरा वीर्य निकल जाएगा और हम दोनों जन्मदिन सही से नहीं मना पाएंगे.
लेकिन मुझे तो आज चेतन भईया का वीर्य पीना था इसलिए मैंने वापस लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया.
मैं- ये गलत बात है भईया, मुझे आपका लंड ठीक से गीला करने दो ना … नहीं तो ये मेरी चुत में कैसे घुसेगा और आपका वीर्य निकल गया तो क्या हुआ आपको कहीं जाना है क्या?
चेतन भईया- नहीं मेरी बहन कविता तुझे छोड़ कर मैं कहां जाऊंगा?
मैं- फिर क्यों टेंशन ले रहे हो, पूरी रात पड़ी है जन्मदिन मनाने के लिए … आज रात में मैं आपकी हूँ. अभी तो आपको केक भी खिलाना है! मैं आपको मेरे बोबों पर मेरे होंठों पर, मेरी चुत पर और मेरे नितंबों पर केक लगा कर चटवाऊंगी … बोलो भईया चाटोगे न आप अपनी बहन कविता को?
भईया भी समझ गए कि उसकी बहन कविता आज खुल कर अपनी जवानी उसके नाम करना चाहती है- बिल्कुल मेरी बहन कविता … लो चूसो फिर अपने चेतन भईया का लंड … और पी जाओ इसका शीरा!
मैं जोर जोर से चेतन भईया का लंड चूस रही थी और अपना मुँह आगे पीछे कर रही थी.
थोड़ी ही देर में में चेतन भईया की सिसकारियां तेज हो गईं और उन्होंने मेरा सर जोर से पकड़ लिया.
वे आह आह की सिसकारी लेते हुए बोले- कविता और तेज … और तेज चूसो … बस पानी निकलने ही वाला है!
मैंने अपने भाई के लंड को और तेज चूसना चालू कर दिया.
भईया भी अपनी कमर हिला रहे थे और अचानक से उनके मुँह से चीख निकल गई- ओह कविता … मैं आ रहा हूं … और तेज चूसो मेरी बहन … आह अपने भईया का लंड और तेज चूसो!
अचानक से भईया के लंड ने ऐक झटका खाया और उनके मुँह से सिसकारी निकल गई- आह कविता लो मैं आ गया!
इसी के साथ चेतन भईया के लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ दी. वह पिचकारी सीधे मेरे गले से नीचे उतरती चली गई.
चेतन भईया का लंड झटके खाता रहा और वीर्य छोड़ता रहा.
मैं उनके लौड़े से निकला पूरा वीर्य पी गई और लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.
भईया का लंड ढीला पड़ गया था और सो सा गया था.
मैंने अपने मुँह से चेतन भईया का लंड बाहर निकाला, तो वह सिकुड़ कर छोटा सा हो गया.
मैंने भईया की तरफ देखा तो वे आंखें बंद करके आनन्द में डूबे हुए थे.
मैंने उनके चेहरे पर इतनी खुशी कभी नहीं देखी.
मुझे बहुत अच्छा लगा कि मैंने अपने सगे भाई को सुख दिया.
भईया- आह कविता … मजा आ गया आज तुमने मुझे खुश कर दिया. आज के बाद मैं वही करूंगा जो तुम कहोगी … आई लव यू कविता … काश तुम मेरी बहन की जगह बीवी होती!
मैं चेतन भईया के होंठों को चूमती हुई बोली- क्यों शर्मिंदा करते हो भईया. आप तो मेरे सबसे प्यारे भईया हो. आपकी बहन हुई तो क्या मैं आपकी बीवी बन कर रहूंगी. आप जैसे चाहो मेरी जवानी का सुख भोग सकते हो. आप जब भी कहेंगे, मैं हमेशा आपके लंड की इसी तरह की सेवा करने को तैयार हूं.
दोस्तो, बहन ने भाई का लंड चूस कर वीर्य पी लिया है.
अगले अंक में बहन अपनी कुंवारी चुत में भाई का लंड लेगी.
क्या आपको नहीं लगता है कि मेरी इस ब्रदर डिक सक स्टोरी के लिए आपको एक मेल लिखना चाहिए!
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