बड़ी बहन की चुत की चुदास- 2

Views: 25 Category: Brother-Sister By sureshthakur2 Published: July 16, 2026

भाई का लंड चूसा बड़ी बहन ने. जीजा ने मेरी बहन की गांड मारी तो उसकी गांड फट गयी. तो मैंने अपनी बहन की गांड में दवा लगाकर उसे ठीक किया. लेकिन नंगी बहन देख मेरा लंड खड़ा हो जाता था.

फ्रेंड्स, मैं आपको अपनी जीजी और जीजा की चुदाई की कहानी सुना रहा था.

मैं कहानी के पहले भाग
दीदी और जीजू की चुदाई लाइव देखी
में आपको अब तक बता चुका था कि जीजी की गांड में जीजा ने उंगली पेल दी थी, जिस वजह से जीजी तड़फ उठी थीं.

अब आगे बड़ी बहन ने भाई का लंड चूसा:

जीजा की उंगली जैसे ही गांड में घुसी, तो जीजी की आह निकल गई लेकिन जीजा नहीं रुके.

कुछ देर बाद जीजा ने अपनी उंगली में और जीजी की गांड के छेद पर थोड़ा तेल लगाया और अपनी उंगली जीजी की गांड में पुनः डालने लगे.
जीजी को दर्द होने लगा क्योंकि इस बार उंगली काफी गहराई में घुस गई थी.

जीजा ने जीजी की तरफ ध्यान न देते हुए अपनी उंगली को गांड की गहराई तक धकेलना जारी रखा.
उंगली अन्दर चली गई थी तब जीजी अपनी गांड को हिलाने लगी थीं.
शायद वे यह कोशिश इसलिए कर रही थीं ताकि उंगली उनकी गांड में न जाए.

लेकिन जीजा तो गांड मारने की ठान चुके थे … तो उन्होंने अपने एक हाथ से जीजी के कूल्हों को पकड़ा और अपनी पूरी उंगली जीजी की गांड में धकेल दी.
जीजी दर्द से चिल्ला उठीं.

फिर जीजा ने उंगली निकाल कर जीजी की गांड पर जोर जोर से थप्पड़ मारना शुरू कर दिया, जिससे उन्हें दर्द हो रहा था … लेकिन लग रहा था जैसे दीदी जीजा के थप्पड़ों का आनन्द ले रही थीं.
गांड में उंगली करने के बाद छेद को और ढीला करने के लिए जीजा ने अपनी दो उंगलियां पेलना शुरू कर दीं.

जीजी तड़फ तो रही थीं लेकिन वे भी शायद समझ गई थीं कि गांड मरवाने में ही भलाई है.
कुछ देर में गांड ढीली हो गई और जीजी को भी मजा आने लगा था.

अब जीजा ने अपने लंड पर बहुत सारा तेल लगाया और आगे की चमड़ी को पीछे खींच लिया, जिससे उनका बड़ा वाला लाल सुपाड़ा साफ दिखने लगा.

उन्होंने सुपाड़े और जीजी की गांड पर और तेल लगाया और उनके दोनों चूतड़ों को हाथों से पकड़ कर फैला दिए जिससे उनकी भूरी सी गांड का छोटा सा छेद लुपलुप करता हुआ दिखने लगा.

जीजा ने अपने लौड़े का सुपाड़ा जीजी की गांड के छेद पर रखा और धक्का लगा दिया.
जीजा का लंड गांड के अन्दर नहीं गया और चूत की खाई में फिसल गया.

जीजा ने वापस अपना लंड पकड़ा जीजी की गांड के छेद में फंसा कर उनके चूतड़ों को फैलाते हुए पकड़ कर रखा.
जीजी ने भी गांड के छेद को ढीला छोड़ा, उसी वक्त जीजा ने अपने लंड का सुपाड़ा जीजी की गांड में पेल दिया.

जीजा का सुपाड़ा जीजी की गांड में अन्दर फिसलता हुआ घुस गया.

जीजी जोर से चिल्लाईं और लंड को बाहर निकालने को बोलीं.
लेकिन जीजा ने उनकी एक न सुनी बल्कि उन्होंने जीजी की गांड पर थप्पड़ मारने शुरू कर दिए.

जीजी को भी अपनी गांड पर थप्पड़ मरवाने में मज़ा आने लगा था.
वे थोड़ी ढीली पड़ गईं और जीजा ने अपना लंड जीजी की गांड में धकेलना शुरू कर दिया.

जीजा का लंड जीजी की गांड में जाने लगा.

कुछ मिनट रुकने के बाद जीजा ने अपने लंड को वापस एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड जीजी की गांड के अन्दर पेल दिया था.

जीजी रोईं और अपनी गांड में जीजा के लंड के हमले से बचने के लिए अपनी गांड को पीछे खींचने लगीं.
लेकिन जीजा ने उनकी कमर को पकड़ लिया था और वे जीजी की पीठ पर चढ़ गए थे.

इस तरह से जीजी, जीजा के शिकंजे में फंस गई थीं.

तभी जीजा ने जीजी की चूचियों से खेलना शुरू कर दिया.
इससे जीजी को राहत मिलने लगी.

कुछ मिनटों के बाद जीजा ने जीजी की गांड मारना शुरू कर दिया.

वे अपना लौड़ा थोड़ा बाहर खींचते और फिर तेजी से जीजी की गांड में गहराई तक धकेल देते.
जीजी की गांड से खून निकलने लगा लेकिन जीजा नहीं रुके.

उन्होंने जीजी को पकड़ा हुआ था और वे तेज तेज धक्का देने में लगे हुए थे.
इस तरह से उन्होंने जीजी की गांड मारना शुरू कर दिया था.

कोई दस मिनट तक गांड मरवाने के बाद जीजी सहज हो गईं और वे जीजा का लंड अपनी गांड में लेने लगी थीं.
अब ऐसा लग रहा था कि जीजी अपनी गांड मरवाने का आनन्द ले रही हैं.

जीजा उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मारते रहे.

कुछ मिनट बाद जीजा जोर से कराहते हुए बोला- आह आह … मेरा झड़ने वाला है.
जीजा के चूतड़ टाइट हो गए और वे अपने पैरों की उंगलियों पर अकड़ कर खड़े हो गए.
वे अपने लंड को जीजी की गांड में गहराई तक धकेलने लगे और अगले कुछ पलों बाद जीजा ने अपने कूल्हों को हिलाते हुए झड़ना शुरू कर दिया.

उन्होंने अपना सारा वीर्य जीजी की गांड में छोड़ दिया और थक कर उनकी पीठ पर ही गिर गए.
जीजा ने जीजी की पीठ पर आराम करने के बाद अपना लंड बाहर निकाला.

मैंने देखा कि उनका लंड वीर्य और जीजी की गांड से निकले खू.न से लथपथ था.
उनका वीर्य जीजी की गांड से निकल कर उनकी चूत पर टपकने लगा था और जीजी दर्द से कराहती हुई बिस्तर पर गिर गईं.

वे अपनी गांड पर हाथ फेरती हुई बोलीं- मेरी गांड फट गई है और खून निकल रहा है मादरचोद.
जीजा हंस कर बोले- साली, अब मैं तेरी गांड रोज़ मारूंगा. तेरी गांड मेरा लंड लेने के लिए ढीली हो गई है. अब तुझे दर्द नहीं होगा भोसड़ी वाली छिनाल. ले लंड साफ कर.
जीजी भुनभुनाई- खुद ही साफ कर लो!

जीजा ने हंस कर अपना लंड जीजी के पेटीकोट से साफ किया.
फिर जीजी उठीं और उन्होंने उसी पेटीकोट से अपनी गांड साफ की.

अगले कमरे में मैं यह चुदाई देख कर उत्तेजित हो गया और मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया था, जो अब तक सख्त हो चुका था.
मैंने हस्तमैथुन शुरू कर दिया.

कुछ देर बाद मैंने वीर्य की धार छोड़ी और बिस्तर पर जाकर सो गया.

अगले दिन जीजा ऑफिस चले गए.
तब मैंने देखा कि जीजी पूरे शरीर और गांड में दर्द के कारण चलने में असमर्थ थीं.

मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ?
उन्होंने कहा- कुछ नहीं.

मैंने जीजी से कहा- मैं सब जानता हूं. जीजा ने कल रात आपकी गांड मारी थी न … इसलिए आप चल नहीं पा रही हैं!
उन्होंने पूछा- तुम्हें कैसे पता?

मैंने कहा- मैंने दरवाजे के छेद से सब देख लिया. वे आपके चूतड़ और चूचियों और गालों पर थप्पड़ मार रहे थे.
जीजी ने पूछा- फिर तुमने सब देखने के बाद क्या किया?
मैंने कहा- सब देखने के बाद मेरा लंड भी कड़क हो था तो मैंने लंड की मुठ मार ली और अपना वीर्य निकाल दिया.

जीजी ने कहा- क्या तुमने कल से पहले भी सब देखा था?
मैंने कहा- हां.

‘फिर तुमने, हमें चुदाई करते देखने के बाद क्या किया था?’
मैंने कहा- तुम दोनों के सो जाने के बाद मैंने आपकी चूचियां छुईं … अपना लंड हिलाया और अपना वीर्य झड़ाया.

जीजी ने कहा- तुम शैतान हो, तुमने मेरी चूचियां छुई और दबाईं … और मेरी चूत को भी छुआ और सूंघा और चाटा था. मैंने तुम्हारा हाथ अपनी चूचियों पर और अपनी चूत पर जीभ महसूस की थी. क्या तुम्हें मेरे रस और तुम्हारे जीजा के वीर्य से भीगी मेरी चूत का स्वाद पसंद आया?

मैंने कहा- हां मुझे जीजा के वीर्य का स्वाद पसंद आया, अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं जीजा का लंड चूसना और उसका वीर्य खाना पसंद करूंगा.
जीजी ने कहा- ठीक है, जब मेरे पीरियड्स होंगे और तुम्हारा जीजा मुझे चोद नहीं पाएगा तो मैं उससे कहूँगी कि तुम उसका लंड चूसना चाहते हो.

मैंने जीजी ने कहा- क्या आपको उस दिन सही में पता चल गया था कि मैं आपकी चुत चाट रहा हूँ?

जीजी- हां मैंने महसूस किया था लेकिन तुम्हें लंड हिलाते हुए देखने के बाद मैं चुप पड़ी रही और सोने का नाटक करती रही. अगर तुम चाहो तो हमारे साथ सो सकते हो और हमें चुदाई करते हुए देख सकते हो, लेकिन अपने जीजा को मत बताना.
मैंने कहा- ठीक है जीजी, मैं आपको चुदती हुई देखना चाहता हूँ.

मैंने कहा- आप अपने दर्द के लिए क्या करोगी जीजी?
जीजी ने कहा- मलहम लगा लूँगी, तो कुछ दिनों में घाव ठीक हो जाएगा.

मैंने कहा- मलहम है या मैं ले आऊं!
जीजी ने कहा- हां अभी मेरे पास नहीं है, तुम बाजार जाकर कुछ मलहम और दर्द की दवा ले आओ.

मैं गया और मलहम और दर्द की दवा ले आया.

जीजी ने कहा कि मैं खुद मलहम नहीं लगा सकती हूँ.
मैंने कहा- जीजी, मैं लगा दूँगा.

उन्होंने कहा- नहीं मैं तेरे सामने नंगी नहीं हो सकती.
मैंने कहा- जीजी, मैंने आपको कई बार रात में नंगी देखा है. जब जीजा आपको चोद रहे थे … इसलिए यह पहली बार नहीं है, जब मैं आपको नंगी देखूंगा. वैसे भी आप अपनी गांड पर मलहम कैसे लगाओगी आपका हाथ वहां तक नहीं पहुंच पाएगा.

जीजी ने कहा- ठीक है, तू लगा दे … लेकिन किसी को मत बताना!
मैंने कहा- ठीक है.

फिर जीजी ने दरवाजे बंद कर दिए और अपने नाइट गाउन को अपने कूल्हों तक उठा लिया.
मैंने कहा- जीजी, जीजा ने आपके चूतड़ों और चूचियों पर भी खूब मारा है न … इसलिए वहां भी मलहम लगवा लो … इसके लिए बेहतर रहेगा कि आप पूरी नंगी हो जाओ.

वे बोलीं- हां, तू सही कह रहा है. मेरे वहां भी दर्द हो रहा है.
यह कह कर जीजी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और वे पूरी नंगी हो गईं.

जीजी ने एक हाथ से अपनी चूचियां और दूसरे से अपनी चूत ढकी.
तो मैंने हंसते हुए कहा- जीजी मैंने आपकी चूचियां और चूत कई बार देखी हैं, जब आप चुद रही थीं. अब आप उन्हें क्यों छिपा रही हैं?
उन्होंने अपना हाथ हटा लिया और चूचियां सहला कर बोलीं- ले देख ले साले कमीने … और चाहो तो चूस भी लो!

यह कह कर जीजी ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अपना चेहरा नीचे करके बिस्तर पर लेट गईं.
मैंने जीजी के चूतड़ों पर लाल निशान देखे और उनकी गांड से खू.न देखा जो सूख गया था और चिपका हुआ था.

मैंने कहा- पहले मुझे आपकी गांड पर लगा सूखा खू.न साफ करना होगा, फिर मलहम लगाऊंगा.
जीजी ने कहा- ठीक है, थोड़ा पानी और साबुन ले आओ और रुई से खून को साफ कर दो.

मैंने पानी लिया और जीजी की गांड को फैलाकर सफाई शुरू कर दी.
सफाई के बाद मैंने जीजी के चूतड़ों को भी साफ किया और उनसे कहा- जीजी आप बहुत खूबसूरत हैं. जब आप नंगी होती हैं तो बहुत सेक्सी लगती हैं.

वे मुस्कुराईं और बोलीं- क्या तुम्हें यह सब पसंद है?
मैंने कहा- हां मुझे आपको नंगी देखना पसंद है.

उन्होंने कहा- अच्छा जब मैं नंगी होती हूँ तो तुम्हें क्या पसंद आता है?
मैंने कहा- आपकी चूचियां, गांड, चूतड़ और चूत.

‘तूने तो मुझे नंगी देखा है, मुझे भी तो तू नंगा हो कर अपना सामान दिखा!’
मैंने कहा- ठीक है.

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए, जीजी को नंगी देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था.

मैंने नंगे रह कर ही जीजी की गांड के छेद और उनकी चूत पर मलहम को उंगली से रगड़ रगड़ कर लगाया.
उनकी गांड पर मलहम लगाते समय मैंने चूतड़ों को धीरे से दबाया भी और मालिश जैसी भी की. इससे जीजी को आराम महसूस हुआ.

वे कहने लगीं- हां ऐसे ही मेरी गांड की मालिश कर दे … अच्छा लगा रहा है.

मैं जीजी की गांड की मसाज करने लगा.

फिर मैंने उन्हें पलटने को कहा ताकि मैं उनकी चूचियों पर सही से मलहम लगा सकूँ.
वे पलटीं हालांकि वे अपनी चूचियों पर खुद अपने हाथ से मलहम लगा सकती थीं पर वे अपने मम्मों पर मेरे हाथों को महसूस करना चाहती थीं.

मैंने जीजी की उठी हुई सख्त चूचियों पर मलहम फैलाई और हथेली से लगा कर उनकी मालिश की.
जीजी ने अपनी आंखें बंद कर ली थीं.

कुछ पल बाद जीजी ने धीरे से कहा- मेरे दूध दबाओ. अच्छा लग रहा है!

मैंने देखा कि जीजी के निप्पल खड़े हो गए थे और उनकी सांसें तेज़ हो गई थीं. वे उत्तेजित हो गई थीं.

तभी उन्होंने धीरे से अपना हाथ मेरी जांघों के बीच बढ़ाया और मेरे लंड को पकड़ लिया.
मेरे लंड में से प्री-कम टपक रहा था.

जीजी ने कहा- क्या तुम्हें भी थोड़ा मज़ा चाहिए?
मैंने कहा- हां!

फिर वे बोलीं- मेरे मुँह के पास आओ.
मैं उनके चेहरे के पास गया, उन्होंने मेरे होंठों को चूमा और कहा- मेरी मदद करने के इनाम के तौर पर मैं तुम्हारा लंड चूसूँगी.

यह कहते हुए जीजी ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और वे मेरे लौड़े को चूसने लगीं.
उन्होंने मेरे लंड को धीरे से काटा और अपने गले तक ले लिया.

दो मिनट के बाद मैंने जीजी से कहा- जीजी, मेरा रस निकलने वाला है!
उन्होंने कहा- ठीक है तू मेरे मुँह में झड़ जा.

मुझे महसूस हुआ कि मेरा वीर्य मेरे अंडकोष से निकल रहा है तो मैंने जीजी के मुँह में वीर्य डालना शुरू कर दिया.
मेरा वीर्य जीजी के मुँह में जाता जा रहा था और जीजी मेरे लंड को चूसती हुई वीर्य को निगलती जा रही थीं.

इस प्रकार मेरी जीजी ने भाई का लंड चूसा.

सारा रस निगल लेने के बाद जीजी ने पूछा- क्या अब तुम खुश हो?
मैंने कहा- हां बहुत … लेकिन मेरी एक और इच्छा है!

उन्होंने कहा- क्या?
मैं झिझका और चुप रहा.

जीजी ने पूछा- बोल ना और क्या चाहिए?
मैंने सर झुका कर कहा- आपको चोदना है.

पहले तो वे गुस्सा हुईं, फिर बोलीं- मैं तेरी बड़ी बहन हूं और ऐसा कैसे सोच सकती हूं.
मुझे शर्मिंदगी महसूस हुई और मैं रोने लगा.

मैंने कहा- सॉरी जीजी, मुझे ऐसा सोचने के लिए भी बहुत दुख है.

कुछ मिनट चुप रहने के बाद उन्होंने कहा- यह एक गलती हुई थी कि तुमने मुझे चुदते हुए देखा और तब भी देखा जब मैंने तेरे जीजा से अपनी गांड मरवाई थी.
मैं चुप रहा.

कुछ मिनट सोचने के बाद जीजी ने कहा- ठीक है मैं तुम्हें मुझे चोदने दूंगी लेकिन केवल एक बार … और केवल दिन के समय, जब तेरे जीजा जॉब पर गए होंगे. उसके बाद तुम मुझे कभी नहीं छूओगे!
मैं बहुत खुश था.

जीजी ने इशारा किया तो मैं उनके ऊपर झुका और पहली बार उसके मुँह को चूमा.
जीजी चौंक गईं, लेकिन फिर संभल गईं और उन्होंने मुझे वापस जोश से चूमा.

जीजी ने मुझसे कहा- मुझे कुछ दिनों में ठीक हो जाने दो, फिर तुम मुझे चाहो तो एक बार चोद सकते हो. तब तक तुम मुझे अपने जीजा से चुदते हुए देखो.

दोस्तो, अगले भाग में मैं आपको अपनी सेक्स कहानी में बताऊंगा कि किस तरह से मैं दीदी को सही से नहीं चोद पाया और जीजा ने भी जीजी को चोदना बंद कर दिया तो जीजी की चुत में किसका लंड गया और उनकी चुदास मिट सकी.

मेरी इस भाई का लंड चूसा कहानी पर आप अपने विचार जरूर मेल करें.
धन्यवाद.
sureshthakur2@gmail.com

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