अठारहवीं वर्षगांठ पर बहन ने भाई से चुत फड़वाई- 2

Views: 3 Category: Brother-Sister By loverboy199.love Published: September 21, 2026 📖 11 min read
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आई वांट बिग ब्रदर डिक स्टोरी में मैं 18 साल की हुई तो मेरे बड़े भाई की वासना भरी हरकतों ने मेरे जिस्म में भी वासना जगा दी. मैं भाई का बड़ा लंड लेना चाहती थी.

हैलो मेरी जान … मैं आपकी कविता वापस से अपनी भाई बहन सेक्स कहानी का अगला भाग लेकर हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
बड़े भाई की मुझे चोदने की तमन्ना
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरे भइया मुझे मेरे अठारहवें जन्मदिन पर चोदने के लिए बेसब्र हुए जा रहे थे और मैं खुद अपने भाई के लंड से अपनी कुंवारी चुत की सील फड़वाने को मरी जा रही थी.

अब आगे आई वांट बिग ब्रदर डिक स्टोरी:

भइया निरंतर अपने लंड से मुझे पेलने की सोच रहे थे.
तभी मैंने सोचा कि अगर चेतन भइया को रोका नहीं गया तो वे अभी ही मुझे चोद देंगे.

दूसरे ही पल मैंने यह भी सोचा कि यदि भइया नहीं चोदेंगे तो मैं खुद ही उनसे चुदवा लूंगी क्योंकि मेरी चुत में इतनी ज्यादा आग लग चुकी थी कि ये बिना चुदे मानने वाली नहीं थी.

अब एक आखिरी कैंडल रह गई थी जो कि टेबल की दूसरी तरफ को लगी थी.
मैं जोर लगा कर फूँक मार तो रही थी पर कैंडल बुझ नहीं रही थी.

चेतन भइया ने मेरी चुत के मुँह पर अपना लंड का टोपा सही से लगाया और मुझसे बोले- कविता रूको, मैं एक दो तीन बोलता हूँ … जैसे ही मैं तीन बोलूँ, तुम एकदम जोर से फूँक मारना, तो शायद कैंडल बुझ जाए!
मैं- ठीक है भइया!

चेतन भइया ने अपने हाथों से मेरे दोनों नितंबों को जोर से पकड़ लिया.
मैं चेतन भइया की चाल समझ ही नहीं पाई.

चेतन भइया ने मेरी चुत पर अपने लंड को दबाया और जोर से कहा- एक दो तीन!
यह कह कर उन्होंने एक जोरदार झटका दे मारा.

उस झटके की वजह से चेतन भइया का लंड का मोटा टोपा मेरी चुत में घुस गया.
मेरी तो जैसे सांस ही रुक गई क्योंकि चेतन भइया का लंड बहुत मोटा था और उनका लंड अब मेरी चुत के अन्दर घुस गया था.

शायद 2 या 3 इंच लंड अन्दर घुस गया था.
मेरे मुँह से जोर से ‘आह चेतन भइया मर गई …!’

उसी वक्त मेरे मुँह से जोर से सांस निकलने के कारण कैंडल भी बुझ गई.
चेतन भइया खुश होकर बोले- देखा कविता, लास्ट कैंडल भी बुझ गई है. अब तुम इसी तरह खड़ी रहो … अब हम केक काटते हैं.
मैं दर्द से कराहती हुई बोली- आह ओके चेतन भइया … जल्दी से केक काट देते हैं … अब मुझसे रहा नहीं जा रहा!

उस वक्त चेतन भइया का लंड मेरी चुत में घुसा हुआ था.
मैं तो कमसिन चुत वाली कुंवारी लड़की थी और चेतन भइया एक सांड जैसे भरपूर मर्द हैं.

मेरी हाइट तो चेतन भइया के पेट जितनी ही है, चेतन भइया का लंड भी मेरे हाथ से मोटा है.

पता नहीं आज उनका पूरा लंड जब मेरी चुत में जाएगा तो मेरा क्या हाल होगा?
मेरी चुत में अभी तो सिर्फ भइया के लंड का टोपा भर अन्दर गया है और अभी से ही मुझे इतना ज्यादा दर्द हो रहा है कि मेरी तो जैसे सांस ही रुक गई है.

मेरा मन तो कर रहा था कि यहां से भाग जाऊं.
लेकिन दिल कह रहा था कि ऐसे ही खड़ी रहूं और चेतन भइया का लंड मेरी चुत के अन्दर बाहर होता रहे.

हम दोनों भाई बहन इस तरह से शो कर रहे थे जैसे मेरी चुत में चेतन भइया का लंड घुसा ही नहीं हो.
मैं टेबल पर झुक कर खड़ी थी क्योंकि इसी एंगल में लंड चुत के अन्दर घुसा रह सकता था.

फिर चेतन भइया ने मुझे चाकू दिया और कहा कि कविता ऐसे ही खड़ी खड़ी केक को काट दो!

मैंने कांपते हुए हाथ से चाकू पकड़ा और केक काटने लगी.
उधर चेतन भइया मेरी चुत में लंड को अन्दर को ढकेलने की कोशिश कर रहे थे.

मेरी चुत बहुत गीली हो गई थी, जिससे चेतन भइया को लंड अन्दर बाहर करने में बहुत आसानी होने लगी थी.

मैं महसूस कर रही थी कि अब चेतन भइया का लगभग आधा लंड मेरी चुत के अन्दर घुस गया था.
मेरी सांसें तेज हो गई थीं.
चेतन भइया का भी ऐसा ही हाल था.

उनका लंड अब शायद मेरी सील के पास पहुँच गया था तो मुझे दर्द होने लगा था.
शायद चेतन भइया का लंड मेरी चुत की सील तोड़ने ही वाला था.

मैं अभी सोच ही रही थी कि अब पता नहीं क्या होगा कि तभी भइया ने एक जोर का झटका मार दिया.
इस बार उनका फौलादी लंड उनकी कुंवारी बहन कविता की चुत की सील तोड़ते हुए अन्दर घुस गया.

ये एक अजीब सा दर्द भरा अहसास था.
जब तक लंड की ठोकर नहीं लगी थी, तब तक तो मेरा भी मन कर रहा था कि आज अपने 18वें जन्मदिन पर चेतन भइया के लंड से सील तुड़वा ही लूं … लेकिन दर्द और डर के कारण सब कुछ गलत लगने लगा था.

मैं और चेतन भइया अभी भी इस बात को इग्नोर कर रहे थे कि लंड चुत का मिलन हो गया है.

तभी चेतन भइया ने मुझे केक खिलाया, तो मैंने भी चेतन भइया को केक खिलाने के लिए उनकी तरफ को मुड़ गई.
इसी वजह से चेतन भइया का लंड मेरी चुत से ‘फक’ की आवाज़ करता हुआ बाहर निकल गया.

चेतन भइया का लंड अब मुझे साफ साफ दिखाई दे रहा था क्योंकि मेरा मुँह उनकी तरफ था और चेतन भइया नीचे से बिल्कुल नंगे थे.
भइया का मूसल लंड देख कर तो जैसे मेरी सांस ही रुक गई.

मैंने पहले भी उनका लंड देखा था, पर आज तो वह बहुत लंबा और मोटा लग रहा था!

शायद मेरे हाथ से भी मोटा लंड था.
लगभग 8 या 9 इंच लम्बा था और एकदम कड़क डंडे की तरह खड़ा था.

चेतन भइया ने फिर से एक्टिंग करते हुए कहा- क्या हुआ कविता!
मैं उनके लंड को निहारती हुई बोली- अरे चेतन भइया, मैं भी तो आपको केक खिलाऊंगी ना!

भइया- हां मेरी प्यारी बहन, तुम हमेशा मेरी गोद में बैठ कर मुझे खिलाती हो … तो आज भी मेरी गोद में बैठ कर खिलाओ ना!
मैं- ठीक है मेरे प्यारे चेतन भइया, आप पलंग पर बैठो … मैं केक लेकर आती हूं.

चेतन भइया पलंग पर दोनों पैर लटका कर बैठ गए.

मैं एक बड़ा सा टुकड़ा काट कर चेतन भइया की तरफ पलटी और जो मंजर देखा तो मस्त होकर सोचने लगी.
लग रहा था कि चेतन भइया आज ही अपनी छोटी बहन की चुत का भोसड़ा बना देंगे.

मैं मुस्कुराती हुई चेतन भइया के सामने खड़ी होकर जानबूझ कर बोली- ओह चेतन भइया, आप तो इस तरह से बैठे हैं, अब मैं आपकी गोद में कैसे बैठूंगी?

चेतन भइया- अभी बताता हूं कविता, पहले तुम मेरे पास तो आओ!
चेतन भइया मेरे बगल में हाथ डाल कर मुझे उठाते हुए बोले- मेरी प्यारी बहन मेरे सामने से मेरी गोदी में बैठेगी.

मैं तो जानती थी कि चेतन भइया मुझको कैसे बैठाएंगे!
मैं अपनी गांड चेतन भइया की जांघों पर रख कर सामने मुँह से मुँह लगा कर बैठ गई.

चेतन के मुँह से मादक आवाज़ निकली- आआह कविता!
मैं अनजान बन कर बोली- क्या हुआ चेतन भइया, क्या मैं बहुत भारी हूँ?

चेतन भइया ने मेरी स्कर्ट के अन्दर मेरे नितंबों पर हाथ रख कर अपनी ओर पूरा चिपका कर कहा- मेरी प्यारी बहन कविता तुम तो फूल से भी हल्की हो, लाओ केक खिलाओ!
मेरा पूरा ध्यान अपने चेतन भइया के लंड पर था क्योंकि गोद में बैठने के कारण चेतन भइया का लंड मेरी चुत के मुँह पर लग रहा था.

फिर चेतन भइया मेरे नितंबों पर हाथ फेरते हुए बोले- कविता अब तुम कुछ ही दिनों को मेहमान हो इस घर में!
मैं- वह कैसे चेतन भइया?

भइया- अरे मेरी प्यारी बहन अब तुम जवान हो गई हो. थोड़े दिन बाद तुम शादी करके किसी और के साथ घर बसाओगी!
मैं अपने चेतन भइया के गले से चिपक गई और रोने के अंदाज में बोली- मैं किसी के साथ घर नहीं बसाऊंगी.

चेतन भइया ने मेरा मुँह ऊपर कर दिया और मेरी मदहोश आंखों में देखने लगे.
उन्होंने मेरी गांड को पकड़ कर अपने कड़क लंड पर दबाया तो मुझ पर तो समझो बिजली गिर गई

मेरी गीली चुत में चेतन भइया के लंड ने ठोकर मार दी ‘थप’ और उसी पल चेतन भइया लंड को अन्दर को दबाते हुए बोले- तो किसके साथ घर बसाओगी कविता?
मैं उनके लंड के अहसास से गनगना गई और मस्ती से उछल कर अपने चेतन भइया के सीने से चिपक गई.

मैं चुत को टाइट करके बोली- आह … चेतन भइया में आपके साथ घर बसाऊंगी और हमेशा आपसे यूं ही चिपक कर रहूंगी!

मैं इतनी गर्म हो गई थी कि मैंने अपने चेतन भइया को खुले शब्दों में कह दिया कि आपकी बहन कविता आपके साथ घर बसाएगी.

पहले तो चेतन भइया कुछ देर तक चुप रहे, फिर मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे थोड़ा पीछे सरकाया.
‘ऊह … मर गई!’

मेरी चुत भइया के लंड पर रगड़ मार कर पक्क की आवाज करती हुई अलग होने लगी थी पर तभी भइया रुक गए.

भइया के लंड का टोपा मेरी चुत के मुँह पर आ गया था तो मुझे बड़ा सख्त सा अहसास हो रहा था.

चेतन भइया अपना हाथ मेरे पेट पर फेरते हुए मेरी चुत की तरफ ले गए.
मेरी चुत पर चेतन भइया का हाथ आते ही मेरा मन खुश हो गया.
भइया मेरी चुत को उंगली से सहलाने लगे और मेरी चुत के दाने को दोनों उंगलियों के बीच में दबाने लगे.

मेरे तो जैसे रोम रोम में आनन्द की लहर दौड़ने लगी.
चेतन भइया की उंगलियां मेरी चुत में घूमती हुई मुझे मदहोश कर रही थीं.

फिर चेतन भइया मेरे बोबों को छूने लगे तो मैं शर्मा कर चेतन भइया से लिपटने लगी.
भइया ने रोक दिया.

भइया- आह कविता, इतना शर्माओगी तो अपने चेतन भइया के साथ घर कैसे बसाओगी?
मैं आंखें बंद करके चुपचाप बैठी रही.

भइया- कविता तुम बोलोगी नहीं तो मैं उठ कर चला जाऊंगा.
मैं फिर से चेतन भइया से चिपक गई और बोली- नहीं भइया, आप मत जाओ … घर तो मैं आपके साथ ही बसाऊंगी!
चेतन भइया- ठीक है मेरी प्यारी बहन कविता बसा लेना घर … पहले तुम अपनी शर्ट तो खोलो.

कमरे में अंधेरा था तो मैं शर्माते हुए अपनी टी-शर्ट के बटन खोलने लगी.

चेतन भइया ने उसी समय अपना लंड मेरी चुत पर रगड़ा और पूछा- कविता, बटन खुल गए क्या?
चेतन भइया अब अपनी बहन की जवानी को एंजॉय कर रहे थे.

मैंने अपनी टी-शर्ट उतार कर अपने मुसम्मी जैसे मोटे और नुकीले बोबों को चेतन भइया के सामने परोस दिया.
चेतन भइया ने जैसे ही मेरे दूध देखे तो वे बोले- पकड़ कर देखना पड़ेगा … मुझे तो कुछ दिख ही नहीं रहा है!

जबकि कमरे में इतनी लाइट तो थी कि उन्हें मेरे दूध दिख रहे थे … लेकिन चेतन भइया मस्ती के मूड में थे इसलिए वे बोले- ठीक से दो ना कविता, क्यों अपने चेतन भइया को तड़पा रही हो!
मैं भी अपने बोबों को मसलवाने और चुसवाने के लिए बेताब थी.

मैं- ठीक से देखो ना भइया, मेरी टी-शर्ट हट चुकी है.
भइया मेरे बगल में हाथ डाल कर धीरे धीरे बोबों पर हाथ लाए और दबाते हुए मसलने लगे.

मैं मस्त होने लगी और अपने दूध को खुद उनके मुँह में देने की कोशिश करने लगी.
तभी भइया ने नीचे से स्कर्ट को भी खोल कर निकाल दिया.

मैं नंगी हो गई थी तो शर्मा कर बोली- अरे भइया मुझे शर्म आ रही है, आपने तो मुझे पूरी नंगी कर दिया है!

भइया ने मेरे पूरे शरीर पर हाथ फेरा और बोले- कविता इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है. पूरी नंगी होगी तभी तो मेरे साथ अच्छे से घर बसा पाओगी!
मैं कुछ नहीं बोली.

चेतन भइया ने कहा- जाओ कविता अब लाइट को चालू करो, मैं भी अपनी बहन को आज जी भर कर देखना चाहता हूं.
मैं अपने चेतन भइया की गोद से उठ कर गई और स्विच बोर्ड के पास जाकर मैंने लाइट चालू कर दी.

लाइट जलते ही कमरे में एकदम से रोशनी हो गई.

मैं नंगी थी इसलिए मुझको बहुत शर्म आ रही थी.

भइया मेरे नंगे बदन को देख कर मजा ले रहे थे.
मैं तो जैसे लाज शर्म से मरी जा रही थी.

मैं चेतन भइया की तरफ पलटी और अपना एक हाथ अपनी चुत पर रख कर उसे छुपाने लगी.
मैंने दूसरे हाथ से अपने दोनों बोबों को ढक लिया.

दोस्तो, आई वांट बिग ब्रदर डिक स्टोरी से पानी आया टांगों के बीच में?
हा हा हा … मैं मुठ मारने पर मजबूर कर दूँगी आपको …
जल्दी से लिख कर बताओ न कि मेरी भाई बहन सेक्स कहानी आपको कैसी लग रही है!
loverboy199.love@gmail.com

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