माय बिग ब्रदर वांट सेक्स विद मी. हम दोनों अक्सर अकेले रहते हैं घर में तो आपस में काफी खुले हुए हैं. मेरे 18वें जन्मदिन पर भाई मेरे लिए एक ड्रेस लाया.
हाय, मेरा नाम कविता है, मैं 18 साल की हूं और चेतन भइया 30 साल के हैं.
मम्मी पापा बिजनेस के सिलसिले में अक्सर बाहर रहते हैं.
हमारे घर में हम दोनों भाई बहन ही रहते हैं.
इसी बात का फायदा उठाकर चेतन भइया ने मुझे मेरे 18 वें जन्मदिन पर चोद दिया.
यह सब विस्तार से भाई बहन सेक्स कहानी मे लिख रही हूँ.
चेतन भइया मुझे अक्सर अपने बदन से चिपका कर शाबासी देते थे.
पहले तो मुझे यह सब करना अच्छा नहीं लगता था मगर धीरे धीरे मैं भी एन्जॉय करने लगी.
चेतन भइया मुझे प्यार करने के बहाने मेरे नए नए उठ रहे बोबों को दबा देते थे.
वे दिखावा तो यही करते थे जैसे वे मुझे प्यार कर रहे हों, पर मैं जानती थी कि चेतन भइया मुझे चोदना चाहते हैं. माय बिग ब्रदर वांट सेक्स विद मी.
मैं भी जवान हो रही थी तो इतनी तो समझ मुझमें भी आ गई थी.
मैंने भी ब्लू-फिल्म्स देखी हुई थीं तो चुदाई को समझती थी.
बस अभी चुत में किसी का लंड लिया नहीं था तो मेरी चुत कुंवारी थी.
मेरे भइया अब कभी मेरे पीछे खड़े होकर अपना खड़ा लंड मेरे नितंबों से चिपका कर रगड़ने लगते तो कभी मेरे झुकने पर मेरे बोबे देखने लगते थे.
कभी मुझे जोर से भींच लेते, जिससे मेरे कश्मीरी सेब जैसे टाइट बोबे चेतन भइया के सीने से चिपक जाते.
ऐसा करने से मुझे बहुत मजा आता था, शायद चेतन भइया को भी मजा आता होगा इसलिए वे भी मुझे अक्सर जोर से भींच लेते और मैं बस कसमसा कर रह जाती थी.
मगर सच कह रही हूँ कि जब चेतन भइया मेरे बोबों को दबाते थे तो मुझे इतना मजा आता था कि वह मैं बयान ही नहीं कर सकती.
चेतन भइया जब ये हरकत करते तो मुझे पता नहीं क्या हो जाता था. मैं चाह कर भी उन्हें मना तो नहीं कर पाती थी.
मुझे इसमें एक अजीब सा आनन्द मिलने लगा था और मैं खुद भी उन्हें अपने दूध मसलने की छूट दे देती थी.
इसका असर ये हुआ कि मैं भी चुपचाप चेतन भइया के लौड़े को छूने का मजा लेने लगी लेकिन वह सब मैं एकदम मासूमियत से करती थी.
जब वे मुझे अपनी गोद में बैठाते और मुझे उनका खड़ा लंड जो मेरी गांड में चुभता, तो मुझे बड़ा अच्छा लगता था और मैं अपनी गांड को उनके सख्त होते लौड़े पर घिसने लगती थी.
उस वक्त वे भी मुझसे बात करते करते मेरे बोबे दबा देते तो मेरा बदन एकदम से गनगना जाता था.
मैं भी कभी कभी चेतन भइया का लंड ऐसे दबा देती, जैसे गलती से छू लिया हो.
चेतन भइया कभी टॉयलेट से बिना तौलिया के नंगे निकल जाते.
उस वक्त मैं उन्हें नंगा देख कर भाग जाती, मगर मुझे उनका झूलता लंड सच में उत्तेजित कर देता था.
जब मैं दो तीन बार उन्हें नंगा देख चुकी थी तो मेरे मन मन में उनके लंड की तस्वीर मानो छप सी गई थी.
अब तो सपने में भी मुझे अक्सर चेतन भइया का काला और मोटा सा लंड ही दिखायी देने लगा था.
मुझे ऐसे मीठे सपनों का आनन्द आने लगा था और मैं चुदास में भर कर खुद अपने हाथ से अपने दूध मींजने लगती थी.
अब तो हालत यह हो गई थी कि चेतन भइया का जब भी मन करता, वे सामने से मेरे बोबे दबा देते तो कभी मेरे चूतड़ मसल देते थे.
फिर कुछ दिन बाद मेरा 18 वां जन्मदिन आने वाला था.
चेतन भइया ने उस दिन पार्टी देने का वादा किया था.
उस दिन मम्मी पापा हमेशा की तरह घर पर नहीं थे.
वे दोनों शहर से बाहर थे.
मैंने भइया को मना कर दिया कि हम दो लोग ही तो हैं घर पर … बाहर क्या जाना!
इस पर चेतन भइया ने कहा- चलो कोई बात नहीं, आज अपन दोनों ही मिल कर तेरा जन्मदिन मना लेंगे.
फिर चेतन भइया मेरे लिए गिफ्ट लेने चले गए.
मैं चेतन भइया के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी.
ठीक रात 8 बजे डोरबेल बजी.
मैंने दौड़ कर दरवाजा खोला और हमेशा की तरह चेतन भइया से लिपट गई.
चेतन भइया ने भी मुझे अपने सीने से चिपका लिया.
मैं चेतन भइया से लिपट कर नखरे दिखाती हुई बोली- आपने इतनी देर क्यों कर दी, जाइए मैं आप से नहीं बोलती.
चेतन भइया मेरी गांड पर थपकी मार कर बोले- अरे मेरी बहन तो नाराज हो गई … लो अभी नाराजगी दूर किए देता हूँ.
चेतन भइया के एक हाथ में जो बैग था, मुझे दिखा कर बोले- देखो तो क्या लाया हूँ.
मैंने खुश होकर चेतन भइया को चूम लिया और जोर से लिपट कर बोली- भइया, आप कितने अच्छे हैं.
भइया- कविता इसमें तेरे लिए ड्रेस है, इसको पहन कर तुम केक काटना.
चेतन भइया ने गहरी नज़रों से मुझे देखा और मेरी गांड को अपनी तरफ खींचा.
मेरी जांघें चेतन भइया की जांघों से चिपक गईं.
हमेशा की तरह चेतन भइया के लंड में भी शायद सुरसुरी होने लगी थी.
उनका लंड भी खड़ा हो रहा था और वह मुझे अपनी चुत के पास चुभने लगा था.
ये एक अजीब सा अहसास था, जो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था.
मेरा मन कर रहा था कि मैं हमेशा ही इसी तरह चेतन भइया से लिपट कर खड़ी रहूँ … और चेतन भइया का मोटा लंड मेरी चुत पर ठोकर मारता रहे.
मेरी चुत चेतन भइया के लंड से जा टकराई, आंखों में आंखें डाल कर भइया धीरे से बोले- कविता कुछ ही देर बाद तू 18 की हो जाएगी. तू तो अब जवान हो गई!
मैंने भी अपना हाथ सीधा करने के बहाने से चेतन भइया के लंड को मसल दिया और बोली- हां चेतन भइया अब मैं जवान हो गई हूँ, तो अब मुझे वह लंबा और मोटा वाला खिलौना चाहिए!
भइया- हां कविता आज तुझे मैं वही खिलौना दूंगा, जिससे तू आज पूरी तरह जवान हो जाएगी!
यह कह कर उन्होंने मुझे वासना से देखा तो मैंने भी नशीली आंखों से मौन स्वीकृति दे दी.
भइया- जाओ और तैयार होकर ऊपर वाले कमरे में आ जाओ.
मैं अपने रूम में गई और बैग खोल कर देखा तो मुझको शर्म भी आई और चेतन भइया पर प्यार भी आया.
उसमें मेरे लिए एक सेक्सी ड्रेस थी. यह एक मिनी स्कर्ट और टी-शर्ट थी, जो बिना ब्रा और पैंटी के पहनना थी.
मैं जल्दी से नहा कर कमरे में नंगी ही आई और आईने के सामने खड़ी होकर मैंने ड्रेस पहनी.
वह ड्रेस बहुत छोटी थी क्योंकि मेरी गांड और बोबे उस ड्रेस में फिट ही नहीं हो रहे थे.
फिर भी मैंने उस ड्रेस को किसी तरह से पहन लिया.
मेरा दिल जोर जोर धड़क रहा था कि पता नहीं आज क्या होगा!
अब मैं ऊपर छत पर बने कमरे में आ गई.
वहां का बल्ब ऑफ था, बस कमरे में एक मोमबत्ती जल रही थी.
कमरे में रोशनी इतनी कम थी कि कुछ भी साफ नहीं दिख रहा था.
तभी चेतन भइया अन्दर आए.
मैंने देखा कि चेतन भइया का बदन तो पूरा नंगा था, उन्होंने बस एक पतला सा गमछा अपनी कमर में लपेट रखा था.
वह गमछा उनके सामने से यानि लंड के पास से कुछ उठा हुआ था.
मैं समझ गई कि वह उभार चेतन भइया के प्यारे से लंड का है.
उनके लौड़े में हल्का सा तनाव आया हुआ था.
मैं अपने चेतन भइया का लंड देख कर मदहोश होने लगी.
चेतन भइया ने मेरे रसभरे होंठों पर हल्का सा चूमा और बोले- ओ गॉड … मेरी बहन कविता तो दुनिया की सब से सुंदर लड़की है!
मैं शर्मा कर चेतन भइया से लिपट कर बोली- मेरे भइया भी तो सब से अच्छे मर्द हैं.
इस बात को सुनकर चेतन भइया का हाथ जहां जाना था, जा चुका था.
अब वे अपने हाथ से मेरे बोबों को दबाने लगे थे.
मेरे मुँह से मदभरी सिसकारी निकल गई ‘आह भइया!’
फिर चेतन भइया मुझे टेबल के पास खड़ा कर दिया और वे मेरे पीछे आ गए.
भइया बोले- कविता मोमबत्ती जलाओ!
मैंने झुक कर दियासलाई जलाई और एक एक करके केक पर लगी मोमबत्तियां जलाने लगी.
चेतन भइया को इसी बात का इंतज़ार था.
मेरे झुकते ही मेरा मिनी स्कर्ट पीछे से ऊपर उठ गया और मेरी गोरी गोरी गांड चेतन भइया के सामने आ गई.
बैलेंस बनाने के लिए मैंने अपनी टांगें थोड़ी खुली रखी थीं जिस कारण मेरी गांड थोड़ी ज्यादा सी खुल गई थी.
ये नज़ारा चेतन भइया को मस्त कर रहा था.
भइया मेरी गांड से चिपक गए.
उनका खड़ा लंड मेरी टांगों के बीच में चुभने लगा.
हाय चेतन भइया का लंड और मेरी चुत में केवल एक पतला गमछा ही अवरोध रह गया था.
मुझको लगा कि मेरी चुत से कुछ निकल रहा है.
मेरे हाथ कांपने लगे और मैंने किसी तरह मोमबत्तियां जलाईं.
पूरी 18 मोमबत्तियां जलने पर कुछ रोशनी हुई.
चेतन भइया मुझे छुरी देकर बोले- कविता, अब तुम कुछ ही पल मैं 18 साल की जवान हो जाओगी. चलो सारी कैंडल्स को जोर से फूँक मार कर बुझाओ.
जब चेतन भइया ने कहा कि कविता फूँक मार कर कैंडल बुझाओ, तो मुझे फिर आगे झुकना पड़ा.
मेरा रोम रोम सिहरा जा रहा था. पता नहीं अब क्या होगा.
फिर मैंने जानबूझ कर अपने पैरों को कुछ और चौड़ा दिया और ज्यादा झुक गई. मैं खुद चेतन भइया के लौड़े को पूरी जगह देना चाह रही थी.
चेतन भइया कोई छोटे बच्चे तो थे नहीं. उनको भी पता चल गया था कि उनकी बहन उनसे क्या चाहती है!
भइया ने अपने खड़े लंड को मेरी चुत पर सैट करते हुए धीरे से कहा- कविता आराम से एक एक करके बुझाओ न … कोई जल्दी करने की जरूरत नहीं है.
मैं एक एक करके मोमबत्तियों को बुझाने लगी.
उस दरमियान चेतन भइया का लंड मेरी चुत पर मस्ती से रगड़ मार रहा था.
मुझे उसकी गर्मी महसूस हो रही थी, जो मुझे बहुत ही ज्यादा उत्तेजित भी कर रही थी.
फिर चेतन भइया ने गमछे को, जो उनके लंड और मेरी चुत के बीच पर्दा बना हुआ था, उसको वे धीरे धीरे ऊपर को सरकाने लगे.
मेरी तो सांस ही रुक गई.
मेरा ध्यान उधर ना जाए इसलिए चेतन भइया बार बार बोलते रहे- शाबाश कविता, जोर से फूँक मारो!
वे धीरे धीरे अपने लौड़े को ढके हुए उस गमछे को हटाते भी रहे.
तभी मैंने महसूस किया कि मेरी चुत पर गर्म लोहा एकदम से सट गया है.
मेरी चुत जोर जोर से चुनचुनाने लगी, तो मैं गांड मटकाने लगी.
चेतन भइया लंड को चुत की दरार पर एडजस्ट करते हुए बोले- क्या हुआ कविता, बुझाओ ना!
चेतन भइया ने अपने दोनों हाथ मेरे चूतड़ों पर रखे और धीरे धीरे से मेरे नितंबों को अपने दोनों अंगूठों की मदद से फैलाते हुए खोलने लगे.
चेतन भइया के दोनों अंगूठे मेरी गांड के छेद के पास दबने की वजह से नीचे से मेरी चुत की दोनों फांकें भी खुल रही थीं, जिसकी वजह से मेरी चुत काफी ज्यादा खुल गई और चेतन भइया का मोटा लंड मेरी चुत के ऊपर आ गया.
ऐसा लग रहा था कि अगर चेतन भइया ने थोड़ा सा भी जोर लगाया तो उनका लंड उनकी बहन की कुंवारी चुत में घुस जाएगा.
मेरी तो सांसें ही उखड़ने लगी थीं.
मैं थोड़ी हांफती हुई अपनी चुत को लंड पर सैट करके बोली- भइया, अब नहीं बुझ रही है!
भइया- अच्छा लाओ मैं ही बुझा देता हूँ!
यह कह कर चेतन भइया मेरी चुत के पास जांघों पर हाथ रख कर झुके और मेरे ऊपर लद से गए.
वे मेरी जवानी को अपने लौड़े से कुचलते हुए कैंडल बुझाने लगे.
तभी मेरी सांस फिर से उखडने लगी.
मैंने महसूस किया कि चेतन भइया का लंड मेरे चुत के मुँह के अन्दर आ गया है.
मुझे लगा कि उनके लंड के सुपारे की मोटाई के कारण मेरी चुत का मुँह खुलता जा रहा है.
चेतन भइया की दोनों हाथों की उंगलियां मेरी चुत को चौड़ा कर रही थीं, यह अहसास हुआ तो मैं समझ गई कि ये मोमबत्ती बुझा नहीं रहे हैं बल्कि अपनी बहन की कुंवारी चुत में अपना मोमबत्ता घुसेड़ने में लगे हैं.
मैं अपने आपे से बाहर होने लगी.
चेतन भइया भी अपनी बहन की सीलपैक चुत को चोदने के लिए बेसब्र हो रहे थे.
दोस्तो, माय बिग ब्रदर वांट सेक्स विद मी कहानी में मजा आ रहा है न! पढ़ते रहिए … आपकी टांगों के बीच में से पानी न निकलवा दूँ तो कहना.
प्लीज मेल जरूर करें कि भाई बहन सेक्स कहानी कैसी लग रही है.
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