Wo Choda Din - 4
एक चूत दो लंड कहानी में उधर मेरे पति की गर्लफ्रेंड को दो लंड एक साथ मिल रहे थे और इधर मैं बेचारी बिना लंड के तड़प रही थी. बिना लंड के मुझे बुखार हो गया.
कहानी का पिछला भाग:
मेरे पति की गर्लफ्रेंड को मिला नया लंड
अब आगे एक चूत दो लंड कहानी:
राजीव ने अपना लंड शालिनी के मुंह से निकला और बिस्तर से उठकर कहीं गए।
अब मेरे सामने सिर्फ शालिनी और हार्वी थे।
शालिनी ने हार्वी को धक्का देकर बिस्तर पर लिटाया और पलट कर अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी।
हार्वी पागल कुत्ते की तरह लपलपाती जीभ से शालिनी की चूत चाटने लगा।
इधर शालिनी हार्वी के ऊपर आकर उसके पूरे बदन को चाटने लगी।
तभी पीछे से राजीव आते दिखाई दिए.
उनके हाथ में आइसक्रीम थी।
उन्होंने दो उंगली से आइसक्रीम अपने लौड़े पर चारों तरफ लगाई और शालिनी का मुंह ऊपर किया.
शालिनी ने तुरंत उनके लोहे की तरह कड़क लोड़े को अपने मुंह में ले लिया।
अब शालिनी मुंह से आइसक्रीम का स्वाद भी ले रही थी।
जब हार्वी ने राजीव के हाथ में आइसक्रीम का डब्बा देखा तो वह शालिनी के नीचे से निकला और अपनी दो उंगलियों में आइसक्रीम भरकर शालिनी की चूत में घुसा दी।
अब वह भी शालिनी की चूत से चाट चाट कर आइसक्रीम का स्वाद लेने लगा।
शालिनी जोर-जोर से सीत्कार रही थी।
“Hey man, please fuck me hard.” की आवाज़ शालिनी के मुंह से निकाल रही थी।
राजीव और हार्वी दोनों ही शालिनी के बदन से खेल रहे थे.
और इधर शालिनी बिस्तर पर मछली की तरह तड़प रही थी।
उन दोनों से खुद को चोदने की भीख मांग रही थी, “Plz someone fuck me. plz fuck me..ufff … कोईई ईईईई तो आओ, रुका नहीं जा रहा।”
तभी हार्वी ने राजीव की तरफ देखते हुए पूछा, “may I??”
“yes please.” राजीव ने शिष्टता दिखाते हुए कहा।
हार्वी ने शालिनी की दोनों टांगें फैलाई और उनके बीच में आकर बैठ गया।
शालिनी खुद ही अपने चूतड़ उचका उचका कर हार्वी का लौड़ा अपने अंदर लेने की कोशिश करने लगी।
जैसे ही हार्वी ने अपना लौड़ा शालिनी की टपटपा रही योनि के दोनों रसीले होठों के बीच में रखा, शालिनी ने अपने चूतड़ उछाल कर एक ही झटके में खुद ही पूरा अंदर ले लिया।
“Oh wow. what an energy” हार्वी के मुंह से निकला।
बस वो मिशनरी पोजीशन में शालिनी के ऊपर हावी हो गया।
वो शालिनी के ऊपर जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
इधर शालिनी के मुंह से राजीव का आइसक्रीम लगा लंड भी निकल गया।
जैसे ही शालिनी के मुंह से राजीव का आइसक्रीम लगा लंड निकला, हार्वी ने आगे बढ़कर राजीव का लंड अपने मुंह में ले लिया।
अब शालिनी नीचे लेटी थी जिसके ऊपर हार्वी लगातार धक्के मार रहा था और साथ ही हार्वी राजीव का लंड भी चूस रहा था।
राजीव के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था और राजीव को हार्वी से इस तरह के हमले की उम्मीद भी नहीं थी।
पर उस समय मैंने देखा कि राजीव के चेहरे की रंगत अलग ही थी।
शायद राजीव इस नए अनुभव का पूरा आनंद ले रहे थे।
शालिनी अपने दोनों पैर बिस्तर पर पटक रही थी और जोर-जोर से चिल्ला रही थी, “हार्ड…प्लीज हार्ड।”
कुछ धक्के मारने के बाद अचानक हार्वी निढाल हो गया और शालिनी के बराबर में जाकर लेट गया.
शालिनी ने खुद को घुमाकर अपनी दोनों टांगें राजीव की तरफ कर दी और अपने बराबर में लेटे हार्वी को तकिया बनाकर अपना सर उसके बदन पर रख लिया।
शायद शालिनी का अभी हुआ नहीं था, वह मेरे पति से बोली, “Please Fuck me hard….. I need more plz fuck me.”
राजीव ने तुरंत अपना 8 इंच लंबा लंड शालिनी की चूत के मुहाने पर रखा।
शालिनी ने फिर से अपने चूतड़ ऊपर उछाले और राजीव का पूरा लंड एक ही झटके में अंदर ले लिया।
शालिनी की चूत में लंड डाले डाले ही राजीव धीरे-धीरे पीछे होकर बिस्तर से नीचे उतरे और शालिनी के चूतड़ बिस्तर के किनारे पर ले आए।
अब राजीव ने शालिनी की दोनों टांगें ऊपर करके आगे से अपने कंधों पर लगा लिए और शालिनी की दोनों चूचियां अपने दोनों हाथों से दबा लिया मैंने देखा।
अब राजीव के अंदर का भूखा शेर जाग चुका था।
राजीव जोर जोर से शालिनी की चूत में पूरी गहराई तक अपना लंड घुसा कर धक्के मार रहे थे.
“आह… आह… उफ्फ… आह…” की शालिनी की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
हार्वी वहां से उठकर चला गया.
वह शायद वॉशरूम में धोने गया था।
राजीव लगातार शालिनी पर जबर्दस्त प्रहार कर रहे थे।
इधर मैं भी बहुत तेजी से अपनी चूत में उंगली कर रही थी।
न जाने क्यों … आज मुझे यह सब देखना बहुत अच्छा लग रहा था और राजीव के जबरदस्त लगते धक्के मैं अपनी चूत में महसूस कर रही थी।
तभी शालिनी बोली, “मेरा तो हो गया. Please Stop now.”
पर राजीव अब कहां रुकने वाले थे, उनकी गाड़ी की गति तो बढ़ती ही जा रही थी, “फच फच फच” उनके धक्कों की थाप किसी संगीत की तरह मेरे कानों में पड़ रही थी।
राजीव ने शालिनी की दोनों चूचियां दबा दबा कर लाल कर दी थी और मुझे लगता है राजीव के धक्कों की पिटाई से शालिनी के गोरे चूतड़ भी लाल हो गए होंगे।
तभी राजीव ने एक लंबी डकार ली और एक जोर का धक्का मारते हुए शालिनी के ऊपर जा गिरे।
मैं समझ गई कि राजीव भी मंजिल तक पहुंच गए हैं।
पर इधर मैं तो अभी बाकी थी।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं।
मैंने अपनी दो उंगलियां अपनी चूत के अंदर डालकर जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया।
जबकि मैं अपने अंगूठे से अपनी चूत का दाना भी सहला रही थी.
पर अभी तक मेरी प्यास नहीं मिटी थी।
तभी मैंने देखा की हार्वी अपनी लटकती लुल्ली लेकर वापस बिस्तर पर आ गया है।
शालिनी अभी भी निढाल पड़ी थी।
राजीव शालिनी के ऊपर से उठ कर वहाँ से चले गए।
मैंने शालिनी को आवाज लगाकर पूछा, “अरे मजा आया न?”
शालिनी हंसते हुए बोली- तुम्हें तो 4-4 का अनुभव है, मुझे तो दो के साथ तो मजा आ ही जाता है.
इधर हार्वी फिर से शालिनी के बदन से खेलने लगा।
राजीव भी बिस्तर पर वापस आ गए।
शालिनी वहां से उठकर बाथरूम जाने लगी तो हार्वी ने फिर से शालिनी को पकड़ लिया।
बिस्तर के बराबर में खड़ी शालिनी को हार्वी ने पीछे से पकड़ कर उसकी चूचियों को फिर से मीझना शुरू कर दिया।
राजीव को भी जोश आया और उन्होंने आ कर शालिनी को आगे से पकड़ लिया।
अब दोनों मर्द मिलकर शालिनी को सैंडविच मसाज दे रहे थे और शालिनी फिर से कसमसाने लगी।
राजीव का लंड तो फिर से तनाव में आ गया। राजीव ने शालिनी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया।
उसका तनाव देखकर शालिनी वहीं घुटने के बल बैठ गई और राजीव का लंड अपने मुंह में ले लिया।
जैसे ही शालिनी घुटनों के बल बैठी, हार्वी वहीं फर्श पर शालिनी की चूत के नीचे लेट गया और शालिनी की चूत से टपकते हुए रस को चाटने लगा.
शालिनी बार-बार थोड़ा ऊपर उठकर हार्वी के जीभ के वार से बचने की कोशिश कर रही थी।
शायद उसको जोर से पेशाब लगी थी।
पर हार्वी लगातार उसकी चूत के अंदर तक अपनी जीभ घुसा रहा था।
जब शालिनी से रुका नहीं गया तो वह वहां से उठ कर तुरंत वॉशरूम भाग गई।
इधर मैं अब बेचैन हो रही थी।
मेरे सामने अब दोनों पुरुष खड़े थे. राजीव का लंड पूरा तैयार था।
तभी राजीव ने अपना लंड हार्वी की तरफ करते हुए उसको बोला- Hey … wanna suck it?
और जवाब में शालिनी की जगह हार्वी अपने घुटनों पर बैठ गया और उसने राजीव का लंड अपने मुंह में ले लिया।
मेरे लिए भी यह पहला अनुभव था जब कोई पुरुष किसी दूसरे पुरुष का लंड चूस रहा था।
मेरे अंदर उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।
मेरा पूरा बदन आग की तरह तप रहा था।
मैंने अपनी दो-दो उंगलियां लगातार चूत के अंदर बाहर करनी शुरू कर दी.
कुछ सेकंड के बाद अचानक मेरे अंदर से लावा फूट गया और मुझे ऐसा लगा जैसे दुनिया का सबसे बड़ा सुख मुझे प्राप्त हो गया है।
मैंने राजीव को बोला- अब मैं बंद कर रही हूं। मुझे नींद आ रही है। आप लोग एंजॉय करो!
और मैं वीडियो कॉल बंद करके अपने वाशरूम गई, सब कुछ धोकर साफ किया और अपने बिस्तर में आकर नंगी ही सो गई।
मेरी तो आंख भी सुबह 9:00 बजे खुली।
जबकि मैं तो रोज सुबह 5:30 बजे उठ जाती थी।
आज 9:00 बजे भी मुझसे उठा नहीं जा रहा था।
मैंने महसूस किया कि मेरा शरीर अभी भी रात की तरह ही गर्म था।
मुझे उठने में तकलीफ हो रही थी।
जब मैंने जबरदस्ती उठने की कोशिश की तो मुझे हल्का चक्कर आ आने लगा।
मैं करीब एक घंटा और बिस्तर पर ऐसे ही पड़ी रही।
जब 10 बजने को थे, मैंने फिर से उठने की कोशिश की.
पर मुझसे उठा नहीं जा रहा था।
मेरा शरीर अभी भी बहुत गर्म था।
मैंने राजीव को फोन करके बताना ही उचित समझा।
मैंने तुरंत फोन उठाकर राजीव को फोन लगाया और उनको अपनी स्थिति बताई।
उन्होंने कहा, “हो सकता है तुम्हें रात बुखार हो गया। एक बार डॉक्टर को दिखा लो।”
मुझे लगा शायद राजीव सही कह रहे हैं।
मैंने उठकर खुद को थोड़ा सा फ्रेश किया और अपने लिए चाय बनाई।
तभी मेरे पास नैना भाभी का फोन आया।
नैना भाभी गौरव की मम्मी थी।
उनको शायद राजीव ने फोन करके बता दिया कि मुझे बुखार है।
नैना भाभी बोली, “शशि, राजीव ने बताया कि तुम्हें बुखार है। मैं तुम्हारे पास आ रही हूं। तुम तैयार हो जाओ डॉक्टर के पास चलते हैं।”
वैसे तो मैं तैयार थी पर मैं नैना भाभी के साथ डॉक्टर के पास नहीं जाना चाहती थी।
लेकिन कर भी क्या सकती थी।
जब राजीव ने उनका फोन कर ही दिया, तो मैं कैसे मना करती।
10 मिनट में नैना भाभी अपनी एक्टिवा से मेरे घर आ गई और मैं उनके साथ डॉक्टर के पास चली गई।
डॉक्टर खुराना हमारे फैमिली डॉक्टर थे।
हम छोटी-मोटी बीमारियों के लिए हमेशा उनके पास ही जाया करते थे।
पिछले लगभग 25 साल से हम लोग डॉक्टर खुराना को जानते थे।
पर आज डॉक्टर खुराना के सामने बैठकर भी मुझे वह डॉक्टर नहीं सिर्फ एक मर्द ही महसूस हो रहे थे।
जब डॉक्टर खुराना मेरा टेस्ट करने के लिए अपनी कुर्सी छोड़कर उठे तो मेरी नजर उनके पैन्ट के उस भाग पर थी और मैं महसूस करने की कोशिश कर रही थी कि क्या वहां कोई तनाव है.
पर वहां ऐसा बिल्कुल नहीं था.
एक बार और मुझे निराशा हाथ लगी.
खैर डॉक्टर खुराना को दिखाकर हम लोग वापस आ गए.
मैंने अपने ऑफिस में बोल दिया कि मुझे बुखार है मैं ऑफिस बिल्कुल नहीं आऊंगी।
राजीव को गए आज पांचवा दिन था।
दवाई लेने के बाद मैं दिन भर सोती ही रही।
शायद कुछ कमजोरी या फिर डॉक्टर खुराना की दवाइयों का नशा था।
शाम को 7:30 बजे मेरे पास नैना भाभी का फोन आया और मेरी तबीयत के बारे में पूछा।
तो मैंने बताया कि मुझे ठीक महसूस नहीं हो रहा है।
नैना भाभी ने पूछा- आज दिन में कुछ खाया?
मैंने कहा, “नहीं.”
नैना भाभी ने कहा, “चल तू फोन रख, मैं आती हूँ।”
करीब 8 बजे नैना भाभी मेरे लिए अपने घर से खाना बना कर लाई।
उन्होंने बताया कि वो आज रात यही रुकेंगी और मेरी देखभाल करेंगी।
मैंने खाना खाया और अपने बिस्तर पर सोने चली गई.
रात को 10 बजे राजीव का कॉल आया, तब मैं गहरी नींद में थी।
मैंने फोन नैना भाभी को ही दे दिया.
नैना भाभी ने राजीव को मेरी तबीयत के बारे में बताया और फोन रख दिया.
भाभी मेरे बराबर वाले बिस्तर पर आकर सो गई।
मेरी नींद इतनी गहरी थी कि रात भर पता ही नहीं चला।
अगली सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैं कल से कुछ बेहतर महसूस कर रही थी।
नैना भाभी मुझसे पहले जाग चुकी थी.
उन्होंने मेरे लिए चाय बनाई और मेरा हाल पूछा।
मैंने बताया, “पहले से बेहतर है।”
भाभी बोली, “अभी तुम तैयार हो जाओ। तुम्हें 10 बजे करीब डॉक्टर के पास ले चलती हूं।”
ठीक 10 बजे हम लोग फिर से डॉक्टर खुराना के पास पहुँच गए.
डॉक्टर खुराना ने बताया, “अभी बुखार तेज़ है और 5 दिन का पूरा दवाई का कोर्स करना पड़ेगा।”
मैं भाभी के साथ घर आ गई।
भाभी ने मुझसे कहा, “मुझे अपना घर भी देखना है मैं घर तक जा रही हूं। तुम आराम करो। दोपहर का लंच बनाकर मैं गौरव के हाथ भेज दूंगी. तुम्हें 5 दिन पूरे आराम की जरूरत है। जिस भी चीज की जरूरत हो, मुझे बता देना. या तो मैं खुद आ जाऊंगी या गौरव के हाथ भेज दूंगी।
नैना भाभी के जाने के बाद मैं दवाई लेकर फिर से सो गई।
एक चूत दो लंड कहानी पर आपकी राय मेल और कमेंट्स में वांछित है.
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