वो चौदह दिन- 3

Views: 2 Category: Group Sex By me.funny123 Published: June 20, 2026

Wo Choda Din - 3 

टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी में मेरे पति मुझे वीडियो कॉल पर अपनी रंगरेलियां दिखा रहे थे. उनकी कुलीग उनके बिस्तर पर थी और साथ में एक यूरोपियन आदमी भी था.

कहानी का पिछला भाग:
मुझे हर हालत में लंड की जरूरत है

अब आगे टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी:

करीब एक घंटा बाजार में खरीदारी करने के बाद गौरव ने मुझे घर छोड़ दिया और नमस्ते करके अपने घर के लिए चला गया।

अब करीब 9:00 बज चुके थे मैंने एक बार और चांस लेने की सोची और डिनर जोमैटो से मंगवाना तय किया।
क्या पता आज कोई अच्छा सा आदमी मिल जाए.
क्योंकि जोमैटो के अलावा मुझे कोई दूसरा सही ऑप्शन दिखाई नहीं दे रहा था।

खाना ऑर्डर करते ही मैं तुरंत अपने कमरे में गई और जाकर कल वाली वही सेक्सी नाइटी पहन ली.
इस बार मैंने नाइटी के अंदर भी कुछ नहीं पहना था।

9:15 बजे ही मेरे पास जोमैटो के डिलीवरी बॉय का कॉल आ गया।
मैंने खिड़की से झांक कर देखा तो सामने बाइक पर एक लगभग 50 वर्षीय व्यक्ति था जो देखने में ठीक-ठाक लग रहा था.

वैसे भी मेरा इंटरेस्ट ऐसे पुरुषों में ज्यादा था जिनके साथ में मैं सुरक्षित महसूस कर सकूं।
कम उम्र के लोगों से तो मैं दूर ही रहना चाहती थी।

आज शायद मेरी मुराद पूरी होने वाली थी।

मैंने दरवाजा खोला और उस आदमी को घर के अंदर बुला लिया.
उसने मुझे मेरा पैकेट पकड़ा और पेमेंट के पैसे मांगे।

मैं चाहती थी कि वह मेरा बदन चारों तरफ से देखे।
इसलिए मैं पैकेट लेकर पलट कर अंदर की तरफ गई और उसको बोला- पैसे लेकर आती हूं।

मैं थोड़ा गाँड मटका मटका कर चल रही थी ताकि उसकी नजर मेरे पूरे बदन पर पड़े।
अपने कमरे में जाकर मैं वहां पैकेट रखा और नकद पैसे निकाले जैसे ही वापस आई तो देखा कि वो आदमी तो मेरे घर के बाहर खड़ा था मैंने उसको पैसे पकड़ने के बहाने अंदर बुलाने की भी कोशिश की.

पर वो तो शायद जरूर से ज्यादा ही शरीफ था।
अब मैं भी सिर्फ इशारा ही तो दे सकती थी उसको जबरदस्ती चोदने को थोड़ा बोल दूंगी।

मुझे एक बार फिर अपनी कोशिश नाकामयाब होती दिख रही थी।

तब तक वह बंदा मेरे से पैसे लेकर अपनी बाइक स्टार्ट करके वहां से जा चुका था और मैं एक बार फिर खाली हाथ खड़ी थी।

मेरा मूड बहुत खराब था; मैंने दरवाजा बंद किया और अपने कमरे में आते ही अपनी नाईटी भी उतार दी ड्रेसिंग के सामने खड़े होकर गौर से अपना पूरा बदन देखने लगी।
क्या मेरे बदन में अब वह पहले जैसा चुंबकत्व नहीं रहा?
सब मुझसे भाग क्यों रहे हैं?

दिखने में तो मैं काफी कामुक लग रही थी मेरे 36 साइज के गोरे रंग के मोटे-मोटे चुचे मुझे ही लालच दे रहे थे।
मेरा गोरे रंग का सपाट पेट मुझे आकर्षित कर रहा था।

फिर यह सब मुझसे भाग क्यों रहे हैं? कोई भी मुझे लाइन नहीं मार रहा।
अरे एक बार कोई कोशिश करके तो देखा मैं तो “हां” करने को तैयार हूँ।

अभी यह सब सोच ही रही थी कि मेरे पति राजीव का कॉल आ गया.
“क्या हाल है जानू?” राजीव ने पूछा।
मैंने जवाब दिया, “किसी तरह तुम्हारे बिना दूसरा दिन तो कट गया अब बाकी 12 दिन क्या होगा? मुझे भी नहीं पता तुम जल्दी आओ मुझे तुम्हारे बिना रहने की आदत नहीं है और ये तुम्हारी गलती है कि तुमने अपनी लत मुझे लगा दी। अब मेरा मन नहीं लग रहा तो बताओ मैं क्या करूं?”
राजीव ने पलट कर जवाब दिया, “तुझे मेरी नहीं इस समय एक पुरुष शरीर की जरूरत है फिर चाहे वो कोई भी हो, और मैं तो तुझको बोला है कि जो तुझे ठीक लगे अपना इंतजाम कर ले।”

मैंने झल्लाते हुए कहा, “क्या सड़क पर टांगें खोल कर बैठ जाऊं? जब कोई नहीं मिल रहा तो मैं क्या करूं? हर किसी पर भरोसा तो नहीं कर सकती।”

राजीव ने जब मुझे गुस्से में देखा तो बात को बदलने के लिए एकदम बोला, “अच्छा बताओ आज सुबह से अब तक क्या किया?”
मैंने भी विषय को बदलने के लिए राजीव को अपनी सुबह से शाम तक की सारी दिनचर्या बताने शुरू कर दी।

मेरी बातें सुनकर राजीव हंसने लगे, बोले, “दूध वाला, सब्जी वाला, जोमैटो वाला कोई भी नहीं फंसा पाई।”
मैंने कहा, “बात फँसाने की नहीं है। बात हिम्मत करने की है। जब तुम साथ होते हो तो पता नहीं हिम्मत कहां से आ जाती है। अकेले बहुत डर लगता है। और फिर पता नहीं कौन कहां किस तरह फायदा उठा ले। ये भी सोचना पड़ता है।”

फिर राजीव ने पूछा, “बाजार से क्या-क्या लाई?”
तो मैंने वह भी विस्तार से बताया।

तभी राजीव ने मुझसे कहा, “अरे शशि!”
“हम्म” मैं रुक गई।

“तुम यार गौरव को ट्राई करो, अच्छा लड़का है, और घर की बात घर में भी रहेगी।” राजीव ने मुझे सलाह दी।
“छी…छी… कुछ तो शर्म करो। गौरव अभी 19 साल का है और हमारे बेटे का दोस्त है हमारे लिए तो बेटे की तरह ही है। उसके साथ तो ये सब मैं सोच भी नहीं सकती। गौरव के साथ तो मैं बाजार भी सूट सलवार ही पहन कर गई थी।”
राजीव ने मुझे फिर कहा, “बेटे जैसा है पर बेटा नहीं है! एक बार कोशिश करके देखो. गौरव एक पुरुष है और तुम एक औरत! गौरव भी हस्तमैथुन जरूर करता होगा। उसकी जरूरत पूरी हो जाएगी और तुम्हारा काम हो जाएगा।”

उनकी बात सुनकर मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने फोन काट दिया।
राजीव की इस हरकत ने मुझे अंदर तक झझकोर दिया।

रात को 11 बजे राजीव ने मुझे फिर से वीडियो कॉल किया.
पर मैंने गुस्से में उसका फोन ही नहीं उठाया.

मुझे पता ही नहीं लगा रात को कितने बजे मुझे नींद आ गई और सुबह उठकर अपने नित्यकर्म निपटाकर नाश्ता करके अपनी एक्टिवा उठाकर ऑफिस चली गई।

मैंने तय किया कि अपना ध्यान इस सब से बिल्कुल हटाकर सिर्फ काम में लगाऊंगी।

सारा दिन मैं सिर्फ ऑफिस के काम में लगी रही।
इधर उधर कोई ध्यान नहीं।
मुझे पता भी नहीं चला कि शाम को 6.30 बज गए।

मैं 7 बजे तक ऑफिस से घर पहुंच गई।
घर आकर चाय बनाई फिर थोड़ी देर आराम करने के बाद अपने लिए डिनर बनाया।

अभी मैं डिनर कर ही रही थी कि राजीव की कॉल आ गई।

मैंने जैसे ही कॉल उठाया तो मुझे ध्यान आया कि मैं तो राजीव की कल की गलत हरकत से वजह से उनसे गुस्सा हूं।
मैंने तुरंत कॉल कट कर दी।

राजीव ने उसके बाद मुझे 4 बार कॉल की.
पर मैंने एक भी कॉल रिसीव नहीं की।

आखिर में राजीव मुझे व्हाट्सएप पर बार बार “सॉरी जानू” “सॉरी जानू” के मैसेज भेजने लगे।
थोड़ी देर गुस्सा रहने के बाद मुझे लगा कि अब राजीव को माफ कर देना चाहिए।

रात को 9.40 पर फिर से राजीव का कॉल आया मैंने कॉल उठा लिया।
राजीव ने सबसे पहले मुझे “सॉरी” बोला; फिर “थैंक्स” भी कि मैंने उनका कॉल उठा किया।
मैंने बोला “इट्स ओके।”

फिर हम वही दिन भर की बात करने लगे।
राजीव में मुझसे पूछा “अब तबियत कैसी है?”
मैंने भी अकड़ कर कहा, “तुमको क्या लगता है? मैं अकेली नहीं रह सकती। हुह… मैं बिल्कुल ठीक हूँ, और आज सारा दिन मैंने ऑफिस और अपने काम को दिया है खुद को बहुत बिजी रखा और इधर उधर ध्यान ही नहीं दिया।”

“ये तुमने ठीक किया सामने बोला। पर आज मेरे पास तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है।” राजीव ने जवाब में कहा।
मैंने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा, “अब क्या सरप्राइज दिखा रहे हो?”
राजीव ने कहा “वीडियो कॉल कर।”

मैंने अपना लैपटॉप लगाकर राजीव को वीडियो कॉल किया।
मेरे सामने अपने शानदार कमरे में राजीव बिल्कुल नंग धडंग अकेले बैठे थे।

मैंने हंसते हुए पूछा, “आज आपकी चिड़िया कहां उड़ गई?”
राजीव ने कहा, “अरे वही तो सरप्राइज है।”

मैंने पूछा, “कोई दूसरी फंसा ली क्या?”
राजीव बोले, “अरे यार, यहां यही सबसे मुश्किल काम है।”
मैं और राजीव एक दूसरे को देखकर हंसने लगे।

आज मैं बिल्कुल तनाव मुक्त महसूस कर रही थी।
मैंने राजीव से फिर पूछा, “क्या सच में आज शालिनी आपके साथ नहीं है?”
राजीव ने कहा, “अरे साथ ही है यार, आज हमने कुछ नया प्लान किया है।”
“ओह्ह वाओ” मेरे मुंह से निकला, “क्या नया प्लान किया है? मुझे भी बताओ।”

तभी राजीव ने अपना मोबाइल दूसरी तरफ घुमाया.
मैंने देखा शालिनी बिस्तर पर बिल्कुल नंगी लेटी थी। उसने अपनी दोनों टांगें फैला रखी थी और कोई अन्य पुरुष लपलपाकर उसकी गुलाबी चूत चाट रहा था।
“अरे यह क्या?” मुझे एकदम झटका लगा।

तभी शालिनी ने मेरी तरफ इशारा करके हाथ हिलाया और “हाय” बोला।
मैंने भी शालिनी को “हेलो” बोलकर पूछा, “ये कौन?”
शालिनी ने बताया, “ये कोई फ्रांस का व्यक्ति है। जो कि इस होटल में रुका है। जिसमें यह लोग रुके हैं। कल दिन में ही इन लोगो से हमारी अच्छी बातचीत हो गयी थी। कुछ आपस में प्लान हो गया था और आज वो भी हम दोनों के खेल में शामिल हो गया।”

उस व्यक्ति ने भी शालिनी की चूत से अपना मुंह हटाकर मेरी तरफ देखा और मुझे “हेलो” बोला।

मैंने देखा वह कोई 40-42 वर्षीय अंग्रेज लग रहा था।
उसका गठीला बदन मुझे भी आकर्षित कर रहा था।

मैंने शालिनी से पूछा, “क्या ये हिंदी समझता है?”
शालिनी ने कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं यह सिर्फ अंग्रेजी और फ्रेंच भाषा ही समझता है। बल्कि इसकी तो इंग्लिश भी हमारी समझ में देर से आती है।”
“फिर कैसे?” मैंने अगला सावल दागा।

“अरे मैडम, कामसुख की कोई भाषा नहीं होती. ये तो इंसान और जानवर सभी बिना बोले समझ लेते हैं।” शालिनी ने सधा हुआ जवाब दिया।
जिसके सामने मैं सच में निरुत्तर थी।

तब मैंने अपनी झुंझलाहट मिटाते हुए शालिनी को हिंदी में कहा “साली कुतिया, तेरे हर जगह मजे हैं यहां एक नहीं मिल रहा और तू दो-दो लिए बैठी है।”
शालिनी हंसते हुए बोली, “किस्मत अपनी अपनी। वो दिन याद है जब तुम देहरादून में चार के बीच में अकेले खेल रही थी। आज मेरा नंबर है।”
तभी राजीव ने अपना मोबाइल साइड में रखी एक टेबल पर लगाया और उन दोनों के पास बिस्तर पर ही उस कामक्रीड़ा में शामिल होने आ गए।

मैंने भी उन लोगों को डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समझा।
मैं लैपटॉप में उस खेल को देखने में मशगूल हो गई।

वो व्यक्ति, जिसका नाम बाद में मुझे हार्वी बताया गया, लगातार शालिनी की चिकनी योनि के अंदर तक अपनी जीभ डाल कर चाट रहा था।
इधर राजीव ने भी शालिनी के खुद ही उछल रही चूचियों पर धावा बोल दिया।

राजीव शालिनी के ऊपर से एक टांग चढ़ाकर उसके पेट पर बैठ गए और उसकी दोनों चूचियों से खेलने लगे।
इधर शालिनी में भी दो तकिया उठाकर अपनी गर्दन के नीचे रखे ताकि उसका चेहरा थोड़ा सा ऊपर हो सके और राजीव का कड़क प्रेमदंड पकड़कर अपनी जीभ से उसका अग्रभाग सहलाने लगी।

उफ्फ … ये तुम तीनों ने क्या कर दिया?
जिस जंजाल से बड़ी मुश्किल से निकलकर आज मैं नॉर्मल महसूस कर रही थी। तुम तीनों ने फिर से मुझे वहीं ला दिया।

मेरे शरीर की कामाग्नि फिर से धधक उठी।
मेरा पूरा शरीर अकड़ना शुरू हो गया।

वो तीनों अपने खेल में पूरी तरह से मग्न थे।
इधर धीरे-धीरे मैंने भी अपने कपड़े उतार फेंके।

मैं अपने मोटे-मोटे गोरे बूब्स को खुद ही सहलाने लगी।

शालिनी जो अब तक राजीव के लोड़े को आइसक्रीम की तरह चाट रही थी।
उसने पूरा का पूरा अपने मुंह में भर लिया और गपागप करने लगी।

इधर हार्वी भी शालिनी की टांगों के बीच से निकलकर ऊपर आ गया उसने अपना तना हुआ लौड़ा शालिनी के हाथ में पकड़ा दिया।
शालिनी के मुंह में मेरे पति का लौड़ा था और हाथ में हार्वी का।

मैंने देखा हालांकि हार्वी का लण्ड ज्यादा बड़ा नहीं था, परंतु बहुत गोरा था।
उसको देखकर मेरे मुंह में भी पानी आ गया।
मेरे पति का लंड हार्वी के मुकाबले कम से कम 2 इंच बड़ा था।
लेकिन काला।

शालिनी गोरे और काले दोनों का मजा एक साथ ले रही थी और यहां मैं अपनी उंगली से अपनी चूत के दाने को सहला रही थी।

तभी राजीव ने अपना लंड शालिनी के मुंह से निकला और बिस्तर से उठकर कहीं गए।
अब मेरे सामने सिर्फ शालिनी और हार्वी थे।

टू डिक्स फॉर वन पुसी स्टोरी पर आपकी राय मेल और कमेंट्स में वांछित है.
me.funny123@rediffmail.com

You May Also Like

लंड और चूत जैसे आग और फूस- 5
Views: 162 Category: Group Sex Author: enjoysunny6969 Published: March 27, 2026

टू गर्ल्स Xxx स्टोरी में सीमा और बिंदिया आपस में खुली हुई थी. बिंदिया सीमा के घर आई तो दोनों ने मिल कर योजना बनी कि बिंदिय…

जीजा और उसके दोस्त से साली चुदी- 1
Views: 204 Category: Group Sex Author: tellerstory440 Published: April 02, 2026

जीजा साली सेक्स टॉक कहानी में एक लड़का अपने दोस्त को साली की शादी में ले गया. जीजा की योजना साली को शादी से पहली रात को चो…

Comments

```